भारत

ईरान क्रूड ऑयल आयात गिर रहा है: जयवीर शेरगिल

जयवीर शेरगिल ने कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान क्रूड ऑयल आयात गिर रहा है।

एमएसपी पर झूठे दावों का खुलासा: कांग्रेस मुख्यालय में प्रियंका चतुर्वेदी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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एक साथ चुनाव: कांग्रेस मुख्यालय में अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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मुन्ना बजरंगी की हत्या गहरी साजिश का नतीजा या फिर करोड़ों की सुपारी डील का अंजाम

उत्तर प्रदेश के बागपत जिला जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के तुरंत बाद भले ही कुख्यात सुनील राठी ने उसके मर्डर का जुर्म कबूल कर लिया हो, मगर इस सनसनीखेज वारदात के पीछे की वजह को हर कोई जानना चाहता है। हत्यारोपी सुनील राठी के आत्मरक्षा वाले बयान से खुद अफसर ही इत्तेफाक नहीं रखते तो आम जनता भला इस पर कैसे यकीन कर सकती है?

सवाल उठता है कि यह हत्याकांड किसी गहरी साजिश का नतीजा है या फिर करोड़ों की सुपारी डील का अंजाम। अगर ये दोनों वजह नहीं है तो फिर ये पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के माफिया में किसी नए गठजोड़ के आगाज का खुला ऐलान है। सवाल जितने बड़े हैं, जवाब भी उतना ही उलझा हुआ है।

मुन्ना बजरंगी के परिजन लंबे समय से अपने सफेदपोश विरोधियों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते आ रहे हैं। बजरंगी की हत्या के बाद परिजनों द्वारा खेकड़ा थाने में दी गई तहरीर में भी उन्हीं विरोधियों के नाम शामिल हैं।

वे इसे राजनीतिक हत्या बता रहे हैं तो अगला सवाल खड़ा हो जाता है कि इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में आतंक का दूसरा नाम बन चुका सुनील राठी कैसे मोहरा बन गया? अपराध की दुनिया को करीब से जानने वाले लोगों का जवाब है कि यह एक बहुत बड़ी सुपारी डील हो सकती है। इतना ही नहीं, इस हत्या को लेकर दस करोड़ रुपये तक के सौदे की चर्चाओं का बाजार भी गर्म है।

सुपारी किलिंग के अलावा जो एक और कयास लगाया जा रहा है, वह है वेस्ट यूपी और पूर्वांचल के माफिया के नये गठजोड़ का आगाज। यह कैसे फिट बैठता है? इसके पीछे की दलील भी कमजोर नहीं है।

सुत्रों का कहना है कि सुनील राठी का रिश्तेदार राजीव राठी पूर्वाचल की मिर्जापुर जेल में बंद है उसकी कुछ दिन पहले मुन्ना बजरंगी के गुर्गों द्वारा पिटाई कर दी जाती है, जिसका पक्ष पूर्व सांसद ब्रिजेश सिंह के गुर्गे लेते हैं। इसी रिश्तेदार के जरिये ही सुनील राठी की टेलिफोनिक बातचीत इस नये गैंग से शुरू हो जाती है और फिर दो बड़े माफिया की जुगलबंदी से तीसरे बड़े माफिया डॉन का खात्मा हो जाता है।

पुलिस और न्यायिक जांच भी इन्हीं तीन बिंदुओं को केन्द्र में रखकर चल रही है तथा इसके लिये हर उस कड़ी को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जो हत्याकांड के सटीक खुलासे तक उनको पहुंचा दे।

मॉब लिंचिंग: कांग्रेस मुख्यालय में प्रमोद तिवारी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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पीएम मोदी की जयपुर रैली पर कांग्रेस मुख्यालय में आरपीएन सिंह द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट: कांग्रेस मुख्यालय में मनीष तिवारी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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रूसी हथियारों के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों को बाईपास करने की जरूरत है : आर्मी चीफ

भारत के सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कहा कि भारत को रूस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को बाईपास करने के लिए वैकल्पिक रास्ता तलाशना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस में निर्मित हथियारों का इस्तेमाल पूरी भारतीय सेनाओं में किया जा रहा है।

भारत के सबसे बड़े हथियार सप्लायर पर अमेरिकी प्रतिबंध को लेकर पहली बार टिप्पणी करते हुए सेनाध्यक्ष रावत ने कहा कि हमें अपने राष्ट्रीय हित को देखना होगा और उसके बाद यह तय करना होगा कि हमारे लिए कौन सा बेहतर है। भारत में बड़ी तादाद में रूस में निर्मित हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में यह लीगेसी का मुद्दा है।

सूत्रों ने बताया कि भारत अब प्रतिबंधों में अमरिका से छूट पाने की कोशिश कर रहा है क्योंकि भारतीय सेना रूसी हथियारों पर निर्भर है। ऐसे में यह मुद्दा प्रस्तावित 2+2 की होनेवाली दोनों देशों की रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री की बैठक में उठ सकता है।

पहले यह वार्ता 16 जुलाई को वाशिंगटन में तय थी, लेकिन अमेरिका ने इसे तीसरी बार टाल दिया क्योंकि उनके विदेश मंत्री का उत्तर कोरिया का दौरा होना था। सेनाध्यक्ष रावत ने कहा कि भारत-रूस द्विपक्षीय रक्षा व्यापार जारी रखने के लिए भुगतान के वैकल्पिक उपाय अपनाकर अमरिकी प्रतिबंधों को बाईपास किया जा सकता है।

मलेशिया ने जाकिर नाईक को भारत भेजने से किया इनकार

धर्म उपदेशक जाकिर नाईक को प्रत्यर्पित करने की भारत की उम्मीदों को जोरदार झटका लगा है। मलेशियाई सरकार ने जाकिर नाईक को भारत भेजने से इनकार कर दिया है।

मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्‍मद ने शुक्रवार को कहा कि नाईक को भारत नहीं भेजा जाएगा। नाईक ने 2016 से मुस्लिम बहुल देश मलेशिया में शरण ले रखी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने जनवरी में नाईक को प्रत्यर्पित करने का औपचारिक अनुरोध किया था।

महातिर मोहम्‍मद ने कहा, ''जाकिर जब तक हमारे देश में कोई समस्या पैदा नहीं कर रहे हैं, तब तक वह उसे प्रत्यर्पित नहीं करेंगे, क्योंकि जाकिर को मलेशिया की नागरिकता प्राप्त है।

मलेशियाई पीएम के इस बयान से जाकिर को भारत प्रत्यर्पित करने की भारत की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है।

इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था कि हमारे अनुरोध पर मलेशियाई पक्ष गंभीरता से विचार कर रहा है। कुआलालंपुर में हमारा उच्चायोग इस संबंध में संबंधित मलेशियाई अधिकारियों से नियमित संपर्क में है। भारत ने मलेशिया के साथ प्रत्यर्पण संधि कर रखी है।

जाकिर नाईक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा जांच एजेंसी (एन आई ए ) चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जाकिर के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यू ए पी ए) और भारतीय दंड संहिता (आई पी सी) की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

अरुण जेटली 'संवैधानिक अराजकतावादी', उनका संविधान में 'कोई विश्वास नहीं है' : आम आदमी पार्टी

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में शासन के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के कल गुरुवार के फैसले के बाबत लिखे गए ब्लॉग के लिए आज केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा।

आम आदमी पार्टी ने कहा कि उनका नजरिया शीर्ष अदालत के फैसले पर भाजपा की हताशा दिखाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि दिल्ली सरकार की मंत्रिपरिषद के पास आरक्षित विषयों को छोड़कर बाकी सभी विषयों पर निर्णय करने का अधिकार है।

आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष ने अरुण जेटली को 'संवैधानिक अराजकतावादी' करार देते हुए कहा कि उन्हें संविधान में 'कोई विश्वास नहीं है'।

आशुतोष ने ट्वीट किया, ''उच्चतम न्यायालय के फैसले पर अरुण जेटली का ब्लॉग पढ़ने के बाद मुझे यकीन हो गया है कि जेटली संवैधानिक अराजकतावादी हैं। अपने नेता गोलवलकर / मोदी और आरएसएस की विचारधारा की तरह संविधान में उनका कोई विश्वास नहीं है।

गौरतलब है कि भारत में मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली सरकार के पास पुलिस का अधिकार नहीं है। जेटली ने कहा, ऐसे में वह पूर्व में हुए अपराधों के लिए जांच एजेंसी का गठन नहीं कर सकती। जेटली ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि इसके अलावा यह धारणा पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है कि संघ शासित कैडर सेवाओं के प्रशासन से संबंधित फैसला दिल्ली सरकार के पक्ष में गया है।