उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पत्रकारों पर नाराजगी जताई है। जब एक पत्रकार ने समाजवादी परिवार में अभी भी चल रहे गृहयुद्ध पर उनसे सवाल किया तो उन्होंने कहा कि आप मई में एक दिन आ जाओ। हम आपके सभी सवालों का जवाब देंगे, उसके बाद से आप फिर परिवार में लड़ाई पर कोई सवाल मत पूछना।
इसके अलावा अखिलेश ने पत्रकार के केसरिया रंग के टी-शर्ट पर भी चुटकी ली और कहा कि आप अभी नए आए हैं। इसके बाद एक असहज टिप्पणी में उन्होंने कहा कि आप जैसे लोगों की वजह से ही देश बर्बाद हो रहा है।
दरअसल, कुछ दिनों पहले उनके चाचा शिवपाल यादव ने कहा था कि अब अखिलेश को अपने वादे के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष का पद नेता जी यानी मुलायम सिंह यादव को दे देना चाहिए।
राज्य की योगी आदित्य नाथ सरकार पर भी अखिलेश यादव ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि आगरा और सहारनपुर की घटनाएं भाजपा सरकार को दिखाई नहीं दे रही है। अखिलेश ने कहा कि इलाहाबाद में भी गैंगरेप के बाद बेटियों को बदमाशों ने मार डाला बावजूद सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके शासन काल में झूठा बदायूं कांड तो मीडिया में खूब उछाला गया था।
अखिलेश यादव लखनऊ में सपा के सदस्यता अभियान के तहत एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस मौके पर राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ली।
अखिलेश यादव ने राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आजकल थानों में भगवा अंगोछे वालों की भीड़ बढ़ गई है।
पूर्व मुख्य मंत्री ने योगी सरकार द्वारा एक्सप्रेस वे की जांच कराने पर कहा कि जो एक्सप्रेस वे पर चढ़ेगा वो सपा को वोट करेगा।
उन्होंने कहा कि योगी जी हमसे अच्छा काम कब करोगे?
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मंगलवार को अपने पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। रंजीत सिन्हा पर अपने कार्यकाल के दौरान कोयला घोटाले की जांच को प्रभावित करने का आरोप है।
सीबीआई के इतिहास में यह दूसरी बार है जब सीबीआई के पूर्व निदेशक अपनी ही जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं।
इस साल फरवरी में सीबीआई ने पूर्व निदेशक ए.पी.सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी मीट निर्यातक मोईन कुरैशी की मदद की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के स्पेशल निदेशक एमएल शर्मा को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा था। रंजीत सिन्हा वर्ष 2012 से 2014 तक सीबीआई के निदेशक रहे थे और इस दौरान उन्होंने कोयला घोटाले के आरोपियों से मुलाकात की थी जिसमें कुछ राजनेता और कुछ बिजनेसमैन शामिल थे। यह मुलाकात रंजीत सिन्हा के सरकारी आवास पर होती थी।
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2015 में वकील प्रशांत भूषण की शिकायत पर रंजीत सिन्हा के खिलाफ जांच का जिम्मा एमएल शर्मा को सौंपा था। इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने कोर्ट में विजिटर्स डायरी भी पेश की थी।
सूत्रों ने बताया कि कोर्ट के जांच के आदेश के बाद रंजीत सिन्हा मार्च के आखिरी सप्ताह में सीबीआई हेडक्वार्टर में पहुंचे थे। रंजीत सिन्हा से पूछताछ के लिए सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर लेवल के अधिकारी और सीबीआई की स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के एक एसपी स्तर के अधिकारी जांच के दौरान शामिल हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 23 जनवरी को रंजीत सिन्हा के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे और एसआईटी का गठन करने के निर्देश दिए थे। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को अपने मनपसंद के अधिकारियों को जांच में शामिल करने का आदेश दिया था।
अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एके शर्मा इस वक्त सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। वह इस मामले में रोजाना जांच पर नजर रख रहे हैं।
इस मामले में रंजीत सिन्हा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं और मैं इस मामले में कुछ नहीं कह सकता हूं। उन्होंने कहा कि वह अदालत का सम्मान करते हैं इसलिए इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकते है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एमएल शर्मा की कमेटी ने जांच में पाया था कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि रंजीत सिन्हा ने कोयला खदान आवंटन मामलों की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी। साथ ही अपने आवास पर आरोपियों से कई बार मुलाकात भी की थी।
एमएल शर्मा कमेटी ने रंजीत सिन्हा के सरकारी आवास की विजिटर्स डायरी को सही करार दिया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि इन मुलाकातों से संभव है कि रंजीत सिन्हा ने जांच के काम को प्रभावित करने की कोशिश की हो।
सुप्रीम कोर्ट ने रंजीत सिन्हा पर लगे पद के दुरुपयोग के आरोप की जांच का निर्देश देते हुए 14 मई 2015 के अपने आदेश का हवाला दिया था। इस आदेश में कोर्ट ने कहा था कि कि जांच अधिकारी या जांच दल की अनुपस्थिति में कोल ब्लॉक आवंटन मामले के आरोपियों से रंजीत सिन्हा की मुलाकात पूरी तरह अनुचित है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 मई 2015 के आदेश में एमएल शर्मा से रंजीत सिन्हा के आचरण की जांच करने को कहा था।
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोमवार को करीब 300 नक्सलियों ने सीआरपीएफ की टुकड़ी पर हमला किया। इसमें सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए और छह जवान अभी भी गंभीर रूप से घायल हैं।
इतना ही नहीं, नक्सली इस दौरान जवानों के बहुत से हथियार भी लूटकर ले गए।
छत्तीसगढ़ पुलिस के नक्सल ऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल डीएम अवस्थी ने मीडिया को बताया है कि सीआरपीएफ और नक्सलियों के बीच एनकाउंटर करीब तीन घंटे तक चला और जवानों ने इसका बहादुरी के साथ सामना किया।
उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के 100 जवान सड़क निर्माण कार्य की सुरक्षा में लगे हुए थे। जब नक्सलियों ने सीआरपीएफ की टुकड़ी पर हमला किया तो उस वक्त 38 आम लोग भी वहां मौजूद थे, लेकिन किसी भी आम नागरिक की इस नक्सली हमले में मौत नहीं हुई है। जवानों ने नक्सलियों का बहादुरी के साथ सामना करते हुए आम नागरिकों की जान बचाई।
उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने अचानक सीआरपीएफ की टुकड़ी पर गोली चलाना शुरू कर दिया। इस दौरान 25 जवानों की एक टुकड़ी खाना खाने बैठी थी और ये जवान ही नक्सलियों के इस हमले के दौरान शहीद हुए। उन्होंने बताया कि दक्षिणी बस्तर में सड़क निर्माण का ये एक महत्वपूर्ण कार्य चल रहा है।
अवस्थी ने बताया कि इस हमले के दौरान रॉकेट लॉन्चर और आईईडी का इस्तेमाल नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि नक्सली एक हफ्ते से सीआरपीएफ की टुकड़ी की रेक कर रहे थे। सीआरपीएफ की टीम क्या करती ये नक्सलियों को पता था।
अवस्थी ने बताया कि नक्सलियों को पता था कहां और कब हमला करना है?
सूत्रों के मुताबिक, जवानों के कुल 22 हथियार गायब हुए हैं। अब तक 12 एके-47 (जिनमें पांच अंडरबैरल ग्रेनेड लांचर भी शामिल हैं), चार एकेएम (एके-47 सीरिज की एक अन्य राइफल), दो इंसास एलएमजी (लाइट मशीन गन) और तीन इंसास राइफल के गायब होने की सूचना मिली है। जवानों के पांच वायरलेस सेट, दो दूरबीन, 22 बुलेटप्रूफ जैकेट और एक डीप सर्च मैटल डिटेक्टर (डीएसएमडी) भी गायब हुए हैं। इसके अलावा सभी हथियारों की मैगजींस भी बड़ी मात्रा में गायब होने की खबर है।
सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षित वर्ग में नौकरी के संबंध में एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को आरक्षित वर्ग में ही नौकरी मिलेगी, चाहे उसने सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा अंक क्यों न हासिल किए हों।
जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस एएम खानविल्कर की पीठ ने कहा कि एक बार आरक्षित वर्ग में आवेदन कर उसमें छूट और अन्य रियायतें लेने के बाद उम्मीदवार आरक्षित वर्ग के लिए ही नौकरी का हकदार होगा। उसे समान्य वर्ग में समायोजित नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह फैसला आरक्षित वर्ग की महिला उम्मीदवार के मामले में दिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उसे सामान्य वर्ग में नौकरी दी जाए क्योंकि उसने लिखित परीक्षा में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा अंक हासिल किए हैं।
कोर्ट ने कहा कि डीओपीटी की 1 जुलाई 1999 की कार्यवाही के नियम तथा ओएम में साफ है एससी/एसटी और ओबीसी के उम्मीदवार को, जो अपनी मेरिट के आधार पर चयनित होकर आए हैं, उन्हें आरक्षित वर्ग में समायोजित नहीं किया जाएगा।
उसी तरह जब एससी/एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए छूट के मानक जैसे उम्रसीमा, अनुभव, शैक्षणिक योग्यता, लिखित परीक्षा के लिए अधिक अवसर दिए गए हों तो उन्हें आरक्षित रिक्तियों के लिए ही विचारित किया जाएगा। ऐसे उम्मीदवार अनारक्षित रिक्तियों के लिए अनुपलब्ध माने जाएंगे।
याचिकाकर्ता ने उम्र सीमा में छूट लेकर ओबीसी श्रेणी में आवेदन किया था। उसने साक्षात्कार भी ओबीसी श्रेणी में ही दिया था। इसलिए वह सामान्य श्रेणी में नियुक्ति के अधिकार के लिए दावा नहीं कर सकती।
उदाहरण के लिए, अगर कोई उम्मीदवार आवेदन भरते समय ही खुद को आरक्षित श्रेणी में बताता है और इसके तहत मिलने वाला लाभ लेता है। लेकिन बाद में उसके अंक सामान्य श्रेणी के कटऑफ के बराबर या अधिक होते हैं, तो भी उसका चयन आरक्षित सीटों के लिए ही होगा। इसके तहत उसे सामान्य वर्ग की सीटें नहीं मिलेंगी।
दीपा पीवी ने वाणिज्य मंत्रालय के अधीन भारतीय निर्यात निरीक्षण परिषद में लैब सहायक ग्रेड-2 के लिए ओबीसी श्रेणी में आवेदन किया था। इसके लिए हुई परीक्षा में उसने 82 अंक प्राप्त किए। ओबीसी श्रेणी में उसे लेकर 11 लोगों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। लेकिन इसी वर्ग में 93 अंक लाने वाली सेरेना जोसेफ को चुन लिया गया।
जहां तक सामान्य वर्ग का सवाल था, वहां न्यूनतम कटऑफ अंक 70 थे। लेकिन कोई भी उम्मीदवार ये अंक नहीं ला पाया। दीपा ने इस श्रेणी में समायोजित करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे निरस्त कर दिया। इसके बाद दीपा सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
तमिलनाडु की पूर्व सीएम जे जयललिता की मौत के बाद अन्नाद्रमुक में हुए दो धड़े के बीच सुलह का रोडमैप लगभग तैयार हो गया है। इसके तहत ओ पन्नीरसेल्वम को राज्य का मुख्यमंत्री और वर्तमान सीएम ई के पलानीस्वामी को शशिकला की जगह पर पार्टी का महासचिव बनाया जा सकता है।
एक अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार, अन्नाद्रमुक के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि विलय का समझौता हो गया है, अब दोनों धड़ों के वरिष्ठ नेताओं के बीच फैसले पर अंतिम मुहर और उसकी घोषणा के लिए एक औपचारिक वार्ता शुरू होगी। पलानीस्वामी पन्नीरसेल्वम के लिए सीएम की कुर्सी खाली करेंगे और पार्टी प्रमुख बनेंगे।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री सी विजय भास्कर के ठिकानों पर आयकर विभाग का छापा पड़ा था, संभवतः उनको कैबिनेट से हटाया जा सकता है। राज्य के दक्षिणी क्षेत्र से पूर्व मंत्री और विधायक सेंथिल बालाजी के साथ एक या दो चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि नए मंत्रिमंडल में सेंथिल बालाजी को भास्कर की जगह पर लिया जा सकता है।
गौरतलब है कि सेंथिल बालाजी ने शुक्रवार को सी विजय भास्कर और लोकसभा के उपसभापति एम थम्बीदुरै के खिलाफ भूख हड़ताल करने की घोषणा की थी। उन पर करूर में एक मेडिकल कॉलेज के निर्माण में विलंब कराने का आरोप है, इस मेडिकल कॉलेज की घोषणा जयललिता ने की थी।
गौरतलब है कि अन्नाद्रमुक के धड़ों के विलय के प्रयास के तहत मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी नीत गुट ने शुक्रवार को एक समिति के गठन की घोषणा की थी और विरोधी ओ पन्नीरसेल्वम गुट ने इस पर प्रतिक्रिया यह कहकर दी कि उसकी समिति जल्द गठित होगी।
पलानीस्वामी द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता राज्यसभा सदस्य आर वैथीलिंगम करेंगे और इसमें कुछ मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है।
पन्नीरसेल्वम के सहयोगी के पी मुनुसामी ने संवाददाताओं से कहा कि पार्टी समर्थकों और लोगों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए हम भी एक समिति का गठन करने जा रहे हैं।
इससे पहले गुरूवार को बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया था जब ओ पन्नीरसेल्वम गुट ने विलय वार्ता के लिए पार्टी महासचिव वीके शशिकला और उप महासचिव टीटीवी दिनाकरन को औपचारिक तौर पर पार्टी से निकालने की शर्त रखी थी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की पिछले साल पांच दिसंबर को निधन से जुड़ी परिस्थितियों की सीबीआई जांच की भी मांग की थी।
विलय वार्ता के लिए अपना रुख कड़ा करते हुए पन्नीरसेल्वम गुट ने मांग की थी कि पलानीस्वामी के नेतृत्व वाला धड़ा शशिकला और दिनाकरन के अलावा उनके परिवार के 30 अन्य सदस्यों को पार्टी से औपचारिक तौर पर बर्खास्त करें।
दिल्ली में धरना दे रहे तमिलनाडु के किसानों ने विरोध का अब एक नया रास्ता अपनाया है। जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से प्रदर्शन कर रहे ये लोग अब अपना ही पेशाब पीने को मजबूर हैं।
इतना ही नहीं, किसानों ने रविवार को मल खाकर भी प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
बता दें कि कि तमिलनाडु के किसान केंद्र की मोदी सरकार से कर्जमाफी और वित्तीय सहायता की मांग के लिए धरने पर बैठे हैं। सूखे के कारण उनकी फसल बर्बाद हो गई।
इन किसानों की मांग है कि सरकार उनके लिए सूखा राहत पैकेज जारी करे।
सिर्फ एक कपड़े में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे किसान आज प्लास्टिक की बोतलों में पेशाब के साथ सामने आए।
नेशनल साउथ इंडियन रिवर लिंकिंग फॉर्मर्स एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष पी अय्याकनकु ने कहा कि तमिलनाडु में पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारी प्यास की अनदेखी कर रहे हैं।
मोदी सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी बदहाली की ओर खींचने के लिए गले में इंसान की खोपड़ी पहनने से लेकर सड़क पर सांभर-चावल और मरे हुए सांप-चूहे खाकर ये किसान अपना विरोध जता चुके हैं।
ये किसान नंगे भी हो चुके हैं। किसानों ने साउथ ब्लॉक में प्रधानमंत्री दफ्तर के सामने सड़क पर नंगे होकर प्रदर्शन किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि बाबरी मस्जिद केस के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी, एमएम जोशी, केंद्रीय मंत्री उमा भारती, कल्याण सिंह, विनय कटियार समेत भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद के 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश (धारा 120 बी) के तहत मुकदमा चलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला देते हुए कहा कि मामले का ट्रायल जल्द पूरा किया जाए व रोजाना सुनवाई हो। हालांकि राजस्थान के राज्यपाल होने के कारण कल्याण सिंह पर यह मुकदमा नहीं चल पाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पीके घोष व आरएफ नारीमन की पीठ ने फैसले में कहा कि इस मामले में रायबरेली में चल रहे ट्रायल को लखनऊ सेशन कोर्ट में चल रहे ट्रायल के साथ जोड़ा जाए।
इससे पहले 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में 2010 में अपील की थी। हाईकोर्ट ने इन मामले में नेताओं को साजिश से बरी कर दिया था।
अप्रैल में हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस तरह के मामले में इंसाफ के लिए हमें दखल देना होगा। यह देखते हुए तकनीकी कारणों से आडवाणी सहित 13 नेताओं पर लगे आपराधिक षडयंत्र के आरोप हटाए गए थे, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था हम इसके लिए संविधान के अनुच्छेद- 142 (सुप्रीम कोर्ट को असाधारण अधिकार) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी सवाल किया था कि इस मामले में एक ही षडयंत्र हैं तो इसके लिए दो अलग-अलग ट्रायल क्यों?
मालूम हो कि आडवाणी सहित अन्य नेताओं पर रायबरेली की अदालत में भीड़ को उकसाने का मामला चल रहा है जबकि लखनऊ की विशेष अदालत में कार सेवकों पर षडयंत्र और बाबरी मस्जिद को तोड़ने का मुकदमा चल रहा है। सीबीआई की ओर से दलील दी गई थी कि इन 13 नेताओं केखिलाफ आपराधिक षडयंत्र का मुकदमा चलना चाहिए।
वहीं आडवाणी और जोशी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने संयुक्त ट्रायल के विचार का विरोध किया था। उनका कहना था कि सीआरपीसी के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता। इस तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल भी नहीं कर सकता क्योंकि यह आरोपियों के जीवन जीने और व्यक्तिगत आजादी के मौलिक अधिकार से जुड़ा मामला है।
हिमाचल प्रदेश के चौपाल क्षेत्र के गुम्मा में उत्तराखंड की एक प्राइवेट बस 800 मीटर नीचे टौंस नदी में जा गिरी। हादसे में 46 लोगों की मौत हो गई है। वहीं कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। 10 से ज्यादा घायलों को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है। इनमें कई लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है।
पुलिस के अनुसार हादसा सुबह करीब 11 बजे हुआ है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार, उत्तराखंड की एक निजी बस में 56 से ज्यादा लोग सवार थे।
ताजा सूचना के अनुसार, पुलिस ने अब तक नदी से 46 लोगों के शव बरामद कर लिए हैं। इनमें कई बच्चे और महिलाएं भी शामिल बताए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
त्यूणी एसओ के अनुसार, प्राइवेट बस उत्तराखंड के विकासनगर (देहरादून) से त्यूणी जा रही थी। मगर सुबह करीब 11 बजे अचानक गुम्मा के पास बस बेकाबू होकर टौंस नदी में जा गिरी। हादसे का पता सबसे पहले स्थानीय लोगों को चला। लोगों ने पुलिस को सूचना दी। बताया जा रहा है कि हादसे के दौरान एक व्यक्ति ने बस से छलांग लगा दी। उसे मामूली चोटें आई हैं।
कई लोग घायल हैं, जिन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा है। हादसे में मृतकों का आंकड़ा अभी बढ़ सकता है। हादसा कैसे हुआ? इसके कारणों का पता लगाया जा रहा है। बस में सवार ज्यादातर लोग हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के थे।
बताया जा रहा है कि बस कंडक्टर गायब है। वहीं, कुपवी एक अन्य व्यक्ति भी गायब चल रहा है। एसओ का कहना है कि हादसे की जांच की जा रही है। अभी मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। हादसे की सूचना मिलते ही उत्तराखंड प्रशासन भी मौके पर पहुंच गया है। मृतकों की शिनाख्त की जा रही है। हादसे के बाद यहां लोगों का जमावड़ा लग गया है।
हिमाचल सीमा पर खाई में गिरी बस हादसे पर उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आर्थिक मदद देने का निर्देश दिया है। मृतकों के आश्रितों के लिए 1 लाख की मदद के साथ गंभीर घायलों के लिए 50 हजार रुपये की मदद दी जायेगी।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को बाबरी मस्जिद ढहाने की घटना को महात्मा गांधी की हत्या से ज्यादा गंभीर बताते हुए सुनवाई पूरी होने में देरी की निंदा की।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1992 में राष्ट्रीय शर्म के लिए जिम्मेदार लोग आज देश चला रहे हैं।
हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ने ट्वीट किया, महात्मा गांधी हत्याकांड की सुनवाई दो वर्ष में पूरी हुई और बाबरी मस्जिद ढहाने की घटना जो एमके गांधी की हत्या से ज्यादा गंभीर है, उसमें अब तक फैसला नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि गांधी जी के हत्यारों को दोषी ठहराकर फांसी पर लटकाया गया और बाबरी कांड के आरोपियों को केन्द्रीय मंत्री बनाया गया, पद्म विभूषण से नवाजा गया, न्याय प्रणाली धीरे चलती है।
उन्होंने ये टिप्पणियां ऐसे समय कीं जब उच्चतम न्यायालय ने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में भाजपा के शीर्ष नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती के खिलाफ आपराधिक साजिश का आरेाप बहाल करने के सीबीआई के अनुरोध को स्वीकार किया।
शीर्ष अदालत ने हालांकि कहा कि राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह को संवैधानिक छूट मिली हुई है और उनके खिलाफ पद से हटने के बाद सुनवाई हो सकती है।
कल्याण सिंह वर्ष 1992 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।
ओवैसी ने कहा कि इसमें 24 साल की देरी हुई। 24-25 साल गुजर चुके हैं। लेकिन आखिरकार उच्चतम न्यायालय ने फैसला किया कि साजिश का आरोप होना चाहिए। लेकिन मुझे आशा है कि उच्चतम न्यायालय (वर्ष 1992 से लंबित) अवमानना याचिका पर भी फैसला करेगी।
उन्होंने कई ट्वीट में कहा कि क्या कल्याण सिंह इस्तीफा देकर सुनवाई का सामना करेंगे या राज्यपाल होने के पर्दे के पीछे छिपेंगे, क्या मोदी सरकार न्याय के हित में उन्हें हटाएंगे, मुझे संदेह हैं।
ओवैसी ने कहा कि उनको लगता है कि अगर उच्चतम न्यायालय ने कार सेवा की अनुमति नहीं दी होती तो बाबरी मस्जिद नहीं ठहायी जाती और उच्चतम न्यायालय का अभी भी अवमानना याचिका पर सुनवाई करना बाकी है।
उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामा देने के बाद 28 नवंबर 1992 में सांकेतिक कार सेवा की अनुमति दी थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने शांतिपूर्ण कार सेवा के लिये हलफनामा दिया था। इसके बाद 6 दिसंबर को कारसेवकों ने 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद गिरा दी थी।
बीएसएफ ने अपने जवान तेज बहादुर यादव को बर्खास्त कर दिया है। तेज बहादुर यादव ने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स पर वीडियो क्ल्प्सि पोस्ट कर पाकिस्तानी सीमा से सटे इलाकों में तैनात बीएसएफ जवानों को खराब खाना दिए जाने की शिकायत की थी।
उन्हें मंगलवार (19 अप्रैल) को सांबा की समरी सिक्योरिटी फोर्स से डिसमिस कर दिया गया। तेज बहादुर यादव को फोर्स का अनुशासन तोड़ने का दोषी पाया गया है, इसके अलावा उन्होंने फोर्स के ग्रीवांस रीड्रेसल मैकेनिज्म का पालन भी नहीं किया।
इसके अलावा, तेज बहादुर यादव को सेना के सामान्य आदेशों का उल्लंघन करने का भी दोषी पाया गया। तेज बहादुर यादव ड्यूटी के दौरान दो मोबाइल फोन रखते थे जो कि एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के खिलाफ है। इसके अलावा यूनिफॉर्म में सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालकर भी निर्देशों का उल्लंघन है।
तेज बहादुर यादव ने बीएसएफ के इस फैसले पर कहा है कि वे बर्खास्तगी के खिलाफ अदालत में अपील करेंगे। हालांकि उनके पास बीएसएफ के उच्चतर मुख्यालय में अपील करने का विकल्प भी मौजूद है।
बीएसएफ द्वारा तेज बहादुर यादव को बर्खास्त किए जाने के बाद उनकी पत्नी शर्मिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया। जिसमें उन्होंने कहा, ''उसका (यादव) कोर्ट मार्शल कर दिया गया है। उसने जवानों के हित में ये कदम उठाया था और देश को अपना खाना दिखाया था। इसके बाद कोई भी मां अपने बच्चे को फौज में भेजेगी क्या? उसने ऐसा कौन सा गुनाह किया था जो उसकी 20 साल की सर्विस हो गई थी और उसको डिसमिस कर दिया गया। सरकार को चाहिए था कि उसको बाइज्जत घर भेज दे, सरकार ने ये बहुत गलत किया है। इससे कोई भी मां अपने बच्चे को सेना में भेजने से डरेगी।''
तेज बहादुर यादव ने फेसबुक पर चार वीडियो शेयर किए थे। इन वीडियो में जली रोटी, पानी वाली दाल को दिखाया गया था।
मीडिया में मामला उजागर होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने तत्काल मामले की जांच का आदेश दिया था। बीएसएफ ने मामले पर सफाई देते हुए खराब खाना दिए जाने से इनकार किया था।
इसके अलावा अधिकारियों ने तेज बहादुर यादव पर अपनी सेवा शर्तों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया था।









