भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हेट स्पीच के मामले ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में सरकार मूकदर्शक क्यों बनी हुई है? इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने टीवी चैनल के एंकरों की भी भूमिका को भी अहम बताया है।
भारत में न्यूज़ चैनलों पर होने वाली बहस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी ज़ाहिर की है। बुधवार, 21 सितम्बर 2022 को हेट स्पीच के मामले में एक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि ऐसी बहसों में अक्सर हेट स्पीच को जगह दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल पूछा है कि वो ऐसे हेट स्पीच को लेकर मूकदर्शक क्यों बनी रही है?
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) के एम नटराज से कई सवाल पूछे हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पूछा है, ''आख़िर इसमें समस्या क्या है? भारत सरकार इस मामले में कोई स्टैंड क्यों नहीं ले रही है? सरकार क्यों ऐसे मामलों को लेकर मूकदर्शक बनी हुई है?''
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि केंद्र को इस मामले में कोर्ट के विरोध में खड़ा नहीं होना चाहिए, बल्कि मदद करनी चाहिए।
न्यूज़ चैनलों की बहस पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के उन न्यूज़ चैनलों पर भी टिप्पणी की है जो अक्सर टीवी पर बहसों में हेट स्पीच को जगह देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पाया है कि हेट स्पीच से सबसे ज़्यादा फ़ायदा राजनीतिक लोगों को होती है और इसके लिए टीवी न्यूज़ चैनल मौक़ा देते हैं।
जस्टिस के एम जोसेफ़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट के बेंच ने कहा है कि न्यूज़ चैनल के एंकर की भूमिका इसी लिहाज़ से बहुत महत्वपूर्ण है। कोर्ट का मानना है कि टीवी बहस में शामिल लोग हेट स्पीच से दूर रहें, यह तय करना एंकर की ज़िम्मेदारी है। इस बेंच में दूसरे जज जस्टिस ऋषिकेश राय हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच को लेकर कई याचिकाओं की एक साथ सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है।
बोलने की आज़ादीः कहां तक छूट हो
सुप्रीम कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा है कि बोलने की आज़ादी बहुत ही ज़रूरी है लेकिन टीवी चैनल पर हेट स्पीच के लिए छूट नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने ध्यान दिलाया है कि हेट स्पीच के लिए ब्रिटेन में एक टीवी चैनल पर भारी ज़ुर्माना लगाया गया है।
हेट स्पीच को लेकर दायर एक याचिका की पैरवी करने वाले वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े भी कोर्ट की टिप्पणी से सहमत हैं। उन्होंने कहा, "चैनल और राजनेताओं को ऐसी स्पीच से चारा मिलता है। चैनलों को पैसे मिलते हैं और वो बहस में 10 लोगों को एक साथ बैठा देते हैं।''
अपनी नज़रिया न थोपें एंकर
सुप्रीम कोर्ट की बेंच का कहना है, "एंकर को वो बात आगे बढ़ानी चाहिए जो लोग कह रहे हैं, वो नहीं जो वो ख़ुद कहना चाहते हैं। लोकतंत्र के स्तंभ को स्वतंत्र होना चाहिए, उन्हें किसी के आदेश पर नहीं चलना चाहिए।''
नफ़रत को हवा देना मंजूर नहीं
बेंच ने कहा है, ''किसी एंकर का अपना नज़रिया हो सकता है लेकिन बात तब बिगड़ती है जब आपके सामने अलग-अलग राय रखने वाले लोग होते हैं और आप उन्हें बोलने नहीं देते हैं। इस तरह से आप नफ़रत पैदा करते हैं और इससे आपको टीआरपी मिलती है।''
वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने बेंच से कहा कि मंगलवार, 20 सितम्बर, 2022 को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि हम हेट ऑक्सीजन नहीं दे सकते। इसपर जस्टिस हेगड़े ने कहा, ''बिल्कुल नहीं। हम नफ़रती हवा नहीं फैला सकते।''
केंद्र सरकार की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल नटराज ने कोर्ट को बताया कि इसपर 14 राज्यों ने अपने सुझाव भेज दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सभी राज्यों के जवाब एक साथ फ़ाइल करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर, 2022 को होगी।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में अपने भाषण में कोरोना महामारी और यूक्रेन संकट की वजह से उपजे आर्थिक और खाद्य आपूर्ति संकट की चर्चा की। उन्होंने इससे निपटने के उपाय भी बताए।
प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार, 15 सितम्बर, 2022 की रात समरकंद पहुंचे थे। शुक्रवार, 16 सितम्बर, 2022 को वे सम्मेलन में शामिल हुए और अन्य नेताओं के साथ एक तस्वीर ट्वीट की।
आठ नेताओं की इस तस्वीर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे दाहिनी ओर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ सबसे बाईं ओर खड़े दिखे।
एससीओ के प्रभावी नेतृत्व के लिए नरेंद्र मोदी ने उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव का शुक्रिया अदा किया।
मोदी ने कहा कि आज पूरा विश्व महामारी के बाद आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है।
एससीओ के सदस्य देश वैश्विक जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देते हैं। वहीं, विश्व की 40 प्रतिशत जनसंख्या इन देशों में निवास करती हैं। इसलिए इन संकटों से निपटने में एससीओ देशों की भूमिका अहम है।
मोदी ने कहा कि इस वर्ष भारत की अर्थव्यवस्था में 7.5 प्रतिशत वृद्धि की आशा है, जो विश्व की बड़ी इकोनॉमी में सबसे अधिक होगी।
मोदी ने कहा कि भारत प्रत्येक सेक्टर में इनोवेशन का समर्थन कर रहा है और आज देश में 70 हज़ार से अधिक स्टार्टअप्स हैं, जिनमें से 100 से अधिक यूनिकॉर्न (बिलियन डॉलर की कंपनी) हैं।
उन्होंने कहा कि ये अनुभव कई एससीओ सदस्यों के भी काम आ सकता है। इस उद्देश्य के लिए वे 'स्पेशल वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार्टअप्स एंड इनोवेशन' की स्थापना करके एससीओ देशों के साथ अनुभव साझा करने को तैयार हैं।
मोटे अनाज की खेती पर जोर
उन्होंने कहा कि विश्व आज खाद्य सुरक्षा के संकट का सामना कर रहा है। इस समस्या का संभावित समाधान है- मोटे अनाज की खेती और उपभोग को बढ़ावा देना।
यह एक ऐसा सुपरफूड है, जो न सिर्फ़ एससीओ देशों में बल्कि विश्व के कई भागों में हजारों सालों से उगाया जाता है।
उन्होंने कहा कि 2023 को 'यूएन इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स' के रूप में मनाया जाएगा। इसे बढ़ावा देने के लिए एससीओ के अंतर्गत 'मिलेट्स फूड फेस्टिवल' के आयोजन पर विचार किया जाना चाहिए।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज भारत विश्व के 'मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज़्म' के लिए सबसे किफ़ायती जगहों में से एक है।
उन्होंने कहा कि एससीओ देशों के बीच ट्रेडिशनल मेडिसिन पर सहयोग बढ़ाना चाहिए और भारत इसके लिए नए 'एससीओ वर्किंग ग्रुप ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन' की पहल करेगा।
मोदी ने और क्या कहा?
भारत एससीओ सदस्य देशों के बीच अधिक सहयोग और आपसी विश्वास का समर्थन करता है।
महामारी और यूक्रेन संकट से ग्लोबल सप्लाई चेन में कई बाधाएं पैदा हुईं, जिसकी वजह से पूरा विश्व ऊर्जा और खाद्य संकट का सामना कर रहा है।
एससीओ को इसके लिए विश्वस्त, लचीला और विविध चेन विकसित करने के प्रयास करने चाहिए। कनेक्टिविटी के साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि एक-दूसरे को ट्रांजिट का पूरा अधिकार दें।
उन्होंने कहा कि भारत को एक 'मैन्यूफैक्चरिंग हब' बनाने की दिशा में प्रगति हो रही है।
भारत में जंगी जहाज आईएनएस विक्रांत पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भारत की केंद्र की बीजेपी की नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की है।
भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी का एक वीडियो ट्वीट करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि साल 2014 से पहले भी भारत आत्मनिर्भर था।
उन्होंने लिखा, "उस समय के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत 12 अगस्त 2013 को लॉन्च किया था, वहीं प्रधानमंत्री (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) ने इसे आज किया है। साल 2014 से पहले एक आत्मनिर्भर भारत मौजूद था।''
यूपीए-2 में एके एंटनी भारत के रक्षा मंत्री थे। वीडियो में एके एंटनी आईएनएस विक्रांत की लैंडिंग के लिए भारत को बधाई दे रहे हैं और बता रहे हैं कि भारत इसे बनाने वाला दुनिया में छटा देश है।
जयराम रमेश का बयान ऐसे समय पर आया है जब आज भारत अपने सबसे बड़े जंगी जहाज विक्रांत को अपने बेड़े में शामिल कर रहा है।
आईएनएस विक्रांत में खास क्या है?
इसके अंदर 2300 कंपार्टमेंट हैं और आप घुसते ही भूल जाएंगे कि ये एक जहाज़ है। 262 मीटर लंबे और 60 मीटर ऊंचे जहाज़ पर समुद्र की तेज़ लहरों का कोई ख़ास असर महसूस नहीं होता।
जहाज़ को चौड़े रास्ते और सीड़ियां जोड़ते हैं इसलिए एक जगह से दूसरी जगह जाना मुश्किल नहीं है। एयरकंडीशनर बाहर की उमस और गर्मी को अंदर नहीं आने देते।
नए विक्रांत में 1700 लोग काम करेंगे। हालांकि अभी इसमें 2000 और लोग भी काम कर रहे हैं जिनके ऊपर केबल ठीक करने, पॉलिश करने और इंटीरियर के काम की जिम्मेदारी है।
विक्रांत पर एक बड़ी मेडिकल फैसिलिटी है। यहां एक 16 बेड का अस्पताल भी है, दो ऑपरेशन थिएटर हैं, लैब है। आईसीयू हैं और सीटी स्कैन है। यहां पांच डॉक्टर और 15 पैरामेडिक हैं।
इस जहाज़ पर 30 फ़ाइटर प्लेन और हेलीकॉप्टर रखे जा सकते हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 2 सितम्बर, 2022 को केरल के कोच्चि में भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को देश को समर्पित किया।
उन्होंने इस मौक़े पर भारतीय नौसेना के नए ध्वज या निशान का भी अनावरण किया। इस मौक़े पर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केरल के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान, केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और नौसेना अध्यक्ष आर हरिकुमार के साथ कई अन्य लोग मौजूद थे।
इस मौक़े पर आयोजित कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी ने विक्रांत के महत्व को बताते हुए कहा, "आज यहाँ केरल के समुद्री तट पर भारत, हर भारतवासी, एक नए भविष्य के सूर्योदय का साक्षी बन रहा है। विक्रांत विशाल, विराट, विहंगम है। विक्रांत विशिष्ट है, विक्रांत विशेष भी है। विक्रांत केवल एक युद्धपोत नहीं, 21वीं सदी के भारत के परिश्रम, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।''
उन्होंने कहा, ‘‘अगर लक्ष्य दुरन्त हैं, यात्राएं दिगंत हैं, समंदर और चुनौतियाँ अनंत हैं। तो भारत का उत्तर है विक्रांत। आजादी के अमृत महोत्सव का अतुलनीय अमृत है विक्रांत। आत्मनिर्भर होते भारत का अद्वितीय प्रतिबिंब है विक्रांत।''
और मोदी ने क्या कहा?
मोदी के अनुसार, ''आज भारत विश्व के उन देशों में शामिल हो गया है, जो स्वदेशी तकनीक से इतने विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण करता है। आज आईएनएस विक्रांत ने देश को एक नए विश्वास से भर दिया है, देश में एक नया भरोसा पैदा कर दिया है।''
उन्होंने कहा, ‘‘आईएनएस विक्रांत के हर भाग की अपनी एक खूबी है, एक ताक़त है। अपनी एक विकासयात्रा भी है। ये स्वदेशी सामर्थ्य, स्वदेशी संसाधन और स्वदेशी कौशल का प्रतीक है। इसके एयरबेस में जो स्टील लगी है, वो स्टील भी स्वदेशी है।''
पीएम मोदी ने बताया, ‘‘इतिहास गवाह है कि कैसे उस समय ब्रिटिश संसद में क़ानून बनाकर भारतीय जहाज़ों और व्यापारियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए।''
''बूंद-बूंद जल से जैसे विराट समंदर बन जाता है। वैसे ही भारत का एक-एक नागरिक 'वोकल फॉर लोकल' के मंत्र को जीना प्रारंभ कर देगा, तो देश को आत्मनिर्भर बनने में अधिक समय नहीं लगेगा।''
''पिछले समय में इंडो-पैसिफिक रीज़न और इंडियन ओशन में सुरक्षा चिंताओं को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता रहा। लेकिन आज ये क्षेत्र हमारे लिए देश की बड़ी रक्षा प्राथमिकता है। इसलिए हम नौसेना के लिए बजट बढ़ाने से लेकर उसकी क्षमता बढ़ाने तक हर दिशा में काम कर रहे हैं।''
नेवी में महिलाओं को शामिल करने पर मोदी ने क्या कहा?
उन्होंने कहा, "विक्रांत जब हमारे समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उतरेगा, तो उस पर नौसेना की अनेक महिला सैनिक भी तैनात रहेंगी। समंदर की अथाह शक्ति के साथ असीम महिला शक्ति, ये नए भारत की बुलंद पहचान बन रही है।''
''अब इंडियन नेवी ने अपनी सभी शाखाओं को महिलाओं के लिए खोलने का फैसला किया है। जो पाबंदियाँ थीं वो अब हट रही हैं। जैसे समर्थ लहरों के लिए कोई दायरे नहीं होते, वैसे ही भारत की बेटियों के लिए भी अब कोई दायरे या बंधन नहीं होंगे।''
रूस ने कहा, भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है
आईएनएस विक्रांत के नौसेना में शामिल होने पर भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा है कि यह पल भारत के लिए गर्व करने वाला है।
उन्होंने कहा कि भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। इससे पता चलता है कि भारत वैश्विक ताक़त बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। दुनिया को मजबूत भारत की ज़रूरत है।
भारत में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भारत के पहले वर्चुअल स्कूल की लाॅन्चिंग बुधवार, 31 अगस्त, 2022 को कर दी। उन्होंने कहा है कि यह स्कूल उन बच्चों के लिए है जो किसी वजह से स्कूल नहीं जा सकते।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, उन्होंने बताया है कि 'दिल्ली माॅडल वर्चुअल स्कूल' में भारत के किसी कोने के छात्र दाखि़ला ले सकते हैं। इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया बुधवार, 31 अगस्त, 2022 से शुरू हो गई है।
केजरीवाल ने कहा, "आज हम दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के तहत भारत का पहला वर्चुअल स्कूल 'दिल्ली मॉडल वर्चुअल स्कूल' की शुरुआत कर रहे हैं।''
उन्होंने कहा, ''कोई भी छात्र 'दिल्ली मॉडल वर्चुअल स्कूल' में लाइव क्लासेज़ अटेंड कर सकते हैं और रिकॉर्ड किए हुए क्लासेज़ को देख सकते हैं। अभी यह स्कूल कक्षा 9 से 12 तक के लिए शूरू किया जा रहा है।''
केजरीवाल के अनुसार, इस स्कूल में विद्यार्थियों को आईआईटी जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कराई जाएगी। उन्होंने दावा किया है कि यह स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 30 अगस्त, 2022 को साल 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े सभी मामलों को बंद कर दिया। शीर्ष न्यायालय में गुजरात दंगों से जुड़ी 10 याचिकाएँ थीं, जिनमें से एक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से भी दायर की गई थी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस रविंद्र भट्ट और जेबी परदीवाला की बेंच ने कहा कि कोर्ट इस मामले में विशेष जाँच समिति गठित कर चुकी थी और दंगों से जुड़े नौ में से आठ मामलों की सुनवाई भी पूरी हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "चूंकि सभी मामले अब अनावश्यक हो चुके हैं, इसलिए अदालत को अब इनपर सुनवाई करने की ज़रूरत नहीं है।''
एसआईटी की ओर से कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बताया कि नौ में से केवल एक मामले की सुनवाई बाकी है। ये नरोदा गांव इलाके से जुड़ा मामला है और इसमें भी आख़िरी दौर की जिरह जारी है। अन्य मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है या फिर हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के सामने इनको लेकर पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि 8 मामलों में सुनवाई पूरी होने की वजह से अब लंबित याचिकाएं गैर-ज़रूरी हो गई हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि नरोदा दंगा मामले में भी कानून के अनुसार सुनवाई होगी और एसआईटी उसके अनुरूप कार्रवाई कर सकती है।
27 फरवरी, 2002 में अयोध्या से लौट रही साबरमती एक्सप्रेस के कोच एस-6 में गोधरा स्टेशन पर आग लगाने की घटना हुई थी, जिसमें 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी, जिसके बाद गुजरात में दंगे भड़क उठे थे।
गुजरात दंगों में 1000 से ज़्यादा लोग मारे गए थे जिनमें ज़्यादातर मुसलमान थे।
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने को लेकर दायर अवमानना की सभी याचिकाओं को बंद करने का फ़ैसला किया है। ये याचिकाएँ 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराए जाने से रोकने में विफल रहने पर उत्तर प्रदेश सरकार और इसके कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि समय बीत जाने और 2019 में राम मंदिर मुद्दे पर आए फ़ैसले के मद्देनज़र, अवमानना की इन याचिकाओं को बंद किया जाता है।
जस्टिस संजय किशन कौल की अगुआई वाली खंडपीठ ने इन सभी मामलों को बंद करने का फ़ैसला किया। ये मामला असलम भुरे ने दाखिल किया था।
अदालत का कहना है कि इस मामले में याचिकाकर्ता असलम भुरे की मौत 2010 में हो गई थी।
अदालत ने एडवोकेट एमएम कश्यप की उस मांग को ख़ारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता की जगह एमिकस क्यूरी को लाया जाए। छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद धर्मांध हिन्दुओं द्वारा गिरा दी गई थी।
2019 में सुप्रीम कोर्ट का इस पर फ़ैसला आया था। जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच जजों की संविधान पीठ ने 40 दिनों तक इस पर सुनवाई की और 1045 पन्नों का ये फ़ैसला सर्वसम्मति से सुनाया था।
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में बाबरी मस्जिद के स्थल पर पूजा के अधिकार को मंज़ूरी और मस्जिद के लिए दूसरी जगह पर पांच एकड़ ज़मीन देने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निर्माण के लिए रास्ता तैयार कर दिया था।
बाद में भारत की बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार (नरेंद्र मोदी सरकार) ने जस्टिस रंजन गोगोई को भारतीय संसद के उच्च सदन राज्य सभा भेज दिया जिसकी चारों तरफ काफी आलोचना हुई।
जबकि 2020 में एक अन्य फ़ैसले में बाबरी मस्जिद को तोड़ने की साजिश में शामिल होने के आरोपी लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित सभी 32 अभियुक्तों को कोर्ट ने सबूत के अभाव में बरी कर दिया।
भारत के राज्य कर्नाटक में कन्नड़ पाठ्यपुस्तक के एक पाठ में विनायक दामोदर सावरकर को शामिल किया गया है, जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल है। सोशल मीडिया पर इसका मज़ाक भी उड़ाया जा रहा है।
दरअसल इस पाठ में कहा गया है कि सावरकर अंडमान द्वीप समूह की सेलुलर जेल में बुलबुल के पंख पर बैठकर उड़ते थे।
इस पाठ का नाम कलावनु गेद्दावरु है। इसका मतलब है कि जो धारा के ख़िलाफ़ जीतते हैं। ये पाठ केटी गट्टी द्वारा लिखा गया एक यात्रा वृत्तांत है। लेखक केटी गट्टी ने जेल में उस कोठरी का दौरा किया था जहां सावरकर 1911 से 1921 तक कैद रहे।
ये पाठ कर्नाटक में रोहित चक्रतीर्थ की अध्यक्षता वाली पाठ्यपुस्तक संशोधन कमेटी ने संशोधित पाठ्यक्रम में शामिल किया। पाठ्यक्रम में इस पाठ पर विवाद होने के बाद इसे हटा दिया गया है।
जेल में सावरकर के जीवन की चर्चा करते हुए लेखक ने एक पैराग्राफ में जिक्र किया है कि कैसे पीछे की दीवार में एक छोटा सा छेद था जिससे आकाश भी नहीं देखा जा सकता था। कहीं से बुलबुल पक्षी उड़कर इसी छेद से कोठरी में आ जाते थे और सावरकर उनके पंखों पर बैठकर हर रोज मातृभूमि का भ्रमण करते थे।
लेखक और डेटा वैज्ञानिक अरुण कृष्णन ने कहा, ''मैं मानता हूं कि हमें सावरकर को अपने स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने की जरूरत है, लेकिन क्या इसे इस तरीके से किया जाना चाहिए। सावरकर खुद इसे देखकर शर्मिंदा महसूस करते।''
एक अधिकारी की तरफ से ये बताया गया कि लेखक ने इसका इस्तेमाल एक रूपक की तरह किया था।
इसके जवाब में पूर्व कांग्रेस मंत्री प्रियांक खड़गे ने ट्वीट कर कहा कि ऐसा नहीं लगता है कि इसे एक रूपक की तरह कहा गया था।
हालांकि टेक्स्ट बुक सोसायटी के प्रबंध निदेशक मेडगौड़ा ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''यह लेखक की कल्पना है। पाठ्यपुस्तक रिविजन कमेटी ने ये फैसला लिया था। अभी तक हमें सरकार की ओर से कोई निर्देश नहीं मिला है। हम लोग इंतज़ार कर रहे हैं।''
बीजेपी का क्या कहना है
इस मामले पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सी टी रवि ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, "मातृभूमि के प्रति सावरकर के प्रेम ने उन्हें कैसे लोगों से जोड़ा, ये बताने के लिए लेखक ने कल्पना का सहारा लिया। आपको इसे प्रैक्टिकल होकर देखने की ज़रूरत नहीं है। अगर आप कल्पना करें तो आप दुनिया में कई जगहों पर हो सकते हैं।''
कर्नाटक के प्राइमरी एंड सेकेंडरी शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने इस मामले पर टिप्पणी करने से मना कर दिया।
पहले भी हो चुका है विवाद
कुछ महीने पहले भी पाठ्यपुस्तकों का कंटेंट कर्नाटक में बीजेपी सरकार के लिए शर्मिंदगी का कारण बन गया था। उस समय 12वीं शताब्दी के समाज सुधारक और लिंगायत समुदाय के संस्थापक बसवन्ना के कथनों को गलत तरीके से पेश करने को लेकर शिकायत की गई थी।
भारत में रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक ने दावा किया है कि नोएडा के ट्विन टावर के ध्वस्त होने से कंपनी को करीब 500 करोड़ का नुकसान हुआ है।
कंपनी के चेयरमैन आर के अरोड़ा ने रविवार, 28 अगस्त, 2022 को ख़ुद इसकी जानकारी दी।
समाचार एजेंसी पीटीआई को आर के अरोड़ा ने बताया कि ज़मीन खरीदने से लेकर ट्विन टावर के निर्माण, अलग-अलग अप्रूवल के लिए अधिकारियों को किए गए भुगतान से लेकर सालों से बैंकों को दिए जा रहे ब्याज़ की राशि और दोनों टावरों के खरीदारों को दिए गए 12 प्रतिशत ब्याज़ के भुगतान को जोड़ लें तो कंपनी को कुल 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
नोएडा के सेक्टर 93A में बना ट्विन टावर सुपरटेक कंपनी के एमराल्ड प्रोजेक्ट का हिस्सा थी। ट्विन टावर में बने 900 अपार्टमेंट्स की कुल मार्केट वैल्यू क़रीब 700 करोड़ थी।
अरोड़ा ने पीटीआई को बताया कि दोनों ही टावर करीब 8 लाख स्क्वायर फिट की एरिया में बनाई गई थीं।
उन्होंने कहा, ''हमने ये टावर नोएडा विकास प्राधिकरण के अप्रूवल के बाद ही बनवाई थी।''
भारत के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रविवार, 28 अगस्त, 2022 की दोपहर 2.30 बजे करीब 100 मीटर ऊंचे एपेक्स और सेयेन टावरों को गिरा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने एमराल्ड कोर्ट परिसर के अंदर इन दो टावरों के निर्माण में मानदंडों का उल्लंघन पाया था। टावरों को ध्वस्त करने में 3700 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया।
बिलकिस बानो गैंगरेप मामले में 134 रिटायर्ड नौकरशाहों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित को सात पन्नों का खुला पत्र लिखा है।
इस पत्र में मुख्य न्यायाधीश से 14 व्यक्तियों की हत्या और बिलकिस बानो गैंगरेप मामले में 11 दोषियों को समय से पहले रिहा करने के आदेश को रद्द करने की अपील की थी। ये मामला गुजरात में 2002 में हुए दंगों के समय का है।
गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो मामले में दोषियों को समय से पहले 15 अगस्त, 2022 को रिहाई दे दी थी।
कॉन्सिट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप ने चीफ जस्टिस को लिखा कि गुजरात सरकार ने समय से पहले रिहाई का आदेश जारी करने में कई गलतियां की हैं।
पत्र में कहा गया है कि गुजरात सरकार के इस फैसले का प्रभाव न सिर्फ बिलकिस बानो और उसके परिवार बल्कि भारत में सभी महिलाओं की सुरक्षा पर भी पड़ेगा।
कॉन्सिट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप ने चीफ जस्टिस से सभी 11 दोषियों को फिर से जेल में भेजने की अपील की है।
रिटायर्ड नौकरशाहों ने कहा कि इस मामले में जांच सीबीआई ने की थी, इसलिए सजा में छूट देने से पहले केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं ली गई है।









