अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन द्वारा सीरिया पर हवाई हमला करने की खबर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस हमले की जानकारी दी।
डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर सीरिया पर हवाई हमला किया है। यह हमला सीरिया की राजधानी दमिश्क के कुछ इलाकों पर किया गया है।
ट्रंप के अनुसार, यह हवाई हमला सीरिया द्वारा हाल ही में किए गए केमिकल हमले के विरोध में किया गया।
बता दें कि बीते हफ्ते सीरिया में एक रासायनिक हमला किया गया था, जिसमें 60 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले के बाद सीरिया की बशर अल असद सरकार को भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।
वहीं अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा मिलकर सीरिया पर किए गए इस हवाई हमले ने रुस को नाराज कर दिया है। रुस के अमेरिका में राजदूत एनाटोली एनटोनोव ने इस हवाई हमले पर बयान देते हुए कहा है कि भयावह आशंकाएं सच साबित हुई हैं। हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर इस तरह की कोई भी कारवाई की गई तो उसके परिणाम भुगतने होंगे।
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में रुस और ईरान की भी आलोचना की। ट्रंप ने कहा कि कौन देश बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों की मौत के जिम्मेदार का सहयोगी बनना चाहेगा?
बता दें कि सीरिया की बशर अल असद सरकार को रुस और ईरान समर्थन दे रहे हैं। वहीं ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा ने भी सीरिया पर हवाई हमले की पुष्टि की है। एक बयान जारी करते हुए थेरेसा मे ने कहा कि सीरिया को केमिकल हथियारों का इस्तेमाल करने से रोकने का कोई व्यवहारिक विकल्प मौजूद नहीं था, जिसके बाद सीरिया पर हवाई हमला किया गया। थेरेसा मे ने कहा कि हवाई हमले से पहले हर तरह के राजनयिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया।
थेरेसा मे ने यह भी बताया कि यह एक लिमिटेड हमला था, उनका किसी सिविल वॉर में दखल देने का कोई इरादा नहीं है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा कि हम केमिकल हथियारों के इस्तेमाल को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकते।
अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित यू-ट्यूब मुख्यालय में गोलीबारी की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक बंदूकधारी महिला यहां पहुंची और उसने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस गोलीबारी में कुल 4 लोगों के घायल होने की खबर है। गोलियां बरसाने के बाद महिला हमलावर ने खुद को भी गोली मार ली।
स्थानीय पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, महिला हमलावर ने अपने सिर में गोली मार कर खुदकुशी कर ली। भारतीय समय के अनुसार घटना मंगलवार रात की है। बताया जा रहा है कि लंच के दौरान ये शूटआउट हुआ। हमले में घायल हुए चार लोगों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोलीबारी में घायल चार लोगों में से एक को महिला बंदूकधारी जानती थी। कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में ये भी बताया जा रहा है कि वह घायल युवक हमला करने वाली महिला का प्रेमी था। घायल युवक के साथ दो महिलाओं को भी गोली लगी है, जिनका उपचार चल रहा है।
गूगल के सी ई ओ सुंदर पिचाई ने यू-ट्यूब मुख्यालय में हुई गोलीबारी की इस घटना पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, ''यू-ट्यूब मुख्यालय में गोलीबारी की दुखद घटना को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। यू-ट्यूब की सी ई ओ सुसान वोजिकी और मैं इस मुश्किल घड़ी में कर्मचारियों और यू-ट्यूब कम्युनिटी का पूरी तरह सपोर्ट कर रहे हैं।''
अपने बयान में सुंदर पिचाई ने पुलिस का भी शुक्रिया अदा किया। साथ ही, पिचाई ने ये भी कहा कि अब हर किसी को यू-ट्यूब टीम के समर्थन में आना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि जब कर्मचारी लंच कर रहे थे, तभी गोलीबारी हुई। सुरक्षाकर्मियों ने फौरन कर्मचारियों को बिल्डिंग से बाहर निकाला। साथ ही प्रत्येक की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
चीन का बेकाबू हो चुका स्पेस स्टेशन तियांगोंग-1 सोमवार को दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में धरती के वायुमंडल में पहुंचते ही नष्ट हो गया। चीनी स्पेस अथॉरिटी ने इसकी पुष्टि की।
वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, यह यान सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर धरती के वायुमंडल में आया और इसका अधिकांश हिस्सा जलकर नष्ट हो गया।
हालांकि, इसके कुछ हिस्से अब धरती पर गिरेंगे, लेकिन पेइचिंग के मुताबिक, कोई भी हिस्सा ज्यादा बड़ा नहीं होगा।
चीन ने 10.4 मीटर लंबा यह स्पेसक्राफ्ट साल 2011 में लॉन्च किया था। चीन की स्पेस एजेंसी चाइना नेशनल स्पेस ऐडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक तियांगोंग-1 से मार्च 2016 से संपर्क टूट चुका था। जिसके बाद से यह अंतरिक्ष में घूम रहा था।
बता दें कि साढ़े आठ टन वजन वाला यह स्पेस स्टेशन साल 2016 में ही अपना नियंत्रण खो चुका था और तब से ही यह धरती की तरफ गिर रहा है। वैज्ञानिकों ने पहले ही अनुमान लगाया था कि इस स्पेसक्राफ्ट का अधिकतर हिस्सा गिरते समय जलकर खाक हो जाएगा, लेकिन 10 से 40 प्रतिशत हिस्सा मलबे के रूप में बचा रह सकता है और इसमें खतरनाक केमिकल्स हो सकते हैं।
पोलैंड इन दिनों गर्भपात कानून में बदलाव को लेकर हो रहे विरोध आंदोलनों के कारण चर्चा में है। पोलैंड में धुर दक्षिणपंथी पार्टी लॉ एंड जस्टिस की सरकार है जिसे संक्षिप्त में पी आई एस कहते हैं। पोलैंड की सरकार अपने फैसलों से लगातार खलबली मचाए हुए है। कभी वह शरणार्थियों को नहीं लेने के मुद्दे पर यूरोपीय संघ के सामने सीना तान कर खड़ी हो जाती है तो कभी देश की न्यायपालिका पर शिकंजा कसती है। यही नहीं, पिछले दिनों पोलैंड की सरकार ने एक कानून बना दिया जिसके तहत यहूदी नरसंहार के लिए किसी भी तरह पोलैंड को दोष देना अपराध घोषित कर दिया गया।
अब सरकार गर्भपात के कानून सख्त बनाने की तैयारी में थी, लेकिन भारी विरोध के कारण फिलहाल उसे अपने कदम पीछे खींचने पड़े। 23 मार्च को 50 हजार से ज्यादा लोग राजधानी वारसॉ की सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने इसे ब्लैक फ्राइडे का नाम दिया और उनके हाथों में मौजूद तख्तियों पर लिखा था 'स्टॉप' या फिर 'हमें चॉइस चाहिए, दहशत नहीं'।
पोलैंड पूरी तरह से एक कैथोलिक देश है और वहां गर्भपात पर पहले से ही प्रतिबंध है। सिर्फ तीन परिस्थितियों में गर्भपात की अनुमति है। पहला, अगर मां की जान को खतरा हो। दूसरा, गर्भ बलात्कार या अनैतिक शारीरिक संबंधों का नतीजा हो। तीसरा, गर्भ में पल रहे भ्रूण को कोई स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा हो।
पोलैंड में जितने भी गर्भपात अभी तक होते रहे हैं उनमें 90 प्रतिशत तीसरी श्रेणी यानी भ्रूण को नुकसान होने की परिस्थिति के तहत होते रहे हैं। अब सरकार नए कानून के जरिए इसी तीसरी श्रेणी को खत्म करना चाहती है। सरकार देश में गर्भपात के लिए संभावनाओं को बेहद सीमित कर देना चाहती है। बीते डेढ़ साल में यह दूसरा मौका है, जब पोलैंड में गर्भपात को लेकर सियासी बहस छिड़ी है। अक्टूबर 2016 में भी पोलैंड में गर्भपात पर लगभग पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग उठी थी। लगभग साढ़े चार लाख लोगों ने गर्भपात पर रोक के समर्थन में अपने हस्ताक्षर दिए थे। लेकिन उसके बाद एक लाख लोग इसके खिलाफ सड़कों पर उतरे जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं।
पी आई एस पार्टी के बहुत से सांसद गर्भपात विरोधी मुहिम के समर्थन में थे, लेकिन सरकार ने इससे दूरी बना ली। कैथोलिक चर्च भी गर्भपात पर रोक चाहता था, लेकिन 6 अक्टूबर 2016 को संसद में बिल पेश होने से पहले उसने अपना रुख बदल कर लिया। चर्च ने कहा कि उसे यह मंजूर नहीं है कि किसी महिला को गर्भपात कराने की वजह से जेल जाना पड़े।
अब फिर पोलैंड उसी दोराहे पर खड़ा है। 2016 में गर्भपात विरोधियों को मिली नाकामी के बाद पी आई एस पार्टी के अध्यक्ष यारोस्लाव काचिंस्की ने कहा था कि उनकी पार्टी कानूनों में इस तरह के बदलाव के लिए प्रतिबद्ध है जिससे विकलांग भ्रूण भी जन्म ले पाएं ताकि उनका 'बपतिस्मा हो सके, उन्हें दफनाया जा सके और उन्हें एक नाम दिया जा सके। पिछले दिनों कैथोलिक बिशपों ने फिर पोलिश सांसदों से कहा कि ''वे इंसानी अस्तित्व के सभी पलों के प्रति अपना बिना शर्त समर्थन व्यक्त करें।'' यानी वे उन बच्चों की वकालत कर रहे थे जो गर्भ में किसी विकृति का शिकार हो गए हैं।
पी आई एस पार्टी के लिए कैथोलिक चर्च के इस बयान की बहुत अहमियत है क्योंकि अगले साल पोलैंड में आम चुनाव होने हैं और जीत के लिए उसे चर्च का समर्थन चाहिए। लेकिन आम चुनाव से पहले इस साल के आखिर में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव भी पी आई एस के लिए अहम परीक्षा होंगे। वहीं बुधवार को जारी एक सर्वे के मुताबिक, सर्वे में पी आई एस की लोकप्रियता घटकर 28 प्रतिशत रह गई है, जबकि एक महीने पहले वह 40 प्रतिशत के आसपास थी।
पिछले दस साल में कभी पी आई एस के लिए समर्थन में इतनी गिरावट देखने को नहीं मिली। एक महीने के भीतर लोकप्रियता में 12 प्रतिशत की गिरावट दिखाती है कि गर्भपात का मुद्दा लोगों के लिए कितना अहम है। सर्वे करने वाली संस्था के मुताबिक, यहूदी नरसंहार से जुड़े कानून पर इस्राएल के साथ कूटनीतिक टकराव के कारण भी लोगों में सरकार के प्रति रोष है। इस्राएल ही नहीं, बल्कि पोलैंड इस मुद्दे पर अमेरिका से भी टकराने को तैयार हो गया, जबकि अमेरिका उसका अहम रक्षा सहयोगी है। दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी पार्टी सिविल प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता छह फीसदी की बढ़त के साथ 22 प्रतिशत हो गई है।
गर्भपात के मुद्दे पर पोलैंड की सरकार को अपने लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है, साथ ही यूरोपीय मानवाधिकार परिषद ने भी उसे चेतावनी दी है। यूरोपीय मानवाधिकार आयुक्त नील्स मुइजनिएक्स ने कहा है कि अगर पोलैंड ने गर्भपात विरोधी कानून को पास किया तो यह उन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा जिन्हें निभाने की जिम्मेदारी पोलैंड के ऊपर भी है। उन्होंने पोलिश संसद से कहा है कि ऐसे किसी कानून को पारित न करे जिससे महिलाओं के यौन और प्रजनन से जुड़े अधिकारों पर बंदिशें लगती हों।
पिछले साल सरकार ने एक वीडियो जारी किया जिसमें पोलैंड के लोगों से कहा गया है कि वे खरगोशों की तरह बच्चे पैदा करें, ताकि देश में घटती जनसंख्या की समस्या से निपटा जा सके। यही नहीं, ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों को सरकार ने आर्थिक मदद देने का भी ऐलान किया है।
पोलैंड में जन्मदर पूरे यूरोप में सबसे कम है। पोलैंड में गर्भपात के खिलाफ कानून को सख्त बनाने की वकालत करने वाले भी कम नहीं हैं। लेकिन एक आधुनिक समाज और यूरोपीय संघ का हिस्सा होने के नाते व्यक्तिगत आजादी को भी पोलैंड को संरक्षित करना होगा। गर्भपात विरोधियों का कहना है कि महिलाएं इंसान हैं, न कि बच्चे पैदा करने वाली मशीन। इसलिए उन्हें कब और कितने बच्चे पैदा करने हैं, ये फैसला करने का हक सिर्फ उन्हें ही होना चाहिए।
पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका के एक पूर्व कर्मचारी क्रिस्टोफर विली ने दावा किया है कि भारत के अरबपति बिजनेस टायकून ने कांग्रेस को चुनाव हरवाने के लिए कैम्ब्रिज एनालिटिका को पैसे दिये थे। इससे पहले उन्होंने यह भी कहा था कि इस कंपनी ने भारत में बड़े पैमाने पर काम किया है और उन्हें लगता है कि कांग्रेस ने इस कंपनी की सेवाएं ली थी।
व्हिसल ब्लोअर क्रिस्टोफर विली 27 मार्च को फेसबुक डेटा चोरी मामले में ब्रिटेन की एक संसदीय समिति के समक्ष अपनी गवाही दे रहे थे। बता दें कि फेसबुक डेटा चोरी के तार ब्रिटेन की इस विवादित कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका से जुड़े होने की खबरें मिली हैं। साथ ही इस तरह के आरोप लग रहे हैं कि इन घटनाक्रमों का संबंध भारत में चुनावों को कथित तौर पर प्रभावित किये जाने से है।
अपनी गवाही के दौरान विली ने कहा कि उनके पूर्ववर्ती एस सी एल समूह में चुनावों के प्रमुख डान मुरेसन भी भारत में काम कर रहे थे, जिनकी केन्या में रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गयी। विली ने दावा किया कि उन्हें ऐसी कहानियां सुनने को मिली हैं कि मुरेसन को केन्या होटल में शायद जहर दिया गया था। डान मुरसेन रोमानिया के नागरिक थे।
पर्सनलडेटा डॉट आई ओ के सह- संस्थापक पॉल ओलिवियर देहया ने भी समिति के समक्ष अपनी गवाही में कहा कि उन्होंने ऐसी खबरें सुनी थीं कि मुरेसन को एक भारतीय अरबपति ने रुपये दिये थे, जो चाहते थे कि कांग्रेस चुनाव हार जाए। क्रिस्टोफर विली और ओलिवियर देहया हाउस ऑफ कामंस की डिजिटल, सांस्कृतिक, मीडिया और खेल समिति के समक्ष अपनी गवाही दे रहे थे।
ओलिवियर देहया ने कहा कि इसका मतलब यह है कि डान मुरेसन जिस पार्टी के लिए काम करने का दावा कर रहे थे, उसके अलावा उन्हें एक दूसरी पार्टी से भी पैसा मिला था। उन्होंने कहा कि अब भारत और केन्या के पत्रकारों को साथ आना चाहिए और इस मामले की जांच करनी चाहिए।
बता दें कि इस मामले में भारत के दो प्रमुख दलों कांग्रेस और बीजेपी के बीच तलवारें खिची हुई है। कांग्रेस ने मंगलवार को सरकार पर आरोप लगाया कि वह महत्वपूर्ण मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए कैम्ब्रिज एनालिटिका के मुद्दे को तूल दे रही है। पार्टी ने कानून मंत्री से सवाल किया कि यदि उनके पास साक्ष्य हैं तो फेसबुक, कैम्ब्रिज एनालिटिका तथा उसकी सहयोगी ओबीआई के खिलाफ प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं करवा रहे हैं?
बांग्लादेश में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। आमतौर पर लड़कियों द्वारा प्रेम या दोस्ती का प्रस्ताव ठुकराने पर लड़के हिंसक हो जाते हैं। लेकिन, बांग्लादेश की राजधानी ढाका में इसके विपरीत मामला सामने आया है। एक किशोर ने किशोरी के दोस्ती के अनुरोध को ठुकरा दिया था। इससे नाराज आरोपी युवती ने लड़के के चेहरे पर तेजाब उड़ेल दिया। इस घटना में घायल पीड़ित फिलहाल अस्पताल में अपना इलाज करा रहा है। घायल की पहचान महमुदुल हसन मारुफ (17) के तौर पर की गई है। तेजाब हमले से उसका चेहरा झुलस गया है।
पुलिस ने आरोपी (16 वर्षीया किशोरी) और उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया है। महमुदुल की मां ने इस खौफनाक घटना के बारे में जानकारी दी। चेहरे के अलावा कंधा भी झुलस गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महमुदुल रात में अपने दोस्तों के साथ मौज-मस्ती के बाद घर लौट रहा था, जब आरोपी लड़की से उसका आमना-सामना हुआ था। महमुदुल के कई बार इनकार करने के बावजूद वह महीनों से उसका पीछा कर रही थी। उस रात गरमा-गरमी के बाद युवती ने उसके चेहरे पर तेजाब फेंक दिया। ढाका पुलिस ने घटना के एक दिन बाद युवती को मां के साथ गिरफ्तार कर लिया था।
डॉक्टरों ने बताया कि चेहरे पर गहरा जख्म होने के कारण किशोर अपनी जिंदगी को लेकर बहुत चिंतित है। महमुदुल के चेहरे की स्किन को गहरा नुकसान पहुंचा है, जिसे पूरी तरह से ठीक होने में लंबा वक्त लग सकता है।
बता दें कि बांग्लादेश में तेजाब हमले की घटनाएं बहुत ज्यादा होती हैं। खासकर 1990 के दशक के बाद से इस तरह के हमलों में काफी वृद्धि देखी गई है। सालाना 500 से ज्यादा इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। तेजाब हमले के घायलों की मदद के लिए बांग्लादेश में वर्ष 1999 में एसिड सर्वाइवर फाउंडेशन नामक संगठन की स्थापना की गई थी। यह संस्था ऐसे हमलों में घायलों की मदद करता है।
संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई हमलों में तो लोगों के चेहरे बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में तो पीड़ितों के आंखों की रोशनी तक चली जाती है। इस तरह के हमलों को आमतौर पर व्यक्तिगत रंजिश के कारण अंजाम दिया जाता है।
अमेरिका में 2016 में हुए चुनावों में रूसी हस्तक्षेप के आरोपों के बीच मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि उन्हें पक्का विश्वास है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में दखल देने के लिये कोई फेसबुक के इस्तेमाल की कोशिश कर रहा है।
अभी चुनावों में दखल की संभावनाओं पर सी एन एन द्वारा पूछे जाने पर फेसबुक के सी ई ओ ने कहा, ''मुझे विश्वास है कि कोई कोशिश कर रहा है।'' उन्होंने कहा, ''रूस का 2016 में जो भी प्रयास था। मुझे विश्वास है कि उसका वी2, या दूसरा संस्करण भी है, मुझे यकीन है कि वे उस पर काम कर रहे हैं। और इस बार कुछ अलग युक्ति अपनाई जाएगी जिसके बारे में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम उसकी पहचान कर सकें और उसका मुकाबला कर सकें।''
उनका यह बयान कैंब्रिज एनालिटिका प्रकरण के सामने आने के बाद आया है जिसमें राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के चुनावी अभियान से जुड़ी ब्रिटिश डेटा कंपनी ने कथित तौर पर पांच करोड़ फेसबुक यूजर्स का आंकड़ा बिना उनकी जानकारी के हासिल और इस्तेमाल किया था।
जुकरबर्ग ने कहा कि फेसबुक कर्मचारियों को कुछ अलग चीज होने की भनक थी जिसे हमें सामने लाना होगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी तकनीक निर्माण कर रहे हैं और मानव समीक्षकों की सेवा ले रहे हैं जिससे दुष्प्रचार और दूसरे हमलों को रोका जा सके। उन्होंने कहा, ''इस साल हमने जो बड़ी प्रतिबद्धताएं व्यक्त की हैं, उनमें से कंपनी में सुरक्षा के लिये काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या दोगुनी करना शामिल है। सुरक्षा और कंटेंट की समीक्षा के लिये इस साल के अंत तक कंपनी में हम 20,000 लोगों के साथ काम करने जा रहे हैं।
चीन ने पाकिस्तान को अत्यधिक संवेदनशील ट्रैकिंग प्रणाली बेची है, जिससे इस्लामाबाद की मिसाइल क्षमता में बढ़ोत्तरी हो सकती है। दक्षिण चीन मॉर्निग पोस्ट के अनुसार, एक चीनी थिंक टैंक ने कहा कि चीन पाकिस्तान को इस तरह की प्रौद्योगिकी देने वाला पहला देश है। चीन पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश है।
शिचुआन प्रांत के चेंगदू में इंट्स्टीट्यूट ऑफ ऑपटिक्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, चाइना एकेडमी ऑफ साइंसेज (आई ओ ई, सी ए एस) के शोधकर्ता झेंग मेंगवी ने कहा, ''पाकिस्तान की सेना ने हाल ही में अपने नए मिसाइलों के परीक्षण और विकास के लिए एक चीन निर्मित प्रणाली को 'फायरिंग रेंज' पर तैनात किया है।''
इंट्स्टीट्यूट ऑफ ऑपटिक्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, चाइना एकेडमी ऑफ साइंसेज की ओर से जारी बयान के अनुसार, चीनी टीम को पाकिस्तान में इस ट्रैकिंग प्रणाली को असेंबलिंग और जांच करने और इसे प्रयोग करने के लिए तकनीकी कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के दौरान काफी इज्जत दी गई। बयान के अनुसार, प्रणाली का प्रदर्शन प्रयोगकर्ताओं के उम्मीद से काफी बेहतर था। इसके लिए इस्लामाबाद की ओर से दी गई धनराशि के बारे में अभी बताया नहीं गया है।
द पोस्ट के अनुसार, ''ऑप्टिकल प्रणाली मिसाइल के परीक्षण के लिए बेहद जरूरी होता है। यह लेजर रेंजर के साथ उच्च दक्षता वाले टेलीस्कोप, उच्च गति वाले कैमरे, इंफ्रारेड डिटेक्टर और केंद्रीकृत कंप्यूटर प्रणाली से लैस होता है जो चलते हुए लक्ष्य का फोटो लेने और पीछा करने के लिए होती है।'' यह डिवाइस मिसाइल के इसके लॉन्चर से अलग होने, स्टेज सेपरेशन, टेल फ्लैम और वातावरण में मिसाइल के दोबारा प्रवेश करने की तस्वीर उच्च रिजोल्यूशन के साथ कैद करता है।
झेंग ने कहा, ''चीन निर्मित प्रणाली की विशेषता इसकी चार टेलीस्कोप इकाइयों के प्रयोग की क्षमता है जिसकी क्षमता सामान्य रूप से काफी ज्यादा है।'' उन्होंने कहा, ''हमने सामान्य तौर पर उन्हें आंख का एक जोड़ा दिया है। वे इससे जो भी देखना चाहें, देख सकते हैं, यहां तक की चांद भी।''
भारत और अमेरिकी लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि चीन पाकिस्तान को मिसाइल बनाने और परमाणु विकास कार्यक्रम में समर्थन दे रहा है, लेकिन इस तरह के सहयोग के विश्वसनीय प्रमाण सार्वजनिक तौर पर नहीं देखे जाते हैं और इंट्स्टीट्यूट ऑफ ऑपटिक्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, चाइना एकेडमी ऑफ साइंसेज के बयान को दुर्लभ बनाते हैं।
राजनीतिक उद्देश्यों के लिए फेसबुक उपभोक्ताओं के कथित डेटा लीक की खबरों के बीच व्हाट्सएप के सह-संस्थापक ब्रायन एक्टन ने मंगलवार को उपभोक्ताओं से सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक को डिलीट करने के लिए कहा।
ब्रायन एक्टन ने ट्वीट कर अपने 23,000 से ज्यादा फालोवर्स से कहा, ''यह फेसबुक को हटाने का समय है।''
फेसबुक ने 2014 में व्हाट्स एप का अधिग्रहण किया था। राजनीतिक डेटा विश्लेषक कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका के फेसबुक के पांच करोड़ उपभोक्ताओं के डेटा तक बिना अनुमति के पहुंचने की रपट सामने आने के बाद फेसबुक कड़ी प्रतिक्रिया का सामना कर रहा है।
कंपनी ने उपभोक्ताओं के डेटा एक फेसबुक एप से सालों पहले हासिल किए थे, जिसे कथित तौर पर मनोवैज्ञानिक उपकरण होने की बात कही गई थी। हालांकि, कंपनी उस जानकारी के लिए अधिकृत नहीं थी।
इससे पहले मंगलवार को ब्रिटेन की डेटा संरक्षण वॉचडाग ने राजनीतिक डेटा विश्लेषक और परामर्शदाता के लंदन मुख्यालय की तलाशी के लिए अदालती वारंट की मांग की। इस परामर्शदाता ने डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी टीम के साथ काम किया है और कथित तौर पर मतदान को प्रभावित करने के लिए अमेरिकी मतदाताओं के फेसबुक प्रोफाइल का इस्तेमाल किया।
यू के इंफार्मेशन कमिश्नर ने कैंब्रिज एनालिटिका के मुख्यालय का दौरा करते समय फेसबुक द्वारा नियुक्त किए गए लेखापरीक्षकों को नीचे खड़े रहने का भी आदेश दिया था।
इस बीच अमेरिका व ब्रिटेन के सांसदों ने फेसबुक उपभोक्ताओं के डेटा लीक की रपट के बाद कार्रवाई की मांग की है। मार्क जुकरबर्ग के फेसबुक ने व्हाट्स एप को 2014 में 19 अरब डॉलर में खरीदा था, लेकिन एक्टन 2018 की शुरुआत में 'सिंगल फाउंडेशन' शुरू करने से पहले कंपनी के साथ कई साल बने रहे। बीते महीने उन्होंने 'सिंगल' में पांच करोड़ डालर का निवेश किया, जो बेहद लोकप्रिय व्हाट्स एप के लिए एक स्वतंत्र विकल्प है। एक अन्य व्हाट्स एप के सह-संस्थापक जान कोउम अब भी कंपनी की अगुवाई कर रहे हैं और फेसबुक के बोर्ड में हैं।
फेसबुक के संस्थापक और सीईओ मार्क जुकरबर्ग के लिए सोमवार का दिन निराशाजनक रहा। उनकी कंपनी के शेयरों में करीब आठ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई इससे मार्क जुकरबर्ग को एक ही दिन में 395 अरब रुपये यानी 6.06 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जबकि कंपनी को 35 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। ऐसा फेसबुक द्वारा डेटा लीक की खबरों के बाद हुआ है।
साल 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनावों के वक्त डोनाल्ड ट्रम्प की मदद करने वाली एक ब्रिटिश फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका पर फेसबुक के करीब पांच करोड़ यूजर्स की पर्सनल इन्फॉरमेशन चुराने के आरोप लगे हैं। इन पांच करोड़ यूजर्स की जानकारियों का इस्तेमाल अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में किया गया था।
मामला उजागर होते ही अमेरिका और यूरोप के सांसदों ने फेसबुक से इस बावत जवाव तलब किया है और जुकरबर्ग को संसद के सामने पेश होने को कहा है। इस खबर के बाद फेसबुक के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली है।
हालांकि, इस बड़ी गिरावट के बावजूद मार्क जुकरबर्ग दुनिया के सबसे चौथे अमीर शख्स हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अमेजन के जेफ बेजोस, माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स और वारेन वफेट अभी भी मार्क जुकरबर्ग से आगे हैं। जुकरबर्ग और उससे जुड़ी कंपनियों के पास फेसबुक के करीब 403 मिलियन शेयर्स हैं।
बता दें कि फेसबुक ने साल 2016 में ही बता दिया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के दौरान उसके प्लेटफॉर्म का रूस में गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है। तब जुकरबर्ग पर उंगली नहीं उठी थी। अब ब्रिटिश फर्म द्वारा धांधली की खबरों के बाद फेसबुक और जुकरबर्ग दोनों परेशानी झेल रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन में सोशल मीडिया और सोशल नेटवर्किंग साइट्स के रेग्यूलेशन के लिए सख्त कानून की चर्चा हो रही है।









