विदेश

तीन नोबेल विजेताओं ने सू की को रोहिंग्या संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया

तीन नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं ने म्यांमार की नेता आंग सान सू की और देश की सेना पर हिंसा में उनकी कथित भूमिका को लेकर नरसंहार का आरोप लगाया है। इस हिंसा की वजह से हजारों रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार छोड़कर बांग्लादेश जाना पड़ा। काफी विशाल क्षेत्र में फैले शरणार्थियों के शिविरों का दौरा करने के लिए बांग्लादेश की यात्रा पर आईं इन तीनों हस्तियों ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनकी साथी नोबेल शांति पुरस्कार विजेता सू की अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं।

उनमें से एक यमन की तवाक्कोल करमान ने सू की से कहा कि या तो वे संभल जाएं अन्यथा मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार रहें। उनकी दो साथियों - उत्तरी आयरलैंड के मैरीड मैगुईर और ईरान की शीरीन एबादी ने इस स्थिति के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कठघर में खड़ा करने के लिए काम करने का वादा किया।

पिछले साल अगस्त से करीब 700,000 रोहिंग्या म्यांमार से भागकर बांग्लादेश चले गए हैं। सुरक्षा बलों की एक चौकी पर उग्रवादियों के हमले के बाद म्यांमार की सेना ने अगस्त में सैन्य कार्रवाई शुरू की थी।

दूसरी तरफ, लाउडस्पीकर पर म्यांमार के सैनिकों द्वारा धमकी दिए जाने के बाद निर्जन क्षेत्र में रह रहे सैकड़ों रोहिंग्या अपने-अपने शिविर छोड़कर बांग्लादेश सीमा के अंदर चले गए। यह बात बुधवार को समुदाय के नेताओं ने कही। इन दोनों देशों के बीच इस निर्जन क्षेत्र में करीब 6,000 रोहिंग्या रह रहे हैं जो अगस्त में सैन्य कार्रवाई होने पर म्यांमार छोड़कर यहां आ गए थे।

ये लोग पिछले साल म्यांमार में हिंसा भड़कने के बाद वहां से शुरू में भागने वालों में शामिल थे। उन्होंने इस निर्जन क्षेत्र में अपने शिविर बना लिए थे। उसके कुछ हफ्ते बाद बांग्लादेश उन्हें अपने यहां आने देने पर राजी हो गया। हाल के हफ्तों में उन पर म्यांमार के सैनिकों का दबाव पड़ा। इन सैनिकों ने उनके शिविर से चंद मीटर दूर लगी तार की बाड़ पर गश्त बढ़ा दी और लाउडस्पीकर पर रोहिंग्याओं को वहां से चले जाने का आदेश दिया। समुदाय के नेता दिल मोहम्मद ने कहा कि आदेश से शिविर में दहशत फैल गई।

सऊदी अरब के सुल्तान ने सैन्य प्रमुखों को बर्खास्त किया

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने चीफ ऑफ स्टाफ सहित शीर्ष सैन्य कमांडरों को बर्खास्त कर दिया है। बर्खास्तगी का यह ऐलान ऐसे समय में आया है, जब सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन सेना यमन में विद्रोहियों से लड़ रही है और इस जंग को तीन साल पूरे होने जा रहे हैं।

इस दौरान कुछ राजनीतिक नियुक्तियां भी की गईं, जिसमें तमादार बिंत यूसुफ अल रामाह को श्रम और सामाजिक विकास विभाग की उपमंत्री नियुक्त किया गया है।

सऊदी अरब की आधिकारिक एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी (एस पी ए) में प्रकाशित खबर के अनुसार, सऊदी सुल्तान सलमान ने थलसेना और वायुसेना के प्रमुखों को भी पद से बर्खास्त किया है।

इनकी कमान अब युवा नेतृत्व के हाथ में दी गई है। बीबीसी के मुताबिक, देश के इस उथल-पुथल के पीछे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का हाथ बताया जा रहा है।

एस पी ए के मुताबिक, जनरल अब्दुल रहमान बिन सालेह अल बुनयान को चीफ ऑफ स्टाफ पद से बर्खास्त किया गया है। प्रिंस तुर्की बिन तलाल को दक्षिण पश्चिम असीर प्रांत का नया उपगवर्नर नियुक्त किया गया है। वह अरबपति प्रिंस अलवालीद बिन तलाल के भाई हैं।

भारत को लगता है कि वह अमेरिका पर एहसान कर रहा है : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

भारत ने हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल पर भारी आयात शुल्क लगा दिया है जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी नाराज हैं। यही वजह है कि एक महीना में दूसरी बार ट्रंप ने अमेरिकी मोटरसाइकिलों पर लगे भारी आयात शुल्क का मुद्दा उठाया है।

एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि ''भारत ने आयात शुल्क में 50 प्रतिशत की कटौती करने की बात कही है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका को 'कुछ नहीं' मिल रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका निष्पक्ष और वाजिब डील चाहता है।'' ट्रंप ने कहा कि ''भारत को लगता है कि वह आयात शुल्क घटाकर अमेरिका पर एहसान कर रहा है, लेकिन अमेरिका को इससे कुछ भी हासिल नहीं हो रहा है।''

भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हाल ही में हुई एक बातचीत का जिक्र करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ''प्राइम मिनिस्टर (नरेन्द्र मोदी), जिन्हें मैं बहुत अच्छा इंसान मानता हूं, ने एक दिन मुझे फोन करके कहा कि उन्होंने आयात शुल्क को घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया है और अब उसे 50 प्रतिशत करने जा रहे हैं। मैने कहा 'ठीक है' और मैं क्या कहता ? क्या मुझे रोमांचित होना चाहिए था ? लेकिन यह ठीक नहीं है। इसी तरह की हमारी कई डील्स हैं।'' व्हाइट हाउस में गवर्नरों के साथ हुई एक बैठक के दौरान ट्रंप ने ये बातें कही।

अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ट्रंप ने कहा कि ''भारतीय कंपनियां अमेरिका के साथ काफी बिजनेस करती हैं। उनकी मोटरसाइकिलें भी हमारे देश में आती हैं, लेकिन हमें उनसे कुछ नहीं मिलता। वहीं हमारी मोटरसाइकिलों पर भारत 100 प्रतिशत, जिसे अब घटाकर 50 प्रतिशत किया जा रहा है, टैक्स लगाता है।''

बता दें कि इससे पहले भी ट्रंप भारत द्वारा अमेरिकी मोटरसाइकिलों पर लगाए गए भारी आयात शुल्क को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। ट्रंप ने भारत द्वारा लगाए गए इम्पोर्ट टैक्स को 'पक्षपातपूर्ण' बताया था और धमकी दी थी कि अब अमेरिका भी भारतीय मोटरसाइकिलों के आयात पर भारी शुल्क वसूलेगा।

सीरियाई सरकार के ईस्टर्न घौटा पर हमले में 5 बच्चों समेत 29 की मौत

सीरिया की राजधानी में विद्रोहियों के कब्जे वाले ईस्टर्न घौटा उपनगर पर शनिवार को किए गए ताजा हमले में पांच बच्चों समेत कम से कम 29 लोगों की मौत हो गई। पिछले सप्ताह सीरियाई सरकार के वफादार बलों द्वारा यहां की गई भीषण बमबारी में 500 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो गई थी।

ब्रिटेन की युद्ध निगरानी संस्था सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स (एस ओ एच आर) के मुताबिक, डौमा शहर में सुबह से जारी हवाई हमले और तोपों से दागे गए गोलों से 12 लोगों की मौत हो गई और अल-शिफोनिया कस्बे में चार अन्य लोगों की मौत हो गई।

एस ओ एच आर ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया है कि हाल ही में हुए हमलों के लिए सीरियाई और रूसी बल जिम्मेदार है या नहीं। शनिवार के हमले में कम से कम 12 लोग घायल भी हुए हैं। रात भर अर्बिन और हरास्ता के साथ ही सकबा और हामौरियाह में भीषण हमले जारी रहे। एस ओ एच आर ने कहा है कि इन इलाकों में बमबारी के कारण निजी संपत्तियां खाक हो गईं।

ऑब्जर्वेटरी के हवाला से समाचार एजेंसी एफे ने कहा है कि शनिवार को हुई मौतों के साथ ही ईस्टर्न घौटा में 18 फरवरी से लेकर अब तक मृतकों की संख्या 505 पहुंच गई है, जिसमें 123 बच्चे और 65 महिलाएं शामिल हैं। हमलों में 2,453 लोग घायल भी हुए हैं, जिसमें से सैकड़ों की हालत गंभीर बताई जा रही है। जबकि दर्जनों अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर ने इस सप्ताह के प्रारंभ में सीरियाई सरकार से बमबारी रोकने का आह्वान किया था।

अफगानिस्तान में आर्मी बेस पर आतंकी हमला, सीरियल धमाकों और हमलों में 23 लोगों की मौत

अफगानिस्तान में सीरियल धमाकों और हमलों में कम से कम 23 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। ये जानकारी संबंधित अधिकारियों ने शनिवार (24 फरवरी, 2018) को दी है। अधिकारियों के मुताबिक, सबसे बड़े हमले में तालिबानी आतंकवादी बीती रात पश्चिमी फराह प्रांत में सेना के ठिकाने में घुस गए और 18 सैनिकों को मार गिराया।

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता दौलत वजीर ने कहा, ''बीती रात आतंकवादियों के एक बड़े समूह ने फराह के बाला बुलुक जिले में आर्मी बेस पर हमला किया। दुर्भाग्य से हमने 18 सैनिकों को खो दिया और दो सैनिक घायल हुए हैं। हमने इलाके में अतिरिक्त बलों को भेजा है।''

तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी ली है। उप प्रांतीय गवर्नर युनूस रसूली ने कहा कि अधिकारियों ने हमले की जांच के लिए टीम भेजी है। एक अन्य घटना में एक आत्मघाती हमलावर ने काबुल के राजनयिक इलाके में शनिवार सुबह धमाका कर खुद को उड़ा दिया। गृह मंत्रालय के उप प्रवक्ता नसरत रहीमी ने कहा कि इसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए।

मौत के आंकड़े में संशोधन करते हुए उन्होंने कहा, ''सुबह करीब साढ़े आठ बजे, पैदल आए एक आत्मघाती हमलावर की पहचान चेक प्वाइंट पर की गई। उसने अच्छे कपड़े और गले में टाई भी पहन रखी थी। उसने विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया और तीन लोगों को मार गिराया, जबकि पांच अन्य घायल हो गए।''

नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर एक रक्षा सूत्र ने कहा कि यह हमला अफगानी खुफिया एजेंसी नेशनल डायरेक्ट्रेट ऑफ सिक्योरिटी (एन डी एस) के पास हुआ। एन डी एस परिसर नाटो मुख्यालय और अमेरिकी दूतावास के पास स्थित है।

एक चश्मदीद ने तोलो न्यूज टीवी को बताया, ''मैं पास से गुजर रहा था, जब मैंने तेज धमाके की आवाज सुनी। मेरी कार के शीशे टूट गए। मैंने अपने पास सड़क पर कई घायलों को देखा।''

अधिकारियों ने कहा कि अशांत दक्षिणी हेलमंड प्रांत में शनिवार को हुए दो अन्य हमलों में एक आत्मघाती कार बम हमलावरों ने धमाका कर दो सैनिकों को मार दिया, जबकि इसमें एक दर्जन अन्य घायल हो गए।

पहले मामले में आतंकवादियों ने नाद अली जिले में सेना के ठिकाने पर हमले के लिये हमवी गाड़ी का इस्तेमाल किया। प्रांतीय प्रवक्ता उमर जावाक ने कहा कि सतर्क सैनिकों ने इसकी पहचान कर ली और एक रॉकेट के जरिए इसे बर्बाद कर दिया। हालांकि इस हमले में दो सैनिकों की मौत हो गई तथा सात अन्य घायल हो गए। दूसरा आत्मघाती कार बम हमला प्रांतीय राजधानी लश्कर गाह में हुआ जिसमें सात लोग घायल हो गए।

भारत से सटी सीमा पर चीन ने पीएलए को क्यूटीएस-11 से किया लैस

चीन ने भविष्य की सूचना प्रौद्योगिकी आधारित लड़ाई की तैयारी के लिए भारत से लगी सीमा पर तैनात पी एल ए की एक शाखा को अमेरिकी शैली वाली समेकित व्यक्तिगत सैनिक लड़ाकू प्रणाली से लैस किया है। मीडिया की खबरों में ऐसा कहा गया है। हाल के वर्षों में चीन की सेना युद्ध के मैदान में आई टी, डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलीजेस ऐप्लिकेशंस के इस्तेमाल के लिए 'सूचना प्रौद्योगिकी आधारित युद्ध' शब्द का इस्तेमाल करने लगी है।

चाइना सेंट्रल टेलीविजन (सी सी टी वी) से संबद्ध शाखा वीहुटांग ने खबर दी है कि वेस्टर्न थियेटर कमान में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के स्पेशल आॅपरेशन फोर्सेज के स्काई वुल्फ कमांडो को उनके प्रशिक्षण में क्यू टी एस-11 सिस्टम से लैस किया गया है। वेस्टर्न थियेटर कमान भारत से लगती 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की जिम्मेदारी संभालती है।

चीनी विशेषज्ञों के अनुसार क्यू टी एस-11 अमेरिकी सैनिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली की तरह है। चीनी सैन्य विशेषज्ञ सोंग जोंगपिंग ने सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स से कहा कि दुनिया में सबसे मजबूत व्यक्तिगत आग्नेयास्त्र बताए जाने वाला क्यू टी एस-11 न केवल आग्नेयास्त्र पर काबू पा लेता है बल्कि यह खोज एवं संवाद सुविधाओं से लैस पूर्ण डिजिटलीकृत समेकित व्यक्तिगत सैनिक लड़ाकू प्रणाली है। राइफल और 20 मिलीमीटर ग्रेनेड लांचर वाली यह प्रणाली लक्ष्य के अंदर के सैन्यकर्मियों को नष्ट करने में सक्षम है।

सोंग ने कहा कि अमेरिका और चीन की यह प्रणाली एक जैसी है, लेकिन तुलनीय नहीं है। स्पेशल आॅपरेशन फोर्स इस प्रणाली को परखने वाली पहली सैन्य इकाई है। बाद में उसे अन्य इकाइयों में ले जाया जाएगा। भारत के साथ लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा पर इस नई प्रणाली की तैनाती की सरकारी मीडिया की घोषणा से कुछ दिन पहले वहां वायुरक्षा पांत समुन्नत करने की खबर आई थी। इसे यहां सैन्य पर्यवेक्षक पी एल ए द्वारा मनोवैज्ञानिक युद्ध अख्तियार करने के रूप में देखते हैं।

ग्लोबल टाइम्स ने पहले एक विशेषज्ञ के हवाले से खबर दी थी कि एल ए सी पर जे-10 और जे-11 जैसे लड़ाकू विमानों की तैनाती का लक्ष्य भारत द्वारा नए लड़ाकू विमान की खरीद से उत्पन्न खतरे से निबटने पर लक्षित है। यह संभवत: भारत के राफेल विमानों की खरीद के संदर्भ में था। चीनी सेना ने 73 दिनों तक चले डोकलाम गतिरोध के दौरान मीडिया में जोर-शोर से अपना प्रचार अभियान चलाया था।

म्यांमार: पहले सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों के घर जलाए, अब बुलडोजर चलाकर गांवों के नामोनिशान तक मिटा रही है

रोहिंग्या मुसलमानों के घरों को जलाने के बाद अब म्यांमार में उनके नामोमिशान को खत्म किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, म्यांमार के रखाइन स्टेट में मौजूद रोहिंग्या मुसलमानों के दर्जनों गांवों पर बुलडोजर चलाकर उनके घरों को तोड़ा जा रहा है।

कोलोराडो बेस्ड डिजिटल ग्लोब द्वारा शुक्रवार को सेटेलाइट द्वारा ली गई कुछ तस्वीरें जारी की गई हैं, जिनमें इन गांवों का वर्तमान परिदृश्य साफ दिखाई दे रहा है। तस्वीरों में दिख रहा है कि बहुत से इलाकों में कुछ ही महीनों के अंदर काफी बदलाव आ गया है। वह इलाके जहां लोगों के घर बने हुए थे, वह अब सपाट दिख रहे हैं। पिछले साल अगस्त में इन गांवों में हिंसा काफी बढ़ गई थी, जिसके कारण हजारों रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश भागने को मजबूर हुए थे।

वहीं म्यांमार की सरकार कुछ भी गलत किए जाने की बात को लगातार खारिज कर रही है। सरकार का कहना है कि रखाइन स्टेट में आतंकवादी समूहों को जवाब देने के लिए ऑपरेशन किया जा रहा है।

द इंडिपेंडेंट के मुताबिक, एक महिला ने बताया कि जब वह बांग्लादेश से अपने घर मायिन ह्लट वापस लौटी थी, तब उसे वहां की हालत देखकर काफी हैरानी हुई थी। उसने बताया कि बहुत से घरों को पिछले साल जला दिया गया और सब कुछ खत्म कर दिया गया। यहां तक कि वहां पेड़ों को भी नष्ट कर दिया गया। महिला ने एपी को बताया, ''उन्होंने बुलडोजर से सब कुछ नष्ट कर दिया। मैंने बड़ी मुश्किल से अपना घर पहचाना। सभी घर अब खत्म हो चुके हैं। सारी यादें भी जा चुकी हैं। उन्होंने सब कुछ खत्म कर दिया।''

बता दें कि रखाइन स्टेट में संकट पिछले साल अगस्त में रोहिंग्या विद्रोहियों द्वारा सुरक्षा बलों पर हमला किए जाने के बाद से शुरू हुआ था। म्यांमार के सशस्त्र बलों ने रोहिंग्या मुसलमानों के घरों को जला दिया। साथ ही, सशस्त्र बलों ने लोगों का नरसंहार, लड़कियों और महिलाओं के रेप और लूटपाट भी किये।

रखाइन स्टेट के उत्तरी इलाकों में समतल गांवों की हवाई तस्वीरें सबसे पहले 9 फरवरी को सामने आई थीं। उस वक्त म्यांमार में यूरोपीय संघ के राजदूत क्रिस्टियन श्मिट ने सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को पोस्ट किया था। डिजिटल ग्लोब द्वारा हाल ही में जारी की गई तस्वीरों के माध्यम से यह कहा जा रहा है कि दिसंबर से लेकर फरवरी के बीच करीब 28 गांवों को बुलडोजर की मदद से समतल कर दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा, दक्षिण सूडान में यौन हिंसा चरम पर पहुंच चुकी है

संयुक्त राष्ट्र (यू एन) ने दक्षिण सूडान में मानवाधिकारों की हालत को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां बच्चों को अपनी मां और अन्य महिला रिश्तेदारों का रेप होते या उन्हें मरते हुए देखने के लिए विवश किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दक्षिण सूडान में यौन हिंसा चरम पर पहुंच चुकी है। यू एन के मानवाधिकार जांचकर्ताओं द्वारा शुक्रवार को जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण सूडान के करीब 40 अधिकारी मानवता के खिलाफ हो रहे अपराधों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इन अधिकारियों का नाम अभी सामने नहीं लाया गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जल्द ही सुनवाई के उद्देश्य से इनके नाम जाहिर किए जा सकते हैं। इन 40 अधिकारियों में 4 कर्नल के लेवल के अधिकारी हैं तो वहीं तीन स्टेट गवर्नर्स हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये अधिकारी ही बाल सैनिकों की भर्ती करते हैं। संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं ने सैंकड़ों लोगों की गवाही, सैटेलाइट की तस्वीरों और करीब 60,000 दस्तावेजों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है।

सूडान में यौन हिंसा के साथ-साथ भुखमरी की भी समस्या काफी ज्यादा है। सरकार के धड़ों के बीच जारी संघर्ष के कारण वहां के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दक्षिण सूडान को साल 2011 में सूडान से आजादी मिली थी, लेकिन दिसंबर 2013 से ही वहां गृह युद्ध शुरू हो गया। हालांकि साल 2015 में शांति समझौते पर दस्तखत भी किए गए, लेकिन फिर भी वहां हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है।

दक्षिण सूडान की सरकार की ओर से कहा गया है कि इन अपराधों में जिसका भी नाम शामिल है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आईविटनेस न्यूज़ के मुताबिक, विदेशी मामलों के प्रवक्ता माविएन मैकोल ने कहा है, ''अपराधों के लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति पर सरकार मुकदमा चलाएगी। यह एक जिम्मेदार सरकार है।''

यू एन की रिपोर्ट में कई पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई। पीड़ित लोगों ने बताया कि किस तरह उन्हें जान बचाने के लिए खुद के ही परिवार के सदस्यों का रेप करने के लिए विवश किया जाता है। एक महिला ने बताया कि उसके बेटे को जिंदा रहने के लिए अपनी दादी का रेप करने के लिए विवश किया गया था।

ऐसे लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है जो राजनीतिक लक्ष्यों के लिए धर्म का इस्तेमाल करते हैं : पीएम मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रुदू ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आतंकवाद और चरमपंथ का मुकाबला करने से जुड़े मुद्दों सहित व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने पर गहन विचार विमर्श किया। दोनों नेताओं के बीच बैठक के बाद भारत, कनाडा ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग सहित छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

लगभग दो घंटे तक चली बैठक के बाद मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उनके बीच द्विपक्षीय भागीदारी के तमाम पहलुओं पर बातचीत हुई। मोदी ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के लिए आतंकवाद से लड़ाई के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है जो राजनीतिक लक्ष्यों के लिए धर्म का इस्तेमाल करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की एकता और अखंडता को चुनौती देने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मोदी का यह बयान ट्रूडे सरकार के खालिस्तान के मुद्दे पर नरम रुख के बाद आया है। मोदी ने कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री देश के विभिन्न हिस्सों में घूमे हैं और उन्होंने निश्चित रूप से भारत की विविधता का अनुभव किया होगा।

ट्रूडे ने भारत को वाणिज्यिक सहयोग के लिए एक स्वाभाविक भागीदार बताया।  इससे पहले भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने त्रुदू से मुलाकात करके आपसी हितों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने दोनों नेताओं की तस्वीर पोस्ट करते हुए ट्वीट किया, ''तस्वीर खुद ही कहानी बयां करती है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रुदू के साथ गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई और हमारी साझेदारी को मजबूत तथा प्रगाढ़ करने के तरीकों पर चर्चा हुई।'' इससे पहले ट्रूडे का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया।

ईरान में विमान दुर्घटना: 66 लोगों की मौत

66 यात्रियों को लेकर तेहरान से यासूज जा रहा ईरान का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में सभी यात्रियों के मरने की आशंका है। हालांकि आधिकारिक रूप से मौतों की पुष्टि अभी बाकी है। यात्री विमान ने मेहराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी।

ईरान की असेमन एयरलाइंस ने इस हादसे की पुष्टि करते हुए सभी यात्रियों की मौत की आशंका जताई है। असेमन एयरलाइंस के प्रवक्ता के मुताबिक, प्लेन में जहां क्रू के छह मेंबर थे, वहीं कुल 60 यात्री थे। यह विमान दो इंजन का था और छोटी दूरी की उड़ान में इस्तेमाल होता था। हादसा क्यों हुआ? अभी इसके कारणों का पता नहीं चल सका है।

अधिकारियों के मुताबिक, जब विमान ने उड़ान भरी थी, तब आसमान में धुंध थी। उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान से संपर्क टूट गया। विमान रेडार से गायब हो गया। इस बीच सेंट्रल ईरान के सेमीरोम स्थित पहाड़ी क्षेत्र के ऊपर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, विमान दक्षिण-पश्चिम यासूज शहर और तेहरान के बीच यात्रा के दौरान इस्फहान प्रांत के सोमीरोम शहर के पास जाग्रोस पहाडियों में दुर्घटना ग्रस्त हो गया।

आपातकाल सेवा विभाग के प्रवक्ता के मुताबिक, सभी इमरजेंसी स्टाफ को अलर्ट कर दिया गया। हालांकि मौसम खराब होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में परेशानी हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक, दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। कुछ ईरानी अफसरों के मुताबिक, देश के ज्यादातर विमान पुराने हो चुके हैं, इस वजह से हादसों की संख्या बढ़ी है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो विमान में दो सुरक्षा कर्मी, दो फ्लाइट अटेंडेंट और पायलट व को-पायलट सहित 60 लोग सवार थे।