विदेश

नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड और भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता की

भारत और नेपाल के प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद नई दिल्ली में प्रेस वार्ता को संबोधित किया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल प्रचंड और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 1 जून 2023 को दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की।

नरेंद्र मोदी ने कहा

- हम अपने रिश्तों को हिमालय जितनी ऊंचाई देने के लिए काम करते रहेंगे, और इसी भावना से, हम सभी मुद्दों को, चाहे बाउंड्री का हो या कोई और विषय, सभी का समाधान करेंगे।
- आज मैंने और प्रधानमंत्री प्रचण्ड जी ने भविष्य में अपनी पार्टनरशिप को सुपरहिट बनाने के लिए बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
- आज ट्रांजिट अग्रीमेंट संपन्न किया गया है। इसमें नेपाल के लोगों के लिए, नए रेल रूट्स के साथ साथ, भारत के इनलैंड वाटरवेज़ की सुविधा का भी प्रावधान किया गया है।
- मुझे याद है, 9 साल पहले, 2014 में, कार्यभार सँभालने के तीन महीने के भीतर मैंने नेपाल की अपनी पहली यात्रा की थी। उस समय मैंने भारत-नेपाल संबंधों के लिए एक हिट फार्मूला दिया था- हाईवेस, आई-वेज़, और ट्रांस-वेज़।
- मैंने कहा था कि भारत और नेपाल के बीच ऐसे संपर्क स्थापित करेंगे कि हमारे बॉर्डर्स, हमारे बीच रुकावट न बने।
- भारत और नेपाल के धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध बहुत पुराने और मज़बूत हैं। इस सुन्दर कड़ी को और मज़बूती देने के लिए प्रधानमंत्री प्रचण्ड जी और मैंने निश्चय किया है कि रामायण सर्किट से संबंधित परियोजनाओं में तेजी लायी जानी चाहिए।

तुर्की में अर्दोआन की जीत भारत के लिए क्या मायने रखती है?

तुर्की में रेचेप तैय्यप अर्दोआन फिर से राष्ट्रपति चुनाव जीत गए हैं। अर्दोआन पिछले दो दशक से तुर्की की कमान संभाल रहे हैं और दो दशक सत्ता में रहने के बाद भी चुनाव जीतने में कामयाब रहे।

अर्दोआन की जीत भारत के लिए क्या मायने रखती है? भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्दोआन को जीत की बधाई दे दी है। मोदी ने बधाई देते हुए उम्मीद जताई है कि आने वाले वक़्त में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध अच्छे होंगे और वैश्विक मुद्दे पर सहयोग बढ़ेगा।

मोदी ने भले बधाई दे दी है लेकिन उन्हें पता है कि अर्दोआन के सत्ता में आने के बाद भारत से रिश्ते सहज नहीं रहे हैं। पिछले नौ सालों में मोदी ने मध्य-पूर्व के कई देशों का दौरा किया लेकिन तुर्की नहीं गए।

2019 में मोदी तुर्की का दौरा करने वाले थे लेकिन ऐन मौक़े पर दौरा रद्द हो गया था। पाँच अगस्त 2019 को कश्मीर का विशेष दर्जा भारत ने ख़त्म कर दिया था और तुर्की ने इसका खुलकर विरोध किया था। अर्दोआन ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में भी उठाया था।

कश्मीर पर अर्दोआन की लाइन पाकिस्तान के पक्ष में रही है। भारत के लिए हमेशा से यह असहज करने वाला रहा है। तुर्की इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी ओआईसी में भी कश्मीर को लेकर हमलावर रहा है।

भारत तुर्की की इन आपत्तियों के जवाब में कहता रहा है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और तुर्की की टिप्पणी भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है।

भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी ट्वीट कर इस बात पर चिंता जताई है कि अर्दोआन की जीत भारत के लिए किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है।

कंवल सिब्बल ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''तुर्की में अर्दोआन की जीत भारत के लिए बहुत सहज स्थिति नहीं है। तुर्की कश्मीर पर इस्लामिक लाइन पर समर्थन पाकिस्तान को देगा। ओआईसी में भी कश्मीर पर सक्रिय रहेगा। पाकिस्तान के साथ तुर्की की जुगलबंदी चिंताजनक है। ऑटोमन साम्राज्य वाला अर्दोआन का लक्ष्य भी विनाशकारी है। अर्दोआन के नेतृत्व में तुर्की का ब्रिक्स में आना किसी भी मायने में ठीक नहीं है। रूस के साथ भी अर्दोआन की दोस्ती बहुत अच्छी है।''

तुर्की का पाकिस्तान परस्त रुख़ रहा है। कहा जाता है कि इसकी शुरुआत 1950 के शुरुआती दशक या फिर शीत युद्ध के दौर में होती है।

इसी दौर में भारत-पाकिस्तान के बीच दो जंग भी हुई थी। तुर्की और भारत के बीच राजनयिक संबंध 1948 में स्थापित हुआ था। तब भारत के आज़ाद हुए मुश्किल से एक साल ही हुआ था।

इन दशकों में भारत और तुर्की के बीच क़रीबी साझेदारी विकसित नहीं हो पाई। कहा जाता है कि तुर्की और भारत के बीच तनाव दो वजहों से रहा है। पहला कश्मीर के मामले में तुर्की का पाकिस्तान परस्त रुख़ और दूसरा शीत युद्ध में तुर्की अमेरिकी खेमे में था जबकि भारत गुटनिरपेक्षता की वकालत कर रहा था।

नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन यानी नेटो दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1949 में बना था। तुर्की इसका सदस्य था। नेटो को सोवियत यूनियन विरोधी संगठन के रूप में देखा जाता था।

इसके अलावा 1955 में तुर्की, इराक़, ब्रिटेन, पाकिस्तान और ईरान ने मिलकर 'बग़दाद पैक्ट' किया था। बग़दाद पैक्ट को तब डिफ़ेंसिव ऑर्गेनाइज़ेशन कहा गया था।

इसमें पाँचों देशों ने अपनी साझी राजनीति, सेना और आर्थिक मक़सद हासिल करने की बात कही थी. यह नेटो की तर्ज़ पर ही था। 1959 में बग़दाद पैक्ट से इराक़ बाहर हो गया था। इराक़ के बाहर होने के बाद इसका नाम सेंट्रल ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन कर दिया गया था। बग़दाद पैक्ट को भी सोवियत यूनियन के ख़िलाफ़ देखा गया। दूसरी तरफ़ भारत गुटनिरपेक्षता की बात करते हुए भी सोवियत यूनियन के क़रीब लगता था।

जब शीत युद्ध कमज़ोर पड़ने लगा था तब तुर्की के 'पश्चिम परस्त' और 'उदार' राष्ट्रपति माने जाने वाले तुरगुत ओज़ाल ने भारत से संबंध पटरी पर लाने की कोशिश की थी।

1986 में ओज़ाल ने भारत का दौरा किया था। इस दौरे में ओज़ाल ने दोनों देशों के दूतावासों में सेना के प्रतिनिधियों के ऑफिस बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद 1988 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने तुर्की का दौरा किया था। राजीव गांधी के दौरे के बाद दोनों देशों के रिश्ते कई मोर्चे पर सुधरे थे।

लेकिन इसके बावजूद कश्मीर के मामले में तुर्की का रुख़ पाकिस्तान के पक्ष में ही रहा इसलिए रिश्ते में नज़दीकी नहीं आई।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, अमेरिका चीन को घेरने, दबाने और रोकने की पूरी कोशिश कर रहा है

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अक्सर अपने बयानों में चीन के विकास की बात करते हैं लेकिन सीधे तौर पर अमेरिका के बारे में कुछ नहीं कहते।

लेकिन चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस के दौरान आयोजित राजनीतिक सलाहकारों के समूह की एक बैठक में व्यापारियों से बात करते हुए उन्होंने अमेरिका की आलोचना की।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि अमेरिका चीन को 'घेरने, दबाने और रोकने' की पूरी कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस कारण चीन के सामने कई 'चुनौतियां' खड़ी हो गई हैं।

दूसरी तरफ चीन के विदेश मंत्री चिन गांग ने मंगलवार, 7 मार्च 2023 को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बयान का समर्थन किया और चीन-अमेरिका के तनावपूर्ण रिश्तों के लिए अमेरिका को ज़िम्मेदार ठहराया।

चिन गांग ने कहा, "अगर अमेरिका ने अपनी हरकतों पर ब्रेक नहीं लगाया और ग़लत राह पर चलना बंद नहीं किया तो चाहे कितनी भी सुरक्षा रखी जाए, गाड़ी का पटरी से उतरना तय है और इससे संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो इसका परिणाम भयंकर होगा?"

चिन गांग ने कहा, "ये एक लापरवाह खेल है जिसमें दोनों पक्षों के हित और साथ ही पूरी मानवता का भविष्य शामिल है। ये सामान्य बात है कि चीन हर तरह से इसके ख़िलाफ़ है।''

चिन गांग ने ताइवान मामले का ज़िक्र किया और कहा कि ये वो लाल रेखा है जिसे पार करने की इजाज़त नहीं है।

चिन गांग ने कहा, "ताइवान का सवाल चीन के मूल हितों से जुड़ा है, ये चीन-अमेरिका के राजनीतिक रिश्तों के मूल में है और दोनों के रिश्तों में ये वो लाल रेखा है जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए।''

"ताइवान मामले पर सवाल खड़ा करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से अमेरिका की है। हम अमेरिका के ताइवान मामले को लेकर इसलिए बात कर रहे हैं ताकि हम उसे कहें कि वो चीन के आंतरिक मामलों में दखलअंदाज़ी न करे।''

अमेरिका में कई जगहों पर ऊंचाई पर उड़ने वाले चीन के बैलून देखे जाने के बाद अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते और बिगड़ गए हैं।

अमेरिका ने ये कहते हुए चीनी बैलून को गिरा दिया था कि इसमें जासूसी के लिए उपकरण लगे हुए थे।

लेकिन चीन ने कहा कि ये मौसम की जानकारी इकट्ठा करने वाला बैलून था जो रास्ता भटक कर अमेरिका के इलाक़े में चला गया था, लेकिन अमेरिका ने इसे लेकर ओवररिएक्ट किया है।

यूक्रेन को अमेरिका का समर्थन मिलता रहेगा: बाइडन

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन यूक्रेन की राजधानी कीएव पहुंचे। साल भर पहले रूस के आक्रमण के बाद से बाइडन की ये यूक्रेन की पहली यात्रा है।

इससे पहले, बाइडन पोलैंड के राष्ट्रपति एंद्रेज दुदा से मिलने गए थे। लेकिन वहां से वह अचानक कीएव पहुंच गए।

यूक्रेन की राजधानी कीएव में सुबह से यह अंदाज़ा लग रहा था कि कोई अहम मेहमान आने वाला है।

यूक्रेन की नेता लिसिया वेसिलेन्को ने बताया कि ये मेहमान बाइडन हैं।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम अकाउंट से अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ हाथ मिलाते हुए एक तस्वीर पोस्ट की है।

ज़ेलेंस्की ने लिखा, "जो बाइडेन, कीएव में आपका स्वागत है। आपकी यात्रा सभी यूक्रेनियन के लिए समर्थन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत है।''

पोलैंड से अचानक यूक्रेन की राजधानी कीएव पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि यूक्रेन को अमेरिका का समर्थन मिलता रहेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ''कीएव की मेरी यात्रा यूक्रेन के लोकतंत्र, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति हमारी अटूट और अटल प्रतिबद्धता की एक बार फिर पुष्टि करते हैं।''

बयान में आगे कहा गया है, "लगभग एक साल पहले पुतिन ने हमला करते हुए सोचा था कि यूक्रेन कमजोर है और यूरोप बंटा हुआ। उन्होंने सोचा था कि वो हमें थका देंगे। लेकिन वो बिल्कुल गलत थे।''

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से मुलाकात के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक साझा बयान जारी किया गया है।

इस बयान में जेलेंस्की ने कहा, 'लोकतांत्रिक दुनिया' ये 'ऐतिहासिक जंग' जीत कर रहेगी।''

बाइडेन की मौजूदगी में ज़ेलेंस्की ने टेलीविजन पर जारी संयुक्त बयान में कहा, ''अमेरिका और यूक्रेन के रिश्ते के पूरे इतिहास में ये सबसे अहम यात्रा है। ये उन नतीजों के बारे में बताता है, जिन्हें हमने पहले ही हासिल कर लिया है। आज की हमारी बातचीत काफी सफल रही।''

जेलेंस्की ने कहा, ''इस यात्रा के नतीजें दिखेंगे। इस मुलाकात का असर युद्ध के मैदान में होगा। यूक्रेन को अबराम्स टैंक देने के अमेरिकी फैसले से यूक्रेनी सेना मजबूत हुई है। मेरी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच लंबी रेंज के हथियारों पर भी बातचीत हुई है।''

यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने आगे कहा, ''मुझे मालूम है कि यूक्रेन की मदद के लिए काफी अहम पैकेज मिलेगा। इसका मतलब साफ़ है कि रूसी आक्रामकता के लिए अब कोई मौका नहीं होगा।''

जेलेंस्की ने कहा, ''मिस्टर प्रेसिडेंट यूक्रेन आपका आभारी है।''

रूस ने यूक्रेन में मानवता के ख़िलाफ़ अपराध किए हैं: कमला हैरिस

अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा है कि उनके देश ने औपचारिक रूप से यह तय कर लिया है कि रूस ने यूक्रेन में मानवता के ख़िलाफ़ अपराध किए हैं।

म्यूनिख़ सिक्योरिटी कॉन्फ्रेन्स में कमला हैरिस ने रूस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। कमला हैरिस ने कहा है कि जब से यूक्रेन पर हमले हुए हैं, तब से रूस ने 'हत्या, जुल्म, बलात्कार और निर्वासन जैसे जघन्य काम' किए हैं।

म्यूनिख़ सिक्योरिटी कॉन्फ्रेन्स के दौरान दुनिया के तमाम नेताओं ने यूक्रेन का लंबे समय तक समर्थन करने की अपील की है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने यूक्रेन का सैन्य समर्थन और बढ़ाने की ज़रूरत बताई है। ऋषि सुनक ने कहा है कि यूक्रेन के पश्चिमी सहयोगियों को उसके भविष्य की सुरक्षा के लिए योजना बनाने और यूक्रेन को हथियार भेजने की ज़रूरत है।

म्यूनिख़ सिक्योरिटी कॉन्फ्रेन्स में कमला हैरिस ने कहा है कि यूक्रेन में हुए कथित अपराधों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

हैरिस ने कहा, "उनके कृत्य हमारे सामान्य मूल्यों और हमारी मानवता पर हमला हैं।''

कमला हैरिस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, एक ख़ास नागरिक समाज पर 'व्यापक या सिस्टमैटिक हमला' मानवता के ख़िलाफ़ अपराध है।

अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा, "यूक्रेन में रूस की कार्रवाई को लेकर हमने सबूतों की जांच की। हम क़ानूनी मानकों को जानते हैं और इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये मानवता के ख़िलाफ़ अपराध हैं।''

कमला हैरिस ने यूक्रेन में युद्ध के दौरान बूचा और मारियोपोल में हुए 'बर्बर और अमानवीय' अत्याचारों का हवाला दिया।

कमला हैरिस ने कहा, "हम सभी सहमत हैं कि ज्ञात और अज्ञात सभी पीड़ितों के लिए न्याय होना चाहिए।''

हालांकि रूस ने अपने हमलों में नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों से बार बार इनकार किया है।

जर्मनी के म्यूनिख़ में म्यूनिख़ सिक्योरिटी कॉन्फ्रेन्स 24 फरवरी 2023 को यूक्रेन पर हुए रूस के हमले की पहली सालगिरह पर आयोजित किया जा रहा है।

राष्ट्रपति रईसी की चीन यात्रा: राष्ट्रपति शी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर क्या कहा?

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी चीन की यात्रा पर हैं।

चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक़, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर जल्द से जल्द और उचित प्रस्ताव लाने के लिए कहा है।

जिनपिंग ने ईरान के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए अपना समर्थन देने की बात की है।

जिनपिंग ने बीजिंग में ईरानी राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी से कहा कि वो ईरान के परमाणु समझौते को लागू करने लिए फिर से सकारात्मक तौर पर बातचीत शुरू करेंगे।

साल 2015 में ईरान ने जर्मनी, चीन, अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस के साथ एक समझौता किया था।

इस समझौते के तहत ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रमों को सीमित करना था। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को इससे अलग कर लिया था, इसके बाद से यह समझौता रद्द हो गया था।

चीन ने इस क़दम की आलोचना की थी और कहा था कि इस समझौते पर फिर से लौटने के लिए अमेरिका को पहल करनी चाहिए।

सितंबर 2022 में अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात से जुड़ी कुछ कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए थे, इनमें पांच कंपनियां चीन की थीं।

पश्चिमी देश, उभरती हुई एक बहुध्रुवीय दुनिया की प्रक्रिया को पलटने की कोशिश कर रहे हैं: रूस

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अफ्रीकी देशों की अपनी यात्रा के दौरान शुक्रवार, 27 जनवरी 2023 को कहा कि पश्चिमी देश, उभरती हुई एक बहुध्रुवीय दुनिया की प्रक्रिया को पलटने की कोशिश कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने कहा है कि बहुध्रुवीय इतिहास की घड़ी सही दिशा में घूम रही है।

रूस की समाचार एजेंसी तास ने लावरोव के हवाले से कहा है कि बहुध्रुवीय दुनिया का उदय एक उद्देश्यपूर्ण और अजेय प्रक्रिया है, जो होकर रहेगा।

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने चीन और भारत के तीव्र विकास के साथ तुर्की, मिस्र, ब्राजील और लातिन अमेरिकी और फ़ारस की खाड़ी ​के पास स्थित देशों के उभार का ज़िक्र किया है।

उन्होंने वैश्विक बहुध्रुवीय दुनिया को आकार देने में पांच देशों के संगठन 'ब्रिक्स' की भूमिका को अहम क़रार दिया है।

सर्गेई लावरोव ने कहा, "ऐसे में अमेरिका, नेटो और अमेरिका द्वारा पूर्णत: नियंत्रित यूरोपीय संघ की इसे पलटने के सामूहिक प्रयासों के बावजूद बहुध्रुवीय इतिहास की घड़ी सही दिशा में चल रही है।''

उन्होंने पश्चिम के इन तथाकथित प्रयासों को बेकार बताते हुए कहा कि वे केवल इस प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।

सर्गेई लावरोव ने इसी हफ़्ते भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की तारीफ़ करते हुए कहा था कि उसकी विदेश नीति को विदेशों से नियंत्रित नहीं किया जा सकता।

शंघाई समूह सहयोग संगठन: भारत के निमंत्रण पर पाकिस्तान ने क्या कहा?

भारत में शंघाई समूह सहयोग संगठन की बैठक में पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी को निमंत्रित किए जाने पर पाकिस्तान ने कहा है कि वो इस पर विचार कर रहा है।

भारत इस बार शंघाई समूह सहयोग संगठन की बैठक का आयोजन कर रहा है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा गया है कि सदस्य देशों को निमंत्रण देने की एक स्टैंडर्ड प्रक्रिया है जिसके तहत भारत ने न्योता भेजा है।

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस निमंत्रण पर मानक प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है और इस पर उचित निर्णय लिया जाएगा।

दोनों देशों के बीच रिश्ते बीते काफ़ी समय से तल्ख़ रहे हैं और हाल ही में अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने दावा किया था कि दोनों देशों के बीच एक समय परमाणु युद्ध छिड़ने की नौबत आ गई थी।

पॉम्पियो ने अपनी किताब में दावा किया है कि साल 2019 के फरवरी महीने में भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध छिड़ने की नौबत आ गयी थी।

पॉम्पियो के मसले पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ये उनका निजी संस्मरण है। लेकिन सारी दुनिया जानती है कि फ़रवरी 2019 में किसने आक्रमण किया था और किसने संयम का परियच दिया।

भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को भारतीय सैनिकों के काफ़िले पर आत्मघाती हमला किया गया था जिसमें चालीस सैनिकों की मौत हुई थी।

भारत ने इसके बाद पाकिस्तान पर 27 फरवरी 2019 को अहले सुबह हवाई हमले किए थे जिसमें भारत ने कई चरमपंथियों को मारने का दावा किया था। इसके जवाब ने पाकिस्तान ने भारत पर 28 फरवरी 2019 को सुबह में हवाई हमले किए। परिणामस्वरूप भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ने की नौबत आ गई। लेकिन अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध टली। तब से अब तक भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण सम्बन्ध है।

इसराइल और तुर्की के बीच राजनयिक संबंध पूरी तरह बहाल होते दिख रहे

इसराइल और तुर्की के बीच चल रही तनावपूर्ण स्थिति के बाद अब राजनयिक संबंध पूरी तरह बहाल होते दिख रहे हैं।

मंगलवार, 27 दिसम्बर 2022 को तुर्की में इसराइल की राजदूत आइरिट लिलियन ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तय्यप अर्दोआन को अपना विश्वास पत्र सौंपा। कई सालों बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्ते फिर से शुरू हुए हैं।

आइरिट लिलियन जनवरी 2021 से तुर्की में उपराजूदत के तौर पर नियुक्त थीं, लेकिन अब विश्वास पत्र देने के बाद उन्हें औपचारिक तौर पर इसराइल के राजदूत का दर्जा दे दिया गया है।

आइरिट लिलियन ने कहा, ''इस मौके ने दिल को उम्मीदों से भर दिया है। हम सभी उम्मीद करते हैं कि इसरायल और तुर्की के बीच राजनीतिक मेल-मिलाप की प्रक्रिया तेज़ होगी और कई क्षेत्रों तक इसका विस्तार होगा।''

दिसंबर 2022 में इसराइल में भी तुर्की के नए राजदूत साकिर ओज़कान ने अपना विश्वास पत्र सौंपा था।

इसराइल में प्रधानमंत्री पद के लिए नामित बिन्यामिन नेतन्याहू और अर्दोआन के बीच एक नवंबर 2022 के चुनाव के बाद बात हुई थी।

इसमें दोनों नेताओं ने पारस्परिक हितों का सम्मान करते हुए साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई थी।

कभी क्षेत्रीय सहयोगी रहे इसराइल और तुर्की के बीच लगभग एक दशक से रिश्तों में तनाव चल रहा था।

गज़ा पट्टी में सहायता के लिए जा रहे एक जहाज़ पर छापेमारी के बाद तुर्की ने साल 2010 में इसराइल के राजदूत को बर्ख़ास्त कर दिया था। इस घटना में 10 तुर्की नागरिक मारे गए थे।

फिर साल 2016 में राजनयिक रिश्ते बहाल हुए। लेकिन, दो साल पहले तुर्की ने अपने राजदूत को इसराइल से वापस बुला लिया था।

ये फ़ैसला गज़ा पट्टी पर इसराइल की ओर से फ़लस्तीनियों के विरोध प्रदर्शन पर की गई फ़ायरिंग के कारण लिया गया था। इसके बाद से दोनों देश एक-दूसरे से संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।

अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के पढ़ने और काम करने पर रोक को लेकर यूएनएससी ने चिंता जताई

अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के लिए स्कूल, विश्वविद्यालयों में पढ़ने और एनजीओ में काम करने पर रोक लगाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गहरी चिंता ज़ाहिर की है।

सुरक्षा परिषद ने मंगलवार, 27 दिसम्बर 2022 को एक बयान जारी कर अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के लिए समान और पूरे अधिकारों की अपील की है।

साथ ही कहा है कि तालिबान सरकार स्कूल फिर से खोले और अपनी उन नीतियों में बदलाव करे जो मानवाधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रता का उल्लंघन करती हैं।

हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार ने लड़कियों के विश्वविद्यालय जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे पहले लड़कियों के छठी कक्षा के बाद स्कूल में पढ़ने पर पाबंदी लगाई गई थी।

वहीं, लड़कियों और महिलाओं के ग़ैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) में काम करने पर भी रोक लगा दी गई है।

इस पर सुरक्षा परिषद ने कहा, ''महिलाओं के एनजीओ और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में काम ना करने से देश में मानवीय मदद के लिए चल रहे अभियान प्रभावित होंगे।

इनमें संयुक्त राष्ट्र के चलाए जा रहे अभियान भी शामिल हैं। ये प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उम्मीदों और उन प्रतिबद्धताओं से अलग हैं जो तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के लोगों से की थी।''

वहीं, सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने महासचिव के विशेष प्रतिनिधि और अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) को अपना पूर्ण समर्थन फिर से दोहराया।

साथ ही उनके काम के महत्व पर ज़ोर दिया जिसमें अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति की निगरानी, जानकारी देना और इन मसलों पर सभी संबंधित राजनीतिक पक्षों और हितधारकों से बातचीत करना शामिल है।

भारत साल 2022 के दिसंबर में सुंयक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की मौजूदा स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने ये बयान जारी किया है।