उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से आगे बातचीत से इनकार किया है और इसके लिए दक्षिण कोरिया की ग़लती बताया है।
उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन के संबोधन के जवाब में अपना बयान जारी किया है।
इससे पहले, दक्षिण कोरियाई सेना के मुताबिक शुक्रवार को उत्तर कोरिया ने अपने पूर्वी समुद्री तट पर दो मिसाइलें दागीं थीं। एक महीने के भीतर उत्तर कोरिया ने छठी बार ऐसे प्रक्षेपण किए हैं।
दक्षिण कोरियाई सेना के ज्वाएंट चीफ़ ऑफ़ स्टॉफ़ ने बताया है कि उत्तर कोरिया ने ये दोनों मिसाइलें गुरुवार को स्थानीय समय के मुताबिक आठ बजे दागीं गईं जो 230 किलोमीटर की दूरी तय करने में कामयाब हुई।
इससे छह दिन पहले उत्तरी कोरिया ने दो कम दूरी वाली बैलेस्टिक मिसाइलें दागीं थीं जो जापान सागर में जाकर गिरी थीं।
ख़ास बात यह है कि उत्तर कोरिया यह प्रक्षेपण, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तरी कोरियाई राष्ट्रपति किम जोंग उन की मुलाकात के बाद कर रहे हैं, जून में हुई मुलाकात के दौरान दोनों परमाणु निशस्त्रीकरण की बात आगे बढ़ाने पर सहमत हुए थे।
परमाणु हथियार विकसित करने के आरोप के चलते उत्तर कोरिया अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों का सामना कर रहा है।
जापानी शासन से स्वाधीनता के मौके पर, राष्ट्रपति मून ने 2045 तक कोरियाई प्रायद्वीप के एकीकृत होने की उम्मीद की है।
कोरिया का विभाजन द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दो देशों में हो गया था। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून के मुताबिक इस अहम मोड़ पर निशस्त्रीकरण को हासिल करना सबसे अहम था हालांकि इसके बाद बातचीत अटकने की घोषणा हुई है।
उन्होंने टेलीविजन पर प्रसारित अपने भाषण में कहा, "एक नए कोरियाई प्रायद्वीप जो खुद के साथ पूर्वी एशिया के लिए भी शांति और समृद्धि ले कर आए, का इंतज़ार हम सबको है।''
उत्तर कोरिया ने अपने बयान में कहा है, "दक्षिण कोरिया अपना संयुक्त सैन्य अभ्यास जारी रखे हुए है और इलाके में शांति और शांतिपूर्ण अर्थव्यवस्था की बात कर रहा है। ऐसा करना सही नहीं है।''
उत्तर कोरियाई प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा, "हम लोग उनकी सोच प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रहे हैं क्योंकि एक तरफ तो वे उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच बातचीत की बात कर रहे हैं जबकि दूसरी ओर हमारी सेना को 90 दिनों में नष्ट करने की योजना बना रहे हैं। वे वास्तव में बेशर्म आदमी हैं।''
उत्तर कोरिया ने अमरीका-दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य अभ्यास को लेकर नाराज़गी जताई है, यह सैन्य अभ्यास अभी चल रहा है। उत्तर कोरिया की ओर से इसे पहले युद्ध की तैयारी बताया था।
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने हाल में डोनल्ड ट्रंप को लिखे अपने खत में इस महंगे सैन्य अभ्यास को लेकर शिकायत की थी।
उत्तर कोरिया की ओर से एकीकरण के मसले को देखने वाले प्रवक्ता ने कहा कि बातचीत बंद करने का फ़ैसला दक्षिण कोरिया की ओर से सैन्य अभ्यास के आयोजन के चलते किया गया है।
सियोल से बीबीसी संवाददाता लाउरा बिकर का विश्लेषण:
उत्तर कोरियाई प्रवक्ता ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति को 'बेशर्म' बताया है और उनके दोनों देशों के एकीकरण वाले बयान को निरर्थक बताया है।
लेकिन सबसे ज़्यादा मुश्किल की बात यह है कि सियोल में राजनयिक बातचीत के दरवाजे़ बंद हो गए हैं।
दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत से इनकार करके उत्तर कोरिया ने अपनी ओर से यह संकेत दिया है कि वह अमरीका से सीधे बातचीत करेगा। यह दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के लिए बेहद अपमानजनक है क्योंकि उन्होंने ही डोनल्ड ट्रंप और किम जोंग-उन के बीच बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी।
प्योंगयांग को यह लग सकता है कि उसे अपने पड़ोसी देश से कुछ हासिल नहीं हो सकता, और अमरीका की मंज़ूरी के बिना कुछ भी रियायत नहीं मिल सकती। ऐसे में अब जब किम जोंग-उन ने व्हाइट हाउस से सीधा संपर्क स्थापित कर लिया है ऐसे में सीधे संपर्क करना उन्हें बेहतर लगा होगा, हाल ही में ट्रंप ने उनके खत को ख़ूबसूरत पत्र भी कहा था।
दरअसल अमरीकी प्रशासन ने एक तरह से उत्तर कोरिया को ऐसा करने का रास्ता दिया है। उत्तर कोरिया की छह मिसाइलें दागने के बाद भी एक बार भी अमरीका ने उसकी आलोचना नहीं की है।
डोनल्ड ट्रंप भी सार्वजनिक तौर पर दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास को महंगा बता चुके हैं।
हालांकि अभी भी सबकुछ ख़त्म नहीं हुआ है। यह एक तरह से धमकी भी हो सकती है। लेकिन इससे यह तो जाहिर हो ही रहा है कि दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून बहुत जल्दी सियोल में किम जोंग-उन की मेजबानी नहीं कर रहे हैं।
लंदन में भारतीय उच्चायोग के सामने गुरुवार को स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर अनुच्छेद 370 हटाने के समर्थक और विरोधी कथित तौर पर आमने-सामने आ गए।
लंदन में 61 वर्षीय नौकरीपेशा भारत सचानिया उच्चायोग की इमारत के बाहर भारतीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने के लिए गए थे। उन्होंने कहा कि समर्थकों से अधिक वहां पर विरोध प्रदर्शन करने वाले मौजूद थे।
उन्होंने बताया, "यह सारा नज़ारा भारतीय उच्चायुक्त रुचि घनश्याम उच्चायोग के अंदर से देख रही थीं। जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने समर्थकों को घेर लिया और उन्होंने टमाटर, पानी की बोतलें, अंडे फेंकने शुरू किए तो भारतीय उच्चायुक्त चिंतित हो गईं और इसके कारण उन्होंने लंदन पुलिस बल को फ़ोन करके और सुरक्षा बल भेजने के लिए कहा।''
उन्होंने पुलिस की मदद से समर्थकों को बचाया और उन्हें भारतीय उच्चायोग के अंदर ले गईं।
भारत सचानिया का कहना है कि सभी समर्थक डेढ़ घंटे तक वहां रहे, एक समर्थक ने बताया कि उसकी आंखों पर अंडे और टमाटर फेंके गए। धीरे-धीरे लोग भारतीय उच्चायोग के बाहर से जाने लगे और कई मेट्रो ट्रेन प्रदर्शनकारियों से भर गईं।
सचानिया ने बताया कि उन्होंने सुना है कि दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है लेकिन उन्होंने किसी को चोट लगते या घायल होते हुए नहीं देखा था। उन्होंने मदद के लिए भारतीय उच्चायोग का धन्यवाद किया है।
सुधा के 40 वर्षीय पति और 8 वर्षीया बेटी उस समय भारतीय उच्चायोग के बाहर थे। सुधा ने बीबीसी को बताया कि शुरुआत में कम प्रदर्शनकारी थे जिसके कारण कम संख्या में सुरक्षाबल वहां था लेकिन धीरे-धीरे वहां काफ़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पहुंच गए।
उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने भारतीय उच्चायोग को चारों ओर से घेर लिया और पुरुष, महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों पर अंडे, टमाटर, बोतलें फेंकने लगे।
सुधा ने कहा कि सुरक्षा के उपायों में कमी थी, पुलिस बल को अच्छे से तैयारी करनी चाहिए थी और भारी संख्या में पुलिस कर्मियों को वहां भेजना चाहिए था।
ब्रैडफ़ॉर्ड से कंज़रवेटिव पार्टी के सदस्य ओवैस राजपूत एक कश्मीरी हैं और वह इस प्रदर्शन में भाग लेने के लिए ब्रैडफ़ॉर्ड से यहां आए थे। उन्होंने कहा कि हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी भारतीय उच्चायोग के बाहर जमा हुए थे।
उन्होंने कहा कि उन्होंने वहां पर लोगों को नारे लगाते और बैनर लहराते देखा, इनमें कश्मीरी, पाकिस्तानी और खालिस्तान समर्थक शामिल थे लेकिन वहां कोई भारतीय समर्थक नहीं था।
उन्होंने कहा कि वहां इकट्ठा हुए 90 फ़ीसदी कश्मीरी मूल के ब्रितानी नागरिक थे, और 10 ट्रेन के डिब्बे उन लोगों से भरे थे जो ब्रैडफ़ॉर्ड से प्रदर्शन में भाग लेने आ रहे थे।
राजपूत ने कहा कि उन्होंने वहां कोई हिंसा या प्रदर्शनकारियों द्वारा लोगों पर अंड्डे या बोतलें फेंकते हुए नहीं देखा। उनसे किसी ने कहा था कि लोगों पर अंड्डे फेंके गए हैं लेकिन उन्होंने कोई ख़राब व्यवहार नहीं देखा।
उन्होंने बताया कि लोग मोदी विरोधी नारे लगा रहे थे और पोस्टरों पर जूते मार रहे थे लेकिन साथ ही साथ काफ़ी संख्या में पुलिस वहां तैनात थी और हेलिकॉप्टर से पुलिस निगरानी कर रही थी। उनको लगता है कि इस विरोध प्रदर्शन में तकरीबन 20 हज़ार लोगों ने भाग लिया जिनमें बूढ़े और विकलांग लोग भी शामिल थे।
राजपूत के अनुसार, यह एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन था जिसमें सिर्फ़ विरोधी नारे लगे, साथ ही कई लोगों ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के झंडे ले रखे थे जो शांति की बात करता है। उन्होंने स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस की प्रशंसा करते हुए सड़कों को अवरुद्ध करने की आलोचना भी की जिसके कारण भीड़ की समस्या हुई।
राजपूत ने कहा कि लंदन प्रशासन इस प्रदर्शन को और अच्छे तरह से नियंत्रित कर सकता था क्योंकि प्रशासन को अनुमान नहीं था कि इतनी भारी संख्या में प्रदर्शनकारी इसमें भाग लेंगे।
हम अभी भी इस घटना पर स्कॉटलैंड यार्ड और भारतीय उच्चायोग के बयान का प्रतीक्षा कर रहे हैं।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर भारत के कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर आपत्ति जताई है।
इस मुद्दे पर सुरक्षा परिषद एक तरह से बंद कमरे में शुक्रवार को अनौपचारिक बैठक करने जा रहा है। यह बैठक ऐसी होती है जिसका ना ही कोई रिकॉर्ड रखा जाएगा और न ही उसमें दिए गए किसी बयान को रिकॉर्ड किया जाएगा।
यह ऐसी बैठक होगी जिसमें न ही पाकिस्तान की कोई नुमाइंदगी होगी और न ही भारत की ओर से कोई नुमाइंदा शामिल होगा।
पर सबसे अहम सवाल ये है कि बंद कमरे में होने वाली बैठक में क्या कहा जाएगा इसके बारे में भारत को कैसे पता चलेगा? तो भारत इसके लिए अपने मित्र देशों पर निर्भर है।
भारत ने जम्मू-कश्मीर से जब से अनुच्छेद 370 हटाया है तब से कई मित्र देशों ने इसे भारत का अंदरूनी मसला बताया है। तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हो रही बैठक के लिए भारत भी इन्हीं देशों पर निर्भर है।
इस बैठक में शामिल भारत के मित्र देश उसे बाहर आकर इस बैठक के बारे में बताएंगे।
हम सब ही जानते हैं कि पाकिस्तान और चीन के बीच बेहद पुराने और घनिष्ठ रिश्ते हैं। चीन ने पाकिस्तान की रक्षा, परमाणु और मिसाइल क्षेत्र में मदद की है। अब चीन पाकिस्तान में निवेश करके आर्थिक रूप से उसकी मदद कर रहा है।
इस तरह से समझा जा सकता है कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के लिए कश्मीर मुद्दे पर बैठक बुलाने में मदद की होगी। इसी तरह अभी पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी चीन गए थे तो उन्होंने इस बैठक के लिए मदद भी मांगी होगी।
इसके अलावा भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी एक सप्ताह पहले चीन की यात्रा पर थे।
भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना उसका अंदरूनी मामला है। भारत में अनुच्छेद 370 और धारा 35-ए को हटाने के लिए संसद से क़ानून को पास करवाया गया है। अगर उस पर किसी को कोई दिक्कत हो तो इसको भारत का सुप्रीम कोर्ट सुनेगा।
पाकिस्तान दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि भारत के कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन हो रहा है। पाकिस्तान ने कई तर्कों के आधार पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है जिनमें एक वैध तर्क संचार साधनों का ठप्प होना है।
नब्बे के दशक में कश्मीर में चरमपंथ बढ़ने के बाद से पाकिस्तान ने इस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करना चाहा है। उसने कई दफ़ा कहा है कि यह द्विपक्षीय नहीं बल्कि बहुपक्षीय मुद्दा है।
संयुक्त राष्ट्र आमसभा जल्द ही होने वाली है। इसमें पाकिस्तान का कोई भी नुमाइंदा हो वह कश्मीर का मुद्दा ज़रूर उठाएगा।
लेकिन पाकिस्तान आमसभा में क्या कहेगा इसका अभी से अनुमान लगाना जल्दबाज़ी होगी।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की असेंबली के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा है कि जम्मू कश्मीर में 370 ख़त्म करके नरेंद्र मोदी ने अपना आख़िरी कार्ड खेला है और ये उसी तरह है जैसे हिटलर ने यहूदियों के लिए फ़ाइनल सॉल्यूशन बनाया था।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में कुछ करने की तैयारी में है और जंग हुई तो उसके लिए पाकिस्तान पूरी तरह तैयार है। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए सीधे कहा- आपकी ईंट का जवाब पत्थर से देंगे।
इमऱान ने कहा कि 'नरेंद्र मोदी ने जो आख़िरी कार्ड खेला है, इसके बाद कश्मीर आज़ादी की ओर जाएगा।'
पाकिस्तान के पीएम ने अपने भाषण में कई बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम लिया और कहा कि भारत में जो भी हो रहा है वह आरएसएस की विचारधारा के कारण ही हो रहा है। उन्होंने आरएसएस की विचारधारा को हिटलर की नाज़ी पार्टी के समान बताया।
इस बार पाकिस्तान अपने स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को 'कश्मीर एकजुटता दिवस' मना रहा है।
पाकिस्तान ने यह क़दम भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर राज्य को मिला विशेष दर्जा छीनने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के विरोध में उठाया है।
बुधवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद पहुंचे।
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के राष्ट्रपति सरदार मसूद ख़ान और प्रधानमंत्री राजा फ़ारूक़ हैदर ने उनकी अगवानी की। उन्हें गार्ड ऑफ़ ऑनर भी दिया गया।
इमरान ख़ान ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की असेंबली को संबोधित करते हुए कहा, ''जो आरएसएस की विचारधारा है, जिसके नरेंद्र मोदी बचपन से सदस्य हैं। इस आरएसएस ने अपनी प्रेरणा हिटलर की नाज़ी पार्टी से ली थी। ये नस्लीय श्रेष्ठता मानते थे कि हिंदू प्रजाति श्रेष्ठ है। वे समझते थे कि मुसलमानों ने हमारे ऊपर जो हुक़ूमत की है, अब इनसे बदला लेना है।''
इमरान ख़ान ने कहा कि यह विचारधारा न सिर्फ़ मुसलमानों से नहीं, ईसाइयों से भी नफ़रत करती है। आरएसएस ने अपने लोगों के ज़हन में डाला है कि अगर मुसलमान हमारे ऊपर 600 साल हुक़ूमत न करते तो वो शानदार देश बनते।
नरेंद्र मोदी पर आक्रामक होते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि इस विचारधारा ने महात्मा गांधी को कत्ल किया। इसी विचारधारा ने आगे चलकर मुसलमानों का क़त्ल-ए-आम किया।
''पिछले पांच सालों में जो कश्मीर में ज़ुल्म किए गए, इसी विचारधारा के कारण किए गए। यह नरेंद्र मोदी ने जो कार्ड खेला है, यह उसका आखिरी कार्ड था। यह फ़ाइनल सल्यूशन है। हिटलर ने भी यहूदियों के लिए फ़ाइनल सॉल्यूशन बनाया था।''
''मोदी ने आख़िरी कार्ड खेल दिया है, रणनीतिक ब्लंडर कर दिया है मोदी ने। यह मोदी और बीजेपी को बहुत भारी पड़ेगा। क्योंकि सबसे पहले कश्मीर का इन्होंने अंतरराष्ट्रीयकरण कर दिया।''
इमरान खान ने कहा, ''पहले कश्मीर पर बात करना मुश्किल था। अब दुनिया की नज़र कश्मीर पर है, हमारे ऊपर है कि हम इसे कैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाते हैं। मैं आपकी संसद के सामने जिम्मेदारी लेता हूं कि मैं कश्मीर की दुनिया में आवाज उठाने वाला एंबैसडर हूं।''
इतिहास को देखें तो दुनिया में बीमार दिमाग़ और बिना तहज़ीब वाले लोगों ने क़त्लेआम मचाया है। लोगों को अंदाज़ा नहीं है कि ये वैसी विचारधारा है। दुनिया के लोग सोचते हैं कि ये कर्म और निर्वाण वाला देश है। वे हमें दहशतगर्द कहते थे, मगर भारत को सहिष्णु माना जाता था। लेकिन इस विचारधारा का नुक़सान अगर किसी को होगा तो सबसे ज़्यादा हिंदुस्तान को होगा।
इन्होंने हिंदुस्तान के संविधान को रद्द कर दिया। 370 हमारा मामला तो था ही नहीं। वे जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ गए, सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ चले गए। देश जंगों से तबाह नहीं होती, रूल ऑफ़ लॉ ख़त्म होने से तबाह होते हैं। जज वहां डरे हैं, मीडिया को कंट्रोल किया है, विपक्ष के नेताओं के भाषण देखें तो लगता है कि डरकर भाषण दे रहे हैं। ऐसा नाज़ी जर्मनी में हुआ करता था। उनकी विचारधारा के ख़िलाफ़ बोलने वालों को गद्दार कहा जाता था। उसे मार दिया जाता था या भगा दिया जाता था। भारत में भी मुसलमान कुछ कहे तो उसे पाकिस्तान जाने के लिए कहा जाता है। बुद्धिजीवी भी डरते हैं।
ये भारत को तबाही की ओर ले जा रहे हैं. भारत में 18 से 19 करोड़ मुसलमान हैं। ये कम संख्या नहीं है। इनके साथ जब ऐसा किया जाता रहेगा, उन्हें डराया जाएगा, उनके अधिकार खत्म किए जाएंगे तो उनकी प्रतिक्रिया आएगी ही। इंग्लैंड में देखें तो मेनचेस्टर और बर्मिंघम में जिन लोगों को दबाया जाता रहा, वे कट्टरपंथी हो गए। हिंदुस्तान में भी ऐसा ही हो रहा है।
हिंदुस्तान में जब क्रिकेट खेलने जाता था तो खाते-पीते घरों के मुसलमान कहते थे कि टू नेशन थ्योरी ठीक नहीं थे। आज सभी कहते हैं कि जिन्ना ठीक थे। कश्मीर के जो भारत समर्थक नेता थे, वे भी आज ऐसा कह रहे हैं। मैंने फ़ारूक़ अब्दुल्लाह को सुना।
ये जो आरएसएस का जिन्न बोतल से बाहर आया है, ये वापस नहीं जाएगा। यह आगे बढ़ेगा। अब सिखों पर मुश्किल आएगी, दलितों पर आएगी। ईसाइयों पर आ चुकी है और मुसलमानों को तो निशाना बनाया ही जा रहा है।
नफ़रत से भरा यह नज़रिया कश्मीर तक नहीं रुकेगा, पाकिस्तान की ओर आएगा। हमें जानकारी है इन्होंने आज़ाद कश्मीर में एक्शन लेने का प्लान बनाया है, जैसे पुलवामा के बाद इन्होंने किया था। हमारी दो बार नैशनल सिक्यॉरिटी मीटिंग भी हो चुकी है।
इस बार और ज़्यादा ख़ौफ़नाक प्लान बनाया हुआ है। कश्मीर में जो कर रहे हैं, उससे नज़र हटाने के लिए वे अब आज़ाद कश्मीर में एक्शन लेंगे। इसके लिए मैं आज यहां से मोदी को पैगाम देता हूं- आप एक्शन लें, आपकी ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा।
पाकिस्तान की फौज को युद्ध का कड़ा अनुभव है। 20 सालों से शहीदों की लाशें उठा रही है। पाकिस्तान की फ़ौज और क़ौम भी तैयार है। फ़ौज के साथ क़ौम भी लड़ेगी। फिर से मोदी से कह दूं- आप भी करेंगे, हम मुकाबला करेंगे। आख़िर तक जाएंगे। हम अल्लाह के अलावा किसी और के सामने नहीं झुकते।
मोदी ने अपने भाषण में कहा- 370 को ख़त्म करके खुशहाली लाएंगे। हिटलर ने जब रूस पर अटैक किया था तो कहा था- मैं तुम्हें कम्यूनिज़्म से आज़ाद कर रहा हूं। आरएसएस ने नाज़ी पार्टी से सीखा था कि अगर थोड़े से लोग संगठित हो जाएं और उनका नज़रिया तगड़ा हो वो पूरी क़ौम पर कब्ज़ा कर सकते हैं। जो हरकतें बीजेपी हिंदुस्तान में कर रही है, वही नाज़ी पार्टी ने किया था। जब किसी क़ौम पर तबाही आती है तो उसके नेता पर घमंड छा जाता है। यही हिटलर के साथ हुआ था।
जंग मसले का हल नहीं होता। जंग से एक मसला हल करने जाते हैं तो तीन और पैदा हो जाते हैं। मगर यह नरेंद्र मोदी का मिसकैलकुलेशन है।
पाकिस्तान पूरी तरह तैयार है। हमने फ़ैसला किया है कि अगर इन्होंने कुछ उल्लंघन किया, जिसकी इन्होंने तैयारी भी की है तो हम भी तैयार हैं। और फिर जो जंग होगी, हम पूरी दुनिया को बता दें, उसके लिए आप ज़िम्मेदार होंगे।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठन इसीलिए बने थे कि युद्ध न हों। ये उन सभी का इम्तिहान है। इसके सदस्य क्या सिक्यॉरिटी काउंसिल के 11 प्रस्तावों के पक्ष में खड़े होंगे? आपने कश्मीर के लोगों को जो आत्मनिर्णय का अधिकार दिया था, नरेंद्र मोदी ने उसे और दूसरे प्रस्तावों को उठाकर फेंका है।
हमने यूएन में याचिका डाली है। अंतरराष्ट्रीय अदालत में जाएंगे, दुनिया के हर मंच पर जाएंगे। हमने दुनिया भर में मौजूद पाकिस्तानी और कश्मीरी समुदाय को इकट्ठा किया है। कल लंदन में कश्मीर के लिए ऐतिहासिक संख्या में लोग बाहर निकलेंगे। अगले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा शुरू होगी तो इतने लोग आपको दिखेंगे जितने पहले कभी नहीं देखे होंगे।
जब उधर जो कर्फ़्यू लगाया है, वह हटेगा तो दुनिया को हम बताएंगे कि इस दौरान जो हुआ, उसके लिए आप ही ज़िम्मेदार हैं। एक आदमी ने जो वहां फ़ौजें भेजी हैं, वहां जुल्म के अलावा और क्या किया जा रहा होगा? इसलिए हमारे राजदूत दुनिया भर में सक्रिय हैं।
अल्लाह से उम्मीद करते हैं कि कश्मीर में जो हुआ है, नरेंद्र मोदी ने जो आख़िरी कार्ड खेला है, इसके बाद कश्मीर आज़ादी की ओर जाएगा। मैं जंग में यक़ीन नहीं रखता और मैंने पूरी कोशिश की क़रीबी बढ़ाने की। हिंदुस्तान और पाकिस्तान के हित एक जैसे ही तो हैं। ताल्लुक अच्छे होंगे तो ख़ुशहाली आएगी। क्लाइमेट चेंज और ट्रेड पर मिलकर काम कर सकते हैं। कश्मीर मसले को बातचीत से हल सकते हैं। मगर विचारधारा के कारण इनका तो एक ही लक्ष्य है- पाकिस्तान को सबक सिखाना।
अगर क़ायद-ए-आज़म की सोच न होती तो हमारा मुल्क न होता और हम इसी तरह की रेसिस्ट और फ़ासिस्ट विचारधारा के बीच ग़ुलामी कर रहे होते। आज आज़ाद मुल्क में बैठकर हम क़ायद-ए-आज़म के लिए दुआ करते हैं।
ये मत सोचिए कि कश्मीर पर आपने कोई क़ानून पास कर दिया तो वहां के लोग हाथ खड़े कर देंगे। वे भी सख़्त हो चुके हैं। मौत का डर ख़त्म हो गया है उनसे। जिस तरह से वे निकले हैं, वैसे निडर क़ौम निकलती है जो ज़िंदगी से ऊपर क़ौम की ग़ैरत का ख़्याल रखती है। नरेंद्र मोदी आप इस क़ौम को ग़ुलाम नहीं बना सकेंगे। आपकी ईंट का जवाब पत्थर से देंगे। वक़्त आ गया है जब हम आपको सबक सिखाएंगे।
उत्तर कोरिया ने समुद्र में दो मिसाइलें एक साथ दागीं हैं। बीते कुछ सप्ताह में उत्तर कोरिया की ओर से दागी गई ये पांचवीं मिसाइल है।
दक्षिण कोरिया की सेना का कहना है कि ये कम दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइल हैं।
अगर इस बात की पुष्टि होती है तो ये परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन होगा।
इस परीक्षण के कुछ देर पहले ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्हें उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की तरफ़ से एक बेहद ख़ूबसूरत ख़त मिला है।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन, अमरीका-दक्षिण कोरिया के मौजूदा संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर खुश नहीं थे।
ये दोनों मिसाइलें दक्षिण हैंमयोंग प्रांत के पूर्वी शहर हमहुंग के पास से दागी गईं और फिर यह पूर्वी कोरियाई प्रायद्वीप के जापान सागर में गिरीं।
इन दोनों मिसाइलों को स्थानीय समयानुसार 05 बजकर 34 मिनट पर और 05 बजकर 50 मिनट पर दागा गया। इन दोनों ने क़रीब चार सौ किलोमीटर दूरी तय की।
दक्षिण कोरियाई सेना ने एक बयान में कहा है कि ये मिसाइल मैक 6.1 की तुलना में ज़्यादा तेज़ गति के साथ अधिकतम 48 किलोमीटर की ऊंचाई तक गईं।
जून में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम के बीच मुलाक़ात हुई थी जिसमें परमाणु निरस्त्रीकरण समझौते को दोबारा से शुरू करने की बात हुई थी लेकिन उसके बाद से ही उत्तर कोरिया लगातार एक के बाद एक मिसाइल और रॉकेट का परीक्षण कर रहा है।
इस मिसाइल लॉन्च के कुछ वक़्त पहले ही अमरीकी राष्ट्रपति ने एक पत्र का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि किम ने उन्हें एक बेहद ख़ूबसूरत चिट्ठी लिखी है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से मुख़ातिब हुए ट्रंप ने कहा कि यह बहुत सकारात्मक चिट्ठी थी।
उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि हम एक बार और मिलेंगे। उन्होंने वाक़ई में तीन पेज की एक ख़ूबसूरत चिट्ठी लिखी है ... मतलब मेरा कहना है कि यह शुरू से लेकर अंत तक ख़ूबसूरत है - एक बेहद ख़ूबसूरत चिट्ठी।''
उत्तर कोरिया ने अमरीका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर नाराज़गी जताई है।
हालांकि मुख्य सैन्य अभ्यास 11 अगस्त से शुरू होगा लेकिन धीरे-धीरे महत्वपूर्ण तैयारियां शुरू हो गई हैं।
यह संयुक्त सैन्य अभ्यास मुख्य रूप से कंप्यूटर-सिम्युलेटेड है।
यह सैन्य अभ्यास अमरीका और दक्षिण कोरिया के बीच हुए पिछले अभ्यासों की तुलना में कम महत्वपूर्ण है। पर दूसरी ओर उत्तर कोरिया इसे उकसाने वाली कार्रवाई मान रहा है।
भारत के कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के ख़िलाफ पाकिस्तान लगातार आवाज़ उठा रहा है और भारत के इस कदम की निंदा कर रहा है।
पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी चीन पहुंचे, जहां उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की।
उधर लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने से चीन नाराज़ है और अपनी नाराज़गी को वो भारत के सामने दर्ज भी करा चुका है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद कहा है कि चीन ने माना है कि भारत के आक्रामक रुख ने पूरे क्षेत्र के लोगों को ख़तरे में डाल दिया है।
कुरैशी ने इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लगातार तीन ट्वीट किए।
शाह महमूद कुरैशी ने पहले ट्वीट में लिखा, "आज मैंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी और अन्य अधिकारियों के साथ अहम और निर्णायक बैठक की। पाकिस्तान और चीन के बीच भाईचारे का रिश्ता है। चीन ने आज पाकिस्तान को सहयोग और प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया।''
वहीं दूसरे ट्वीट में कुरैशी ने कहा कि चीन के विदेश मंत्री ने माना कि भारत के आक्रामक रुख ने कश्मीर के लोग को परेशान और बेआवाज़ कर दिया है। "साथ ही पूरे क्षेत्र के लोगों को ख़तरे में डाल दिया है।''
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि "पाकिस्तान शांति और स्थिरता लाना चाहता है, जिसका चीन ने समर्थन किया है और हम मिलकर कश्मीर के लोगों की आवाज़ को दुनिया के सामने उठाएंगे।''
इससे पहले, चीन ने एक बयान जारी कर कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने की अपील की थी।
चीन ने ये भी कहा था कि दोनों ही देशों को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए जो एकतरफा रूप से यथास्थिति को बदल देंगे।
चीन के बयान की प्रतिक्रिया में भारत ने कहा था कि भारत दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दख़ल नहीं देता है और दूसरे देशों से भी ऐसी ही उम्मीद करता है।
उधर भारत ने पाकिस्तान पर दुनिया को गुमराह करने का आरोप लगाया है और पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप ना करने के लिए कहा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान को कश्मीर की विशेष स्थिति के बारे में भारत के निर्णय के तथ्य को पहचानना चाहिए।
पाकिस्तान ने कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने के निर्णय के बाद भारत के साथ अपने राजनयिक संबंधों में कटौती की घोषणा की है और भारतीय राजदूत को वापस भेजने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच व्यापार को निलंबित करने का फैसला किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान भारत के इस आंतरिक मुद्दे को दुनिया के सामने द्विपक्षीय संबंधों की चिंताजनक तस्वीर पेश करने के लिए एकतरफा कदम उठा रहा है लेकिन वो हर जगह विफल रहा है।
जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ती तल्ख़ी के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से इस मुद्दे पर 'अधिकतम संयम' दिखाने की अपील की है।
महासचिव गुटेरेस ने इस मुद्दे के समाधान के लिए साल 1972 में हुए 'शिमला समझौते' की याद भी दिलाई है। भारत भी जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का समाधान शिमला समझौते के तहत तलाशने की हिमायत करता रहा है।
भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को ख़त्म कर दिया है।
इस पर पाकिस्तान ने गहरी आपत्ति ज़ाहिर करते हुए भारत के कूटनीतिक स्तर को कम करने के अलावा दो पक्षीय व्यापार को भी निलंबित कर दिया है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान एलान कर चुके हैं कि उनका देश इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद समेत विभिन्न मंचों पर उठाएगा। वहीं भारत ने इसे अपना आंतरिक मामला बताते हुए विरोध को ख़ारिज कर दिया है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने उनकी ओर से एक बयान जारी किया है।
इस बयान में कहा गया है, "इस क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र की स्थिति का निर्धारण संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों से होता है।''
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ओर से जारी बयान में बताया गया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच '1972 में हुए (शिमला) समझौते' का ज़िक्र किया।
शिमला समझौते में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर 'अंतिम स्थिति का निर्धारण संयुक्त राष्ट्र के चार्टर को ध्यान में रखते हुए शांतिपूर्ण तरीक़े से किया जाएगा।'
हालांकि, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि उनका देश 'शिमला समझौते की क़ानूनी वैधता को परखेगा।'
भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1971 के युद्ध के बाद साल 1972 में शिमला में समझौता हुआ था। उस समय इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री थीं और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फ़िक़ार अली भुट्टो थे।
चीन और तुर्की ने हालात पर चिंता जताई है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भारत की ओर से कश्मीर में लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़ी रिपोर्टों पर चिंता ज़ाहिर की है। उनकी चिंता है कि इससे 'क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति ख़राब हो सकती है।'
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सभी पक्षों से कहा है कि वो ऐसे क़दम नहीं उठाएं जिससे जम्मू-कश्मीर की स्थिति (स्टेटस) पर प्रभाव पड़े।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि उनका देश शिमला समझौते की क़ानूनी वैधता को परखेगा।
भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता साल 1972 में हुआ था। उस समय इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री थीं और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फ़िक़ार अली भुट्टो थे।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, क़ुरैशी ने ये भी कहा कि भारत के साथ दोतरफ़ा समझौतों की समीक्षा की जाएगी। समीक्षा का काम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की बनाई विशेष कमेटी करेगी। हालांकि, उन्होंने इस बात का ब्योरा नहीं दिया कि पाकिस्तान किन समझौतों की समीक्षा करेगा।
शाह महमूद कुरैशी चीन के लिए रवाना हो गए हैं जहां वो अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाक़ात करेंगे।
भारत ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को ख़त्म कर दिया है। पाकिस्तान ने इसके विरोध में भारत के साथ राजनयिक संबधों को कमतर बनाने और व्यापारिक गतिविधियों पर रोक लगाने समेत गई फ़ैसले किए हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस को भी निलंबित कर दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फ़ैसले पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इस मसले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप करने की अपील की है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा है, ''पूरी दुनिया इंतज़ार कर रही है कि भारत के क़ब़्जे वाले कश्मीर से कर्फ़्यू हटे और पता चले कि उत्पीड़ित कश्मीरियों के साथ क्या हुआ है। क्या बीजेपी सरकार ये सोचती है कि कश्मीरियों के ख़िलाफ़ भारी सुरक्षा बलों की तैनाती से आज़ादी का आंदोलन थम जाएगा? इससे आंदोलन और ज़ोर पकड़ेगा।''
दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा है, "ये स्वाभाविक है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत के क़ब्ज़े वाले कश्मीर में नरसंहार का गवाह बनेगा। सवाल ये है कि क्या हम एक और फासीवाद का गवाह बनेंगे, जो कि इस बार बीजेपी सरकार की शक्ल में है या फिर दुनिया इसे रोकने का नैतिक साहस दिखाएगी।''
इससे पहले दिन में पाकिस्तान ने समझौता एक्सप्रेस ट्रेन को एकतरफ़ा बंद करने की घोषणा की थी।
बुधवार को पाकिस्तान ने भारत के साथ अपने राजनयिक रिश्ते सीमित करने और व्यापारिक रिश्ते तोड़ने समेत कई घोषणाएं की थीं।
भारत ने जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन करते हुए इसे केंद्र प्रशासित इलाक़ा बना दिया है।
अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम के दो अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए हैं। इसके साथ ही सात दशक पुराना कश्मीर का मसला एक बार फिर पूरी दुनिया में चर्चा के केंद्र में आ गया है।
देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार तीन से दस नाइजीरियाई मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों से पीड़ित हैं। देश आत्महत्या के लिए भी दुनिया में 15 वें स्थान पर है। क्या बुरा है, संसाधनों की जरूरत वाले लोगों की मदद करने के लिए दुर्लभ हैं।
नाइजीरिया में केवल आठ सार्वजनिक मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल हैं, और उन सुविधाओं में से केवल एक पूर्वोत्तर नाइजीरिया में है जहां लोग अभी भी सरकारी बलों और बोको हराम सशस्त्र समूह के बीच युद्ध द्वारा भड़काए गए आघात से पीड़ित हैं।
चूंकि पारंपरिक सेवाओं में कमी है, इसलिए कई मानसिक स्वास्थ्य अधिवक्ताओं ने संकट से निपटने के लिए अपरंपरागत दृष्टिकोण अपनाया है। गैर-लाभकारी एनईईएम फाउंडेशन केके, या मोटराइज्ड ट्राइसिकल टैक्सियों के माध्यम से परामर्श सेवाएं प्रदान करता है, जबकि मेंटली अवेयर नाइजीरिया इनिशिएटिव (MANI) के साथ परामर्शदाता लोगों तक पहुंचने के लिए व्हाट्सएप और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं।









