अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क के इकॉनमी क्लब में 12 नवंबर को जलवायु परिवर्तन पर बोलते हुए भारत, रूस और चीन को निशाने पर लिया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "मैं पूरी पृथ्वी पर साफ़ हवा चाहता हूं, साफ़ हवा के साथ साफ़ पानी भी चाहता हूं। लोग मुझसे सवाल पूछते हैं कि आप अपने हिस्से के लिए क्या कर रहे हैं। मुझे इससे एक छोटी सी समस्या है। हमारे पास ज़मीन का छोटा सा टुकड़ा है - यानी हमारा अमरीका। इसकी तुलना आप दूसरे देशों से करें, मसलन चीन, भारत और रूस से करें तो कई देशों की तरह ये भी कुछ नहीं कर रहे हैं।''
ट्रंप ने ये भी कहा, "ये लोग अपनी हवा को साफ़ रखने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं, ये पूरी पृथ्वी को साफ़ रखने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। ये अपना कूड़ा कचरा समुद्र में डाल रहे हैं और वह गंदगी तैरती हुई लॉस एंजलिस तक पहुंच रही है। क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि ये गंदगी लॉस एंजलिस तक पहुंच रही है? आप यह देख रहे हैं लेकिन कोई इस पर बात नहीं करना चाहता।''
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप किस गंदगी की बात कर रहे हैं और क्या वो वाक़ई भारत, चीन और रूस से आ रही है?
दरअसल ट्रंप जिस गंदगी की बात कर रहे हैं, उसे दुनिया ग्रेट पैसिफ़िक गारबेज पैच के नाम से जानती है। यह कचरा अमरीका के कैलिफ़ोर्निया से लेकर हवाई द्वीप समूह के बीच फैला हुआ है।
नेचर पत्रिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, गंदगी से भरा यह इलाक़ा छह लाख वर्ग मील में फैला हुआ है जिसका क्षेत्रफल अमरीकी राज्य टेक्सस से दोगुने में फैला हुआ है।
दुनिया को इसका पहली बार पता 1990 के दशक में चला था। ओशन क्लीनअप फ़ाउंडेशन के मुताबिक़, यहां पूरे पैसिफ़िक रिम से प्लास्टिक का कचरा पहुंचता है। यानी प्रशांत महासागर के इर्द-गिर्द बसे एशिया, उत्तरी अमरीका और लैटिन अमरीकी देशों से।
वैसे यहां यह जानना दिलचस्प है कि ये पूरा इलाका सॉलिड प्लास्टिक से भरा नहीं है। बल्कि यहां मोटे तौर पर 1.8 खरब प्लास्टिक के टुकड़े मौजूद हैं जिनका वजन क़रीब 88 हज़ार टन माना जा रहा है यानी 500 जंबो जेट्स के वज़न के बराबर।
इस गंदगी को साफ़ करने के लिए अभी तक किसी देश की सरकार सामने नहीं आई है, हालांकि ओशन क्लीनअप फ़ाउंडेशन कुछ समूहों के साथ ये काम करने की कोशिश कर रहा है।
पैसिफ़िक रिम के चारों ओर बसे देशों से निकला कचरा इस क्षेत्र में फैलकर जमा हो जाता है। इसमें प्लास्टिक की वे बेकार चीज़ें होती हैं जिन्हें यूं ही फेंक दिया जाता है।
नदियों के रास्ते ये समंदर में पहुंच जाती हैं। यानी ग्रेट पैसिफ़िक गारबेज पैच में आपको अलग-अलग देशों से बहकर आई प्लास्टिक की चीज़ें मिल सकती हैं जिनमें से कुछ अमरीका के ही लॉस एंजलिस की हो सकती हैं।
यूएस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ यहां सबसे ज़्यादा गंदगी चीन और दूसरे देशों से पहुंचता है। ऐसे में एशिया के दूसरे नंबर के देश होने के कारण भारत की भूमिका पर भी सवाल उठेंगे।
लेकिन 2015 में साइंस एडवांसेज़ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार सबसे ज़्यादा प्लास्टिक का कचरा एशिया से ही निकलता है। इनमें चीन, इंडोनेशिया, फ़िलिपींस, वियतनाम, श्रीलंका और थाईलैंड सबसे ज़्यादा गंदगी फैलाने वाले छह शीर्ष देश हैं।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रविवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके बताया कि चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के प्रमुख अबु बकर अल-बग़दादी ने सीरिया में अमरीका के स्पेशल फ़ोर्स की एक रेड के दौरान ख़ुद को उड़ा लिया।
ये ऑपरेशन उत्तर-पश्चिम सीरिया के इदलिब इलाक़े में हुआ।
इस ख़बर पर दुनिया के अलग-अलग देशों की लगातार प्रतिक्रिया आ रही है।
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने इस्लामिक स्टेट के भगौड़े नेता अबु बकर अल बग़दादी के मारे जाने को एक अहम मोड़ बताया है।
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि बग़दादी का मारा जाना आतंकवाद के ख़िलाफ़ हमारी साझा लड़ाई में एक टर्निंग पॉइंट है। तुर्की आगे भी आतंकवाद के ख़िलाफ़ कोशिशों को सहयोग देगा जैसा कि हमेशा करता आया है।
उन्होंने कहा कि तुर्की ने आईएस, पीकेके/वाईपीजी और दूसरे चरमपंथी संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में बड़ी क़ीमत चुकाई है।
तुर्की के विदेश मंत्री ने पुष्टि की है कि अमरीकी अभियान के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच जानकारी साझा की गई थी।
तुर्की से उलट रूस के रक्षा मंत्रालय ने अमरीका की कार्रवाई के दावे पर शक जताया है।
रूस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकफ़ ने कहा कि उन्हें इस बात की पुख़्ता जानकारी नहीं मिली है कि अमरीका ने इस्लामिक स्टेट के पूर्व नेता बग़दादी को एक बार फिर मारने के लिए इदलिब में ऑपरेशन चलाया है।
उन्होंने कहा कि जिस तेज़ी से इस अभियान में शामिल होने वाले देशों की संख्या बढ़ रही है और सब विरोधाभासी जानकारी दे रहे हैं, उससे सवाल भी उठ रहे हैं और शक भी पैदा हो रहा है कि ये अभियान कितना विश्वसनीय है, और ख़ासकर कितना सफल हुआ।
पहले ख़बरें आ रही थीं कि रूस ने भी इस अभियान में भूमिका निभाई है लेकिन रूस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कोनाशेनकफ़ ने इसका खंडन किया।
उन्होंने कहा कि जिस जगह पर बग़दादी के मारे जाने की ख़बर आ रही है वो इलाक़ा इस्लामिक स्टेट के दुश्मन और जिहादी समूह हयात तहरीर अल-शाम का है तो ऐसे में इस्लामिक स्टेट के पूर्व नेता का वहां पर होना भी अमरीका से सबूत की मांग करता है।
ईरान के सूचना मंत्री मोहम्मद जावेद अज़ारी ने अमरीकी ऑपरेशन पर ट्वीट किया कि ये कोई बड़ी बात नहीं, आपने अपने ही पैदा किए को मारा है।
ईरान के एक न्यूज़ चैनल ईरीन ने भी रूस की तरह ही सवाल उठाया है कि बग़दादी सीरिया के इदलिब में छुपा था जो कि इस्लामिक स्टेट के दुश्मन फोर्स का इलाक़ा है। साथ ही कहा कि ट्रंप बग़दादी की मौत को 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में इस्तेमाल करेंगे। चैनल ने 2016 चुनावों में दिए गए ट्रंप के एक बयान की याद दिलाई जिसमें उन्होंने ख़ुद कहा था कि अमरीकी सरकार ने इस्लामिक स्टेट को बनाया है।
ईरान के अधिकारी पहले भी इस्लामिक स्टेट के लिए अमरीका को ज़िम्मेदार ठहराते रहे हैं।
इराक़ के सरकारी टीवी ने दावा किया है कि इराक़ ने अमरीका के नेतृत्व वाली टीम को ख़ुफ़िया जानकारी दी जिससे इस्लामिक स्टेट के मुखिया अबु बकर अल बग़दादी तक पहुंचने में मदद मिली।
इससे पहले भी इराक़ न्यूज़ एजेंसी ने एक खुफ़िया अधिकारी के हवाले से बग़दादी की मौत की पुष्टि की थी।
वहीं, सीरिया के सरकारी मीडिया से काफ़ी तीखी प्रतिक्रिया आई।
सरकारी न्यूज़ एजेंसी सना ने कहा कि कई सालों तक बग़दादी को सीरिया और इराक़ में आतंकवाद के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के बाद अमरीका के राष्ट्रपति ने आज बग़दादी के मारे जाने की घोषणा की।
अल जज़ीरा न्यूज़ चैनल ने इस न्यूज़ की कवरेज में इस बात पर ख़ासा ज़ोर दिया कि इस अभियान को तुर्की की इजाज़त लिए बिना अंजाम दिया गया और बग़दादी को अमरीकी सैन्यबल ने नहीं मारा, बल्कि बग़दादी ने ख़ुद को मारा।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि अगर बीजेपी सरकार में हिम्मत है तो करतारपुर कॉरिडोर को शुरू होने से रोक दे। जिओ टीवी से क़ुरैशी ने कहा कि रोक सको तो रोक लो।
उन्होंने कहा कि भारत चाहे या न चाहे करतारपुर कॉरिडोर खुलने जा रहा है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि भारत के पंजाब में करतारपुर कॉरिडोर खुलने से लोगों में ख़ुशी है और बीजेपी सरकार में हिम्मत नहीं है कि वो इसे रोक दे।
भारत में ख़ुफ़िया एजेंसियों ने करतारपुर को लेकर चिंता जताई है कि पाकिस्तान सिख धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर सकता है।
महमूद क़ुरैशी ने ये भी दावा किया कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।
अगले महीने नौ नवंबर को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान इसका उद्घाटन करने वाले हैं। क़ुरैशी ने कहा, ''भारत के प्रधानमंत्री के लिए स्पष्ट संदेश है कि अगर आप करतारपुर को सच बनने से रोक सकते हो तो रोक लो।''
क़ुरैशी ने कहा, ''अगर मनमोहन सिंह एक आम आदमी की तरह इस समारोह में शामिल होना चाहते हैं तब भी उनका स्वागत है। सिख श्रद्धालुओं को यहां उच्चतम गुणवत्ता वाली सुविधाएं मिलेंगी।''
अमरीकी उप-राष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा है कि तुर्की उत्तरी सीरिया में अपना सैन्य अभियान रोकने पर राज़ी हो गया है ताकि कुर्द नेतृत्व वाले बल पीछे हट सकें।
यह घोषणा अंकारा में पेंस और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के बीच मुलाक़ात के बाद की गई है।
सभी सैन्य अभियानों को अगले 5 दिनों तक के लिए रोक दिया गया है और अमरीका कुर्द बलों को 'व्यवस्थित तरीक़े से वापसी' कराने में मदद करेगा। अमरीका सीमा के उस इलाक़े से कुर्द बलों को हटा रहा है जहां तुर्की 'सेफ़ ज़ोन' बनाना चाहता है।
तुर्की ने पिछले सप्ताह इस अभियान की शुरुआत की थी।
इसका मक़सद कुर्द बलों को सीमा से पीछे धकेलकर, सीरियाई शरणार्थियों के लिए एक 'सेफ़ ज़ोन' बनाना है।
पेंस की घोषणा से पहले अमरीकी राष्ट्रपति ने अर्दोआन का शुक्रिया अदा करते हुए ट्वीट किया कि 'लाखों जानें बच जाएंगी।'
पेंस ने अपनी घोषणा के दौरान डोनल्ड ट्रंप के 'मज़बूत नेतृत्व' का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा, "वह संघर्ष विराम चाहते थे। वह हिंसा रोकना चाहते थे।''
तुर्की के विदेश मंत्री मेवलूत चावूशॉलू ने पत्रकारों से कहा कि एसडीएफ़ बॉर्डर ज़ोन से हट जाता है तो तुर्की का हमला स्थाई रूप से रोक दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, "हम ऑपरेशन स्थगित कर रहे हैं, समाप्त नहीं कर रहे हैं। हम तभी ऑपरेशन ख़त्म करेंगे जब कुर्द लड़ाके पूरी तरह क्षेत्र से नहीं हट जाते।''
अमरीकी उप-राष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि जब तुर्की सैन्य अभियान समाप्त कर देगा। तब उस पर से आर्थिक प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे और इस दौरान अधिक प्रतिबंध नहीं लगाए जाएंगे।
अमरीका और तुर्की के बीच इस बैठक में एसडीएफ़ का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था।
इससे पहले बीबीसी को पता चला था कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का ख़त 'कूड़ेदान में फेंक दिया था।'
सीरिया से अपनी सेना वापस बुलाने के बाद नौ अक्तूबर को लिखे गए इस ख़त में ट्रंप ने अर्दोआन से कहा था, "बेहद सख़्त इंसान मत बनिएगा. बेवकूफ़ी मत करिएगा।''
राष्ट्रपति ट्रंप तुर्की से मांग कर रहे थे कि वह उत्तरी सीरिया में कुर्द बलों के ख़िलाफ़ सैन्य बल का प्रयोग न करें लेकिन अर्दोआन ने इस मांग को नज़रअंदाज़ कर दिया।
इस समय अमरीकी उप-राष्ट्रपति माइक पेंस अंकारा में हैं और युद्ध विराम की कोशिश कर रहे हैं।
उत्तरी सीरिया से सेना को वापस बुलाने के बाद अमरीका की आलोचना हो रही है। आलोचक कह रहे हैं कि इसने तुर्की को सैन्य हमला करने के लिए हरी झंडी दिखा दी।
सीरिया में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई में कुर्द बलों के नेतृत्व वाला सीरियन डेमोक्रेडिक फ़ोर्सेज़ (एसडीएफ़) अमरीका का साथी रहा है।
हालांकि, यह भी डर बना हुआ है कि इस अस्थिरता के कारण उत्तरी सीरिया में वापस जिहादी समूहों का उदय हो सकता है।
एसडीएफ़ में कुर्द लड़ाकों के बल पीपल्स प्रॉटेक्शन यूनिट्स (वाईपीजी) का प्रभुत्व है। इन्हें तुर्की आतंकी मानता है। तुर्की का मानना है कि यह कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) का ही विस्तार है जो उसके क्षेत्र में कुर्दों के स्वायत्त राज्य के लिए लड़ते रहे हैं।
राष्ट्रपति अर्दोआन को ट्रंप ने ख़त में लिखा था, "चलिए एक अच्छे सौदे पर काम करें। आप हज़ारों लोगों के क़त्लेआम के लिए ज़िम्मेदार नहीं बनना चाहोगे, और मैं भी तुर्की की अर्थव्यवस्था को तबाह करने का ज़िम्मेदार नहीं बनना चाहता। और मैं करूंगा।''
"अगर आप इसे सही और मानवीय तरीक़े से करते हैं तो इतिहास में आपकी प्रशंसा की जाएगी। अगर ऐसी अच्छी चीज़ नहीं होती है तो आपको हमेशा एक शैतान के रूप में देखा जाएगा।''
इस पर तुर्की के राष्ट्रपति के सूत्रों ने बीबीसी तुर्की को बताया, "राष्ट्रपति अर्दोआन को यह ख़त मिला था जिसे उन्होंने सिरे से ख़ारिज करते हुए कूड़ेदान में फेंक दिया।''
भारत और बांग्लादेश की सीमा पर गुरुवार को हुई एक झड़प में सीमा सुरक्षा बल के एक जवान की मौत हो गई है।
बीएसएफ़ ने एक बयान जारी कर कहा कि बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश के साथ फ़्लैग मीटिंग के दौरान हुई इस गोलीबारी में हेड कॉन्स्टेबल विजय भान सिंह की मौत हो गई।
दूसरी तरफ़, बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश के राजशाही ज़िले के कमांडिंग ऑफ़िसर लेफ़्टिनेंट कर्नल फ़िरदौस महमूद ने बीबीसी बांग्ला से बातचीत में ये दावा किया कि बी एस एफ़ ने बांग्लादेश की सीमा में घुसकर पहले बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश पर फ़ायरिंग की और इसके बाद ही उनकी तरफ़ से जवाबी कार्रवाई की गई।
उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों की फ़्लैग मीटिंग थी। उन्होंने बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश की तरफ़ से किसी के हताहत होने की जानकारी से इनकार किया।
उधर, बीएसएफ़ का ये कहना है कि हालात उस समय नियंत्रण से बाहर हो गए जब उनकी तरफ़ से कुछ भारतीय मछुआरों को गिरफ़्तार करने के लिए बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश से गुरुवार को संपर्क किया गया।
ये मछुआरे मुर्शिदाबाद ज़िले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर पद्मा नदी में मछली पकड़ रहे थे।
बीएसएफ़ के एक अधिकारी बी एस गुलेरिया ने कहा, "शाम के पाँच बजे बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश के साथ एक फ़्लैग मीटिंग हुई। मीटिंग के बाद हिरासत में लिए गए मछुआरों ने वहां से आने के लिए इनकार कर दिया और फिर बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश के सैनिकों ने हमारे जवानों को चारों तरफ़ से घेर लिया।''
बीएस गुलेरिया ने बताया, "हालात बिगड़ने पर जब बीएसएफ़ के जवान स्पीडबोट की तरफ़ लौट रहे थे तो बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश ने अचानक गोली चलानी शुरू कर दी गई।''
हालांकि लेफ़्टिनेंट कर्नल फ़िरदौस महमूद ने बांग्लादेश सीमा के भीतर किसी बीएसएफ़ जवान की मौत से इनकार किया है।
हेड कॉन्स्टेबल विजय भान सिंह की मौत मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही हो गई थी।
घटना के बाद बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश और सीमा सुरक्षा बल के आला अधिकारियों के बीच फ़ोन पर बात हुई है।
इस सिलसिले में बी एस एफ़ के रिटायर्ड डीआईजी सलिल कुमार मित्र ने बीबीसी बांग्ला को बताया, "ये एक अभूतपूर्व घटना है। किसी फ़्लैग मीटिंग के दौरान अतीत में पहले कभी भी गोली चलने की घटना नहीं हुई थी।''
उन्होंने कहा, ''फ्लैग मीटिंग के दौरान दोनों पक्ष किसी मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए बातचीत करते हैं।''
ये स्पष्ट नहीं है कि बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश ने गोली क्यों चलाई?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने सीएनएन को दिए इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड इसलिए पसंद हैं क्योंकि वो युद्ध नहीं चाहते हैं।
ईरान और सऊदी अरब में बातचीत शुरू करवाने में लगे इमरान ख़ान से अमरीकी टीवी चैनल सीएनएन ने पूछा कि इसमें क्या कोई प्रगति हो पाई है तो पाकिस्तानी पीएम ने कहा कि अभी वो इसका डिटेल नहीं बताना चाहते हैं।
पीएम ख़ान ने कहा कि जब तक दोनों पक्षों से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आ जाती है तब तक वो कोई जानकारी साझा नहीं करेंगे। ट्रंप पर पूछे गए सवाल के जवाब में इमरान ख़ान ने कहा, ''लोग राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना करते हैं लेकिन मैं उन्हें पसंद करता हूं क्योंकि वो युद्ध में भरोसा नहीं करते हैं।''
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने उत्तरी सीरिया में युद्ध विराम के लिए अमरीका की अपील को ख़ारिज कर दिया है।
तुर्की का कहना है कि अमरीका से लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद कुर्द बलों के ख़िलाफ़ वो अपना सैन्य हमला जारी रखेगा।
उनकी ये टिप्पणी उस समय आई है जब अमरीकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस और विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो तुर्की का दौरा करने वाले हैं।
उधर फ्रांस के प्रधानमंत्री ने संसद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उत्तर सीरिया से अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाने के फ़ैसले और तुर्की की सीरिया पर कार्रवाई के बाद इस्लामिक स्टेट की तरफ़ से नए ख़तरों के पैदा होने की आशंका जताई है।
तुर्की के लड़ाकू विमानों ने उत्तरी सीरिया के कुछ हिस्सों पर बम बरसाए हैं।
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा कि उनकी सेना कुर्द लड़ाकों को निशाना बनाकर एक 'सेफ़-ज़ोन' तैयार कर रही है।
कुर्दों के नेतृत्व वाले सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्स का कहना है कि इस हमले में कम से कम दो नागरिक मारे गए हैं।
जबकि तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा कि अंकारा द्वारा पिछले दिन अपना अभियान शुरू करने के बाद से 109 ''आतंकवादियों'' मारे गए।
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने जोर देकर कहा है कि ऑपरेशन कुर्द लोगों के खिलाफ नहीं है, केवल ''आतंकवादियों'' के खिलाफ हैं।
तुर्की के इस हमले से कुर्दो के नेतृत्व वाले अमरीकी गठबंधन के साथ झगड़ा बढ़ सकता है।
गठबंधन ने कहा है कि सीमापार तुर्की की किसी भी कार्रवाई का मुंहतोड़ जबाव दिया जाएगा।
सीरिया के कुर्द संगठन ने अमरीका और इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ बने गठबंधन से इस इलाक़े में नो फ़्लाई ज़ोन बनाने को कहा है ताकि "निर्दोष लोगों पर हमले" को रोका जा सके।
सीरिया में इस्लामिक स्टेट को हराने में कुर्द लड़ाके अमरीका के प्रमुख सहयोगी रहे हैं।
कुर्द लड़ाके अपने नियंत्रण वाले इलाक़ों मे बनी जेलों में बंद हज़ारों इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों और उनके रिश्तेदारों की निगरानी करते हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि अब से जेलों में बंद हज़ारों इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों की जिम्मेदारी तुर्की की है।
तुर्की ने उत्तरपूर्वी सीरिया में जमीनी हमले शुरू कर दिए हैं। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उत्तरी सीरिया से अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाने के विवादास्पद फैसले के कुछ दिन बाद ही ये हमला हुआ है।
इस फ़ैसले से पहले तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने ट्रंप को फ़ोन किया था। लेकिन अमरीका और बाहर इस फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है।
एर्दोगन ने ट्विटर पर कहा है, "ये अभियान हमारे दक्षिणी सीमा पर चरमपंथी कॉरिडोर बनाए जाने से रोकने और इस इलाक़े में शांति स्थापित करने के लिए शुरू किया गया है।''
उन्होंने ये भी कहा है, "ये सीरिया की क्षेत्रीय संप्रभुता को बनाए रखेगा और आतंकवादियों से स्थानीय आबादी को आज़ाद करेगा।''
कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि टैंक उनके गांव तक पहुंच गए हैं।
तुर्की कुर्द लड़ाकों को हटाकर वहां सेफ़ ज़ोन बनाना चाहता है। तुर्की कुर्द लड़ाकों को आतंकवादी मानता है।
फिलहाल तुर्की में क़रीब 36 लाख सीरियाई शरणार्थी रह रहे हैं।
ख़बरें हैं कि रास अल आइन और तल अबियाद कस्बों से लोग पलायन करने लगे हैं, जहां कई हवाई हमले किए गए।
एसडीएफ़ के अनुसार, इन हमलों में दो नागरिक मारे गए हैं और रास अल आइन के पश्चिमी हिस्से में मिशराफ़ गांव में दो अन्य लोग घायल हुए हैं।
कई देशों ने इस हमले पर चिंता ज़ाहिर की है। ब्रिटेन और फ्रांस इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की योजना बना रहे हैं। जबकि यूरोपीय संघ के अध्यक्ष ने सैन्य अभियान रोकने के लिए कहा है।
इस बीच ट्रंप के क़रीबी अमरीकी सीनेटर लिंड्से ग्राहम ने कहा है कि वो कांग्रेस में इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि एर्दोगन को इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़े।
उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने बेशर्मी से अपने कुर्द सहयोगियों को अकेला छोड़ दिया है।
ट्रंप ने एक बयान में कहा है कि संदिग्ध इस्लामिक स्टेट लड़ाके जेल में बने रहें और इस्लामिक स्टेट फिर से संगठित न हो इसके लिए तुर्की ज़िम्मेदार होगा।
इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई में कुर्द संगठनों ने अपने 11,000 लड़ाके खोए हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान चीन के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरे में बीजिंग में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि वो चीन के राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग की नीतियों को अपनाना चाहते हैं।
पीएम ख़ान ने कहा कि जिस तरह से राष्ट्रपति जिनपिंग ने भ्रष्ट लोगों को जेल में डाला था वैसे ही वो 500 भ्रष्ट लोगों को पाकिस्तान की जेल में डालना चाहते हैं।
चाइना काउंसिल फोर प्रमोशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में बोलते हुए पीएम ख़ान ने कहा कि उन्होंने चीन से सीखा है कि देश में भ्रष्टाचार से कैसे निपटना है।
पीएम ख़ान ने कहा, ''शी जिनपिंग की पहचान भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सख़्त अभियान चलाने वाले राष्ट्रपति की है। मैंने सुना है कि पिछले पाँच सालों में 400 मंत्रियों को चीन में भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहरा जेल में डाला गया।''
इमरान ख़ान राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हवाला दे रहे थे। इस अभियान की शुरुआत शी जिनपिंग ने 2012 में की थी। कहा जाता है कि इसके तहत लाखों लोगों के ख़िलाफ़ चीन में भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई हुई थी।
इमरान ख़ान ने काउंसिल को संबोधित करते हुए कहा, ''मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रपति जिनपिंग की तरह ही 500 भ्रष्ट लोगों को पाकिस्तान की जेल में बंद कर पाऊंगा। दुर्भाग्य से पाकिस्तान में यह प्रक्रिया काफ़ी जटिल है।''
इमरान ख़ान ने कहा कि देश में निवेश की राह में सबसे बड़ी बाधा भ्रष्टाचार है।
पीएम ख़ान ने कहा कि चीन ने जिस तरह से करोड़ों लोगों को ग़रीबी से बाहर निकाला है उसे पाकिस्तान को सीखने की ज़रूरत है। पाकिस्तानी पीएम ने कहा कि पिछले 30 सालों में चीन ने 70 करोड़ लोगों को ग़रीबी से बाहर निकाला है।
उन्होंने कहा कि ऐसा मानवीय इतिहास में कभी नहीं हुआ था।
इमरान ख़ान पीएम बनने के बाद तीसरी बार चीन के दौरे पर गए हैं।
भारत ने कश्मीर को लेकर चीन के राजदूत की ओर से पाकिस्तान में दिए गए विवादास्पद बयान पर विरोध दर्ज कराया है।
पाकिस्तान में चीन के राजदूत ने कहा था कि कश्मीरियों के बुनियादी अधिकार दिलाने में मदद के लिए चीन काम कर रहा है।
भारत ने चीन से सफ़ाई मांगी है। भारत को लगता है कि जम्मू-कश्मीर पर चीन अपनी घोषित नीति से अलग हट रहा है।
शुक्रवार को इस्लामाबाद में चीनी राजदूत याओ जिंग ने कहा कि 'कश्मीरियों को उनके बुनियादी अधिकार और इंसाफ़ दिलाने में मदद के लिए भी हम काम कर रहे हैं।'
उन्होंने कहा, "कश्मीर के मुद्दे का तार्किक हल होना चाहिए और चीन इलाक़ा की शांति और स्थिरता के लिए पाकिस्तान के साथ खड़ा है।''
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11-12 अक्टूबर को भारत दौरे पर आ रहे हैं।









