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जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटा : कांग्रेस मुख्यालय में एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटा : कांग्रेस मुख्यालय में एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

आंध्र प्रदेश में पार्टी को मजबूत करने के लिए कार्य योजना पर ओमन चांडी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने इस्तीफा दिया

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकर अरविंद सुब्रमण्यम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। भारत के केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बुधवार को कहा कि अरविंद सुब्रमण्यम करीब चार वर्षों तक अपनी सेवा देने के बाद अब अमेरिका लौट जाएंगे।

अरूण जेटली ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा - ''परिवार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लेकर वह अमेरिका लौट जाएंगे।... उन्होंने मुझे मेरी सहमति देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं छोड़ा।''

अरविंद सुब्रमण्यम ने बतौर मुख्य आर्थिक सलाहकर 16 अक्टूबर 2014 को तीन वर्षों के लिए पद संभाला था। जिसे पिछले साल बढ़ाकर बाद में अक्टूबर 2018 तक कर दिया गया। अपने फेसबुक शीर्षक - 'थैंक्यू अरविंद' में जेटली ने कहा कि सुब्रमण्यम अपनी वर्तमान जॉब के चलते परिवार से अलग-थलग पड़े हुए थे, जब उन्हें पिछले एक साल और अपने पद पर बने रहने का अनुरोध किया था।

जेटली ने कहा, ''कुछ दिन पहले सुब्रमण्यम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मुझसे बात की। उन्होंने बताया कि वह पारिवारिक प्रतिबद्धताओं की वजह से अमेरिका लौटना चाहते हैं। उनके कारण व्यक्तिगत हैं, लेकिन उनके लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। मेरे पास उनसे सहमत होने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।''

जेटली ने कहा कि पिछले साल अक्तूबर में सुब्रमण्यम का तीन साल का कार्यकाल पूरा हुआ था। इसके बाद उन्होंने सुब्रमण्यम से कुछ समय और पद पर बने रहने का आग्रह किया था।
     
जेटली ने कहा, ''यहां तक उन्होंने मुझे बताया है कि वह पारिवारिक प्रतिबद्धताओं और मौजूदा नौकरी के बीच फंसे हुए हैं। यह उनकी अब तक की सबसे संतोषजनक नौकरी है।''

जेटली का मई में गुर्दा प्रत्यारोपण हुआ था। अभी वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार पीयूष गोयल के पास है।

जेटली ने भारतीय अर्थव्यवस्था के वृहद आर्थिक प्रबंधन के लिए सुब्रमण्यम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ''व्यक्तिगत रूप से मुझे उनके व्यक्तित्व, ऊर्जा, बौद्धिक क्षमता और विचारों की कमी खलेगी। एक दिन में वह कई बार मेरे कमरे में आकर मुझे 'मिनिस्टर' कहकर बुलाते थे। कभी वह अच्छी खबर देते तो कभी दूसरे तरह का समाचार देने आते थे। निश्चित रूप से मुझे उनकी कमी खलेगी। मुझे विश्वास है कि वह कहीं भी होंगे, वहां से अपनी सलाह या विश्लेषण भेजते रहेंगे।''

बीजेपी और पीडीपी गठबंधन ने जम्मू-कश्मीर को आग में झोंक दिया : राहुल गाँधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जम्मू-कश्मीर में महबूबा सरकार से बीजेपी के अलग होने को लेकर उस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दोनों पार्टियों के अवसरवादी गठबंधन ने राज्य को आग में झोंक दिया जिससे निर्दोष लोगों और सैनिकों को जान गंवानी पड़ी। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में इस गठबंधन सरकार की वजह से भारत को सामरिक रूप से नुकसान पहुंचा है और यूपीए सरकार के समय हुई सारी मेहनत पर पानी फिर गया।

गांधी ने ट्वीट किया, ''बीजेपी और पीडीपी गठबंधन ने जम्मू-कश्मीर को आग में झोंक दिया जिसमें निर्दोष लोग और हमारे बहादुर जवानों की जान चली गयी। इससे भारत को सामरिक रूप से नुकसान हुआ है और संप्रग सरकार की वर्षों की कड़ी मेहनत पर पानी फिर गया।'' उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति शासन में नुकसान जारी रहेगा। अहंकार, अक्षमता और घृणा हमेशा विफल होती है।'' गौरतलब है कि भाजपा आज पीडीपी से अलग हो गई और उसने गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया।

जम्मू-कश्मीर में भाजपा के पीडीपी के साथ गठबंधन तोड़ने के साथ आज तीन साल पुरानी राज्य सरकार गिर गई। अब राज्य में राज्यपाल शासन अपरिहार्य नजर आ रहा है। अधिकारियों ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा से एक रिपोर्ट का इंतजार है जिसके बाद राज्यपाल शासन लागू करने संबंधी औपचारिकताएं शुरू की जाएंगी।

भारत के केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने आवास पर गृह सचिव राजीव गाबा और खुफिया ब्यूरो एवं गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक करके जम्मू-कश्मीर की जमीनी हालात का आकलन किया। नई सरकार के गठन की संभावना नजर नहीं आने के बीच, अगर आठवीं बार राज्यपाल शासन लागू होने की स्थिति बनती है तो यह चौथा मौका होगा, जब एन एन वोहरा के राज्यपाल के रूप में कार्यकाल के दौरान जम्मू-कश्मीर में केन्द्रीय शासन लगाया जाएगा।

पूर्व नौकरशाह वोहरा 25 जून 2008 को राज्यपाल बने थे। बीजेपी ने आज पीडीपी के साथ तीन साल पुराना गठबंधन तोड़ते हुए कहा कि राज्य में बढ़ते आतंकवाद और कट्टरपंथ को देखते हुए सरकार में बने रहना असंभव हो गया है।

दिल्ली: सीएम केजरीवाल ने हड़ताल खत्म कर दिया

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एलजी अनिल बैजल के ऑफिस में जारी हड़ताल को खत्म कर दिया है। केजरीवाल और उनके मंत्री अपनी मांगों के समर्थन में 11 जून की शाम से उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय में धरना दे रहे हैं। इनकी मांगों में आईएएस अधिकारियों को अपनी हड़ताल खत्म करने का निर्देश देने और काम रोकने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी शामिल है।

वहीं उपराज्यपाल कार्यालय के अनुसार, दिल्ली के उपराज्यपाल ने केजरीवाल को पत्र लिखकर उनसे अधिकारियों से तत्काल मिलकर बातचीत के जरिये दोनों पक्षों की चिंताओं पर गौर करने को कहा है।

इस हड़ताल में शामिल दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को आज एल एन जे पी अस्पताल से छुट्टी मिल गई।  दोनों मंत्री उप राज्यपाल कार्यालय में अनशन पर बैठे थे और सेहत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

मूत्र में कीटोन का स्तर तेजी से बढ़ने और रक्त शर्करा का स्तर घटने के बाद सिसोदिया को कल दोपहर करीब तीन बजे एल एन जे पी अस्पताल ले जाया गया। जबकि जैन की सेहत खराब होने के बाद उन्हें रविवार रात एल एन जे पी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने कहा कि मुख्य सचिव के साथ कथित हाथापाई के बाद शुरू हुए गतिरोध को समाप्त करने के लिए सीएम केजरीवाल के साथ सचिवालय में बैठक के लिए उन्हें औपचारिक निमंत्रण का इंतजार है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल अनिल बैजल से सरकार और नौकरशाहों के साथ बैठक कराने का अनुरोध किया था जिसके बाद आईएएस अधिकारियों की ओर से यह बयान आया है।

आईएएस ए जी एम यू टी संगठन ने कहा कि नौकरशाहों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने का मुख्यमंत्री का आश्वासन मिलने के बाद अधिकारी बैठक के लिए औपचारिक संदेश मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि सूत्रों ने कहा कि बैजल बैठक का आयोजन नहीं कराएंगे क्योंकि एलजी कार्यालय पहले ही आम आदमी पार्टी सरकार से अधिकारियों के साथ बैठक करने और मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ फरवरी में कथित मारपीट के बाद से चल रहे गतिरोध को समाप्त करने के लिए कह चुका है।

दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने उप राज्यपाल अनिल बैजल पर आरोप लगाया कि वह केंद्र की भाजपा की अगुवाई वाली सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं। साथ ही इस साल की शुरुआत में मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर हुए कथित हमले के बाद पैदा हुए गतिरोध को खत्म करने के लिए अरविंद केजरीवाल सरकार एवं आईएएस अधिकारियों की बैठक नहीं बुला रहे हैं।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने दावा किया कि आईएएस अधिकारी सरकार से बातचीत करने के लिए तैयार हैं क्योंकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उन्हें आश्वस्त किया है कि वह उनकी सुरक्षा एवं संरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

इस्तीफे के बाद महबूबा ने कहा, घाटी में शांति के लिए पाकिस्तान से भी बातचीत होनी चाहिए

जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल एन एन वोहरा को इस्तीफा सौंपने के बाद महबूबा मुफ्ती ने संवाददाताओं से बात की। उन्होंने कहा कि जनता को मुसीबत से निकालने के लिए बीजेपी से हाथ मिलाया था। जनता से संवाद बनाने के लिए सरकार का गठन किया गया था। महबूबा ने कहा कि घाटी में शांति के लिए पाकिस्तान से भी बातचीत होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री के तौर पर इस्तीफा सौंपने के बाद महबूबा ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल को बता दिया है कि हम कोई और गठबंधन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, हमने हमेशा कहा है कि जम्मू-कश्मीर में बल प्रयोग की सुरक्षा नीति काम नहीं करेगी, सुलह-समझौता महत्वपूर्ण है। हम कश्मीर में संवाद और सुलह-समझौता के लिए प्रयासरत रहेंगे तथा भाजपा के साथ गठबंधन सत्ता के लिए नहीं था।

जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर से राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो गई है। बीजेपी की ओर से गठबंधन सरकार से समर्थन वापसी के बाद महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेज दिया। इसके साथ ही, महबूबा ने आज शाम को पीडीपी की बैठक बुलाई है।

उधर, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि राज्य में जो हुआ अच्छ हुआ। कांग्रेस किसी भी सूरत में पीडीपी के साथ सरकार नहीं बनाएगी। तो वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि वो किसी भी गठबंधन का समर्थन नहीं करेंगे और राज्यपाल शासन का समर्थन करते हैं। उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जल्द से जल्द चुनाव हो।

जम्मू-कश्मीर : महबूबा मुफ्ती ने सीएम पद से इस्तीफा दिया

जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर से राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो गई है। बीजेपी ने गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। इसके बाद महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेज दिया। इसके साथ ही, महबूबा ने शाम 4 बजे पीडीपी की बैठक बुलाई है।

उधर, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि राज्य में जो हुआ अच्छा हुआ। कांग्रेस किसी भी सूरत में पीडीपी के साथ सरकार नहीं बनाएगी।

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर की पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापसी का ऐलान किया। मंगलवार को बीजेपी प्रवक्ता राम माधव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में गठबंधन की सरकार और आगे चलाना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ सलाह मशविरा के बाद किया गया है। बीजेपी ने समर्थन वापसी की चिट्ठी राज्यपाल को भेज दी है।

राम माधव ने कहा कि सबकी सहमति से इस गठबंधन को खत्म करने का फैसला किया गया। राम माधव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति के लिए पीडीपी के साथ गठबंधन किया गया था। जम्मू-कश्मीर में विकास के लिए केन्द्र सरकार ने भरपूर मदद की।

उन्होंने कहा कि गठबंधन का नेतृत्व पीडीपी के पास था। पीडीपी ने अड़चन डालने का काम किया। दायित्व निभाने में महबूबा पूरी तरह से नाकाम रही। जम्मू और लद्दाख के विकास की अनदेखी की गई। ऐसे में बीजेपी के मंत्री ठीक से काम नहीं कर सके। राम माधव ने कहा कि महबूबा सरकार राज्य को नहीं संभाल पा रही थी।

जम्मू-कश्मीर बीजेपी के प्रभारी राम माधव ने कहा कि बीजेपी ने यहां पर राज्यपाल शासन की मांग की है। उन्होंने कहा कि अब राज्यपाल शासन से ही प्रदेश में हालत सुधरने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकार से समर्थन वापसी के बावजूद जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के सभी बीजेपी मंत्रियों और प्रदेशाध्यक्ष को नई दिल्ली बुलाया था। ऐसा माना जा रहा था कि पीडीपी-बीजेपी गठबंधन पर अमित शाह कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।

2014 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में 87 सीटों में से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी को 28, बीजेपी को 25 और नेशनल कॉन्फ्रेंस को 15 सीट मिली थी। जबकि कांग्रेस को 12 और अन्य को 9 सीटें मिली थी।

पीडीपी सरकार से बीजेपी के समर्थन वापसी पर शिवसेना ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए इसे स्वाभाविक बताया है। शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि यह गठबंधन राष्ट्रविरोधी और अप्राकृतिक था। हमारे पार्टी प्रमुख ने कहा था कि यह गठबंधन आगे नहीं चलेगा। अगर वे इस गठबंधन को आगे चालू रखते तो उन्हें 2019 के चुनाव में जवाब देना पड़ता।

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने समर्थन वापस लिया, महबूबा सरकार अल्पमत में

जम्मू-कश्मीर की पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार से भारतीय जनता पार्टी ने अपना समर्थन वापसी का ऐलान किया है। मंगलवार को बीजेपी प्रवक्ता राम माधव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में गठबंधन की सरकार और आगे चलाना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ सलाह मशविरा के बाद किया गया है।

बीजेपी ने समर्थन वापसी की चिट्ठी राज्यपाल को भेज दी है। इसके साथ ही, बीजेपी के मंत्रियों ने भी अपना इस्तीफा भेज दिया है। जिसके बाद राज्य में पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार का गिरना अब तय है। ऐसा माना जा रहा है कि शाम तक महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगी।

राम माधव ने कहा कि सबकी सहमति से इस गठबंधन को खत्म करने का फैसला किया गया। राम माधव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति के लिए पीडीपी के साथ गठबंधन किया गया था। जम्मू-कश्मीर में विकास के लिए केन्द्र सरकार ने भरपूर मदद की।

उन्होंने कहा कि गठबंधन का नेतृत्व पीडीपी के पास था। पीडीपी ने अड़चन डालने का काम किया। दायित्व निभाने में महबूबा पूरी तरह से नाकाम रही। जम्मू और लद्दाख के विकास की अनदेखी की गई। ऐसे में बीजेपी के मंत्री ठीक से काम नहीं कर सके।

जम्मू-कश्मीर बीजेपी के प्रभारी राम माधव ने कहा कि बीजेपी ने यहां पर राष्ट्रपति शासन की मांग की है। उन्होंने कहा कि अब राष्ट्रपति शासन से ही प्रदेश में हालत सुधरने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकार से समर्थन वापसी के बावजूद जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के सभी बीजेपी मंत्रियों और प्रदेशाध्यक्ष को नई दिल्ली बुलाया था। ऐसा माना जा रहा था कि पीडीपी-बीजेपी गठबंधन पर अमित शाह कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।

2014 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 87 सीटों में से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी को 28, बीजेपी को 25 और नेशनल कॉन्फ्रेंस को 15 सीट मिली थी। जबकि कांग्रेस को 12 और अन्य को 9 सीटें मिली थी।

भारत का सकल घरेलू उत्पाद: कांग्रेस मुख्यालय में मनीष तिवारी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

भारत के सकल घरेलू उत्पाद पर कांग्रेस मुख्यालय में मनीष तिवारी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग: प्रेस ब्रीफिंग के प्रमुख अंश

- प्रधान मंत्री मोदी को अपने कार्यकाल के तहत भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ मौलिक प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए।

- सार्वजनिक डोमेन में अभी तक संशोधित जीडीपी श्रृंखला क्यों नहीं डाली गई है?

- क्या यह तथ्य नहीं है कि मोदी की सरकार नए आधार वर्ष के आधार पर डेटा जारी नहीं कर रही है क्योंकि यूपीए का प्रदर्शन एनडीए से बेहतर था?

- क्या यह तथ्य नहीं है कि चालू वित्त वर्ष के लिए चालू खाता घाटा इतना हद तक बढ़ गया है कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान इसके बारे में गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं।

- नीरव मोदी को उनके खिलाफ कोई कार्रवाई किए बिना दुनिया भर में घूमने दिया गया है। नीरव मोदी का मामला मोदी सरकार की विफलता का सिर्फ एक लक्षण है।

प्रधानमंत्री मोदी की कश्मीर नीति पर पवन खेरा द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

प्रधानमंत्री मोदी की कश्मीर नीति पर पवन खेरा द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग