विदेश

'इस्लामिक स्टेट को अमेरिका खदेड़ देगा और उनका समूल नाश कर देगा'

अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा है कि अमेरिका आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट को खदेड़ देगा और उनका समूल नाश कर देगा ताकि वह उनके देश और देशवासियों के लिये खतरा पैदा नहीं कर सके।

वॉशिंगटन में गुरुवार (23 फरवरी) को आयोजित कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस (सीपीएसी) में अपने संबोधन में पेंस ने कहा, ''हमलोग आईएसआईएस को खदेड़ देंगे और उनके स्रोत का समूल नाश कर देंगे ताकि वह हमारे देश या हमारे परिवारों के लिये खतरा पैदा नहीं कर सके।''

उन्होंने कहा, ''हम अमेरिकी सेना का पुनर्निर्माण शुरू करने जा रहे हैं। हमलोग लोकतंत्र के शस्त्रागार का पुनर्निर्माण करेंगे। हम अपने सैनिकों, नौसैनिकों, वायुसैनिकों, मरीन और तटरक्षकों को संसाधान उपलब्ध करायेंगे और उनके मिशन को पूरा करने एवं घर सुरक्षित लौटने के लिये जरूरी प्रशिक्षण उपलब्ध करायेंगे।''

पेंस ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन कामकाजी परिवारों, छोटे कारोबारियों और किसान परिवारों के लिये टैक्स में कटौती कर एक बार फिर देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने जा रहा है।

पेंस ने कहा, ''हमलोग नौकरियां खत्म करने वाले नियमों को हटा रहे हैं और बराक ओबामा के हस्ताक्षर वाले असंवैधानिक शासकीय आदेशों को रद्द करने जा रहे हैं।''

वहां मौजूद लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच पेंस ने कहा कि ट्रम्प अमेरिका को पहले रखते हैं और उन्होंने अमेरिकी लोगों की नौकरी पर वापसी पहले ही शुरू कर दी हैं।

उन्होंने कहा, ''वह सेना का पुननिर्माण कर रहे हैं और अपने दुश्मनों पर नजर रख रहे हैं। वह कानून प्रवर्तन का समर्थन करते हैं और अवैध आव्रजन को हमेशा के लिए खत्म कर रहे हैं।''

पेंस ने कहा कि ट्रम्प अपने वादों के पक्के इंसान हैं। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि मीडिया, गणमान्य व्यक्तियों, पार्टी के अंदर के लोगों, शीर्ष पद पर पदस्थ हर शख्स ट्रम्प को प्रत्येक कदम पर खारिज करता रहा।

उन्होंने कहा, ''ट्रम्प को खारिज करने के साथ उन्होंने लाखों मेहनकश लोगों को खारिज किया, इस देश को महान बनाने वाले लोगों को भुला दिया और अब तक की सबसे बुरी बात यह है कि वे अब भी उन्हें खारिज करने की कोशिश कर रहे हैं। वे अब भी हम सभी को खारिज करने की कोशिश कर रहे हैं।''

अमेरिका से बाहर तीन लाख भारतीय निकाले जा सकते हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रवासियों और सीमा सुरक्षा पर नए विशेष आदेश जारी किए हैं जिससे तीन लाख अमेरिकी भारतीयों पर देश निकाले का खतरा मंडराने लगा है।

वहीं इस आदेश से बिना दस्तावेजों के गैर-कानूनी रूप से रह रहे कुल 1.10 करोड़ अप्रवासी अमेरिका से बाहर हो सकते हैं। इनमें से ज्यादातर मैक्सिको के लोग हैं।

नए आदेश में छोटी-मोटी चोरी और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई करने का प्रावधान है। वहीं किसी मामले में दोष सिद्ध होने से लेकर आरोपी बनाए जाने और संदिग्ध होने पर भी अप्रवासियों को अमेरिका से बाहर निकाला जा सकता है।

ओबामा प्रशासन के वक्त सीमा से 160 किलोमीटर के भीतर पाए जाने वाले ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाती थी जिन्होंने अमेरिका में 14 दिनों से कम वक्त बिताया हो। पर अब दो साल से कम वक्त तक अमेरिका में रह रहे लोगों को निशाना बनाया जा सकता है। वहीं कोई वीजा की सीमा से अधिक वक्त तक रह रहा हो तो उन्हें भी देश छोड़ना होगा, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। इन कठोर नियमों से सिर्फ बच्चों को छूट दी गई है।

ट्रंप ने इस आदेश को लागू करने की जिम्मेदारी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को सौंपी है। दस हजार नए प्रवासी अधिकारियों और कस्टम एजेंट की नियुक्ति करने की भी तैयारी है। वहीं सीमा पर भी पांच हजार नए एजेंट तैनात किए जाएंगे। नए आदेश में 32 हजार किलोमीटर लंबी मैक्सिको अमेरिकी सीमा पर दीवार बनाने की योजना की भी विस्तृत जानकारी है। मैक्सिको की सीमा से पकड़े गए लोगों को जबरदस्ती मैक्सिको भेजा जाएगा।

हालांकि कानूनी रूप से अमेरिका को ऐसा करने का अधिकार नहीं है।

ट्रंप ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान ही बगैर दस्तावेजों के रह रहे प्रवासियों पर निशाना साधा था। पिछले हफ्ते पुलिस की ओर से की गई छापेमारी में ऐसे 600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ट्रंप समर्थक इन प्रवासियों पर अमेरिका में अपराध को बढ़ावा देने के आरोप लगते है, जबकि सरकारी आंकड़ों में दावा किया जाता रहा है कि मूल अमेरिकियों की तुलना में अप्रवासी अपराध में कम लिप्त होते हैं।

चरसद्दा अदालत पर हुए हमले के दौरान 3 हमलावर मारे गए

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नवाज़ शरीफ पाकिस्तान में इमरजेंसी लगा सकते हैं !

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ देश में आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं। पनामा लीक्स में पीएम नवाज का नाम आने के बाद वे सुप्रीम कोर्ट में मुकदमे का सामना कर रहे हैं और वह इस मुकदमे को टालने के लिए इमरजेंसी की घोषणा कर सकते हैं।

इस समय उनके पास वाजिब कारण हैं क्योंकि देश में पिछले पांच दिनों में दस बड़े आतंकवादी हमले हुए हैं। पीएम नवाज के पास यह अधिकार है कि वे देश के आंतरिक हालातों का हवाला देकर इमरजेंसी की कार्रवाई कर सकते हैं, इससे वे पनामा लीक्स के मामले को भी टालने में सफल हो जाएंगे।

पाकिस्तान के न्यूज चैनल में शुक्रवार को आए कार्यक्रम 'लाइव विद डॉ शाहिद मसूद' में वहां के कानूनविद ने इस बात को बताया है कि पीएम नवाज को यह अधिकार है कि वह आंतरिक हालातों के कारण देश पर इमरजेंसी थोप सकते हैं।

डॉ शाहिद मसूद ने इस कार्यक्रम में पूर्व जस्टिस सईद उस्मानी से बात की। उन्होंने सवाल पूछा कि अगर पीएम नवाज को देश में इमरजेंसी लगानी हो तो उसका तरीका क्या है? इस पर जस्टिस उस्मानी ने कहा कि इमरजेंसी लगाने के लिए देश के आंतरिक या बाहरी हालात खराब हो। इस समय देश के आंतरिक हालात खराब है। पिछले पांच दिनों में दस हमले हो चुके हैं इसलिए पीएम के पास अधिकार है कि पीएम आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन उनको इमरजेंसी लगाने के बाद इसको दस दिनों के अंदर संसद के पास जाना होगा। संसद इसको छह महीने से लेकर एक साल तक देश में आपातकाल की अवधि दे सकती है।

इसके बाद डॉ शाहिद मसूद ने जस्टिस उस्मानी से पूछा कि इस दौरान क्या जनता के बुनियादी अधिकार रद्द हो जाते है? इस पर जस्टिस उस्मानी ने  कहा कि इमरजेंसी संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत लगती है। इसी के साथ एक और अनुच्छेद 233 है जिसमें सरकार के पास यह अधिकार आता है कि वह लोगों के बुनियादी अधिकार को निलंबित कर सकती है। यदि किसी कोर्ट में बुनियादी अधिकारों पर कोई सुनवाई चल रही हो तो तो उसको भी टाला जा सकता है।

इसके बाद शाहिद मसूद ने पूछा कि पीएम नवाज शरीफ पर पनामा लीक्स का मुकदमा अनुच्छेद 184 (3) के तहत चल रहा है, क्या वह भी टाला जा सकता है? इस पर जस्टिस ने कहा कि इमरजेंसी लगाने के बाद नवाज के खिलाफ जो भी कोर्ट की सुनवाई है, उसको एक साल तक के लिए टाला जा सकता है। इसके साथ जस्टिस उस्मानी ने साफ किया कि यदि पीएम इमरजेंसी लगाते हैं तो उनको दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में पास करवाना होगा।

इमरजेंसी के मामले पर पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के वकील शाह खाबर ने भी सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि पीएम नवाज के पास पूरी पॉवर है कि वे देश में इमरजेंसी थोप सकते हैं और पनामा लीक्स के मामले को लटकाया जा सकता हैं।

डॉ शाहिद मसूद वहीं शख्स है जिन्होंने कुछ समय पहले कहा था कि पाकिस्तान में कुछ बड़ा होने वाला है। उनको पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने नोटिस कानूनी नोटिस भेजा था जिसमें उनसे इस साल 24 जनवरी को दिखाए प्रोग्राम में उनके खिलाफ गलत बयानबाजी के लिए माफी मांगने और साथ ही 1 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की गई थी। जिस पर पाकिस्तान इलेक्ट्रानिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी ने उनके शो को तीस दिनों के लिए बैन कर दिया था और 1 करोड़ का जुर्माना लगाया था। हालांकि मसूद को राहत देते हुए इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी है।

पनामा पेपर्स से यह खुलासा हुआ है कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार के लोगों ने विदेशों में कंपनियां खोल रखी हैं। हालांकि पीएम नवाज शरीफ और उनके परिवार ने इन आरोपों का खंडन किया था। इमरान खान के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियां इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही थी।

पाकिस्तान में सूफी दरगाह पर फिदायीन हमला, 100 मरे, आईएसआईएस ने जिम्मेदारी ली

पाकिस्तान में सिंध प्रांत के शहवान शहर की लाल शाहबाज कलंदर दरगाह में आत्मघाती बम हमले में 100 से अधिक लोग मारे गये हैं और 250 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

इस हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने ली है। मेडिकल सुविधाओं को मुहैया कराने वाले संगठन इदी के एक प्रवक्ता ने कहा कि हमले से प्रतीत होता है कि हमला दरगाह में महिलाओं वाले क्षेत्र को निशाना बनाकर किया गया था। इस भाग में 30 बच्चों समेत कई महिलाओं की मौत हुई है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शब्बीर सत्तार ने बताया कि इस आत्मघाती हमले को एक व्यक्ति ने अंजाम दिया जो भीड़भाड़ वाली इस दरगाह में घुस गया और वहां जाकर उसने खुद को विस्फोट से उड़ा दिया।

उन्होंने बताया, "इस हमले में कम से कम 100 लोगों की मौत हुई और 250 से अधिक लोग जख्मी हैं और मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती है।"

पाकिस्तान में एक सप्ताह के भीतर यह पांचवां आतंकी हमला हुआ है। पुलिस के अनुसार, यह धमाका सूफी रस्म धमाल के दौरान हुआ। विस्फोट के समय दरगाह के परिसर के भीतर सैकड़ों की संख्या में जायरीन मौजूद थे।

तालुका अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक मोइनुद्दीन सिददीकी के हवाले से डान ने खबर दी है कि कम से कम 72 शवों और 250 से अधिक घायलों को अस्पताल लाया गया है। इलाके के अस्पतालों में आपात स्थिति घोषित कर दी गई है। घटनास्थल से अस्पतालों की दूरी बहुत अधिक है। सबसे निकट चिकित्सा परिसर 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तारिक विलायत ने बताया कि शुरुआती रिपोर्ट से पता चलता है कि यह आत्मघाती विस्फोट है। विस्फोट दरगाह में महिलाओं के लिए आरक्षित क्षेत्र में हुआ। बचाव अधिकारियों ने कहा कि पर्याप्त एंबुलेंस नहीं होने की वजह से मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।

सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने तत्काल बचाव अभियान चलाने का आदेश दिया और सरकार ने हैदराबाद एवं जमशुरू जिलों के अस्पतालों में आपात स्थिति घोषित कर दी है। लाल शाहबाज कलंदर सूफी दार्शनिक-शायर थे।

सूफी दरगाह पर यह हमला उस वक्त हुआ है जब एक दिन पहले ही पाकिस्तान सरकार ने देश में आतंकी हमलों में हुई बढ़ोत्तरी को देखते हुए उन सभी तत्वों को मिटाने का संकल्प लिया था जो देश में शांति एवं सुरक्षा पर खतरा पैदा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने देश में सुरक्षा हालात की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की जिसमें यह फैसला लिया गया।

रूस का क्रूज मिसाइल तैनात करना आईएनएफ संधि का उल्लंघन: अमेरिका

रूस ने हथियार नियंत्रण संधि इंटरमीडिएट रेंज न्यक्लियर फोर्सेज (आईएनएफ) संधि के उल्लंघन की अमेरिकी अधिकारियों की शिकायतों के बावजूद एक नए क्रूज मिसाइल को तैनात किया है। इस संधि के तहत अमेरिका और रूस पर जमीनी स्तर पर मध्यम दूरी की मिसाइलों को तैनात करने पर पाबंदी है।

ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने आज यह जानकारी दी। रूस ने गुप्त रूप से एसएससी-8 नामक क्रूज मिसाइल को तैनात किया है जिसका पिछले कई वर्षों से विकास और परीक्षण किया जाता रहा है।

अमेरिकी अधिकारी ने इस संबंध में सबसे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए कहा कि रूस द्वारा 1987 के मध्यम दूरी के आईएनएफ के उल्लंघन की अमेरिका की शिकायतों के बावजूद इसे तैनात कर दिया गया।

अमेरिकी अधिकारी ने अपना नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर कहा, ''हमें मालूम है कि यह पुराना मुद्दा है। ओबामा प्रशासन के समय हुई आईएनएफ संधि का उल्लंघन कर रूस इन चीजों का विकास और परीक्षण करता रहा है।''

अमेरिकी अधिकारी ने कहा, ''मुद्दा अब मिसाइल की तैनाती को लेकर है और यह आईएनएफ संधि का और भी बड़ा उल्लंघन है।''

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट पर रूस के रक्षा मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है। हालांकि रूस ने पूर्व में संधि के उल्लंघन के आरोपों को साफ नकार दिया था।

भारत की हवा चीन और पाकिस्तान से भी अधिक जहरीली

भारत प्रदूषण के मामले में अपने दोनों पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान को टक्कर दे रहा है। एक नए अध्ययन से पता चला है कि भारत में हवा इतनी जहरीली होती जा रही है कि इससे हर साल 10 लाख से अधिक लोग समय से पहले दम तोड़ रहे हैं।

यह अमरीका स्थित हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट ने किया है। शोध में कहा गया है कि इनमें से अधिकतर मौतें हवा में मौजूद बेहद सूक्ष्म कणों की वजह से हो रही हैं जो अस्थमा और फेफड़ों के कैंसर को जन्म देते हैं।

खास बात ये है कि रिपोर्ट में वायु प्रदूषण से मरने वालों की जो संख्या बताई गई है, वो पिछले साल विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी आंकड़ों से कहीं अधिक हैं।

संस्थान का दावा है कि उसने ये आंकड़े अध्ययन की नई तकनीकों के जरिये हासिल किए हैं।

विश्व के नेताओं के साथ ट्रम्प का अजीब हैण्डशेक्स

विश्व के नेताओं के साथ ट्रम्प का अजीब हैण्डशेक्स 

लाहौर आत्मघाती हमले में 16 की मौत, मरने वालों में डीआईजी और एसएसपी शामिल

पाकिस्तान में सोमवार शाम को पंजाब विधानसभा के बाहर हुए आत्मघाती हमले में 16 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में लाहौर के डीआईजी यातायात मोबिन अहमद और एसएसपी जाहिद गोंदल, डीएसपी परवेज बट शामिल हैं। करीब 58 लोग घायल हुए हैं।

लाहौर के पुलिस अधिकारी अमीन वैंस ने कहा कि माल रोड में विधानसभा के चेयरिंग क्रास गेट पर हुए हमले में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। गेट पर सैकड़ों केमिस्ट और दवा कंपनियों के प्रतिनिधि कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

वैंस के मुताबिक, जैसे ही मोबिन अहमद हड़ताल खत्म करने का ऐलान करने वाले थे, तभी एक मोटरसाइकिल सवार स्टेज के पास पहुंच गया और धमाका कर दिया।

उन्होंने कहा कि डीआईजी मोबिन अहमद इससे पहले बलूचिस्तान में एक आतंकी हमले में बाल-बाल बचे थे।

पंजाब के कानून मंत्री राणा सनाउल्लाह ने कहा कि धमाका इतना तेज था कि उसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। हमले के बाद सेना ने इलाके की घेराबंदी कर दी और अस्पतालों में इमरजेंसी लागू कर दी गई है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेनाध्यक्ष जनरल आसिफ कमर बाजवा ने हमले की कड़ी निंदा की है।

राष्ट्रीय आतंकरोधी एजेंसी ने सात फरवरी को अलर्ट में पंजाब सरकार को लाहौर विधानसभा और गवर्नर हाउस के निकट आतंकी हमले की चेतावनी जारी की थी।

प्रांतीय सरकार ने कहा कि अलर्ट के बाद कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, लेकिन भीड़ के बीच हमलावर ने सबको चकमा दे दिया। हालांकि विधानसभा के बाहर प्रदर्शन की इजाजत क्यों दी गई, यह सवाल उठ रहा है।

आतंकी संगठन जमात-अल-अहरार ने लाहौर हमले की जिम्मेदारी ली है। सुरक्षा एजेंसियां एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। हमला ऐसे वक्त हुआ, जब लाहौर में पाकिस्तान सुपर लीग का फाइनल होने वाला है।

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