विदेश

कश्मीर की यथास्थिति में किसी भी तरह का एकतरफ़ा बदलाव अवैध है: चीन

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संवैधानिक अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने की पहली वर्षगांठ पर चीन के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है।

चीन ने कहा कि भारत ने कश्मीर में एकतरफ़ा फ़ैसले के ज़रिए यथास्थिति में बदलाव कर अवैध और ग़ैरक़ानूनी काम किया है। भारत ने पिछले साल जब अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी किया था तब भी चीन ने इसी तरह से आपत्ति जताई थी।

चीन के बयान पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा ऐतराज जताया है। भारत ने कहा कि चीन को दूसरे देशों के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन को इस पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

पाकिस्तान की सरकारी समाचार एजेंसी असोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान ने बुधवार को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन से प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कश्मीर और भारत को लेकर एक सवाल किया।

एपीपी ने सवाल पूछा, भारत ने कश्मीर की जनसांख्यिकी संरचना बदलने के लिए जो एकतरफ़ा क़दम उठाया था, उसे आज एक साल पूरा हो गया। अब भी बेगुनाह कश्मीरियों के ख़िलाफ़ अत्याचार जारी है। भारत की यह कोशिश और सीमा पर युद्धविराम के उल्लंघन के अलावा पाकिस्तान के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए ख़तरा है। भारत के इस क़दम के बाद से ही चीन संयुक्त राष्ट्र चार्टर और शांतिपूर्ण तरीक़ों से कश्मीर का विवाद सुलझाने की वकालत करता रहा है। अभी चीन का क्या रुख़ है?''

इस सवाल के जवाब में वांग वेनबिन ने कहा, ''चीन की नज़र कश्मीर के हालात पर बनी हुई है। कश्मीर मुद्दे पर हमारा रुख़ बिल्कुल स्थिर और स्पष्ट है। पहली बात तो यह कि कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक रूप से विवादित है। यह बात संयुक्त राष्ट्र चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और दोनों देशों के द्विपक्षीय समझौतों में भी कही गई है।''

''दूसरी बात यह कि कश्मीर की यथास्थिति में किसी भी तरह का एकतरफ़ा बदलाव अवैध है। तीसरी बात यह कि कश्मीर मसले का समाधान संबंधित पक्षों को शांतिपूर्ण संवाद में खोजना चाहिए। भारत और पाकिस्तान दोनों पड़ोसी हैं और इसे बदला नहीं जा सकता। दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध दोनों के ही हित में हैं। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भी हित में है। चीन उम्मीद करता है कि दोनों पक्ष बातचीत के ज़रिए अपने मतभेदों को सुलझाएंगे और रिश्ते बेहतर करेंगे। यह दोनों देशों और पूरे इलाक़े की तरक़्क़ी, शांति और स्थिरता के हक़ में होगा।''

भारत के अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने अपने नियंत्रण वाले कश्मीर में कई तरह के आंतरिक बदलाव किए हैं लेकिन चीन ने कोई आपत्ति नहीं जताई। पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में प्रशासनिक बदलाव किए हैं।

पाकिस्तान के नया नक्शा जारी करने पर भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बयान में कहा, ''हमने पाकिस्तान का तथाकथित राजनीतिक नक्शा देखा है जिसे प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जारी किया है। गुजरात और जम्मू-कश्मीर पर इस तरह से दावे पेश करना राजनीतिक मूर्खता है। इन हास्यास्पद क़दमों की ना तो कोई कानूनी वैधता है और ना ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय में विश्वसनीयता है। वास्तव में, पाकिस्तान की ये नई कोशिश सीमा पार आतंकवाद के जरिए क्षेत्रीय विस्तार की मंशा को पुख्ता करती है।''

मस्जिद की जगह मंदिर का निर्माण, भारतीय लोकतंत्र के चेहरे पर एक दाग़ है: पाकिस्तान

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया और मंदिर की आधारशिला रखी।

पाकिस्तान ने भारत के इस क़दम की सख़्त आलोचना की है। पाकिस्तान ने कहा है कि मस्जिद की जगह मंदिर का निर्माण, भारतीय लोकतंत्र के चेहरे पर एक दाग़ है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है, ''वो ज़मीन जिस पर बाबरी मस्जिद 500 बरसों तक खड़ी रही हो, वहां राम मंदिर का निर्माण निंदनीय है। भारतीय सुप्रीम कोर्ट का मंदिर बनाने के लिए इजाज़त देने का फ़ैसला, न सिर्फ़ मौजूदा भारत में बढ़ते बहुसंख्यकवाद को दर्शाया है, बल्कि ये भी दिखाता है कि कैसे धर्म न्याय के ऊपर हावी हो रहा है।  आज के भारत में अल्पसंख्यक, ख़ासकर मुसलमानों के धर्मस्थलों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ऐतिहासिक मस्जिद की ज़मीन पर बना मंदिर तथाकथित भारतीय लोकतंत्र के चेहरे पर एक दाग़ की तरह होगा।''

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सूचना मंत्री फ़ैय्याज़ उल हसन चौहान ने कहा, ''पाकिस्तान करतारपुर कॉरिडोर खोलने जैसा क़दम उठा रहा है, जबकि भारत हर वो क़दम उठा रहा है जो मुसलमानों और दूसरे अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हो और इसी वजह से पूरी दुनिया में उसकी जगहंसाई हो रही है। भारतीय प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी बीजेपी के फ़ैसले से उनके चेहरे से धर्मनिरपेक्ष देश होने का नक़ाब उतर चुका है जिसकी पूरी दुनिया अब निंदा कर रही है।''

पाकिस्तान में धर्म स्थलों की सुरक्षा बढ़ाई गई

छह दिसंबर, 1992 को भारत में बाबरी मस्जिद के गिराए जाने के बाद पाकिस्तान में भी इसकी प्रतिक्रिया हुई थी और कई मंदिरों को नुक़सान पहुंचाया गया था।

पाँच अगस्त, 2020 को राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन कार्यक्रम के बाद पाकिस्तान में किसी तरह की प्रतिक्रिया की आशंका के मद्देनज़र वहां मंदिरों और अल्पसंख्यक समाज के धर्मस्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

पाकिस्तान में मंदिरों और गुरुद्वारों की निगरानी करने वाली संस्था वक़्फ़ प्रोपर्टी बोर्ड ने पिछले महीने ही पाकिस्तान की केंद्र सरकार को ख़त लिखकर धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम का आग्रह किया था।

वक़्फ़ प्रोपर्टी बोर्ड के चेयरमैन आमिर अहमद ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उन्हें अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए आधारशिला रखे जाने की गंभीरता का अंदाज़ा है और इसीलिए वो संबंधित अधिकारी और विभागों से लगातार संपर्क में हैं कि ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

उन्होंने कहा कि उनकी संस्था के पास अपनी कोई फ़ोर्स नहीं होती और ये प्रांत सरकारों की ही ज़िम्मेदारी होती है कि वो अपने-अपने क्षेत्रों में आने वाले धर्म स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

आमिर अहमद ने कहा कि उन्होंने सभी प्रांतों को भी इस बारे में सतर्क रहने के लिए कहा है।

पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फ़ॉर पीस स्टडीज़ के निदेशक आमिर राना हालांकि इस बात से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते कि भारत में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन का पाकिस्तान में कोई असर होगा।

उनका कहना था, ''पाकिस्तान में धार्मिक संगठन और राजनीतिक दल सांकेतिक विरोध तो ज़रूर करेंगे लेकिन क़ानून-व्यवस्था का कोई मसला खड़ा हो, इसकी आशंका कम है। दोनों तरफ़ बसने वाले लोगों ने बाबरी मस्जिद के मामले में भारतीय सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को मान लिया है और अब आगे बढ़ना चाहते हैं।''

पंजाब प्रांत के सूचना मंत्री फ़ैय्याज़ उल हसन चौहान ने कहा कि पाकिस्तान की जनता बहुत समझदार है और वो इस अवसर पर अपने अल्पसंख्यक भाई-बहनों की इबादतगाहों को नुक़सान पहुंचाने का सोच भी नहीं सकते और न ही सरकार ऐसे किसी असामाजिक तत्व को इस तरह की किसी कार्रवाई की इजाज़त देगी।

बेरुत धमाका: लेबनान की राजधानी बेरुत में बड़ा धमाका, दर्जनों की मौत और हज़ारों ज़ख़्मी

लेबनान की राजधानी बेरुत में एक बड़ा धमाका हुआ है।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि अभी कम से कम 70 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और क़रीब 4000 लोग ज़ख़्मी हुए हैं। लेबनान के प्रधानमंत्री हसन दिआब ने बुधवार को राष्ट्रीय शोक दिवस की घोषणा की है।

अधिकारियों का कहना है कि एक गोदाम में भारी विस्फोटक सामग्री स्टोर थी और वहीं धमाका हुआ है।

लेबनान के राष्ट्रपति माइकल इयोन ने ट्वीट कर कहा है कि यह बिल्कुल अस्वीकार्य है कि 2,750 टन विस्फोटक नाइट्रेट असुरक्षित तरीक़े से स्टोर कर रखा गया था। धमाका कैसे हुआ? इसकी जाँच अभी जारी है।

मौक़े पर मौजूद बीबीसी के पत्रकार का कहना है कि शव बिखरे हुए हैं और भारी नुक़सान हुआ है। लेबनान के प्रधानमंत्री हसन दिआब ने इसे भयावह बताया है और कहा है कि जो भी दोषी होंगे उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।

जिस विस्फोटक नाइट्रेट के स्टोर की बात कही जा रही है वो 2014 से ही स्टोर था। समाचार एजेंसी एएफ़पी से एक चश्मदीद ने कहा कि आसपास की सभी इमारतें ध्वस्त हो गई हैं। चारों तरफ़ शीशे और मलबे बिखरे पड़े हैं। धमाके की आवाज़ पूर्वी भूमध्यसागर में 240 किलोमीटर दूर साइप्रस तक सुनाई पड़ी।

यह धमाका 2005 में लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की हत्या की जाँच और अदालती सुनवाई का फ़ैसला आने के ठीक पहले हुआ है।

धमाका शहर के तटीय इलाक़े में हुआ है। ऑनलाइन पोस्ट किए गए वीडियो में धमाके के दृश्य काफ़ी भयावह हैं। आग की लपटों के साथ धुएं के गुबार उठ रहे हैं।

यह धमाका तब हुआ है जब लेबनान आर्थिक संकट में बुरी तरह से घिरा हुआ है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्री हमाद हसन ने कहा है कि धमाके में कई लोग ज़ख़्मी हुए हैं और भारी नुक़सान हुआ है।

कहा जा रहा है कि अस्पतालों में बड़ी संख्या में हताहतों को पहुँचाया गया है।

अभी तक धमाके की वजह पता नहीं चल पाई है। कुछ रिपोर्ट में इसे हादसे के तौर पर भी देखा जा रहा है। लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में तटीय इलाक़े पर स्थित एक विस्फोटक केंद्र में आग लगने की बात कही गई है।

स्थानीय मीडिया में दिखाया जा रहा है कि लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं।  एक चश्मदीद ने कहा कि पहला धमाका बहरा कर देने वाला था।

लेबनान का इसराइल के साथ भी सरहद पर तनाव चल रहा है। इसराइल ने पिछले हफ़्ते कहा था कि उसने अपने इलाक़े में हिजबुल्लाह की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया।

हालांकि बीबीसी से इसराइल के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि बेरुत धमाके से इसराइल का कोई संबंध नहीं है।

लेबनान में पिछले कुछ समय से सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लेबनान 1975-1990 के गृह युद्ध के बाद से सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है और लोग सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं।

लेबनान स्थित भारतीय दूतावास ने इस भयावह विस्फोट की जानकारी देते हुए हेल्पलाइन जारी की है।

भारतीय दूतावास ने ट्वीट किया, ''सेंट्रल बेरुत में इस शाम दो बड़े धमाके हुए हैं। सभी को संयम बनाए रखने की सलाह दी जाती है। अगर भारतीय समुदाय के किसी भी व्यक्ति को मदद की ज़रूरत है तो हमारी हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं।''

हादी नसरुल्लाह नाम के एक चश्मदीद ने बीबीसी से कहा-

मैंने आग की लपटें देखीं लेकिन मुझे ये नहीं पता था कि धमाका होने जा रहा है। मैं भीतर चला गया। अचानक मुझे सुनाई पड़ना बंद हो गया क्योंकि मैं घटनास्थल के बहुत क़रीब था। कुछ सेकंड तक मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दिया। मुझे लगने लगा था कि कुछ गड़बड़ है।

तभी अचानक गाड़ियों, दुकानों और इमारतों पर शीशे टूटकर गिरने लगे।  पूरे बेरुत में अलग-अलग इलाक़ों से लोग एक दूसरे को फ़ोन कर रहे थे।  हर किसी ने धमाके की आवाज़ सुनी। हम बिल्कुल अवाक थे क्योंकि पहले कोई धमाका होता था तो कोई एक इलाक़ा ही प्रभावित होता था लेकिन यह ऐसा धमाका था जिसे बेरूत के बाहर भी महसूस किया गया।

बीबीसी अरब मामलों के विश्लेषक सेबेस्टियन अशर क्या कहते हैं?

धमाके के बाद जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं उनमें न केवल धुएं के गुब्बार हैं बल्कि कई किलोमीटर तक तबाही के मंज़र भी हैं। इस धमाके ने पहले से ही आर्थिक संकट से परेशान लेबनान को सदमे में डाल दिया है। लेबनान की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है और सड़कों पर सरकार के ख़िलाफ़ लोग विरोध कर रहे हैं।

धमाके के ठीक पहले सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच ऊर्जा मंत्रालय के बाहर हाथापाई हुई थी। लोग नेताओं की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। यहां तक कि भुखमरी की चेतावनी दी जा रही है और सांप्रदायिक टकराव बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है। इस धमाके ने कइयों को रफ़ीक हरीरी की मौत की भी याद दिला दी। लेबनान के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार यह कोई महज़ हादसा हो, न कि पूर्वनियोजित साज़िश।

हरीरी मामला क्या है?

कार बम के ज़रिए 2005 में लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की हत्या कर दी गई थी। संयुक्त राष्ट्र का एक ट्राइब्यूनल इस हत्या के मामले में शुक्रवार को फ़ैसला सुनाने वाला है। इसमें सभी चार संदिग्ध ईरान समर्थित हिज़बुल्लाह समूह के हैं।

हालांकि ये इस हमले में शामिल होने से इनकार करते रहे हैं। हरीरी के आवास के बाहर एक दूसरे धमाके की भी बात कही जा रही है।

चारों संदिग्ध शिया मुसलमान हैं और इनके ख़िलाफ़ अदालती सुनवाई नीदरलैंड्स में हुई है। हरीरी को जब कार बम के ज़रिए मारा गया था तो इसमें 21 अन्य लोगों की भी जान गई थी।

14 फ़रवरी 2005 को रफ़ीक हरीरी जब एक गाड़ी से जा रहे थे तभी उन्हें निशाना बनाकर एक बड़ा धमाका किया गया था। इस धमाके में उनकी मौत हो गई थी।

हरीरी लेबनान के प्रमुख सुन्नी नेता थे। हत्या से पहले वह विपक्ष के साथ आ गए थे। हरीरी ने लेबनान से सीरिया की सेना हटाने की मांग का भी समर्थन किया था, जो लेबनान में 1976 में हुए गृह युद्ध के बाद से ही मौजूद थी।

हरीरी की हत्या के बाद सीरिया समर्थक सरकार के ख़िलाफ़ हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर प्रदर्शन करने उतरे थे। हरीरी की हत्या के लिए लेबनान ने ताक़तवर पड़ोसी को ज़िम्मेदार ठहराया गया था। हमले के दो सप्ताह के भीतर ही सरकार को इस्तीफ़ा देना पड़ा और कुछ वक़्त बाद सीरिया को भी अपनी फ़ौज वापस बुलानी पड़ी।

सारे सबूत इकठ्ठा करने के बाद संयुक्त राष्ट्र और लेबनान ने विस्फोट की जांच के लिए 2007 में द हेग में एक ट्राइब्यूनल का गठन किया। इस ट्राइब्यूनल ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के चार संदिग्धों पर आतंकवाद, हत्या और हत्या की कोशिश के आरोप तय किए।

हमले से जुड़े एक पाँचवें शख़्स और हिजबुल्लाह के सैन्य कमांडर मुस्तफ़ा अमीन की 2016 में सीरिया में हत्या कर दी गई थी।

हिजबुल्लाह के समर्थकों ने इस ट्रायल को ख़ारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ट्राइब्यूनल राजनीतिक रूप से तटस्थ नहीं है।

कोरोना महामारी: भारत की अर्थव्यवस्था से ज़्यादा अमरीका राहत पैकेज दे चुका

अमरीका के वित्त मंत्रालय का कहना है कि तीसरी तिमाही में कोरोना वायरस के अर्थव्यवस्था पर दुष्प्रभाव को कम करने के लिए 947 अरब डॉलर क़र्ज़ लेने की योजना है। कांग्रेस पहले ही कोरोना वायरस महामारी को लेकर तीन ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज आवंटित कर चुकी है।

रिपब्लिकन्स और डेमोक्रेट्स में इस बार कोरोना वायरस रिलीफ़ बिल को लेकर मतभेद है क्योंकि लाखों की तादाद में बेरोज़गार हुए अमरीकियों को मुआवजा देने की समय सीमा ख़त्म हो चुकी है। सोमवार को वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अनुमान के मुताबिक़ एक ट्रिलियन डॉलर की और ज़रूरत है ताकि बिल पास होने के बाद उसे लागू किया जा सके।

भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 2.73 ट्रिलियन डॉलर का है। अर्थव्यवस्था के आकार का मतलब जीडीपी से है।

2017 की रैंकिंग में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 2.65 ट्रिलियन डॉलर था जो 2018 में बढ़कर 2.73 ट्रिलियन डॉलर तो हुआ लेकिन उसकी रैंकिंग गिर गई।

ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि 2018 में फ़्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था भारत की तुलना में ज़्यादा मज़बूत रही। कहा जा रहा था कि भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर पाँचवें नंबर पर आ जाएगा लेकिन ब्रिटेन और फ़्रांस ने भारत को सातवें नबंर पर धकेल दिया।

2018 में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 2.64 ट्रिलियन डॉलर से 2.84 ट्रिलियन डॉलर की हो गई और फ़्रांस की 2.59 ट्रिलियन डॉलर से 2.78 ट्रिलियन डॉलर की हो गई।

20.49 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमरीकी अर्थव्यवस्था पहले नंबर है और 13.61 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन की अर्थव्यवस्था दूसरे नंबर पर है।

4.97 ट्रिलियन डॉलर के साथ जापान तीसरे नंबर पर और जर्मनी 3.99 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे नंबर पर है।

क्या अमरीका में संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप और फाउची एकमत नहीं है?

अमरीका में कोरोना संक्रमण के तेज़ी से बढ़ते मामलों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एंथोनी फाउची को ग़लत बताया है।

ट्रंप का कहना है कि देश में टेस्टिंग अधिक हो रही है। इस कारण संक्रमण के अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर ट्रंप ने लिखा, ''अगर हम कम टेस्ट कर दे तो संक्रमण के कम ही मामले दर्ज किए जाते। इटली, फ्रांस और स्पेन ने क्या किया? लेकिन दुख की बात है कि वहां संक्रमण के मामले फिर बढ़ रहे हैं। अमरीका के अधिकांश राज्यों के गवर्नरों ने मेहनत की है।''

शुक्रवार को संसद की कोरोना वायरस पैनल के सवालों का जबाव देते हुए फाउची ने कहा था कि यूरोप के मुक़ाबले अमरीका में कोरोना संक्रमण के अधिक मामले दर्ज होने का कारण लॉकडाउन न लगाना है।

फाउची ने कहा था, ''अधिकतर यूरोपीय देशों ने लॉकडाउन लगाया और अपनी अर्थव्यवस्था का 95 फीसदी हिस्सा बंद कर दिया। वहीं अमरीका ने अपनी अर्थव्यवस्था का केवल 50 फीसदी हिस्सा ही बंद किया।''

साथ ही उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से बाहर निकलते वक्त जहां कुछ राज्यों ने सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के दिशानिर्देशों का पालन किया, वही कुछ राज्यों ने ऐसा नहीं किया। इस कारण दक्षिण और पश्चिम के कुछ राज्यों में संक्रमण के अधिक मामले दर्ज किए गए।

साउथ चाइना सी के मुद्दे पर अमरीका-ऑस्ट्रेलिया वार्ता

अमरीका और उसके करीबी सहयोगी देश ऑस्ट्रेलिया के बीच चीन के मुद्दे पर उच्च स्तरीय वार्ता हुई है। दोनों देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि नियम-कायदों पर आधारित विश्व व्यवस्था बरकरार रखी जाएगी।

हालांकि ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री ने ये बात भी जोर देकर कही कि बीजिंग के साथ कैनबेरा के रिश्ते अहम हैं और इसे नुक़सान पहुंचाने का उनका कोई इरादा नहीं है।

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और रक्षा मंत्री माइक एस्पर और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्षों के बीच वाशिंगटन में दो दिनों तक ये वार्ता हुई है।

कोरोना महामारी और स्वदेश वापस लौटने पर दो हफ़्तों के क्वारंटीन के नियम के बावजूद ऑस्ट्रेलिया के नेता इस बातचीत के लिए वाशिंगटन पहुंची थीं।

मंगलवार को एक साझा प्रेस सम्मेलन में माइक पॉम्पियो ने चीन के दबाव के सामने अपने रुख पर बने रहने के लिए ऑस्ट्रेलिया की तारीफ की।

उन्होंने कहा कि साउथ चाइना सी में क़ानून का शासन फिर से शुरू करने के लिए अमरीका और ऑस्ट्रेलिया साथ मिलकर काम जारी रखेंगे।

साउथ चाइना सी पर चीन अपना दावा जताता है जबकि इस इलाके में उसकी दखलंदाज़ी पर अमरीका और उसके सहयोगी देश विरोध करते हैं।

साउथ चाइना सी के आस-पास के देशों के बीच तनाव की स्थिति है और सामुद्रिक परिवहन की आज़ादी को लेकर चिंता जताई जा रही है।

ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मैरीज़ पेन ने कहा कि अमरीका और ऑस्ट्रेलिया 'रूल ऑफ़ लॉ' को लेकर प्रतिबद्ध हैं। इसका उल्लंघन करने वाले देशों को नियंत्रित किया जाएगा। उन्होंने हॉन्ग कॉन्ग में आज़ादी के अधिकार में कटौती के मामले का भी उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष एक वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमत हुए हैं जो कोरोना वैक्सीन और महामारी पर सहयोग की संभावना तलाशने और नुक़सानदेह सूचनाओं पर निगरानी रखेगी।

इसी दौरान मैरीज़ पेन ने ये भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया चीन के मुद्दे पर हर बात से सहमत नहीं है और न ही वो हर बात पर अमरीका के साथ है।

मैरीज़ पेन ने कहा, ''चीन के साथ हमारे जो रिश्ते हैं, वो महत्वपूर्ण है। और उन्हें नुक़सान पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं है। न तो हमारी मंशा कुछ ऐसा करने की है जो हमारे हितों के ख़िलाफ़ हो। एशिया प्रशांत क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया और अमरीका के साझा हित हैं। लेकिन हम हर बात से सहमत नहीं है। और ये हमारी सौ सालों की दोस्ती, आदरपूर्ण संबंधों का हिस्सा है।''

हालांकि मैरीज़ पेन ने इस बात का जिक्र नहीं किया कि अमरीका से ऑस्ट्रेलिया के किन मुद्दों पर असहमति है।

लेकिन उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि उनका देश अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर फ़ैसले करता है।

''हम चीन के साथ भी उसी तरह निभाते हैं। हमारे मजबूत आर्थिक रिश्ते हैं, दूसरे संबंध हैं और ये दोनों देशों के हितों के अनुरूप काम करता है।''

कोरोना के दो तिहाई मामले केवल 10 देशों में है: वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना संक्रमण के दो तिहाई मामले केवल 10 देशों में हैं।

डब्ल्यू एच ओ के निदेशक टेड्रॉस एडहॉनम गीब्रियएसुस ने कहा है कि ''कोरोना महामारी ने दुनिया के करोड़ों लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित किया है। कई लोग महीनों से घरों में बंद हैं और महामारी के ख़त्म होने का इंतज़ार कर रहे हैं।''

''लेकिन अब चीज़ें पहले जैसी सामान्य नहीं हो पाएंगी, महामारी ने कई बातों को पूरी तरह बदल दिया है।''

''आपको समझना होगा कि खुद को सुरक्षित रखना अब आपकी ज़िम्मेदारी है। आपको सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों का पालन करना होगा और हाथों को बार-बार धोना पड़ेगा। आप कहीं भी रहें आपको स्थानीय प्रशासन की बात भी माननी होगी।''

डब्ल्यूएचओ ने ये भी कहा है कि जल्द ही कोरोना से जुड़े क्वारंटीन के नियमों में बदलाव करने वाला है।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि क्वारंटीन के नियमों के कारण किसी के मानवाधिकार पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए।

जॉन्स हॉप्किन्स युनिवर्सिटी के डैशबोर्ड के अनुसार दुनिया भर में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 6 लाख 24 हज़ार से अधिक हो गई है।

केवल अमेरिका में अब तक ये वायरस 143,224 लोगों की जान ले चुका है। वहीं ब्राज़ील में ये 82,771 और ब्रिटेन में 45,586 लोगों की मौत का कारण बन चुका है।

2021 से पहले कोरोना के वैक्सीन की कोई उम्मीद नहीं: वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अगले साल यानी 2021 से पहले कोरोना वायरस की वैक्सीन बनने की कोई उम्मीद नहीं है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी निदेशक माइक रेयान ने कहा कि कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के मामले में शोधकर्ताओं को सही कामयाबी मिल रही लेकिन साल 2021 के शुरुआती दिनों से पहले उसकी उम्मीद नहीं की जा सकती है।

उन्होंने ये भी कहा कि ये ज़रूरी है कि वैक्सीन की सुरक्षा मानकों में कोई कमी नहीं की जाए, भले ही वैक्सीन बनने की गति थोड़ी धीमी हो जाए।

उन्होंने कहा, ''हमें अपनी आँखों में देखने की हिम्मत होनी चाहिए और लोगों से आँख मिलाने की भी हिम्मत होनी चाहिए। आम लोगों को ये वैक्सीन देने से पहले, हमें उन्हें सुनिश्चित करना है कि वैक्सीन को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए हमने हर संभव एहतियात बरता है। हम ये करने में थोड़ा कम समय ले सकते हैं लेकिन वास्तव में देखा जाए तो अगले साल के पहले हिस्से में ही हम लोगों को वैक्सीनेट करना शुरू कर सकेंगे।''

उन्होंने कहा कि कई संभावित वैक्सीन अपने ट्रायल के तीसरे फ़ेज़ में हैं और कोई भी वैक्सीन सुरक्षा मानकों या प्रभावी होने में अभी तक फ़ेल नहीं हुई है।

चीन कोरोना संकट के नाम पर पड़ोसियों पर धौंस जमा रहा हैः माइक पॉम्पियो

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि चीन कोरोना संकट के ज़रिए अपने पड़ोसियों पर धौंस जमा रहा है और साउथ चाइना सी में सैन्य ताक़त बढ़ा रहा है।

माइक पॉम्पियो ने मंगलवार रात लंदन में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर आरोप लगाया कि वो कोरोना महामारी में दुनिया की मदद करने के बजाय अपने पड़ोसियों पर दादागिरी दिखा रहा है।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब के साथ वार्ता के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पूरे विश्व को मिलकर काम करने की ज़रूरत है जिससे ये सुनिश्चित हो सके कि हर देश अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लेकर तय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पालन करें।

अमरीकी विदेश मंत्री ने एक बार फिर चीन पर कोरोना महामारी के शुरूआती दौर के ब्यौरे को छिपाने का आरोप लगाया।

पॉम्पियो ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का इस संकट को अपने हितों के लिए इस्तेमाल करना शर्मनाक है।

साउथ चाइना सी के विवादित क्षेत्रों पर चीन के दावे के बारे में टिप्पणी करते हुए पॉम्पियो ने कहा कि चीन का इस पर कोई क़ानूनी दावा नहीं बनता और वो अपने पड़ोसियों को धमका रहा है और उन पर धौंस दिखा रहा है।

अमेरिका ने चीन पर वैक्सीन रिसर्च की हैकिंग का आरोप लगाया

अमरीका ने चीन पर उन हैकरों की मदद करने का आरोप लगाया है जो कोरोना वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटी कंपनियों को निशाना बना रहे हैं।

अमरीकी अधिकारियों ने चीन के दो नागरिकों पर आरोप लगाया है कि वो कोरोना वैक्सीन पर शोध कर रही अमरीकी कंपनी की जासूसी कर रहे थे और ऐसा करने में उन्हें चीनी सरकार से मदद मिल रही थी।

अमरीका ने चीनी साइबर जासूसी के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ा है और इसी दौरान ये बात सामने आई है।

पिछले हफ़्ते यूके, अमरीका और कनाडा ने रूस पर भी कोरोना वैक्सीन से जुड़े रिसर्च को चुराने का आरोप लगाया था।

अमरीका ने चीन के जिन दो नागरिकों (ली शियाओयू और डॉंग जियाज़ी) पर आरोप लगाया है वो पहले इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र रहे हैं।

अमरीका ने उन पर व्यापार की ख़ुफ़िया जानकारी चुराने का भी आरोप लगाया है।

ये दोनों छात्र चीन में रहते हैं। अमरीका के अनुसार ये दोनों निजी हैकर हैं लेकिन चीन के सरकारी अधिकारी इनकी मदद करते रहे हैं।

अमरीका के अनुसार इन दोनों ने जनवरी में मैसाचुसेट्स स्थित एक बायोटेक फ़र्म को हैक करने की कोशिश की जो कोरोना वायरस के इलाज पर शोध कर रही थी। उन्होंने मैरीलैंड स्थित एक कंपनी को भी हैक करने की कोशिश की थी।

अमरीका के अनुसार दोनों चीनी नागरिकों ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, जर्मनी, जापान, नीदरलैंड्स, स्पेन, स्वीडन और ब्रिटेन स्थित उन कंपनियों और बायोटेक फ़र्म को निशाना बनाया जो कि कोरोना वैक्सीन पर शोध कर रहे हैं।