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कोरोना महामारी से निपटने के लिए इंडोनेशिया ने दी भारी टैक्स छूट

कोरोना वायरस महामारी की वजह से दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। इंडोनेशिया ने अपनी अर्थव्यवस्था पर महामारी के असर को सीमित करने के लिए कारोबार के लिए टैक्स छूट बढ़ाने का फ़ैसला किया है।

इंडोनेशिया के टैक्स ऑफिस ने शनिवार को कहा है कि सितंबर महीने में टैक्स में दी गई राहत ख़त्म हो रही थी, जिसे दिसंबर महीने तक बढ़ा दिया गया है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और मध्यम-लघु आकार के उद्योगों को टैक्स ब्रेक की सुविधा दी जाएगी।

इसके अलावा, कॉर्पोरेट टैक्स की किस्तों में भी छूट दी जाएगी। इंडोनेशिया की सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए 50 अरब डॉलर का पैकेज दिया है। राहत पैकेज और राजस्व में आई कमी की वजह से साल 2020 के लिए इंडोनेशिया का बजट घाटा अनुमान से तीन गुना ज्यादा बढ़ने की आशंका है।

यह इंडोनेशिया की जीडीपी के 6.34 फीसदी तक पहुंच सकता है। इंडोनेशिया की वित्त मंत्री श्रीमुलयानी इंद्रावती ने पहले कहा था कि कंपनियों को दिवालिया होने से बचाने के लिए टैक्स ब्रेक की सुविधा दी गई है।

यूएन प्रमुख का मुक्त बाज़ार व्यवस्था पर तीखा तंज: कुछ लोग सुपरयाट में हैं और बाक़ी कचरों में फँसे हुए हैं

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरस ने मुक्त बाज़ार व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है।

गुटेरस ने ट्वीट कर कहा है, "कोविड 19 ने उस झूठ को सतह पर ला दिया है कि मुक्त बाज़ार सबको स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया करा सकता है। यह कपोल-कल्पना ही है कि बिना भुगतान के स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकती हैं। यह एक धोखा ही है, जिसमें कहा जाता है कि हम नस्लवाद से मुक्त दुनिया में रह रहे हैं। हम सभी एक ही समंदर में तैर रहे हैं लेकिन कुछ लोग सुपरयाट में हैं और बाक़ी कचरों में फँसे हुए हैं।''

रूस के हैकर्स कोरोना की वैक्सीन का नुस्खा चुरा रहे हैं?

ब्रिटेन के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (एनसीएससी) ने कहा है कि रूस के हैकर्स उन संगठनों को निशाना बना रहे हैं, जो कोरोना वायरस की वैक्सीन विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।

एनसीएससी का दावा है कि हैकर्स अपना काम निश्चित रूप से रूसी ख़ुफ़िया सेवा के हिस्से के रूप में कर रहे हैं।

सेंटर का कहना है कि हैकर्स ग्रुप ने मैलवेयर का इस्तेमाल करके कोविड- 19 की वैक्सीन से जुड़ी जानकारियाँ चुराने की कोशिश की।

एनसीएससी के निदेशक पॉल चिचेस्टर ने इसे घिनौना कार्य कहा है।

अमरीका को इस साल के आख़िर तक मिल जाएगी कोरोना वैक्सीन: डॉ. फ़ाउची

कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर बुधवार को अमरीका से एक ख़ुशख़बरी आई थी। अमरीकी फ़ार्मास्युटिकल कंपनी मोडेरना की वैक्सीन के परीक्षण के दौरान सकारात्मक परिणाम मिले थे।

बुधवार को ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया था कि 'वैक्सीन को लेकर बड़ी ख़बर है।' अब अमरीका के ही संक्रामक रोगों के शीर्ष विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने अनुमान लगाया है कि अमरीका को इस साल के अंत तक कोरोना वायरस की वैक्सीन मिल जाएगी।

डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी से कहा, ''जिस समय का अनुमान लगाया गया है उसको लेकर मैं ख़ुश हूं।''

उन्होंने कहा कि वो इस विचार से चिंतित नहीं हैं कि चीन वैक्सीन बनाने की दिशा में अमरीका से आगे निकल जाएगा।

उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि हर कोई एक ही ट्रैक पर चल रहा है। वे इसे हमसे पहले प्राप्त नहीं करने जा रहे हैं। जो बिलकुल पक्का है।''

बाकी वैज्ञानिकों की तरह उनका भी कहना है कि इससे जुड़ा यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि एक वैक्सीन के ज़रिए शरीर कब तक बीमारी से बचा रहेगा।

ट्रंप ने ट्वीट किया, वैक्सीन पर बड़ी ख़बर है

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर ट्वीट किया है कि वैक्सीन पर बड़ी ख़बर है। हालांकि, उन्होंने इसके अलावा आगे कोई जानकारी नहीं दी है।

दरअसल ऐसा अनुमान है कि उन्होंने कोविड-19 की उस वैक्सीन को लेकर ट्वीट किया है जिसे अमरीका में सफलतापूर्वक टेस्ट की गई पहली वैक्सीन बताया जा रहा है।

इस वैक्सीन से इम्युन को वैसा ही फ़ायदा पहुंचा है जैसा कि वैज्ञानिकों ने उम्मीद की थी। अब इस वैक्सीन का अहम ट्रायल किया जाना है।

अमरीका के शीर्ष विशेषज्ञ डॉ. एंथोनी फ़ाउची ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से कहा, "आप इसे कितना भी काट-छांट कर देखो तब भी ये एक अच्छी ख़बर है।"

इस ख़बर को न्यू यॉर्क टाइम्स ने भी प्रकाशित किया है। इसके ट्रायल से जुड़ी सूचना clinicaltrials.gov पर पोस्ट की गई है। इसे लेकर अभी स्टडी जारी है और अक्टूबर 2022 तक चलेगी।

नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ हेल्थ और मोडेरना इंक में डॉ. फ़ाउची के सहकर्मियों ने इस वैक्सीन को विकसित किया है।

अब 27 जुलाई से इस वैक्सीन का सबसे अहम पड़ाव शुरू होगा। तीस हज़ार लोगों पर इसका परीक्षण किया जाएगा और पता किया जाएगा कि क्या ये वैक्सीन वाक़ई कोविड-19 से मानव शरीर को बचा सकती है?

महिलाओं पर कोरोना महामारी के असर को दरकिनार करने से 5 ट्रिलियन डॉलर की चपत लगेगी

बिल एंड मिलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन के एक पेपर में मिलिंडा गेट्स ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस के महिलाओं पर पड़ने वाले असमान प्रभाव को न देखा गया तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर 5 ट्रिलियन डॉलर का असर पड़ेगा।

मिलिंडा गेट्स का अनुमान है कि कोरोना महामारी के कारण आने वाली मंदी से पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं की 1.8 गुना नौकरियां जाएंगी।

वो लिखती हैं कि उसी समय बच्चों और परिवारजनों का बोझ भी महिलाओं पर पड़ेगा। इसके अलावा स्कूल बंद होने से भी दुनिया भर में महिलाओं के नौकरी छोड़ने का डर है।

साथ ही मिलिंडा ने सरकारों से निवेदन किया है कि वे कोरोना महामारी के कारण आई गिरावट को देखते हुए जब नीतियां बनाएं तो इस लैंगिक असमानता के मुद्दे को भी देखें।

बच्चों के जीवन-रक्षक टीकाकरण में भारी गिरावट आयी: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण तकरीबन 30 सालों में पहली बार बच्चों के जीवन-रक्षक टीकाकरण में भारी गिरावट आई है।

2020 के शुरुआती चार महीनों में संयुक्त राष्ट्र ने पाया है कि बच्चों के डिप्थीरिया, टेटनस और काली खांसी के टीकाकरण में खासी गिरावट दर्ज की गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉक्टर टेड्रोस एदनहोम गेब्रेयासिस का कहना है कि इन बीमारियों से बच्चों की मौतें कोविड-19 के मुक़ाबले होने वाली मौतों से अधिक हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि ये वैक्सीन सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास में सबसे ताक़तवर हथियार हैं।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन की जांच सच पर पर्दा डालने जैसी है: पॉम्पियो

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने एक बार फिर चीन पर हमला बोलते हुए कहा है कि कोरोना वायरस महामारी पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की जांच पूरी तरह से सच पर पर्दा डालने के लिए है।

पिछले साल वुहान में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला मिला था जिसके बाद से पॉम्पियो और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन पर सूचना छिपाने का आरोप लगाते रहे हैं।

पोम्पियो ने कहा, इसके कारण 1 लाख अमरीकियों की जानें गई हैं और विश्व की अर्थव्यवस्था पर खरबों डॉलरों का बोझ पड़ा है।

पोम्पियो ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, ''अब विश्व स्वास्थ्य संगठन को आने और जांच करने के लिए अनुमति दी जा रही है। इसको लेकर मैं पूरी तरह विश्वस्त हूं कि यह पूरी तरह से सच पर पर्दा डालने वाला है।''

दरअसल पोम्पियो डब्ल्यूएचओ की उस स्वतंत्र जांच पर ध्यान दिलाना चाह रहे थे जो इस महीने की शुरुआत में शुरू हुई है। चीन में जांच को लेकर विश्व स्तर पर मांग उठती रही है।

हालांकि यह जांच पैनल कोरोना वायरस के पैदा होने की जांच नहीं करेगा जिसकी पोम्पियो और दूसरे विश्व के नेता मांग करते रहे हैं।

इस महामारी के दौरान ट्रंप प्रशासन लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि महामारी की शुरुआत में डब्ल्यूएचओ चीन के साथ इस मुद्दे को छिपाने में लगा रहा।

कोरोना वायरस: तेज़ी से फैलते संक्रमण के बीच ट्रंप और फाउची में मतभेद

बीते कुछ समय से, ट्रंप प्रशासन और अमरीकी सरकार के उच्चस्थ जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ एंथनी फाउची के बीच कोरोना वायरस संकट को संभाले जाने पर दूरियां बढ़ती हुई दिख रही हैं।

इन दिनों अमरीका में प्रतिदिन कोरोना वायरस संक्रमण के लगभग साठ हज़ार नए मामले सामने आ रहे हैं।

बीते सोमवार डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर इस महामारी को कमतर ठहराने की कोशिश करते हुए सामने आ रहे संक्रमण के ज़्यादा मामलों के लिए ज़्यादा टेस्टिंग को ज़िम्मेदार ठहराया।

फाउची ने स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक विशेषज्ञ से एक ऑनलाइन मीटिंग के दौरान कहा, ''हमने अपने देश में स्थानीय जन स्वास्थ्य ढांचे को बर्बाद होने दिया है।''

फाउची ने चेतावनी दी कि कुछ प्रांतों ने कोरोना वायरस संक्रमण की रफ़्तार नियंत्रित और कम होने से पहले ही लॉकडाउन खोलने की जल्दबाजी दिखाई।

इन प्रांतों ने ऐसा करते हुए पूर्ण लॉकडाउन हटाने के बाद किसी तरह की सावधानी नहीं बरती। और ऐसे प्रांतों का अमरीका में प्रतिदिन दर्ज किए जा रहे नए मामलों में बढ़त में योगदान है।

वहीं, ट्रंप के सहयोगियों ने न्यूज़ आउटलेट्स को बताया है कि फाउची ने अपने आकलन में कई तरह की ग़लतियां की हैं।

कोरोना अभी भी दुश्मन नंबर एक, लेकिन नहीं समझ रहे हैं कुछ देश और वहां के नागरिक: डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ के प्रमुख डॉ. टेड्रोस एडहनॉम गिब्रयेसॉस ने भी कहा है कि अगर कुछ देशों की सरकारों ने निर्णयात्मक क़दम नहीं उठाए तो कोरोना वायरस की स्थिति लगातार बिगड़ती जाएगी।

गिब्रयेसॉस ने कहा, ''जिन देशों में कोरोना का संक्रमण रोकने के प्रावधानों को ठीक से लागू नहीं किया गया या कम किया गया है, वहां ख़तरनाक ढंग से मामले बढ़ रहे हैं। अगर मैं स्पष्टता से कहूं तो कई देश ग़लत दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।''

''कोरोना वायरस अभी भी लोगों के लिए दुश्मन नंबर एक बना हुआ है, लेकिन कई देशों की सरकारों और वहां के नागरिक इस ख़तरे को लेकर सावधानी नहीं बरत रहे हैं।''

गिब्रयेसॉस ने यह भी कहा कि कुछ नेताओं ने कोरोना वायरस के ख़तरे को कम करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के काम को कमतर बताने की कोशिश की है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने किसी नेता का नाम नहीं लिया लेकिन कुछ लोग मान रहे हैं कि उनका इशारा अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उन नेताओं की ओर था जो डब्ल्यूएचओ की आलोचना कर चुके हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने कहा, ''अगर बेसिक बातों पर ध्यान नहीं दिया गया तो महामारी लगातार बढ़ेगी और स्थिति ख़राब से ख़राब होती जाएगी।''