आयरलैंड में गर्भपात पर प्रतिबंध हटाने पर एक जनमत संग्रह में 66.4 फीसदी लोगों ने इसका समर्थन किया। खबरों के मुताबिक, महिला की जान को खतरा होने की स्थिति में ही अभी गर्भपात की इजाजत है और बलात्कार के मामलों में यह नहीं है। दरअसल भारतीय डॉक्टर सविता हलप्पनवार को कानून का हवाला देकर साल 2012 में आयरिश डॉक्टरों ने गर्भपात करने से इनकार कर दिया, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई थी। इससे सबक लेते हुए करीब छह साल बाद शनिवार को आयरलैंड के लोगों ने उस कानून को हटाने के लिए संविधान में ही बदलाव करने को मंजूरी दे दी।
कैथोलिक ईसाई धर्म से प्रभावित संविधान के अंतर्गत गर्भपात से संबंधी कानून में बदलाव के लिए शनिवार को जनमत संग्रह हुआ, जिसमें 40 निर्वाचन क्षेत्रों के 63.9 फीसदी लोगों ने मतदान किया। कुल पड़े मतों में औसतन 66.4 फीसदी ने गर्भपात को प्रतिबंधित करने संबंधी कानून को बदलने के पक्ष में मतदान किया, जबकि 33.6 फीसदी लोगों ने इसके खिलाफ में मतदान किया।
डबलिन कैसल में भारतीय समयानुसार रात करीब 10: 52 बजे आधिकारिक रूप से नतीजों का ऐलान किया गया। गर्भपात की मंजूरी संबंधी जनादेश की घोषणा होते ही लोगों ने सविता-सविता के नारे लगाए।
भारतीय मूल के प्रधानमंत्री लियो वरदकर ने जनमत संग्रह के नतीजों की घोषणा की। वरदकर ने कहा कि लोगों ने अपनी राय जाहिर कर दी। उन्होंने कहा है कि एक आधुनिक देश के लिए एक आधुनिक संविधान की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आयरलैंड के मतदाता, महिलाओं के सही निर्णय लेने और अपने स्वास्थ्य के संबंध में सही फैसला करने के लिए उनका सम्मान और उन पर यकीन करते हैं।
उन्होंने कहा कि हमने जो देखा, वह आयरलैंड में पिछले 20 सालों से हो रही शांत क्रांति की पराकाष्ठा है। आठवें संशोधन को निरस्त करने के पक्ष में पड़े मत कानून में बदलाव के लिए आयरलैंड की संसद का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
गौरतलब है कि आयरलैंड में भारतीय दंतचिकित्सक सविता हलप्पनवार को 2012 में गर्भपात की इजाजत नहीं मिलने पर एक अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। उनकी मौत ने आयरलैंड में गर्भपात पर चर्चा छेड़ दी। सविता के पिता आनंदप्पा यालगी ने कर्नाटक स्थित अपने घर से कहा कि उन्हें आशा है कि आयरलैंड के लोग उनकी बेटी को याद रखेंगे।
कानून में बदलाव करने के लिए पहली बाधा पार करने के बाद आयरिश सरकार अब प्रस्ताव को कैबिनेट में मंजूरी के लिए रखेगी। आयरलैंड के स्वास्थ्य मंत्री सिमोन हैरिस ने कहा, मंगलवार को एक प्रस्ताव को कानूनी मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।
ऑफेंश अगेंस्ट द पर्सन एक्ट 1861 के मुताबिक गर्भपात पर रोक है। 1983 में हुए आठवें संशोधन के मुताबिक गर्भपात कराने पर सजा का प्रावधान किया गया। सविता की मौत और यूरोपीय मानवाधिकार समझौते के तहत भ्रूण के विकृत होने पर गर्भपात की इजाजत दी गई। नए कानून में महिला गर्भपात करा सकेगी।
भारतीय दंत चिकित्सक सविता हलप्पनवार को उनके पति प्रवीण ने 21 अक्तूबर 2012 को पेट में दर्द होने की शिकायत पर डबलिन के अस्पताल में भर्ती कराया। उस समय उनके गर्भ में 17 हफ्ते का भ्रूण पल रहा था और डॉक्टरों ने गर्भपात की सलाह दी। आयरिश कानून का भी हवाला दिया, जिसके मुताबिक कुछ निर्धारित परिस्थितियों में गर्भपात संभव है। सविता की हालत बिगड़ी और 28 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई।
कनाडा के ओंटारियो में बॉम्बे भेल नाम के एक इंडियन रेस्टोरेंट में धमाका हुआ है। धमाके में 15 लोग घायल हुए हैं जिनमें से तीन की हालत नाजुक है। धमाका के बारे में सूचना मिलते ही पुलिस और बम निरोधक दस्ता टीम तुरंत मौके पर पहुंच चुकी हैं। साथ ही, घायलों के इलाज के लिए डॉक्टर्स की टीम भी वहां पहुंच चुकी है। राहत बचाव कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि धमाका रात करीब 10:30 बजे (कनाडा के समय के अनुसार) हुआ, जब सभी लोग डिनर कर रहे थे। धमाके के बाद से आसपास के सभी रेस्टोरेंट और इलाके की घेराबंदी कर दी गई है।
कनाडा की लोकल मीडिया रिपोर्ट की मानें तो धमाके से पहले दो संदिग्ध लोगों को वहां जाते हुए देखा गया था, जिसके बाद वहां धमाका हुआ। पुलिस ने धमाके से पहले जो सी सी टी वी फुटेज देखें है। उसमें दोनों संदिग्ध रेस्टोरेंट के अंदर जाते हुए नजर आ रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक, ब्लास्ट के तुरंत बाद ही संदिग्ध लोग घटनास्थल से निकल गए। दोनों ने हुड वाली जैकेट पहन रखी है जिससे उनका चेहरा नजर नहीं आ रहा है। इनमें से एक की लंबाई करीब 5 फीट 10 इंच है, जिसकी उम्र 20 साल के आसपास लग रही है।
धमाका किसने किया? क्या इसमें किसी संगठन का हाथ था? इसके बारे में अभी कोई सूचना नहीं मिली है।
उत्तर कोरिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोनों देशों के बीच होने वाली शिखर वार्ता को रद्द करने के निर्णय को बेहद अफसोसजनक बताया है। उत्तर कोरिया ने कहा है कि वह अब भी वाशिंगटन के साथ वार्ता का इच्छुक है। समाचार एजेंसी के सी एन ए ने उत्तर कोरिया के फर्स्ट वाइस फॉरन मिनिस्टर किम के-ग्वान के हवाले से कहा, ''बैठक रद्द करने की आकास्मिक घोषणा हमारे लिए अप्रत्याशित है और हम इसे बेहद अफसोसजनक मानते हैं।''
ग्वान ने कहा, ''हम एक बार फिर अमेरिका को कहना चाहते हैं कि हम किसी भी समय किसी भी रूप में आमने-सामने बैठ समस्याओं का समाधान करने को तैयार हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग-उन के साथ होने वाली शिखर वार्ता को गुरुवार को रद्द कर दिया और इसके लिए उत्तर कोरियाई शासन की खुली शत्रुता को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही प्योंगयांग को कोई भी मूर्खतापूर्ण एवं लापरवाही भरी कार्रवाई करने के खिलाफ आगाह भी किया।
ट्रंप ने किम को पत्र लिख सूचना दी कि सिंगापुर में 12 जून को होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में वह हिस्सा नहीं लेंगे। इसके बाद उत्तर कोरियाई फर्स्ट वाइस फॉरन मिनिस्टर किम के-ग्वान ने आज अपने बयान में कहा कि उत्तर कोरियाई नेता शिखर वार्ता की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने कहा, ''हमारे अध्यक्ष (किम जोंग-उन) ने भी कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक से एक नई शुरुआत होगी और इसकी तैयारियों के लिए वह मेहनत भी कर रहे थे।''
ट्रंप के बैठक रद्द करने की घोषणा करने से कुछ देर पहले ही उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु परीक्षण ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त करने की जानकारी दी थी।
उत्तर कोरिया ने आज कहा कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास के कारण उसके पास दक्षिण कोरिया के साथ होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता स्थगित करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है क्योंकि यह दोनों कोरियाई देशों के बेहतर हुए संबंधों के खिलाफ है।
दक्षिण कोरिया के एकता मंत्रालय ने कल कहा कि वार्ता का लक्ष्य उन योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना था जो 27 अप्रैल के कोरियाई शिखर सम्मेलन के बाद निकलकर सामने आयी थी जिसमें कोरिया युद्ध का औपचारिक अंत करना और 'पूर्ण परमाणु निशस्त्रीकरण' करना शामिल था।
उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल एजेंसी ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास को उकसावे का कार्रवाई बताते हुए कहा कि उत्तर कोरिया के पास बातचीत स्थगित करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा है कि उत्तर कोरिया का दोनों कोरियाई देशों के बीच मंत्रिमंडलीय स्तर की वार्ता को स्थगित करने का निर्णय खेदजनक है और यह अप्रैल में दोनों देशों के बीच किये गये वायदे के खिलाफ है।
मंत्रालय के प्रवक्ता बैक ते-ह्युन ने बयान में कहा, ''अमेरिका-दक्षिण कोरिया के बीच वार्षिक संयुक्त हवाई युद्धाभ्यास का हवाला देकर उत्तर कोरिया का दोनों कोरियाई देशों के बीच होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता को एकतरफा स्थगित करने का निर्णय खेदजनक है। यह पनमुनजोम के शिखर सम्मेलन की घोषणा के खिलाफ है।'' ह्युन ने उत्तर कोरिया से बातचीत के मार्ग पर दोबारा लौटने की अपील की। इस आशय का बयान उत्तर कोरिया के पास भेजा जाएगा।
गाजा सीमा पर फलस्तीनियों के प्रदर्शन पर इजरायल की गोलीबारी के खिलाफ तुर्की ने इजरायली राजदूत को देश छोड़ने का आदेश दिया है। इस बीच, इस गोलीबारी में मरने वाले फलस्तीनियों की संख्या मंगलवार को बढ़कर 61 हो गई।
बता दें कि गाजा सीमा पर इजरायली गोलीबारी में 61 फलस्तीनी मारे गए। मरने वालों में 08 से 16 साल की उम्र के बच्चे भी शामिल हैं। इस गोलीबारी में 2,700 के करीब फलस्तीनी घायल हो गए। गाजा सीमा पर प्रदर्शन करने 40,000 फलस्तीनी जुटे थे। ये लोग यरुशलम में अमेरिकी दूतावास खोलने के विरोध में थे। वे छह हफ्तों से हमास द्वारा आहूत विरोध प्रदर्शन में शामिल थे।
तुर्की विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को अंकारा में इजरायली राजदूत ईटन नाहे को तलब किया और देश छोड़ने को कहा। इससे पहले उसने अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम ले जाने के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार को अमेरिका व इजरायल से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया था।
यरुशलम में अमेरिकी दूतावास खोलने के खिलाफ गाजा सीमा पर हो रहे प्रदर्शन पर इजरायली बलों ने सोमवार को भीषण गोलीबारी की थी, जिसमें 52 फलस्तीनी मारे गए थे। राष्ट्रपति रेसेप तईप एदोर्गन ने इन मौतों को नरसंहार बताया। उन्होंने फलस्तीनियों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने लिए तीन दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया और 18 मई को इंस्ताबुल में एकजुटता रैली आयोजित करने की बात कही। उन्होंने दोहराया कि इजरायल एक आतंकवादी राष्ट्र है।
तुर्की ने गाजा हिंसा के मुद्दे पर इसी सप्ताह इस्लामिक सहयोग संगठन (ओ आई सी) की आपात बैठक बुलाई है। तुर्की के सरकारी प्रवक्ता बेकीर बोजडाग ने कहा कि अंकारा शुक्रवार को इस मामले पर आपात बैठक करना चाहता है।
बेल्जियम ने गाजा हिंसा को लेकर मंगलवार को इजरायल के राजदूत सिमोना फ्रैंकेल को तलब किया। उनसे बेल्जियाई विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी बुधवार को बात करेंगे।
दक्षिण अफ्रीका ने सोमवार को ही ऐलान किया कि वह गाजा हिंसा के विरोध में इजरायल से अपने राजदूत को वापस बुला रहा है। दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध और सहयोग विभाग ने गाजा में फलस्तीनी प्रदर्शनकारियों पर इजरायली बलों की कार्रवाई की सख्त शब्दों में निंदा की।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद गाजा हिंसा का संज्ञान लेते हुए इस मुद्दे पर आपात बैठक बुलाने जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन के स्थायी पर्यवेक्षक रियाद मंसूर ने मंगलवार को कहा कि यह बैठक अगले 24 घंटों के भीतर होने की संभावना है।
अमेरिका ने इजरायल-गाजा सीमा पर हुई हिंसा की घटना की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाले संयुक्त राष्ट्र के एक बयान के अनुमोदन को रोक दिया है। बयान के मसौदे में कहा गया कि सुरक्षा परिषद को असैन्य फलस्तीनियों की मौत का दुख है, जो शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने के अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे थे। इसके मुताबिक, सुरक्षा परिषद जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इन कार्रवाइयों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग करती है।
अमेरिका ने गाजा हिंसा के लिए फलस्तीनी संगठन हमास को जिम्मेदार ठहराया है। व्हाइट हाउस के उप प्रेस सचिव राज शाह ने मंगलवार को कहा, हम गाजा में हिंसा जारी रहने की खबरों से अवगत हैं। इन दुखद मौतों के लिए हमास जिम्मेदार है। हमास ने जानबूझकर इस प्रतिक्रिया को भड़काया है। उन्होंने कहा कि इजरायल को अपने बचाव का अधिकार है।
यरुशलम में अमेरीका का नया दूतावास खोले जाने को लेकर गाजा पट्टी में प्रदर्शन कर रहे फिलिस्तीनियों पर इजरायली सुरक्षाबलों ने गोली चला दी, जिसमें 37 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। फिलिस्तीन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है।
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, सोमवार को हुए हिंसक प्रदर्शन में 500 से ज्यादा लोगों को चोटें आई हैं। इजरायली सेना ने आरोप लगाया है कि गाजा में सत्तासीन हमास ने प्रदर्शनकारियों को बॉर्डर क्रॉस करने के लिए उकसाया, जिसके बाद उन्हें रोकने के लिए गोलीबारी करनी पड़ी।
इस साल मार्च में शुरू हुए इस प्रदर्शन में मरने वालों की संख्या 67 हो गई है। वहीं, इजरायल ने कहा है कि वो किसी भी कीमत पर अपने बॉर्डर की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की घटना का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना किए जाने पर इजरायल ने कहा कि उसे अपनी सीमाओं की सुरक्षा करने का पूरा अधिकार है और वो किसी भी कीमत पर यह सुनिश्चित करेगा कि उसकी सीमा में कोई प्रदर्शनकारी घुसने ना पाए।
मंत्रालय के अनुसार, मारे गये लोगों में 14 वर्षीय एक बच्चा भी है। विरोध के लिए हजारों लोग सीमा पर पहुंचे थे। इस बीच कुछ लोग पथराव करते हुए बाड़ के समीप पहुंच गये और वे उसे पार करने की कोशिश करने लगे। उस पर इस्राइली सुरक्षाकर्मियों ने मोर्चा संभाल रखा था। इस्राइली सेना ने कहा, ''करीब 1000 हिंसक उपद्रवी गाजा पट्टी सीमा के समीप जगह-जगह जमा हो गये थे और सुरक्षा बाड़ से करीब आधे किलोमीटर दूर हजारों अन्य जुटे थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने छह दिसंबर को विवादास्पद शहर यरुशलम को इस्राइल की राजधानी के रुप में मान्यता दी थी। अमेरिका के उपविदेश मंत्री जॉन सुल्लिवान दूतावास का उद्घाटन करने के सिलसिले में आये अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में ट्रंप की बेटी इवांका, उसके पति जारेड कुशनर, वित्त मंत्री स्टीवन न्यूचिन हैं। कल इस्राइली प्रधानमंत्री नेतान्याहू ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया था।
पाकिस्तान के लाहौर में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के निलंबित नेता मणिशंकर अय्यर ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के ताजा जिन्ना विवाद के जरिये पड़ोसी मुल्क से कथित तौर पर भारत की मोदी सरकार पर निशाना साधा है।
मणिशंकर अय्यर के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर देखा जा रहा है। वीडियो में अय्यर पाकिस्तान के कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना की भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से तुलना करते हुए देखे रहे हैं। वह जिन्ना की तारीफ करते हुए देखे जा रहे हैं। पाकिस्तान के गुलाब देवी अस्पताल का जिक्र करते हुए मणिशंकर अय्यर कहते हैं कि अगर यहां से महात्मा गांधी की तस्वीर हटाई जाए तो उनकी (भारतीयों) की प्रतिक्रिया क्या होगी?
मणिशंकर अय्यर ने कहा कि उन्होंने जिन्ना को कायदे आजम कहा तो भारत के कई एंकर उन पर सवाल खड़े करने लगे कि कोई भारतीय पाकिस्तान में जाकर ऐसा कैसे बोल सकता है? उन्होंने कहा कि वह ऐसे कई पाकिस्तानियों को जानते हैं जो मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी कहकर पुकारते हैं, तो इससे क्या वे सभी पाकिस्तानी देशद्रोही हो गए?
मणिशंकर अय्यर ने देश के बंटवारे के लिए वी डी सावरकर पर इसकी पृष्ठभूमि तैयार करने का आरोप लगाते हुए जिन्ना को क्लीनचिट दी और इसी के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा स्थिति वी डी सावरकर के द्वारा 1923 में खोजे गए 'हिंदुत्व' शब्द की देन हैं जो किसी भी धार्मिक किताब में नहीं मिलता है। उन्होंने सावरकर को इस शब्द को जरिए दो देशों के सिद्धांत का समर्थक और भारत की वर्तमान सरकार का गुरु बताया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में मणिशंकर अय्यर ने 2014 के आम चुनाव में मोदी की जीत के पीछ की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि पिछले आम चुनाव में देश की 70 फीसदी जनता ने मोदी के खिलाफ वोट किया था, लेकिन उनके बंटे होने के कारण मोदी जीत गए। उन्होंने उम्मीद जताई कि वही 70 फीसदी जनता एकजुट होकर भारत को अराजकता के माहौल से मुक्ति दिलाएगी।
मणिशंकर अय्यर के ताजा बयान से कांग्रेस ने पल्ला झाड़ा है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अय्यर पार्टी से निलंबित चल रहे हैं, इसलिए उनकी बातों को तवज्जो नहीं देना चाहिए। कहा जा रहा है कि अय्यर का बयान ऐसे समय आया है, जब कर्नाटक में चुनाव बेहद करीब है। गुजरात चुनाव से भी ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विवादित बयान देकर अय्यर पार्टी के कोपभाजन का शिकार बने थे। राजनीतिक पंडितों ने माना था कि अय्यर के बयान से कांग्रेस को नुकसान हुआ था।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ को इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को संसद की सदस्यता के लिए अयोग्य ठहरा दिया है। ख्वाजा आसिफ के पास संयुक्त अरब अमीरात का वर्क परमिट होने के कारण उन्हें अयोग्य ठहराया गया है।
बता दें कि बीते साल ख्वाजा आसिफ के खिलाफ एक याचिका अदालत में दाखिल की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के बाद इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर आज फैसला सुनाया गया है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट के 3 जजों की पीठ ने यह फैसला सुनाया।
याचिका में कहा गया था कि ख्वाजा आसिफ ने 2013 के आम चुनावों के दौरान अपने नामांकन पत्र में गलत जानकारी दी थी। याचिका के अनुसार, केन्द्रीय मंत्री होने के बावजूद ख्वाजा आसिफ संयुक्त अरब अमीरात की आई एम ई सी एल कंपनी के पूर्णकालिक कर्मचारी भी रहे और वहां से तन्ख्वाह पाते रहे। ऐसा कर उन्होंने संविधान की शपथ की अवहेलना की है। पाकिस्तान के अखबार डॉन ने यह जानकारी दी है।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता उस्मान डार पूर्व क्रिकेटर और राजनेता इमरान खान के नेतृत्व वाली तहरीक-ए-इंसाफ के सदस्य हैं और साल 2013 में आम चुनावों में ख्वाजा आसिफ से हार चुके हैं।
ख्वाजा आसिफ को इस्लामाबाद हाईकोर्ट द्वारा अयोग्य ठहरा दिए जाने से पाकिस्तान की सत्तारुढ़ पार्टी पी एम एल (एन) को दोहरा झटका लगा है। दरअसल, पार्टी पहले ही अपने पूर्व अध्यक्ष नवाज शरीफ के कोर्ट द्वारा पी एम पद के लिए अयोग्य ठहराए जाने से सकते में है।
बता दें कि पनामा पेपर लीक मामले में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को पी एम पद के लिए अयोग्य ठहरा दिया था, जिसके बाद नवाज को पी एम की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने नवाज के पी एम एल (एन) चीफ रहने के लिए भी अयोग्य ठहरा दिया है।
नवाज शरीफ पर आरोप था कि उन्होंने बोर्ड ऑफ कैपिटल एफ जी ई के चेयरमैन होने के नाते मिलने वाली अपनी सैलरी डिक्लेयर नहीं की थी। फिलहाल, नवाज शरीफ के बाद अब ख्वाजा आसिफ को भी कोर्ट द्वारा संसद सदस्यता से अयोग्य ठहराए जाने पर उनकी पार्टी पी एम एल (एन) को बड़ा झटका लगा है और आगामी आम चुनावों में पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों यूरोप के दौरे पर हैं। कठुआ गैंगरेप और हत्या को लेकर मोदी का ब्रिटेन में विरोध किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी मोबाइल वैन पर बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर मोदी का विरोध कर रहे हैं। विरोधियों ने मोदी का विरोध करने के कारण भी बताए हैं। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें मुसलमानों की हत्या करने वालों का संरक्षक, बलात्कारियों को बचाने वाला और दलितों की हत्या करने वालों का समर्थक करार दिया है।
मोदी के विरोध में लंदन के व्हाइटहॉल, लंदन आई, पार्लियामेंट स्क्वायर और वेस्टमिंस्टर एबी के समीप होर्डिंग लगाए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने कठुआ गैंगरेप के दोषियों को सजा दिलाने के बारे में सवाल पूछे हैं। प्रदर्शनकारियों ने लिखा, 'मोदी नॉट वेलकम'।
बता दें कि इससे पहले ब्रिटेन के कुछ छात्र संगठनों ने नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। छात्रों ने पूछा था कि भारत में तीन नाबालिग लड़कियों के खिलाफ हुए घृणित अपराध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेजी से उचित न्याय सुनिश्चित करने के लिए कब कार्रवाई करेंगे? छात्रों ने पूछा, ''आपने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चियों को न्याय मिलेगा। हम इसका स्वागत करते हैं। मगर प्रधानमंत्री से सवाल है कि बच्चियों को इंसाफ कब और कैसे मिलेगा?''
कठुआ और उन्नाव गैंगरेप मामले में प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, उन्होंने एक कार्यक्रम में आरोपियों को न बख्शने की बात कही थी।
कठुआ में एक आठ साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। बाद में उसकी हत्या भी कर दी गई थी। आरोपियों के समर्थन में कुछ संगठनों ने प्रदर्शन किया है। वकीलों के एक गुट ने पुलिस को इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने से रोकने की भी कोशिश की थी।
उन्नाव दुष्कर्म कांड में भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर संलिप्तता के आरोप लगे हैं। पीड़िता द्वारा सार्वजनिक तौर पर विधायक पर आरोप लगाने के बावजूद पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया था। मामले के कोर्ट में पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोपी विधायक के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। साथ ही छानबीन के लिए एस आई टी भी गठित की थी। हालांकि, विवाद बढ़ने पर मामले को सी बी आई के हवाले कर दिया गया।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (18 अप्रैल) को ब्रिटेन की पी एम थेरेसा मे से मिले। भारत और ब्रिटिश पी एम की यह मुलाकात लंदन के 10 डाउनिंग स्ट्रीट स्थित प्रधानमंत्री के आवास पर हुई।
इस अवसर पर मोदी ने कहा, ''यह मेरे लिए खुशी की बात है कि मुझे लोगों से संवाद करने का मौका संत बसवेश्वर की जयंती के मौके पर मिला है।''
बता दें कि यह संत 12वीं सदी के समाज सुधारक थे।
मोदी ने कहा, ''मुझे यकीन है कि आज की मुलाकात के बाद भारत-ब्रिटेन के संबंधों को नई ऊर्जा मिलेगी। मुझे खुशी है कि ब्रिटेन अंतर्राष्ट्रीय सोलर अलाइंस का हिस्सा होगा। मुझे लगता है कि इससे न केवल जलवायु परिवर्तन की समस्या से लड़ने में मदद मिलेगी। बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी।''
बता दें कि मोदी राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक (चोगम) में द्विपक्षीय मुलाकातों और बहुपक्षीय चर्चा में हिस्सा लेने के लिए ब्रिटेन पहुंचे हैं। ब्रिटेन के विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन ने यहां हीथ्रो हवाई अड्डे पर मोदी की अगवानी की थी। मोदी लंदन में 'भारत की बात, सबके साथ' कार्यक्रम में तकरीबन दो हजार लोगों के सामने भाषण देंगे।
याद दिला दें कि मोदी फिलहाल अपने चार दिवसीय दौरे पर हैं। लंदन में वह बकिंगघम पैलेस में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से भी मिलेंगे।
नरेंद्र मोदी ने प्रिंस चार्ल्स से मुलाकात की। दोनों 'विज्ञान और नवीनता के 50 साल' विषय पर लगी प्रदर्शनी देखा।
नरेंद्र मोदी से मुलाकात के मसले पर ब्रिटेन की पी एम थेरेसा मे बोलीं, ''मुझे उम्मीद है कि हम मिलकर भारत और ब्रिटेन के लोगों के लिए अच्छा काम करेंगे।''
स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन ने कहा कि स्वीडन, भारत के साथ अपनी साझेदारी की बहुत कद्र करता है। उन्होंने नोर्डिक देश में योगदान के लिए भारतीय समुदाय की प्रशंसा की। मोदी ने अपने भाषण में कहा कि दुनिया में भारत का कद बढ़ा है।









