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राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने चेतावनी दी, हमला या हमले की कोशिश करने पर भारी कीमत चुकानी होगी

ताइवान पर हमले को लेकर ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने चेतावनी दी है। साई इंग-वेन ने कहा कि हमला या हमले की कोशिश करने पर भारी कीमत चुकानी होगी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसकी निंदा करेगा।

राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने सैन्य अधिकारियों से कहा, ''हमें दुश्मन को यह समझने देना है कि ताइवान के पास देश की रक्षा करने के लिए दृढ़ संकल्प और तैयारी है। साथ ही ताइवान के पास खुद की रक्षा करने की क्षमता भी है।''

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद से चीन नाराज़ है। इस यात्रा के बाद से ताइवान में तनाव चरम पर है। हालांकि पिछले 25 सालों में अमेरिका से इतनी बड़ी हैसियत का कोई शख़्स ताइवान की यात्रा पर नहीं गया था।

चीन ने इस यात्रा को अपनी 'राष्ट्रीय संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन' बताया था और इसे 'वन चाइना पॉलिसी' के ख़िलाफ़ चुनौती कहा था।

इस बीच, अमेरिका ने ताइवान के करीब चीन की सैन्य गतिविधि को 'उकसावे वाली कार्रवाई' बताया है और आरोप लगाया है कि इससे क्षेत्र में ख़तरे की स्थिति बन रही है।

दूसरी तरफ़ चीन ने अमेरिका से कहा है कि वो 'आग से ना खेले'।

चीन ताइवान को खुद से अलग हो गए एक ऐसे प्रांत के रूप में देखता है, जिसका देश की मुख्यभूमि के साथ आज न कल विलय होना तय है।

लेकिन दूसरी तरफ़ ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश के रूप में पेश करता है। उसके यहां लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है, लेकिन ताइवान ने खुद को कभी आधिकारिक रूप से स्वतंत्र राष्ट्र घोषित नहीं किया है।

सऊदी अरब बिना परमिट हज यात्रा करने वालों पर 2666 यूएस डॉलर का जुर्माना लगाएगा

बिना परमिट हज यात्रा करने वालों पर सऊदी अरब 2666 यूएस डॉलर का जुर्माना लगा सकता है।

इस संबंध में सऊदी अरब सरकार ने आधिकारिक बयान जारी किया है।

बयान के अनुसार सऊदी अरब के जन सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता मोहम्मद अल-शुवाएरेख़ की ओर से ये बताया गया है कि कोई भी व्यक्ति यदि बिना परमिट हज यात्रा करने की कोशिश करते पकड़ा गया तो उसपर 10000 रियाल का जुर्माना लगाया जाएगा।

हज यात्रा करने की इच्छा रखने वालों को संबंधित अधिकारियों से परमिट लेना ज़रूरी है।

मोहम्मद अल-शुवाएरेख़ ने सभी नागरिकों से कहा है कि वो हज को लेकर जारी किए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के उल्लंघन से बचने के लिए मक्का और सभी धार्मिक स्थलों पर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात रहेंगे।

सऊदी अरब ने इससे पहले बताया था कि साल 2022 में दुनियाभर से आने वाले 10 लाख़ से अधिक लोगों को हज यात्रा की इजाज़त दी गई है। बीते दो सालों से कोरोना संक्रमण के कारण केवल सऊदी अरब के नागरिक ही हज यात्रा पर जा सकते थे।

पेरिस हमलों के दोषी को मिली फ़्रांस के इतिहास की सबसे कठोर सज़ा

साल 2015 में पेरिस की अलग-अलग जगहों पर हुए हमलों को करने वाले गुट के एकमात्र जीवित हमलावर को आतंकवाद और हत्या का दोषी ठहराया गया है।

सलाह अब्देसलाम को फ़्रांस के इतिहास में अब तक की सबसे कड़ी सज़ा दी गई है। इस हमले में 130 लोगों की जान गई थी। सलाह को इस अपराध के लिए आजीवन क़ैद की सज़ा दी गई है।

अदालत ने 19 अन्य लोगों को भी मामले में दोषी पाया है। इनमें से समझा जाता है कि 6 दोषियों की मौत हो चुकी है।

इस मामले की सुनवाई भी आधुनिक फ़्रांस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चली। मामले में सितंबर 2021 से सुनवाई जारी थी।

पिछले नौ महीनों से पीड़ित, पत्रकार और मृतकों के परिजन पेरिस में इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष तौर पर बनाए गए कोर्ट रूम में जुटते थे।  ये हमला फ़्रांस के इतिहास में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे वीभत्स माना जाता है।

13 नवंबर, 2015 को फ़्रांस में बार, रेस्तरां, नेशनल फ़ुटबॉल स्टेडियम और एक म्यूज़िक वेन्यू सहित अलग-अलग जगहों पर हमले हुए थे। इसमें सैकड़ों लोग घायल भी हुए थे।

मुक़दमे की शुरुआत में अब्देसलाम ने ख़ुद को चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट का 'सिपाही' बताया था।

हालाँकि, बाद में अब्देसलाम ने पीड़ितों से माफ़ी मांगी और कोर्ट को कहा कि वो हत्यारा नहीं है और उसे हत्यारोप में सज़ा देना अन्याय होगा।

अब्देसलाम ने दावा किया कि हमलों वाली रात उसने अपने आत्मघाती जैकेट को न उड़ाने का फ़ैसला लिया था। लेकिन बाद में कोर्ट के सामने पेश सबूतों से ये पता लगा कि वास्तव में जैकेट में ख़राबी की वजह उसमें विस्फ़ोट नहीं हुआ था।

अब्देसलाम को ताउम्र जेल में रहना होगा। फ़्रांस के कानूनों के अनुसार अब वो पैरोल के लिए भी 30 साल की सज़ा काटने के बाद ही आवेदन कर सकते हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध से प्रभावित अफ्रीका के लोगों की पुतिन मदद करें: अफ्रीकी संघ प्रमुख

अफ्रीकी संघ के प्रमुख ने रूस के साथ हुई एक बैठक में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा है कि अफ्रीकी देश यूक्रेन में युद्ध के निर्दोष शिकार हैं और रूस को उनकी परेशानी को कम करने में मदद करनी चाहिए।

सोची में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद अफ्रीकी संघ के प्रमुख मैकी साल ने कहा कि रूसी नेता ने अनाज और खाद के निर्यात को आसान बनाने का वादा किया। हालांकि ये कैसे होगा इसका कोई विवरण नहीं दिया है।

पुतिन इस बात से इनकार करते रहे हैं कि रूस यूक्रेन के बंदरगाहों को अनाज निर्यात करने से रोक रहा है।

अफ्रीका में खपत होने वाले गेहूं का 40% से अधिक हिस्सा आमतौर पर रूस और यूक्रेन से आता है।

लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी, 2022 से जारी युद्ध के बाद से काला सागर में यूक्रेन के बंदरगाहों को निर्यात के लिए बड़े पैमाने पर ब्लॉक कर दिया गया है।

यूक्रेन और उसके सहयोगियों ने बंदरगाहों को ब्लॉक करने के लिए रूस को दोषी ठहराया।

संयुक्त राष्ट्र के क्राइसिस कोऑरडिनेशन के सदस्य अमीन अवद ने जेनेवा में कहा, ''अगर ये बंदरगाह नहीं खुले तो इसके परिणामस्वरूप अकाल की स्थिति पैदा हो जाएगी।''

उन्होंने कहा कि अनाज की कमी से 1.4 अरब लोग प्रभावित हो सकते हैं और बड़े पैमाने पर पलायन हो सकता है।

रूस और यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के वक्त से ही पूरे अफ्रीका महाद्वीप में खाद्य कीमतों में ज़बरदस्त वृद्धि हुई है, जिससे भारी संख्या में लोग भूखमरी की ओर बढ़ रहे हैं।

विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख माइक डनफोर्ड ने कहा कि अफ्रीका में 8 करोड़ से अधिक लोग गंभीर रूप से खाद्य असुरक्षा झेल रहे हैं, इन लोगों को पेट पालना दुश्वार हो गया है। साल 2021 ये संख्या लगभग 5 करोड़ थी।

अफ्रीकी देश चाड ने राष्ट्रीय खाद्य आपातकाल घोषित कर दिया है। देश की एक तिहाई आबादी को खाद्य सहायता की जरूरत है, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार चाड सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहायता के लिए अपील की है।

विदेशी दुश्मन देश की इस्लामिक रिपब्लिक की सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते हैं: ईरान

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश में हाल में हुए प्रदर्शनों के लिए विदेशी दुश्मनों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि ये विदेशी दुश्मन ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक की सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते हैं।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक उन्होंने कहा कि ईरान के दुश्मनों ने इसके खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ रखा है। उन्होंने अमेरिका पर समुद्र में डकैती डालने का आरोप लगाया है। दरअसल पिछले दिनों ग्रीस के दो जहाजों पर लदे ईरानी तेल को अमेरिका ने जब्त कर लिया था।

खामेनेई ने कहा, ''आज ईरान के दुश्मन इसे देश में हो रहे प्रदर्शनों के जरिये चोट पहुंचाने का ख्वाब देख रहे हैं। उनके लिए यही सबसे बड़ी उम्मीद बन गई है।''

दक्षिण पश्चिम ईरान में पिछले दिनों एक बिल्डिंग के ध्वस्त हो जाने से 37 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद वहां लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने लगे थे।

उन्होंने कहा, ''लेकिन दुश्मनों का आकलन पहले की तरह ही गलत है।''

1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति की 33वीं वर्षगांठ के मौके पर टीवी पर एक संबोधन के जरिये खामेनेई ने कहा कि ईरान के दुश्मनों का मकसद पूरा नहीं होगा।

ईरान में पिछले दिनों तेज़ी से बढ़ते महंगाई के विरोध में प्रदर्शन देखने को मिले। इसमें प्रदर्शनकारी ईरान के राष्ट्रपति के खिलाफ 'रईसी मुर्दाबाद, तानाशाह मुर्दाबाद, देश छोड़ो' जैसे नारे लगाते दिखे।

आयातित गेहूं पर सब्सिडी कम किए जाने के बाद मई 2022 की शुरुआत में ईरान के कई हिस्सों में प्रदर्शन शुरू हुए थे। इसके कारण आटे से बनने वाली खाद्य वस्तुओं जैसे कि पास्ता और ब्रेड के दामों में बढ़ोतरी हुई है।

कट्टरपंथी धड़े से संबंध रखने वाले राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की सरकार ने 3 मई 2022 को सब्सिडी घटाने का फ़ैसला लिया था। ईरान का कहना है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद खाद्य सुरक्षा संकट पैदा हुआ है।

ईरान ने इसराइल को अरब देशों से दोस्ती पर कड़ी चेतावनी दी

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने कुछ अरब देशों और इसराइल के बीच संबंधों के समान्य होने की आलोचना की है और साथ ही इसे लेकर इसराइल को कड़ी चेतावनी दी है।

इब्राहिम रईसी ने ईरान के नेशनल आर्मी डे पर तेहरान में एक सैन्य परेड के दौरान अरब और इसराइल देशों के संबंधों का ज़िक्र किया।

उन्होंने वहाँ इसराइल को चेतावनी देते हुए कहा, ''इसराइल अगर कुछ देशों के साथ संबंध सामान्य करना चाहता है तो उसे मालूम है कि उसकी छोटी-से-छोटी हरकत हमसे छिपी नहीं है।''

''अगर वे कोई ग़लती करते हैं, तो हम सीधे यहूदी शासन के दिल पर चोट करेंगे और हमारी सेना की शक्ति उन्हें शांति से बैठने नहीं देगी।''

ईरानी मीडिया के अनुसार कोरोना महामारी की वजह से दो साल के अंतराल के बाद सैन्य परेड हुई जो ईरान के वरिष्ठ नेताओं और सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में परेड आयोजित की गई।

इसमें सेना के नए हथियारों और उपकरणों का भी प्रदर्शन किया गया। इस दौरान इब्राहिम रईसी ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की भी जमकर तारीफ़ की।

ईरान और इसराइल की दुश्मनी जगजाहिर

ईरान इसराइल को मान्यता नहीं देता है। जबकि इसराइल भी कई बार कह चुका है कि वो परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को बर्दाश्त नहीं करेगा।  ईरान और पश्चिमी देशों के बीच हुआ परमाणु समझौता डोनाल्ड ट्रंप ने ख़त्म कर दिया था। लेकिन जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद से नए सिरे से परमाणु समझौते को लागू करने की क़वायद चल रही थी।

मार्च 2022 में ही ये बातचीत भी रद्द हो गई क्योंकि ईरान चाह रहा था कि अमेरिका अपने विदेशी आतंकी संगठन की लिस्ट से रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प को हटा दे लेकिन ये मुद्दा सुलझ नहीं सका और बातचीत भी बंद पड़ गई।

ईरान कई बार ये आरोप लगा चुका है कि इसराइल ने उसके परमाणु ठिकानों पर हमला किया है और ईरान के न्यूक्लियर वैज्ञानिकों की हत्या कराई है। इसराइल इन आरोपों को न तो नकारता है और न ही इसकी पुष्टि करता है।

साथ ही इसराइल और ईरान के बीच समुद्र में अघोषित टकराव भी सामने आता रहता है, जिसमें जहाजों पर रहस्यमय हमले होते हैं।

इसराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अपनी चिंताएं जताता रहा है। इसराइल को शक है कि ईरान परमाणु हथियारों का निर्माण कर रहा है, जिससे ईरान इनकार करता रहा है।

इसराइल और खाड़ी देशों की क़रीबी पर ईरान की नज़र

हाल के कुछ सालों में खाड़ी के कई देश इसराइल के क़रीब आए हैं। अभी मार्च 2022 में ही इसराइल में चार अरब देशों का बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें शामिल होने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन भी पहुंचे।

इस सम्मेलन में संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। ये पहली बार था जब इसराइल ने इतने सारे अरब देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की है।

ऐसी बैठक और क़रीबी को मध्य-पूर्व में ईरान के ख़िलाफ़ एक नए क्षेत्रीय गठजोड़ के तौर पर भी देखा जा रहा है। ये भी कहा जा रहा है कि मुलाक़ात ने ये भी साफ़ कर दिया है कि अब अरब देश फ़लस्तीन विवाद के मुद्दे का हल निकाले बिना ही इसराइल के साथ संबंध बढ़ाने के लिए तैयार हैं।

इसराइली मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक, बैठक के आख़िर में इसराइली विदेश मंत्री याएर लैपिड ने बताया कि सम्मेलन में शामिल होने वाले सभी देशों के बीच ड्रोन और मिसाइल हमलों, समुद्री हमलों से सुरक्षा के लिए एक ''क्षेत्रीय व्यवस्था'' बनाए जाने को लेकर चर्चा हुई। याएर लैपिड का इशारा ईरान या उसके सहयोगी देशों की ओर था।

दरअसल, ये सभी देश ईरान की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

सऊदी अरब, बहरीन और यूएई, ईरान और उसके इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) को लेकर भी हमेशा संदेह में रहे हैं। बीबीसी के सुरक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर ने अपनी रिपोर्ट में इसके एक कारण का ज़िक्र करते हुए लिखा है, ''वो ईरान को लेकर सतर्क रहते हैं क्योंकि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए मध्य पूर्व में ताक़तवर छद्म मिलिशिया गुटों का नेटवर्क तैयार किया है।''

ऐसे में ईरान, इसराइल के साथ अपने दुश्मनी के संबंधों को खुलकर जाहिर कर ही रहा है साथ ही इसराइल पर निशाना साध अरब देशों को अपने रुख के बारे में संकेत भी दे रहा है।

हालांकि, नेशनल आर्मी डे पर इब्राहिम रईसी ने कहा, "हमारी रणनीति हमला करने की नहीं बल्कि बचाव की है।''

उन्होंने आगे कहा, ''ईरान की सेना ने ख़ुद को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबंधों के मौके का अच्छा इस्तेमाल किया है और हमारा सैन्य उद्योग सबसे अच्छे आकार में है।''

लाइव: यूक्रेन पर रूस का हमला

लाइव: यूक्रेन पर रूस का हमला

रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला कर दिया। यूक्रेन पर रूस के हमले के बारे में यूक्रेन के भीतर से रिपोर्ट्स, विश्लेषण, ताज़ा खबरें और वीडियो के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें।

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कनाडा के पीएम ट्रूडो ने सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन रोकने के लिए आपातकाल लगाया

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार, 14 फरवरी 2022 को विरोध प्रदर्शनों को ख़त्म करने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है। अमेरिका से लगने वाली सीमाएं बंद कर दी गई हैं।

आपातकाल अधिनियम के तहत, सरकार ने प्रदर्शनकारियों के फ़ंड में कटौती करने के उद्देश्य से ये क़दम उठाया है। 50 सालों में ये पहली बार है जब कनाडा में आपातकाल लगाया गया है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, प्रधानमंत्री ट्रूडो ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ''इस तरह नाकेबंदी करना हमारी अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुंचा रहा है और सार्वजनिक सुरक्षा को भी ख़तरे में डाल रहा है।  हम अवैध और ख़तरनाक गतिविधियों को जारी रखने की अनुमति नहीं दे सकते हैं और न ही कभी देंगे।''

वहीं, कैनेडियन सिविल लिबर्टीज़ एसोसिएशन ने कहा कि, ''सरकार ने आपातकालीन अधिनियम को लागू करने के मानक को पूरा नहीं किया है, आपातकालीन अधिनियम का उद्देश्य 'संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता' के ख़तरों से निपटने के लिए होता है।''

ये प्रदर्शन तब शुरू हुए जब सीमा पार करने वाले ड्राइवरों के लिए कोविड-19 का टीकाकरण या क्वारंटीन करने का आदेश दिया गया। इसके विरोध में कनाडा के ट्रक ड्राइवरों ने ''फ़्रीडम कॉन्वॉय'' निकाला और साथ ही महामारी प्रतिबंध से लेकर कार्बन टैक्स तक हर चीज़ पर ट्रूडो सरकार की नीतियों का विरोध करने लगे।

प्रदर्शनकारियों ने छह दिनों के लिए विंडसर, ओंटारियो और डेट्रॉयट के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग, अंबेसडर ब्रिज को ब्लॉक कर दिया था जिसे रविवार, 13 फरवरी 2022 को पुलिस ने खाली कराया। ओटावा में विरोध प्रदर्शन तीन सप्ताह से जारी हैं।

लाहौर में हुए धमाके का निशाना हाफ़िज़ सईद का घर था: पाकिस्तान पुलिस

पाकिस्तान में पंजाब प्रांत की पुलिस के मुताबिक लाहौर में हुए धमाके का निशाना जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद का घर था।

लाहौर के जौहर टाउन इलाके में बुधवार, 23 जून 2021 को हुए इस धमाके में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है जबकि 14 लोग घायल हुए हैं।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की पुलिस के आईजी इनाम ग़नी ने बताया कि हाफ़िज़ सईद के घर के पास सुरक्षा होने की वजह से हमलावर घर तक नहीं पहुंच सके।

पाकिस्तान में मौजूद बीबीसी संवाददाता शुमाइला जाफ़री के मुताबिक आईजी ग़नी ने मीडिया को जानकारी दी, ''धमाका हाफ़िज़ सईद के घर के पास हुआ। घर के पास पुलिस होने के वजह से हमलावर वहां तक नहीं पहुंच सके।''

आईजी ग़नी ने कहा कि ऐसा लगता है कि हमलावरों का निशाना हाफ़िज़ सईद के घर के पास बनी पोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मी थे।

इसके पहले लाहौर के कमिश्नर कैप्टन (रिटायर्ड) उस्मान यूनिस ने दो लोगों की मौत और 14 लोगों के ज़ख़्मी होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि घायलों में एक पुलिसकर्मी समेत चार लोगों की स्थिति गंभीर है। उन्होंने बताया कि मौके पर विस्फोटक कैसे पहुंचे, इसकी जांच की जा रही है।

लाहौर में हाफ़िज़ सईद के घर के पास धमाका

पाकिस्तान में लाहौर के जौहर टाउन में हुए एक धमाके में कम से कम दो की मौत हुई है और 14 लोग ज़ख़्मी हुए हैं।

लाहौर के कमिश्नर कैप्टन आर उस्मान ने दो लोगों की मौत और 14 लोगों के ज़ख़्मी होने की पुष्टि की है।

कमिश्नर लाहौर, कैप्टन रिटायर्ड उस्मान यूनिस का कहना है कि घर के बाहर, गली में एक गड्ढा है और बुरी तरह क्षतिग्रस्त एक कार और मोटरबाइक भी है। धमाके की जगह को देखकर लगता नहीं कि ये आत्मघाती हमला होगा।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये अब तक साफ़ नहीं हो रहा है कि घटनास्थल पर विस्फोटक कार से लाए गए थे या मोटरबाइक पर।

इससे पहले समा टीवी से बात करते हुए लाहौर के उपायुक्त मुदासिर रियाज़ ने कहा था कि धमाके में 12 लोग ज़ख़्मी हुए हैं। घायलों में बच्चे और महिलाए भी शामिल हैं।

पाकिस्तान से बीबीसी संवाददाता शुमाइला जाफ़री ने बताया कि पाकिस्तानी प्रांत पंजाब के अधिकारियों ने एक व्यक्ति के मौत की पुष्टि की है। यह धमाका लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद के एक आवास के पास हुआ है।

बीबीसी को एक अधिकारी ने बताया कि ये धमाका जिस जगह हुआ, वहाँ के एक घर का इस्तेमाल हाफ़िज़ सईद भी करते रहे हैं। इसी घर को जाने वाले चार रास्तों में से एक में विस्फोट हुआ है। इस घर पर पुलिस हमेशा मौजूद रहती है।

हाफ़िज़ सईद के सारे घर और ठिकाने सरकार की कस्टडी में है और उन पर दिन-रात पुलिस का पहरा रहता है।

राहत बचाव टीम 1122 के प्रवक्ता ने पाकिस्तानी मीडिया से बताया कि अभी ये साफ़ नहीं हो पाया है कि गैस पाइपलाइन फटी या फिर सिलिंडर।

उन्होंने कहा कि अभी तक धमाके की वजह स्पष्ट नहीं है। लाहौर के उपायुक्त मुदासिर रियाज़ मलिक ने इस धमाके में मदद के लिए सभी राहत बचाव कार्य को मौक़े पर पहुँचने का निर्देश दिया है। उन्होंने अस्पतालों के इमर्जेंसी वॉर्ड को अलर्ट कर दिया है।

टीवी फुटेज में दिख रहा है कि आसपास के घरों को नुक़सान हुआ है।  पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री उस्मान बज़दार ने इस धमाके की जाँच का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने भी इस धमाके को अंजाम दिया है उन्हें क़ानून के कटघरे में लाया जाएगा।