विदेश

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की हालत स्थिर: डाउनिंग स्ट्रीट

ब्रिटेन में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 5,000 के पार हो गया।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की हालत स्थिर: डाउनिंग स्ट्रीट

डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की हालत स्थिर है। वो अब आईसीयू में हैं। हालत बिगड़ने के बाद उनको डाउनिंग स्ट्रीट से आईसीयू में शिफ्ट किया गया।

दुनिया भर में अब तक 13 लाख 50 हज़ार लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए, क़रीब 74 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है।

भारत में मरने वालों की संख्या 124 हुई, कोरोना वायरस से 4789 लोग संक्रमित

भारत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मंगलवार शाम तक भारत में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 124 हो गई है। कोरोना से संक्रमित लोगों की तादाद भी लगातार बढ़ती जा रही है। अब ये बढ़कर 4789 हो गई है।

कई विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस से संक्रमण और मौत का दायरा और बड़ा है क्योंकि कई देशों में इसकी रिपोर्टिंग ही नहीं हो रही।

285,327 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद ठीक हुए हैं। हालांकि अब तक इसकी कोई दवा नहीं बन पाई है।

ब्रिटेन में पिछले 24 घंटों में 758 लोगों की मौत

ब्रिटेन के स्वास्थ विभाग एनएचएस के अनुसार पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के 758 मरीज़ों की मौत हुई है। इस तरह ब्रिटेन में अब तक मरने वालों की संख्या 5655 हो गई है। सोमवार को इसी समय मरने वालों की संख्या 4897 थी।

जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे मंगलवार शाम देश के कई हिस्सों में आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।

राजधानी टोक्यो समेत देश के कई हिस्सों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़े हैं। आपातकाल लागू होने से सरकार लॉक डाउन को ज़्यादा प्रभावी तरीक़े से लागू कर पाएगी।

जापान में अब तक संक्रमण के 3906 मामले सामने आ चुके हैं और 92 लोगों की मौत हो चुकी है।

ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने लोगों से घर में रहने की अपील की

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने लोगों से ईस्टर के दौरान घर में रहने की अपील की है। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में स्थिरता आती दिख रही है।  यहां अब तक 5844 लोग संक्रमित पाए गए हैं और 44 लोगों की मौत हो चुकी है।

स्पेन में 24 घंटों में 637 मौतें

स्पेन में कोरोना वायरस के संक्रमण से हो रही मौतों में लगातार चौथी बार बड़ी गिरावट दिखी है। बीते 24 घंटों में 637 लोगों की मौत हुई है जो दो सप्ताह में सबसे कम है।

यहां अब तक कुल 136,675 लोग संक्रमित पाए गए हैं और 13341 की मौत हो चुकी है। अब तक 40,437 लोग ठीक हो चुके हैं।

यूरोप में कोरोना वायरस की चपेट में 40 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत

यूरोप के कई देश कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में हैं। इसका सबसे ज़्यादा असर इटली में देखने को मिला है। बीते 24 घंटे में इटली में 766 लोगों की मौत हुई है। इसके साथ ही देश में कोरोना वायरस से अब तक 14,681 लोगों की मौत हो चुकी है। बीते 24 घंटे के दौरान इटली में 2,399 नए संक्रमण का पता चला है, नए संक्रमण के मामलों में बीते कई दिनों की तुलना में कमी दर्ज की गई है।

वहीं स्पेन में भी मरने वालों की संख्या 10 हज़ार को पार कर चुकी है।  लगातार दूसरे दिन स्पेन में 900 से ज़्यादा मौतें हुई हैं। यहां इस महामारी से अब तक 10,935 लोगों की मौत हुई है।

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक यूरोप में कोरोना वायरस की चपेट में 40 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है। 

स्पेन में शुक्रवार को 932 मौतें

कोरोना वायरस के संक्रमण से स्पेन में शुक्रवार को 932 लोगों की मौत हुई। इसके साथ ही स्पेन में मरने वालों की कुल संख्या 10 हज़ार 935 पहुंच गई है। इटली के बाद स्पेन दुनिया का दूसरा देश है जहां कोरोना वायरस से सबसे ज़्यादा मौतें हुई हैं।

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 53 हज़ार हो गई है और संक्रमित लोगों की कुल संख्य 10 लाख पार कर गई है।

अमरीका में पिछले 24 घंटे में 1200 लोगों की मौत हुई है। इसके साथ ही अमरीका में मरने वालों की कुल संख्या छह हज़ार से ज़्यादा हो गई है।  अमरीका में कोरोना से संक्रमित लोगों की कुल संख्या दो लाख 17 हज़ार हो गई है।

ब्रिटेन में पिछले 24 घंटे में 684 मौतें

ब्रिटेन में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के संक्रमण से 684 लोगों की जान गई। इसके साथ ही ब्रिटेन में मरने वालों की कुल संख्या 3,605 हो गई है।

कोरोना: लोगों की आवाजाही पर गूगल की रिपोर्ट

गूगल ने करोड़ों मोबाइल फ़ोन यूज़र्स के लोकेशन डेटा से सम्बन्धित कुछ ऐसी रिपोर्ट्स जारी की हैं जो इटली और जापान सरकार के उन दावों से अलग हैं जिनमें कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए लोगों की आवाजाही पर काबू की बात कही गई थी।

गूगल की इन रिपोर्टों में फ़ोन यूज़र्स की लोकेशन और मूवमेंट ट्रैक की गई है जिससे पता चलता है कि पिछले पांच हफ़्तों में वो कब बस स्टेशन गए और कब किराने की दुकान गए।

हालांकि रिपोर्ट से ये भी पता चलता है कि इटली के दुकानों, पार्कों और मॉल्स में पिछले पांच हफ़्तों में लोगों की आवाजाही 90 फ़ीसदी तक कम हुई है। वहीं, जापान में लोगों के बाहर निकलने में सिर्फ़ 20 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

गूगल का ये भी कहना है कि रिसर्च के दौरान फ़ोन यूज़र्स की निजता का पूरा ख़याल रखा गया है और इसका मक़सद स्वास्थ्यकर्मियों और प्रशासन की ये समझने में मदद करना है कि आवाजाही पर रोक लगाना प्रभावी है या नहीं।

इराक़: कोरोना से जुड़ी रिपोर्ट की वजह से रॉयटर्स पर बैन

इराक़ी प्रशासन ने अपने यहां समाचार एजेंसी रॉयटर्स पर तीन महीनों के लिए प्रतिबन्ध लगा दिया है। प्रशासन का कहना है कि इराक़ में कोरोना संक्रमण से सम्बन्धित रॉयटर्स की कवरेज ग़ैर-पेशेवराना थी।

समाचार एजेंसी ने गुरुवार को ख़बर दी थी कि इराक़ में कोरोना संक्रमण के मामले सरकारी दावों से कई गुना ज़्यादा हैं।

इराक़ सरकार का कहना है कि उसके यहां कोरोना वायरस के कुल 772 मामले हैं। वहीं, रॉयटर्स के मुताबिक़ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इराक़ सरकार के बताए गए आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है।

रॉयटर्स ने अपनी ख़बर में तीन अज्ञात डॉक्टरों का हवाला दिया था और कहा था कि ये टेस्टिंग की प्रक्रिया में करीब से शामिल थे।

इराक़ के कम्युनिकेशन्स ऐंड मीडिया कमीशन ने भी रॉयटर्स पर अज्ञात सूत्रों पर भरोसा करने का आरोप लगाया है। इसने रॉयटर्स को माफ़ीनामा प्रकाशित करने का आदेश दिया है और साथ ही इस पर 21 हज़ार डॉलर का जुर्माना भी लगाया है।

दुनिया में सबसे अधिक इटली में मौतें

विश्व भर में कोरोना संक्रमण के मामले 10 लाख से अधिक हुए। मौतों का आंकड़ा 53,000 के पार पहुंचा।

भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या पहुंची 2301. अब तक 56 लोगों की मौत।

अमरीका में दो लाख से अधिक लोग वायरस से संक्रमित, 5,900 से अधिक की मौत। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा देश के लिए आ रहा है मुश्किल वक्त।

दुनिया में सबसे अधिक इटली में मौतें। कोरोना के कारण अब तक 13,915 लोगों की जान गई।

विश्व युद्ध के बाद पहली बार कोरोना के चलते विंबलडन हुआ रद्द।

ग्लासगो में होने वाला जलवायु सम्मेलन भी टला।

यूरोप की ताज़ा स्थिति क्या है?

जर्मनीः मरने वालों की संख्या 1,000 के पार। संक्रमण के मामलों की संख्या चीन से ज़्यादा।

स्पेनः गुरुवार को एक दिन में सर्वाधिक 950 लोगों की मौत। इटली के बाद स्पेन में कोरोना से सबसे ज़्यादा लोगों की मौत।

फ़्रांसः अगले सप्ताह ईस्टर के मौक़े पर लोगों की आवाजाही रोकने के लिए प्रबंध किए जा रहे हैं। 18 मार्च से अब तक 400 से ज़्यादा रोगियों को हाई-स्पीड ट्रेनों से इलाज के लिए ले जाया गया है।

ग्रीसः एक प्रवासी कैंप और एक जहाज़ से पहुँचा ग्रीस में कोरोना वायरस। जहाज़ पर सवार 380 यात्रियों में से 119 पोज़िटिव पाए गए। एथेंस के पास एक प्रवासी कैंप में रहने वाले 24 प्रवासी भी संक्रमित।

कोरोना वायरस से कैसे लड़ेगा अमरीका?

कोरोना से कैसे लड़ेगा: अमरीका में मेडिकल उपकरण और दवाएं तकरीबन ख़त्म।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है कि अमरीका में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए ज़रूरी मेडिकल उपकरण और दवाएं अब तकरीबन ख़त्म हो गई हैं।

अमरीका के लगभग सभी प्रांतों के गवर्नरों ने सुरक्षा उपकरण, टेस्टिंग किट्स और ज़्यादा वेंटिलेटर्स देने की अपील की है।

लेकिन वाशिंगटन पोस्ट अख़बार ने सरकारी अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि अमरीका में ऐसे हालात बन गए हैं जिसमें उपलब्ध सुरक्षा उपकरणों, टेस्टिंग किट्स और वेंटिलेटर्स के लिए ट्रंप प्रशासन और राज्यों और शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। इन चीज़ों के लिए अभूतपूर्व मांग की वजह से यहाँ मुनाफाखोरी शुरू हो गई है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक ओर जहां मेडिकल उपकरण ज़रूरतमंद मुल्कों को मदद के तौर पर दे दी तो दूसरी तरफ़ ठीक उसी दौरान वे चीन और रूस से इन चीज़ों की खरीदारी के लिए कोशिश कर रहे थे।

इस बीच अमरीका में छह महीने के एक बच्चे की कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से मौत हो गई है।

माना जा रहा है कि ये बच्चा कोरोना वायरस से मरने वाला सबसे कम उम्र का बच्चा है। अमरीका में अभी तक कोरोना वायरस से पांच हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है।

कोरोना वायरस: स्पेन में 10 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत

कोरोना वायरस की वजह से स्पेन में 10 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि कुछ दिनों में कोरोना संक्रमण के मामले 10 लाख हो जाएंगे और मौतों का आंकड़ा 50,000 तक पहुंच जाएगा।

भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1965 पहुंची। अब तक 50 लोगों की मौत हो चुकी है।

अमरीका में दो लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित है। अमेरिका में 5000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि देश के लिए मुश्किल वक्त आ रहा है।

इटली में कोरोना के कारण अब तक 13,155 लोगों की जान गई।

विश्व युद्ध के बाद पहली बार कोरोना के चलते विंबलडन रद्द हुआ।

ग्लासगो में होने वाला जलवायु सम्मेलन भी टला।

चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा से भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान होगा?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार को म्यांमार की राजधानी नेपिडॉ पहुंचे। 19 साल बाद यह पहला मौक़ा है जब कोई चीनी राष्ट्रपति म्यांमार के दौरे पर है।

वैसे तो जिनपिंग दोनों देशों के राजनयिक रिश्तों की 70वीं वर्षगांठ पर म्यांमार आए हैं मगर इस यात्रा के दौरान वह म्यांमार की शीर्ष नेता आंग सान सू ची के साथ मिलकर चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारे के तहत कई परियोजनाओं को शुरू करेंगे।

शी जिनपिंग के दौरे से पहले चीन के उप विदेश मंत्री लाउ शाहुई ने पत्रकारों से कहा था कि राष्ट्रपति की इस यात्रा का मक़सद दोनों देशों के रिश्तों को मज़बूत करना और बेल्ट एंड रोड अभियान के तहत आपसी सहयोग बढ़ाना है।

उन्होंने कहा था कि इस दौरे का तीसरा लक्ष्य है 'चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारे को मूर्त रूप देना।' चीन म्यांमार आर्थिक गलियारा शी जिनपिंग के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड अभियान का ही अंग है।

चीन के इसी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को भारत शक की निगाहों से देखता रहा है क्योंकि उसका मानना है कि इस अभियान के तहत चीन दक्षिण एशियाई देशों में अपना प्रभाव और पहुंच बढ़ाने की कोशिशों में जुटा है।  

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फ़ॉर ईस्ट एशियन स्टडीज़ में एसोसिएट प्रोफ़ेसर रितु अग्रवाल कहती हैं कि चीन और म्यांमार के बीच अच्छे संबंधों की शुरुआत काफ़ी पहले हो गई थी।

वह बताती हैं, "चीन और म्यांमार काफ़ी क़रीबी कारोबारी सहयोगी रहे हैं।  चीन के युन्नात प्रांत में म्यामांर की सीमा के साथ 2010 से लेकर अब तक कई सारे बॉर्डर इकनॉमिक ज़ोन बनाए गए हैं और आर्थिक आधार पर म्यांमार को चीन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जैसे कि यहां से ऑयल और गैस पाइपलाइन बिछाने की भी बात थी।''

रितु अग्रवाल बताती हैं कि युन्नान की प्रांतीय सरकार ने अपने स्तर पर म्यामांर के साथ अच्छे रिश्ते बनाने की कोशिश की थी। यह सिलसिला 80 के दशक से शुरू हुआ था। हालांकि, बीच में कई उतार-चढ़ाव आए। मगर अब बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के माध्यम से इस कोशिश को जारी रखा जा रहा है।

बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विदेश नीति का अहम हिस्सा माना जाता है। इसे सिल्क रोड इकनॉमिक बेल्ट और 21वीं सदी का समुद्री सिल्क रोड भी कहा जाता है। जिनपिंग ने 2013 में इसे शुरू किया था।

बेल्ट रोड इनिशिएटिव के तहत चीन का इरादा कम से कम 70 देशों के माध्यम से सड़कों, रेल की पटरियों और समुद्री जहाज़ों के रास्तों का जाल सा बिछाकर चीन को मध्य एशिया, मध्य पूर्व और रूस होते हुए यूरोप से जोड़ने का है। चीन यह सब ट्रेड और निवेश के माध्यम से करना चाहता है।

चीन के इस बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में भौगोलिक रूप से म्यांमार काफ़ी अहम है। म्यांमार ऐसी जगह पर स्थित है जो दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच है। यह चारों ओर से ज़मीन से घिरे चीन के युन्नान प्रांत और हिंद महासागर के बीच पड़ता है इसलिए चीन-म्यांमार इकनॉमिक कॉरिडोर की चीन के लिए बहुत अहमियत है।

रितु अग्रवाल बताती हैं, "चीन काफ़ी सालों से कोशिश कर रहा है कि कैसे हिंद महासागर तक पहुंचे। शी जिनपिंग की ताज़ा यात्रा चीन की समुद्री शक्ति को बढ़ाने की कोशिश में है क्योंकि चीन का समुद्री शक्ति बढ़ाना शी जिनपिंग की प्राथमिकताओं में है। इसलिए वह पोर्ट बनाने, रेलवे लाइन बिछाने की कोशिश कर रहे हैं। वह इनके माध्यम से कनेक्टिविटी चाहते हैं।''

अप्रैल 2019 में हुए चीन के दूसरे बेल्ट एंड रोड फ़ोरम (बीआरएफ) में म्यांमार की नेता आंग सान सू ची ने 'चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारे' (सीएमईसी) के तहत सहयोग बढ़ाने के लिए चीन के साथ तीन एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे।

चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा अंग्रेज़ी के Y अक्षर के आकार का एक कॉरिडोर है। इसके तहत चीन विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से हिंद महासागर तक पहुंचकर म्यांमार के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाना चाहता है।

2019 से 2030 तक चलने वाले इस आर्थिक सहयोग के तहत दोनों देशों की सरकारों में इन्फ्रास्ट्रक्चर, उत्पादन, कृषि, परिवहन, वित्त, मानव संसाधन विकास, शोध, तकनीक और दूरसंचार जैसे कई क्षेत्रों में कई सारी परियोजनाओं को लेकर सहयोग करने पर सहमति बनी थी।

इसके तहत चीन के युन्नान प्रांत की राजधानी कुनमिंग से म्यांमार के दो मुख्य आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए लगभग 1700 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जाना है।

कुनमिंग से आगे बढ़ने वाले इस प्रॉजेक्ट को पहले मध्य म्यांमार के मंडालय से हाई स्पीड ट्रेन से जोड़ा जाएगा। फिर यहां से इसे पूर्व में यंगॉन और पश्चिम में क्यॉकप्यू स्पेशल इकनॉमिक ज़ोन से जोड़ा जाएगा। चीन क्यॉकप्यू में पोर्ट भी बनाएगा।

इस अभियान के तहत म्यांमार की सरकार ने शान और कचिन राज्यों में तीन बॉर्डर इकनॉमिक कोऑपरेशन ज़ोन बनाने पर सहमति जताई थी।

चीन का कहना है कि सीएमईसी से म्यांमार के दक्षिण और पश्चिमी क्षेत्रों में सीधे चीनी सामान पहुंच सकेगा और चीन के उद्योग भी सस्ते श्रम की तलाश में ख़ुद को यहां शिफ़्ट कर सकते हैं। यह दावा किया जाता रहा है कि म्यांमार इस परियोजना के कारण चीन, दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया के बीच कारोबार का केंद्र बन जाएगा।

लेकिन चीन और म्यांमार के बीच युन्नान के साथ लगती सीमा पर कई तरह की पहलों के चलते बने संबंध पूरी तरह आर्थिक संबंध ही हैं, ऐसा भी नहीं है। रितु अग्रवाल कहती हैं कि इस तरह के आर्थिक अभियानों के पीछे कहीं न कहीं सुरक्षा का एजेंडा रहता है।

संभवत: भारत की चिंताएं भी इसी से जुड़ी हैं।

भारत के लिहाज़ से देखें तो चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारे को कुछ विश्लेषक चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की तरह मान रहे हैं जो चीन के पश्चिमी शिनज़ियांग प्रांत को कराची और फिर अरब सागर में ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। वैसे ही चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा चीन को बंगाल की खाड़ी की ओर से समंदर से जोड़ता है।

इसके अलावा, पिछले साल शी जिनपिंग ने नेपाल यात्रा के दौरान चीन-नेपाल आर्थिक गलियारे की शुरुआत की थी। इसके तहत चीन का इरादा तिब्बत को नेपाल से जोड़ना है। चीन नेपाल कॉरिडोर, चीन-पाकिस्तान और चीन-म्यांमार गलियारों के बीच में पड़ता है।

इस तरह तीनों गलियारे का चीन को कारोबारी स्तर पर लाभ होगा मगर भारत की चिंताएं सुरक्षा को लेकर भी रहती हैं। रितु अग्रवाल कहती हैं कि भारत को पहले से ही इस बात की चिंता है कि कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ सुरक्षा को लेकर भी ख़तरा बढ़ सकता है।

वह कहती हैं, "चीन जो भी कनेक्टिविटी करता है, उसमें वह इकनॉमिक कॉरिडोर की बात करता है मगर उसके पीछे भी दूसरों की अर्थव्यवस्था को कंट्रोल करने जैसी रणनीतियां रहती हैं। यह चीन का तरीक़ा है। भारत के लिए चिंता की बात यह है कि दक्षिण एशिया में उसके पड़ोसी अगर चीन के नियंत्रण में आ गए तो उसे क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभरने में दिक्कत होगी।''

चीन ने भारत को भी अपने इस अभियान में शामिल करने की कोशिशें की हैं मगर भारत ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालांकि, चीन मामलों के जानकार अतुल भारद्वाज मानते हैं कि चीन की पहुंच म्यांमार कॉरिडोर के माध्यम से हिंद महासागर तक हो जाने से भारत को कोई चिंता नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने बीबीसी से कहा, "भारत हमेशा से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाए जाने के समर्थन में रहा है इसलिए उसे किस बात का डर होगा? बल्कि उसे तो अपने आसपास शुरू होने वाली नई परियोजनाओं में आर्थिक अवसरों की तलाश करनी चाहिए। ऐसा नहीं है कि चीन उन हिस्सों को जोड़ रहा है जो अछूते रहे हैं। वह सिर्फ़ कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए वैकल्पिक रास्ते मुहैया करवा रहा है।''

भारत भी अपनी विदेश नीति में 'लुक ईस्ट पॉलिसी' की बात करता रहा है। इसके तहत यह कहा जाता रहा कि भारत के संबंध म्यांमार के साथ अच्छे होने चाहिए। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार पूर्वोत्तर राज्यों के जरिये 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी का ज़िक्र कर चुके हैं।

अगर भारत दक्षिण पूर्वी देशों के साथ आर्थिक और कारोबारी सहयोग बढ़ाना चाहता है तो उसका रास्ता म्यांमार से होकर ही जाता है। मगर भारत की लुक ईस्ट या एक्ट ईस्ट के नारों वाली नीतियों के बावजूद म्यांमार में चीन का प्रभाव लगातार बढ़ा है।

रितु अग्रवाल कहती हैं कि भारत का म्यांमार के साथ ऐतिहासिक रूप से सांस्कृतिक रिश्ता रहा है, इसलिए चीन के प्रयासों को लेकर चिंता करने की जगह अपनी ओर से गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए।

वह कहती हैं, "ऐतिहासिक रूप से भारत के उत्तर पूर्व और कलकत्ता के म्यांमार से अच्छे रिश्ते थे, दोनों देशों में सीधे व्यापारिक संबंध थे और यातायात भी होता था। यह देखा जाना चाहिए कि कैसे इसे फिर से जीवंत किया जा सकता है।''

"भारत अपनी ओर से पहल करके म्यांमार के साथ कोई मिशन शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम उठा सकता है। भारत दक्षिण एशिया में शुरू से बड़ी शक्ति रहा है। ऐसे में चिंतित होने की जगह उसे पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक रिश्ते मज़बूत करने की रणनीति बनानी चाहिए।  उसे देखना होगा कि क्या पहल करके वह चीन के प्रभाव को सीमित कर सकता है।''

भारत पर तीन दिशाओं से बेल्ट एंड रोड अभियान के तहत चीन की पहुंच होने को लेकर रितु अग्रवाल कहती हैं, "भारत की चिंताएं तो हैं मगर अहम बात यह है कि उसकी आगे की रणनीति क्या होगी? कैसे पड़ोसियों के साथ ट्रेड डील की जा सकती है, कैसे व्यापारिक रिश्ते मज़बूत किए जा सकते हैं। कोई प्रभावी नीति होनी चाहिए।''

शी जिनपिंग पर अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को सफल बनाने का दबाव बना हुआ है। बहुत सारे देशों ने उनकी पहल को लेकर इच्छा तो जताई थी मगर पायलट प्रॉजेक्ट्स के नतीजे चीन की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे हैं। म्यांमार में भी विरोध के स्वर उठते रहे हैं।

ऐसे में विश्लेषकों का मानना है कि भारत को अपनी ओर से सकारात्मक पहल करके पड़ोसियों को अपनी ओर खींचने की कोशिश करनी चाहिए और इस संबंध में उसे कोई स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि भारत की मोदी सरकार अपनी आर्थिक मंदी के कारण चीन को रोकने में सफल होगी?

भारत में मुसलमानों और उनके पवित्र स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए: ओआईसी

मोदी सरकार के नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर भारत में ही केवल विरोध नहीं हो रहा है बल्कि इस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ भी आ रही हैं।

रविवार को इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने भी इस पर बयान जारी किया है। ओआईसी के महासचिव युसूफ़ बिन अहमद बिन अब्दुल रहमान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत के हालिया घटनाक्रम पर उनकी नज़र बनी हुई है।

ओआईसी के 60 मुस्लिम बहुल देश सदस्य है। अपने बयान में ओआईसी ने कहा है, ''भारत के हालिया घटनाक्रम को हम क़रीब से देख रहे हैं। कई चीज़ें ऐसी हुई हैं, जिनसे अल्पसंख्यक प्रभावित हुए हैं। नागरिकता के अधिकार और बाबरी मस्जिद केस को लेकर हमारी चिंताएं हैं। हम फिर से इस बात को दोहराते हैं कि भारत में मुसलमानों और उनके पवित्र स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।''

ओआईसी ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और दायित्वों के अनुसार बिना किसी भेदभाव के अल्पसंख्यकों को सुरक्षा मिलनी चाहिए।  ओआईसी ने कहा कि अगर इन सिद्धांतों और दायित्वों की उपेक्षा हुई तो पूरे इलाक़े की सुरक्षा और स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

ओआईसी पर सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों का दबदबा है।  इस्लामिक देशों के बीच इस संगठन की प्रांसगिकता पर भी सवाल उठते रहे हैं। 19-20 दिसंबर को मलेशिया में कुआलालंपुर समिट हुआ और इसमें इस्लामिक दुनिया की आवाज़ को नया मंच देने की भी बात हुई है।  

सऊदी अरब को डर है कि कहीं ओआईसी के समानांतर कोई दूसरा इस्लामिक संगठन खड़ा न हो जाए और उसका प्रभुत्व कम हो जाए।  इसीलिए सऊदी अरब और उसके सहयोगी देश संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन इस बैठक में नहीं गए थे।

कुआलालंपुर समिट में पाकिस्तान को भी जाना था लेकिन सऊदी अरब ने जाने से रोक दिया था। ऐसा तब है जब कुआलालंपुर समिट की बात तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन, पाकिस्तानी पीएम इमरान और मलेशिया के पीएम महातिर मोहम्मद के बीच तय हुई थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने मलेशिया के पीएम का इस समिट में आने का आमंत्रण स्वीकार भी स्वीकार कर लिया था लेकिन वो सऊदी के दबाव में नहीं गए।

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन इस समिट में पहुंचे थे और उन्होंने कहा था कि पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान सऊदी अरब के दबाव में मलेशिया नहीं आ पाए थे।

तुर्की के अख़बार डेली सबाह ने राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन का बयान छापा था जिसमें उन्होंने कहा था, ''सऊदी अरब ने पाकिस्तान को आर्थिक प्रतिबंध की धमकी दी थी इसलिए इमरान ख़ान मलेशिया नहीं आए।''

कई विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी अरब इस बात से डरा हुआ है कि ओआईसी के समानांतर कोई और संगठन न खड़ा हो जाए।

इस समिट में सऊदी के सारे प्रतिद्वंद्वी आए थे। ईरान, क़तर और तुर्की इस समिट में आए थे और तीनों देशों के संबंध सऊदी अरब से अच्छे नहीं हैं।  पाकिस्तान का सऊदी से अच्छा संबंध है लेकिन मलेशिया ने कश्मीर मसले पर पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया था। सऊदी अरब कश्मीर के मसले पर चुप ही रहता है।

सऊदी अरब की न्यूज़ एजेंसी एसपीए के अनुसार सऊदी के किंग सलमान ने मलेशियाई पीएम महातिर मोहम्मद को फ़ोन कर कहा था कि इस्लामिक दुनिया से जुड़ी समस्याओं पर बात ओआईसी के मंच पर ही होनी चाहिए।

डेली सबाह के अनुसार राष्ट्रपति अर्दोआन ने तुर्की के स्थानीय मीडिया से कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब सऊदी ने किसी देश पर कोई काम नहीं करने के लिए दबाव डाला हो।

अर्दोआन ने पाकिस्तान के नहीं आने पर कहा, ''दुर्भाग्य से हम देख रहे हैं कि सऊदी ने पाकिस्तान पर दबाव बनाया। सऊदी में 25 लाख से ज़्यादा पाकिस्तानी काम करते हैं। अगर पाकिस्तान नहीं मानता तो वहां काम करने वाले पाकिस्तानियों को वापस भेज दिया जाता और ये काम बांग्लादेश के लोगों को दे दिया जाता। इसके साथ ही सऊदी के शाही शासन ने आर्थिक मदद वापस लेने की धमकी दी थी।''

पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भी ट्वीट कर नागरिकता क़ानून को मुसलमानों के ख़िलाफ़ बताया है। उन्होंने ये भी कहा है कि भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ बढ़ रहे विरोध-प्रदर्शन के कारण भारत की सेना पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कोई ऑपरेशन कर सकती है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत ऐसा हिंदू राष्ट्रवाद को लामबंद करने के लिए युद्ध उन्माद को भड़काना चाहता है। इमरान ख़ान ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान के पास मुँहतोड़ जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।

पाकिस्तानी पीएम ने ट्वीट कर कहा है, ''भारत ने जम्मू-कश्मीर में अब भी सबको क़ैद करके रखा है। अगर यहां से पाबंदियां हटती हैं तो क़त्लेआम की आशंका है। अगर भारत में इस तरह के विरोध-प्रदर्शन बढ़ते हैं तो पाकिस्तान पर भारत का ख़तरा और बढ़ेगा। भारतीय आर्मी प्रमुख का बयान हमारी इन चिंताओं को और आश्वस्त करता है।''

इमरान ख़ान ने अपने अगले ट्वीट में कहा है, ''पिछले पाँच सालों से मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत हिंदू राष्ट्र की तरफ़ बढ़ रहा है। इस प्रक्रिया में हिन्दू श्रेष्ठता और फासीवादी विचारधारा के ज़रिए आगे बढ़ा जा रहा है।  अब नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ वो भारतीय सड़क पर हैं जो चाहते हैं कि भारत की विविधता बनी रहे। सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन जन आंदोलन बन गया है।''