विदेश

अमरीका ने कोरियाई समुद्र में युद्धपोत भेजे

अमरीकी सेना ने हमला करने में सक्षम युद्धपोतों को कोरियाई प्रायद्वीप की तरफ बढ़ने का आदेश दिया है। हमला करने में सक्षम कार्ल विनसन टुकड़ी में युद्धपोत के अलावा एयरक्राफ्ट कैरियर भी शामिल है।

अमरीकी पैसिफिक कमांड का कहना था कि दक्षिण पैसिफिक की तरफ कूच करती ये तैनाती एक बुद्धिमानी भरा कदम है जो दिखाता है कि हम इस क्षेत्र में पूरी तरह तैयार हैं।

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि उत्तर कोरिया की परमाणु धमकियों से निपटने के लिए अमरीका अकेले सक्षम है।

अमरीकी पैसिफिक कमान के प्रवक्ता डेव बेनहम का कहना था, ''इस क्षेत्र में सबसे बड़ा खतरा उत्तर कोरिया है क्योंकि वो गैर ज़िम्मेदार है और वो अपने मिसाइल परीक्षणों और परमाणु हथियार बनाने के प्रयासों से खतरा पैदा कर रहा है।''

इससे पहले उत्तर कोरिया ने कहा था कि सीरिया पर अमरीकी मिसाइल हमले इस बात को साबित करते हैं कि अपने परमाणु कार्यक्रम को और मजबूत करने का उत्तर कोरिया का फ़ैसला सही था।

उतर कोरिया की सरकारी मीडिया ने एक सरकारी प्रवक्ता के हवाले से कहा, ''शुक्रवार को हुआ हमला एक संप्रभु राज्य के ख़िलाफ़ असहनीय आक्रामकता है।''

बीते बुधवार को सीरिया के विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाके में संदिग्ध रासायनिक हमला हुआ था। इसमें 89 लोग मारे गए थे।

इसके बाद अमरीका ने शुक्रवार को टॉमहॉक मिसाइलों से सीरिया के कुछ ठिकानों पर हमला किया।

उत्तर कोरिया ने हाल के दिनों में परमाणु मिसाइल विकसित करने के लिए कई परीक्षण किए हैं।

संयुक्त राष्ट्र, उत्तर कोरिया पर मिसाइल और परमाणु परीक्षण को लेकर उसपर कई प्रतिबंध लगा चुका है। लेकिन उत्तर कोरिया ने इन प्रतिबंधों को बार-बार तोड़ा है। उन्होंने लगातार अधिक शक्तिशाली परमाणु बमों के सफल परीक्षण किए हैं।

उनका दावा है कि उन्होंने मिसाइल में फिट किए जा सकने लायक परमाणु बम बनाने में क़ामयाबी हासिल कर ली है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने उत्तर कोरिया के इन दावों पर संदेह जताए हैं।

शुक्रवार को अमरीकी मिसाइलों ने सीरियाई हवाई पट्टी को निशाना बनाया जिसमें छह लोग मारे गए।

सीरियाई सरकार के किसी केंद्र पर यह पहला अमरीकी हमला था। हालांकि वो पहले भी इस इलाक़े में इस्लामिक स्टेट को निशाना बना चुका है।

केसीएनए समाचार एजेंसी ने उत्तर कोरिया के एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा है, ''सीरिया के ख़िलाफ़ अमरीकी मिसाइल हमला साफ तौर पर एक संप्रभु राष्ट्र के ख़िलाफ़ असहनीय आक्रामकता है और हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।''

उन्होंने कहा, ''आज की हकीक़त ये बताती है कि हमें ताक़त के ख़िलाफ़ ताक़त के साथ खड़ा होना होगा और इसने ये लाखों बार साबित किया है कि परमाणु हथियार विकसित करने का हमारा फैसला एक सही चुनाव था।''

अधिकारी के अनुसार, ''केवल हमारी अपनी सैन्य शक्ति ही हमें साम्राज्यवादी आक्रामकता से बचा पाएगी। अमरीकी आक्रामकता का मुक़ाबला करने के लिए हम अपनी सैन्य ताक़त को बढ़ाना जारी रखेंगे।''

शेख हसीना देश को भारत के हाथों बेच रही हैं: खालिदा जिया

बांग्लादेश की विपक्षी नेता खालिदा जिया ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री शेख हसीना जिंदगी भर सत्ता में बने रहने का सपना पूरा करने के लिए देश को भारत के हाथों बेच रही हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री एवं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की प्रमुख खालिदा ने कल रात पार्टी के एक कार्यक्रम में कहा, ''हसीना जिंदगी भर सत्ता में रहने का सपना देखती हैं। उन्होंने इसके लिए ढेर सारी चीजें कीं। उन्होंने देश के लिए कुछ नहीं रखा, सभी बेच डाला।''

बीएनपी प्रमुख का यह बयान भारत और बांग्लादेश के बीच रक्षा समेत 22 समझौतों पर दस्तखत होने के कुछ ही घंटे बाद आई। चार दिन की भारत यात्रा पर आई हसीना और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में रक्षा और असैनिक परमाणु समेत प्रमुख क्षेत्रों में 22 संधियां की गईं।

बहरहाल, लंबे समय से लंबित तीस्ता जल बंटवारा पर समझौता नहीं हुआ, मोदी ने जल्द हल के लिए अपनी सरकार की वचनबद्धता दोहराई।

खालिदा ने कहा, ''ऐसा प्रतीत होता है कि वह (हसीना) बाकी देश को बेच डालेंगी ... लेकिन विश्व इतिहास बताता है कि देश बेचने के बाद कोई नहीं बचता।''

हसीना के साथ व्यापक बातचीत करने के बाद नरेन्द्र मोदी ने बांग्लादेश के लिए साढ़े चार अरब डालर की नई रियाअती ऋण सुविधाओं और सैन्य खरीदारी के लिए 50 करोड़ डालर की अतिरिक्त सहायता की घोषणा की।

खालिदा और हसीना के बीच तीखी प्रतिद्वंद्विता है और पिछले तीन दशक से उनके इस प्रतिद्वंद्विता का जहर बांग्लादेशी सियायत में भी फैल रहा है। इससे पहले, कल बीएनपी ने रक्षा समझौते पर दस्तखत को 'जनता और देश के साथ चरम विश्वासघात' करार दिया और पार्टी के प्रवक्ता रूहुल कबीर रिज्वी ने दावा किया कि इस घटनाक्रम से बांग्लादेश की सुरक्षा व्यवस्था भारत के सामने बेपरदा हो जाएगी।

रिज्वी ने कहा, ''करारनामों पर दस्तखत के बाद हमारी सुरक्षा और वजूद दांव पर लग गए हैं।''

सत्तारूढ़ अवामी लीग के महासचिव एवं सड़क परिवहन एवं पुल मंत्री ओबैदुल कादर ने बीएनपी से कहा कि वह भारत और बांग्लादेश के बीच हस्ताक्षरित करारनामों का ब्योरा जाने बगैर कोई टिप्पणी नहीं करे।

कादर ने कहा, ''करार में कुछ ऐसा नहीं है जिसे छिपाया जाए क्योंकि यह प्रौद्योगिकी का युग है।''

मिस्र की चर्च में धमाका: 21 लोगों की मौत, 40 घायल

उत्तरी मिस्र के तंता शहर में पाम रविवार को एक कॉप्टिक चर्च में हुए एक विस्फोट में कम से कम 21 लोग मारे गए और 59 घायल हो गए हैं।

एक सुरक्षा सूत्र ने कहा, सेंट जॉर्ज मार गिर्गिस चर्च में अगली सीट के नीचे विस्फोटक लगाया गया था, और मुख्य प्रार्थना कक्ष में इसमें विस्फोट कर दिया गया।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, ''मृतकों की संख्या में वृद्धि हो सकती है क्योंकि घायलों में कई की हालत गंभीर है।''

विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया, ''मिस्र में फिर आतंकवादी हमला, इस बार पाम रविवार को। मिस्रवासियों के खिलाफ एक और अप्रिय घटना, लेकिन असफल प्रयास है।''

पाम रविवार ईसाई कैलेंडर का एक सबसे पवित्र दिन है। सीएनएस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में दिख रहा है कि हमले के तुरंत बाद चर्च के बाहर भीड़ जमा हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि विस्फोट से एक दीवार पूरी तरह नष्ट हो गई है।

राष्ट्रपति अब्दल फतह अल-सीसी ने कहा कि सैन्य अस्पतालों में घायलों को भर्ती कराया गया है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, एम्बुलेंस अथॉरिटी के प्रमुख, मगदी अवाद ने कहा कि उत्तरी काहिरा से लगभग 120 किमी दूर स्थित चर्च में कम से कम 26 एम्बुलेंस तैनात किए गए हैं। किसी समूह या व्यक्ति ने अभी तक हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

कॉप्टिक ईसाई मिस्र की आबादी के 10 प्रतिशत है। वे सदियों से बहुसंख्य मुस्लिम आबादी के साथ शांतिपूर्वक रह रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल दिसंबर में एक प्रार्थना सभा के दौरान काहिरा में एक कॉप्टिक कैथ्रेडल में हुए एक बम विस्फोट में 25 लोग मारे गए थे।

पोप फ्रांसिस इस महीने काहिरा का दौरा करने वाले हैं और वहां वह कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स चर्च के प्रमुख सहित विभिन्न धर्मगुरुओं से मुलाकात करेंगे।

नस्लीय हिंसा को लेकर भारत के ख‍िलाफ हुए अफ्रीकी राजदूत

अफ्रीकी स्टूडेंट्स पर भारत में हो रहे लगातार हमलों को लेकर अफ्रीकी राजदूतों ने चिंता जताई है। इसे नस्लीय और दूसरे देशों से आए लोगों के प्रति नफरत का व्यवहार बताते हुए उन्होंने इसपर भारत के खिलाफ एक्शन लेने की बात कही है। अफ्रीकी राजदूतों ने इस मामले पर अंतर्राष्ट्रीय जांच कमिटी बैठाने के साथ कहा है कि मुद्दे पर भारत पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है।

बता दें कि 27 मार्च को भारी मात्रा में ड्रग्स लेने के चलते 17 वर्षीय भारतीय लड़के की मौत पर एक ग्रुप ने ग्रेटर नोएडा में कैंडल मार्च निकाला। इस मामले में पुलिस ने कुछ नाइजीरियन लोगों से पूछताछ कर उन्हें छोड़ दिया था। इससे गुस्साए लोगों ने कैंडल मार्च के दौरान 4 नाइजीरियन छात्रों पर हमला कर दिया।

हालांकि, पुलिस ने भी इस मामले में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार करने के अलावा करीब 1200 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

इस मामले पर नाइजीरियन उच्च आयोग के अधिकारियों ने घायलों से मुलाकात की और इसे उनके लिए असुरक्षित बताया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय से भी बातचीत जारी है।

एक शीर्ष अफ्रीकी राजनयिक ने ग्रेटर नोएडा हमले को नस्लीय बताते हुए कहा, ''अफ्रीकी लोगों के बारे में लोगों के बीच पर्याप्त जागरूकता नहीं है। यही सबसे बड़ी दिक्कत है।''

वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले का कहना है कि सरकार भारत में रह रहे सभी विदेशी लोगों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हालात को नियंत्रण में रखने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं।

बागले ने कहा कि विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने नाइजीरियन उच्चायुक्त से इसपर उचित कदम उठाने को लेकर बातचीत की है।

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल के मुताबिक, इस तरह की घटना अफ्रीका में भारत की छवि को खराब कर सकता है।

लोगों का आरोप है कि अफ्रीकी देशों से स्टूडेंट वीजा पर भारत आने वाले अधिकांश छात्र नशे के कारोबार में जुटे हैं। ये लोग अफ्रीकी देशों से नशीले पदार्थ लाकर भारतीय छात्रों के बीच नशीले पदार्थ सप्लाई करते हैं। वहीं दूरिस्ट वीजा पर लड़कियां भारत में आकर सेक्स के धंधों में लिप्त रहती है। विदेशी नागरिक होने की वजह से पुलिस भी इनपर जल्द कार्रवाई करने से हिचकती है।

रूस पर आतंकी हमला: 2 मेट्रो स्टेशनों पर धमाके, 10 की मौत

रूस के पीटर्सबर्ग शहर में दो मेट्रो स्टेशनों (पीटर्सबर्ग मेट्रो स्टेशन और सनाया मेट्रो स्टेशन) पर हुए भीषण धमाकों से 10 लोगों की मौत हो गई। इस धमाके में कम से कम 50 लोगों के घायल होने की भी खबर है।

स्थानीय मीडिया में इन धमाकों को आतंकी हमला बताया गया है।

घटनास्थल की जो भयावह तस्वीरें सामने आई हैं उनमें लोग खून से लथपथ भागते हुए दिख रहे हैं।

यह धमाका ब्लू लाइन अंडरग्राउंड मेट्रो पर हुआ। घटना के बाद से इलाके के तीन मेट्रो स्टेशनों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।

स्टेशन को पूरी तरह से खाली करा लिया गया है और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना सोमवार को स्थानीय समयानुसार दिन के करीब 2:30 बजे की है। यानी भारतीय समयानुसार शाम करीब 5 बजे धमाके हुए।

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने मामले की हर एंगल से जांच कराने की बात कही है। उन्होंने हादसे में हताहत हुए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

रूस की आतंकवाद निरोधी समिति ने कहा कि यह एक आईईडी धमाका था जो संभवत: किसी डिब्बे में छिपाकर रखा गया था।

धमाके के लिए इस्तेमाल किए गए बम में कीलें भरी थीं। धमाके के बाद सभी मेट्रो ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया।

पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि धमाके के बाद सेन्नाया प्लोश्चड मेट्रो स्टेशन पर आठ एंबुलेस खड़ी थीं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दो मेट्रो स्टेशनों पर धमाके की बात कही गई।

धमाका ऐसे समय हुआ है जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के साथ बैठक करने के लिए सेंट पीटर्सबर्ग में मौजूद थे। पीटर्सबर्ग मॉस्को के बाद रूस का दूसरा सबसे बड़ा शहर है।

इससे पहले 2010 में रूस में दो महिला आत्मघाती हमलावरों ने मास्को की मेट्रो ट्रेन पर बम धमाके किए थे जिसमें 38 लोगों की मौत हो गई थी।

इसी तरह 2004 में रूस में जब कुछ इस्लामिक कट्टरपंथियों ने एक स्कूल के छात्रों को बंधक बना लिया था तो घटना में आतंकियों समेत 330 लोग मारे गए थे जिनमें आधे से ज्यादा बच्चे थे।

2002 में आतंकियों ने एक थिएटर में घुसकर लोगों को बंधक बना लिया था जिसमें पुलिस कार्रवाई होने पर 120 लोगों की मौत हुई थी।

ये घटनाएं रूस में तब सामने आई थीं जब बतौर प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन ने 1999 में मुस्लिम इलाके चेचन्या की अलगाववादी सरकार को कुचलने का अभियान चलाया था।

इसके बाद राष्ट्रपति बनने के बाद से पुतिन अब तक विद्रोहियों के खिलाफ सख्ती बनाए हुए हैं।

पोलैंड में भारतीय छात्र को हमलावरों ने बेरहमी से पीटा

पोलैंड में भारतीय छात्र को कुछ हमलावरों ने बेरहमी से पीटा है। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्विटर पर इस घटना की जानकारी मिली थी। हालांकि इस ट्वीट में युवक की मौत की सूचना थी। सुषमा ने तुरंत पोलैंड में भारतीय राजदूत से विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

भारतीय राजदूत ने बाद में बताया कि युवक जिंदा है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

पोलैंड के पोज्नान शहर में बुधवार को अज्ञात हमलावरों ने 21 वर्षीय भारतीय युवक पर हमला बोल दिया। वह अपने एक दोस्त के साथ एक अन्य मित्र के घर जा रहा था। हमलावरों ने बाजार में उसे पीटा और धक्का दिया, जिसके चलते उसका सिर पास की एक दुकान से टकराया और खून बहने लगा। युवक ने मदद के लिए गुहार भी लगाई, लेकिन कोई मदद को आगे नहीं आया।

यही नहीं, युवक की मदद के लिए पहुंची पुलिस को भी पूरा मामला समझने में करीब 24 घंटे लग गए। भारतीय युवक अंग्रेजी और हिंदी भाषा ही जानता था, जबकि पुलिसकर्मी सिर्फ पोलिश भाषा समझते थे।

युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि अभी हमले के पीछे के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को सबसे पहले एक ट्वीट से घटना की जानकारी मिली। इसमें युवक की मौत का दावा किया गया था। सुषमा ने पोलैंड में भारतीय राजदूत से घटना की पूरी जानकारी मांगी।

देर शाम राजदूत अजय बिसारिया ने सुषमा को बताया कि युवक जिंदा है। कुछ लोगों ने उस पर बुधवार को हमला किया था, पोलिश पुलिस मामले की जांच कर रही है।

आतंकियों के छिपने की जगह न बने व्हाट्सऐप

ब्रिटेन के गृह मंत्री एंबर रुड का कहना है कि चरमपंथी के लिए छिपने की कोई भी जगह नहीं हो सकती है और ख़ुफ़िया एजेंसियों को व्हाट्सऐप के एनक्रिप्टेड मैसेज पढ़ने की अनुमति होनी चाहिए।

ख़ालिद मसूद नाम के शख़्स ने इसी हफ्ते लंदन के वेस्टमिंस्टर में एक हमले में तीन लोगों की जान ले ली थी। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में वो मारा गया था।

हमले से दो मिनट पहले तक उनका फ़ोन व्हाट्सएप से कनेक्टेड था।

ब्रिटेन के गृह मंत्री का कहना है कि वो जल्द ही इस सेवाएं देने वाली कंपनियों से मुलाक़ात करेंगी और उनसे साथ मिलकर काम करने के लिए कहेंगी।

वहीं लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन का कहना है कि जाँच एजेंसियों के पास पहले से ही बहुत-सी शक्तियां हैं।

उन्होंने कहा कि 'जानने के अधिकार' और लोगों की 'निजता के अधिकार' के बीच संतुलन होना चाहिए।

बीबीसी वन के एंड्रयू मार शो पर बात करते हुए ब्रिटेन के गृह मंत्री एंबर रुड ने कहा, ''ये पूरी तरह अस्वीकार्य है। आतंकवादियों के छिपने के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।''

उन्होंने कहा, ''हमें सुनिश्चित करना है कि व्हाट्सऐप और ऐसी अन्य कंपनियां आतंकवादियों को गुप्त तरीके से बात करने की कोई जगह न दे पाएं।''

रड ने कहा, ''हमें इस स्थिति में ये सुनिश्चित करना है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों के पास व्हाट्सऐप के एनक्रिप्टेड संदेश पढ़ने की क्षमता हो।''

व्हाट्सऐप पर भेजे जाने वाले सभी संदेश दोनों ओर से एनक्रिप्टेड होते हैं। यानी इन संदेशों को भेजने वालों के अलावा और कोई नहीं पढ़ सकता है।

इसका मतलब ये है कि ख़ुफ़िया एजेंसियां और ख़ुद व्हाट्सऐप भी इस एप्लीकेशन के ज़रिए भेजे जाने वाले संदेशों को नहीं पढ़ सकती है।

इस बारे में व्हाट्सऐप का कहना है कि लोगों की निजता की सुरक्षा करना उसका आधार मूल्य है।

एपल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक भी कह चुके हैं कि सरकार का हमें अपने उत्पादों की जांच के लिए पिछला रास्ता खुला छोड़ने के लिए मजबूर करना ग़लत है।

एपल के उत्पाद भी पूरी तरह एनक्रिप्टेड होते हैं। यानी एपल के फ़ोन में रखी गई जानकारी को फ़ोन मालिक के अलावा और कोई नहीं पढ़ सकता है।

रड का कहना है, ''मैं टिम कुक से कहूंगी कि वो दोबारा सोचें कि किन तरीकों से एपल के फ़ोन पर व्हाट्सएप होने की स्थिति में वो हमारी मदद कर सकते हैं।''

यूरोपोल के निदेशक रॉब वैनराइट भी रड की मांगों का समर्थन करते हैं।

उन्होंने कहा, ''मैं इस बात से सहमत हूं कि हमारे संदेशों को पढ़ने की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कुछ न कुछ किया जाना चाहिए।''

52 वर्षीय ख़ालिद मसूद ने लंदन में लोगों पर कार चढ़ा दी थी। इस हमले में 52 लोग घायल हुए थे और तीन की मौत हो गई थी।

शनिवार को मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने कहा था कि मसूद ने ये हमला अकेले ही अंजाम दिया।

स्कॉटलैंड यार्ड ने कहा था कि ऐसा भी मुमकिन है कि कभी ये पता ही न चल पाए कि हमले के पीछे उसका मक़सद क्या था ?

बांग्लादेश के सिलहट में दो धमाके, तीन की मौत

बांग्लादेश के अधिकारियों के मुताबिक, देश के उत्तर-पूर्वी शहर सिलहट में हुए दो धमाकों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई।

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, मरने वालों में एक पुलिस अधिकारी शामिल है। धमाके में कई लोग घायल भी हुए हैं।

अधिकारियों ने जानकारी दी है कि धमाके एक इमारत के पास हुए हैं जहां संदिग्ध चरमपंथियों और सेना के कमांडो के बीच संघर्ष जारी है।

सिलहट मेट्रोपोलिटन पुलिस के प्रवक्ता ज़िदान अल मूसा ने बताया कि धमाके में इंस्पेक्टर चौधरी अबू कैसर की मौत हो गई। मारे गए बाकी दो लोगों में एक हमलावर हो सकता है।

मूसा ने कहा कि सिलहट में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सेना अभियान चला रही है।

संदिग्ध चरमपंथियों ने सुरक्षा बलों पर बमों से हमला किया। इस वारदात में 40 लोग घायल हो गए हैं।

स्थानीय पत्रकार अहमद नूर ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि जहां बम हमला हुआ, वे वहां से थोड़ी ही दूर थे।

सेना के एक अधिकारी ने बताया कि पूरे शहर में चरमपंथियों की धर पकड़ चल रही है।

पुलिस ने सिलहट के दक्षिण सुरमा इलाक़े में एक पांच मंज़िला मकान की दो दिनों से घेराबंदी कर रखी थी। उसके बाद शनिवार को उस मकान पर कमांडो ने हमला कर दिया।

इसके पहले सेना ने जानकारी दी थी कि उन्होंने चरमपंथियों के कब्ज़े वाली इमारत से 78 आम लोगों को बाहर निकाला है। इनमें 21 बच्चे शामिल हैं।

सेना के प्रवक्ता लेफ़्टीनेंट कर्नल रशीदुल हसन ने बताया, चरमपंथियों की संख्या छह के करीब है। उनके पास बड़ी मात्रा में विस्फोटक और बम हैं। 

पाकिस्तान में बदल रहा आतंकी हमले का स्वरूप

पाकिस्तान में पहले आतंकी सिर्फ सरकारी संस्थानों और सुरक्षाकर्मीयों पर ही हमले करते थे, लेकिन अब उनके हमले का पैमाना लगातार बढ़ता और बदलता जा रहा है। अब वह ज्यादातर धार्मिक संस्थान और आम लोगों को निशाना बनाने लगे हैं।

पाकिस्तान के जाने-माने अखबार 'डॉन' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इससे वह सरकार पर और अधिक दबाव बनाना चाहते हैं। डॉन ने पिछले तीन-चार साल में पाकिस्तान में हुए कुछ बड़े आतंकी हमलों के तरीके पर यह रिपोर्ट तैयार की है जिसके मुताबिक, आतंकी लगातार बड़े पैमाने पर भीड़ को निशाना बनाकर हमले कर रहे हैं ताकि ज्यादा नुकसान हो।

आतंकियों का मानना है कि सेना या पुलिस पर हमला करने से सिर्फ राज्य प्रभावित होता है और उनके हमले का ज्यादा प्रचार-प्रसार नहीं हो पाता। लेकिन जैसे ही आम लोग उसका शिकार बनते हैं। आतंक की चर्चा होने लगती है और सरकार पर भी दबाव बनता है। यहां तक कि ऐसी खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरने लगती हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2007 के बाद से आतंकियों ने अपने साथियों को सजा देने के लिए कोर्ट पर गुस्सा निकाला। इस दौरान पाकिस्तान में कुल 11 बार कोर्ट को निशाना बनाया गया। खैबर पख्तूनवा में आठ, क्वेटा में दो और इस्लामाबाद एक हमला किया गया। इन हमलों में 62 वकील और तीन जज समेत लगभग 170 लोग मारे गए।

सबसे खास बात यह है कि पाकिस्तान में जो उलेमा धार्मिक स्थलों पर हमले की कड़ी निंदा करते हैं वो कोर्ट पर हमले के समय कुछ नहीं बोलते।

2005 से 2017 के बीच पाकिस्तान के लगभग कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आतंकी हमले हुए। अब्दुल्ला शाह गाजी, शाह नूरानी, बारी इमाम, बाबा फरीद समेत कुल सात श्राइन को निशाना बनाया गया। इन हमलों में कम से कम 269 लोगों की जान गई। इन हमलों से साफ जाहिर होता है कि आतंकी हमले में धर्म कभी आड़े नहीं आता। आतंकी अफगानिस्तान से लेकर सीरिया और इराक में समान रूप से हमले कर रहे हैं। उनका काम सिर्फ दहशत फैलाना है।

ढाका एयरपोर्ट के पुलिस गेट पर आत्मघाती हमला

बांग्लादेश की राजधानी ढाका का इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुक्रवार को बड़ी तबाही से बच गया। एयरपोर्ट की पुलिस चेक पोस्ट पर रोके जाने के बाद एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया।

हमले में किसी अन्य के मारे जाने की अभी खबर नहीं है।

सशस्त्र बल के सहायक कमांडर तंजिला अख्तर ने कहा कि शाम सात बजे यह धमाका हुआ। हमलावर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। एयरपोर्ट के सौ मीटर के दायरे में यह धमाका हुआ है।

हवाई अड्डे के पास सैन्य शिविर पर आत्मघाती हमले के एक हफ्ते बाद यह घटना हुई है। आईएस ने उस हमले की जिम्मेदारी ली थी।

ताजा हमले के बाद हवाई अड्डों, कारागारों समेत अहम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

ढाका पुलिस के प्रवक्ता मसुदुर रहमान ने कहा कि पुलिस और सैन्य कर्मियों को पास आता देख हमलावर ने धमाका कर दिया। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है।