विदेश

मॉरीशस को 50 करोड़ डॉलर का कर्ज देगा भारत

भारत ने आज मारीशस को 50 करोड़ डालर की ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इसके साथ ही दोनों देशों ने हिन्द महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मारीशस के प्रधानमंत्री प्राविंद जगन्नाथ के बीच विस्तृत बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किये गये।

नई दिल्ली में जारी एक वक्तव्य के मुताबिक, मोदी ने कहा कि वह और जगन्नाथ इस बात पर सहमत हुए हैं कि आर्थिक अवसरों का लाभ उठाने और दोनों देशों के लोगों को सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिये हिन्द महासागर में परंपरागत और गैर-परंपरागत खतरों से निपटने के लिये प्रभावी व्यवस्था किया जाना जरूरी है।

भारत के प्रधानमंत्री ने कहा, ''हमें समुद्री डकैती की घटनाओं के प्रति निगरानी बढ़ानी होगी। इससे हमारे व्यापार और पर्यटन पर असर पड़ता है। नशीले पदार्थों और मानव तस्करी, अवैध मछली पालन तथा समुद्री संसाधनों के अन्य प्रकार के अवैध दोहन पर भी नजर रखनी होगी।''

उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय समुद्रीय समझौते से आपसी सहयोग और क्षमता मजबूत होगी।

मारीशस के प्रधानमंत्री जगन्नाथ ने इस अवसर पर कहा, दोनों देशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री आवागमन के मार्ग सुरक्षित हो और समुद्री डकैती, अवैध तरीके से मछली पकड़ने और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिये नियमित रूप से निगरानी रखनी होगी।

इस अवसर पर तटरक्षक नौवहन जहाज गार्डियन की परिचालन आयु का विस्तार करने का भी फैसला किया गया। यह जहाज भारत ने मारीशस को एक अनुदान सहायता कार्यक्रम के तहत दिया है। मोदी ने मार्च 2015 में अपनी मारीशस यात्रा के दौरान अपतटीय पहरेदारी के लिये भारत में निर्मित और वित्तपोषित बारा कुडा नौवहन जलयान को मारीशस तटरक्षा के लिये सुपुर्द किया था।

दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद चार समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये। समुद्री सुरक्षा समझौते के अलावा तीन अन्य समझौते किये गये। इनमें मारीशस में सिविल सेवा कालेज स्थापित किये जाने, समुद्रीय शोध कार्यों में सहयोग और एक समझौता अमेरिकी डालर में ऋण सुविधा के बारे में किया गया।

भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि मारीशस को ऋण सुविधा का समझौता उसके विकास के प्रति हमारी मजबूत और लगातार प्रतिबद्धता का बेहतर उदाहरण है।

दोनों देशों ने व्यापार और निवेश सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का भी फैसला किया है। मोदी ने कहा, ''मारीशस में चल रही विकास गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी को लेकर भारत को गर्व है।'' उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग पर भी जोर दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता के लिये मारीशस के समर्थन को दोहराते हुये जगन्नाथ ने चागोस आर्कीपिलेगो पर उनके देश के दावे का नयी दिल्ली द्वारा समर्थन किये जाने का स्वागत किया। हिन्द महासागर स्थित चागोस आर्कीपिलेगो पर ब्रिटेन और मारीशस दोनों दावा करते हैं।

वृहद आर्थिक सहयोग एवं भागीदारी समझौते (सीईसीपीए) पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई। जगन्नाथ ने इस मुद्दे पर बातचीत शुरू होने को लेकर संतोष जताते हुए कहा कि मारीशस को यह बातचीत इस साल के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है।

सीरिया के मायादीन में अमरीकी हवाई हमला, 80 की मौत

सीरिया में कार्यकर्ताओं के मुताबिक़, चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के नियंत्रण वाले एक शहर में अमरीकी हवाई हमलों में कम से कम 80 लोगों की मौत हो गई है।

सीरिया में हताहतों के बारे में जानकारी देने वाले एक समूह ने बताया कि मायादीन शहर में अमरीकी हमले में मारे गए लोगों में आईएस लड़ाकों के रिश्तेदार शामिल हैं। इनमें कई बच्चे भी शामिल हैं।

अमरीकी सेना ने भी इस इलाक़े में हवाई हमले की पुष्टि की है और कहा है कि नुक़सान की समीक्षा की जा रही है।

पिछले तीन दिन में मायादीन में कई बार हवाई बमबारी की ख़बरें आईं हैं।

संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने लड़ाई में शामिल सभी देशों की वायुसेना से हमले के समय नागरिकों और सैनिक अड्डों के फ़र्क को बारीकी से ध्यान में रखने की अपील की है।

इससे पहले गुरुवार को अमरीकी सेना ने इस बात की पुष्टि की थी कि मार्च में इराक़ के मूसल में अमरीकी सेना के हवाई हमले में एक माह के दौरान कम से कम 105 आम लोगों की मौत हुई थी।

मिस्र की राजधानी कायरो में 24 ईसाइयों की गोली मारकर हत्या

मिस्र की राजधानी कायरो में अज्ञात बंदूकधारियों ने कत्लेआम मचाया है। यहां ईसाइयों को ले जा रही एक बस पर मिलिट्री की वेश भूषा में खड़े तैयार हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दी। इस हमले में 24 लोगों की मौत हो गई है और 25 लोग घायल हो गये हैं।

फाक्स न्यूज के मुताबिक, आठ से दस हमलावरों ने दक्षिण कायरो से गुजर रही बस पर गोलियां चलाई। मुस्लिम बहुल देश मिस्र में पिछले कुछ दिनों से ईसाई समुदाय के लोग कट्टरपंथियों के आसान शिकार हो गये हैं।

अब तक किसी ग्रुप ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। लेकिन मिस्र के कोप्टिक क्रिश्चयन आतंकी संगठन इस्लामिक ग्रुप के निशाने पर रहे हैं। सुरक्षा कर्मी हमलावरों की तलाश कर रहे हैं। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंचीं।

बुधवार (24 मई) को ही कायरो में अमेरिकी दूतावास ने चेतावनी जारी कर कहा था कि दूतावास की जानकारी के मुताबिक, हसम ग्रुप नाम के एक आतंकी संगठन ने हमले की धमकी दी थी।

मिस्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता खालिद मजाहिद ने बताया कि हमले में 24 ईसाइयों की मौत हो गई और 27 अन्य घायल हो गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये हमला कायरो से 160 मील दूर नील नदी के किनारे मिनाया नाम के जगह पर हुआ है। मिस्र के मिनाया में कॉप्टिक क्रिश्चयन की संख्या सबसे ज्यादा है। इस जगह पर पिछले कुछ सालों में धार्मिक तनाव बढ़ गया है।

पिछले महीने 9 अप्रैल को टंटा और अलेक्जेंड्रिया में गिरजाघरों को निशाना बनाकर किये गए दो आत्मघाती हमलों में कम से कम 46 व्यक्तियों की मौत हो गई थी।

नौशेरा में भारतीय कार्रवाई का पाकिस्तान ने खंडन किया

भारतीय सेना ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में की गई कार्रवाई में पाकिस्तान की चौकियों को नुकसान पहुँचा है।

हालांकि पाकिस्तान ने भारत की तरफ़ से हुई ऐसी किसी भी कार्रवाई से इनकार किया है।

एसपीआर के एक अधिकारी मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने ट्वीट किया है, ''नौशेरा में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी पोस्ट को नष्ट करने और आम नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना की फ़ायरिंग के भारत के दावे ग़लत हैं।''

इससे पहले भारतीय सेना के मेजर जनरल अशोक नरूला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान ने 20 और 21 मई कौ नौशेरा सेक्टर में कार्रवाई की थी, इसके जवाब में भारतीय सेना ने ये कार्रवाई की है।

उन्होंने कहा कि गर्मियों में अब बर्फ़ पिघलने से घुसपैठ बढ़ने की आशंका है, लेकिन भारतीय सेना की तैयारी पूरी है।

नौशेरा में हुई कार्रवाई में चार चरमपंथियों को मारा गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि हमारी कोशिश जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल करना है। इसके लिए ज़रूरी है कि नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ को प्रभावी तरीके से रोका जाए।

इस मौके पर भारतीय सेना ने एक वीडियो भी जारी किया है। तकरीबन 21 सेकंड के इस वीडियो में 10-11 धमाके होते दिख रहे हैं।

भारतीय सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अशोक नरूला ने कहा कि नियंत्रण रेखा पर भारत की स्थिति पाकिस्तान की तुलना में म़जबूत है। पाकिस्तानी सेना हथियारबंद घुसपैठियों को भारत के कश्मीर में दाखिल कराने में मदद करती है।

भारतीय सेना की तरफ से जारी किए गए इस वीडियो पर पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने नई दिल्ली में न्यूज़ चैनल 'सीएनएन न्यूज़ 18' से कहा कि उन्हें पाकिस्तान की तरफ से इसके बारे में जानकारी नहीं मिली है इसलिए वे फिलहाल कुछ नहीं कह सकते।

हालांकि उन्होंने कहा, ''इससे दो चीजें साबित होती हैं। पहला ये कि जम्मू और कश्मीर दोनों देशों के बीच केंद्रीय मुद्दा है और दूसरा अगर आज कुछ होता है तो ये समझने की जरूरत है कि दोनों देशों को इस लंबे समय से पेंडिंग मुद्दे को सुलझाने के लिए बातचीत की मेज पर बैठने की कितनी जरूरत है। ये दुर्भाग्य की बात है कि संघर्ष विराम के बावजूद नियंत्रण रेखा पर तनाव बना हुआ है इसलिए ये महत्वपूर्ण है कि ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए।''

जम्मू-कश्मीर के पुंछ में पिछले दिनों भारतीय सेना के दो जवानों की हत्या कर उनके शवों के साथ बर्बरता की गई थी।

भारतीय सेना ने उस समय कहा था कि इसका माकूल जवाब दिया जाएगा।

भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने जवानों के शव क्षत-विक्षत किए जाने की निंदा की थी और कहा था कि युद्ध के दौरान भी कहीं ऐसी हरकतें नहीं होती हैं।

हालांकि पाकिस्तान ने इस तरह की घटना में हाथ होने से साफ़ इनकार किया था।

मैनचेस्टर ब्लास्ट: आईएस ने ली हमले की जिम्मेदारी

ब्रिटेन के मैनचेस्टर में हुए ब्लास्ट की जिम्मेदारी आतंकी संगठन आईएस (इस्लामिक स्टेट) ने ली है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी एएफपी ने दी है।

सोमवार (22 मई) की रात को मैनचेस्टर में हुए विस्फोट में 22 लोगों की मौत हो गई और करीब 50 अन्य लोग घायल हो गए थे।

हमले के वक्त मैनचेस्टर एरीना में अमेरिकी पॉप सिंगर अरियाना ग्रैंडे का कार्यक्रम हो रहा था। हमले पर उन्होंने भी दुख जताया।

23 वर्षीया गायिका अरियाना ग्रैंडे ने घटना के बाद ट्वीट किया, ''टूट गई हूँ। दिल की गहराइयों से बहुत-बहुत माफी मांगती हूँ। मेरे पास शब्द नहीं है।''

हमले में आईएस का नाम आने से पहले ही उसके समर्थक इंटरनेट पर खुशियां मनाने लगे थे। हमले के बाद आईएस के समर्थकों ने खुशी जाहिर की और आपस में बधाई संदेश भेजे थे।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक स्टेट से जुड़े ट्वीटर अकाउंट से धमाके से जुड़े हैशटैग का इस्तेमाल करके बधाई संदेश भेजे गए और दूसरी जगहों पर ऐसे ही हमलों के लिए हौसला अफजाई की गई।

भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मैनचेस्टर धमाके पर शोक व्यक्त करते हुए पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा कि भारत दुख की इस घडी में ब्रिटेन के साथ है।

कुलभूषण जाधव को फांसी पर लटकाएंगे: पाकिस्तानी सुरक्षा विशेषज्ञ

कुलभूषण जाधव की फाँसी की सजा पर इंटरनेशनल कोर्ट द्वारा रोक लगा दिये जाने के बावजूद पाकिस्तान के रवैये के प्रति भारत की चिंता बरकरार है। भारत को इस बात की चिंता सता रही है कि पाकिस्तान में कुलभूषण जाधव के साथ अनहोनी हो सकती है।

भारत को इस बात की भी आशंका है कि पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट के फैसले का सम्मान नहीं भी कर सकता है। भारत की इस आशंका की वजह भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले पाकिस्तान के कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों का वो बयान है जो उन्होंने इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले के बाद दिया है।

पाकिस्तान के सुरक्षा विशेषज्ञ ने सैयद तारिक पीरजादा ने कहा है कि  हमें इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले की परवाह नहीं है, हम कुलभूषण जाधव को फांसी पर जरूर चढ़ाएंगे।

अंग्रेजी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ से बातचीत में पीरजादा ने कहा, ''हमें इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की परवाह नहीं है, हम जाधव को फाँसी पर चढ़ा देंगे।''

बता दें कि सैयद तारिक पीरजादा पाकिस्तान के न्यूज़ चैनलों पर आने वाले सुरक्षा विशेषज्ञ हैं और अक्सर भारत के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं।

बता दें कि कश्मीर के राजनीतिक विश्लेषक सुशील पंडित ने भी कहा है कि हम वैसे देश के साथ डील कर रहे हैं जहां प्रधानमंत्री को भी फांसी दे दी जाती है। लिहाजा भारत को काफी सावधान रहना पड़ेगा।

बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो को पाकिस्तान में फांसी दे दी गई थी। जुल्फिकार अली भुट्टो 1973 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे। जनरल जिया उल हक ने उनका तख्तापलट कर दिया था और उन पर विरोधी नेता की हत्या का आरोप लगाकर मुकदमा चलाया गया और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। पाकिस्तान ने तमाम अंतर्राष्ट्रीय दबावों की परवाह ना करते हुए जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर लटका दिया था।

अंतरराष्ट्रीय अदालत ने कुलभूषण जाधव की मौत की सज़ा पर रोक लगाई

हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पाकिस्तान की जेल में बंद भारत के कुलभूषण जाधव की मौत की सज़ा पर रोक लगा दी है।

अदालत ने कहा कि जब तक उनके मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता उन्हें फांसी नहीं दी जा सकती।

कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जासूसी के आरोप में फांसी की सज़ा सुनाई है। जहाँ पाकिस्तान का आरोप है कि वो जासूस हैं, वहीं भारत कहता है कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया।  
भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव लगभग एक साल से पाकिस्तान में कैद हैं।

जाधव की फ़ांसी टालने को लेकर भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस यानी आईसीजे का दरवाज़ा खटखटाया था।

आईसीजे के प्रेसिडेंट ने कहा कि कुलभूषण जाधव की फांसी पर सुनवाई ख़त्म होने तक रोक लगाने का फ़ैसला सभी जजों का सर्वसम्मति से लिया गया फ़ैसला है।

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में 11 जजों की बेंच ने कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी के बारे में कहा कि इस गिरफ्तारी की स्थिति को लेकर अभी भी विवाद है।

आईसीजे ने कहा कि फांसी की सज़ा से माफ़ी के लिए पाकिस्तान में जो 150 दिनों का समय दिया गया है वो अगस्त में ख़त्म हो रहा है।

कोर्ट का फ़ैसला सुनाते हुए जज रॉनी एब्राहेम ने कहा,  ''इससे पता चलता है कि अगस्त के बाद कभी भी उन्हें फांसी दी जा सकती है और ये मामला अर्जेंट है।''

अदालत ने पाकिस्तान की उस आपत्ति को खारिज कर दिया कि ये मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।  हालाँकि अदालत ने ये भी कहा कि इस पर मतभेद हैं।

अदालत ने भारत और पाकिस्तान के बीच संधियों का हवाला दिया और कहा कि 1977 से ही भारत और पाकिस्तान वियना संधि का हिस्सा हैं।

जाधव के मामले में अदालत ने कहा कि जाधव को काउंसलर मदद मिलनी चाहिए थी।

पेशावर से कराची तक सड़कों पर चौबीसों घंटे वीड‍ियो र‍िकॉर्डिंग करेगा चीन

पाकिस्तान और चीन की दोस्ती दुनिया के लिए नई नहीं है, लेकिन पाकिस्तान में बन रहे चीन-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) को लेकर पाकिस्तानी सरकार कुछ ज्यादा ही उतावलेपन में है।

इस बीच, चीन में चल रहे 'वन बेल्ट, वन रोड समिट' में पाकिस्तान और चीन के बीच सबसे हॉट एजेंडा सीपीईसी के लॉन्ग टर्म प्लान को मंजूरी देना है।

पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की वेबसाइट पर छपी खबर के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान में अपने पांव पसारने का पुख्ता इंतजाम इस कॉरिडोर के सहारे किया है। इस पाकिस्तानी मीडिया को जो पेपर डॉक्यूमेंट हाथ लगे हैं। उसके मुताबिक, चीन का मास्टर प्लान है कि वो पाकिस्तान में हजारों एकड़ जमीन लीज पर लेगा और उसमें सिंचाई के अलग-अलग तकनीक का इस्तेमाल कर खेती करेगा।

इतना ही नहीं, वहां निगरानी का पूरा बंदोबस्त करने की भी चीन की योजना है। इसके तहत पेशावर से लेकर कराची तक शहरों में चौबीसों घंटे वीडियो रिकॉर्डिंग होने वाला सर्विलांस सिस्टम लगाया जाएगा।

इसके तहत सड़कों और प्रमुख बाजारों की निगरानी की जा सकेगी। इस इलाके में नेशनल फाइबर केवल बिछाकर न केवल इंटरनेट बल्कि चीनी टीवी ब्रॉडकास्टिंग को भी पाकिस्तान के घर-घर तक पहुंचाने की चीन सरकार की योजना है ताकि चीनी संस्कृति का प्रसार पाकिस्तान के हरेक हिस्से में हो सके।

चीन की योजना है कि वो चीनी संस्कृति और चीनी इन्टरप्राइजेज के जरिए पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था के हर मोड़ तक अपनी पहुंच बनाए।

हालांकि, पाकिस्तान के इतिहास में इस तरह के विदेशी निवेश और विदेशी हस्तक्षेप का कोई मिसाल सामने नहीं आया है। पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में चीनी कारोबारी मध्यम और छोटे इन्टरप्राइजेज भी स्थापित करेंगे। इनमें घरेलू उपकरण बनाने की यूनिट के अलावा, चीनी मोबाइल का निर्माण भी शामिल है।

इसके अलावा टेलीकम्यूनिकेशन और मेटालर्जिकल सेक्टर में भी चीनी उद्योग लगाएगे जाएंगे ताकि वहां के खनिज संसाधन का दोहन किया जा सके।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे में टेक्सटाइल्स एंड गार्मेंन्ट्स, सीमेंट एंड बिल्डिंग मैटेरियल्स, फर्टिलाइजर एंड एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी से संबंधित प्लांट भी लगाए जाएंगे। इसके लिए वहां नई नीति भी बनाई जा रही है। इसके अलावा वहां इंडस्ट्रियल पार्क, स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाने की भी चर्चा है।

इन सबसे अहम है वहां कृषि, वानिकी के साथ-साथ औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए चीन की योजना है कि इस इलाके में रेलवे और हाई स्पीड हाईवे का निर्माण कराया जाय।

चीन की प्रमुख योजनाओं में पाकिस्तानी समुद्री तट का विकास करना शामिल है। इसके तहत वहां नौकायन के लिए मार्ग विकसित करना, रात में मनोरंजन के साधन मुहैया कराना, क्रूज होमपोर्ट्स विकसित करना, सिटी पार्क्स बनाना, पब्लिक स्क्वेयर बनाना, थियेटर और गोल्फकोर्स, स्पा, थियेटर और वाटर स्पोर्ट्स डेवलप करने की भी योजना है। इसके अलावा उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान के पेशावर में पायलट सेफ सिटी बनाने की भी चीन की योजना है।

दोनों देशों के बीच आधिकारिक बातचीत के कागजात से पता चलता है कि पाकिस्तान जहां ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जल्द से जल्द बनवाने के लिए चीन पर दबाव डाल रहा है  वहीं चीन पूर्वी एक्सप्रेसवे को जल्द से जल्द पूरा कराने का दवाब पाकिस्तान पर दे रहा है।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस ने कुलभूषण जाधव पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) में पाकिस्तान ने कहा है कि कुलभूषण जाधव पर आरोपों को लेकर भारत की तरफ़ से कभी कोई जवाब नहीं आया।

उसने आरोप लगाया कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत को राजनीतिक ड्रामे के लिए इस्तेमाल किया है।

कुलभूषण जाधव को फांसी की सज़ा दिए जाने पर रोक लगाने को लेकर भारत आईसीजे पहुंचा है और सोमवार को इस पर सुनवाई हुई।

भारत ने पहले अपना पक्ष रखा और पाकिस्तान पर वियना संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए फांसी की सज़ा पर रोक लगाने की मांग की।

जवाब में पाकिस्तान की दलील थी कि वियना संधि आतंकी कार्रवाई में शामिल रहे जासूस पर लागू नहीं होती।

पाकिस्तान ने कहा कि कुलभूषण जाधव के मुस्लिम नाम वाले पासपोर्ट को लेकर भारत ने कोई जवाब नहीं दिया और चुप्पी साधे रखी।

उसने अंतरराष्ट्रीय अदालत से कहा कि कुलभूषण जाधव पर भारत की अपील गैरज़रूरी और ग़लत समझ पर आधारित है।

इससे पहले भारत की ओर से पैरवी कर रहे अटार्नी हरीश साल्वे ने कहा कि जाधव को उनके कानूनी अधिकारों से वंचित रखा गया और कॉन्सुलर उपलब्ध कराए जाने की 16 अपीलों को नज़रअंदाज़ कर वियना संधि का उल्लंघन किया गया है।

भारत का पक्ष रखते हुए हरीश साल्वे ने कहा कि कुलभूषण पर उन बयानों के आधार पर आरोप तय किए गए जो उन्होंने पाकिस्तानी सेना के क़ैद में रहते हुए दिए थे।

उन्होंने कहा कि जाधव को कॉन्सुलर उलब्ध कराए जाने की सारी कोशिशों को पाकिस्तान ने अनसुना कर दिया।

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को कथित जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई है।

भारत का कहना है कि कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर उपलब्ध कराए जाने से इनकार कर दिया गया और एकतरफ़ा फ़ैसला सुना दिया गया। अब भारत इस सज़ा पर रोक चाहता है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है।

मिसाइल टेस्ट के बाद उत्तर कोरिया का दावा, वो नए रॉकेट से बड़े परमाणु 'वॉरहेड' ले जाने में सक्षम है

रविवार को किए गए मिसाइल टेस्ट के बारे में उत्तर कोरिया ने दावा किया है कि वो एक नए तरह का रॉकेट था जो बड़े परमाणु 'वॉरहेड' ले जाने में सक्षम है।

आसमान की ओर दागा गया ये मिसाइल 2000 किलोमीटर की ऊंचाई तक गया।

700 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद ये जापान के पश्चिमी सागर तट पर जाकर गिरा।

उत्तर कोरिया ने सोमवार को कहा कि ये टेस्ट 'नए विकसित किए गए बैलिस्टिक रॉकेट की काबिलियत' को परखने के लिए था।

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों की एक और अवहेलना करके किए गए इस मिसाइल टेस्ट की दुनिया भर में आलोचना हुई है।

इस साल उत्तर कोरिया ने बार-बार मिसाइल टेस्ट किए हैं जिससे दुनिया भर में चिंता का माहौल है और अमरीका के साथ उसका तनाव बढ़ा है।

हालांकि उत्तर कोरिया के सभी टेस्ट कामयाब नहीं रहे हैं।

अमरीका और जापान ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई है।

उत्तर कोरियाई समाचार एजेंसी 'केसीएनए' ने सोमवार को कहा कि नए विकसित किए गए 'ह्वॉसॉन्ग-12' का परीक्षण योजना के मुताबिक रहा।

एजेंसी के मुताबिक, 'ह्वॉसॉन्ग-12' मध्यवर्ती/लंबी दूरी तक मार करने वाला 'रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बैलिस्टिक रॉकेट' है।

उत्तर कोरिया के बारे में माना जाता है कि वो परमाणु हथियार और उन्हें टारगेट तक ले जाने वाले मिसाइलों को विकसित कर रहा है।

और ये सब संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के बावजूद हो रहा है।

लेकिन इस बात को लेकर तस्वीर साफ नहीं है कि क्या रॉकेट में लगाए जा सकने लायक हथियार बनाने की काबिलियत उसके पास है या नहीं।

उत्तर कोरिया ने अभी तक 'इंटरकॉन्टिनेंटल (अंतरमहाद्वीपीय) बैलिस्टिक मिसाइल' या 'आईसीबीएम' का परीक्षण नहीं किया है जो टारगेट तक पहुंच सकता हो, उदाहरण के लिए अमरीका।

'इंटरकॉन्टिनेंटल (अंतरमहाद्वीपीय) बैलिस्टिक मिसाइलों' के बारे में कहा जाता है कि ये 6000 किलोमीटर के फ़ासले तक मार कर सकती हैं।

लेकिन जानकारों का मानना है कि रविवार को उत्तर कोरिया ने जिस मिसाइल का टेस्ट किया है उसे सीधा ऊपर दागने के बजाय धरती के समानांतर दागने पर ये 4000 किलोमीटर तक जा सकता है।

कहा जाता है कि कोरियाई शासक किम जोंग-उन ने वैज्ञानिकों को लापरवाह न होने की हिदायत दी है है और जब तक कि अमरीका सही फैसला न ले ले, उनसे परमाणु हथियारों पर अपना काम आगे जारी रखने के लिए कहा गया है।

इससे पहले अमरीका की तरफ़ से सही परिस्थितियों में उत्तर कोरिया से वार्ता के बारे में कहा गया था।

लेकिन रविवार को संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत निकी हेली ने कहा कि किम जोंग-उन जब तक अमरीकी शर्तें पूरी नहीं करते, हम उनके साथ वार्ता के लिए नहीं बैठने वाले हैं।