विदेश

भारत में धार्मिक आजादी को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका 3 करोड़ देगा

भारत में धार्मिक आजादी को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका ने करीब पांच लाख डॉलर (करीब 3.24 करोड़ रुपये) का अनुदान देने का ऐलान किया है। अमेरिकी विदेशी मंत्रालय ने इसके लिए गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) से आवेदन मांगे हैं।

आवेदन के साथ भारत में धार्मिक हिंसा और भेदभाव कम करने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव मांगा गया है। श्रीलंका के लिए भी इसी तरह के अनुदान की घोषणा की गई है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के लोकतंत्र, मानवाधिकार और श्रम ब्यूरो की इस संबध में जारी सूचना में कहा गया है कि 493,827 डॉलर के कार्यक्रम का मकसद भारत में धार्मिक हिंसा और भेदभाव को कम करना है। आवेदकों से कार्यक्रम की सफलता के लिए आपत्तिजनक संदेशों से मुकाबले के लिए सकारात्मक संदेशों के विचार देने को कहा गया है।

इसके अलावा उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता खासकर धार्मिक अल्पसंख्यकों की कानूनी सुरक्षा को लेकर सिविल सोसायटी और पत्रकारों को शिक्षित करने का प्रस्ताव भी देने को कहा गया है। आवेदनों की जांच के बाद भारत और श्रीलंका के लिए अनुदान पाने वालों की घोषणा की जाएगी।

कोलकाता-खुलना के बीच बंधन एक्सप्रेस शुरू, मोदी-हसीना ने हरी झंडी दिखाई

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कोलकाता और बांग्लादेश के खुलना के बीच बंधन एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कुछ समय पहले हमने साउथ एशिया सैटलाइट के लॉन्च के समय इसी प्रकार वीडियो कॉन्फ्रेंस की थी।

पीएम मोदी ने कहा कि आज हमने दो रेल पुलों का भी उद्घाटन किया है। करीब 10 करोड़ डॉलर की लागत से बने ये पुल बांग्लादेश के रेल नेटवर्क को मजबूत करने में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के विकास कार्यों में विश्वस्त साझेदार होना भारत के लिए गर्व का विषय है।

पीएम मोदी ने कहा कि विकास और कनेक्टीविटी दोनों एक साथ जुड़े हुए हैं। हम दोनों देशों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक जुड़ाव को मजबूत करने की दिशा में आज कुछ और कदम उठाए हैं। खासकर पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के लोगों के बीच आवाजाही और संपर्क बेहतर होगा।

इससे पहले बांग्लादेश की राजधानी ढाका और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के बीच मैत्री एक्सप्रेस ट्रेन पहले से ही चल रही है। अब बंधन एक्सप्रेस के शुरू होने से दोनों देशों के बीच नजदीकियां बढ़ेगी। पीएम मोदी ने कहा कि विकास औऱ संपर्क एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, पड़ोसी देशों के नेताओं के साथ संबंध पड़ोसियों जैसे ही होने चाहिए।

चीन की साजिश: ब्रह्मपुत्र नदी की धार मोड़ने से भारत में पड़ सकता है सूखा

चीन ब्रह्मपुत्र नदी की धारा मोड़ने के लिए एक हजार किलोमीटर लम्बी सुरंग बनाने की योजना पर विचार कर रहा है। अगर ये बांध बना तो ये दुनिया का सबसे लम्बा बांध होगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ब्रह्मपुत्र की धारा को तिब्बत से अपने शिनजियांग प्रांत की तरफ मोड़ना चाहता है। चीन के शिनजियांग प्रांत में पानी की कमी रहती है। चीन में ब्रह्मपुत्र नदी को यारलंग सांगपो कहते हैं। तिब्बत से निकलने वाली ये नदी भारत के पूर्वोत्तर से होते हुए बांग्लादेश में बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

अगर चीन ये सुरंग बनाता है तो ब्रह्मपुत्र के बहाव में बदलाव आएगा जिसका नतीजा यह होगा कि बहुत से इलाकों में जल संकट हो सकता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सुरंग बनाने से बड़ी मात्रा में नदी का पानी पहले जमा होगा जिससे बाढ़ की आशंका भी बढ़ सकती है।

चीनी अखबार चीन मार्निंग पोस्ट में छपी खबर के अनुसार, ब्रह्मपुत्र के रास्ते में सुरंग बनाने का योजना उच्च स्तरीय अधिकारियों को दे दी गयी जिन्हें मार्च 2018 तक अपनी राय देनी है। इस सुरंग के बनने से तिब्बत और पूर्वोत्तर भारत के पारिस्थितिकी को भी क्षति पहुंच सकती है। ये सुरंग चीन को काफी महंगी भी पड़ेगी।

चीनी अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार, एक चीनी विशेषज्ञ ने अनुमान जताया है कि इस सुरंग को बनाने में 15 करोड़ डॉलर प्रति किलोमीटर का खर्च आएगा। यानी पूरी सुरंग बनाने में करीब 150 अरब डॉलर खर्च होंगे।

अतीत में भारत द्वारा जताई चिंता पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन ने आश्वस्त किया था कि वो तिब्बत में झांगमु पर कोई बांध नहीं बना रहा है।

चीन ने कहा था कि वो केवल एक पनबिजली परियोजना के लिए बांध बना रहा है जिससे भारत जाने वाला नदी का पानी प्रभावित नहीं होगा। अगर चीन ये सुरंग बनाता है तो जाहिर तौर पर इसका प्रभाव नदी की धारा पर पड़ना तय है।

स्पेन ने कैटेलोनिया का सीधा नियंत्रण अपने हाथों में लिया

स्पेन ने कैटेलोनिया का सीधा नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया है और रात में आधिकारिक गजट में विशेष उपायों को ऑनलाइन प्रकाशित कर क्षेत्र की अलगाववादी सरकार को बर्खास्त कर दिया है।

कैटेलोनिया के अलगाववादी सांसदों ने शुक्रवार को स्वतंत्रता की अधिघोषणा पारित की थी जिसके बाद स्पेन सरकार ने शनिवार को यह कदम उठाया है।

स्पेन के प्रधानमंत्री मारियानो राजोय ने क्षेत्रीय संसद को भंग कर दिया है और 21 दिसंबर को नए क्षेत्रीय चुनाव का आह्ववाहन किया है।

कैटेलोनियाई राष्ट्रपति कार्ल्स पुइग्डेमोंट की जगह अब पूर्वोत्तर क्षेत्र में मारियानो राजोय शीर्ष निर्णयकर्ता बन गए हैं। पुइग्डेमोंट और कातालूनीया कैबिनेट के 12 सदस्यों को अब भुगतान नहीं किया जाएगा और यदि वे निर्देशों को मानने से इनकार करते हैं तो उन पर दूसरों का दायित्व हड़पने का आरोप लगाया जा सकता है।

कैटेलोनिया के शीर्ष अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई जवाब नहीं आया है। बर्खास्त किए गए कैटेलोनिया के क्षेत्रीय पुलिस निदेशक ही अब तक एकमात्र ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने बयान जारी किया है और कहा है कि वह निर्देशों का पालन करेंगे।

उल्लेखनीय है कि कैटेलोनिया की संसद ने शुक्रवार को स्पेन से आजादी और खुद के एक गणराज्य के तौर पर अस्तित्व में आने की घोषणा करते हुए इससे जुड़े प्रस्ताव को पारित किया था। आजादी की घोषणा वाले प्रस्ताव के पक्ष में 70 वोट आए, जबकि विपक्ष में 10 वोट पड़े थे। दो सदस्य मतदान से अनुपस्थित थे।

कैटेलोनिया की 135 सदस्यीय संसद में मतदान से पहले विपक्षी सांसद वाकआउट कर गए। विपक्षी सदस्यों का कहना था कि इस घोषणा को स्पेन और विदेश से आधिकारिक मान्यता मिलने की संभावना नहीं है।

बता दें, स्पेन के दूसरे सबसे बड़े राज्य कैटेलोनिया में हिंसा के बीच हुए जनमत संग्रह में 90 प्रतिशत लोगों ने स्पेन से अलग होने के लिए वोट किया था। 75 लाख की आबादी वाले राज्य में लगभग 40 प्रतिशत लोगों ने जनमत संग्रह में भाग लिया। यहां 53 लाख रजिस्टर्ड वोटर्स हैं।

कैटेलोनिया सरकार के प्रवक्ता जोर्डी टुरुल ने बताया कि लगभग 22 लाख मतों की गणना की गई, जिसमें करीब 20 लाख मत स्पेन से अलग होने के पक्ष में पड़े।

नेपाल में सड़क हादसा: बस नदी में गिरने से 31 की मौत

नेपाल के धादिड़ जिले में शनिवार को यात्रियों से खचाखच भरी एक बस के दुर्घटनाग्रस्त होकर नदी में गिर जाने के कारण कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक भारतीय महिला भी शामिल है।

धादिड़ के पुलिस अधीक्षक ध्रुब राज राउत ने बताया कि काठमांडो से करीब 70 किलोमीटर पश्चिम में घाटबेसी मोड पर बस सुबह करीब पांच बजे दुर्घटनाग्रस्त होकर त्रिशुली नदी में जा गिरी।

नेपाल सेना के जवानों सहित सुरक्षा बलों और सशस्त्र बलों के जवानों ने पृथ्वी राजमार्ग से लगे दुघर्टनास्थल से नदी से 16 घायल यात्रियों को बाहर निकाला।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बचाव टीम अब तक 31 शवों को निकाल चुकी है और अन्य लापता यात्रियों की तलाश की जा रही है।

पुलिस ने बताया कि सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया है, लेकिन इनमें से गंभीर रूप से घायल दो यात्रियों को इलाज के लिए काठमांडो ले जाया गया है।

पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक खबरों के मुताबिक, खराब दृश्यता के कारण एक मोड़ पर तेज रफ्तार बस पर नियंत्रण पाने में चालक के असफल रहने के कारण हादसा हुआ।

पुलिस ने बताया कि बस में 52 यात्री यात्रा कर रहे थे।  पुलिस ने शनिवार को हुए हादसे के लिए प्रथम दृष्टया खराब दृश्यता को जिम्मेदार माना है।

स्पेन से अलग होकर नया देश बना कैटेलोनिया

कैटेलोनिया की संसद ने आज स्पेन से आजादी और खुद के एक गणराज्य के तौर पर अस्तित्व में आने की घोषणा करते हुए इससे जुड़े प्रस्ताव को पारित कर दिया। आजादी की घोषणा वाले प्रस्ताव के पक्ष में 70 वोट आए, जबकि विपक्ष में 10 वोट पड़े। दो सदस्य मतदान से अनुपस्थित रहे।

कैटेलोनिया की 135 सदस्यीय संसद में मतदान से पहले विपक्षी सांसद वाकआउट कर गए।

विपक्षी सदस्यों का कहना था कि इस घोषणा को स्पेन और विदेश से आधिकारिक मान्यता मिलने की संभावना नहीं है।

बता दें, स्पेन के दूसरे सबसे बड़े राज्य कैटेलोनिया में हिंसा के बीच हुए जनमत संग्रह में 90 प्रतिशत लोगों ने स्पेन से अलग होने के लिए वोट किया था। 75 लाख की आबादी वाले राज्य में लगभग 40 प्रतिशत लोगों ने जनमत संग्रह में भाग लिया। यहां 53 लाख रजिस्टर्ड वोटर्स हैं।

कैटेलोनिया सरकार के प्रवक्ता जोर्डी टुरुल ने बताया कि लगभग 22 लाख मतों की गणना की गई, जिसमें करीब 20 लाख मत स्पेन से अलग होने के पक्ष में पड़े।

स्पेन में साल 2015 के चुनाव में कैटेलोनिया अलगाववादियों को जीत मिली थी। इस चुनाव के दौरान ही इन्होंने कैटेलोनिया को आजाद कराने के लिए जनमत संग्रह कराने का वादा किया था।

साल 1977 में तानाशाही से उबरने के बाद से यह स्पेन में सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा था।

हालांकि स्पेन के नेतृत्व ने इस जनमत संग्रह को खारिज कर दिया था। दूसरी तरफ अदालतों ने भी इसे रोकने को कहा था। इस मसले को लेकर स्पेन पुलिस ने कैटेलोनिया के कई अधिकारियों को गिरफ्तार किया था।

उत्तर प्रदेश: विदेशी लड़की से छेड़छाड़, विदेशी कपल को लाठी-डंडों से पीटा

फतेहपुर सीकरी में कुछ युवाओं द्वारा रविवार को लगभग एक घंटे तक स्विट्जरलैंड के एक जोड़े क्वेंटिन जेरेमी क्लेर्क और मैरी ड्रोक्स का पीछा करने, उन्हें प्रताड़ित करने और पत्थरों और डंडों से उन पर हमला करने की खबर सामने आई है।

मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। 4 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

हमले के बाद पीड़ितों को आगरा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आगरा में स्विट्जरलैंड के एक जोड़े पर रविवार को हुए हमले के संबंध में गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

सुषमा ने स्विट्जरलैंड के जोड़े पर हमले की खबर को साझा करते हुए ट्वीट कर कहा, ''मैंने इसे अभी देखा। मैने इस संबंध में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।''

सुषमा ने एक और ट्वीट कर कहा, ''मेरे मंत्रालय के अधिकारी अस्पताल में जाकर पीड़ित जोड़े से मिलेंगे।''

अधिकारियों ने दोपहर में जोड़े से मुलाकात की।

वहीं इस पूरी घटना पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री व समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया है। अखिलेश ने कहा कि विदेशी पर्यटकों को सेल्फी लेने के लिए पीटा जा रहा है। उत्तर प्रदेश का एंटी रोमियो स्क्वॉड कहां है? वह गुरुवार को समाजवादी पार्टी के कार्यालय में पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे।

अखिलेश ने कहा, ''एंटी रोमियो स्क्वॉड का क्या हुआ? एक विदेशी युगल को फतेहपुर सिकरी में सेल्फी लेने के लिए पीटा गया। उत्तर प्रदेश में अप्रत्याशित रूप से अपराध और लूट की घटनाओं में इजाफा हुआ है। कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है।''

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 24 साल के क्‍वेंटिन जेरेमी क्‍लार्क अपनी गर्लफ्रेंड मैरी ड्रोज के साथ 30 सितंबर को भारत आए थे। उन्‍होंने बताया कि आगरा में एक दिन बिताने के बाद वे फतेहपुर सीकरी रेलवे स्‍टेशन के नजदीक खड़े थे, जब एक समूह ने उनका पीछा करना शुरू किया।

क्‍लार्क के अनुसार, ''शुरू में उन्‍होंने कुछ कहा, जो हमारी समझ में नहीं आया और फिर उन्‍होंने हमें रुकने को कहा ताकि वे मैरी के साथ सेल्‍फी ले सकें।''

शोषण जल्‍द ही हमले में बदल आया। दोनों की पिटाई की गई जिसमें क्‍लार्क के सिर में चोट आई है। डॉक्‍टर ने कहा कि उसके एक कान पर लगी चोट से सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। मैरी ड्रोज का हाथ भी टूट गया है और कई जगह चोट के निशान हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, घायल अवस्‍था में दोनों वहीं पड़े रहे। आस-पास खड़े लोग अपने मोबाइल फोन पर उनकी विडियो उतारते रहे।

भयावह अनुभव को याद करते हुए क्‍लार्क ने कहा, ''लड़के मना करने के बावजूद हमारे साथ चलते रहे। पूरे रास्‍ते वह तस्‍वीरें लेते रहे और मैरी के पास आने की कोशिश करते रहे। जो कुछ भी हम समझ सके, उसके अनुसार वे हमारे नाम और आगरा में हमारे रहने की जगह पूछ रहे थे। उन्‍होंने हमें किसी जगह ले जाने को कहा, जिसपर हमने मना कर दिया। कुछ देर बाद मेरे ऊपर लाठियां और पत्‍थर बरसने लगे। जब मैरी ड्रोज ने रोका तो उसे भी नहीं छोड़ा गया।

मैरी ड्रोज ने कहा कि पहले मुझे लगा कि वह एक महिला पर हमला नहीं करेंगे, मगर वह गलत निकलीं। उन्‍होंने कहा, ''मुझे नहीं पता उन्‍होंने क्यों हमला किया? वे हमारा कोई सामान नहीं ले गए।''

मैरी ड्रोज ने इस बात से भी इनकार किया कि वे दोनों 'किस' कर रहे थे। किसी एक स्‍थानीय पुलिसकर्मी ने 'भीड़ के गुस्‍से' के पीछे इसी को वजह बताने की कोशिश की थी, जिसे ड्रोज ने 'अफवाह' करार दिया।

मेक इन इंडिया को झटका: चीन ने टेस्ला का प्लांट हासिल किया

अमेरिकी मोटर निर्माता कंपनी टेस्ला इंक के प्रोडक्ट आर्किटेक्ट एलन मस्क ने कंपनी का नया कारखाना चीन में खोलने का फैसला किया है।

द वाल स्ट्रीट जनरल की खबर के अनुसार, टेस्ला ने पहली बार अमेरिका से बाहर कारखाना खोलने के लिए चीन के साथ करार कर लिया है। टेस्ला के इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' मुहिम को बड़ा झटका माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन में बनने वाले इस कारखाने का मालिक टेस्ला होगा, न कि उसे तैयार करने वाला स्थानीय निर्माता। चीन ने इलेक्ट्रिक वेहिकल मैनुफैक्चर्स की सुविधा के लिए हाल ही में कुछ कानूनी रियायतें दी हैं। माना जा रहा है कि चीन टेस्ला को 25 प्रतिशत आयात शुल्क में शायद ही छूट दे।

मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने टेस्ला को किसी भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता के साथ भारत में कारखाना खोलने के लिए प्रस्ताव दिया था।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में टेस्ला के फ्रीमोंट स्थित कारखाने का दौरा किया था। इसी साल जून में टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने ट्विटर पर सूचित किया था कि उनकी कंपनी इस मसले पर भारत सरकार के साथ बातचीत कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, कार कंपनी स्थानीय कारखाने के निर्माण तक आयात से जुड़े जुर्माने और अन्य पाबंदियों में ढील चाहती थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2014 को 'मेक इन इंडिया' योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में निर्माण के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके माध्यम से भारत सरकार देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ावा दे रही है। सरकार को उम्मीद है कि 'मेक इन इंडिया' से देश में निवेश के साथ ही रोजगार में भी बढ़ोत्तरी होगी।

रोहिंग्या नरसंहार: म्यांमार सेना के खिलाफ अमेरिका ने प्रतिबन्ध लगाया

अमेरिका ने म्यांमार की उन ईकाइयों और अधिकारियों को दी जा रही सैन्य सहायता वापस लेने का ऐलान किया है जो रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा में शामिल थे।

इस हिंसा की वजह से बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार छोड़ कर भागना पड़ा है।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नॉर्ट ने दंडात्मक कदमों का ऐलान करते हुए कहा, ''रखाइन प्रांत में हाल ही में हुई हिंसा की वजह से रोहिंग्या तथा अन्य समुदायों को जिस तरह की तकलीफ उठानी पड़ी है, उसके लिए हम गहरी चिंता प्रकट करते हैं।''

उन्होंने कहा कि यह अनिवार्य हो गया है कि ज्यादतियों के लिए जिम्मेदार राज्येत्तर तत्वों सहित लोगों तथा संस्थाओं को जवाबदेह ठहराया जाए।

रखाइन प्रांत में हिंसा की वजह से बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम देश छोड़कर बांग्लादेश चले गए जिससे वहां (बांग्लादेश में) गहन मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है।

हीथर नॉर्ट ने कहा कि अमेरिका अपने मित्रों और सहयोगियों के साथ जवाबदेही संबंधी विकल्प पर विचार कर रहा है।

हीथर ने एक बयान में कहा कि अमेरिका लोकतंत्र की ओर म्यांमार के बढ़ने के साथ ही रखाइन प्रांत में मौजूदा संकट को दूर करने के प्रयासों में मदद करता रहेगा।

नॉर्ट ने कहा, ''हालांकि म्यांमार की सरकार और इसके सशस्त्र बलों को सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे।''

रखाइन प्रांत में सेना की कार्रवाई के बाद म्यांमार से अब तक 600,000 रोहिंग्या मुस्लिम अपना घर छोड़कर सीमा पार कर बांग्लादेश चले गए। यह संकट अगस्त महीने के आखिर में तेज हुआ है।

म्यांमार के सुरक्षा बलों पर उग्रवादियों के हमलों के बाद सेना ने इस समुदाय पर कार्रवाई शुरू की थी।

नॉर्ट ने कहा कि अमेरिका ने म्यांमार की सेना के मौजूदा और पूर्व नेतृत्व पर लगे यात्रा प्रतिबंध हटाने पर विचार करना 25 अगस्त से बंद कर दिया है।

वहीं, सोमवार को खबर आई थी कि संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों, सरकार के मंत्रियों और अधिकार समूहों से जुड़े नेता एक सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं जिसका उद्देश्य बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए रकम जुटाना है।

यूरोपीय संघ, कुवैत सरकार और संयुक्त राष्ट्र की प्रवासी, शरणार्थी और मानवीय सहायता समन्वय एजेंसियों का उद्देश्य फरवरी तक संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए 43.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता के लक्ष्य को हासिल करना है।

अधिकारियों ने कहा था कि अब तक इस लक्ष्य का महज एक चौथाई ही जुट पाया है।

अफगानिस्तान में मिलिट्री एकेडमी पर आत्मघाती हमला, सेना के 15 कैडेट्स की मौत

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में सेना के शिविर से निकलते समय आत्मघाती बम हमले में अफगान सेना के 15 प्रशिक्षु मारे गए।

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता दौलत वजीरी ने कहा, ''शनिवार दोपहर सेना के कैडेट मिलिट्री अकादमी से जब एक मिनी बस में बाहर आ रहे थे, तो एक आत्मघाती बम हमलावर ने उन्हें निशाना बनाया जिसमें 15 कैडेट मारे हो गए और चार जख्मी हो गए।''

वहीं, अफगानिस्तान में जुम्मे की नमाज के दौरान दो मस्जिदों में हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 63 लोगों की मौत हो गई है। इन हमलों में काबुल में एक शिया मस्जिद और पश्चिमी गोर प्रांत में एक सुन्नी मस्जिद को निशाना बनाया गया था।

युद्ध से प्रभावित अफगानिस्तान में पिछले सप्ताह कई हमले हुए।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इन हमलों की निंदा करते हुए एक बयान में कहा कि सभी धर्मों और जातियों को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों को समाप्त करने के लिए सुरक्षा बल लड़ाई तेज करेंगे।

गृह मंत्रालय के अधिकारी मेजर जनरल अलीमस्त मोमांद ने बताया कि काबुल की शिया मस्जिद इमाम जमान में एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। इस हमले में 30 लोगों की मौत हो गई और 45 घायल हो गए।

प्रांतीय पुलिस प्रमुख के प्रवक्ता मोहम्मद इकबाल निजामी ने बताया कि गोर प्रांत के एक सुन्नी मस्जिद में जुम्मे की नमाज के दौरान हुए आत्मघाती हमले में 33 लोगों की मौत हो गई। इस हमले की जिम्मेदारी तत्काल किसी समूह ने नहीं ली है।

अमेरिकी सरकार ने भी काबुल और गोर में हुए हमलों सहित इस सप्ताह अफगानिस्तान में हुए अन्य हमलों की निंदा की है।