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उत्तर प्रदेश सरकार ने योगी आदित्य नाथ पर 2007 गोरखपुर दंगे के मामले में मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ पर 2007 में गोरखपुर में हुए दंगे के मामले में मुकदमा नहीं चलेगा। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्य नाथ सरकार ने इस मामले में मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दी है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से गुरुवार (11 मई) को ये बयान आया है।

बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पिछले सप्ताह तलब किया था और गोरखपुर दंगें से जुड़े सभी दस्तावेजों को अदालत में लाने को कहा था, इस मामले में स्थानीय सांसद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ आरोपी हैं।

बता दें कि जस्टिस रमेश सिन्हा और उमेश चन्द्र श्रीवास्तव की बेंच ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को गुरुवार (11 मई) को अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने को कहा था, और वे दस्तावेज मांगे थे जिनमें उन व्यक्तियों के नाम है जिनके खिलाफ इस मामले में मुकदमा चलाया जाना है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ये आदेश परवेज परवाज नाम के शख्स की याचिका पर सुनवाई के दौरान दी थी। 2007 गोरखपुर दंगों के मामले में गोरखपुर के कैंट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था, इस मामले का गवाह असद हयात भी इस मामले में याचिकाकर्ता है।

इससे पहले अदालत ने इस मुकदमे में सीएम योगी आदित्य नाथ पर मुकदमा चलाने की अनुमति ना देने के लिए राज्य सरकार को फटकार लगाई थी।

2007 की जनवरी महीने में ही उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में दो समुदायों के बीच दंगा हुआ था। इस दंगे में दो लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गये थे। इस मामले में तत्कालीन बीजेपी सांसद योगी आदित्य नाथ, स्थानीय विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल, और उस समय शहर की मेयर रही अंजू चौधरी पर आरोप है कि इन लोगों ने रेलवे स्टेशन के पास भड़काऊ भाषण दिया था इसके बाद ये दंगा भड़का था।

पुलिस के मुताबिक, ये विवाद मुहर्रम पर ताजिये के जुलूस के रास्ते को लेकर था। इस केस में योगी आदित्य नाथ समेत बीजेपी के कई नेताओं पर कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज हुआ था।

आम आदमी पार्टी का चुनाव आयोग के बाहर प्रदर्शन, कहा- हमें ईवीएम दीजिए, हैक करके दिखाएंगे

आम आदमी पार्टी ने गुरुवार को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के मुद्दे पर चुनाव आयोग ऑफिस के आगे प्रदर्शन किया है। दिल्ली लेबर मिनिस्टर और आम आदमी पार्टी नेता गोपाल राय ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी तीन मांगे रखी हैं।

उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग कहता है कि ईवीएम मशीन टैंपर नहीं की जा सकती तो हम मांग करते हैं कि हमें मशीन दी जाए और हम उसे हैक करके दिखाएंगे।

गोपाल राय ने कहा, ''हम मांग करते हैं कि ईवीएम को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं उनका जवाब दिया जाए। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब जैसे राज्यों में यह मुद्दा उठाया गया। हम चुनाव आयोग से अपील करते हैं कि हमें मशीन दी जाए और हम उन्हें हैक करके दिखाएं। दूसरा चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के 2013 में वीवीपीएटी लगाए जाने को लेकर आए आदेश का पालन हो। और तीसरी मांग करते हैं कि वोटिंग मशीन व स्लिप का हिसाब रखा जाए।''

वहीं आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर कई दावे किए। उन्होंने धौलपुर और भिंड में ईवीएम में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा, ''लोगों के दिमाग में दो तरह के सवाल हैं- क्या ईवीएम में गड़बड़ी की जा सकती है और क्या ईवीएम में गड़बड़ी की गई है? नोटबंदी के बाद जितने भी चुनाव हुए हैं उनमें से अधिकतर में भाजपा की जीत हुई है।''

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हम चुनाव आयोग से मांग करते हैं कि एक समिति का गठन किया जाए जो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पुणे चुनाव की गड़बड़ियों की जांच करे।

गोपाल राय ने चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपकर निम्नलिखित तीन माँगें की है:
-  सभी चुनाव वीवीपीएटी लगी ईवीएम मशीन से ही कराए जाएं।
-  25 फीसदी पोलिंग बूथ पर वोटिंग मशीन व स्लिप का हिसाब रखा जाए
-  गुजरात चुनाव पूरी तरह से वीवीपीएटी के द्वारा कराया जाए।

मंडल और कमंडल से भाजपा और आरएसएस को हुआ फायदा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक आधारित तंत्र का बड़ा फायदा हुआ है। ये कहना है चीन के एक प्रमुख बुद्धिजीवी माओ केजी का।

माओ केजी के अनुसार, 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराने का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा राजनीतिक फायदा हुआ। चीन-भारत संबंधों के विशेषज्ञ माओ केजी का यह लेख 'गुआनचाओ डॉट सीएम' पर प्रकाशित हुआ है।

केजी के अनुसार, नरेंद्र मोदी द्वारा 'गुजरात मॉडल' की पृष्ठभूमि में विकास के नारे ने भाजपा और आरएसएस के बीच गठजोड़ को मजबूत किया जिसका उन्हें राजनीति लाभ मिला।

माओ केजी के अनुसार, पीएम मोदी आर्थिक उन्नति के लिए तेज विकास पर जोर दे रहे हैं और आरक्षण की नीति पर कम जोर दे रहे हैं क्योंकि आरएसएस इसके खिलाफ है।

केजी के अनुसार, पीएम मोदी को 2013 से ही आरएसएस का पूरा समर्थन हासिल है।

केजी ने लिखा है, ''छोटे केक के बंटवारे के बजाय केक का आकार बढ़ाने पर जोर देकर मोदी विभिन्न सामाजिक समूहों के जटिल हितों की टकराहट से बच के चल रहे हैं।''

चीनी लेखक ने अपने लेख में भाजपा के उभार के बीज 1989 में लागू हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण और 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराए जाने की घटनाओं में देखे हैं।

केजी ने लिखा है, ''मंडल रिपोर्ट की वजह से शिक्षा और रोजगार के मामले में बेहतरी की उम्मीद कर रहे मध्य वर्ग और उच्च वर्ग को खुद के संग नाइंसाफी महसूस हुई। इस निराशा से भाजपा के जनाधार में ठोस बढ़ोत्तरी हुई जो प्राथमिकता के आधार पर आरक्षण का विरोध करती थी और समान प्रतियोगिता की मांग करती थी।''

केजी ने लिखा है कि बाबरी मस्जिद गिराने के बाद हुए धार्मिक ध्रुवीकरण से भाजपा और आरएसएस को अपना जनाधार बढ़ाने में काफी मदद मिली।

केजी के अनुसार, इन दोनों घटनाओं से दोनों संगठनों के कैडरों की संख्या तेजी से बढ़ी जो आज भी भाजपा और आरएसएस के संगठन की रीढ़ की हड्डी हैं।

माओ केजी ने लिखा है कि आरएसएस के पास 10 हजार प्रचारक और 50 हजार सक्रिय शाखाएं हैं।

केजी के अनुसार, आरएसएस के पास करीब छह लाख स्वयंसेवक और मजदूर, किसान, महिला और छात्र संगठन हैं।

केजी ने लिखा है, ''ये समूह भाजपा को संगठनात्मक एका, सामाजिक संसाधन और विचारधारा के प्रसार का मौका प्रदान करता हैं।''

सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक और हलाला पर सुनवाई शुरू

सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मुद्दे पर गुरुवार से सुनवाई शुरू हुई है। अलग-अलग धर्मों के पाँच जजों की संवैधानिक पीठ इसपर सुनवाई कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा, वह देखेगी कि तीन तलाक धर्म का अभिन्न हिस्सा है या नहीं।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि इस मुद्दे में बहुविवाह पर सुनवाई नहीं की जाएगी, हालांकि हलाला पर सुनवाई हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने गर्मियों की छुट्टी में इस संवेदनशील मुद्दे पर सुनवाई करने का फैसला लिया था।

गुरुवार को छुट्टी का पहला दिन था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह इस मुद्दे को देखेगा कि क्या तीन तलाक धर्म का मूल हिस्सा है? हम इस मुद्दे को भी देखेंगे कि क्या तीन तलाक लागू किए जाने योग्य मूलभूत अधिकार का हिस्सा है।

हालांकि उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मुस्लिमों में बहुविवाह का मुद्दा उसकी विवेचना का हिस्सा नहीं हो सकता।

सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की संविधान पीठ में पाँचों जज अलग-अलग धर्म के हैं।  इन जजों में मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर (सिख), जस्टिस कूरियन जोसेफ (ईसाई), आरएफ नारिमन (पारसी), यूयू ललित (हिंदू) और अब्दुल नजीर (मुस्लिम) हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जज किसी भी मजहब के हों, वो अदालत में फैसले सिर्फ और सिर्फ भारतीय संविधान की रोशनी में लेते हैं।

तीन तलाक से जुड़ी याचिका में छह याचिकाकर्ता हैं कुरान सुन्नत सोसाइटी, शायरा बानो, आफरीन रहमान, गुलशन परवीन, इशरत जहां और आतिया साबरी।

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने सर्वोच्च अदालत से कहा था कि तीन तलाक इस्लाम का अंदरूनी मामला है और बोर्ड साल-डेढ़ साल में मामले पर आम राय बना लेगा।

हालांकि शिया मुसलमानों के पर्सनल बोर्ड ने तीन तलाक का समर्थन किया है।

करीब 100 मुस्लिम बुद्धिजीवियों और पेशेवरों ने खुला खत लिखकर तीन तलाक का विरोध करते हुए कहा था कि ये इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं है।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मायावती ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बर्खास्त किया

बहुजन समाज पार्टी के नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके बेटे अफजल सिद्दीकी को मायावती ने पार्टी से निकाल दिया। बीएसपी महासचिव सतीश चन्द्र मिश्रा ने बुधवार (10 मई) को ये जानकारी दी।

सतीश चन्द्र मिश्रा ने कहा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध कार्यों में शामिल होकर बेनामी संपत्ति बनाई। इन पर अवैध बूचड़खाना चलाने का भी आरोप है।

बीएसपी के वरिष्ठ नेता सतीश चन्द्र मिश्रा ने बताया कि वे पार्टी के नाम पर वसूली भी किया करते थे। जब पार्टी को इस बात की जानकारी हुई तो उन्हें और उनके बेटे को पार्टी के सभी पदों से बर्खास्त कर उन्हें पार्टी से बाहर निकालने का फैसला लिया गया।

सतीश चन्द्र मिश्रा ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि बाप-बेटे दोनों अवैध रुप से धन वसूल रहे हैं और भ्रष्टाचार के कामों में शामिल हैं। निश्चित रुप से इससे पार्टी की छवि खराब हो रही थी।

सतीश चन्द्र मिश्रा के मुताबिक, इन शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए इन दोनों को पार्टी से हटाने का फैसला लिया गया।

बता दें कि विधानसभा चुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन के बाद बीएसपी सुप्रीमो मायावती अपनी पार्टी में जबर्दस्त फेरबदल करने में लगी हैं, इसी के तहत उन्होंने अपने भाई आनंद को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया था।

बता दें कि नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी बीएसपी के चोटी के नेता में शामिल थे। उन्हें बहुजन समाज पार्टी का मुस्लिम चेहरा माना जाता था और वे मायावती के करीबी और विश्वासपात्र माने जाते थे। यूपी में जब मायावती की सरकार थी तो नसीमुद्दीन सिद्दीकी मंत्री भी थे और मायावती ने उन्हें आबकारी और पीडब्ल्यूडी जैसे अहम विभाग भी दिये थे। हाल ही में खत्म हुए यूपी के विधानसभा चुनावों में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बेटे अफजल सिद्दीकी को बीएसपी के सोशल मीडिया कैंपेनिंग को देखने की जिम्मेदारी थी और अफजल सिद्दीकी के नेतृत्व में ही बसपा ने सोशल मीडिया पर अपना जनाधार बढ़ाया था।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए अस्पताल से काम कर रहीं सोनिया गांधी

भारत में राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस समेत सभी विपक्षी पार्टियों ने कमर कस ली है। बीजेपी को रोकने के लिए विरोधी दल धर्मनिरपेक्ष मोर्चे की गठन की ओर बढ़ रहे हैं। इसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सक्रिय हो गई हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को फूड प्वाइजनिंग की शिकायत के बाद दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

एनडीटीवी के मुताबिक, सोनिया गांधी ने अस्पताल से ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से फोन पर बातचीत की और मुलाकात के लिए सोमवार का दिन निश्चित किया।

राष्ट्रपति उम्मीदवार पेश करने के विपक्ष के मिशन का सोनिया गांधी नेतृत्व कर रही हैं। उनका असली एजेंडा 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले बीजेपी के सामने एक विशाल मोर्चा खड़ा करना है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री से पहले फोन पर बात करने और मीटिंग की तारीख तय करने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात कर चुकी हैं।

उम्मीद है कि सोनिया को इस मामले में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का समर्थन मिल सकता है। हाल ही में मधु लिमये की जयंती के मौके पर 9 विपक्षी दल एक मंच पर साथ नजर आए थे और बीजेपी से मुकाबला करने के लिए एकजुट होने का फैसला किया था।

कांग्रेस के अलावा जनता दल यू, सीपीएम, सीपीआई, एनसीपी, जनता दल एस, सोशलिस्ट पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के नेता इस सम्मेलन में शामिल हुए।

अधिकतर नेताओं का मानना है कि आगामी राष्ट्रपति चुनाव विपक्ष की एकता का पहला चरण माना जाए। इसे लेकर तैयारियां की जा रही है।

बता दें कि सोनिया गांधी को फूड प्वाइजनिंग की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। सर गंगा राम हॉस्पिटल के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के चेयरमैन डॉ डीएस राना ने बताया कि ''श्रीमती गांधी रविवार को हॉस्पिटल में भर्ती की गई हैं। उन्हें फूड प्वाइजनिंग की शिकायत थी। उन्हें जल्द ही डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।''

वैसे इससे पहले भी श्रीमती गांधी अपने खराब स्वास्थ्य के चलते हॉस्पिटल में भर्ती हो चुकी है। पिछले कुछ महीनों में ये तीसरी बार है जब उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा हो।

योगी आदित्य नाथ ने भीम राव अंबेडकर की मूर्ति पर नहीं किया माल्यार्पण, दलित हुए उग्र

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने सीएम पद की शपथ लेने के बाद मेरठ का पहला दौरा किया। योगी के दौरे के दौरान मेरठ के शेरगढ़ी और उसके आस-पास के इलाकों के दलितों ने जमकर हंगामा किया और शराब के ठेके में तोड़फोड़ की।

दरअसल दलित योगी आदित्य नाथ द्वारा अंबेडकर की मूर्ति पर माला नहीं डालने के कारण नाराज हो गए और इसके बाद उनका गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साई भीड़ ने तोड़फोड़ और नारेबाजी के साथ शराब के ठेके को लूट लिया।

यही नहीं, कई जगहों पर योगी आदित्यनाथ के बैनर और पोस्टरों को भी नुकसान पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अपनी यात्रा के दौरान मेरठ के शेरगढ़ी स्थित मलिन बस्ती का निरीक्षण किया। इस दौरान वहां स्थित भारत के संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर की मूर्ति पर योगी द्वारा माला नहीं चढ़ाई गई जिससे दलित नाराज हो गए।

दलितों को उम्मीद थी कि सीएम योगी आदित्य नाथ अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण जरुर करेंगे। मूर्ति पर माल्यार्पण न किए जाने से नाराज दलितों ने योगी मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए।

यही नहीं, हंगामा कर रहे लोगों ने योगी के पोस्टरों और बैनरों को भी फाड़ दिया और सड़क जाम कर दी। हंगामा कर रहे लोगों ने सड़क के पास स्थित शराब के ठेके को भी निशाना बनाया। प्रदर्शन कर रहे उग्र दलितों ने शराब की दुकान पर धावा बोतले हुए तोड़फोड़ की और शराब लूट ली।

दलितों का उग्र प्रदर्शन काफी देर तक ऐसे ही चलता रहा। बाद में पुलिस फोर्स मौक-ए-वारदात पर पहुंची और हंगामा कर रहे लोगों को बल प्रयोग करके वहां से खदेड़ा।

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब के ठेके को हटाने की काफी समय से मांग की जा रही थी, लेकिन उनकी इस मांग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था।

उग्र दलितों ने हंगामे के दौरान कुछ वाहनों को भी क्षतिग्रस्त किया।

भीम सेना के सैकड़ों लोगों ने फूँके वाहन, पुलिस चौकी जलाने की कोशिश

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में मंगलवार (नौ मई) को दोबारा हिंसा भड़क उठी। पिछले हफ्ते शब्बीरपुर गांव में दलितों के संग हुई हिंसा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी।

पुलिस के अनुसार, करीब 1000 लोगों की 'भीम सेना' के झंडे तले इकट्ठा हुए थे। हिंसा में सहारनपुर के दो गांवों में एक प्राइवेट बस, 10 मोटरसाइकिलें और एक कार जला दी गयीं। हिंसा में पुलिस के तीन जवान और एक पत्रकार भी घायल हो गये।

पुलिस के अनुसार, भीड़ ने पुलिस चौकी को भी जलाने की कोशिश की। हिंसा में शामिल होने के आरोप में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 22 लोगों को गिरफ्तार किया है।

मंगलवार की हिंसा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने राज्य के प्रधान सचिव (गृह) देबाशीष पंडा, पुलिस डीजीपी सुलखान सिंह और पुलिस एडीजी (कानून-व्यवस्था) आदित्य मिश्रा को तलब किया।

सूत्रों के अनुसार, सीएम योगी ने अधिकारियों को उपद्रवकारियों से कड़ाई से निपटने के लिए कहा है। उत्तर प्रदेश के केबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा है कि हालात जल्द ही सामान्य हो जाएंगे।

पांच मई को सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में तब हिंसा भड़क उठी जब दलितों ने ठाकुरों द्वारा निकाली जा रही एक शोभायात्रा में तेज आवाज में संगीत बजाने पर आपत्ति की। दोनों पक्षों में इस बात को लेकर विवाद हो गया और बाद में हिंसा भड़क उठी।

हिंसा में एक ठाकुर की मौत हो गयी और दलितों के 25 घर जला दिए गए।

पुलिस के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर 'भीम सेना' नामक संगठन द्वारा नौ मई को सहारनपुर में इकट्ठा होने के मैसेज वितरित किए जा रहे थे। साथ ही 'महा पंचायत' और शब्बीरपुर में दलितों के खिलाफ हिंसा पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

सहारनपुर के डीएम एनपी सिंह के अनुसार, सोशल मीडिया पर भेजे गये मैसेज में कहा जा रहा है कि ''न्याय नहीं मिला तो सहारनपुर शहर को जला दिया जाएगा।''

डीएम एनपी सिंह के अनुसार, विरोध प्रदर्शन करने वाले जिले के दलित बहुल गांवों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मलहीपुर में गाड़ियों को जला दिया और पुलिस की गाड़ी पर पथराव किया।

सहारनपुर के डीआईजी जीतेंद्र शाही के अनुसार, 'भीम सेना' बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के मुख्यमंत्रीकाल से सक्रिय है।

लोगों को सहारनपुर में इकट्ठा होने की अपील करने वाले राहुल भारती ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि ''दलितों के खिलाफ अत्याचार सोची-समझी रणनीति का परिणाम था और हम इसके खिलाफ लड़ेंगे।''

कर्नाटक में 150 सीटें जीत कर कांग्रेस बनाएगी सरकार: बीजेपी महासचिव

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीधर राव ने पार्टी की बैठक में कहा कि कर्नाटक में अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव में कांग्रेस 150 सीटें जीतेगी। कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए 113 सीटें ही काफी होती हैं।

मुरलीधर राव को तुरंत ही अपनी भूल का अहसास हो गया और उन्होंने अपनी बात दुरस्त करते हुए कहा कि कर्नाटक में आगामी विधान सभा चुनाव में भाजपा 150 सीटें जीतेगी, लेकिन मुरलीधर राव की अनचाही भूल से पार्टी को अवांछित नुकसान हो गया।

उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर लीक हो गया। आखिर में मुरलीधर राव ने भाजपा के सोशल मीडिया सेल को उनके संबोधन का पूरा वीडियो जारी करने के लिए कहा।

कर्नाटक में अभी कांग्रेस की सरकार है। कांग्रेस के के सिद्धारमैया राज्य के मुख्यमंत्री हैं। कर्नाटक में पिछला विधान सभा चुनाव मई 2013 में हुआ था। राज्य में विधान सभा की कुल 225 सीटे हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने राज्य की 125 सीटों पर जीत हासिल करके भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया था।

भाजपा को 44  और जनता दल (सेकुलर) को 40 सीटों पर जीत मिली थी। बाकी सीटें अन्य पार्टियों और निर्दलियों के खाते में गयी थीं।

2013 के चुनाव में भाजपा को बीएस येदियुरप्पा के पार्टी छोड़ने का बड़ा नुकसान हुआ था। येदियुरप्पा के नेतृत्व में ही भाजपा पहली बार किसी दक्षिण भारतीय राज्य में सरकार बनाने में सफल हुई थी। येदियुरप्पा ने भाजपा से निकलने के बाद अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा था।

येदियुरप्पा भले ही अपनी पार्टी को जीत न दिला सके हों, लेकिन उन्होंने भाजपा को हराने में अहम रोल अदा किया था।

जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी का आदेश दिए जाने के करीब एक घंटे बाद ही कोलकाता हाई कोर्ट के जज सीएस कर्णन ने भारत की सर्वोच्च अदालत के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि वो पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रद्द करने वाला आदेश दे चुके हैं।

जस्टिस कर्णन ने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट ने सुबह 11 बजे आदेश दिया। मैंने सुबह 11.20 पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रद्द करने का आदेश दिया। वो मीडिया को मेरे बयान न छापने का आदेश कैसे दे सकते हैं?''

जस्टिस कर्णन चेन्नई के चेपक गवर्नमेंट गेस्ट हाउस में मीडिया से मुखातिब थे।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (नौ मई) को मीडिया को जस्टिस कर्णन के किसी भी बयान को न छापने के लिए कहा था। कर्णन ने अपने लेटर पैड पर लिखा एक लिखित बयान जारी किया और कहा कि ये उनका आदेश है।

जस्टिस कर्णन ने कहा कि उन्होंने सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट के सात जजों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।

जस्टिस कर्णन ने कहा, ''क्या मैं असमाजिक तत्व हूं? क्या मैं आतंकी हूं? वो प्रतिबंध का आदेश कैसे दे सकते हैं? बगैर मेरा पक्ष सुने उन्होंने मेरे खिलाफ कई फैसले दिए हैं? मैं गिरफ्तारी या जेल से नहीं डरता। आम जनता मेरे साथ है। ये न्यायिक व्यवस्था की पूर्ण विफलता है। मैं पहले ही जेल देख चुका हूं।''

जस्टिस कर्णन ने बताया कि हाई कोर्ट के जज के तौर पर वो करूर, शिवगंगा स्थित जेलों का दौरा कर चुके हैं।

जेल जाने से डरने के सवाल पर जस्टिस कर्णन ने कहा, ''मैं नेपोलियन की तरह हूं, डॉक्टर अंबेडकर का एक दत्तक पुत्र  ..... वो कहते हैं मैं पागल हूं। अगर मैं पागल हूं तो मुझे जेल क्यों भेजा जा रहा है?''

ये पूछने पर की क्या वो राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने वाले हैं? जस्टिस कर्णन ने कहा कि वो पहले राष्ट्रपति को अपना प्रतिनिधित्व भेज चुके हैं। जस्टिस कर्णन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू होने लायक नहीं है और वो मीडिया पर प्रतिबंध के सर्वोच्च अदालत के आदेश को खारिज करने वाला आदेश दे चुके हैं।

जस्टिस कर्णन ने कहा कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट के सात जजों और उनके बीच का नहीं बल्कि न्यायापालिका में भ्रष्टाचार का है जिसकी अनदेखी की जा रही है।

जस्टिस कर्णन ने कहा कि एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सर्वोच्च अदालत में मामले को सही तरीके से नहीं रखा।