विदेश

यूएई ने आवासीय वीज़ा और एंट्री पर्मिट के लिए अहम घोषणा की

संयुक्त अरब अमीरात 12 जुलाई से मियाद ख़त्म हो चुके आवासीय वीज़ा और आईडी कार्ड के नवीनीकरण के लिए आवेदन स्वीकार करेगा।

कैबिनेट ने मियाद ख़त्म हो चुके वीज़ा की वैधता बढ़ाने, अमीरात आईडी कार्ड और एंट्री पर्मिट को लेकर अहम फ़ैसला किया है। यूएई ने कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने लिए लगाई गई पाबंदियों में ढील देने के बाद यह अहम फ़ैसला लिया है। शुक्रवार को फेडरल अथॉरिटी फोर आइडेंटिटी एंड सिटिज़नशिप (आईसीए) ने कहा कि यह फ़ैसला बताता है कि हम सामान्य दिनों में वापसी कर रहे हैं।

आईसीए ने कहा, ''कई सेक्टर में कारोबार और काम को सामान्य दिनों की तरह पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है।''

कोरोना वायरस की महामारी के शुरुआती महीनों में लॉकडाउन और ट्रैवेल बैन के कारण यूएई ने आवासीय वीज़ा, एंट्री और रेजिडेंसी पर्मिट की वैधता की मियाद बढ़ा दी थी।

आईसीए ने शनिवार को कहा कि वीज़ा, एंट्री पर्मिट और आईडी कार्ड की सेवा फिर से शुरू होने जा रही है। 12 जुलाई से लोग इसका शुल्क जमा कर आवेदन करना शुरू सकते हैं।

आईसीए ने शनिवार को कहा, ''सभी प्रवासी निवासियों, यूएई नागरिकों और जीसीसी देशों के लोगों से आग्रह है कि वो अपने अमान्य हो चुके दस्तावेज़ों को वैध करवा लें।''

ख़ास बातें
- जिनका आवासीय वीज़ा और अमीरात आईडी कार्ड इस साल मार्च और अप्रैल महीने में अवैध हो गया था वो इसके नवीनीकरण के लिए 12 जुलाई से आवेदन कर सकते हैं।
- जिनका आवासीय वीज़ा और अमीरात आईडी कार्ड इस साल मई महीने में अवैध हो गया था, वे 11 अगस्त से नवीनीकरण के लिए आवेदन दे सकते हैं।
- जिनका आवासीय वीज़ा और अमीरात आईडी कार्ड एक जुलाई से 11 जुलाई के बीच एक्सपायर्ड हुआ है वो इसके नवीनीकरण के लिए 10 सितंबर से आवेदन कर सकते हैं।

कोरोना वायरस: अनजान निमोनिया महामारी से कज़ाकस्तान ने इनकार किया

कज़ाकस्तान ने चीनी अधिकारियों की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि देश ''अनजान तरह के निमोनिया की महामारी'' से जूझ रहा है।

गुरुवार को कज़ाकस्तान में मौजूद चीनी दूतावास ने अपने नागरिकों को चेतावनी दी और कहा कि ''देश ऐसे निमोनिया से जूझ रहा है जो संभवत: कोविड-19 से भी घातक हो सकता है।''

चीनी दूतावास का कहना था कि निमोनिया की महामारी से साल 2020 के पहले छह महीनों में कज़ाकस्तान में 1,772 मौतें हुई हैं और इनमें से 628 मौतें अकेले जून के महीने में हुई हैं। कज़ाकस्तान के तीन प्रांतों में इस कारण जो मौतें हुई हैं उसमें चीनी नागरिक भी शामिल हैं।

इसके जवाब में शुक्रवार को कज़ाकस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को ''ग़लत'' करार दिया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कज़ाकस्तान में हाल में ''निमोनिया पैदा करने वाला अनजान वायरस'' के मामले सामने आए हैं, लेकिन चीनी दूतावास ने जो चेतावनी जारी की है वो ''सच्चाई नहीं है।''

मंत्रालय के अनुसार जिन लोगों में कोरोना जैसे लक्षण थे उन लोगों के कोरोना वायरस टेस्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियमों के अनुसार किए गए हैं और उनका रिज़ल्ट नेगेटिव आया है जिसके बाद इस बीमारी को निमोनिया के रुप में दर्ज किया गया है।

हाल में कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामले सामने आने के बाद कज़ाकस्तान ने देशव्यापी लॉकडाउन लगाया है।

कज़ाकस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 10 जुलाई तक देश के करीब 55,000 लोग कोरोना संक्रमित हैं जबकि 264 लोगों की इस कारण मौत हुई है।

कज़ाकस्तान समेत कई केंद्रीय एशियाई देशों पर आरोप हैं कि वो कोरोना महामारी की दूसरी लहर को निमोनिया करार देकर, संक्रमण की संख्या कम बता रहे हैं।

शुक्रवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को दिए एक बयान में कहा कि कज़ाकस्तान संगठन के दिशानिर्दशों के अनुसार ही निमोनिया के मामलों की पहचान कर रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि कज़ाकस्तान से निमोनिया से जुड़ी जो खब़रें मिल रही है संगठन उन पर नज़रें बनाए हुए है, ये मामले कोरोना वायरस से जुड़े हो सकते हैं।

संगठन के इमर्जेन्सी प्रोग्राम के माइक रायन ने कहा कि ''किसी देश में कोरोना महामारी के फैलने का संकेत इसी से मिलता है कि इस वायरस के संक्रमण के मामलों की पहचान नहीं हो पा रही है।''

यूरोपीय संघ की कोरोना वैक्सीन मुहिम से अलग क्यों रहेगा ब्रिटेन?

यूरोपीय संघ के लिए ब्रिटेन के राजदूत सर टिम बैरो ने कहा है कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ की कोरोना वैक्सीन मुहिम का हिस्सा नहीं बनेगा।

यूरोपीय कमिशन के महासचिव को लिखी एक चिट्ठी में उन्होंने कहा कि ब्रिटेन इस मुहिम का हिस्सा नहीं बनना चाहता क्योंकि ऐसा करने पर उसे ''कोरोना वैक्सीन बना रही उन कंपनियों के साथ जारी अपनी बातचीत बीच में ही रोकनी होगी जिनके साथ यूरोपीय संघ ने चर्चा शुरू की है।''

यूरोप के देशों के लिए कोरोना वैक्सीन सुनिश्चित करने की संघ की इस मुहिम के बारे में यूरोपीय कमीशन ने पहले कहा था कि ''वैक्सीन पाने की इस मुहिम में अहम फ़ैसलों में ब्रिटेन की निर्णायक स्थिति रहना संभव नहीं है। इन फ़ैसलों में उत्पादन करने वाली कंपनियों के साथ वैक्सीन की कीमत, संख्या और वैक्सीन की डिलीवरी को लेकर बातचीत शामिल है।''

सर टिम बैरो ने संघ से कहा है कि इसके बावजूद यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ''संभावित वैक्सीन से जुड़े शोध के बारे में जानकारी साझा करने, वैक्सीन के ट्रायल और वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए निवेश'' के मामले में हाथ मिला सकते हैं।

इस पूरे मुद्दे पर ब्रितानी स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने कहा है कि यूरोपीय संघ की वैक्सीन मुहिम में शामिल होने पर देश को वैक्सीन पाने की अपनी कोशिशों को रोकना पड़ेगा जिससे देश को नुक़सान होगा क्योंकि इस मामले में ब्रिटेन दूसरों से आगे है।

उनका कहना है कि यूरोपीय संघ की ''एक शर्त'' को मानना ब्रिटेन के लिए संभव नहीं है क्योंकि ''ऐसा करके उसे अपने स्तर पर जारी बातचीत बंद कर संघ के ज़रिए ही बातचीत करनी होगी, जिसके लिए ब्रिटेन तैयार नहीं है।''

उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि ''इस तरह ब्रिटेन दूसरों से आगे रह सकता है।''

भारत-नेपाल तनाव के बीच पाकिस्तानी विदेश मंत्री का ट्वीट

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने भारत-नेपाल तनाव के बीच एक ट्वीट किया है। हालांकि उनके ट्वीट में भारत-नेपाल तनाव को लेकर कुछ नहीं है।

क़ुरैशी ने नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन को लेकर ट्वीट किया है।

क़ुरैशी ने अपने ट्वीट में कहा है, ''बाढ़ और भूस्खलन से उपजे संकट को लेकर हम नेपाल के लोगों के प्रति संवेदना जताते हैं। हम नेपाल की जनता के साथ खड़े हैं और जो परिवार प्रभावित हुए हैं उनके लिए हम दुआ मांगते हैं।''

क़ुरैशी के इस ट्वीट का कुछ नेपाली ट्विटर यूज़र ने स्वागत किया है। गोर्खाली ठिटो नाम के एक यूज़र ने लिखा है- शुक्रिया पाकिस्तान।

नेपाल में पिछले दो दिनों में ठीक-ठाक बारिश हुई है और भूस्खलन भी हुए हैं। नेपाली अख़बार काठमांडू पोस्ट के अनुसार इससे एक दर्जन लोगों की मौत हुई है।

भारत और नेपाल में सीमा विवाद के कारण तनाव चल रहा है। नेपाल ने 22 मई को नया नक्शा जारी किया था और लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना हिस्सा बताया था।

इससे पहले भारत ने भी अपना नक्शा जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद अपडेट किया था। पूरे मामले में पाकिस्तान ने नेपाल का समर्थन किया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान भी भारत पर नेपाल को लेकर निशाना साध चुके हैं।

अमरीका में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए भारत ने अमेरिकी सरकार से अपील की

भारत ने अमरीका से वीज़ा संबंधी उस नियम को लेकर फिर से विचार करने का अनुरोध किया है जिसके चलते हज़ारों भारतीय छात्रों के सामने अमरीका छोड़ने का संकट उत्पन्न हो गया है।

अमरीकी इमिग्रेशन सेवा ने इस सप्ताह ऐलान किया है कि उन विदेशी छात्रों को देश में रहने की अनुमति नहीं होगी जिनकी यूनिवर्सिटीज अपने सभी क्लासेज को ऑनलाइन मोड में कराएगी। सिर्फ़ क्लासरूम टीचिंग और इन-पर्सन ट्यूशन लेने वाले छात्रों को अमरीका में रहने की अनुमति होगी।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ''ट्रंप प्रशासन को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि देशों के बीच संबंध बेहतर बनाने में एजुकेशनल एक्सचेंज और लोगों के आपसी संबंधों की भूमिका होती है।''

अमरीकी सरकार के इस फ़ैसले का अमरीकी अकादमिक जगत में भी विरोध हो रहा है। हार्वर्ड और मैसाच्यूट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी ने सरकार के फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी है।

डोनाल्ड ट्रंप की नाकामियों की वजह से लाखों लोग का भविष्य अनिश्चित: जो बाइडन

अमरीकी राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन ने कोरोना वायरस संक्रमण के तीस लाख के पार पहुंचने पर वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की है।

उन्होंने कहा, ''जब दूसरे देश अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से खोल रहे हैं, उनके नागरिक काम और कारोबार की दुनिया में लौट रहे हैं तब अमरीका में फिर से लॉकडाउन की स्थिति है। डोनाल्ड ट्रंप की नाकामियों के चलते लाखों लोगों के सामने अनिश्चित भविष्य खड़ा है।

मंगलवार को अमरीका में एक दिन में कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड 60,000 मामले सामने आए थे।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमरीका में सबसे ज़्यादा मामले इसलिए सामने आ रहे हैं क्योंकि अमरीका सबसे ज़्यादा टेस्टिंग कर रहा है। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा है कि कोरोना को लेकर अमरीका अच्छी स्थिति में है।

जो बाइडन कोविड-19 के असर से अमरीका को उबरने के लिए 700 अरब डॉलर की इकॉनमी योजना का खाका पेश करने वाले हैं।

कोविड-19 के लिए दुनिया की तैयारी पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की होगी नजर

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 संक्रमण को लेकर दुनिया भर के देशों के रिस्पांस की समीक्षा के लिए पैनल का गठन किया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडहनॉम गिब्रयेसॉस ने जिनेवा में कहा कि रिव्यू पैनल की अध्यक्षता न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री हेलन क्लार्क और लाइबेरिया के राष्ट्रपति एलन जॉनसॉन सरलीफ़ करेंगे। इसे इंडिपेंडेंट पैनल फ़ॉर पैनेडिमिक प्रीपेयर्डनेसे एंड रिस्पांस कहा जाएगा।

डॉ. ट्रेडोस ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया को आपसी सहयोग बढ़ाने की ज़रूरत है ताकि हम लोग मिलकर लाखों लोगों की ज़िंदगी बचा सकें और इस महामारी पर अंकुश लगा पाएं।

कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन दबाव में हैं क्योंकि अमरीका लगातार डब्ल्यूएचओ पर आरोप लगाता रहा है कि संगठन ने समय रहते यानी चीन में संक्रमण फैलते वक्त उचित भूमिका अदा नहीं की। अमरीका ने डब्ल्यूएचओ पर चीन का पक्ष लेने का आरोप भी लगाया है।

डब्ल्यूएचओ ने रिव्यू पैनल के गठन की घोषणा मई महीने में की थी। यह पैनल महामारी को लेकर ना केवल डब्ल्यूएचओ की तैयारियों का जायज़ा लेगा बल्कि अलग अलग देशों की कोशिशों का भी आकलन करेगा।

इस सप्ताह की शुरुआत में अमरीका ने आधिकारिक तौर पर डब्ल्यूएचओ से अलग होने की जानकारी संयुक्त राष्ट्र को दी है।

वायरस नहीं, भुखमरी से ज़्यादा मौतें होंगी: ऑक्सफ़ैम

चैरिटी संस्था ऑक्सफ़ैम ने चेतावनी दी है कि इस साल के अंत कर कोविड-19 से जुड़ी भुखमरी के कारण हर दिन 12 हज़ार लोगों की जान जा सकती है।

ये आँकड़ा शायद हर दिन बीमारी से मरने वालों की संख्या से ज़्यादा होगा।

ऑक्सफ़ैम का कहना है कि भुखमरी बढ़ने की कई वजहें हैं जिनमें बड़ी संख्या में बेरोज़गारी, लॉ़कडाउन के कारण खाद्यान्न उत्पादकों की परेशानी और सहायता देने में परेशानियाँ शामिल हैं।

अपनी रिपोर्ट में ऑक्सफ़ैम ने भुखमरी के जिन हॉटस्पॉट्स का ज़िक्र किया है, वे हैं- डीआर कांगो, अफ़ग़ानिस्तान, वेनेज़ुएला, पश्चिमी अफ़्रीकी साहेल, इथियोपिया, दक्षिणी सूडान, सीरिया, सूडान और हैती।

ट्रंप सरकार के फ़ैसले को हार्वर्ड और एमआईटी ने दी कोर्ट में चुनौती

अमरीका की शीर्ष दो यूनिवर्सिटीज ने अमरीकी सरकार के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना है। सरकार ने इमिग्रेशन संबंधी नया नियम बनाया है जिसके तहत दूसरे देशों के छात्रों के सामने देश छोड़ने की नौबत आ गई है।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक नया नियम लागू किया है जिसके तहत उन छात्रों को देश में रहने की अनुमति नहीं होगी जिनके शैक्षणिक संस्थानों में क्लास रूम क्लासेज नहीं होगी। हालांकि कोरोना वायरस महामारी के चलते अधिकांश यूनिवर्सिटी ऑनलाइन टीचिंग करा रहे हैं।

दुनिया के दो टॉप इंस्टीट्यूट हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और मैसाच्यूटएस इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी ने नए इमिग्रेशन क़ानून पर रोक लगाने के लिए फ़ेडरल कोर्ट से अपील की है।

हार्वर्ड के प्रेसीडेंट लॉरेंस बाकाउ ने हार्वर्ड कम्यूनिटी को भेजे ईमेल में कहा है कि हम इस मामले को मज़बूती से लड़ेंगे ताकि हमारे अंतरराष्ट्रीय छात्र और देश के दूसरे शैक्षणिक संस्थानों के अंतरराष्ट्रीय छात्र, देश से निकाले जाने के डर से मुक्त होकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।

कीनिया में 2021 से पहले नहीं खुलेंगे प्राइमरी-सेकेंडरी स्कूल

भारत की केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने नौवीं से 12वीं कक्षा के सिलेबस को कम करने का एलाना किया है। इसके तहत 2020-21 सत्र के छात्रों को राहत मिलेगी।

लेकिन मंगलवार को ही दुनिया के एक देश ने इस साल के अंत तक सभी प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल को बंद करने का एलान किया है। अफ्रीकी देश कीनिया के शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश के सभी प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल अब अगले साल खुलेंगे।

कीनिया के शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि सभी छात्रों को उसी क्लास में कक्षा शुरू करनी होगी जिस कक्षा में वे इस साल हैं। कीनिया के शिक्षा मंत्री जॉर्ज मागोहा ने कहा कि इस साल प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों की सालाना परीक्षाएं नहीं होंगी। हर साल ये परीक्षाएं अक्टूबर और नवंबर महीने में आयोजित होती रही हैं।

कीनिया में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला मार्च महीने में सामने आया था इसके बाद से ही वहां के सभी प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल बंद हैं। हालांकि सुरक्षा के लिए सख़्त गाइडलाइंस के तहत पूरे कीनिया में सितंबर महीने से कॉलेज और यूनिवर्सिटी खोलने की तैयारी चल रही है।