राजस्थान हाई कोर्ट ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने को कहा है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, हाई कोर्ट ने राजस्थान सरकार से कहा है कानून में बदलाव कर गाय का वध करने वालों को आजीवन उम्रकैद की सजा होनी चाहिए।
हाई कोर्ट ने हिंनगोनिया गौशाला में गायों की मौत मामले पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने वन विभाग को आदेश दिया है कि हर साल गौशालाओं में 5000 पौधे लगाए जाएं। फिलहाल गौहत्या करने पर 3 साल की सजा का प्रावधान है।
26 मई को नरेंद्र मोदी सरकार ने वध के लिये पशु बाजारों में मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगा दिया था। पर्यावरण मंत्रालय ने पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम के तहत सख्त पशु क्रूरता निरोधक (पशुधन बाजार नियमन) नियम, 2017 को अधिसूचित किया था।
लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने 4 हफ्ते के लिए केंद्र सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी है और इस संबंध में उससे जवाब मांगा है।
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने कहा था कि लोगों की 'फूड हैबिट' तय करना सरकार का काम नहीं है। इस संबंध में केन्द्र के फैसले के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एमवी मुरलीधरन और जस्टिस सीवी कार्तिकेयन ने कहा था कि अपने पसंद का खाना चुनना सभी का व्यक्तिगत मामला है और इस अधिकार में कोई दखल दे नहीं सकता।
वध के लिए मंडियों और बाजार में पशुओं की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले का कई राज्य सरकारों ने विरोध किया था।
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा था कि केन्द्र सरकार ने फैसला राज्यों से बिना पूछे लिया है। इस मामले में बड़ा विवाद तब छिड़ गया था, जब केरल के कन्नूर में इस फैसले के विरोध में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक रुप से एक बछड़े को काटा और उसके मीट को लोगों के बीच में बाँटा था।
यूथ कांग्रेस के इस कार्यक्रम का देश भर में विरोध हुआ था। खुद कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इसकी निंदा की थी।
हालांकि कांग्रेस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अपने पार्टी के दो सदस्यों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
आईआईटी मद्रास में भी स्टूडेंट्स ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ बीफ फेस्टिवल का आयोजन किया था।
वहीं केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर उन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह किसी भी शख्स के संवैधानिक और मूलभूल अधिकारियों का हनन है।
विजयन ने कहा, ''यह देखना होगा कि क्या केंद्र सरकार के पास यह आदेश देने का अधिकार है या नहीं।''
नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा वध के लिये पशु बाजारों में मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगाने से केंद्र-राज्य सम्बन्ध ख़राब होंगे।
पहले सिर्फ कश्मीर में आज़ादी की माँग उठ रही थी। लेकिन अब मोदी सरकार के मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगाने के बाद ट्विटर पर द्रविड़नाडु की माँग उठने लगी है जिसमें केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना को मिलाकर अलग देश बनाने की माँग की जा रही है।
द्रविड़नाडु की माँग 1940 में पेरियार ने अंग्रेजों से की थी। 1947 में आज़ादी के बाद द्रविड़नाडु की माँग को लोग भूल गए थे, लेकिन मोदी सरकार के मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगाने के बाद द्रविड़नाडु की माँग फिर से की जाने लगी है।
मणिपुर की राज्यपाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला को जामिया मिलिया इस्लामिया का चांसलर नियुक्त किया गया है।
जामिया के वीसी तलत अहमद ने खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें (नजमा) 5 साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है। 77 वर्षीया नजमा हेपतुल्ला लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर) एम ए जकी की जगह लेंगी, जिनका पांच साल का कार्यकाल इस वर्ष पूरा हो रहा है।
तलत अहमद ने कहा, ''विश्वविद्यालय को उनके राजनैतिक और सार्वजनिक अनुभव का भरपूर फायदा मिलेगा। उनके साथ काम करना सौभाग्य की बात होगी।''
नजमा हेपतुल्ला पांच बार राज्यसभा की सदस्य रही हैं और 16 साल तक उप-सभापति की जिम्मेदारी भी निभाई है।
मणिपुर का गवर्नर बनने से पहले वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री हुआ करती थीं।
रिपब्लिक टीवी और उसके एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी को दिल्ली हाइकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। सोमवार (29 मई) को कोर्ट ने अरनब गोस्वामी को निर्देश देते हुए कहा है कि आप भाषणबाजी कम करो और अपने तथ्यों को दिखाओ।
साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि आप अपने चैनल पर इस तरह से किसी का नाम (थरूर) को नहीं ले सकते।
आपको बता दें कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा दायर एक मानहानि मामले में सुनवाई के दौरान अरनब गोस्वामी और हाल ही में शुरू हुए न्यूज चैनल रिपब्लिक टीवी को दिल्ली हाइकोर्ट ने नोटिस जारी किया।
दरअसल अरनब गोस्वामी के चैनल रिपब्लिक टीवी ने अपने विशेष प्रोग्राम में सुनंदा पुष्कर हत्याकांड को लेकर खुलासा किया था। प्रोग्राम में दावा किया गया था कि सुनंदा पुष्कर की मौत के बाद कांग्रेस नेता शशि थरूर कमरे में वापस आए थे।
एंकर अरनब गोस्वामी ने स्पेशल प्रोग्राम के जरिए कहा कि शशि थरूर के कमरे में आने के बाद सबूतों से छेड़छाड़ की गई थी। यहां तक की सुनंदा पुष्कर की लाश को भी हटाया गया था।
प्रोग्राम में दावा किया गया था इन रिकॉर्डिंग को पहले कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। हमारे पास पुख्ता सबूत हैं कि सुनंदा पुष्कर की हत्या के बाद शशि थरूर रूम नंबर 309 में सुबह और शाम को वापस आए थे।
इस प्रोग्राम के बाद 27 मई को शशि थरूर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अरनब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। थरूर ने उनके खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक टिप्पणियों के लिए दो करोड़ रूपए के मुआवजे की याचिका में मांग की थी।
बता दें कि शशि थरूर की पत्नी सुनंद पुष्कर दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में मृत पाई गई थी। हत्या के बाद से अब तक इस मर्डर मिस्ट्री को लेकर खुलासा नहीं हो सका है। इस दौरान शशि थरूर खुद अपनी पत्नी की हत्या के शक के दायरे में बने रहे।
हालांकि कई महीने तक जांच और फोरिंसिक रिपोर्ट के बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। मामले की जांच अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई तक भी पहुंची, लेकिन वहां से भी कुछ खास जानकारी निकलकर सामने नहीं आई।
बाद में खुलासा किया गया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद थरूर और सुनंदा के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी।
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी ने एक इंटरव्यू में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने कई अहम मसलों पर बातचीत की।
द वायर को दिए इस इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि नरेंद्र मोदी दुनिया के इकलौते एेसे नेता हैं जो गाली-गलौच करने वाले ट्विटर हैंडल को फॉलो करते हैं। इन्हीं हैंडल के जरिए आपको और आपके बेटे, जो दिमागी लकवे से पीड़ित हैं, पर करन थापर को दिए इंटरव्यू के बाद हमला बोला गया।
इस पर उन्होंने कहा कि उनको फॉलो करके मोदी संदेश देते हैं कि मैं उसे फॉलो कर रहा हूँ। अगर आप उसे फॉलो कर रहे हैं तो आप ही उसे बढ़ावा भी दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि मैंने सुना है कि पीएम मोदी ने उनका स्वागत भी किया। पीएम के आधिकारिक निवास पर भी आपको वही लोग मिलते हैं। वे पीएम मोदी के साथ फोटो भी लगाते हैं। उनमें से एक शख्स को उन्होंने बीजेपी के आईटी सेल का हेड बना दिया। अब यह सरकारी और पार्टी अॉपरेशन बन चुका है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान के अखबार राजस्थान पत्रिका को राज्य सरकार ने सिर्फ इसलिए विज्ञापन देने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्होंने केंद्र सरकार के बारे में कुछ गलत लिखा था।
शौरी से पूछा गया कि आशीष नंदी ने नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू के बाद लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था, मुझे महसूस हो रहा है कि मेरी मुलाकात एक किताबी फासीवादी शख्स से हुई है। आप भी मोदी को जानते हैं, उनके लिए प्रचार भी किया है। क्या आप उनसे सहमत हैं?
इस पर उन्होंने कहा कि जो भी नरेंद्र मोदी के खिलाफ खड़ा होगा, उसपर प्रदीप शर्मा (आईएएस) और तीस्ता सीतलवाड़ की तरह मुकदमों की झड़ी लग जाएगी।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी बहुत जल्दी तिलमिला जाते हैं। उदाहरण के तौर पर दिल्ली और बिहार चुनावों को ही देखिए। यहां मोदी ने विकास-विकास का नारा छोड़कर, लुभावने वादों का पुलिंदा बांध दिया। यह दिखाता है कि एक चुनावी हार से वह कितना घबरा जाते हैं।
क्या आपको लगता है कि सत्ता में बने रहने के लिए आरएसएस ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों से समझौता किया है?
इस पर शौरी ने कहा, नहीं, लेकिन आप एेसा क्यों सोचते हैं कि दोनों अलग हैं। मोदी-शाह हर दिन आरएसएस के मूल्यों को अपनों की तरह बढ़ावा देते हैं। इसी से जाहिर होता है कि वह सत्ता में है। आप देखिए कि बड़े संस्थानों में किन लोगों की नियुक्तियां की गई हैं। इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टॉरिकल रिसर्च (ICHR) का ही उदाहरण ले लीजिए।
उद्योगपति अनिल अंबानी की अगुआई वाली अनिल धीरूभाई अंबानी एंटरप्राइजेज की हालत क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के अनुमान से कहीं ज्यादा खराब है। रिलायंस कम्युनिकेशन पर 10 से ज्यादा स्थानीय बैंकों का लोन बकाया है।
कई बैंकों ने तो अपनी एसेट बुक में स्पेशल मेंशन अकाउंट (एसएमए) के तौर पर रिलायंस के लोन को दर्ज कर लिया है। एसएमए लोन वो होते हैं जिसमें कर्ज लेने वाले ने ब्याज नहीं चुकाया होता। अगर तय तारीख से 30 दिनों तक इन लोन का भुगतान नहीं किया जाता तो उसे एसएमए 1 और 60 दिनों बाद उसे एसएमए 2 श्रेणी में डाल दिया जाता है।
अगर 90 दिनों के बाद भी बैंक को बकाया वापस नहीं किया जाता तो उसे नॉन परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) में डाल दिया जाता है।
बिजनेस अखबार इकनॉमिक टाइम्स ने एक बैंक अधिकारी के हवाले से बताया कि अब तक देश के 10 बैंकों ने लोन को एसएमए 1 और एसएमए 2 में डाल दिया है। एक अन्य ने कहा कि एक हफ्ते बाद कुछ बैंकों को इस लोन को एनपीए में डालना होगा।
केयर और आईसीआरए द्वारा दी गई खराब रेटिंग के बाद आरकॉम के शेयर 20 प्रतिशत तक गिर गए हैं।
हालांकि रेटिंग एजेंसियों को एसएमए लोन की जानकारियाँ नहीं है क्योंकि उसे बैंक आपस में या रिजर्व बैंक से साझा करते हैं।
केयर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मुकेश अंबानी की अगुआई वाली रिलायंस जियो के प्रभाव के कारण रिलायंस कम्युनिकेशन में गिरावट आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आरकॉम के लोन डिफॉल्ट के बारे में कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ''एयरसेल और ब्रुकफील्ड के साथ समझौते के बाद आरकॉम ने बैंकों से कहा कि वह 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज 30 सितंबर 2017 तक या उससे पहले चुकाएगी। इसमें सभी शेड्यूल्ड पेमेंट तो आएंगी ही, कंपनी लोन का प्री-पेमेंट भी करेगी।''
आरकॉम को जनवरी-मार्च तिमाही में 966 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा था जो उसका लगातार दूसरा तिमाही नुकसान था। वित्त वर्ष 2017 भी आरकॉम के लिए नुकसान का पहला साल रहा।
मार्च 31 आरकॉम पर 42000 करोड़ का बकाया था जिसे वह एयरसेल और ब्रूकफील्ड के साथ डील करने के बाद घटाना चाहती है। इन कंपनियों को आरकॉम 11 हजार करोड़ रुपये में अपनी टावर यूनिट रिलायंस इन्फ्राटेल का 51 प्रतिशत हिस्सा बेच रही है। कड़ी स्पर्धा के अलावा लागत में बढ़ोत्तरी के कारण चौथी तिमाही की कमाई भी प्रभावित हुई है।
मणिपुर की एक ट्रॉयल कोर्ट ने सोमवार को सीएम बीरेन सिंह के बेटे अजय मिताई को रोड रेज मामले में पांच साल की जेल की सजा सुनाई है। रोड रेज का यह मामला 2011 का है।
अजय मिताई को 20 मार्च 2011 को हुए रोडरेज के मामले में रोजर पर गोली चलाने के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत पांच साल कारावास की सजा सुनाई गई है।
रोजर ने मिताई की गाड़ी को अपनी एसयूवी से कथित रूप से आगे नहीं निकलने दिया था। इससे मिताई को गुस्सा आ गया और उसने रोजर पर गोली चला दी थी जिससे उसकी बाद में मौत हो गई थी।
बता दें कि एन बीरेन सिंह ने 15 मार्च को मणिपुर के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब एक हफ्ता पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने मृतक के परिजनों की याचिका पर केंद्र एवं मणिपुर सरकार से जवाब माँगा था।
मृतक के माता-पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी जान को खतरा है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि बीरेन सिंह के नेतृत्व में राज्य में भाजपा का शासन होने के कारण पीड़ित के माता-पिता को अपनी जान का खतरा है।
दोषी करार दिए जाने के खिलाफ याचिका की सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय में कोई भी वकील उनकी ओर से पेश होने को तैयार नहीं था।
कश्मीर में एक शख्स को जीप पर बांधने वाले मेजर नितिन गोगोई का सेना प्रमुख बिपिन रावत ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में भारतीय सेना को गंदे खेल का सामना करना पड़ रहा है और इससे अलग तरीके से ही निपटा जा सकता है।
पीटीआई से बातचीत में जनरल रावत ने कहा कि मेजर लीतुल गोगोई को सम्मानित करने का मकसद युवा अफसरों का आत्मबल बढ़ाना था। उन्होंने कहा कि यह एक प्रॉक्सी वॉर है और यह बेहद गंदा होता है। आमने-सामने आने पर वहीं के नियम चलते हैं। इसमें नए तरीकों से आपको लड़ाई लड़नी पड़ती है।
जनरल रावत ने कहा, जब लोग हम पर पत्थर फेंक रहे हों, पेट्रोल बम फेंक रहे हों। तब अगर मेरे जवान मुझसे पूछें कि हमें क्या करना चाहिए तो मैं उनसे इंतजार करने और मरने के लिए नहीं कह सकता। उन्होंने कहा कि मुझे अपने बल का विश्वास कायम रखना है।
जनरल रावत ने यह भी कहा कि अगर लोग पत्थरबाजी की जगह सेना पर फायरिंग करें तो उनका काम आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि काश ये लोग हम पर पत्थर फेंकने के बजाय हथियारों से हमला करते, तब मुझे ज्यादा खुशी होती। तब मैं वो कर सकता था, जो मैं करना चाहता हूँ।
जम्मू-कश्मीर में कई वर्षों तक सेवा देने वाले जनरल रावत ने कहा कि अगर किसी देश में लोगों का सेना पर से भरोसा उठ जाए तो वह देश बर्बाद हो जाता है।
जनरल रावत ने कहा, दुश्मनों को आपका डर होना चाहिए और साथ ही आपके लोगों को भी आप से डरना चाहिए। हमारी फ्रेंडली सेना है, लेकिन जब हमें कानून एवं व्यवस्था बहाल करने को कहा जाएगा, तो लोगों को आपसे डरना चाहिए।
जनरल रावत ने कहा, बतौर सेना प्रमुख उनका काम जम्मू-कश्मीर में सेना के हौसले को बढ़ाना है और मेजर गोगोई को सम्मानित कर मैंने वही किया।
उन्होंने कहा, मैं युद्ध के मैदान में नहीं हूँ और मैं वहां की स्थिति को प्रभावित भी नहीं कर सकता। मैं सिर्फ जवानों को यही कह सकता हूँ कि मैं उनके साथ हूँ।
उन्होंने कहा कि कल अनंतनाग में चुनाव हैं और एेसी घटनाएं फिर हो सकती हैं। अगर सेना सुरक्षा नहीं करेगी, तो लोगों का भरोसा उठ जाएगा।
प्रशासन ने कश्मीर घाटी में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने और हिंसक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए रविवार को कर्फ्यू लगा दिया। हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर सबजार अहमद भट को आधी रात में त्राल में उसके पैतृक गांव में दफना दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे।
प्रशासन का कहना है कि रविवार को श्रीनगर के सात पुलिस थाना क्षेत्रों नौहट्टा, रेनवाड़ी, खानयार, एम.आर.गंज, सफा कदल, क्रालखड और मैसूमा में कर्फ्यू लगाया गया। शहर में सुबह वाहनों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है। श्रीनगर में किसी भी तरह की हिंसक घटना को रोकने के लिए सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है। यहां शनिवार को पत्थरबाजों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प में एक की मौत हो गई थी जबकि 40 घायल हो गए थे।
जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अध्यक्ष यासीन मलिक को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें श्रीनगर की जेल ले जाया गया। मलिक ने शनिवार को त्राल के रुतसाना में सबजार भट के घर का दौरा किया था और उसकी मां से संवेदना जताई थी।
हिजबुल कमांडर सबजार भट को आधी रात के बाद उसके पैतृक गांव रुतसाना में कड़ी सुरक्षा के बीच दफना दिया गया। इस मौके पर विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
त्राल के सैमोह गांव में शनिवार को सुरक्षाबलों द्वारा घेरे जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने इस घेरे को तोड़ने का प्रयास किया जिसमें एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई। इसी स्थान पर हिजबुल कमांडर सबजार अहमद भट और उसके साथी छिपे हुए थे। अन्य स्थानों पर हुई झड़पों में 40 लोग घायल हो गए जिसमें 28 प्रदर्शनकारी और 12 सुरक्षाकर्मी हैं।
घायल प्रदर्शनकारियों में से आठ को गोलियाँ लगी हैं, जबकि सात को पेलेट गोलियाँ लगी हैं और इन्हें श्रीनगर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
उत्तरी कश्मीर के गांदरबल, बडगाम, बांदीपोरा और कुपवाड़ा में धारा 144 लगाई गई है, जबकि दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। दक्षिण कश्मीर के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में लोग शनिवार को सबजार अहमद भट और उसके साथी फैजान की अंतिम यात्रा में शरीक हुए।
प्रशासन ने शनिवार को मोबाइल फोन पर इंटरनेट सेवा बंद कर दी, जबकि प्रीपेड मोबाइल फोन पर आउटगोइंग कॉल भी बंद कर दी गई। रविवार सुबह सभी मोबाइल फोनों पर इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल बंद कर दी गईं। फिलहाल, सिर्फ पोस्टपेड बीएसएनएल मोबाइल फोन ही काम कर रहे हैं। बारामूला से बनिहाल के बीच रेल सेवाएं बंद हैं।
रविवार को होने वाली सिविल सर्विस परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई हैं। कश्मीर घाटी में सोमवार को सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के आदेश हैं।
अलगाववादियों ने रविवार और सोमवार को बंद का आह्वान किया है और मारे गए हिजबुल कमांडर सबजार अहमद भट की याद में 30 मई को 'मार्च टू त्राल' का आह्वान किया है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के भोज में शामिल होने के बाद बहुजन समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पहली बार एक साथ उत्तर प्रदेश में रैली कर सकते हैं।
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संयुक्त रैली का आइडिया शुक्रवार को लंच समारोह के दौरान उस वक्त आया था, जब आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अखिलेश और मायावती से एक साथ आने का अनुरोध किया था।
सपा के सांसद नरेश अग्रवाल ने पुष्टि करते हुए कहा कि इस समारोह में संयुक्त रैलियां करने का प्रस्ताव सामने आया था और सभी बीजेपी विरोधी पार्टियों ने इसका समर्थन किया। उन्होंने टीओआई से कहा कि वक्त की मांग है कि पूरा विपक्ष संयुक्त रूप से बीजेपी के खिलाफ खड़ा हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव के बाद लालू प्रसाद यादव पटना में 27 अगस्त को एक विशाल रैली का आयोजन करेंगे।
हालांकि वरिष्ठ बसपा नेताओं से इस बारे में संपर्क नहीं हो पाया। लेकिन बैठक में मौजूद रहे सूत्रों ने बताया कि मायावती ने भी इसका समर्थन किया है। सूत्र ने मायावती के हवाले से कहा, मैं 100 प्रतिशत आपके साथ हूँ।
मायावती और अखिलेश की संयुक्त रैली 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी विरोधी फ्रंट को एक रूप दे सकती है।
मार्च 2017 में घोषित हुए यूपी विधानसभा चुनावों में मायावती और अखिलेश को बीजेपी से करारी हार का सामना करना पड़ा था जिसके बाद से उनके साथ आने के कयास लगाए जा रहे थे।
लालू और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भी मायावती और अखिलेश यादव से 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान साथ आने को कहा है।
शुक्रवार को लालू ने उत्तर प्रदेश के संदर्भ में एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर सपा, बसपा और कांग्रेस साथ आ जाएं तो लोकसभा में 70 सीटें जीत सकती हैं।
बता दें कि साल 1993 के बाद कभी बसपा और सपा साथ नहीं आईं। इससे पहले उन्होंने साथ में विधानसभा चुनाव लड़ा था जिसमें उन्हें जीत मिली थी। लेकिन दोनों के बीच कड़वाहट साल 1995 में उस वक्त बढ़ गई जब लखनऊ के एक गेस्ट हाउस में ठहरीं मायावती पर गुंडों ने हमला कर दिया था। उस वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने आज सहारनपुर के हिंसा से प्रभावित लोगों के परिजनों से मुलाकात की और निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस उपाध्यक्ष के साथ मौजूद वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पीएल पुनिया ने सहारनपुर से फोन पर बताया कि राहुल ने हिंसा से प्रभावित लोगों को विश्वास दिलाया कि वह उनको इंसाफ दिलाए जाने के लिए काम करेंगे।
राहुल गाँधी ने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि इस जातीय हिंसा की निष्पक्ष जांच करें और इलाके में शांति और भाईचारा बहाल करने के लिये काम करें।
जिला प्रशासन ने कांग्रेस उपाध्यक्ष को जिले में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी थी। प्रशासन ने जिले की सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और राहुल को जिले की सीमा पर रोक लिया गया।
इस पर कांग्रेस नेता ने प्रशासन से पूछा कि उन्हें किस कानून के अन्तर्गत शहर में जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। इसका एक वीडियो भी न्यूज एजेंसी एएनआई ने जारी किया है जिसमें राहुल एक पुलिस अफसर से कह रहे हैं कि आपने किस कानून के तहत मुझे रोकने की कोशिश की? आप मुझे बॉर्डर पर नहीं रोक सकते थे, लेकिन आपने रोका। इसके बाद वह नजदीक के एक ढाबे पर गए और वहाँ उन्होंने जातीय हिंसा से प्रभावित लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात की।
पुनिया ने बताया कि राहुल गाँधी ने प्रशासन से कहा कि उन्हें हिंसा के शिकार अस्पताल में भर्ती लोगों से मिलने के लिए अस्पताल में जाने के इजाजत दें।
इस पर प्रशासन ने बताया कि अस्पताल में भर्ती सभी लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार रात प्रशासन ने अस्पताल में भर्ती 23 लोगों को छुट्टी दे दी गई।
पुनिया ने बताया कि हिंसा प्रभावित लोगों से बातचीत के दौरान राहुल ने जिन दलितों के घर जलाए गए उन्हें कम मुआवजा देने की बात भी उठाई। इस पर जिलाधिकारी ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस मामले की समीक्षा करेंगे और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएंगे। उन्होंने बताया कि राहुल बाद में दिल्ली वापस लौट गए।
इससे पहले आज सुबह राहुल गाँधी कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर के साथ दिल्ली से सहारनपुर के लिए रवाना हुए थे।
सहारनपुर में मौजूद अतिरिक्त महानिदेशक (कानून व्यवस्था) आदित्य मिश्रा ने कहा था कि राहुल से अनुरोध किया जाएगा कि वह शहर न आएं और अगर उन्होंने जिद की तो उनके खिलाफ धारा 144 के तहत कार्रवाई की जाएगी।









