उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दलितों पर फिर से हमला हुआ है।
खबरों के मुताबिक, बड़गांव के चंदपुर गांव में दो दलितों पर तलवारों से हमला किया गया। ये दोनों शख्स सहारनपुर में मायावती की सभा से लौट रहे थे। पुलिस मौके पर पहुंच गई है, और जांच शुरू कर दी है।
बता दें कि मायावती मंगलवार (23 मई) को सहारनपुर पहुंची थी और जातीय हमले में घायल हुए दलितों से मुलाकात की थीं।
खबरों के मुताबिक, मायावती के दौरे से कुछ देर पहले कुछ दलितों ने राजपूतों के घर पर हमला किया था। लेकिन जैसे ही मायावती सहारनपुर से निकलीं, अगड़ी जातियों की ओर से दलितों पर हमला शुरू हो गया। अपने घरों पर हमले से गुस्साये राजपूतों ने तलवारें निकाल ली और दलितों पर हमला कर दिया। इस हमले में एक शख्स को गोली लगी है और कुछ दलित तलवार के हमले में घायल भी हुए हैं।
घटना के बाद चंदपुर गांव में हालात तनावपूर्ण हैं। पुलिस ने यहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और दूसरे थानों की पुलिस के साथ-साथ पीएसी को भी बुला लिया है।
बता दें कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार (23 मई) को सहारनपुर का दौरा किया था। मायावती ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि बीजेपी समाज में वैमनस्य फैलाना चाहती है।
मायावती ने कहा कि बीजेपी दलितों और राजपूतों के बीच खाई पैदा कर रही है।
मायावती ने दावा किया कि सहारनपुर में हिंसा स्थानीय प्रशासन की विफलता से हुआ है।
बीएसपी अध्यक्ष के मुताबिक, दलित 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती पर रविदास मंदिर में कार्यक्रम करना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें अनुमति नहीं दी। इसके बाद जब महाराणा प्रताप जयंती पर राजपूतों की ओर से जुलूस निकाला गया तो दलितों ने भी इसका विरोध किया और कहा कि प्रशासन ने इस कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी है।
योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए मायावती ने कहा कि यहां दलित और राजपूत आपसी भाईचारे के साथ रहते आए हैं, लेकिन योगी सरकार के इशारे पर स्थानीय प्रशासन ने यहां माहौल को बिगाड़ा।
बता दें कि सहारनपुर में 5 मई को दलितों और राजपूतों के बीच हिंसक भिड़ंत हुई थी। इस घटना में एक हेड कॉन्स्टेबल समेत 16 लोग घायल हुए थे, जबकि 1 शख्स की मौत हो गई थी।
भारतीय सेना ने नौशेरा और नौगाम सेक्टर में पाकिस्तान की कुछ चौकियों को तबाह किया गया। इसका एक वीडियो भी सेना की तरफ से जारी किया गया है।
भारतीय सेना द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया कि ये ऑपरेशन पाकिस्तान की तरफ से होने वाले सीजफायर उल्लंघन और घुसपैठ के जवाब में किया गया।
सेना ने इस ऑपरेशन में रॉकेट लॉन्चर, एंटी टैंक मिसाइल और ऑटोमेटिक हथियारों का भी इस्तेमाल किया था। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने इस तरीके के किसी हमले से इंकार किया है।
खबरों के मुताबिक, सेना ने जो वीडियो जारी किया वह 9 मई का है। जिसे नौशेरा सैक्टर में अंजाम दिया गया। इसके अलावा नौगाम सेक्टर में 20 और 21 मई को कार्रवाई की गई।
कार्रवाई की जानकारी भारतीय सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अशोक नरूला ने दी। उन्होंने बताया कि भारत नियंत्रण रेखा पर शांति और सौहाद्र चाहता है।
मेजर जनरल नरूला ने कहा कि पाकिस्तानी सेना हथियारबंद घुसपैठियो को कश्मीर में घुसने में मदद कर रही है।
मेजर जनरल नरूला ने बताया कि भारतीय सेना एलओसी के आसपास दंडात्मक कार्रवाई कर रही है।
मेजर जनरल नरूला ने कहा, ''पाकिस्तानी सेना कई बार मासूम गांववालों पर गोलीबारी से भी बाज नहीं आती।''
मेजर जनरल नरूला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने की जरूरत है ताकि स्थानीय युवक इनसे प्रभावित न हों।
21 मई को भारतीय सेना ने नौगाम सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश विफल कर दी थी और चार आतंकवादियों को मार गिराया था। मुठभेड़ में भारतीय सेना के दो जवान भी मारे गए थे।
जम्मू-कश्मीर में चुनावी ड्यूटी के दौरान एक कश्मीरी को सेना की जीप के आगे 'मानव ढाल' बनाकर बांधने वाले सेना के अधिकारी मेजर नितिन गोगोई को सम्मानित किया गया है।
नितिन गोगोई को सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने काउंटर इनसर्जेंसी ऑपरेशंस के लिए लगातार प्रयास करने हेतु सम्मान दिया है। श्रीनगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के बीरवाह इलाके में उपचुनाव के दौरान 9 अप्रैल को बडगाम में पत्थरबाजों से बचने के लिए 53 राष्ट्रीय राइफल्स ने अपनी जीप के आगे फारूक अहमद डार नाम के शख्स को मानव ढाल के तौर पर बांध दिया था।
इसका वीडियो वायरल होने के दो दिन बाद बीरवाह पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था। सेना की ओर से भी पूरे मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए गए थे।
हालांकि उस वक्त भी अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अधिकारी की इस कार्रवाई को सही ठहराया था।
मेजर की अगुआई वाली 5 गाड़ियों में जवान, 12 चुनाव अधिकारी, 9 आईटीबीपी के जवान और दो पुलिसवाले थे। गोगोई एसीसी बैकग्राउंड से है। आर्मी कैडेट कॉलेज विंग थलसेना, नौसेना और वायु सेना के जवानों को भारतीय सेना में अधिकारियों के रूप प्रशिक्षित करता है। यह अफसर कई रैंक पर रह चुका है और उसे सेना में एक दशक का अनुभव है।
उत्तर प्रदेश में बड़ी उम्मीदों के साथ योगी आदित्य नाथ की सरकार बनी। आम लोगों को लगा कि उनकी जिंदगी में बदलाव आएगा। स्वास्थ्य सेवाएं ठीक हो जाएगी और गरीब लोगों को मुफ़्त चिकित्सा मिलेगी। लेकिन गुजरते वक्त के साथ ये सपने धराशायी हो रहे हैं, और आम आदमी की जिंदगी में कोई परिवर्तन नहीं आ रहा है।
उत्तर प्रदेश के कौशांबी से दिल दहला देने वाला एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में एक शख्स अपनी पत्नी की लाश को लेकर दर बदर भटक रहा है, लेकिन उसे कोई मदद करने वाला नहीं है।
इस वीडियो से मिल रही जानकारी के मुताबिक, एक शख्स अपनी गर्भवती पत्नी को इलाज कराने के लिए कौशांबी के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाता है। लेकिन इलाज के दौरान ही इस शख्स की पत्नी और बच्चे दोनों की मौत हो जाती है।
वीडियो के मुताबिक, ये शख्स अपनी पत्नी को घर ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन से एंबुलेंस मांगता है। लेकिन यहां पर उससे रिश्वत मांगी जाती है। लेकिन इस शख्स के पास रिश्वत देने के लिए पैसे नहीं होते हैं।
लिहाजा यह आदमी डेड बॉडी को खींचते हुए ले जाता है। इस दौरान कई लोग पूरा तमाशा देखते रहे, लेकिन किसी ने इस शख्स की मदद नहीं की।
बता दें कि राज्य और केन्द्र सरकार दोनों ने ही गर्भवती महिलाओं की मदद के लिए कई योजनाएं चला रखी हैं लेकिन लगता है इस शख्स को इन योजनाओं का फायदा नहीं मिल पाया है। उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस के लिए 108 नंबर पर कॉल करने पर मुफ़्त में एंबुलेंस की सेवा उपलब्ध है, इसके बावजूद इस शख्स को इसका फायदा नहीं मिल पाया।
ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की खबरें आने के बीच सोमवार को चुनाव आयोग ने तीन राज्यों की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को टाल दिया है। राज्यसभा की इन सीटों पर 8 जून को मतदान होना था।
इन सीटों पर दोबारा कब चुनाव होंगे? इस बात की जानकारी आयोग द्वारा अभी नहीं दी गई है। साथ ही चुनाव रद्द करने के कारणों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। जिन राज्यों में चुनाव होने थे, उनमें गोवा, गुजरात और पश्चिम बंगाल शामिल है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल, सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ ब्रायन सहित राज्यसभा के दस सांसदों का कार्यकाल अगस्त में खत्म हो रहा है जिसे देखते हुए चुनाव आयोग ने तीन राज्यों की इन दस सीटों पर 8 जून को चुनाव कराने की घोषणा की थी। रिटायर हो रहे इन 10 सदस्यों में चार तृणमूल कांग्रेस के हैं जबकि कांग्रेस के तीन, भाजपा के दो और सीपीएम के एक सदस्य हैं।
गोवा से कांग्रेस सदस्य शांताराम नाइक का कार्यकाल 28 जुलाई को समाप्त हो रहा है, जबकि गुजरात से अहमद पटेल, दिलीप भाई पांड्या और स्मृति ईरानी का कार्यकाल 18 अगस्त तक है। पश्चिम बंगाल के छह सदस्यों का कार्यकाल भी 18 अगस्त को समाप्त होगा। इन सदस्यों में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन, देबब्रत बंदोपाध्याय, सुखेंदु शेखर राय और डोला सेन हैं। कांग्रेस के प्रदीप भट्टाचार्य और सीपीएम के सीताराम येचुरी भी इनमें शामिल हैं।
वहीं चुनाव आयोग ने हाल में विधानसभा चुनाव वाले पांच राज्यों के सीईओ को खत लिखकर ईवीएम मशीन भेजने को कहा है जिन राज्यों में चुनाव हुए हैं उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल है।
माना जा रहा है कि चुनाव आयोग द्वारा यह कदम ईवीएम मशीनों की जांच के लिए दी गई चुनौती को ध्यान में रखते हुआ उठाया गया है।
बता दें कि पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की भूतपूर्व सीएम और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। इसके बाद दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। यही नहीं, आम पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली विधानसभा में ईवीएम हैक करने का डेमो दिखाया था।
झारखंड में 7 लोगों की हत्या पर मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है और झारखंड पुलिस से पूरी घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
झारखंड में दो अलग-अलग घटनाओं में भीड़ ने बच्चा चोर समझकर 7 लोगों की हत्या कर दी थी। इनमें से 4 लोगों की हत्या सरायकेला खरसांवा में और तीन लोगों की हत्या पूर्वी सिंहभूम के नागाडीह में कर दी गई थी।
इस घटना पर मानवाधिकार आयोग ने गंभीर चिंता जताई है और झारखंड के डीजीपी से जवाब तलब किया है। मानवाधिकार आयोग ने झारखंड सरकार से 4 हफ़्तों में रिपोर्ट मांगी है।
मानवाधिकार आयोग ने झारखंड पुलिस से उन उपायों, प्रस्तावित उपायों के बारे में पूछा है जो राज्य सरकार लागू करने वाली है ताकि इस तरह की घटनाएं फिर से ना हो पाये।
आयोग ने कहा है कि भीड़ द्वारा लोगों को मारे जाने की खबरें बेहद चिंताजनक है और राज्य सरकार को इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।
मानवाधिकार आयोग ने अपनी टिप्पणी में कहा कि एक सभ्य समाज इस तरह के घृणित अपराधों को कभी भी सहमति नहीं दे सकता है जहां सिर्फ शक के आधार पर भीड़ द्वारा लोगों की हत्या कर दी जाती है।
इस बीच इस मामले में इंसाफ की मांग को लेकर जमशेदपुर में लोगों का जबर्दस्त प्रदर्शन जारी है। कई जगह पुलिस के साथ लोगों की झड़प भी हुई है। लोगों को शांत करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग भी की थी, जमशेदपुर के चार इलाकों में निषेधाज्ञा जारी कर दी गई है।
मानगो और धातकीडीह में हालात तनावपूर्ण हैं। इसके अलावा ओलीडीह और एमजीएम पुलिस थाना क्षेत्र में भी निषेधाज्ञा लागू की गई है। इन इलाकों में लोगों ने आरोपियों की गिरफ़्तारी को लेकर कई इलाकों में जाम लगा दिया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में अबतक 18 लोगों को गिरफ़्तार किया है। सरकार ने कई पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की है।
ट्रिपल तलाक मामले में आज (22 मई) अॉल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल किया। इसमें बोर्ड ने कहा कि वह कुछ नियमों की अडवाइजरी जारी करेगा जो निकाह करने वालों को मानना होगा। निकाह कराने वाला शख्स दूल्हे को सलाह देगा कि अगर नौबत तलाक तक पहुंच भी जाए तो वह तीन बार तलाक न बोलें।
एफिडेविट में कहा गया कि शरियत और निकाहनामे में तीन तलाक एक गलत प्रथा है, ऐसे किसी प्रोविजन की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बोर्ड ने यह भी कहा कि वह तीन तलाक देने वालों के सामाजिक बहिष्कार का आह्वान भी करेगा। अपने एफिडेविट में अॉल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि वह काजी दूल्हा और दुल्हन को सलाह देंगे कि वे निकाहनामा में एक नियम जोड़ें कि वह तीन तलाक का सहारा नहीं लेंगे।
हालांकि इस एफिडेविट में सदियों पुरानी इस प्रथा को खत्म करने की बात नहीं कही गई है।
18 मई को तीन तलाक मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 6 दिनों तक चली इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं। 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआइएमपीएलबी) से पूछा था कि क्या महिलाओं को 'निकाहनामा' के समय 'तीन तलाक' को 'ना' कहने का विकल्प दिया जा सकता है।
प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाले पांच जजों के संविधान पीठ ने यह भी पूछा था कि क्या सभी काजियों से निकाह के समय इस शर्त को शामिल करने के लिए कहा जा सकता है।
मंगलवार को एआइएमपीएलबी की ओर से पेश पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा था कि तीन तलाक ऐसा ही मामला है जैसे यह माना जाता है कि भगवान राम अयोध्या में पैदा हुए थे। इसने कहा था कि ये धर्म से जुड़े मामले हैं और इन्हें संवैधानिक नैतिकता के आधार पर नहीं परखा जा सकता।
कपिल सिब्बल ने कहा, अगर मेरी आस्था इस बात में है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था तो यह आस्था का विषय है और इसमें संवैधानिक नैतिकता का कोई प्रश्न नहीं है और कानून की अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
एआइएमपीएलबी ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया था कि मुस्लिम समुदाय में शादियां कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर होती हैं और महिलाएं अपने हितों और गरिमा की रक्षा के लिए निकाहनामा में विशेष खंड जुड़वा सकती हैं।
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एआइएमपीएलबी ने कहा था कि वैवाहिक रिश्ते में बंधने से पहले 4 विकल्प होते हैं जिसमें शादी को 1954 के स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर भी कराया जा सकता है।
एआइएमपीएलबी ने कहा कि महिलाएं निकाहनामा पर इस्लामी कानून के तहत बातचीत कर सकती हैं। सिर्फ उसके पति को ही नहीं, महिला को भी तीन बार तलाक कहने का हक है और वह डिवोर्स के मामले में काफी ज्यादा राशि की मेहर मांग सकती है।
केंद्र ने सोमवार को न्यायालय से कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक को अवैध एवं असंवैधानिक करार देता है तो सरकार मुसलमानों में विवाह और तलाक के नियमन के लिए विधेयक लेकर आएगी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह साफ कर दिया था कि वह समय की कमी की वजह से सिर्फ 'तीन तलाक' पर सुनवाई करेगा। हालांकि कोर्ट केन्द्र के जोर के मद्देनजर 'निकाह हलाला' के मुद्दों को भविष्य में सुनवाई के लिए खुला रखा है।
इससे पहले 12 मई को हुई सुनवाई में पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता आरिफ मोहम्मद खान ने कहा था कि एक बार में तीन तलाक देना इस्लामी शरीयत के खिलाफ है और ये मुस्लिम महिलाओं को जिंदा दफनाने जैसा है। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुसलमानों में शादी को खत्म करने का यह तरीका 'बेहद खराब' और 'बर्दाश्त ना करने वाला' है।
वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री और सीनियर वकील सलमान खुर्शीद ने कहा था कि तीन तलाक कानूनी दखल का मामला नहीं है। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को इसको नकारने का अधिकार मिला हुआ है। उन्होंने कहा था कि महिलाएं निकाहनामा (शादी का कॉन्ट्रेक्ट) दिखाकर तीन तलाक को नकार सकती हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को जंतर मंतर पर हजारों की संख्या में दलित समुदाय के लोगों ने न्याय की मांग करते हुए विरोध-प्रदर्शन किया। दलित समुदाय का यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पांच मई, 2017 को सांप्रदायिक दंगों के पीड़ितों के समर्थन में था।
नवगठित दलित संगठन 'भीम आर्मी' के नेतृत्व में बुलाए गए इस धरना-प्रदर्शन में सहारनपुर और आस-पास के इलाकों के युवा शामिल हुए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की छात्र इकाई ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन के सदस्यों ने भी विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे ने आईएएनएस से कहा, ''हमारी मांग है कि भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद पर लगाए गए आरोप वापस लिए जाएं और दलित ग्रामीणों को निशाना बनाने वाले और उनके घरों को जलाने वाले तथाकथित ऊंची जाति के लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।''
सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में महाराणा प्रताप जयंती के दौरान ऊंची आवाज पर संगीत बजाए जाने के खिलाफ विरोध जताने पर दोनों समुदायों के बीच हिंसा भड़क उठी थी। हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और 16 अन्य घायल हुए थे।
विरोध प्रदर्शन में शामिल आइसा के एक अन्य सदस्य ने कहा कि नवगठित दलित संगठन समुदाय के लोगों को आकर्षित करने में सफल रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि विरोध-प्रदर्शन में 10,000 से 15,000 के करीब लोगों ने हिस्सा लिया।
आइसा के एक नेता ने आईएएनएस को बताया कि भीम आर्मी सहारनपुर इलाके के पढ़े-लिखे दलित युवकों का संगठन है जो दलित अधिकारों के नाम पर सिर्फ नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की पारंपरिक मांगों से भिन्न विचार रखता है।
उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में करीब दो दर्जन मुसलमानों के धर्म परिवर्तन करने की खबर है।
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, करीब 24 लोगों ने इस्लाम मजहब को छोड़कर हिंदू रीति-रिवाजों के मुताबिक हिंदू धर्म को अपना लिया है। हिंदू धर्म को अपनाने वाले सभी लोग अंबेडकर नगर जिले के रहने वाले हैं। धर्म परिवर्तन करने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल है।
इस दौरान हिंदू धर्म अपनाने वाले जान मोहम्मद ने कहा कि करीब 20-25 साल उनके पूर्वज हिंदू थे। हालांकि कुछ वजहों से उन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना लिया था।
वहीं हिन्दू धर्म से जुड़े सभी आवश्यक अनुष्ठानों को पूरा करने के बाद इन लोगों ने हिंदू धर्म की शुरुआत दी गई है। पूरा कार्यक्रम एक आर्य समाज मंदिर में बहुत ही गुप्त तरीके से किया गया था।
इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कैलाश चंद्र श्रीवास्तव ने धर्म परिवर्तन से जुड़ी प्रक्रियाओं को पूरा करवाया।
वहीं इस मामले में जानकारी देते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि जिन लोगों ने हिंदू धर्म अपनाया है उन्हें किसी भी तरह का लालच नहीं दिया गया है।
वहीं मामले में उत्तर प्रदेश प्रशासन ने प्रतिक्रिया देने से साफ इंकार कर दिया है।
हिंदू धर्म अपनाने वाले लाल मोहम्मद ने बताया कि उनके पिता हिंदू थे जिनका नाम जयदुर और चाचा का नाम छब्बू लाल था। 20-25 साल पहले उन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना लिया था।
जान मोहम्मद ने बताया कि अब पिता इस दुनिया में नहीं है तो उन्हें अब इस बात का अहसास हुआ कि उनके पिता का जो पहले वाला धर्म था, वही सही धर्म था। अब हम भी हिंदू धर्म में रहना चाहते हैं। इस धर्म में आकर हमें संतुष्टि मिली है।
लाल मोहम्मद ने आगे बताया कि हिंदू धर्म अपनाने के लिए हमें किसी तरह का लालच नहीं दिया गया है। हम अपनी खुशी से हिंदू धर्म में शामिल हुए हैं।
मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर सरकार की अब तक की सफलता-असफलता पर सवाल-जवाब के लिए 'आजतक एडिटर्स राउंड टेबल' का आयोजन किया गया जिसमें पत्रकार राजदीप सरदेसाई द्वारा पूछे गए सवाल पर कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया खासे भड़क गए जिसपर दोनों के बीच तू-तू मैं-मैं हुई।
इस दौरान सिंधिया ने राजदीप से कहा कि किस विकास की बात कर रहे हैं आप? कृषि के क्षेत्र में 12 हजार किसान आत्महत्या कर रहे हैं जोकि भाजपा सरकार की विफलता है। उसकी कथनी और करनी में तो फर्क करना पड़ेगा।
दरअसल राजदीप कांग्रेस और भाजपा सरकारों के दौरान हुए विकास की तुलना कर रहे थे। इस सवाल पर कांग्रेस नेता सिंधिया खासे नाराज हो गए।
इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार (21 मई, 2017) को आजतक एडिटर्स राउंड टेबल में कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बराबरी कर सकते हैं। वह पार्टी और देश का नेतृत्व करने में सक्षम हैं।
सिंधिया ने कहा कि राहुल गांधी के पास अपार क्षमता है। उन्हें जमीन से जुड़े मुद्दों की गहरी समझ है।
उन्होंने कहा, ''मैं निजी तौर पर मानता हूँ कि राहुल गांधी पार्टी और देश का नेतृत्व करने में सक्षम हैं। उन्हें बस कुछ समय दीजिए।''
सिंधिया ने कहा, ''राहुल गांधी निश्चित ही मोदी की बराबरी कर सकते हैं। वह मोदी को चुनौती देंगे और कांग्रेस उस ब्लूप्रिंट के साथ जनता के पास जाएगी जिस पर पार्टी और राहुल काम कर रहे हैं। मुझे लगता है कि हमें उनके नेतृत्व में आगे बढ़ना चाहिए। हम 2019 में उनके नेतृत्व में सरकार बनाएंगे।''
लोकसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे के स्थान पर सिंधिया को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने से संबंधित एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ''भाग्य में क्या लिखा है ... पार्टी की क्या रणनीति है, ये कुछ ऐसी बातें हैं, जिनके बारे में मुझे जानकारी नहीं है।''
ज्योतिरादित्य ने राजनीति में अपने 15 सालों के अनुभव के बारे में कहा, ''मैं कांग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता हूँ । मेरा हमेशा से यही मानना रहा है।''
हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि उनकी पार्टी को नए खाके की और उन राज्यों पर ध्यान देने की जरूरत है जहां कांग्रेस की वापसी की अधिक संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि हमें फिर से विचार करने की जरूरत है, हमने पिछले 10 वर्षो में कई अच्छे काम किए हैं, लेकिन तय ही है कि लोगों का विश्वास जीतने में कामयाब नहीं रहे। हमें नए ब्लूप्रिंट के साथ लोगों के बीच जाने की जरूरत है।
जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के उम्मीदवार के बारे में पूछने पर सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस एक साझा उम्मीदवार पर आमराय बनाने के लिए सभी विपक्षी दलों के साथ चर्चा में हैं। हम सभी विपक्षी दलों से एक नाम पर सहमति बनाना चाहते हैं। चर्चाएं चल रही हैं। कांग्रेस अकेले ही इस पर फैसला नहीं ले सकती है।
यह पूछे जाने पर कि क्या प्रणब मुखर्जी उनके उम्मीदवार होंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोबारा केवल तभी चुनाव उम्मीदवारी पेश करेंगे जब उनके नाम पर आम सहमति बनेगी।









