विदेश

अमेरिकी बयान के बाद चीन के विदेश मंत्री ने कहा, ताइवान चीन का प्रांत है

चीन ने अमेरिका के उस बयान पर सख़्त आपत्ति की है जिसमें कहा गया था कि वो ताइवान के डिफ़ेंस को ध्यान में रखते हुए हथियारों की सप्लाई कर रहा है।

चीन के विदेश मंत्री ने बुधवार, 7 सितम्बर, 2022 को कहा, ''ताइवान चीन का प्रांत है। डिफ़ेंस से अमेरिका का क्या मतलब?''

वन चाइना पॉलिसी के तहत चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है और चीन नहीं चाहता कि अंतररारष्ट्रीय स्तर पर कोई देश ताइवान को किसी स्वतंत्र राष्ट्र के रुप में मान्यता दे।

हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ने ताइवान का दौरा किया था जिसपर चीन ने सख़्त आपत्ति दर्ज करते हुए कहा था कि अमेरिका को इसका खमियाजा भुगतना होगा।

अमेरिका के बाद अब बहुत से यूरोपीय देश खुलकर ताइवान के पक्ष में बोलने लगे हैं।

रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद कुछ देशों में ये डर है कि कहीं चीन भी ताइवान के साथ ऐसा कुछ न कर दे।

पुतिन ने कहा, रूस को अलग-थलग करना असंभव है

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में युद्ध के कारण पश्चिमी देशों की पाबंदियों की आलोचना की है। उन्होंने इन पाबंदियों को ऐसा बुखार कहा है, जिससे पूरी दुनिया के सामने ख़तरा पैदा कर दिया है। व्लादिवोस्तोक में आर्थिक फ़ोरम की एक बैठक के दौरान अपने भाषण में पुतिन ने इसे रूस पर पश्चिमी देशों का आर्थिक हमला कहा है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पाबंदियों के कारण यूरोपीय लोगों के जीवन की गुणवत्ता का बलिदान किया जा रहा है, जबकि अधिक ग़रीब देश के सामने खाद्यान्न संकट पैदा हो गया है।

यूक्रेन के अनाज का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यूरोप ग़रीब देशों को इस बहाने धोखा दे रहा है। यूक्रेन युद्ध के कारण कई महीनों तक वहाँ के बंदरगाह को रूसी सैनिकों ने बंद कर रखा था।

पुतिन का कहना है कि अगस्त, 2022 में निर्यात शुरू होने के बाद से ये कहना ग़लत है कि अनाज के सिर्फ़ दो जहाज़ ही अफ़्रीका गए हैं। रूस ने 24 फ़रवरी, 2022 को यूक्रेन पर हमला किया था। फ़िलहाल उसका यूक्रेन के कई इलाक़ों पर नियंत्रण भी है।

छह महीने बाद यूक्रेन की राजधानी कीएव के आसपास के इलाक़ों और यूक्रेन के उत्तरी हिस्से से रूसी सेना को पीछे हटना पड़ा है, जबकि रूसी सैनिकों को दक्षिणी और पूर्वी हिस्से से यूक्रेन की जवाबी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ रहा है।

यूक्रेन पर हमले के कारण रूस पर पश्चिमी देशों ने कई तरह की पाबंदियाँ लगाई हैं। जवाब में रूस से यूरोप को गैस की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन का कहना है कि रूस को अलग-थलग करना असंभव है।

पुतिन ने यूरोपीय देशों के रूस की गैस पर क़ीमतों की सीमा तय करने के प्रस्ताव की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा किया गया, तो रूस इन देशों को तेल और गैस की सप्लाई रोक देगा।

लिज़ ट्रस यूनाइटेड किंगडम की नई प्रधानमंत्री बनीं, क्वीन एलिज़ाबेथ से मुलाक़ात की

लिज़ ट्रस यूनाइटेड किंगडम की नई प्रधानमंत्री बन गई हैं। लिज़ ट्रस ने क्वीन एलिज़ाबेथ द्वितीय से स्कॉटलैंड के बालमोरल कासल में मुलाक़ात की। महारानी एलिज़ाबेथ ने ट्रस को यूनाइटेड किंगडम का नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया है।

इससे पहले बोरिस जॉनसन ने क्वीन से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफ़ा सौंपा था।

लिज़ ट्रस को सोमवार, 5 सितम्बर, 2022 को कंज़र्वेटिव पार्टी ने अपना नया नेता चुना था। ट्रस को 81,326 वोट मिले जबकि ऋषि सुनक को 60,399 वोट मिले।

सोमवार, 5 सितम्बर, 2022 को लिज़ ट्रस ने कहा कि उनके पास टैक्स कम करने के ''ठोस प्लान'' हैं।

लिज़ ट्रस ने अपने भाषण का अंत करते हुए कहा था, ''वी विल डिलीवर, वी विल डिलीवर, वी विल डिलीवर।''

यानी वो वादे पूरे करेंगी। साथ ही लिज़ ट्रस ने कहा कि 2024 के आम चुनावों में उनकी पार्टी लेबर पार्टी को परास्त करेगी।

इसराइल ने माना: अकलेह को किसी आईडीएफ़ जवान ने ग़लती से गोली मारी

फ़लस्तीनी मूल की अमेरिकी पत्रकार शिरीन अबू अकलेह की मौत के करीब चार महीने बाद इसराइल ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि उनके सैनिकों में से किसी एक ने ग़लती से अल-जज़ीरा की पत्रकार शिरीन अबू अकलेह को मार डाला।

अकलेह पर मई 2022 में उस समय गोली चली थी जब वो वेस्ट बैंक में छापेमारी को कवर करने गई थीं।

हालांकि, सेना के शीर्ष कानूनी अधिकारियों ने हमले में शामिल सैनिकों के ख़िलाफ़ आपराधिक जांच शुरू करने से भी इनकार किया है।

अबू अकलेह के परिवार ने कहा है कि उन्हें कोई 'हैरानी' नहीं हो रही क्योंकि इसराइली सेना लगातार सच छिपाने और हत्या की ज़िम्मेदारी लेने से बचने की कोशिश कर रही थी।

अबू अकलेह 11 मई, 2022 को वेस्ट बैंक के जिनिन में इसराइल की छापेमारी को कवर करने गई थीं। इस दौरान इसराइली सैनिकों और फ़लस्तीनी चरमपंथियों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। हमले के समय अबू अकलेह ने एक जैकेट पहना था, जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में 'प्रेस' लिखा था।

अबू अकलेह की मौत की वजह पर अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों और फ़लस्तीनी अधिकारियों ने कहा था कि अकलेह को इसराइली सैनिकों ने गोली मारी। बाद में संयुक्त राष्ट्र और अलग-अलग प्रेस जांच एजेंसियों ने भी इस दावे का समर्थन किया। अमेरिकी समीक्षा में पाया गया कि संभवतः इसराइली सैनिकों ने अकलेह पर गोली चलाई।

अब इसराइल की सुरक्षाबलों (आईडीएफ़) ने कहा है कि उन्होंने अंदरूनी स्तर पर चल रही जांच पूरी कर ली है।

आईडीएफ़ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसकी अत्यधिक आशंका है कि अकलेह को किसी आईडीएफ़ जवान ने ग़लती से गोली मारी और बेशक वो सैनिक समझ नहीं पाया कि अकलेह पत्रकार हैं।

अधिकारी ने ये भी बताया कि जांचकर्ताओं ने हमला करने वाले सैनिक से बात की। उन्होंने कहा, ''सैनिक ने बताया कि उसने असल में क्या किया, और अगर किया, तो ये ग़लती से हुआ।''

भारत ने बांग्लादेश के साथ कुशियारा नदी से जल बंटवारे पर समझौता किया

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना भारत के दौरे पर आईं हुई हैं। दिल्ली के हैदराबाद हाउस में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि दोनों देशों के बीच कुशियारा नदी के जल के बंटवारे पर एक समझौता हुआ है।

पीएम मोदी ने इसका ऐलान करते हुए कहा, ''आज हमने कुशियारा नदी से जल बंटवारे पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे भारत में दक्षिणी असम और बांग्लादेश में सिलहट क्षेत्र को लाभ होगा।''

हालांकि दोनों देशों के बीच तीस्ता नदी के जल को बांटने पर लेकर कोई बयान नहीं आया है। पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियों के कारण तीस्ता नदी पर दोनों देशों के बीच कोई अंतिम समझौते नहीं हो पा रहा है।

हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी ने कहा, ''ऐसी 54 नदियाँ हैं जो भारत-बांग्लादेश सीमा से गुज़रती हैं, और सदियों से दोनों देशों के लोगों की आजीविका से जुड़ी रही हैं।''

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि दोनों देशों के बीच आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ सहयोग पर भी चर्चा हुई है।

महातिर मोहम्मद ने रूस को लेकर अमेरिका और यूरोप की आलोचना की

मलेशिया के सबसे अधिक समय तक प्रधानमंत्री रहे महातिर मोहम्मद ने रूस का समर्थन करते हुए यूरोपीय संघ के देशों पर निशाना साधा है। उन्होंने नेटो और अमेरिका पर रूस को उकसाने का आरोप लगाया है।

दो दिन पहले सीओवीआईडी के चलते अस्पताल में भर्ती होने वाले महातिर मोहम्मद ने वहीं से कुल 17 ट्वीट करके यूरोपीय देशों की जमकर आलोचना की है।

उन्होंने लिखा, ''मैं जेनेरलाइज़ करना नहीं चाहता। लेकिन इस मामले में मेरे पास जेनेरलाइज़ करने के सिवा कोई विकल्प नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आमतौर पर ऐसा ही होता है।''

पश्चिमी देशों के आलोचक माने जाने वाले महातिर मोहम्मद ने यूक्रेन की लड़ाई को यूरोप की रणनीति का सबसे बढ़िया उदाहरण क़रार दिया है।

उन्होंने कहा, ''मेरा मानना ​​है कि यूरोपीय देश लोगों को मारने के लिए युद्ध के आदी हैं। हज़ारों सालों से देखा जा रहा है कि शायद ही ऐसा कोई साल बीता हो, जब यूरोप के देशों के बीच कोई लड़ाई न हुई हो।''

उन्होंने आगे कहा कि यूरोपीय देश युद्धों का महिमामंडन करते और मौत का जश्न मनाते हैं। उन्होंने यूरोप पर हत्यारों को नायक बनाने, उनका महिमामंडन करने, उनकी प्रतिमाएं बनाने और उनकी याद में समारोह करने का भी आरोप लगाया है।

महातिर मोहम्मद के अनुसार, ''वे अभ्यास और वार गेम के साथ युद्ध की तैयारी करते हैं। वे और लोगों को मारने वाले हथियारों का लगातार आविष्कार कर रहे हैं। वे कहते हैं कि शांति बनाए रखने के लिए देशों को युद्ध की तैयारी करना चाहिए।''

उन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध में रूस के पश्चिमी देशों के सहयोगी होने का ज़िक्र करते हुए कहा है कि उसमें रूस के लाखों लोग मारे गए, लाखों घायल हुए। कई शहर और गाँव पूरे के पूरे बर्बाद हो गए।

रूस ने यूरोप को गैस की सप्लाई रोकी, क्या ये यूरोप के प्रतिबंधों का जवाब है?

रूस ने पाइपलाइन को रिपेयर करने का हवाला देते हुए यूरोप तक गैस पहुंचाने वाली अहम पाइपलाइन 'नॉर्ड स्ट्रीम 1' को पूरी तरह बंद करने का ऐलान किया है।

इस परियोजना की मालिक रूसी कंपनी 'गज़प्रोम' ने कहा है कि नॉर्ड स्ट्रीम 1 पाइपलाइन से गैस सप्लाई पर तीन दिनों तक रोक लगी रहेगी।

रूस पहले ही इस पाइपलाइन के ज़रिए केवल 20 फ़ीसदी गैस की आपूर्ति ही यूरोप को कर रहा है। रूस ने ख़राब उपकरणों को इसकी वजह बताया है।

हालांकि रूस ने उन आरोपों को भी ख़ारिज कर दिया है कि यूक्रेन पर हमला करने के बाद लगाए गए प्रतिबंधों का जवाब देने के लिए उसने यह क़दम उठाया है।

नॉर्ड स्ट्रीम 1 पाइपलाइन 1,200 किलोमीटर लंबी है, जो बाल्टिक सागर के नीचे से होकर पश्चिमी रूस के सेंट पीट्सबर्ग से पूर्वोत्तर जर्मनी तक जाती है।

अभी तक रूस से जर्मनी जाने वाली गैस 'नॉर्ड स्ट्रीम 1' पाइपलाइन के ज़रिए यूक्रेन होते हुए भेजी जाती है। इसे 2011 में खोला गया था। जुलाई 2022 में भी रिपेयर करने का हवाला देते हुए इसे 10 दिनों के लिए बंद किया गया था।

यूरोपीय नेताओं को डर है कि गैस के दाम और बढ़ाने के लिए रूस आपूर्ति में और रुकावट पैदा कर सकता है। गैस के दाम पहले ही 400 प्रतिशत बढ़ चुके हैं। ऐसे हाल में सर्दियों में यूरोप में जीवनयापन के बहुत कठिन होने की आशंका है।

नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन का शुरू होना अभी बाक़ी

सितंबर 2021 में एक अन्य पाइपलाइन 'नॉर्ड स्ट्रीम 2' को डालने का काम पूरा हो गया। उसकी भी लंबाई लगभग 1,200 किलोमीटर है।

इस परियोजना के शुरू होने पर रूस से जर्मनी जाने वाली प्राकृतिक गैस की सप्लाई को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पाइपलाइन से जर्मनी को हर साल 55 अरब घन मीटर गैस की सप्लाई होनी थी।

इराक विरोध: अल-सदर के छोड़ने के बाद घातक संघर्ष छिड़ गया

शक्तिशाली शिया नेता मुक्तदा अल सद्र द्वारा अग्रिम पंक्ति की राजनीति छोड़ने की घोषणा के बाद इराक में एक राजनीतिक संकट हिंसा में बदल गया है।

प्रतिद्वंद्वी शिया गुटों के बीच भारी लड़ाई की खबरों के साथ, पिछले कुछ घंटों में गोलियों और विस्फोटों ने बगदाद के उच्च सुरक्षा वाले ग्रीन जोन को हिला दिया है।

इराक की राजधानी में पिछले कुछ वर्षों में हुई सबसे भीषण लड़ाई में कम से कम 20 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं।

अल जज़ीरा की @Victoria Gatenby रिपोर्ट।

लीबिया में ख़ूनी संघर्ष में 23 की मौत, संयुक्त राष्ट्र ने शांति की अपील की

संयुक्त राष्ट्र ने लीबिया की राजधानी त्रिपोली में हुए घातक संघर्ष को तत्काल रोकने की अपील की है।

शनिवार, 27 अगस्त, 2022 को त्रिपोली में दो राजनीतिक गुटों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। लीबिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, इस झड़प में कम से कम 23 लोग मारे गए और दर्जनों अन्य घायल हो गए।

एक अधिकारी ने बताया कि मरने वालों में युवा हास्य अभिनेता मुस्तफा बराका भी शामिल हैं।

2011 में नाटो समर्थित विद्रोह के बाद से लीबिया में अराजकता का माहौल है।

इस विद्रोह ने लीबिया पर लंबे समय तक शासन करने वाले शासक कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था। तब से लेकर 2019 तक लीबिया में अशांतिपूर्ण माहौल बरक़रार रहा।

हालांकि पहले की तुलना में बीते दो साल शांतिपूर्ण गुज़रे लेकिन शनिवार, 27 अगस्त, 2022 की घटना ने लीबिया में एक बार फिर हिंसा और अराजकता का माहौल पैदा कर दिया है।

लीबिया की राजधानी त्रिपोली के कई इलाकों में विस्फोट हुए हैं। आपातकालीन सेवाओं ने कहा है कि कई अस्पताल प्रभावित हुए हैं। लड़ाई के आसपास के इलाकों से भी लोगों को निकाला गया है।

संयुक्त राष्ट्र के लीबिया मिशन ने कहा कि लड़ाई में 'रिहायशी इलाकों में अंधाधुंध और भारी गोलाबारी' हुई है, जिसके बाद तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया गया है।

शनिवार, 27 अगस्त, 2022 को ये झड़प तब शुरू हुई, जब लीबिया की संयुक्त राष्ट्र समर्थक सरकार के सशस्त्र बलों ने उनके प्रतिद्वंद्वी फाति बाशाघा के वफ़ादार मिलिशिया के एक काफ़िले को रोकने की कोशिश की।

पाकिस्तान में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा: बाढ़ से तीन महीनों में मारे गए 900 से ज्यादा लोग

पाकिस्तान में बाढ़ के चलते सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी है।

शुक्रवार, 26 अगस्त, 2022 को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि बाढ़ के कारण जून 2022 से अब तक 900 से अधिक लोग मारे गए हैं। पिछले 24 घंटों की अगर बात करें तो 34 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत के पुराने शहर सुक्कुर में तंबू लगे हुए हैं, क्योंकि लोगों को ठहरने के लिए जगह चाहिए। इन टेंटों में लोग अपने साथ लाये बिस्तर पर बैठे हैं। लोगों का कीमती सामान पानी में बह गया है।

शहर में सड़कों पर हर जगह पानी भरा हुआ है। सीवेज पाइप से प्लास्टिक कचरा बाहर निकल आया है।

अकेले सिंध प्रांत में बाढ़ ने 300 से अधिक लोगों की जान ले ली है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मदद की अपील की

शुक्रवार, 26 अगस्त, 2022 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि बाढ़ से 3.3 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। ये पाकिस्तान की आबादी का करीब 15 प्रतिशत है।

पाकिस्तान ने बाढ़ से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है, साथ ही उन्होंने मदद के लिए इस्लामाबाद में मौजूद कई देशों के राजदूतों के साथ बैठक की है।

इससे पहले जलवायु मंत्री शेरी रहमान ने कहा था कि पाकिस्तान अपने आठवें मानसून चक्र से गुजर रहा है, जबकि आमतौर पर पाकिस्तान में सिर्फ तीन से चार चक्र बारिश होती है।

जब से गर्मी का मौसम शुरू हुआ है, कई मानसून चक्रों ने पाकिस्तान को तबाह कर दिया है। बाढ़ से पाकिस्तान में चार लाख से ज्यादा घर बर्बाद हो गए हैं।

संयुक्त राष्ट्र की आपदा राहत एजेंसी ओसीएचए ने गुरुवार, 25 अगस्त, 2022 को कहा था कि कम से कम एक लाख 84 हजार लोग राहत शिविरों में विस्थापित हुए हैं।