बांग्लादेश: पुलिस थानों पर भीड़ का हमला, कई थानों में पुलिसवाले नहीं हैं
मंगलवार, 6 अगस्त 2024
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के जतराबाड़ी, बड्डा, मोहम्मदपुर, अदाबार समेत कई पुलिस स्टेशनों पर रात भर हमले और लूटपाट हुई।
सोमवार, 5 अगस्त 2024 को कई थानों पर हमले हुए, कई जगहों पर गुस्साई भीड़ की पुलिस से झड़प भी हुई। कुछ थानों से पुलिसकर्मी भाग गए।
मंगलवार, 6 अगस्त 2024 की सुबह बीबीसी बांग्ला के संवाददाता ने मोहम्मदपुर थाने में जाकर देखा तो पूरा थाना मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका था।
पुलिस स्टेशन के कुछ कमरों से धुआं उठता देखा जा सकता है। पुलिस स्टेशन परिसर में कई जली हुई कारें और फर्नीचर देखे जा सकते हैं।
थाने के अंदर से पंखे, कुर्सियां, टेबल समेत सभी तरह के सामान लूट लिए गए। सुरक्षा संकट के कारण रविवार, 4 अगस्त 2024 को थाने में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी थाना छोड़कर सुरक्षित ठिकाने पर चले गए।
मोहम्मदपुर थाने के एक एसआई ने नाम न छापने की शर्त पर बताया- ''थाने के अंदर मौजूद सभी हथियार और गोला-बारूद लूट लिए गए हैं।''
पास के अडाबर पुलिस स्टेशन को भी लूटा गया।
बताया जाता है कि रविवार, 4 अगस्त 2024 की रात थाने के सामने खड़ी गाड़ियां, मोटरसाइकिलें और थाने के अंदर रखे सामान लूट लिए गए।
इस थाने में भी कोई पुलिसकर्मी नजर नहीं आया। सोमवार, 5 अगस्त 2024 को बड्डा और भटारा थाने पर भी हमला किया गया। आग से थाना भवन जलकर खाक हो गया।
थाने के बाहर रखे सरकारी वाहन और अंदर रखा सारा सामान जला दिया गया। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो में राजारबाग में पुलिस लाइन में सायरन बजते सुनाई दिया।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ढाका के 50 थानों में से ज्यादातर में पुलिस नहीं है।
बांग्लादेश में शेख़ हसीना के पिता के नाम पर बने संग्रहालय को जलाया गया
मंगलवार, 6 अगस्त 2024
बांग्लादेश में सोमवार, 5 अगस्त 2024 को प्रदर्शनकारियों ने धानमंडी स्थित ‘बंगबंधु स्मृति जादूघर’ में तोड़फोड़ की और उसमें आग लगा दी।
बांग्लादेश के राजशाही ज़िले में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की विरासत को संजो कर रखने के लिए ये संग्रहालय बनाया गया था।
इस संग्रहालय में रखी शेख़ हसीना के पिता बंगबंधु शेख़ मुजीबुर्रहमान की तस्वीर को भी प्रदर्शनकारियों ने जला दिया।
बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के गठन पर मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी ने क्या कहा?
मंगलवार, 6 अगस्त 2024
बांग्लादेश में प्रमुख विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के महासचिव मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा है कि अगर मंगलवार, 6 अगस्त 2024 की दोपहर दो बजे तक अंतरिम सरकार का गठन नहीं हुआ तो देश में राजनीतिक शून्य पैदा हो सकता है।
मंगलवार, 6 अगस्त 2024 को ढाका में एक ब्रीफिंग में बीएनपी ने कहा कि उनकी ओर से अंतरिम सरकार के लिए राष्ट्रपति को कोई नाम प्रस्तावित नहीं किया गया है। राष्ट्रपति की ओर से मांगे जाने पर बीएनपी नाम भेजेगी।
बीएनपी ने भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन की ओर से नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस का नाम प्रस्तावित करने के संबंध में ये बात कही।
बीएनपी की ओर से कहा गया है कि उसे छात्रों पर पूरा भरोसा है। लेकिन सर्वदलीय मामलों को महत्व दिया जाना चाहिए।
मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने तीन महीने के भीतर चुनाव कराकर सत्ता सौंपने का भी आग्रह किया। मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से पार्टी की ओर से जल्द देश लौटने का अनुरोध किया गया है।
मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा, ''जो लोग बदले की भावना से संस्थानों पर हमले और लूटपाट कर रहे हैं, वे इसे रोकें। वे आंदोलन के लोग नहीं हैं, बल्कि आंदोलन के विरोधी हैं।''
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के ऊपर हमले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में क्या कहा?
मंगलवार, 6 अगस्त 2024
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के व्यवसाय और मंदिरों को निशाना बनाए जाने पर बयान दिया है।
एस जयशंकर बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर राज्यसभा में बोल रहे थे।
एस जयशंकर ने कहा है कि बांग्लादेश में सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि वहाँ अल्पसंख्यक समुदाय के व्यवसाय और मंदिरों को निशाना बनाया गया है।
"हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के ऊपर नज़र बनाए हुए हैं। भारत में सीमा पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।''
उन्होंने सदन को बताया है कि बांग्लादेश के अलग-अलग इलाक़ों में क़रीब 19 लाख भारतीय रह रहे हैं। हालाँकि क़रीब 10 लाख लोग जुलाई 2024 में ही भारत आ गए हैं और वहाँ फ़िलहाल ज़्यादातर भारतीय छात्र रह गए हैं।
"5 अगस्त 2024 को शेख़ हसीना ने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया। उन्होंने काफ़ी कम समय में भारत में फ़्लाइट लाने के लिए अनुमति मांगी। वो कल (5 अगस्त 2024) शाम में दिल्ली पहुँची हैं।''
एस जयशंकर ने बताया है कि बांग्लादेश में जनवरी 2024 में हुए आम चुनाव के बाद से ही विरोध का सिलसिला शुरू हो गया था।
बांग्लादेश की संसद को भंग किया गया, राष्ट्रपति ने आदेश जारी किया
मंगलवार, 6 अगस्त 2024
बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने आदेश जारी कर देश की संसद को भंग कर दिया है।
राष्ट्रपति कार्यालय के प्रेस विंग की ओर से भेजे गए नोटिस में मंगलवार, 6 अगस्त 2024 को इस बात की जानकारी दी गई।
इस नोटिस में बताया गया है कि तीनों सेनाओं के प्रमुखों, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सिविल सोसाइटी के नुमाइंदों और छात्र आंदोलन के नेताओं की राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के साथ हुई बैठक के बाद राष्ट्रीय संसद को भंग करने का फ़ैसला लिया गया है।
इस संबंध में नोटिफ़िकेशन मंगलवार, 6 अगस्त 2024 को जारी किया जाएगा।
सात जनवरी 2024 को चुनाव के बाद इस संसद का गठन हुआ था।
वहीं सोमवार, 5 अगस्त 2024 को राष्ट्रपति ने एक आदेश जारी कर बीएनपी नेता ख़ालिदा ज़िया समेत कई विपक्षी नेताओं को नज़रबंदी से रिहा कर दिया था।
शेख़ हसीना के देश छोड़ कर भागने पर बांग्लादेश के अख़बारों ने क्या लिखा?
मंगलवार, 6 अगस्त 2024
बांग्लादेश की पीएम शेख़ हसीना के देश छोड़ कर भागने पर वहां के अख़बारों ने अलग-अलग नज़रिये से टिप्पणी की है।
दैनिक 'प्रोथोम आलो' की ख़बर का शीर्षक है- शेख़ हसीना अंत में भी बल प्रयोग करना चाहती थीं।
अख़बार लिखता है कि शेख हसीना अंत में भी अतिरिक्त बल और अधिक रक्तपात के जरिए सत्ता बरकरार रखना चाहती थीं।
'सामयिक' पत्रिका की हेडलाइन है- छात्रों की खून से सनी जीत।
इसमें कहा गया है कि बांग्लादेश में जनता की जीत हुई लेकिन ये छात्रों के खून से सनी हुई है।
'न्यू एज' की ख़बर कुछ इस तरह शुरू होती है- खालिदा की रिहाई, जेएस का विघटन, राष्ट्रीय सरकार जल्द
पहले पन्ने पर लगी इस रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा है कि बीएनपी चेयरपर्सन खालिदा जिया को तुरंत रिहा करने का फैसला किया गया है।
'नया दिगंत' अखबार में बांग्लादेश ग्रामीण बैंक के संस्थापक मोहम्मद यूनुस के हवाले से कहा गया है कि छात्रों की जीत दूसरी आज़ादी है।
जीत के दिन पुलिस फायरिंग में 103 की मौत - युगांतर अखबार के पहले पन्ने पर ये ख़बर छापी गई है।
इसमें लिखा गया है कि प्रधानमंत्री शेख हसीना के सोमवार, 5 अगस्त 2024 को इस्तीफा देने के बाद अवामी लीग के मंत्रियों-सांसदों के आवास, केंद्रीय कार्यालय और अन्य कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई और आगजनी की गई।
''बिजनेस स्टैंडर्ड'' ने लिखा- कर्फ्यू आज ख़त्म; सभी शैक्षणिक, निजी संस्थान, कारखाने भी खुलेंगे। यह बिजनेस स्टैंडर्ड के पहले पन्ने का शीर्षक है।
बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख सलाहकार बनाना चाहते हैं छात्र
मंगलवार, 6 अगस्त 2024
बांग्लादेश में भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के नेता नाहिद इस्लाम ने शेख हसीना के इस्तीफ़े के बाद देश को चलाने के लिए गठित होने वाली अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस का नाम प्रस्तावित किया है।
नाहिद इस्लाम ने राष्ट्रपति से जल्द से जल्द प्रोफेसर यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाने का आग्रह किया।
आंदोलन के समन्वयकों में से एक नाहिद इस्लाम ने मंगलवार, 6 अगस्त 2024 की सुबह सोशल मीडिया फेसबुक पर वीडियो संदेश में मुख्य सलाहकार के नाम का प्रस्ताव रखा।
उस वक़्त उनके साथ कोऑर्डिनेटर आसिफ महमूद और अबू बक्र मजूमदार भी मौजूद थे।
नाहिद इस्लाम ने यह भी कहा कि अंतरिम सरकार का मुखिया बनने के बारे में उनकी प्रोफेसर यूनुस से बात हो चुकी है।
नाहिद इस्लाम ने कहा, ''हमने मोहम्मद यूनुस से भी बात की है। वह छात्रों की अपील पर बांग्लादेश के लिए ये यह अहम जिम्मेदारी लेने के लिए सहमत हो गए हैं।''
भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन ने यह भी कहा कि सलाहकार परिषद के दूसरे सदस्यों के नामों की घोषणा जल्द ही की जाएगी।
इससे पहले सोमवार, 5 अगस्त 2024 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाहिद इस्लाम ने कहा था, ''हम किसी भी तरह की सरकार का समर्थन नहीं करेंगे जब तक कि इसे छात्र-नागरिकों द्वारा समर्थित या प्रस्तावित न किया जाए।''
शेख़ हसीना को राजनीतिक शरण देने के सवाल पर अमेरिका ने क्या कहा?
मंगलवार, 6 अगस्त 2024
अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने कहा है कि बांग्लादेश में कोई भी अंतरिम सरकार लोकतांत्रिक सिद्धांतों, कानून के नियम और बांग्लादेशी लोगों की इच्छा के मुताबिक़ बननी चाहिए।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसे नहीं पता कि शेख़ हसीना ने उनके देश में शरण मांगी है या नहीं।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने पत्रकारों से कहा, ''हम चाहते हैं कि बांग्लादेश के लोग वहां की सरकार का भविष्य तय करें।''
मैथ्यू मिलर ने कहा, ''जवाबदेही कैसी होती है। ये बांग्लादेश के कानून में दिखना चाहिए। हिंसा करने और कानून तोड़ने वालो को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।''
मैथ्यू मिलर ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि शेख़ हसीना ने अमेरिका में राजनीतिक शरण मांगी है या नहीं।
भारत सरकार की सर्वदलीय बैठक में बांग्लादेश के हालात पर चर्चा
मंगलवार, 6 अगस्त 2024
भारत की मोदी सरकार ने बांग्लादेश संकट पर सर्वदलीय बैठक में चर्चा की है।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "बांग्लादेश में फिलहाल जो हो रहा है उस पर हमने संसद में सर्वदलीय बैठक में बात की। हमें खुशी है बांग्लादेश के मामले में सरकार के मौजूदा रवैये को सांसदों का पूरा समर्थन मिला।''
इससे पहले सोमवार, 5 अगस्त 2024 की रात को भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उन्हें बांग्लादेश में सामने आ रहे हालात के बारे में जानकारी दी गई।
कैबिनेट की कमेटी की इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मौजूद थीं।
हसीना के इस्तीफ़ा और भागने के बाद बांग्लादेश के ढाका में लोगों की विशाल भीड़ जश्न मना रही है
सोमवार, 5 अगस्त 2024
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में लोगों की विशाल भीड़ शेख़ हसीना की विदाई का जश्न मना रही है।
बांग्लादेश में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के बाद शेख हसीना ने इस्तीफ़ा देकर देश छोड़ दिया है।
ढाका में लोगों की भीड़ में मौजूद 17 साल की फ़ातिमा ने बीबीसी से कहा, ''हमारा देश फिर से आज़ाद हुआ है। मैं यहाँ अपनी आज़ादी का जश्न मनाने आई हूँ।''
पेशे से व्यवसायी रसूवा का कहना है, ''पिछले कुछ सप्ताह से हो रही घटनाओं से हम निराश थे। हमने बोलने की अपनी आज़ादी खो दी थी।''
रसूवा ने कहा है, "आप देख सकते हैं कि आज सब बाहर निकले हुए हैं। यहाँ जीत का अहसास मौजूद है। लेकन देश के सामने अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार पर काबू पाने की है।''
शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश के सेना प्रमुख ने देश को संबोधित कर शांति की अपील की है। हालाँकि इस अपील के बाद भी देशभर से लूटपाट और आगजनी की ख़बरे आई हैं।
सेनाध्यक्ष वकार-उज़-ज़मान ने कहा है कि देश में अब एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा।
बांग्लादेश में राजनीतिक उथल पुथल के बीच यूरोपीय संघ ने क्या कहा?
सोमवार, 5 अगस्त 2024
यूरोपीय संघ ने बांग्लादेश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को शांतिपूर्ण तरीक़े से सत्ता सौंपने की अपील की है।
ईयू ने कहा है कि बांग्लादेश में मानवाधिकारों को पूरा सम्मान होना चाहिए।
27 देशों के इस समूह के शीर्ष राजनयिक जोसेफ़ बॉरेल ने कहा है, "बांग्लादेश में हो रही घटना पर यूरोपीय संघ क़रीबी नज़र बनाए हुए है।"
ईयू की तरफ से यह बयान बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार उज़-ज़मां के देश के नाम संबोधन के बाद आया है।
ईयू का कहना है, "यूरोपीय संघ बांग्लादेश में हाल के दिनों में प्रदर्शनों में मारे गए लोगों को लेकर काफ़ी दुखी है। हम सेना प्रमुख की बात पर भरोसा करते हैं कि बांग्लादेश के हालात से शांतिपूर्वक निपटा जाएगा और ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से जो भी हत्याएँ हुई हैं उनकी निष्पक्ष जाँच की जाएगी।''
जोसेफ़ बॉरेल ने कहा है कि बांग्लादेश में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जवाबदेही तय करना काफ़ी अहम है और जिन्हें ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से बंदी बनाया गया है उन्हें फौरन रिहा किया जाना चाहिए।
बांग्लादेश में छात्र जुलाई 2024 से ही देश में बड़ी सरकारी नौकरियों में ख़ास लोगों को आरक्षण के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे। इस प्रदर्शन में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई जिसमें जुलाई 2024 में लगभग 300 लोगों की मौत हुई है।
जबकि बीते दो दिनों में 110 से अधिक लोगों की मौत हुई है।
छात्रों के इस प्रदर्शन के बाद सोमवार, 5 अगस्त 2024 को शेख़ हसीना ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है और वो देश छोड़कर चली गई हैं।
बांग्लादेशः शेख़ हसीना के देश छोड़ने के बाद ढाका के हालात क्या हैं?
सोमवार, 5 अगस्त 2024
बांग्लादेश में शेख़ हसीना के इस्तीफ़ा देने और देश छोड़कर चले जाने के बाद कई शहरों में बड़े पैमाने पर लूटपाट और आगजनी की घटनाएं सामना आई हैं।
ढाका में लोगों का हुजूम सड़कों पर उतर पड़ा और पीएम आवास समेत कई इमारतों में तोड़फोड़ हुई है।
तस्वीरों में प्रधानमंत्री कार्यालय से लोगों को सामान उठाकर ले जाते हुए भी देखा गया है। जबकि प्रदर्शनकारी आवास में सोफ़ों पर बैठे और सेल्फ़ी लेते नज़र आए।
इसके अलावा शेख़ हसीना सरकार के गृह मंत्री के आवास में भी तोड़ फोड़ की गई।
बांग्लादेश के सेना प्रमुख ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि देश में एक अंतरिम सरकार बनाई जाएगी और इसके लिए सभी पक्षों से बातचीत की गई है।
बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने चिंता जताई है और देश में लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए फौरन कदम उठाने की बात कही है।
बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के ख़िलाफ़ देश के छात्र जुलाई 2024 से ही आंदोलन कर रहे थे।
यह आंदोलन काफ़ी उग्र और हिंसक हो गया था और जुलाई 2024 में ही 300 से ज़्यादा लोग मारे गए।
जुलाई 2024 में ही शेख़ हसीना ने इस आंदोलन से निपटने के लिए सेना को तैनात किया था, लेकिन इसका आंदोलन पर ज़्यादा असर नहीं पड़ा।
बांग्लादेश के छात्रों ने रविवार, 4 अगस्त 2024 से सविनय अवज्ञा आंदोलन की अपील की थी। इसमें लोगों से तमाम सरकारी टैक्स न देने की अपील की गई थी।
रविवार, 4 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी और इसमें क़रीब 90 लोगों की मौत हुई जबकि सोमवार, 5 अगस्त 2024 को 20 लोगों के मारे जाने की पुलिस ने पुष्टि की है।
शेख़ हसीना के बेटे सजीब वाजिद रॉय ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के कार्यक्रम न्यूज़आवर से बातचीत में बताया है कि उनकी माँ रविवार, 4 अगस्त 2024 को ही अपना पद त्यागने का मन बना चुकी थीं।
शेख़ हसीना के इस्तीफा और देश से भागने के बाद बांग्लादेश की राजधानी ढाका में बड़े पैमाने पर लूटपाट
सोमवार, 5 अगस्त 2024
ढाका में बीबीसी बांग्ला संवाददाता के मुताबिक़ प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के गृह मंत्री के आवास में भी तोड़ फोड़ की है और शहर में बड़े पैमाने पर लूटपाट हो रही है।
इससे पहले देश के सेना प्रमुख ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी।
बांग्लादेश से शेख़ हसीना प्रधानमंत्री का पद छोड़कर देश से भाग गई हैं। उनके भारत की तरफ रवाना होने की ख़बर है।
बांग्लादेश में छात्र जुलाई 2024 से ही देश में बड़ी सरकारी नौकरियों में ख़ास लोगों को आरक्षण के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे। इस प्रदर्शन में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई जिसमें लगभग 300 लोगों की मौत हुई है।
ढाका में मौजूदा माहौल में प्रदर्शनकारियों ने धनमंडी इलाक़े में गृह मंत्री के आवास में भी घुसकर तोड़ फोड़ की है।
बीबीसी बांग्ला सेवा के मुताबिक़ गृह मंत्री के आवास से धुआं निकलता हुआ देखा जा रहा है।
शेख़ हसीना के इस्तीफ़ा देने के बाद प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री कार्यालय में घुस गए।
इससे पहले कई फुटेज सामने आए जिसमें दिख रहा था कि ढाका में शेख़ हसीना के दफ़्तर से प्रदर्शनकारी फर्नीचर उठा कर ले जा रहे हैं।
एक प्रदर्नकारी ने बीबीसी को बताया है कि शेख़ हसीना के पिता मुजीबुर्रहमान की मूर्ति को भी प्रदर्शनकारियों ने नुक़सान पहुँचाया है।
बांग्लादेश की आज़ादी में बड़ी भूमिका निभाने वाले मुजीबुर्रहमान साल 1975 तक देश के राष्ट्रपति थे। उसी दौरान सेना ने उनकी हत्या कर दी थी।
प्रदर्शनकारियों ने मुजीबुर्रहमान की याद में बनाए गए एक म्युजियम को भी आग के हवाले कर दिया है।
इसके अलावा बांग्लादेश के पूर्वी शहर सिलहट में उपायुक्त और एसपी के कार्यालय में भी आगजनी की ख़बरें हैं। वहां कुछ काउंसिलर के मकान में भी आग लगाए जाने की ख़बर है।
बांग्लादेश के हालात पर ब्रिटेन ने कहा, लोकतंत्र बचाने के लिए कदम उठाना ज़रूरी
सोमवार, 5 अगस्त 2024
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के एक प्रवक्ता ने कहा है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द कदम उठाने की ज़रूरत है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने लंदन में पत्रकारों से बातचीत में कहा है कि ''हमने हाल के दिनों में बांग्लादेश में जो हिंसा देखी है उससे प्रधानमंत्री काफ़ी दुखी है।''
उन्होंने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र को सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाया गया है, ताकि बांग्लादेश के लोगों की सुरक्षा और देश में शांति बहाल हो सके।''
बांग्लादेश में उग्र हुए छात्र आंदोलन के बाद शेख़ हसीना को पीएम का पद छोड़ना पड़ा है। वे बांग्लादेश भी छोड़ चुकी हैं।
बांग्लादेश की सेना के चीफ़ ने कहा है कि देश में अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा।
बांग्लादेश: प्रधानमंत्री आवास में लूटपाट, शेख़ मुजीबुर्रहमान की मूर्ति तोड़ने की कोशिश
पीएम शेख़ हसीना के देश छोड़ने के बाद आर्मी चीफ़ ने मीडिया से क्या कहा?
सोमवार, 5 अगस्त 2024
बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार उज़ ज़मान ने देश को संबोधित करते हुए कहा है कि देश में एक अंतरिम सरकार की स्थापना होगी। इसके लिए उन्होंने अलग अलग पक्षों से बात भी की है।
बांग्लादेश में शेख़ हसीना ने प्रधानमंत्री का पद छोड़ दिया है और भारत के अगरतला शहर की तरफ रवाना हो गई हैं।
सेना प्रमुख ने देश को संबोधित करते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। बांग्लादेश में आंदोलन में जो लोग मारे गए हैं, सेना प्रमुख ने उनके लिए न्याय का भरोसा दिया है।
शेख हसीना के ख़िलाफ़ बांग्लादेश के छात्र जुलाई 2024 से ही आंदोलन कर रहे थे। उनकी मांग है कि देश में ऊंचे सरकारी पदों पर नौकरी में आरक्षण को समाप्त किया जाए।
यह आंदोलन काफ़ी हिंसक हो गया था, जिसमें अब तक क़रीब 300 लोगों की मौत हो चुकी है। छात्र बाद में शेख़ हसीना के इस्तीफ़े की मांग पर अड़े हुए थे।
शेख़ हसीना साल 2009 से बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं।
बांग्लादेश में कुछ प्रदर्शनकारियों को ढाका में मौजूद प्रधानमंत्री के सरकारी आवास में घुसते देखा गया है, जबकि हज़ारों छात्रों ने पीएम आवास पर पत्थरबाज़ी भी की है।
बांग्लादेश में प्रधानमंत्री के आवास में प्रदर्शनकारियों ने लूटपाट की
सोमवार, 5 अगस्त 2024
बांग्लादेश में शेख़ हसीना के इस्तीफ़े के बाद प्रदर्शनकारी ढाका स्थित प्रधानमंत्री के आवास में घुस गए हैं। तस्वीरों में प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री आवास का सामान उठाकर ले जाते हुए देखा जा रहा है।
ढाका में मौजूद बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ स्थानीय समाचार चैनल में दिखाए गए एक तस्वीर में लोगों को प्रधानमंत्री आवास से सोफे की तरह एक सामान ले जाते हुए देखा जा सकता है।
बांग्लादेश में पिछले महीने से ही छात्र आंदोलन पर थे, पहले उनकी मांग सरकारी नौकरी में आरक्षण को ख़त्म करने की थी। बाद में वो शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे।
थोड़ी देर पहले ही शेख हसीना अपना इस्तीफ़ा देकर भारत के अगरतला शहर की तरफ रवाना हो गई हैं। उसके बाद बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार उज़ ज़मान ने देश को संबोधित किया है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की है।
बांग्लादेश में प्रदर्शनकारी शेख़ मुजीबुर्रहमान की मूर्ति पर चढ़े, तोड़ने की कोशिश
सोमवार, 5 अगस्त 2024
बांग्लादेश में शेख़ हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर देश से बाहर चले जाने के बाद हज़ारों प्रदर्शकारियों को जश्न मनाते हुए देखा गया है।
ढाका के गणभवन में कुछ प्रदर्शकारी शेख़ मुजीबुर्रहमान की मूर्ति पर भी चढ़ गए और मूर्ति को तोड़ने की कोशिश की।
एक प्रदर्शनकारी ने बीबीसी को बताया है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास में शेख़ मुजीब की मूर्ति को प्रदर्शकारी तोड़ रहे हैं।
मुजीबुर रहमान, शेख़ हसीना के पिता थे। उन्हें बांग्लादेश की आज़ादी का जनक माना जाता है।
शेख़ मुजीब के नेतृत्व में बांग्लादेश ने साल 1971 में पाकिस्तान से आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी।
जुलाई 2024 में बांग्लादेश में सर्वोच्च अदालत के आदेश के बाद आज़ादी की लड़ाई में शामिल हुए लोगों के बच्चों को सरकारी नौकरी में आरक्षण की सुविधा दी गई थी।
इस आदेश के बाद ही देश में आरक्षण के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।
बांग्लादेश में प्रधानमंत्री के आवास पर हज़ारों लोगों की पत्थरबाज़ी, पीएम शेख़ हसीना बांग्लादेश छोड़कर भागीं
बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने भारत के बयान क्या कहा?
सोमवार, 5 अगस्त 2024
नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने कहा है कि भारत का यह कहना कि बांग्लादेश में हो रहे प्रदर्शन देश का आंतरिक मामला है, दुखदायी है।
अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश में हो रहे छात्रों के प्रदर्शन पर भारत के बयान पर निराशा व्यक्त की है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यह अशांति पड़ोसी देशों में भी फैल सकती है।
मोहम्मद यूनुस ने भारत से प्रकाशित होने वाली इंग्लिश दैनिक 'इंडियन एक्सप्रेस' अख़बार से कहा कि भारत ने ऐसा क्यों कहा कि यह बांग्लादेश का आंतरिक मामला है, इससे मुझे दुख हुआ है।
मोहम्मद यूनुस ने कहा है कि जब आपके भाई के घर में आग लगती है तो आप यह कैसे कह सकते हैं कि यह आपका आंतरिक मामला है।
मोहम्मद यूनुस ने कहा, ''कूटनीति में और भी अधिक समृद्ध शब्द हैं अपनी बात रखने के लिए, सिर्फ यह कह देना कि यह आंतरिक मामला है काफी नहीं है।''
जुलाई 2024 में भारत ने बांग्लादेश में सरकारी नौकरी में आरक्षण को लेकर हो रहे छात्रों के हिंसक प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी करने से मना कर दिया था।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से कहा था, ''हम इसे बांग्लादेश का आंतरिक मामला मानते हैं।''
बांग्लादेश में इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं
सोमवार, 5 अगस्त 2024
बांग्लादेश सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट सेवाओं को बंद करने के आदेश दिए हैं। रविवार, 4 अगस्त 2024 की हिंसा से पहले बांग्लादेश में मोबाइल पर इंटरनेट सेवाएँ बंद थीं, जबकि ब्रॉडबैंड सेवा जारी थी।
ख़बरों के मुताबिक़ अब सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट सेवा को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया है।
बांग्लादेश में जुलाई 2024 से ही छात्र आंदोलन पर हैं। इस आंदोलन में देश में भारी हिंसा और आगजनी हुई है। इसमें क़रीब 300 लोगों की मौत भी हो चुकी है।
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ इसमें रविवार, 4 अगस्त 2024 की हिंसा में हुई मौत भी शामिल है।
बांग्लादेश में छात्र सरकारी नौकरी में कोटे को ख़त्म करने की मांग कर रहे हैं, हालाँकि सरकार ने कुछ कोटे को कम ज़रूर किया है लेकिन छात्र अब प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं।
बांग्लादेश में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली न्यूज़ वेबसाइट ढाका ट्रिब्यून और उसकी सहयोगी प्रकाशन कंपनी बांग्ला ट्रिब्यून दोनों ऑफलाइन हो गई हैं।
एक और न्यूज़ वेबसाइट द डेली बांग्ला स्टार भी डाउन है।
बांग्लादेश में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं का बंद होना क्या मायने रखता है?
बांग्लादेश टेली कम्युनिकेशन रेगुलेटरी कमीशन के अनुसार साल 2023 के अंत तक बांग्लादेश में इंटरनेट का प्रयोग करने वाले लोगों की संख्या 13.1 करोड़ थी।
इनमें से लगभग 90 प्रतिशत लोग मोबाइल के माध्यम से इंटरनेट का प्रयोग करते हैं।
अशांति को देखते हुए एक सप्ताह में दूसरी बार है जब बांग्लादेश के एक हिस्से में इंटरनेट सेवाओं को रोका गया है।
बांग्लादेश में प्रधानमंत्री के आवास पर हज़ारों लोगों की पत्थरबाज़ी, पीएम शेख़ हसीना बांग्लादेश छोड़कर भागीं
सोमवार, 5 अगस्त 2024
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना और उनकी बहन ने देश छोड़ दिया है और 'सुरक्षित जगह' पर चली गई हैं।
बीबीसी बांग्लादेश के मुताबिक़ शेख़ हसीना भारत के त्रिपुरा राज्य की राजधानी अगरतला की तरफ रवाना हुई हैं।
इससे पहले बांग्लादेश में जुलाई 2024 से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि देश में ज़्यादातर बड़े सरकारी नौकरी में मौजूद आरक्षण को ख़त्म किया जाए।
हालाँकि छात्रों के आंदोलन के बाद शेख़ हसीना सरकार ने कुछ कोटे को कम ज़रूर किया है, लेकिन लगातार जारी हिंसा के बीच छात्र प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के इस्तीफ़े की मांग पर अड़े हुए थे।
छात्रों के हिंसक आंदोलन में बांग्लादेश में अब तक क़रीब 300 लोगों की मौत हो चुकी है। इस आंदोलन पर काबू पाने के लिए जुलाई 2024 से ही सरकार ने सेना को बुलाया था। रविवार, 4 अगस्त 2024 से छात्रों ने 'सविनय अवज्ञा' आंदोलन की अपील कर रखी थी।
इसमें लोगों से सरकारी टैक्स न देने की अपील की गई थी।
ख़बरों के मुताबिक़ हज़ारों आंदोलनकारी प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के सरकारी आवास पर पत्थरबाज़ी कर रहे हैं।
हमास के शीर्ष राजनीतिक नेता इस्माइल हनिया की हत्या कैसे हुई थी?
शनिवार, 3 अगस्त 2024
ईरान ने बताया है कि हमास के शीर्ष राजनीतिक नेता इस्माइल हनिया की मौत कैसे हुई थी?
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) का कहना है कि हमास के राजनीतिक नेता इस्माइल हनिया की 'हत्या' कम दूरी की मिसाइल से हुई।
आईआरजीसी ने बताया कि मिसाइल में सात किलो का वॉरहेड था और इसे तेहरान के गेस्टहाउस में उनके कमरे के बाहर से दागा गया था।
आईआरजीसी ने यह भी बताया कि इस हत्या के पीछे इसराइल और अमेरिका का हाथ है और सही वक़्त आने पर कड़ा जवाब दिया जाएगा।
बुधवार, 31 जुलाई 2024 को ईरान की राजधानी तेहरान में हमास के शीर्ष राजनीतिक नेता इस्माइल हनिया की एक हमले में मौत हो गई थी।
हनिया ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए तेहरान पहुंचे थे।
बांग्लादेश में आरक्षण के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान कई बच्चे मारे गए: यूनिसेफ़
शनिवार, 3 अगस्त 2024
संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ़ का कहना है कि बांग्लादेश में आरक्षण के ख़िलाफ़ हुए छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कई बच्चों की मौतें हुई हैं।
बच्चों के लिए काम करने वाली यूएन की संस्था यूनिसेफ़ का कहना है कि बांग्लादेश में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कम से कम 32 बच्चों की मौत हुई है।
यूनिसेफ़ के प्रवक्ता का कहना है कि मारे गए बच्चों में से एक की उम्र अभी पांच साल भी नहीं हुई थी। मारे गए अधिकतर लोग सिर्फ़ प्रदर्शन को देख रहे थे।
बीबीसी बांग्ला के सत्यापित किए गए आंकड़ों के मुताबिक़ ये बच्चे उन 200 लोगों में शामिल हैं जो बांग्लादेश में सरकारी नौकरी में आरक्षण को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान मारे गए हैं।
यूनिसेफ़ के दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय निदेशक संजय विजेसेकरा का कहना है कि इस सप्ताह उनकी बांग्लादेश की यात्रा के दौरान उन्हें बच्चों के हिरासत में लिए जाने के बारे में अवगत कराया गया था।
संजय विजेसेकरा ने कहा है कि संगठन ने 32 बच्चों के मारे जाने की पुष्टि की है।
संयुक्त राष्ट्र की संस्था के एक प्रवक्ता ने बताया कि ज़्यादातर मरने वाले लोगों की उम्र 13 या उससे अधिक है। एक बच्चे की उम्र पांच साल से कम और एक बच्चे की उम्र छह से 12 साल के बीच है।
बांग्लादेश के जूनियर सूचना मंत्री मोहम्मद अली अराफ़ात ने कहा है कि सरकार के पास यूनिसेफ़ के दावों के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
मोहम्मद अली अराफ़ात ने बीबीसी को बताया कि उन्हें नहीं मालूम कि यूनिसेफ़ को यह आंकड़े कहां से मिले हैं। मोहम्मद अली अराफ़ात ने कहा, "हमारा रुख़ साफ है, जिस किसी की भी मौत हुई है हम उसकी जांच कराएंगे और अपराधियों को सज़ा देंगे।''
बांग्लादेश के छात्र प्रदर्शन में घायल हुए, मारे गए और गिरफ्तार किए गए लोगों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
हमास के शीर्ष नेता इस्माइल हनिया की हत्या पर हमास ने क्या कहा?
बुधवार, 31 जुलाई 2024
ईरान की राजधानी तेहरान में हुई हमास के शीर्ष नेता इस्माइल हनिया की हत्या पर हमास ने बयान जारी किया है।
हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि हमास इसका जवाब ज़रूर देगा।
हमास संचालित अल अक्सा टेलीविज़न चैनल के अनुसार, मूसा अबू मरज़ौक ने इसे कायरतापूर्ण कार्रवाई क़रार दिया है और कहा है कि इसका जवाब दिया जाएगा।
इसराइल की तरफ़ से इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है लेकिन कुछ नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया दी है।
हेरिटेज मिनिस्टर अमिचाय इलियाहू ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि हनिया की मौत से दुनिया एक बेहतर जगह बनेगी।
अमिचाय इलियाहू ने सोशल मीडिया पर लिखा है। दुनिया से इस तरह की गंदगी साफ़ करने का यही सही तरीक़ा है।
इसराइली डिफेंस फोर्सेस (आईडीएफ़) ने इस पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।
आईडीएफ़ ने सीएनएन और फ्रांस की एक न्यूज़ एजेंसी से कहा है कि विदेशी मीडिया से आ रही हनिया की मौत की ख़बरों पर वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे।
तेहरान में इस्माइल हनिया के निजी आवास पर एक गाइडेड मिसाइल के ज़रिए हमला किया गया था: सऊदी न्यूज़ एजेंसी
बुधवार, 31 जुलाई 2024
हमास के प्रमुख नेता इस्माइल हनिया की मौत किस तरह से हुई इसके बारे में सऊदी अरब की न्यूज़ एजेंसी अल हदात ने बताया है।
अल हदात ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि तेहरान में इस्माइल हनिया के निजी आवास पर एक गाइडेड मिसाइल के ज़रिए हमला किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक़, हमला स्थानीय समयानुसार रात 2 बजे किया गया। यही बात ईरान के सरकारी मीडिया ने भी कही है।
ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड से मान्यता प्राप्त फ़ार्स न्यूज़ ने कहा है कि उत्तरी तेहरान में एक आवास में हनिया ठहरे हुए थे और हवाई हमले में उनकी मौत हुई।
इसराइल से इस्माइल हनिया की हत्या का बदला लेना ईरान का फ़र्ज़ है: अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई
बुधवार, 31 जुलाई 2024
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा है कि वे यह निश्चित करेंगे कि इसराइल को इस्माइल हनिया की कायरतापूर्ण हत्या के लिए पछताना पड़े।
मसूद पेज़ेश्कियान ने यह भी कहा कि ईरान अपनी क्षेत्रीय अखंडता और सम्मान की रक्षा करेगा। समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ मसूद पेज़ेश्कियान ने इस्माइल हनिया को एक बहादुर नेता बताया।
हमास के शीर्ष नेता इस्माइल हनिया क़तर में रहते थे और वे मसूद पेज़ेश्कियान के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए तेहरान की यात्रा पर थे।
वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने भी कहा कि इस्माइल हनिया की हत्या का बदला लेना ईरान का फ़र्ज़ है।
अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से इस्माइल हनिया के लिए कई सारे पोस्ट भी किए।
अपनी एक पोस्ट में अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने लिखा, "शहीद हनिया कई सालों से चल रही इस लड़ाई के लिए अपनी ज़िंदगी को क़ुर्बान करने के लिए तैयार थे। उन्होंने इसके लिए अपने बच्चों और सभी चाहने वालों तक को क़ुर्बान कर दिया।''
अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने एक दूसरी पोस्ट में लिखा, "अपराधी और आतंकवादी इसराइल ने हमारे प्यारे मेहमान को हमारी ही ज़मीन पर शहीद कर दिया। हालांकि इससे हमें कष्ट पहुंचा है लेकिन यही इसराइल को कठोर दंड देने की वजह भी बनेगी।''
हमास नेता इस्माइल हनिया की की हत्या पर अलग-अलग देश भी अपनी प्रतिक्रियाएं ज़ाहिर कर रहे हैं।
जॉर्डन ने कहा कि वह इसराइल के हाथों हमास नेता के हत्या की कड़े शब्दों में निंदा करता है। इससे अब और भी ज़्यादा तनाव और अराजकता पैदा होगी।
लेबनान ने भी इस्माइल हनिया की हत्या की निंदा की है। लेबनान के प्रधानमंत्री नज़ीब मिकाती ने बुधवार, 31 जुलाई 2024 की सुबह अपने मंत्रिमंडल के साथ एक आपात बैठक की।
वहीं चीन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि वे इस हत्या का कड़ा विरोध करते हैं। वे क्षेत्र में अधिक अशांति को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हैं।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन ज़ियान ने कहा कि पूरे ग़ज़ा में एक स्थाई सीज़फ़ायर होना चाहिए।
क़तर ने इस्माइल हनिया की हत्या की निंदा करते हुए उसे एक गंभीर अपराध क़रार दिया।
क़तर के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय और मानवता क़ानून का उल्लंघन बताते हुए यह चेतावनी दी कि यह हत्या और नागरिकों को लगातार निशाना बनाना इस क्षेत्र को और अधिक अराजकता की ओर ले जाएगा और शांति की संभावनाओं को कमज़ोर करेगा।
इसराइल ने अभी तक हमास नेता इस्माइल हनिया की हत्या पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अरब जगत में जंग शुरू होने की आशंकाओं पर अमेरिका के रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
बुधवार, 31 जुलाई 2024
फिलीपींस यात्रा के अंतिम दिन मीडिया से बात करते हुए अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा है, ''मुझे नहीं लगता है कि मिडिल ईस्ट में कोई व्यापक जंग होगी।''
अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा, "मेरा मानना है कि कूटनीति के लिए हमेशा जगह होती है।''
हमास के शीर्ष नेता इस्माइल हनिया की हत्या पर लॉयड ऑस्टिन ने कोई टिप्पणी नहीं की है।
लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि मेरे पास इस मामले पर बोलने के लिए कोई अधिक जानकारी नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि क्षेत्र में बढ़ते हुए तनाव को देखते हुए अमेरिका इसराइल का समर्थन कैसे करेगा? इस पर लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि हमारा उद्देश्य अभी भी तनाव को कम करना है और हालात को सामान्य करना है।
जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय में मध्य पूर्व विषय के प्रोफे़सर नादिर हाशमी ने बीबीसी से कहा है कि हमास के शीर्ष नेता की हत्या से क्षेत्र में पूर्ण रूप से युद्ध भड़कने की आशंका सबसे ज़्यादा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने हमास के नेता इस्माइल हनिया की हत्या पर क्या कहा?
बुधवार, 31 जुलाई 2024
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने हमास के शीर्ष नेता इस्माइल हनिया की हत्या पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
एंटनी ब्लिंकन ने कहा, "जो कुछ भी हुआ ना ही हमारे पास उसकी जानकारी थी और ना ही हम उसमें शामिल थे।''
एंटनी ब्लिंकन ने कहा, "हम इस बारे में अटकलें लगा रहे हैं कि इस घटना का क्या प्रभाव हो सकता है। हालांकि ब्लिंकन ने युद्ध विराम के लिए प्रयास जारी रखने पर भी ज़ोर दिया।''
सिंगापुर में एक कार्यक्रम के दौरान एंटनी ब्लिंकन ने कहा, "युद्ध विराम के महत्व को कोई भी कम नहीं कर सकता है। यह स्पष्ट रूप से बंधकों के हित में है और उन्हें वापस घर लाना है।''
एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि फ़लीस्तीनी भयानक रूप से पीड़ित हैं। बच्चे, महिलाएं और व्यक्ति ग़ज़ा में हमास की गोलीबारी में फंसे हुए हैं।
इस्माइल हनिया की अंतिम यात्रा पर हमास ने क्या कहा?
बुधवार, 31 जुलाई 2024
हमास ने बताया है कि उसके शीर्ष नेता इस्माइल हनिया की अंतिम यात्रा गुरुवार, एक अगस्त 2024 को ईरान की राजधानी तेहरान में निकाली जाएगी।
इसके बाद उनके शव को क़तर की राजधानी दोहा ले जाया जाएगा, जहां वे पिछले कुछ सालों से रह रहे थे।
आख़िर में इस्माइल हनिया का शव दो अगस्त 2024 को क़तर के लूसेल के एक क़ब्रिस्तान में दफ़नाया जाएगा।
बुधवार, 31 जुलाई 2024 को जारी एक बयान में हमास ने कहा था कि तेहरान स्थित आवास पर हुए हमले में इस्माइल हनिया और उनके बॉडीगार्ड की हत्या की गई है।
इस्माइल हनिया क़तर में रहते थे और लंबे वक़्त से वो ग़ज़ा नहीं गए थे।
हमास ने बताया कि इस्माइल हनिया ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने तेहरान गए थे। समारोह मंगलवार, 30 जुलाई 2024 को आयोजित हुआ था।
इस्माइल हनिया की जगह कौन ले सकता है?
बुधवार, 31 जुलाई 2024
हमास चीफ इस्माइल हनिया की हत्या के बाद अब इस पर भी चर्चा शुरू हो गई है कि उनकी जगह कौन ले सकता है?
हालांकि हमास के नए चीफ़ का चुनाव काफ़ी चुनौती भरा हो सकता है और यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे ज़ल्द नहीं निपटाया जा सकता।
हमास के नए चीफ़ के चुनाव में एक ख़तरा यह भी है कि कहीं इससे ईरान समर्थित चरमपंथियों के लिए संगठन में रास्ता ना खुल जाए।
फ़िलहाल येहिया सिनवार इस्माइल हनिया की जगह लेने के लिए सबसे प्रमुख उम्मीदवारों में से एक के तौर पर सामने आए हैं। येहिया सिनवार अभी ग़ज़ा पट्टी में हमास के प्रमुख हैं।
उनको 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हुए हमास हमले का मास्टरमाइंड भी माना जाता है।
येहिया सिनवार के अलावा ख़ालिद मेशाल और ज़हीर जबरीन को भी उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है।
ख़ालिद मेशाल को कम चरमपंथी माना जाता है और वे इस्माइल हनिया से पहले कई सालों तक हमास की कमान भी संभाल चुके हैं। हालांकि ईरान के साथ उनके संबंध कभी भी उतने अच्छे नहीं रहे।
वहीं ज़हीर जबरीन इसराइली जेलों में बंद फ़लस्तीनी क़ैदियों के मामलों की देख-रेख कर रहे हैं। इसके अलावा फ़लस्तीन और इसराइल के बीच क़ैदियों की अदला-बदली पर चल रही बातचीत में भी वे अहम भूमिका निभा रहे हैं।
फिलहाल तीनों ही उम्मीदवार इस्माइल हनिया के डिप्टी के तौर पर काम कर रहे थे।
पाकिस्तान में सैन्य छावनी पर हमले में आठ जवानों और दस चरमपंथियों की मौत
मंगलवार, 16 जुलाई 2024
पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग आईएसपीआर ने बताया है कि सोमवार, 15 जुलाई 2024 को ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के बन्नू शहर में दस चरमपंथियों ने एक सैन्य छावनी पर हमला किया जिसमें आठ जवान मारे गए हैं।
आईएसपीआर के मुताबिक़, "सुरक्षा बलों ने इन चरमपंथियों की छावनी में घुसने की कोशिश को प्रभावी ढंग से नाकाम कर दिया।''
आईएसपीआर ने बताया, "इन आतंकियों ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को इस इलाके में एक दीवार से टकरा दिया।''
आईएसपीआर ने कहा कि इस आत्मघाती विस्फोट के कारण दीवार का एक हिस्सा ढह गया जबकि आसपास के कुछ बुनियादी ढांचे को भी नुक़सान पहुंचा है। विस्फोट में आठ सैनिक मारे गए हैं।
आईएसपीआर ने जानकारी दी कि ऑपरेशन के दौरान सभी दस चरमपंथी मारे गए।
वहीं सेना का कहना है कि सुरक्षाबलों के समय पर और प्रभावी जवाब के कारण सैन्य छावनी को बड़े विनाश से बचा लिया गया और निर्दोष क़ीमती जानें भी बचाई गईं।
हमले के लिए हाफ़िज़ गुल बहादुर समूह को ज़िम्मेदार बताया जा रहा है, जिसे 'गुड तालिबान' के रूप में जाना जाता था।
सेना के मुताबिक़ ये हमला हाफ़िज़ गुल बहादुर ग्रुप ने किया था। पाकिस्तानी सेना के अनुसार, यह ग्रुप अफ़ग़ानिस्तान से ऑपरेट करता है और पहले भी यह ग्रुप पाकिस्तान के ख़िलाफ़ चरमपंथी गतिविधियों के लिए अफ़ग़ानिस्तान की धरती का इस्तेमाल करता रहा है।
आईएसपीआर के मुताबिक़, पाकिस्तान अपनी चिंताओं से अफ़ग़ानिस्तान की अंतरिम सरकार को अवगत कराता रहा है।
आईएसपीआर का कहना है कि पाकिस्तान की सेना हर क़ीमत पर अपनी भूमि और लोगों को आतंकवाद के ख़तरे से बचाएगी और अफ़ग़ानिस्तान से इन ख़तरों के ख़िलाफ़ आवश्यक क़दम उठाएगी।
कुछ महीने पहले पाकिस्तान ने भी सीमा पार अफ़ग़ानिस्तान में इस ग्रुप के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी।









