विदेश

पुतिन का ऐलान : यूक्रेन छोड़कर रूस आने वाले लोगों को हर महीने पेंशन मिलेगी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन छोड़कर आने वाले लोगों को वित्तीय लाभ देने के लिए एक योजना शुरू की है।

इस योजना के मुताबिक 18 फरवरी, 2022 के बाद से जिन लोगों को यूक्रेन छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, उन्हें 10 हजार रूबल यानी 170 डॉलर प्रति महीना पेंशन दी जाएगी।

डिसेबल लोगों को भी इस पेंशन का हिस्सा बनाया गया है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को एकमुश्त मदद की जाएगी।

योजना के मुताबिक इसका लाभ यूक्रेन, डोनेत्स्क और लोहांस्क के लोगों को दिया जाएगा। डोनेत्स्क और लोहांस्क को रूस ने फरवरी 2022 में स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दी थी।

रूस के इस कदम की यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने निंदा करते हुए इसे अवैध बताया है।

18 फरवरी, 2022 को राष्ट्रपति पुतिन ने डोनेत्स्क और लोहांस्क से रूस में आने वाले लोगों को 10 हजार रूबल देने के आदेश दिए थे।

रूस ने यूक्रेन का हवाला देकर परमाणु संधि समझौता नहीं होने दिया

परमाणु निरस्त्रीकरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन किसी भी समझौते पर नहीं पहुंच पाया है। रूस ने सम्मेलन के ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट पर सवाल उठाते हुए संयुक्त घोषणा को अपनाने से रोक दिया है।

हर पांच साल बाद परमाणु अप्रसार संधि की समीक्षा की जाती है। इसका मकसद परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है। इस संधि पर 191 देशों ने हस्ताक्षर किए हुए हैं।

परमाणु अप्रसार संधि के तहत इसमें शामिल देशों को अपना परमाणु भंडार कम करने और दूसरे परमाणु हथियार को खरीदने से रोकती है।

रूस ने यूक्रेन के न्यूक्लियर प्लांट, खासकर जपोरिजिया के आसपास सैन्य गतिविधियों पर गंभीर चिंता का हवाला देते हुए ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट पर आपत्ति जताई है।

साल 2015 में भी समीक्षा बैठक हुई थी। इसमें भाग लेने वाले भी किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए थे।

परमाणु निरस्त्रीकरण पर संयुक्त राष्ट्र कॉन्फ्रेंस 2015 के बाद साल 2020 में होनी थी, लेकिन कोरोना के चलते इसे 2022 में किया गया।

न्यूयॉर्क में चार हफ्ते चली सम्मेलन में सहमति नहीं बन पाई। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने समझौता ना होने पर दुख जाहिर किया है।

यूक्रेन के जपोरिजिया न्यूक्लियर प्लांट पर युद्ध शुरू होने के कुछ दिन बाद ही रूस ने कब्जा कर लिया था। सम्मेलन में शामिल सभी देशों की सहमति के बाद ही ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट को फाइनल किया जाता है और दस्तावेज का रूप दिया जाता है।

सम्मेलन में सभी देशों के अनुमोदन की आवश्यकता थी। नीदरलैंड और चीन सहित कई देशों ने इस बात पर निराशा व्यक्त की कि कोई सहमति नहीं बन पाई है।

सऊदी अरब पाकिस्तान में एक अरब डॉलर का निवेश करेगा

आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की मदद के लिए सऊदी अरब ने एकबार फिर हाथ बढ़ाया है। सऊदी अरब पाकिस्तान में एक अरब डॉलर का निवेश करेगा।

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय की ओर से ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी गई है।

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक़, ''सऊदी अरब के किंग सलमान ने पाकिस्तान में एक अरब डॉलर के निवेश के लिए निर्देश दिए हैं। उन्होंने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को सहारा देने के लिए और वहां के लोगों के लिए यह मदद देने का निर्देश दिया है।''

विज्ञप्ति के मुताबिक़, इस बात की जानकारी सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने गुरुवार, 25 अगस्त, 2022 को पाकिस्तान के विदेश मंत्री के साथ फ़ोन पर हुई बातचीत के दौरान दी।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान ने गुरुवार, 25 अगस्त, 2022 को पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो से फ़ोन पर बातचीत की।

इस बातचीत के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री को किंग सलमान के निर्देश की जानकारी दी। साथ ही दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच साझा लाभ के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

पहले भी मदद कर चुका है सऊदी अरब

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पाकिस्तान की स्थापना के समय से ही मज़बूत संबंध हैं। 1970 के दशक के बाद से ये संबंध और भी मज़बूत हुए हैं।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था जब-जब संकट में आती है, सऊदी अरब उसकी मदद के लिए आगे आता है।

पाकिस्तान में इमरान ख़ान की सरकार गिरने के बाद प्रधानमंत्री बने शहबाज़ शरीफ़ ने अपना पहला विदेशी दौरा सऊदी अरब का ही किया था। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सऊदी से आठ अरब डॉलर का राहत पैकेज लेने में कामयाबी हासिल की थी।

सऊदी अरब ने पिछले क़र्ज़ समझौते के तहत दिसंबर 2021 में भी पाकिस्तान स्टेट बैंक में तीन अरब डॉलर जमा कराए थे।

इसके अलावा साल 2021 में जब पाकिस्तान मुश्किल आर्थिक संकट में फंसा था, डॉलर के मुक़ाबले उसका रुपया टूट रहा था और विदेशी मुद्रा भंडार ख़त्म हो रहा था तब भी सऊदी अरब ने ही आगे बढ़कर उसकी मदद की थी।

अक्टूबर, 2021 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 4.2 अरब डॉलर की आर्थिक मदद दी थी। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के सऊदी दौरे के दौरान इस मदद की घोषणा की गई थी। ये मदद सस्ते क़र्ज़ और उधार तेल के रूप में थी।

ज़वाहिरी की मौत पर तालिबान ने कहा, अभी तक शव नहीं मिला है

तालिबान ने कहा है कि उसे अभी तक अल क़ायदा के पूर्व प्रमुख अल ज़वाहिरी का शव नहीं मिला है। हालाँकि उनकी पड़ताल जारी है।

तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने गुरुवार, 25 अगस्त, 2022 को कहा कि तालिबान को अभी तक अल ज़वाहिरी का शव नहीं मिला है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ''इस मामले में जाँच चल रही है और अभी भी पूरी नहीं हुई है। इस बारे में जो भी जानकारी है वो जाँच पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएगी।''

तालिबान के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, ''जहाँ हमला हुआ था, वहाँ सब कुछ बर्बाद हो चुका था, कोई शव भी नहीं मिला था।''

अमेरिकी ने किया था दावा

अमेरिका ने 31 जुलाई, 2022 को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक ड्रोन हमले में अल-ज़वाहिरी को मारने का दावा किया था।

अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी ने आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन चलाया था। ज़वाहिरी के मारे जाने की पुष्टि ख़ुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने की थी।

बाइडन ने कहा था, "ज़वाहिरी के हाथ अमेरिकी नागरिकों की हत्या से रंगे थे। अब लोगों को इंसाफ़ मिल गया है और यह आतंकवादी नेता अब जीवित नहीं है।''

अधिकारियों का कहना है कि ज़वाहिरी एक सुरक्षित घर की बालकनी में थे तभी ड्रोन के ज़रिए दो मिसाइल दागी गई।

तालिबान के अधिकारियों ने अमेरिका के दावे के बाद कहा था कि ड्रोन हमला तो हुआ था लेकिन जिस समय हमला हुआ घर ख़ाली था। तालिबान अधिकारियों ने कहा था कि ड्रोन हमला एक ख़ाली घर पर हुआ।

तालिबान के एक नेता ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स से कहा था कि वे हमले के समय ज़वाहिरी की मौजूदगी के अमेरिकी दावे की पुष्टि नहीं करते हैं।

पाकिस्तान में बाढ़ और बारिश से अब तक 900 से अधिक लोगों की मौत

पाकिस्तान में बाढ़ और बारिश के कहर से अभी तक 900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 30 लाख से अधिक लोग इससे किसी ना किसी प्रकार से प्रभावित हुए हैं।

बीबीसी उर्दू की ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान के 116 ज़िले बाढ़ और बारिश से बुरी तरह प्रभावित हैं।

एनडीएमए की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान प्रांत के ज़िले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

यहाँ के सभी 33 ज़िलों में स्थिति बेहद गंभीर है।

वहीं ख़ैबर के 34 ज़िले और सिंध के 23 ज़िले भी बाढ़ और बारिश की मार झेल रहे हैं।

अगर आबादी के लिहाज़ से देखें तो पाकिस्तान का सिंध प्रांत सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। यहां 22 लाख 63 हज़ार लोगों का जीवन बाढ़ और बारिश के कारण प्रभावित हुआ है।

हालाँकि यह केंद्र के आंकड़े हैं, लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि सिंध प्रांत में बाढ़-बारिश से प्रभावित होने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक है।

एनडीएमए की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ और बारिश से सात लाख आठ हज़ार से अधिक जानवर अभी तक बह गए हैं। इसके अलावा कई जगहों पर सड़क भी बह गई है।

रूस ने यूक्रेन के रेलवे स्टेशन पर मिसाइल दागी, 22 की मौत, कई घायल

यूक्रेन ने कहा है कि उनके एक रेलवे स्टेशन पर हुए एक रूसी रॉकेट हमले में 22 लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों लोग घायल हो गए हैं।

हमला ऐसे दिन हुआ जब यूक्रेन पर रूस के हमले के ठीक छह महीने हुए हैं।

यूक्रेन ने कहा कि हमला पूर्वी शहर चैपलिन में हुआ जहाँ पांच लोग एक वाहन में जलकर मर गए। इनमें 11 साल का एक बच्चा भी शामिल था।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने हमले की जानकारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक के ही बीच दी। उन्होंने बताया कि इस हमले में क़रीब 50 लोग ज़ख़्मी हुए हैं।

रूस ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

हालांकि रूस लगातार कहता रहा है कि वो ऐसी किसी जगह हमले नहीं करता जहाँ आम नागरिक हों।

ज़ेलेंस्की ने कहा कि उन्हें चैपलिन में हुए हमले के बारे में उस समय पता चला जब वो सुरक्षा परिषद की बैठक में बोलने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने कहा, ''रूस कुछ इस तरह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक की तैयारी करता है।''

उन्होंने कहा कि चार बोगियों में आग लगी है और हताहतों की संख्या बढ़ सकती है।

इससे पहले अप्रैल 2022 में भी एक रेलवे स्टेशन पर हमला हुआ था, जिसमें 50 से अधिक लोग मारे गए थे।

तीसरी बार यूक्रेन की राजधानी कीएव पहुंचे बोरिस जॉनसन

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन अचानक कीएव पहुंचे हैं। वहां उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से मुलाक़ात की।

यूक्रेन सोवियत संघ से आज़ादी का अपना 31वां साल मना रहा है।

यूक्रेन पहुंच कर जॉनसन ने कहा, ''यूक्रेन में जो कुछ भी हो रहा है वो हमारे लिए मायने रखता है। इसलिए आज मैं कीएव आया हूं।''

उन्होंने कहा, ''यही कारण है कि ब्रिटेन अपने दोस्त यूक्रेन के साथ खड़ा रहेगा। मुझे यकीन है कि यूक्रेन इस युद्ध को जीत सकता है और जीतेगा भी।''

रूस के साथ शुरू हुई लड़ाई के बाद बोरिस जॉनसन तीसरी बार यूक्रेन की राजधानी कीएव पहुंचे हैं।

7 जुलाई, 2022 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद जॉनसन कई दिनों बाद सार्वजनिक रूप से दिखे हैं।

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन की आज़ादी को लेकर ब्रिटेन के कट्टर समर्थन के लिए प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को ऑर्डर ऑफ़ लिबर्टी से सम्मानित किया।

ज़ेलेंस्की ने कहा, रूस के किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने रूस के संभावित हमलों को लेकर चेतावनी दी है।

ज़ेलेंस्की की ये चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब यूक्रेन बुधवार, 24 अगस्त, 2022 को अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देर रात को जारी अपने संदेश में ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ऐसे समय में अपनी आज़ादी का जश्न मना रहा है, जब उसे एक बड़े ख़तरे से भी लड़ना पड़ रहा है।

ज़ेलेंस्की ने कीएव, ख़ारकीएव जैसे शहर में रहने वाले लोगों से ख़ास अपील की कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें। ख़ास तौर पर कर्फ़्यू और हवाई हमलों के सायरन का।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा, ''आज का दिन हम सभी के लिए बहुत ख़ास दिन है। लेकिन दुर्भाग्य से इसी वजह से हमारे दुश्मनों के लिए भी ये दिन अहम है। हमें रूस के उकसावे और संभावित हमलों से सावधान रहना चाहिए।''

उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन की सशस्त्र सेना, ख़ुफ़िया विभाग और स्पेशल सर्विस के जवान लोगों की सुरक्षा के लिए हर चीज़ करेंगे।

ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस के किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। बुधवार, 24 अगस्त, 2022 को यूक्रेन पर रूस के हमले को भी छह महीने हो गए हैं।

24 फ़रवरी, 2022 को रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण शुरू किया था। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन 2014 से ही यूक्रेन में रूस का प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा, ''छह महीने पहले हमला किया गया। लेकिन तख़्तापलट करने और अधिकतर यूक्रेन पर नियंत्रण करने का उसका लक्ष्य नाकाम हो गया है।''

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने ये भी दावा किया है कि रूस कई मोर्चों पर संसाधनों की कमी से भी जूझ रहा है। साथ ही उसकी कूटनीतिक शक्ति भी ख़त्म हो गई है। उसका कहना है कि छह महीनों में रूस की लड़ाई उसके लिए भारी पड़ी है।

पाकिस्तान में गलती से गिरी ब्रह्मोस मिसाइल पर जांच पूरी, सरकार ने तीन अधिकारी किए बर्खास्त

भारत की मिसाइल ग़लती से पाकिस्तानी क्षेत्र में गिरने को लेकर जांच पूरी हो गई है।

जांच में सामने आया कि भारत के तीन अधिकारियों के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन नहीं करने के कारण अचानक से मिसाइल फायर हुई। इन तीन अधिकारियों को घटना के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया है।

भारत की केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से तीनों अधिकारियों की सेवाओं को समाप्त कर दिया है। नौकरी से हटाने के आदेश अधिकारियों को मंगलवार, 23 अगस्त, 2022 को दिए गए हैं।

9 मार्च, 2022 को भारत ने गलती से पाकिस्तान क्षेत्र में ब्रह्मोस मिसाइल फायर कर दी थी। ये मिसाइल पाकिस्तान के चन्नू इलाके में गिरी थी। ब्रह्मोस मिसाइल आवाज़ से तीन गुना तेज रफ्तार से चलती है।

हालांकि इस मिसाइल पर वॉरहेड लोडेड नहीं था और इस घटना में सीमा के दोनों तरफ कोई घायल नहीं हुआ था।

संयुक्त राष्ट्र में सीमा सुरक्षा और आतंकवाद पर भारत ने क्या कहा?

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बातचीत और सहयोग के माध्यम से आम सुरक्षा को बढ़ावा देने पर चर्चा के दौरान एक-दूसरे की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान करने की बात कही।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की राजदूत रुचिरा कम्बोज ने कहा कि एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के बाद ही कोई देश ये उम्मीद करे कि उसकी संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा।

इस दौरान भारत ने किसी देश का नाम लिए बिना आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों का भी ज़िक्र किया। अगस्त 2022 के लिए चीन ही सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है। माना जा रहा है कि भारत का निशाना चीन ही था।

रुचिरा कम्बोज ने कहा, ''यथास्थिति को बदलने के इरादे से कोई भी बलपूर्वक या एकतरफ़ा कार्रवाई आम सुरक्षा का अपमान है। आम सुरक्षा तभी संभव है जब सभी देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे। इसके बाद ही उनकी संप्रभुता को सम्मान मिलेगा।''

रुचिरा कम्बोज ने ये बयान ऐसे समय दिया है जब भारत और चीन के बीच बीते दो सालों से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव बना हुआ है।

रुचिरा कम्बोज ने कहा, ''आम सुरक्षा तभी संभव है जब देश एक-दूसरे के साथ किए गए द्विपक्षीय या बहुपक्षीय समझौतों का सम्मान करें, और उन समझौतों को बेकार करने के लिए एकतरफ़ा कार्रवाई न करें।''

भारत लगातार ये आरोप लगाता रहा है कि सीमा से जुड़े कई समझौतों और प्रोटोकॉल का चीन उल्लंघन करता है।

बीते दो महीने में चीन ने संयुक्त राष्ट्र में भारत और अमेरिका की ओर से लश्कर-ए-तैयबा के नेता अब्दुल रहमान मक्की और जैश-ए-मोहम्मद के नेता अब्दुल राउफ़ अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के प्रस्ताव को रोका है।

रुचिरा कम्बोज ने कहा, ''साझा सुरक्षा तभी होगी जब सारे देश आतंकवाद जैसे साझा ख़तरों के ख़िलाफ़ एक साथ खड़े हों और दोहरे मापदंड छोड़ें।''