अर्थव्यवस्था

भारत बंद: मनमोहन सिंह ने कहा, मोदी सरकार सभी हदें पार कर गई है

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर वादों को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए सभी विपक्षी दलों का 'देश की एकता, अखंडता और लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।' पेट्रोल-डीजल के दाम में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी पर नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस की तरफ से बुलाये गए 'भारत बंद' के तहत सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शन में पूर्व प्रधानमंत्री बोल रहे थे।

रामलीला मैदान में आयोजित विरोध प्रदर्शन में सिंह ने कहा, ''इतनी बड़ी संख्या में विपक्षी दलों के नेताओं का शामिल होना बहुत महत्वपूर्ण कदम है। मोदी सरकार ऐसा बहुत कुछ कर चुकी है जो हद को पार कर चुका है। इस सरकार को बदलने का समय आने वाला है। आज किसान, नौजवान सहित हर तबका परेशान है।'' सिंह ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है।

उन्होंने कहा, ''अब इस बात की जरूरत है कि सभी राजनीतिक दल अपने पुराने सिलसिलों को पीछे छोड़कर एकजुट हों। भारत की जनता की पुकार सुनें। यह तभी संभव है जब हम छोटे-छोटे मुद्दों को छोड़कर आगे बढ़ेंगे। देश की एकता, अखंडता और लोकतंत्र को बचाने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। इसके लिए हमें तैयार होना चाहिए।''

विरोध प्रदर्शन में सिंह के अलावा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और राकांपा प्रमुख शरद पवार सहित करीब 20 विपक्षी पार्टियों के नेता शामिल हुए। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और दूसरे नेताओं ने राजघाट से रामलीला मैदान तक मार्च किया।

कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के खिलाफ 'भारत बंद' बुलाया है। कांग्रेस ने सभी सामाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से 'भारत बंद' का समर्थन करने का आह्वान किया है। कांग्रेस का कहना है कि उसकी ओर से बुलाया गया 'भारत बंद' सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक रहेगा, ताकि आम जनता को दिक्कत नहीं हो।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, जीएसटी और नोटबंदी ने छोटे और सीमांत उद्यमों को नुकसान पहुँचाया

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, जीएसटी और नोटबंदी ने छोटे और सीमांत उद्यमों को नुकसान पहुँचाया

मोदी सरकार में पिछले चार सालों में बेरोजगारी दर बढ़ी है: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कपिल सिब्बल की किताब 'शेड्स ऑफ ट्रुथ' के विमोचन के मौके पर कहा कि मोदी सरकार ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया। मोदी सरकार ने हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन देश के युवा आज भी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार जो आंकड़े दे रही है, हकीकत उससे कहीं अलग है। बेरोजगारी दर पिछले चार साल में बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि भारत में कृषि की स्थिति बदहाल है। औद्योगिक उत्पादन और विकास की रफ्तार थम गई है।

मोदी सरकार की महंगाई ने मार डाला

तेल कीमतें आसमान पर, पड़ रही महंगाई की मार। दम तोड़ता रुपया और युवा है बेरोजगार।।

आरपीएन सिंह द्वारा ईंधन मूल्य पर कांग्रेस मुख्यालय में एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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जनता तेल की बढ़ती कीमतों से त्रस्त, मोदी जुमलेबाजी में व्यस्त

गिरता रुपया, महंगा तेल मोदी के भाषण फेल। पेट्रोल 80 रुपया के पार, डीजल लगभग 72 रुपया के पार, और रुपया भी 72 के पार और भारत की जनता पर रोज हो रहा वार। जनता पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से त्रस्त और मोदी जी जुमलेबाजी में व्यस्त।

सबसे पहले, मोदी सरकार ने साढ़े चार साल में, पेट्रोल और डीजल पर टैक्स लगाकर 11 लाख करोड़ रुपया कमाया, देशवासियों को कहा गया कि ये कुर्बानी आप राष्ट्रहित में दे रहे हैं। देश के हित में ये 11 लाख करोड़ रुपया का अतिरिक्त टैक्स का भार जो आम जनमानस की जेब पर डाका डाल कर और आम जनमानस का बजट बिगाड़ कर, डीजल, पेट्रोल और गैस की कीमतें बढ़ा कर डाला जा रहा है, ये किसलिए है, पर वो 11 लाख करोड़ रूपया किसकी जेब में गया? इसका जबाव आज तक मोदी जी नहीं दे पाए।

16 मई, 2014 में कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें 106.24 यूएस डॉलर प्रति बैरल थी जो अब घटकर 73 से 77 यूएस डॉलर प्रति बैरल हो गई है। इसके बावजूद पेट्रोल की कीमत थी 71 रुपया 41 पैसे दिल्ली में, बाकी शहरों में और ज्यादा थी। आज वो कीमत है 79 रुपया 51 पैसे यानी बहुत सस्ते कच्चे तेल के बावजूद पेट्रोल 8 रुपया महंगा।

सवा चार- साढ़े चार साल में मोदी सरकार ने डीजल की कीमत बढ़ाई है, 16 मई, 2014 को डीजल 55 रुपया 49 पैसे, जबकि आज वो कीमत है 71 रुपया 55 पैसे प्रति लीटर यानी 16 रुपया प्रति लीटर कीमत डीजल में बढ़ा दी।

लगभग 8 रुपए पेट्रोल में और 16 रुपया डीजल की कीमतों में साढ़े चार साल में इजाफा हुआ है। इतना भारी इजाफा मोदी कर चुके, ये पैसा कहां गया? क्या इसका जवाब देंगे?

तीसरी बात, मई, 2014 से पेट्रोल की एक्साईज में 211 प्रतिशत इजाफा मोदी सरकार ने किया जो सीधा भारत की सरकार के खजाने में जाता है। मई, 2014 में एक्साईज ड्यूटी का पैसा था 9 रुपया 20 पैसे प्रति लीटर, आज ये पैसा बढ़कर है, एक्साईज एक्साईज ड्यूटी का 19 रुपया 48 पैसे प्रति लीटर, डीजल पर और ज्यादा मार की गई। डीजल पर भारत सरकार के द्वारा लगाया जाने वाला एक्साईज ड्यूटी मई, 2014 के बाद 444 प्रतिशत मोदी सरकार बढ़ा चुकी है। 3 रुपया 46 पैसे, मई 2014 में, डीजल पर एक्साईज ड्यूटी थी, जो आज बढ़कर 15 रुपया 33 पैसे प्रति लीटर हो गई है। सेन्ट्रल एक्साईज ड्यूटी 12 बार बढ़ी दी गई, 11 लाख करोड़ रुपया, देश की जनता की गाढ़ी कमाई से, उनका बजट बिगाड कर डीजल, पेट्रोल और गैस का निकाल लिया गया। इसके लिए कौन जिम्मेवार है?

गिरता रुपया, महंगा तेल मोदी के भाषण फेल

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अशोक गेहलोत, मोतीलाल वोरा, अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और रणदीप सुरजेवाला द्वारा ईंधन लूट पर प्रेस ब्रीफिंग

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राफेल डील घोटाले पर कांग्रेस मुख्यालय में अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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मोदी शासनकाल में 29,000 करोड़ रुपए का कोयला घोटाला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि अक्टूबर 2014 को डीआरआई (Directorate of Revenue Intelligence), जो वित्त मंत्रालय की एक संस्था है, ने घोषणा की थी कि कोयले के निर्यात के मामले में एक बहुत बड़ा घोटाला हुआ है और उसकी जांच की शुरुआत हुई है।

जयराम रमेश ने कहा कि पहली घोषणा अक्टूबर, 2014 में हुई, डीआरआई ने एक बयान दिया कि कोयले के आयात में जो ऑवर इन्वॉयसिंग हुआ है, उसके बारे में जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके बाद 31 मार्च, 2016 को डीआरआई ने एक दूसरा बयान दिया और इस बयान में पहली बार ये जानकारी दी गई कि 40 कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही के पहले जांच की जा रही है, 40 कंपनियाँ इस घोटाले में शामिल हैं और कुल मिलाकर 29,000 करोड़ रुपए का घोटाला है। ये डीआरआई से दूसरी बार बयान दिया गया, 31 मार्च, 2016 को। 40 कंपनियाँ और ज्यादातर इंडोनेशिया से कोयले की खरीद में 29,000 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच, DRI की ओर से यह बयान आया था।

कोयला आयात घोटाला : कांग्रेस मुख्यालय में जयराम रमेश द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

प्रेस ब्रीफिंग की मुख्य बातें:

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) इंडोनेशियाई कोयले के आयात के अत्यधिक मूल्यांकन के लिए लगभग 40 कंपनियों की जांच कर रहा है।

कोयला आयात का यह अतिवृद्धि ₹ 29, 000 करोड़ रुपये है।

इन 40 कंपनियों में से, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्योगपति मित्र गौतम अदानी की कंपनी भी शामिल है।

डीआरआई ने एसबीआई बैंक की विदेशी शाखाओं के साथ जुड़े दस्तावेजों तक पहुंचने में मदद की मांग के लिए सिंगापुर को लेटर्स रोगटोरी (एलआर) जारी किया, जहां कोयला आयात लेन-देन हुआ।

अदानी फर्म ने सिंगापुर कोर्ट से डीआरआई द्वारा जारी एलआर को रद्द करने के लिए कहा था, लेकिन सिंगापुर अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी। अब अदानी फर्म ने डीआरआई जांच को रोकने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का रूख किया है।

कांग्रेस ने मांग की है कि उद्देश्य और समयबद्ध पूछताछ सुनिश्चित करने के लिए एक एसआईटी स्थापित की जानी चाहिए।