भारत

व‍िदेशी न‍िवेश पर फैसला लेने वाले बोर्ड को भंग करने का प्रस्‍ताव

कांग्रेस नेता और भारत के पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के चैन्नई स्थित घर पर छापेमारी के एक दिन बाद ही फॉरेन इनवेस्टमेंट पर्सनल बोर्ड (एफआईपीबी) को भंग करने का प्रस्ताव मोदी की कैबिनेट में पहुंच गया है। यह छापेमारी इसलिए की गई थी कि क्या उनके वित्त मंत्री रहते हुए विदेशी निवेश प्रस्ताव को अवैध रूप से मंजूरी दी गई?

एफआईपीबी का गठन दो दशक पहले किया गया था। इसमें अलग-अलग मंत्रालयों के पांच ब्यूरोक्रेट्स होते हैं। यह भारत में 600 करोड़ रुपये तक के विदेशी निवेश को मंजूरी दे सकते हैं। इससे बड़े निवेश का फैसला कैबिनेट कमिटी करती है।

फरवरी में आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि भारत में बिजनेस करने को सरल बनाना है। इसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए सुधार करने में एफआईपीबी को खत्म करना शामिल है। यह वित्त मंत्रालय का ही एक हिस्सा है।

वित्त मंत्री ने कहा था कि अगले कुछ महीनों में विदेशी निवेश के आवेदन के लिए रोडमैप की घोषणा की जाएगी। कैबिनेट की मंजूरी के एक महीने के अंदर ही एफआईपीबी के भंग होने की संभावना है।

खबरों के मुताबिक, प्रासंगिक मंत्रालयों और नियामकों को निवेश के प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए अधिकृत किया जाएगा। स्वीकृति मांगने वाली कंपनियों को एक नई वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए कहा जा सकता है जो संबंधित मंत्रालयों को सीधे आवेदन पहुंचा देगी। 2015 की शुरूआत में एफआईपीबी ने अपने फैसलों में तेजी लाने के लिए एक महीने में दो बार मीटिंग करना शुरू कर दिया था।

रक्षा और खनन जैसे कुछ क्षेत्रों को छोड़कर सरकारी अप्रूवल की जरूरत नहीं है। यह 49 फीसदी तक की इक्विटी विदेशी खरीदार को दे सकते हैं। भारत में 90 फीसदी से ज्यादा एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) का प्रवाह इस स्वचालित मार्ग से होता है। वित्त वर्ष 2016 के पहले 6 महीने में ही लगभग 1,45,000 करोड़ रुपये का विदेश प्रत्यक्ष निवेश आ गया था। वित्त मंत्रालय के मुताबिक वित्त वर्ष 2015 के पहले 6 महीने की तुलना में यह 36 फीसदी ज्यादा था।

पीटर मुखर्जी के आईएनएक्स मीडिया को मंजूरी देने के मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिंदबरम के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद सीबीआई ने चिंदबरम व उनके बेटे कार्ति चिंदबरम के घर पर छापेमारी की एफआईआर में इंद्राणी मुखर्जी, पीटर मुखर्जी और कार्ति चिदंबरम का भी नाम शामिल था।

मानहानि केस: राम जेठमलानी ने अरुण जेटली को कहा 'बदमाश'

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरिवंद केजरीवाल को वित्त मंत्री अरुण जेटली मानहानि मामले में 10 करोड़ से अधिक का हर्जाना देना पड़ सकता है। दरअसल आज (17 मई, 2017) कोर्ट में मुख्यमंत्री केजरीवाल की तरफ से केस लड़ रहे वकील रामजेठमलानी ने जिरह के दौरान अरुण जेटली को CROOK (बदमाश) शब्द का इस्तेमाल कर उल्लेखित किया।

इस दौरान अरुण जेटली ने कहा, ''क्या आपको इतने भद्दे शब्द का इस्तेमाल करने की मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अनुमति दी है। अगर दी है तो है मैं दस करोड़ की मानहानि वाली राशि बढ़ाने वाला हूँ।''

इसके बाद जेटली ने कहा कि अपमान की भी कोई सीमा होती है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने ऊपर और आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं पर लगे अपराधिक और सिविल केस के बचाव के लिए 93 साल के राम जेठमलानी को मुख्य वकील के रूप में चुना था। जिसपर कहां जा रहा था कि इसके लिए मुख्यमंत्री ने जेठमलानी को करीब चार करोड़ रुपए भुगतान किए हैं।

हालांकि मामले में चले लंबे विवाद के बाद जेठमलानी ने कहा था कि वो बिना किसी तरह की फीस लिए कोर्ट में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का प्रतिनिधित्व करेंगे।

आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान केजरीवाल उपस्थित नहीं थे। वहीं अपने ऊपर लगे आरोप पर वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था डीडीसीए का अध्यक्ष रहने के दौरान केजरीवाल ने उनपर सार्वजनिक तौर पर झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए।

बता दें कि हाईकोर्ट में जिरह के दौरान केजरीवाल के वकील राम जेठमलानी ने कहा, ''अरुण जेटली बदमाश हैं और ये मैं दिखाउंगा।''

जेठमलानी के इन शब्दों के बाद अरुण जेटली ने इसपर कड़ा विरोध जताया और मानहानि की कीमत बढ़ाने की चेतावनी भी दी।

इस दौरान जेटली ने कहा कि आप निजी जिंदगी को लेकर हमले कर रहे हैं, ये ठीक नहीं है।

इसपर जेठमलानी ने कहा कि मैं अपने क्लाइंट की मर्जी से मिल रहा हूँ और हमेशा अपने क्लाइंट से केस समझने के लिए मिलता हूँ।

कोर्ट में जेठमलानी ने कहा कि मैंने काला धन देश में लाने के लिए जितनी लड़ाई लड़ी, उसपर जेटली ने पानी फेर दिया।

बीजेपी को हराने के लिए कांग्रेस का समर्थन कर सकते हैं: हार्दिक पटेल

गुजरात में भाजपा को हराने को अपना मुख्य लक्ष्य बताते हुए पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने बुधवार (17 मई) को संकेत दिया कि वह अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करने पर भी विचार कर सकते हैं।

पटेल आरक्षण आंदोलन की अगुवाई कर चुके 23 वर्षीय नेता ने सरकार पर ओबीसी कोटा के तहत पटेल समुदाय को आरक्षण देने के मुद्दे पर टाल-मटोल करने का आरोप लगाया। पाटीदार अनामत आंदोलन समिति का नेतृत्व करने वाले हार्दिक ने कहा कि अगर राज्य सरकार यथाशीघ्र आरक्षण मुद्दे पर ठोस आश्वासन के साथ नहीं आती है तो वह इस साल के उत्तरार्द्ध में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए काम करेंगे।

हार्दिक ने बुधवार को मीडियाकर्मियों से कहा, ''आरक्षण समेत हमारी विभिन्न मांगों के संबंध में कई ज्ञापन देने के बावजूद पिछले दो वर्षों के दौरान भाजपा सरकार ने कोई आश्वासन नहीं दिया है।'' उन्होंने कहा, ''हम चाहते हैं कि सरकार आरक्षण पर अपना रुख यथाशीघ्र स्पष्ट करे।''

हार्दिक ने कहा, ''मैं उनसे कहना चाहता हूं कि हमारा आंदोलन जीवित है और आने वाले दिनों में यह गति पकड़ेगा। हम अब इस बात को सुनिश्चित करने के लिए योजना बना रहे हैं कि जो पार्टी 150 सीटों पर जीतने का सपना देख रही है, वह चुनाव में 80 से अधिक सीटें नहीं जीत पाए।''

ममता बनर्जी राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष का एक कॉमन उम्मीदवार खड़ा करने के पक्ष में

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार (17 मई) को दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। इन दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष का एक कॉमन कैंडिडेट खड़ा करने, ईवीएम विवाद समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इससे पहले राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी।

ममता बनर्जी राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की ओर से सर्वसहमति से एक कॉमन उम्मीदवार खड़ा करने के पक्ष में है।

बता दें कि मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इसी साल जुलाई में खत्म हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल के बीच ईवीएम विवाद पर भी बात हुई है। केजरीवाल इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं, ममता बनर्जी भी उनके सुर में सुर मिलाती रहीं हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की एकजुटता कायम करने के लिए लगातार कोशिश कर रही हैं। ममता बनर्जी ने इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह, आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की है।

इस बीच ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के निकाय चुनाव में पार्टी की जीत से उत्साहित हैं, और उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि माँ, माटी और मानुष को हम पर विश्वास जताने के लिए बार-बार बधाई। हमलोग विनम्र होकर राज्य की जनता का आभार व्यक्त करते हैं।

निकाय चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को मिली शानदार जीत

पश्चिम बंगाल के 7 नगर निगमों के नतीजे बुधवार को जारी कर दिए गए। इनमें से 4 पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुआई वाली तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की है। वहीं जीजेएम को पहाड़ी इलाकों के 3 वार्ड में जीत हासिल हुई है।

पुजाली, मिरिक, रायगंज और दोमकल में टीएमसी को जीत मिली है। निकाय चुनाव दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, मिरिक, दोमकल, रायगंज और पुजाली में हुए थे।

एएनआई के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस को मुर्शिदाबाद जिले के दोमकल में 21 में से 18 सीटें मिली हैं। बाकी तीन सीटों में एक कांग्रेस को और सीपीआई (एम) को 2 सीटें मिली हैं। ये तीनों उम्मीदवार बाद में टीएमसी में शामिल हो गए।

अब तक के नतीजों के मुताबिक, रायगंज की 27 सीट में से टीएमसी ने 14 पर जीत दर्ज की है। वहीं, सीपीआईएम-कांग्रेस के खाते में 2 और बीजेपी के खाते मे एक वॉर्ड आया है।

पुजाली में तृणमूल कांग्रेस को 16 में से 12 वॉर्ड और बीजेपी, सीपीआईएम को एक-एक वॉर्ड मिला है।

तृणमूल कांग्रेस ने मिरिक निकाय चुनावों में भी जीत हासिल की है। उसे 9 में से 6 सीट मिली हैं।

वहीं, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) को तीन वॉर्ड मिले हैं।

चुनाव जीतने के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया। 14 मई को हुए मतदान में कुल 68 प्रतिशत मतदान हुआ था। सातों निकायों में से पुजाली में सबसे ज्यादा 79.6 प्रतिशत और दार्जलिंग में सबसे कम 52 प्रतिशत मतदान हुआ था। चुनाव के दौरान हिंसा के मामले भी सामने आए थे।

दार्जिलिंग में जीजेएम आगे चल रही है। यहां 32 वॉर्ड में से जीजेएम को 29 पर जीत हासिल हुई है। हालांकि, एक वॉर्ड जीतकर टीएमसी ने यहां पहली बार अपना खाता खोला है।

कुर्सियांग में जीजेएम को 20 में से 17 वॉर्ड पर जीत मिली है। यहां टीएमसी ने तीन सीटें जीती हैं।

कलिम्पोंग में जीजेएम को 23 में से 11 वॉर्ड  पर जीत मिली है। वहीं, टीएमसी को 1 और अन्य ने 2 वॉर्ड जीते हैं।

तीन तलाक आस्था का मसला है: एआईएमपीएलबी

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि तीन तलाक एक 'गुनाह और आपत्तिजनक' प्रथा है, फिर भी इसे जायज ठहराया गया है और इसके दुरुपयोग के खिलाफ समुदाय को जागरूक करने का प्रयास जारी है।

वरिष्ठ वकील यूसुफ हातिम मनचंदा ने न्यायालय से तीन तलाक के मामले में हस्तक्षेप न करने के लिए कहा, क्योंकि यह आस्था का मसला है और इसका पालन मुस्लिम समुदाय 1,400 साल पहले से करते आ रहा है, जब इस्लाम अस्तित्व में आया था।

उन्होंने कहा कि तीन तलाक एक 'गुनाह और आपत्तिजनक' प्रथा है, फिर भी इसे जायज ठहराया गया है और इसके दुरुपयोग के खिलाफ समुदाय को जागरूक करने का प्रयास जारी है।

एआईएमपीएलबी की कार्यकारिणी समिति के सदस्य यूसुफ हातिम मनचंदा ने यह सुझाव पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ को तब दिया, जब पीठ ने उनसे पूछा कि तीन तलाक को निकाह नामा से अलग क्यों किया गया और तलाक अहसान तथा हसन को अकेले क्यों शामिल किया गया?

एआईएमपीएलबी की तरफ से ही पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था और यह आस्था का मामला है और इस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उसी तरह, मुस्लिम पर्सनल लॉ भी आस्था का विषय है और न्यायालय को इस पर सवाल उठाने से बचना चाहिए।

सिब्बल पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ के समक्ष अपनी दलील पेश कर रहे थे, जिसमें प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित तथा न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर शामिल हैं जो तीन तलाक की संवैधानिक मान्यता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं की सुनवाई कर रही है।

जब सिब्बल ने जोर दिया कि पर्सनल लॉ आस्था का मामला है और न्यायालय को इसमें दखल नहीं देना चाहिए, तो न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, ''हो सकता है। लेकिन फिलहाल 1,400 वर्षो बाद कुछ महिलाएं हमारे पास इंसाफ मांगने के लिए आई हैं।''

सिब्बल ने कहा, ''पर्सनल लॉ कुरान व हदीस से लिया गया है और तीन तलाक 1,400 साल पुरानी प्रथा है। हम यह कहने वाले कौन होते हैं कि यह गैर-इस्लामिक है। यह विवेक या नैतिकता का सवाल नहीं, बल्कि आस्था का सवाल है। यह संवैधानिक नैतिकता का सवाल नहीं है।"

सिब्बल ने महान्यायवादी मुकुल रोहतगी द्वारा न्यायालय के समक्ष सोमवार को की गई उस टिप्पणी पर चुटकी ली जिसमें उन्होंने कहा था कि न्यायालय मुस्लिमों में तलाक के तीनों रूपों को अमान्य करार दे और केंद्र सरकार तलाक के लिए नया कानून लाएगी।

जब सिब्बल ने कहा कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय से नहीं कह सकती कि आप पहले तलाक़ के तीनों रूपों को अमान्य करार दीजिए, उसके बाद हम एक नया कानून लाएंगे, तब प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति केहर ने कहा, ''पहली बार आप हमारे साथ हैं।''

सिब्बल ने कहा, ''आस्था को कानून की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता।''

उन्होंने कहा, हम बेहद जटिल दुनिया में प्रवेश कर चुके हैं, जहां क्या गलत है और क्या सही, इसकी खोज करने के लिए हमें 1,400 साल पहले इतिहास में जाना होगा।

जम्मू-कश्मीर में सेना और पुलिस के संयुक्त सर्च ऑपरेशन में बड़े आतंकी ठिकाने का पर्दाफाश

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सेना और पुलिस ने सोमवार (15 मई) को एक सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकवादी ठिकाने का पर्दाफाश किया है।

राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन कर किश्तवाड़ जिले के नागासी तहसील के जंगलों से बड़े पैमाने पर एके-56 राइफल्स के साथ दो मैगजीन, 60 राउंड एके-56, 4 यूबीजीएल ग्रेनेड, 4 हैंड ग्रेनेड, 1 वायरलेस हेडफोन, 1 रेडियो सेट एंटीना, 3 आरपीजी राउंड, खाना पकाने वाला बर्तन और 2 कंबल मिला है।

सूत्रों के मुताबिक, सेना और पुलिस ने अनुमान लगाया है कि यह आतंकवादियों का ठिकाना हो सकता है। आतंकी यहां छिपकर किसी बड़े हमले की साजिश रच रहे थे।

हालांकि, कोई आतंकवादी अभी पकड़ में नहीं आया है। बताया जा रहा है कि सेना और पुलिस की टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त छापेमारी की थी। इसी के साथ सेना और पुलिस ने सर्च आपरेशन तेज कर दिया है।

बसपा से निकाले गए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने योगी आदित्य नाथ से मुलाकात की

बसपा से निकाले गए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्य नाथ से मुलाकात की। सोमवार देर शाम को नसीमुद्दीन सिद्दीकी सीएम के सरकारी आवास पर उनसे मुलाकात करने के लिए पहुंचे।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी को भ्रष्टाचार के आरोपों में बसपा से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा सिद्दीकी के बेटे अफजल को भी पार्टी से बाहर कर दिया है।

पिछले सप्ताह नसीमुद्दीन ने मायावती पर आरोप लगाया था कि वह 50 करोड़ रुपये की मांग कर रही थीं। इसके  अलावा उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया था।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि उनकी जान को खतरा है।

उन्होंने कहा था कि बसपा सुप्रीमो मायावती और बीएसपी के कुछ नेताओं के खिलाफ उनके पास इतने सबूत हैं कि अगर वह उजागर कर दें तो भूकंप आ सकता है। मायावती द्वारा खुद को ब्लैकमेलर बताने पर सिद्दीकी ने कहा था कि उन्होंने बीएसपी प्रमुख का नुस्खा ही उनपर आजमाया और उनका फोन टैप किया।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि मैंने अपने बीवी-बच्चे को बचाने के लिए ऐसा किया।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, ''मायावती बताएं कि मैंने किसको ब्लैकमेल किया। मैंने तो अपने बीवी-बच्चे और परिवार को बचाने के लिए मायावती के सिखाए फोन टैपिंग के नुस्खे को उनपर ही आजमा लिया। मायावती ने अपनी दुर्भावना छिपने के लिए मुझे ब्लैकमेलर कहा। मैंने तो मायावती से बड़ा ब्लैकमेलर आजतक नहीं देखा। मायावती विधायकों और सांसदों को ब्लैकमेल करती हैं।''

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि मायावती की प्रताड़ना से तंग होकर कई लोग पार्टी छोड़कर चले गए।

ऑडियो में मायावती के छेड़छाड़ के आरोप पर उन्होंने कहा कि मायावती को कैसे पता कि ऑडियो में छेड़छाड़ हुई है।

उन्होंने कहा, ''मेरे द्वारा जारी ऑडियो की कहीं भी जांच करा ली जाए। अगर इसमें छेड़छाड़ की बात साबित हो जाती है तो वह जो कहें मैं करने को तैयार हूं। मायावती हमेशा नई कहानी गढ़ती हैं। उन्होंने सतीश चंद्र मिश्र पर बीएसपी को बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि मायावती ने कांशीराम के सपनों को खत्म कर दिया। वह मुझसे मेरे सारी चल-अचल संपत्ति लेना चाहती थीं।''

सांप्रदायिक घटनाओं ने योगी सरकार का बढ़ाया सिरदर्द

कानून-व्यवस्था के नाम पर पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार को घेरकर करीब दो महीने पहले नए तेवर के साथ सत्ता में आई योगी आदित्यनाथ सरकार के सामने यही मुद्दा सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं।

योगी आदित्यनाथ सरकार अपने शुरुआती 100 दिनों के कार्यकाल का 'रिपोर्ट कार्ड' अगले महीने के अंत में जारी करेगी और राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार, मुख्यमंत्री इस दस्तावेज को अपनी सरकार का कामयाबीनामा बनाना चाहेगी। मगर इसके लिए चुनौती काफी बड़ी है। 19 मार्च को योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

उत्तर प्रदेश भाजपा का कहना है कि योगी सरकार बनने के बाद से प्रदेश की तस्वीर में बदलाव शुरू हो चुका है। गुंडागर्दी खत्म हो रही है और अपराध का ग्राफ गिर रहा है। सरकार में जनता का विश्वास बहाल हो रहा है। मगर सहारनपुर में जातीय संघर्ष, बुलन्दशहर, संभल और गोंडा में हाल में हुई साम्प्रदायिक घटनाओं ने सरकार के लिए चिंता खड़ी कर दी है। ज्यादा चिंता की बात यह है कि इन वारदात में बीजेपी और तथाकथित हिन्दूवादी संगठनों के लोगों की संलिप्तता के आरोप लगे हैं।

मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) समेत तमाम विपक्षी दल उस बीजेपी सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेर रहे हैं जो इसी मसले पर पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार की आलोचना करके सत्ता में आई है।

बुलंदशहर में एक लड़की को साथ ले जाने की घटना में अल्पसंख्यक समुदाय के एक व्यक्ति की हत्या मामले में योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं पर आरोप लगा है।

हालांकि योगी हिन्दू युवा वाहिनी सदस्यों को कानून हाथ में ना लेने के लिए चेतावनी दे चुके हैं।

सहारनपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने क्षेत्रीय सांसद राघव लखनपाल शर्मा की अगुवाई में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के घर पर हमला किया। इस मामले में विपक्ष सांसद की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है।

गुजरात में लोकल चुनाव में हारी बीजेपी, कांग्रेस ने 10 साल बाद हासिल की जीत

विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में बीजेपी को जबर्दस्त झटका लगा है। यहां के एक लोकल चुनाव में कांग्रेस ने जबर्दस्त जीत हासिल की है।

इस चुनाव में बीजेपी के सारे कैंडिडेट चुनाव हार गये हैं। कांग्रेस ने 10 साल बाद बीजेपी को यहां शिकस्त दी है।

दरअसल गुजरात के बोटाद जिले में स्थानीय एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) के चुनाव में बीजेपी के सभी 8 कैंडिडेट हार गये हैं।

यहां पर बोटाद कांग्रेस अध्यक्ष डी एम पेटल के नेतृत्व वाले पैनल ने सारे सीटों पर जीत हासिल की है।

शनिवार (13 मई) देर रात घोषित इन नतीजों से बीजेपी नेतृत्व हैरत में है। बीजेपी को इन नतीजों से इसलिए भी हैरानी है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक महीने पहले ही इस इलाके का दौरा कर चुके हैं, और सिंचाई से जुड़े एक स्कीम का उद्घाटन कर चुके हैं, लेकिन बीजेपी को पीएम के इस दौरे का भी कोई फायदा नहीं हुआ है।

इस हार के बाद बीजेपी में कलह का भी दौर शुरू हो गया है। एपीएमसी के एक निदेशक ने कथित रुप से हारे हुए चेयरमैन भिखा लनिया को थप्पड़ भी लगा दिया, इस निदेशक के मुताबिक, चेयरमैन की नेतृत्व क्षमता की कमी की वजह से ही बीजेपी ये चुनाव हारी।

हालांकि एपीएमसी का चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं लड़ा जाता है, लेकिन पार्टी समर्थित नेता ही इस चुनाव को जीतते हैं।

कांग्रेस का कहना है कि किसान वर्ग बीजेपी से नाराज है, किसानों को कपास और मूंगफली के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं इसलिए किसानों ने बीजेपी को सबक सिखाया है।

पाटीदार अनमात आंदोलन समिति (पीएएएस) ने बीजेपी की हार का जश्न मनाया है। पीएएएस के बोटाद संयोजक दिलीप सबवा का कहना है कि ये नतीजा बीजेपी के प्रति किसानों के गुस्से को दर्शाता है, इसका ये भी मतलब है कि पीएम मोदी की घोषणाओं का भी किसानों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष बाबू जबेलिया बोटाद के ही रहने वाले हैं, उनका कहना है कि वे पार्टी की हार को स्वीकार करते हैं और इस बात का पता लगाएंगे कि आखिर बीजेपी से कहां चूक हुई है।