विदेश

यूरोपीय संघ के देशों के लिए रिकवरी पैकेज पर बनी सहमति

यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच एक बड़े रिकवरी पैकेज को लेकर सहमति बनी है, जिससे यहां के देशों को कोरोना वायरस के प्रभाव से उबरने में मदद मिलेगी।

चार दिन चली लंबी बातचीत के बाद ये समझौता हुआ। ये पैकेज 750 अरब यूरो का होगा। जिसके तहत ईयू के 27 देशों को कोरोना महामारी के प्रभाव से निपटने के लिए अनुदान और कर्ज़ दिया जाएगा।

बातचीत के दौरान यूरोपीय नेता दो धड़ों में बंटे नज़र आए। एक तरफ वो देश थे जो वायरस से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और एक तरफ वो थे जो इस पैकेज में लगने वाली बड़ी क़ीमत को लेकर चिंतित थे।

ईयू में ये अब तक का सबसे संयुक्त उधार होगा। शिखर सम्मेलन के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यह यूरोप के लिए एक 'महत्वपूर्ण क्षण' है।

इस समझौते के तहत 390 अरब यूरो का इस्तेमाल कोरोना महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावित सदस्यों को अनुदान देने के लिए किया जाएगा। इससे सबसे बड़ी मदद इटली और स्पेन को होगी। इसके अलावा 360 अरब यूरो से बाकी के सदस्य देशों को कम ब्याज़ दर पर कर्ज़ दिया जाएगा।

ये ख़ास तौर पर ध्यान रखा जाएगा कि पैसे का ग़लत इस्तेमाल ना हो। जिन्हें पैसा मिलेगा, उन्हें यूरोपीय संघ को बताना होगा कि वो इसे कैसे खर्च करने जा रहे हैं? अगर कुछ गड़बड़ लगे तो बहुमत से किसी प्रोजेक्ट को ब्लॉक भी किया जा सकता है। सदस्य अब पैकेज के तकनीकी पहलुओं पर बातचीत करेंगे और इसे यूरोपीय संसद से भी पास कराना होगा।

ट्रंप ने कहा, कोरोना महामारी अभी और बदतर होगी

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमरीका में कोरोना महामारी की स्थिति अभी और ख़राब होगी।

उन्होंने कहा कि उसके बाद हालात ठीक होंगे।

कोरोना की रोज़ाना प्रेस ब्रीफ़िंग की दोबारा शुरुआत करते हुए ट्रंप ने सभी अमरीकियों से फ़ेस मास्क पहनने की अपील की और कहा कि इसका असर होगा।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने प्रेस से बातचीत के दौरान हालांकि ख़ुद फ़ेस मास्क नहीं पहना था और इसके पहले तो वो इस तरह के एहतियाती क़दम का मज़ाक़ भी उड़ाया करते थे।

राष्ट्रपति ट्रम्प के सलाहकारों ने उनसे इस मामले में नया रुख़ अपनाने को कहा है क्योंकि पूरे अमरीका में कोरोना मामले फिर तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

अप्रैल में इसी तरह के एक प्रेसवार्ता के दौरान ट्रंप ने कहा था कि लोगों में डिसइंफ़ेक्टेंट का इंजेक्शन देकर कोरोना का इलाज किया जा सकता है। इसको लेकर उनकी काफ़ी किरकिरी हुई थी और फिर उन्होंने कोरोना ब्रीफ़िंग बंद कर दी थी।

महीनों बाद मंगलवार को अपने पहले प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान उन्होंने बहुत संभल कर वहीं बातें कहीं जो कि इससे पहले कोरोना टास्क फ़ोर्स के अधिकारी और स्वास्थ्य विशेषज्ञ कह रहे थे।

इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी, दुर्भाग्य से ये महामारी ठीक होने से पहले अभी और ख़राब होगी। हमलोग सभी से कह रहे हैं कि अगर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर सकते हैं तो मास्क लगाएं। मास्क को आप पसंद करें या नहीं करें लेकिन उसका असर तो होता है।

ओपिनियन पोल के अनुसार नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन से ट्रम्प कड़ी टक्कर मिलने वाली है।

मीडिया के सामने ट्रंप ख़ुद मास्क पहनने से इनकार करते रहे हैं और ये कहते रहे हैं कि कुछ लोग सिर्फ़ उनके ख़िलाफ़ एक राजनीतिक बयान देना चाहते हैं और उसी के कारण सार्वजनिक रूप से वो मास्क पहनते हैं।

लेकिन हाल ही में एक सैनिक अस्पताल के दौरे के वक़्त मीडिया ने उन्हें पहली बार मास्क पहने हुए दिखाया था।

मलेशिया में कोरोना की महामारी से पाम फसल की उपज में 25 फ़ीसदी की गिरावट

मलेशिया का पाम तेल कारोबार भारत से तनाव के कारण कुछ महीनों तक प्रभावित रहा था लेकिन अब कोरोना की महामारी ने पाम फसल की उपज में 25 फ़ीसदी की गिरावट ला दी है। आने वाले हफ़्तों में यह गिरावट और बढ़ेगी।

ऐसा श्रमिकों की कमी के कारण हो रहा है। मलेशियाई पाम तेल एसोसिएशन (MPOA) ने सोमवार को कहा कि सरकार के उस फ़ैसले का पाम तेल के उत्पादन पर गहरा असर पड़ा है जिसमें नए विदेशी श्रमिकों की बहाली को रोक दिया गया है।

सरकार ने दिसंबर महीने तक नए विदेशी श्रमिकों की बहाली कोरोना के कारण रोक दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इस फ़ैसले से मलेशिया की पाम तेल इंडस्ट्री चौपट हो सकती है।

MPOA के सीईओ नजीब वहाब ने एक कॉन्फ़्रेंस में कहा, ''कोविड 19 से पहले ही हमारे पास क़रीब 36 हज़ार श्रमिक कम थे। हमारा उत्पादन 10 फीसदी से 25 फीसदी गिर गया है।''

मलेशिया दुनिया का दूसरा बड़ा पाम तेल उत्पादक देश है। लेकिन मलेशिया की यह इंडस्ट्री इंडोनेशिया और बांग्लादेश के श्रमिकों पर निर्भर है। मलेशिया पाम फसल के प्लांटेशन 84 फ़ीसदी श्रमिक बांग्लादेश और इंडोनेशिया के हैं। हज़ारों श्रमिक वापस चले गए हैं और उनकी जगह पर नई भर्तियां बंद कर दी गई हैं।

श्रमिकों की कमी के कारण पाम के फल निकालने में देरी हो सकती है और इसका असर तेल उत्पादन पर सीधा पड़ेगा। सितंबर महीने में पाम तेल का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और पूरी इंडस्ट्री श्रमिकों की कमी से जूझ रही है।

नजीब ने कहा कि प्लांटेशन कंपनी सक्रिय रूप से स्थानीय लोगों की नियुक्ति कर रहे हैं ताकि सरकार की नीति का पालन किया जा सके लेकिन स्थानीय लोग गंदगी के कारण इस काम में लगना नहीं चाहते हैं।

ऐसे में श्रमिकों की कमी को पाटना आसान नहीं है। नजीब ने कहा कि अगर स्थानीय लोगों से ज़रूरतें पूरी नहीं हो पाती है तो फिर सरकार की मदद चाहिए।

डिप्टी प्लांटेशन इंडस्ट्रीज और उत्पाद मंत्री विली मोंगिन ने कहा है कि मंत्रालय समस्या को निपटाने के लिए काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि मलेशिया विश्व व्यापार संगठन में शिकायत करने की तैयारी कर रहा है क्योंकि यूरोपीय यूनियन ने पाम तेल का इस्तेमाल बायोफ़्यूल के रूप में करने पर पाबंदी लगा दी है।

रूस ने कोरोना वैक्सीन की रिसर्च बॉडी को टार्गेट करने के आरोपों को नकारा

ब्रिटेन में रूस के राजदूत ने ब्रिटेन और सहयोगी देशों के उन आरोपों को नकार दिया है जिसमें रूस पर कोराना वैक्सीन से जुड़ी रिसर्च को चुराने में हैकर्स को मदद करने की बात कही गई थी।

रविवार को रूस के राजदूत ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में आरोपों को ख़ारिज किया है।

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में रूसी राजदूत ने कहा, ''हम इस पर भरोसा नहीं करते हैं। इन आरोपों का कोई मतलब ही नहीं है।''

ब्रिटेन, कनाडा और अमरीका ने गुरुवार को आरोप लगाए थे कि हैकरों के एक समूह, जो ड्यूक्स या कोज़ी बीयर नाम से जाना जाता है, उसका संबंध रूसी ख़ुफ़िया एजेंसियों से है। इस ग्रुप ने रिसर्च बॉडी को निशाने पर लिया और इसमें ब्रिटेन भी शामिल है।

चीन का ब्रिटेन को धमकी: पलटवार झेलने के लिए तैयार रहे

कोरोना वायरस की महामारी ने पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। दुनिया के कई देशों को लगता है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत चीन से हुई लेकिन उसने इसे लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जिसके कारण लाखों लोगों की मौत हुई और अब भी इसका क़हर जारी है।

चीन को दुनिया भर के कई देश तमाम मुद्दों पर घेर रहे हैं। वो चाहे हॉन्ग कॉन्ग का मुद्दा हो या साउथ चाइना सी का। हाल ही में चीन ने हॉन्ग कॉन्ग में नया सुरक्षा क़ानून लागू किया तो अमरीका और ब्रिटेन समेत पश्चिम के तमाम देशों ने कड़ी आपत्ति ज़ाहिर की।

अमरीका और ब्रिटेन ने तो चीन के ख़िलाफ़ कुछ क़दम भी उठाए। ब्रिटेन ने चीन के उन लोगों पर प्रतिबंध लगा दिया जो हॉन्ग कॉन्ग में मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने में शामिल हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की कंजर्वेटिव पार्टी के कुछ सासंदों ने कहा है कि प्रतिबंधों का इस्तेमाल चीनी अधिकारियों को टार्गेट करने में किया जाना चाहिए।

ब्रिटेन में चीन के राजदूत लियु शियामिंग ने बीबीसी से कहा, ''अगर ब्रिटेन की सरकार चीन के किसी भी शख्स पर प्रतिबंध लगाना शुरू कर देती है तो चीन भी निश्चित तौर पर इसका जवाब देगा।''

उन्होंने कहा, "आपने देखा है कि अमरीका में क्या हुआ, वे चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाते हैं और हम उनके सांसदों और अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाते हैं। मैं नहीं चाहता है कि चीन-ब्रिटेन के संबंधों में भी जैसे को तैसे की रणनीति देखने को मिले।''

ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमनिक राब ने इसी कार्यक्रम में कहा कि वह ब्रिटेन के प्रतिबंधों की सूची को बहुत आगे नहीं ले जाना चाहते हैं। लेकिन ब्रिटेन इतना भी कमज़ोर नहीं होगा कि इसके ज़रिए चीन को चुनौती ना दे सके। राब ने कहा कि वह हॉन्ग कॉन्ग और चीन पर आगे की कार्रवाई को लेकर संसद को सोमवार को सूचित करेंगे।

हॉन्ग कॉन्ग कभी ब्रिटेन का उपनिवेश था। जब ब्रिटेन ने हॉन्ग कॉन्ग शहर को चीन को सौंपा था तो उससे हॉन्ग कॉन्ग को साल 2047 तक स्वायत्तता देने की गारंटी ली थी। ब्रिटेन का कहना है कि नए क़ानून से हॉन्ग कॉन्ग को दी गई स्वायत्तता छीनी जा रही है।

हॉन्ग कॉन्ग और बीजिंग के अधिकारियों का कहना है कि इस क़ानून की मदद से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मौजूद ख़तरे को ख़त्म किया जा सकेगा। चीन लगातार पश्चिमी देशों को हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे में दखल ना देने की चेतावनी देता रहा है।

बांग्लादेश में टेस्टिंग स्कैम: बिना जाँच के ही बताया जा रहा था निगेटिव रिपोर्ट

बांग्लादेश में कोरोना वायरस की जाँच की रफ़्तार अचानक से धीमी हो गई है। जाँच का दायरा लगभग आधा हो गया है।

जून के आख़िरी हफ़्तों में हर दिन 18 हज़ार टेस्ट किए जा रहे थे और अब पिछले दो हफ़्तों से महज़ 10 हज़ार ही टेस्ट हो रहे हैं।

बांग्लादेश में स्क्रीनिंग स्कैम सामने आया है। ढाका के अस्पताल में बिना जाँच के ही निगेटिव रिपोर्ट दी जा रही थी।

इस मामले में दर्जनों लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। ढाका के एक हॉस्पिटल मालिक को भी गिरफ़्तार किया गया है। इस अस्पताल से हज़ारों लोगों को बिना टेस्ट के ही कोरोना का निगेटिव सर्टिफिकेट दिया गया है।

कोरोना महामारी से निपटने के लिए इंडोनेशिया ने दी भारी टैक्स छूट

कोरोना वायरस महामारी की वजह से दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। इंडोनेशिया ने अपनी अर्थव्यवस्था पर महामारी के असर को सीमित करने के लिए कारोबार के लिए टैक्स छूट बढ़ाने का फ़ैसला किया है।

इंडोनेशिया के टैक्स ऑफिस ने शनिवार को कहा है कि सितंबर महीने में टैक्स में दी गई राहत ख़त्म हो रही थी, जिसे दिसंबर महीने तक बढ़ा दिया गया है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और मध्यम-लघु आकार के उद्योगों को टैक्स ब्रेक की सुविधा दी जाएगी।

इसके अलावा, कॉर्पोरेट टैक्स की किस्तों में भी छूट दी जाएगी। इंडोनेशिया की सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए 50 अरब डॉलर का पैकेज दिया है। राहत पैकेज और राजस्व में आई कमी की वजह से साल 2020 के लिए इंडोनेशिया का बजट घाटा अनुमान से तीन गुना ज्यादा बढ़ने की आशंका है।

यह इंडोनेशिया की जीडीपी के 6.34 फीसदी तक पहुंच सकता है। इंडोनेशिया की वित्त मंत्री श्रीमुलयानी इंद्रावती ने पहले कहा था कि कंपनियों को दिवालिया होने से बचाने के लिए टैक्स ब्रेक की सुविधा दी गई है।

यूएन प्रमुख का मुक्त बाज़ार व्यवस्था पर तीखा तंज: कुछ लोग सुपरयाट में हैं और बाक़ी कचरों में फँसे हुए हैं

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरस ने मुक्त बाज़ार व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है।

गुटेरस ने ट्वीट कर कहा है, "कोविड 19 ने उस झूठ को सतह पर ला दिया है कि मुक्त बाज़ार सबको स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया करा सकता है। यह कपोल-कल्पना ही है कि बिना भुगतान के स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकती हैं। यह एक धोखा ही है, जिसमें कहा जाता है कि हम नस्लवाद से मुक्त दुनिया में रह रहे हैं। हम सभी एक ही समंदर में तैर रहे हैं लेकिन कुछ लोग सुपरयाट में हैं और बाक़ी कचरों में फँसे हुए हैं।''

रूस के हैकर्स कोरोना की वैक्सीन का नुस्खा चुरा रहे हैं?

ब्रिटेन के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (एनसीएससी) ने कहा है कि रूस के हैकर्स उन संगठनों को निशाना बना रहे हैं, जो कोरोना वायरस की वैक्सीन विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।

एनसीएससी का दावा है कि हैकर्स अपना काम निश्चित रूप से रूसी ख़ुफ़िया सेवा के हिस्से के रूप में कर रहे हैं।

सेंटर का कहना है कि हैकर्स ग्रुप ने मैलवेयर का इस्तेमाल करके कोविड- 19 की वैक्सीन से जुड़ी जानकारियाँ चुराने की कोशिश की।

एनसीएससी के निदेशक पॉल चिचेस्टर ने इसे घिनौना कार्य कहा है।

अमरीका को इस साल के आख़िर तक मिल जाएगी कोरोना वैक्सीन: डॉ. फ़ाउची

कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर बुधवार को अमरीका से एक ख़ुशख़बरी आई थी। अमरीकी फ़ार्मास्युटिकल कंपनी मोडेरना की वैक्सीन के परीक्षण के दौरान सकारात्मक परिणाम मिले थे।

बुधवार को ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया था कि 'वैक्सीन को लेकर बड़ी ख़बर है।' अब अमरीका के ही संक्रामक रोगों के शीर्ष विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने अनुमान लगाया है कि अमरीका को इस साल के अंत तक कोरोना वायरस की वैक्सीन मिल जाएगी।

डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी से कहा, ''जिस समय का अनुमान लगाया गया है उसको लेकर मैं ख़ुश हूं।''

उन्होंने कहा कि वो इस विचार से चिंतित नहीं हैं कि चीन वैक्सीन बनाने की दिशा में अमरीका से आगे निकल जाएगा।

उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि हर कोई एक ही ट्रैक पर चल रहा है। वे इसे हमसे पहले प्राप्त नहीं करने जा रहे हैं। जो बिलकुल पक्का है।''

बाकी वैज्ञानिकों की तरह उनका भी कहना है कि इससे जुड़ा यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि एक वैक्सीन के ज़रिए शरीर कब तक बीमारी से बचा रहेगा।