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ट्रंप ने ट्वीट किया, वैक्सीन पर बड़ी ख़बर है

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर ट्वीट किया है कि वैक्सीन पर बड़ी ख़बर है। हालांकि, उन्होंने इसके अलावा आगे कोई जानकारी नहीं दी है।

दरअसल ऐसा अनुमान है कि उन्होंने कोविड-19 की उस वैक्सीन को लेकर ट्वीट किया है जिसे अमरीका में सफलतापूर्वक टेस्ट की गई पहली वैक्सीन बताया जा रहा है।

इस वैक्सीन से इम्युन को वैसा ही फ़ायदा पहुंचा है जैसा कि वैज्ञानिकों ने उम्मीद की थी। अब इस वैक्सीन का अहम ट्रायल किया जाना है।

अमरीका के शीर्ष विशेषज्ञ डॉ. एंथोनी फ़ाउची ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से कहा, "आप इसे कितना भी काट-छांट कर देखो तब भी ये एक अच्छी ख़बर है।"

इस ख़बर को न्यू यॉर्क टाइम्स ने भी प्रकाशित किया है। इसके ट्रायल से जुड़ी सूचना clinicaltrials.gov पर पोस्ट की गई है। इसे लेकर अभी स्टडी जारी है और अक्टूबर 2022 तक चलेगी।

नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ हेल्थ और मोडेरना इंक में डॉ. फ़ाउची के सहकर्मियों ने इस वैक्सीन को विकसित किया है।

अब 27 जुलाई से इस वैक्सीन का सबसे अहम पड़ाव शुरू होगा। तीस हज़ार लोगों पर इसका परीक्षण किया जाएगा और पता किया जाएगा कि क्या ये वैक्सीन वाक़ई कोविड-19 से मानव शरीर को बचा सकती है?

महिलाओं पर कोरोना महामारी के असर को दरकिनार करने से 5 ट्रिलियन डॉलर की चपत लगेगी

बिल एंड मिलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन के एक पेपर में मिलिंडा गेट्स ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस के महिलाओं पर पड़ने वाले असमान प्रभाव को न देखा गया तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर 5 ट्रिलियन डॉलर का असर पड़ेगा।

मिलिंडा गेट्स का अनुमान है कि कोरोना महामारी के कारण आने वाली मंदी से पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं की 1.8 गुना नौकरियां जाएंगी।

वो लिखती हैं कि उसी समय बच्चों और परिवारजनों का बोझ भी महिलाओं पर पड़ेगा। इसके अलावा स्कूल बंद होने से भी दुनिया भर में महिलाओं के नौकरी छोड़ने का डर है।

साथ ही मिलिंडा ने सरकारों से निवेदन किया है कि वे कोरोना महामारी के कारण आई गिरावट को देखते हुए जब नीतियां बनाएं तो इस लैंगिक असमानता के मुद्दे को भी देखें।

बच्चों के जीवन-रक्षक टीकाकरण में भारी गिरावट आयी: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण तकरीबन 30 सालों में पहली बार बच्चों के जीवन-रक्षक टीकाकरण में भारी गिरावट आई है।

2020 के शुरुआती चार महीनों में संयुक्त राष्ट्र ने पाया है कि बच्चों के डिप्थीरिया, टेटनस और काली खांसी के टीकाकरण में खासी गिरावट दर्ज की गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉक्टर टेड्रोस एदनहोम गेब्रेयासिस का कहना है कि इन बीमारियों से बच्चों की मौतें कोविड-19 के मुक़ाबले होने वाली मौतों से अधिक हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि ये वैक्सीन सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास में सबसे ताक़तवर हथियार हैं।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन की जांच सच पर पर्दा डालने जैसी है: पॉम्पियो

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने एक बार फिर चीन पर हमला बोलते हुए कहा है कि कोरोना वायरस महामारी पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की जांच पूरी तरह से सच पर पर्दा डालने के लिए है।

पिछले साल वुहान में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला मिला था जिसके बाद से पॉम्पियो और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन पर सूचना छिपाने का आरोप लगाते रहे हैं।

पोम्पियो ने कहा, इसके कारण 1 लाख अमरीकियों की जानें गई हैं और विश्व की अर्थव्यवस्था पर खरबों डॉलरों का बोझ पड़ा है।

पोम्पियो ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, ''अब विश्व स्वास्थ्य संगठन को आने और जांच करने के लिए अनुमति दी जा रही है। इसको लेकर मैं पूरी तरह विश्वस्त हूं कि यह पूरी तरह से सच पर पर्दा डालने वाला है।''

दरअसल पोम्पियो डब्ल्यूएचओ की उस स्वतंत्र जांच पर ध्यान दिलाना चाह रहे थे जो इस महीने की शुरुआत में शुरू हुई है। चीन में जांच को लेकर विश्व स्तर पर मांग उठती रही है।

हालांकि यह जांच पैनल कोरोना वायरस के पैदा होने की जांच नहीं करेगा जिसकी पोम्पियो और दूसरे विश्व के नेता मांग करते रहे हैं।

इस महामारी के दौरान ट्रंप प्रशासन लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि महामारी की शुरुआत में डब्ल्यूएचओ चीन के साथ इस मुद्दे को छिपाने में लगा रहा।

कोरोना वायरस: तेज़ी से फैलते संक्रमण के बीच ट्रंप और फाउची में मतभेद

बीते कुछ समय से, ट्रंप प्रशासन और अमरीकी सरकार के उच्चस्थ जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ एंथनी फाउची के बीच कोरोना वायरस संकट को संभाले जाने पर दूरियां बढ़ती हुई दिख रही हैं।

इन दिनों अमरीका में प्रतिदिन कोरोना वायरस संक्रमण के लगभग साठ हज़ार नए मामले सामने आ रहे हैं।

बीते सोमवार डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर इस महामारी को कमतर ठहराने की कोशिश करते हुए सामने आ रहे संक्रमण के ज़्यादा मामलों के लिए ज़्यादा टेस्टिंग को ज़िम्मेदार ठहराया।

फाउची ने स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक विशेषज्ञ से एक ऑनलाइन मीटिंग के दौरान कहा, ''हमने अपने देश में स्थानीय जन स्वास्थ्य ढांचे को बर्बाद होने दिया है।''

फाउची ने चेतावनी दी कि कुछ प्रांतों ने कोरोना वायरस संक्रमण की रफ़्तार नियंत्रित और कम होने से पहले ही लॉकडाउन खोलने की जल्दबाजी दिखाई।

इन प्रांतों ने ऐसा करते हुए पूर्ण लॉकडाउन हटाने के बाद किसी तरह की सावधानी नहीं बरती। और ऐसे प्रांतों का अमरीका में प्रतिदिन दर्ज किए जा रहे नए मामलों में बढ़त में योगदान है।

वहीं, ट्रंप के सहयोगियों ने न्यूज़ आउटलेट्स को बताया है कि फाउची ने अपने आकलन में कई तरह की ग़लतियां की हैं।

कोरोना अभी भी दुश्मन नंबर एक, लेकिन नहीं समझ रहे हैं कुछ देश और वहां के नागरिक: डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ के प्रमुख डॉ. टेड्रोस एडहनॉम गिब्रयेसॉस ने भी कहा है कि अगर कुछ देशों की सरकारों ने निर्णयात्मक क़दम नहीं उठाए तो कोरोना वायरस की स्थिति लगातार बिगड़ती जाएगी।

गिब्रयेसॉस ने कहा, ''जिन देशों में कोरोना का संक्रमण रोकने के प्रावधानों को ठीक से लागू नहीं किया गया या कम किया गया है, वहां ख़तरनाक ढंग से मामले बढ़ रहे हैं। अगर मैं स्पष्टता से कहूं तो कई देश ग़लत दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।''

''कोरोना वायरस अभी भी लोगों के लिए दुश्मन नंबर एक बना हुआ है, लेकिन कई देशों की सरकारों और वहां के नागरिक इस ख़तरे को लेकर सावधानी नहीं बरत रहे हैं।''

गिब्रयेसॉस ने यह भी कहा कि कुछ नेताओं ने कोरोना वायरस के ख़तरे को कम करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के काम को कमतर बताने की कोशिश की है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने किसी नेता का नाम नहीं लिया लेकिन कुछ लोग मान रहे हैं कि उनका इशारा अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उन नेताओं की ओर था जो डब्ल्यूएचओ की आलोचना कर चुके हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने कहा, ''अगर बेसिक बातों पर ध्यान नहीं दिया गया तो महामारी लगातार बढ़ेगी और स्थिति ख़राब से ख़राब होती जाएगी।''

अमरीकी राष्ट्रपति और हेल्थ एक्सपर्ट एकमत नहीं, बढ़ रहा है संक्रमण

कोरोना संक्रमण को लेकर अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय और स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच असहमति देखने को मिला है वहीं दूसरी ओर अमरीका में कोरोना संक्रमण का बढ़ना जारी है।

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी डैशबोर्ड के मुताबिक अमरीका में कोरोना संक्रमितों की संख्या 33 लाख तक पहुंच गई है। अमरीकी राष्ट्रपति और स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच तालमेल नहीं होने के साथ-साथ और भी कई अहम बातें हैं।

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट को रिट्वीट किया है, जिसमें कोविड-19 को लेकर अमरीकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) पर झूठ बोलने का आरोप है।

अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय के अधिकारियों ने संक्रामक रोग के सबसे बड़े एक्सपर्ट डॉ. एंथनी फ़ाउची को कई मामलों में ग़लत बताया है।

इन सबके बीच अमरीका में कोरोना वायरस संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। पश्चिमी और दक्षिणी प्रांतों में जहां लॉकडाउन पहले हटाया गया था वहां संक्रमण के मामले बढ़े हैं।

रविवार को फ़्लोरिडा में कोरोना संक्रमण के 15 हज़ार नए मामले सामने आए हैं। यह एक दिन में सबसे बड़ी संख्या है।

इन सबके बीच न्यूयार्क से एक अच्छी ख़बर है। अमरीका में हॉटस्पॉट रहे न्यूयार्क में बीते 24 घंटे में कोविड-19 से किसी की मौत नहीं हुई है। मार्च के बाद यह पहला मौका है जब 24 घंटे में न्यूयार्क में कोविड-19 से एक भी शख़्स की मौत नहीं हुई है।

हज के दौरान बिना परमिट के मक्का जाने पर सऊदी अरब भारी जुर्माना लगाएगा

सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने कहा है कि आने वाले दिनों में जब हज यात्रा का आयोजन किया जाएगा, तब बिना परमिट के पवित्र स्थलों पर जाने वालों पर दस हज़ार सऊदी रियाल यानी 2666 अमरीकी डॉलर का जुर्माना लगाया जाएगा।

सऊदी अरब ने इस साल कोरोना वायरस की वजह से हज यात्रा के लिए सऊदी अरब आने वाले लोगों की संख्या को कम किया है।

सऊदी गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ये प्रतिबंध 19 जुलाई (धुल क़दाह) से 2 अगस्त (धुल हिज्जाह) तक चलेगा।

दूसरी बार इस प्रतिबंध का उल्लंघन करते हुए पकड़े जाने पर जुर्माने की राशि दुगनी यानी 2000 सऊदी रियाल और 5332 अमरीकी डॉलर हो जाएगी।

सऊदी प्रेस एजेंसी ने सऊदी अरब सरकार के गृह मंत्रालय का बयान छापा है।

गृह मंत्रालय का बयान कहता है - ''गृह मंत्रालय के एक आधिकारिक सूत्र ने सभी नागरिकों और बाशिंदों से आगामी धार्मिक यात्राओं के दौरान नियमों का पालन करने को कहा है। उन्होंने ज़ोर दिया है कि हज के दौरान सुरक्षाकर्मी नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए पवित्र स्थलों तक जाने वालीं सभी सड़कों और रास्तों पर तैनात रहेंगे।''

सऊदी अरब के प्रशासकों का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से उन्होंने हज करने वालों की संख्या लगभग दस हज़ार तक करने का फ़ैसला किया है।

सऊदी अरब से बाहर रहने वाले लोगों के लिए इस साल हज करने की डेडलाइन बीते शुक्रवार ख़त्म हो गई।

इस्लामिक धारणाओं के मुताबिक़, हज इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है और प्रत्येक शारीरिक रूप से सक्षम मुस्लिम को अपने जीवन में एक बार हज करना चाहिए। बीते साल 25 लाख लोगों ने मक्का और मदीना की यात्रा की थी।

12 जुलाई से 26 जुलाई के बीच यूएई की भारत के पाँच शहरों से विशेष उड़ानें

12 जुलाई से 26 जुलाई के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत के पांच शहरों के लिए विशेष उड़ाने संचालित की जाएंगी। इन उड़ानों से अमीरात में फंसे भारतीय घर लौट सकेंगे और भारत में फंसे अमीरातवासी वापस लौट सकेंगे। ये उड़ानें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोच्चि और तिरूवनंतपुरम से संचालित होंगी।

दिल्ली से रोज़ाना दो उड़ानें होंगी, बेंगलुरु से भी दो उड़ानें और कोच्चि से भी दो उड़ानें रहेंगी। मुंबई से तीन और तिरूवनंतपुरम से रोज़ाना एक उड़ान संचालित होगी। बेंगलुरु और मुंबई की उड़ानें राज्य सरकार की मंज़ूरी पर निर्भर करेंगी। इन उड़ानों के लिए टिकट अमीरात एयरलाइंस की वेबसाइट पर बुक किए जा सकेंगे।

ये टिकट ट्रैवल एजेंट, अमीरात के सेल्स अधिकारी या फिर कॉन्टैक्ट सेंटर से भी बुक किए जा सकेंगे। उड़ान पर सवार होने से पहले यात्रियों के लिए गंतव्य स्थान की सभी ज़रूरतें पूरी करना अनिवार्य होगा। दुबई से भारत के पांच शहरों के लिए चलने वाली इन उड़ानों पर सिर्फ़ भारतीय नागरिक ही सफ़र कर सकेंगे।

संयुक्त अरब अमीरात के जीडीएफ़आरए यानी नागरिकता और विदेश मामलों के महानिदेशालय से देश में दाख़िल होने की मंज़ूरी मिलने के बाद ये उड़ाने दुबई के नागरिकों और आईसीए की मंज़ूरी के बाद संयुक्त अरब अमीरात की दूसरी अमीरातों के निवासियों के लिए उपलब्ध होंगी।

भारत से अमीरात लौटने के लिए कोरोना निगेटिव टेस्ट होना अनिवार्य होगा। भारत सरकार द्वारा स्वीकृत लैब से आरटी-पीसीआर टेस्ट का नतीजा ही मान्य होगा। ये कोरोना निगेटिव प्रमाण पत्र उड़ान के समय से 96 घंटे से ज़्यादा पुराना ना हो।

ईरान में सभी तरह के समारोहों और प्रवेश परीक्षाओं पर रोक

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने शनिवार को उन समारोहों पर पाबंदी लगा दी जिनमें भीड़ जुटती है। ईरान में एक बार फिर से कोरोना के नए मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि राष्ट्रपति रूहानी ने कहा है कि अर्थव्यवस्था खुली रहेगी।

हसन रूहानी के टेलीविजन संबोधन के कुछ देर बाद ही तेहरान में पुलिस ने शादी स्थलों और शोक सभाओं को बंद करने की घोषणा की। पुलिस ने कहा है कि अगले नोटिस तक ये बंद रहेंगे।

ईरान ने अप्रैल महीने के मध्य से लॉकडाउन में ढील देने की शुरुआत कर दी थी लेकिन हाल के दिनों में कोरोना के नए मामले तेज़ी से बढ़े हैं।

शनिवार को कोरोना से ईरान में 188 लोगों की मौत हुई और इसके साथ ही मृतकों की कुल संख्या 12,635 पहुंच गई है।

पिछले 24 घंटों में ईरान में कोरोना के 2,397 मामले सामने आए हैं। ईरान में अब तक कुल 255,117 संक्रमित हो चुके हैं। रूहानी ने शनिवार को कहा, ''पूरे ईरान में समारोहों को सख़्ती से बंद करने की ज़रूरत है। वो चाहे उत्सव में हो या ग़म में। अभी किसी उत्सव और सेमीनार का वक़्त नहीं है।

यहां तक कि यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षाएं भी निलंबित कर दी गई हैं। ईरान की सरकार का मानना है कि कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी इन्हीं समारोहों के कारण है। ईरान में कोरोना वायरस टास्क फोर्स के एक सलाहकार ने चेतावनी दी है कि अगर नियमों का सख़्ती से पालन नहीं किया गया तो ईरान में 50 से 60 हज़ार लोगों की मौत हो सकती है।