भारत ने कश्मीर मुद्दे पर तुर्की और मलेशिया के बयान की कड़ी निंदा करते हुए देश के आंतरिक मुद्दे से जुड़े विषय पर इन दोनों के बयान को तथ्य से परे बताया और मित्रतापूर्ण संबंधों की ओर ध्यान दिलाते हुए उनसे ऐसे बयान देने से बचने को कहा है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ''जम्मू कश्मीर को लेकर हाल का भारत का निर्णय पूरी तरह से आंतरिक मामला है।''
दरअसल संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने आरोप लगाया था कि भारत ने जम्मू कश्मीर पर हमला बोला और क़ब्ज़ा किया। उन्होंने नई दिल्ली से पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने को कहा। तुर्की ने भी कश्मीर की स्थिति पर भारत की कड़ी आलोचना की थी।
अमरीका में एक अध्ययन में दावा किया गया है कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध हुआ तो इसके बेहद खतरनाक नतीजे होंगे। इतना ही नहीं, यह पूरी दुनिया को जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्राकृतिक आपदाओं की तरफ भी ले जाएगा।
स्टडी के सह-लेखक रुट्गर्स यूनिवर्सिटी के ऐलन रोबोक के मुताबिक दोनों देशों में परमाणु युद्ध हुआ तो 12.5 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है।
उन्होंने कहा, ''इस तरह के युद्ध से सिर्फ उन्हीं जगहों को नुकसान नहीं पहुंचेगा जहां परमाणु बम गिरेंगे बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित होगी।''
साइंस अडवांसेज़ जर्नल में प्रकाशित स्टडी में यह मानकर नुकसान का अनुमान किया गया है कि 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध हो सकता है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अमरीका से लौटने के एक दिन बाद ही बड़ा बदलाव किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी की छुट्टी कर दी है।
मलीहा लोधी की जगह अब मुनीर अकरम संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि होंगे।
मलीहा लोधी को पद से क्यों हटाया गया? अब तक पाकिस्तान की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। ना ही ये बताया गया है कि मलीहा लोधी को अब क्या ज़िम्मेदारी दी गई है।
हालांकि सोशल मीडिया में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
कई लोगों का मानना है कि मलीहा पाकिस्तान के 'मिशन कश्मीर' को कामयाब बनाने में बुरी तरह असफल रहीं, इसलिए ये फ़ैसला लिया गया है।
कुछ लोग मलीहा को हटाए जाने के बाद उनकी ग़लतियों का ज़िक्र कर रहे हैं जिनकी वजह से पाकिस्तान को सार्वजनिक मंचों पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था।
मलीहा लोधी की इन्हीं ग़लतियों में से एक थी: संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर की फ़र्ज़ी तस्वीर दिखाना।
सितंबर, 2017 की बात है। मलीहा लोधी ने संयुक्त राष्ट्र में सबके सामने एक तस्वीर लहराते हुए कहा: मैं आपको कश्मीर में 'भारतीय बर्बरता' का चेहरा दिखाती हूं। उन्होंने जो तस्वीर लहराई वो एक युवा जख़्मी लड़की की थी। लड़की का पूरा चेहरा जख़्मों से भरा हुआ था।
मलीहा ने दावा किया कि वो कश्मीर में 'भारतीय क्रूरता' का सबूत पेश कर रही थीं और वो पेलेट गन से घायल लड़की की तस्वीर थी।
उन्होंने इस तस्वीर को रिट्वीट भी किया था।
मगर जल्दी ही पता चल गया कि वो तस्वीर कश्मीर नहीं बल्कि गज़ा पट्टी की थी। तस्वीर में दिख रही लड़की भी कश्मीरी नहीं बल्कि 17 साल की फ़लस्तीनी लड़की थी।
उसे चोटें पेलेट गन से नहीं बल्कि बम के गोलों से लगी थी।
इसराइली हमले में घायल होने वाली इस लड़की की तस्वीर अवॉर्ड विनिंग फ़ोटो पत्रकार हाइडी लवीन ने साल 2014 में खींची थी।
संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर की फ़र्जी तस्वीर पेश करने के लिए मलीहा लोधी की दुनिया में ख़ूब किरकिरी हुई थी।
ख़ासकर पाकिस्तान की सोशल मीडिया में इसकी कड़ी आलोचना हुई थी। पाकिस्तानी लोगों ने कहा कि मलीहा लोधी की इस चूक से देश की बदनामी हुई है।
पाकिस्तानी अख़बार द नेशन ने तो इसे 'आपराधिक चूक' तक कह दिया था।
इसके अलावा मलीहा लोधी उस वक़्त भी अपनी चूक की वजह से चर्चा में आई थीं जब उन्होंने अपने एक ट्वीट में ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को ब्रिटेन का विदेश मंत्री कहकर संबोधित किया था।
लोधी ने ट्वीट किया था, "प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने आज सुबह ब्रिटेन के विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन से मुलाक़ात की।'' उन्होंने ट्वीट के साथ दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक की एक तस्वीर भी साझा की थी।
हालांकि लोधी ने करीब एक घंटे बाद उस ट्वीट को हटाते हुए ग़लती के लिए माफ़ी भी मांग ली थी।
अब पद से हटाए जाने के बाद मलीहा लोधी एक बार फिर सुर्खियों और चर्चा में हैं।
वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार ने उन्हें 'बवंडर' कहकर संबोधित किया है और ट्वीट किया है, "मलीहा अपमानजनक थीं। वो अपने से बड़ों और छोटों सबका अपमान करती थीं। वो बेहद महत्वाकांक्षी और आत्ममुग्ध थीं। प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने वो फ़ैसला लिया है जो उन्हें लेना चाहिए था। मुनीर अकरम को संयुक्त राष्ट्र में नियुक्त करने का फ़ैसला बहुत अच्छा है। हर सिरफिरे व्यक्ति का आख़िरी दिन आता है।''
इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर मुद्दे पर भारत की कड़ी आलोचना की थी और कश्मीर में लगी पाबंदियों को 'अमानवीय' बताया था।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'राइट टू रिप्लाई' के तहत दिए गए भारत के जवाब पर पाकिस्तान ने भी अपना जवाब दिया है और आरोप लगाया है कि भारत 'कश्मीर मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है'।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए भाषण पर भारत ने 'राइट टू रिप्लाई' के तहत जवाब दिया था और उनकी कही 'हर बात को झूठ' बताया था।
पाकिस्तान के प्रतिनिधि ज़ुल्क़रनैन चीना ने रविवार को इसी पर अपने देश की ओर से जवाब दिया और कहा कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने दुनिया के सामने 'भारत के वास्तविक क्रूर चेहरे को उजागर कर दिया'।
उन्होंने कश्मीर का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत ने अपने जवाब में 'ज़मीनी हक़ीक़त से ध्यान हटाने की कोशिश की'।
उन्होंने आरोप लगाया, "भारतीय प्रतिनिधि ने जानबूझकर कश्मीर के लॉकडाउन का ज़िक्र नहीं किया। न ही उन्होंने मासूम कश्मीरियों की तकलीफ़ का ज़िक्र किया जो बीते 53 दिनों से खाने और ज़रूरी सामान की आपूर्ति के अभाव में जीने को मजबूर हैं।''
उन्होंने सवाल किया, "मैं भारतीय प्रतिनिधि से पूछता हूं कि भारत सरकार कश्मीरी लोगों को बाहर आकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने की इजाज़त क्यों नहीं दे रही है? भारत इतना भयभीत क्यों है? पाकिस्तान के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है। क्या भारत के पास इतना नैतिक साहस है कि वो क़ब्ज़े वाले जम्मू कश्मीर को लेकर संयुक्त राष्ट्र ह्यूमन राइट्स हाई कमिश्नर की रिपोर्ट के निष्कर्षों पर जवाब दे?"
पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि भारत सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी है।
उन्होंने कहा, "बीजेपी की विचारधारा के स्रोत आरएसएस के संस्थापकों में से एक एमएस गोलवलकर ने भारत में ग़ैर हिंदुओं के बारे में कहा था कि ग़ैर हिंदुओं को या तो हिंदू संस्कृति और भाषा अपनानी होगी या वो बिना विशेषाधिकार के हिंदू राष्ट्र के अधीन हो जाएंगे। नरेंद्र मोदी एमएस गोलवलकर को गुरु कहते हैं।''
पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि जिन्होंने 1948 में 'महात्मा गांधी की हत्या' की वो आज उनके धर्मनिरपेक्ष भारत के विचारों की हत्या कर रहे हैं। लेकिन, भारत न तो अपनी ग़लत नीतियों को देखना चाहता है और न किसी को देखने देना चाहता है।
पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने हिंदुत्ववादी विचारधारा, गौरक्षा के नाम पर होने वाली हत्या और 2002 के गुजरात दंगों का भी ज़िक्र किया।
इससे पहले शनिवार को भारत की ओर से विदेश मंत्रालय की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने भारत का पक्ष रखा था।
उन्होंने इमरान ख़ान के भाषण को भड़काऊ और उनकी कही हर बात को झूठ बताया था।
साथ ही पाकिस्तान से आतंकवाद के मसले पर पांच सवालों का जवाब देने के लिए कहा था।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में आरोप लगाया कि भारत ने उनकी तरफ से की गई शांति की सभी कोशिशों को नकार दिया।
इमरान ख़ान ने क़रीब 50 मिनट के अपने भाषण में दुनिया को आगाह किया कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच जंग होती है तो 'कुछ भी हो सकता है।'
उन्होंने कहा, ''जब आकार में सात गुना छोटे देश के सामने ये विकल्प हो कि वो सरेंडर कर दे या फिर मौत तक संघर्ष करे। तब हम आख़िर तक लड़ेंगे और जब जंग का अंत होगा तो इसके नतीजे सीमा के परे तक होंगे। ये धमकी नहीं है। ये एक स्वाभाविक चिंता है।''
इमरान ख़ान ने शांति के लिए की गईं अपने कोशिशों का ज़िक्र किया।
उन्होंने कहा, "जब हम सत्ता में आए तो मेरी प्रथामिकता पाकिस्तान को ऐसा देश बनाने की थी जो शांति स्थापित करने में आगे हो। 9/11 के बाद हम आतंकवाद के ख़िलाफ जंग में शामिल हुए।''
इमरान ख़ान ने दावा किया कि उन्होंने भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने के लिए लगातार कोशिश की।
उन्होंने कहा, "हमने पहली चीज़ ये की कि हमने भारत से संपर्क बनाने की कोशिश की। मैंने मोदी से कहा कि हमारी समस्याएं एक सी हैं। गरीबी और जलवायु परिवर्तन। चलिए हम भरोसे पर आधारित रिश्ते बनाते हैं। चलिए हम आगे बढ़ते हैं।''
इमरान ख़ान ने दावा किया कि उन्हें भारत की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से उन्होंने प्रगति के लिए कोई क़दम नहीं बढ़ाया। हमने सोचा कि चुनाव का वक़्त है और वो पाकिस्तान के साथ क़रीबी रिश्ते नहीं बनाना चाहते।''
इमरान ने कहा, "उसके बाद एक 20 साल के लड़के ने खुद को पुलवामा में उड़ा लिया। उनके पिता ने कहा कि वो कट्टरवादी ताक़तों के असर में था। मैंने भारत से कहा कि वो हमें सबूत दें। सबूत देने के बजाए उन्होंने विमान भेज दिए। हमने दो को गिरा दिया। एक पायलट को पकड़ा लेकिन उन्हें वापस कर दिया।''
इमरान ख़ान ने आगे कहा, "इसे शांति की पहल मानने के बजाए मोदी ने पाकिस्तान के ख़िलाफ चुनाव अभियान चलाया।''
इमरान ने कहा कि जब भारत ने पाँच अगस्त को कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किया और 80 लाख लोगों पर हर तरह की पाबंदी लगा दी तो उन्हें समझ में आया कि दरअसल इसके पीछे मोदी सरकार का ख़ास एजेंडा है।
उन्होंने कहा कि भारत ने शिमला समझौते और अपने ही संविधान के ख़िलाफ़ ये क़दम उठाया है।
उन्होंने कहा कि जब भारत के कश्मीर में पाबंदी हटेगी तो वहां क़त्लेआम होने की आशंका है। इमरान ने कहा कि 80 लाख कश्मीरी जानवरों की तरह ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के कश्मीर में हो रही कथित ज़्यादतियों पर दुनिया इसलिए ख़ामोश है क्योंकि भारत एक बड़ा बाज़ार है।
इमरान ने कहा कि इस बात की बहुत आशंका है कि भारत में कश्मीरी युवक किसी हिंसा में शामिल हों और भारत इसके लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराए।
उन्होंने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान में जंग होगी तो एक छोटा देश होने के नाते पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार के इस्तेमाल के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं होगा।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन के ज़रिए पूरी दुनिया को ख़बरदार किया कि अगर ऐसा होता है तो इसका असर सिर्फ़ भारत-पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान आज वहीं खड़े हैं जहां 1939 में यूरोप खड़ा था।
उन्होंने कहा कि 1939 में यूरोप ने हिटलर का तुष्टिकरण किया जिसका नतीजा ये हुआ कि दुनिया को दूसरे विश्व युद्ध से गुज़रना पड़ा। उन्होंने दुनिया से अपील की कि आज कश्मीर में यही हालात हैं और दुनिया को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।
इमरान ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस संगठन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के आजीवन सदस्य हैं, वो हिटलर और मुसोलीनी को अपना आइडियल मानते हैं। इमरान ने कहा कि आरएसएस की विचारधारा ने ही महात्मा गांधी की हत्या की थी।
इमरान ख़ान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अपनी ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए और उसे कश्मीर के मामले में अपने ही प्रस्तावों को लागू करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र समेत पूरी दुनिया को इस बात के लिए भारत पर दबाव डालना चाहिए कि भारत सबसे पहले कश्मीर में लगी पाबंदी हटाए। इमरान ने कहा कि कश्मीरी राजनेता और हज़ारों बच्चे और नौजवान जो हिरासत में हैं उनको फ़ौरन रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि कश्मीरियों को आत्म-निर्णय का अधिकार मिलना ही चाहिए।
इमरान ख़ान ने तक़रीबन 50 मिनट का लंबा भाषण दिया। उन्होंने कश्मीर के अलावा जलवायु परिवर्तन, दुनिया में बढ़ती ग़रीबी और इस्लामोफ़ोबिया का ज़िक्र किया।
इससे पहले इमरान ख़ान ने कहा कि आतंकवाद का किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं है। शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि 9/11 की घटना के बाद इस्लामोफ़ोबिया में बढ़ोत्तरी हुई है और इसका ख़ात्मा होना चाहिए।
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सार्वजनिक तौर पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या की ज़िम्मेदारी ली है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, मोहम्मद बिन सलमान ने कहा है कि वो पिछले साल सऊदी एजेंटों द्वारा की गई ख़ाशोज्जी की हत्या की ज़िम्मेदारी लेते हैं क्योंकि इसे उनके रहते ही अंजाम दिया गया।
क्राउन प्रिंस ने अगले हफ़्ते प्रसारित होने जा रही पीबीएस की एक डॉक्युमेंट्री में यह बात कही है।
यह पहली बार है जब क्राउन प्रिंस सलमान ने सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिया है कि वो इस्तान्बुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या की ज़िम्मेदारी ले रहे हैं।
पश्चिमी देशों की सरकारों और सीआईए ने कहा था कि सऊदी क्राउन प्रिंस ने ही ख़ाशोज्जी की हत्या का आदेश दिया था लेकिन सऊदी के अधिकारी इस बात से इनकार करते रहे थे कि इसमें उनकी कोई भूमिका थी।
दुनिया भर में इस हत्या की ख़बर सुर्खियों में रही थी और इसके लिए सऊदी सरकार की कड़ी आलोचना भी हुई थी।
ख़ाशोज्जी की हत्या से क्राउन प्रिंस की छवि को भी धक्का लगा था। इस हत्याकांड के बाद दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश सऊदी के क्राउन प्रिंस ने अमेरिका या यूरोप का दौरा भी नहीं किया है।
क्राउन प्रिंस ने ये बातें ख़ाशोज्जी की हत्या के एक साल पूरा होने से पहले एक अक्टूबर को प्रसारित होने जा रही डॉक्युमेंट्री में कहीं।
उन्होंने पीबीएस के मार्टिन स्मिथ से कहा, "यह मेरे रहते हुआ। मैं इसकी पूरी जिम्मेदारी लेता हूं क्योंकि यह मेरे रहते हुआ।''
इस डॉक्युमेंट्री का नाम 'द क्राउन प्रिंस ऑफ़ सऊदी अरेबिया' है।
डॉक्युमेंट्री में स्मिथ ने जब मोहम्मद बिन सलमान से पूछा कि उनकी जानकारी के बिना हत्या कैसे हुई तो क्राउन प्रिंस ने कहा, "हम दो करोड़ लोग हैं। हमारे 30 लाख सरकारी कर्मचारी हैं।''
स्मिथ ने क्राउन प्रिंस से पूछा कि क्या हत्यारों ने सरकार के निजी जेट का इस्तेमाल किया था? इस पर उन्होंने कहा, "हमारे पास अधिकारी और मंत्री हैं जो कामकाज देखते हैं और वे ज़िम्मेदार लोग हैं। उनके पास ऐसा करने का अधिकार है।''
इससे पहले सऊदी के अधिकारी ने जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के लिए दूसरों को ज़िम्मेदार ठहराया था।
सरकारी वकील ने कहा था कि तत्कालीन डेप्युटी इंटेलिजेंस चीफ़ ने ख़ाशोज्जी को स्वदेश लाने का आदेश दिया था लेकिन उनकी वापसी करवाने में सफलता न मिलने पर मुख्य वार्ताकार ने उनकी हत्या का आदेश दे दिया।
शुरू में ख़ाशोज्जी के सऊदी अरब के शाही घराने से अच्छे रिश्ते थे लेकिन बाद में वो उसकी आलोचना करने लगे थे।
उधर, अमरीकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जून में रॉयटर्स से कहा था कि ट्रम्प प्रशासन हत्या के जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाने के लिए स्पष्ट रूप से रियाद पर दबाव बनाए हुए है।
सऊदी अरब के 11 संदिग्धों के खिलाफ़ गुप्त सुनवाई हो रही है जिसकी गति काफ़ी सुस्त है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रिंस मोहम्मद और दूसरे वरिष्ठ सऊदी अधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए।
ख़ाशोज्जी अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार थे और आख़िरी बार उन्हें 2 अक्टूबर 2018 को इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास में देखा गया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उनके शव के टुकड़े करके इमारत से बाहर भेजा गया और कुछ भी नहीं मिला।
हत्या के कुछ सप्ताह बाद रियाद में एक निवेश सम्मेलन में क्राउन प्रिंस ने इसे एक जघन्य अपराध और दुखद घटना करार दिया था और ज़िम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे मे लाने का वादा किया था।
ख़ाशोज्जी की मंगेतर हैटिस केंगिज़ ने संयुक्त राष्ट में विश्व नेताओं के एक सम्मेलन से बाहर एक समारोह में कहा कि उनका क्राउन प्रिंस से दो सवाल हैं। पहला, ख़ाशोज्जी की हत्या का आदेश किसने दिया और क्यों दिया?
केंगिज़ ने कहा, "यह स्वीकार करके उन्होंने जमाल की हत्या से ख़ुद को अलग कर लिया है।''
उन्होंने कहा, "वह कह रहे हैं कि यह उनकी निगरानी में हुआ लेकिन इसका मतलब हुआ कि वह इस अपराध में शामिल नहीं थे। उनका बयान पूरी तरह से एक राजनीतिक पैंतरेबाज़ी है।''
इससे पहले तुर्की के एक अख़बार ने सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खाशोज़्जी की मौत से पहले के कुछ आख़िरी पलों की रिकॉर्डिंग का ब्योरा प्रकाशित किया था।
सरकार समर्थक अख़बार 'सबह' ने लिखा था कि ज़िंदगी के आख़िरी लम्हों में खाशोज्जी ने अपने हत्यारों से उनका मुंह बंद न करने की गुज़ारिश की थी। खाशोज्जी ने कहा था कि उन्हें अस्थमा है और मुंह बंद करने से उन्हें घुटन होगी।
अख़बार के मुताबिक ख़ाशोज्जी की हत्या का ये टेप तुर्की की ख़ुफ़िया एजेंसी को पिछले अक्टूबर में दूतावास से ही मिला था।
हाउडी मोदी कार्यक्रम के बाद मंगलवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फिर मुलाक़ात हुई। इस द्विपक्षीय वार्ता के बाद ट्रंप और मोदी मीडिया से रूबरू हुए।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक भारतीय पत्रकार ने मोदी की मौजूदगी में ट्रंप से कुछ सवाल पूछे।
इन सवालों का ट्रंप ने जो जवाब दिया, उसकी चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है। एक दिन पहले जब ट्रंप इमरान ख़ान के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, तब भी ऐसा हुआ था और पाकिस्तानी पत्रकारों का भारत में जमकर मज़ाक उड़ाया गया था।
अब ट्रंप का ऐसा ही कुछ बयान भारतीय पत्रकारों के लिए भी आया है।
जब भारतीय पत्रकार पर ट्रंप बोले थे?
तारीख़ 24 सितंबर 2019
भारतीय पत्रकारों के सवाल, ट्रंप के जवाब
भारतीय पत्रकार का सवाल: पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने ये माना कि आईएसआई ने अलकायदा को प्रशिक्षण दिया था। आप इस बयान को कैसे देखते हैं?
ट्रंप: मैंने ऐसा कुछ नहीं सुना।
पत्रकार: क्या कट्टरपंथी इस्लामिक आतंक से निपटने के लिए कोई रोडमैप है?
ट्रंप: हम कश्मीर के मसले पर समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। हम सब यही चाहते हैं।
पत्रकार: लेकिन सर क्या आतंकवाद बड़ा मुद्दा नहीं है? पाकिस्तान सरकार प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए कोई रोडमैप है?
ट्रंप मोदी की तरफ़ देखकर कहते हैं, ''आपके पास अच्छे रिपोर्टर्स हैं। काश कि मेरे पास भी ऐसे रिपोर्टर होते। आप किसी भी दूसरे पत्रकार से बेहतर कर रहे हैं। आप ऐसे रिपोर्टर कहां खोजते हैं। देखिए मुश्किलों को हल करने के लिए आपके पास महान प्रधानमंत्री हैं। मुझे इसको लेकर कोई शक नहीं है।
जब पाकिस्तानी पत्रकार पर बोले थे ट्रंप?
तारीख़ 23 सितंबर 2019
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से मुलाकात के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस थी।
पकिस्तानी पत्रकारों के सवाल, ट्रंप के जवाब
पाकिस्तानी रिपोर्टर कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र के अध्यादेश से जुड़ा एक सवाल ट्रंप से पूछता है।
ट्रंप इमरान की तरफ देखकर कहते हैं, ''मुझे ये रिपोर्टर पसंद है। क्या आप (पत्रकार) इमरान ख़ान की टीम के हैं?
रिपोर्टर: मैं इमरान की टीम से नहीं हूं। मैं एक स्वतंत्र पत्रकार हूं।
इसके बाद एक दूसरा पाकिस्तानी रिपोर्टर ट्रंप से सवाल पूछता है- 50 दिनों से कश्मीर बंद है। ना ही इंटरनेट, ना ही फोन। कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। आप कश्मीरी लोगों के लिए क्या कर रहे हैं?
ट्रंप, इमरान से कहते हैं, ''आप ऐसे रिपोर्टर कहां से खोजकर लाते हैं। ये लोग कमाल के हैं।''
अमरीकी पत्रकारों से ट्रंप की तल्खी
अमरीका में पत्रकारों से राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कई बार तीखी जंग हो चुकी है।
ट्रंप कई मौक़ों पर मीडिया संस्थानों और पत्रकारों को फ़ेक न्यूज़ फैलाने वाला बताते हुए मज़ाक उड़ा चुके हैं।
2017 में बीबीसी के जॉन सोपल की अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप से नोंकझोंक हुई थी। बीबीसी के जॉन सोपल जब सवाल करने के लिए खड़े हुए तो ट्रंप ने उन्हें बीच में ही रोकते हुए पूछा, "आप कहां से?"
जब पत्रकार ने बताया कि वो बीबीसी से हैं तो ट्रंप ने तंज़ भरे अंदाज़ में कहा, "एक और...''
बीबीसी के जॉन सोपल ने इसे तारीफ़ के तौर पर लेते हुए कहा कि यह अच्छा है...बिना किसी भेदभाव के और निष्पक्ष। सोपाल अपना सवाल पूछ ही रहे थे कि ट्रंप ने उन्हें बीच में ही रोक दिया।
ट्रंप और सीएनएन चैनल के पत्रकार के बीच हुई नोंकझोंक भी काफी चर्चा में रही थी। केबल न्यूज़ नेटवर्क (सीएनएन) के व्हाइट हाउस के मुख्य संवाददाता जिम एकोस्टा से उनका 'प्रेस हार्ड पास' वापस ले लिया गया था।
इस पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स की ओर से कहा गया था कि अगर कोई रिपोर्टर इस तरह व्यवहार करता है तो व्हाइट हाउस व्यवस्थित और निष्पक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर सकता। ये एक पेशेवर के लिए सही नहीं है।
ट्रंप ने साल 2018 में एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने मीडिया को 'लोगों का दुश्मन' तक कह दिया था।
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों का मलबा दिखाते हुए कहा है कि उसके दो तेल प्रतिष्ठानों पर हुए हमले में ईरान के हाथ होने के ये सुबूत हैं।
मंत्रालय का कहना है कि हमले में इस्तेमाल किए गए 18 ड्रोन और सात क्रूज़ मिसाइलें एक ही दिशा से आए थे और इससे पता चलता है कि इनका स्रोत यमन नहीं हो सकता।
यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने इससे पहले दावा कर इस हमले की ज़िम्मेदारी ली थी।
ईरान ने इसमें किसी तरह से शामिल होने के आरोपों का खंडन किया है और चेताया है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का वो जवाब देगा।
लेकिन सऊदी अरब रक्षा मंत्रालय का कहना है कि मलबे से पता चलता है कि 'ये हमले बिना शक ईरान द्वारा प्रायोजित' थे।
हालांकि मंत्रालय ने ये नहीं बताया कि ये हथियार कहां से लाँच किए गए थे।
अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इससे पहले बुधवार को कहा था कि उन्होंने ईरान पर अमरीकी प्रतिबंधों को और कड़ा करने को कहा है।
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो बुधवार को सऊदी अरब में हैं और किंग सलमान के बेटे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिलने वाले हैं।
प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मल्की ने कहा कि जहां से ये ड्रोन लॉंच किए गए थे, वहां की सटीक जानकारी पता लगाए जाने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने बताया, "यूएवी के कंप्यूटरों से बरामद डाटा से पता चलता है कि ये ईरान का है।''
उन्होंने बताया कि बक़ीक़ तेल प्रतिष्ठान पर 18 यूएवी (ड्रोन) दागे गए और दोनों प्रतिष्ठानों पर सात क्रूज़ मिसाइलें दागी गई। इनमें से चार ख़ुरैस तेल क्षेत्र में गिरे और तीन अन्य बक़ीक़ के पास गिरा।
मल्की ने बताया कि ये सभी मिसाइलें उत्तरी दिशा से दागे गए। उन्होंने बक़ीक़ पर दागे गए एक यूएवी का वीडियो दिखाया। इसके अलावा उन्होंने नक्शा और नुकसान की तस्वीरें दिखाईं।
उन्होंने ख़ुरैस पर हमले के बारे में कहा कि क्रूज़ मिसाइलों का सटीक असर ईरान के दिखावे वाली क्षमता से परे जाकर उसकी उन्नत क्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर एक हमला करार दिया। उन्होंने जिम्मेदार लोगों को उनके कार्रवाई के लिए जवाबदेह ठहराए जाने की मांग की।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने जम्मू कश्मीर की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई है।
जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार काउंसिल के 42वें सत्र में आयोग की हाई कमिश्नर मिशेल बेशेलेट ने एनआरसी और जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्य असम को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की हाई कमिश्नर ने कहा है कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर वो चिंतित हैं।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की प्रमुख मिशेल बेशेलेट ने सोमवार को कहा, "कश्मीर के बारे में, मेरे दफ़्तर को नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ मानवाधिकार की स्थिति के बारे में लगातार रिपोर्टें मिल रही है।''
''भारत सरकार के हाल के फ़ैसलों से कश्मीरियों के मानवाधिकार पर असर, इंटरनेट संचार, शांतिपूर्ण एकत्र होने पर लगे प्रतिबंध और स्थानीय नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने लेकर मैं चिंतित हूं।''
उन्होंने कहा कि मैं भारत और पाकिस्तान की सरकारों से आग्रह करना चाहती हूं कि वे यह सुनिश्चित करें कि मानवाधिकारों का सम्मान और उसका बचाव हो।
"मैंने विशेष रूप से भारत से मौजूदा लॉकडाउन या कर्फ़्यू में ढील देने की अपील की है। मैं यह आग्रह करती हूं कि लोगों तक बुनियादी सेवाएं पहुंचे और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि जो हिरासत में लिए गए हैं, उचित प्रक्रियाओं में उनके सभी मानवाधिकारों का सम्मान होगा।''
"यह महत्वपूर्ण है कि कश्मीर के लोगों से उन सभी फ़ैसलों की प्रक्रिया में सलाह ली जाए जो उनके भविष्य को प्रभावित करेंगे।''
मिशेल ने कहा, "दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अशांति और हिंसा के बढ़ते ट्रेंड को देखते हुए मानवाधिकार समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनके आंतरिक मामलों में दख़ल नहीं देना चाहते हैं लिहाजा इससे जुड़े सभी पक्ष हिंसा को छोड़कर संयम से काम लें और मुक्त और समावेशी संवाद को प्राथमिकता दें।''
मिशेल ने कहा कि वो सभी संबंधित देशों से अपील करती हैं कि वो मानवाधिकारों के इन महत्वपूर्ण मुद्दों का साथ बैठ कर हल करें।
कश्मीर पर मानवाधिकार आयोग के बयान पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने ट्विटर पर प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने लिखा, "मैं यूएनएचसीएचआर के जेनेवा में दिए आज के बयान का स्वागत करता हूं. मैं यूएन मानवाधिकार परिषद से भारत प्रशासित कश्मीर से आई दो ख़बरों के मामले में जांच आयोग के गठन की अपील करता हूं।''
इससे पहले इमरान ख़ान ने कहा था कि भारत आरएसएस के नज़रिए की वजह से कश्मीर मामले पर बात करने से पीछे हट रहा है।
उन्होंने कहा था, "नरेंद्र मोदी की ग़लती की वजह से कश्मीर के लोगों को आज़ादी का एक बड़ा मौक़ा मिल गया है। भारत के इस क़दम की वजह से कश्मीर का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गया।''
कश्मीर के साथ ही मिशेल ने भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में एनआरसी को लागू करने और उसके बाद के हालात पर भी चिंता जाहिर की है।
असम में एनआरसी लागू करने पर मिशेल ने कहा, "भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में हाल ही में नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजन वेरिफिकेशन प्रक्रिया ने बड़ी अनिश्चितता पैदा की है। 31 अगस्त को जारी इसकी अंतिम सूची में 19 लाख लोगों के नाम नहीं हैं। मैं सरकार से अपील करती हूं कि अब अपील करने की प्रक्रिया आसान की जाए और लोगों को राज्य से बाहर न किया जाए।''
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर मदद की पेशकश की है। साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा है कि पहले की तुलना में दोनों देशों के बीच तल्ख़ी में कमी आई है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा, "आप जानते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर तनाव चल रहा है। लेकिन मुझे लगता है कि दो हफ़्ते पहले की तुलना में दोनों देशों के बीच तनाव में कमी आई है।
इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि दोनों देश चाहें तो वो मदद के लिए तैयार हैं।
बीती जुलाई में जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अमरीका गए थे तब ट्रंप ने उनसे मुलाक़ात के दौरान कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश की थी लेकिन भारत ने तुरंत उसे ख़ारिज कर दिया था। भारत ने कहा था कि यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है। हालांकि तब ट्रंप ने यह दावा किया था कि खुद नरेंद्र मोदी ने उनसे मध्यस्थता करने के लिए कहा था। भारत ने इस दावे को भी ख़ारिज कर दिया था।
इसके बाद अगस्त महीने में जी 7 की बैठक के दौरान नरेंद्र मोदी से मुलाकात में ट्रंप ने कहा था कि कश्मीर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें किसी भी अन्य देश की मध्यस्थता का कोई स्कोप नहीं है।









