अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा है कि अमेरिकी सैन्य और खुफिया एजेंसियों की निगरानी में पिछले तीन-चार सालों के दौरान आतंकवादी संगठन, इस्लामिक स्टेट (आईएस) उनके देश में उभर कर सामने आया है।
लंदन में 'रशिया टुडे' के साथ एक साक्षात्कार में करजई ने कहा कि उन्हें संदेह है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी अड्डों का इस्तेमाल आईएस की सहायता के लिए किया जाता है।
उन्होंने कहा, ''अफगानिस्तान के कई हिस्सों में सैन्य हेलीकाप्टरों द्वारा आईएस को आपूर्ति किए जाने की दैनिक खबरें मुझे अफगानी लोगों से मिली हैं।''
करजई ने कहा कि 9/11 से आज तक, अरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद अफगानिस्तान में चरमवाद सिर उठाए हुए है।
उन्होंने कहा कि अफगानी लोग पूछते हैं कि अगर अमेरिका अफगानिस्तान में आतंकवाद को हराने के लिए आया था, तो आज वह इतना अधिक क्यों है''?
करजई ने कहा, ''हम नहीं चाहते हैं कि हमारे देश में विशाल, विनाशकारी हथियारों से बमबारी करनी चाहिए। हम शांति चाहते हैं।''
उन्होंने कहा कि अमेरिकी बलों द्वारा एम ओ ए बी (बमों का बाप) का इस्तेमाल उत्तर कोरिया को अमेरिकी शक्ति का अंदाजा कराने का एक संकेत था, लेकिन यह अफगान लोगों पर एक क्रूरता थी। इस साल 13 अप्रैल को अमेरिका ने पूर्वी अफगानिस्तान में आईएस द्वारा उपयोग किए जाने वाले एक सुरंग परिसर पर अपने एक सबसे बड़े गैर-परमाणु बम को गिराया था। अफानिस्तान में इस तरह के हथियार का इस्तेमाल पहली बार किया गया था।
उन्होंने कहा, ''विशेष रूप से विदेशी सेनाओं द्वारा सैन्य कार्रवाई, शांति नहीं लाएगी। अफगानों को समझौते की तलाश के लिए तालिबान समेत सभी लोगों तक पहुंच बनाने के लिए आम सहमति तैयार करने की जरूरत है।''
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका को शांति लाने के लिए चीन, रूस, पाकिस्तान समेत भारत में सहकारी साझेदार बनने की जरूरत है।
पाकिस्तान के संबंध में करजई ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान के साथ मिलकर रहना होगा।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ उनके रिश्ते में दो मजबूत विरोधाभास हैं, ''जब हम शरणार्थी बने, तो पाकिस्तानी लोगों ने हमारा स्वागत किया। लेकिन उन्होंने मुजाहिदीन (सोवियत के खिलाफ) का समर्थन करने का खतरनाक काम किया, जिसने हमारे समाज को कमजोर कर दिया।''
करजई ने कहा कि उन्हें लगता है कि क्षेत्र के लिए नई अमेरिकी नीति में एक अमानवीय उद्देश्य के लिए अमेरिका पाकिस्तान का इस्तेमाल उसके पड़ोसी देश के खिलाफ करेगा।
उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान के साथ इसलिए हाथ मिलाना चाहते हैं, ताकि हम इस गहरी साजिश से बच सकें।
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने अलगाववादियों और नक्सलियों द्वारा बच्चों की भर्ती किए जाने पर चिंता जाहिर की है और कहा है कि सशस्त्र समूहों और सरकार के बीच हिंसा की घटनाओं से वह लगातार प्रभावित होते हैं, खासकर छत्तीसगढ़, झारखंड और जम्मू और कश्मीर क्षेत्र में।
'चिल्ड्रेन इन आर्म्ड कॉन्फलिक्ट' पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र को लगातार सशस्त्र समूह द्वारा बच्चों के इस्तेमाल और नियुक्ति की खबर प्राप्त हो रही है जिसमें नक्सली समूह भी शामिल हैं, खासकर छत्तीसगढ़ और झारखंड में।
सरकारी सूचना के मुताबिक, जम्मू और कश्मीर में सशस्त्र समूहों द्वारा कम से कम 30 स्कूलों को जलाया गया और आंशिक रूप से नुकसान पहुंचाया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके साथ ही सरकारी रिपोर्ट इस बात की भी पुष्टि करते हैं कि इन क्षेत्रों में कई हफ्तों तक चार स्कूलों का सैन्य इस्तेमाल किया गया।
खबरों के मुताबिक, सशस्त्र समूह बच्चों को नियुक्त करने के लिए उनका अपहरण कर अभिभावकों को डराते हैं जो उसके बाद सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और संदेशवाहकों, मुखबिरों और गार्ड के तौर पर बाल दस्तों में सेवाएं देते हैं।
उन्होंने निरीक्षण और रिपोर्टिंग पर लगे प्रतिबंधों का हवाला देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सशस्त्र समूहों द्वारा बच्चों के इस्तेमाल और नियुक्ति पर इन रिपोर्टों को प्रमाणित करने में असमर्थ हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने सशस्त्र समूहों द्वारा आत्मघाती हमलों के लिए बच्चों की नियुक्ति और इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है। इसमें मदरसे के बच्चे भी शामिल हैं।
उन्होंने संघर्षरत क्षेत्रों में सभी पक्षों को संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय एवं मानवाधिकार कानूनों तथा सुरक्षा परिषद् से संबंधित प्रस्तावों के आधार पर अपने दायित्वों से बच्चों की सुरक्षा को बेहतर बनाने की अपील की।
अमेरिका के एक प्रमुख थिंक टैंक यूनाइटेड इंस्टीट्यूट आॅफ पीस के एक विशेषज्ञ ने कहा कि अमेरिका-पाकिस्तान रिश्ते गंभीर संकट में हैं और दोनों देशों के बीच अविश्वास गहरा गया है।
इसके एक दिन पहले ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अपना तीन दिवसीय अमेरिका दौरा खत्म किया है। कांग्रेस से वित्त पोषित अमेरिकी थिंक टैंक यूनाइटेड इंस्टीट्यूट आॅफ पीस में पाकिस्तान पर विशेषज्ञ मोईद यूसुफ ने कहा कि इस्लामाबाद और वाशिंगटन एक-दूसरे की मंशा को बेहद संदेहास्पद नजरिए से देखते हैं।
यूसुफ ने शुक्रवार को पीटीआई को बताया, ''मुझे लगता है कि यह रिश्ता गंभीर संकट में है।''
उनकी यह टिप्पणी पाकिस्तानी विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ के तीन दिवसीय वाशिंगटन दौरा शुक्रवार को खत्म करने के बाद आई है। अपनी यात्रा के दौरान आसिफ ने अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एच आर मैक्मास्टर से मुलाकात की।
आसिफ से जब पूछा गया कि वह अपनी यात्रा से क्या लेकर लौट रहे हैं तो उन्होंने कहा, ''यह असाधारण नहीं होगा। विदेश मंत्री से काफी अच्छी मुलाकात रही। मैक्मास्टर से मुलाकात में मैं थोड़ा सतर्क था, लेकिन वह अच्छी थी। यह बुरी नहीं थी। मुझे लगता है कि हमें चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान के रूप में संपर्क के इस रूख को बरकरार रखने की जरूरत है।''
अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों के विशेषज्ञ यूसुफ ने कहा कि यहां असली मुद्दा अविश्वास का है। उन्होंने कहा, ''यह अविश्वास इतना गहरा है कि दोनों पक्षों के लिए इससे बाहर निकलकर उस तरीके को तलाशना बेहद मुश्किल होगा जिसमें वे एक-दूसरे पर जरूरी भरोसा कायम रख सकें।
यह विश्वास कर सकें कि वे जो कुछ भी करेंगे, उसके प्रति गंभीर होंगे। दो पक्षों की स्थिति ऐसी है कि वे दूसरे पक्ष की मंशा को लेकर बेहद संदेहास्पद नजरिया रखते हैं।'' यूसुफ ने कहा कि किसी को भी इसमें जल्द किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि अगर पाकिस्तान अपने तौर-तरीके नहीं बदलता है और आतंकी समूहों को समर्थन देना जारी रखता है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उसके खिलाफ हर जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं।
मैटिस ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अगर वह अपनी धरती पर आतंकियों की सुरक्षित पनाहगाह के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है तो उसे वैश्विक स्तर पर राजनयिक रूप से अलग-थलग किया जा सकता है और उससे गैर-नाटो सहयोगी का दर्जा छीना जा सकता है।
सबसे अहम सवाल कि आतंकवादियों के पास हथियार आता कहाँ से है?
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एक सूफ़ी दरगाह पर आत्मघाती हमला हुआ है। इस हमले में 13 लोगों के मारे जाने और 20 के घायल होने की ख़बर है।
जब धमाका हुआ उस समय दरगाह में बड़ी तादाद में श्रद्धालु जमा थे। बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के पास झल मग्सी ज़िले की दरगाह में यह धमाका हुआ है।
एक स्थानीय अधिकारी असद ककर ने बताया, ''जिस समय श्रद्धालु सूफ़ी संत सैयद चीसल शाह की सालगिरह के जश्न में शामिल होने के लिए दरगाह में इकट्ठे हो रहे थे, उसी समय हमलावर वहां पहुंचा, पुलिस ने जब उसे गेट पर रोका तो उसने खुद को बम से उड़ा दिया।''
पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, सुरक्षाबलों ने इमारत को सील बंद कर दिया है।
फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि धमाके के पीछे किस संगठन का हाथ है, हालांकि पिछले कुछ सालों से सूफ़ी दरगाहें इस्लामी चरमपंथियों के निशाने पर रही हैं।
फरवरी माह में पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत के सहवान इलाके में एक मस्जिद में धमाका किया गया था, इस धमाके में 80 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
इराक के कुर्द क्षेत्र में आज़ादी के लिए हुए जनमत संग्रह में ऐतिहासिक मतदान हुए हैं।
वोटों की गिनती जारी है और कुर्दिस्तान की आज़ादी के लिए 'हां' के पक्ष में मिलने वाले वोटों के बाद बड़ी जीत की उम्मीद जताई जा रही है।
कुर्दों का कहना है कि ये मतदान उन्हें अलग होने के लिए बातचीत करने का जनादेश देगा, लेकिन इराकी प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी ने इसे असंवैधानिक करार दिया।
इराक के पड़ोसी देश तुर्की और ईरान ने अपने देशों में कुर्द अल्पसंख्यकों के बीच अशांति फैलने की आशंका को देखते हुए सीमाएं बंद करने और तेल के निर्यात को रोकने की चेतावनी दी है।
अमरीका ने भी इस जनमत संग्रह को बेहद निराशाजनक बताया है।
अमरीका ने कहा, ''हमारा मानना है कि इस कदम से कुर्द क्षेत्र और वहां रहने वाले लोगों के बीच अस्थिरता और कठिनाइयां पैदा होंगी।''
तीन राज्यों समेत कुर्द सेनाओं के अधिकार वाले क्षेत्रों में भी जनमत संग्रह के दौरान शांति रही। हालांकि इन क्षेत्रों पर इराक़ अपना दावा करता है।
चुनाव आयोग के मुताबिक, जनमत संग्रह में 72 फ़ीसदी लोगों ने हिस्सा लिया।
हालांकि कुर्दिश वेबसाइट RUDAW के मुताबिक, 90 फ़ीसदी लोगों ने आज़ादी के पक्ष में वोट डाला।
कुर्दिस्तान क्षेत्र की राजधानी इर्बिल और विवादित शहर किरकुक में जनमत संग्रह के बाद जश्न के नज़ारे देखने को मिले।
इन जगहों पर अशांति फैलने के डर से सोमवार रात को कर्फ्यू लगाया गया था।
33 साल के दियार अबुबक्र ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, ''आज हमारी आज़ादी का दिन है। इसी के चलते मैंने अपनी पारंपरिक पोशाक पहनी है, इसे मैंने ख़ासतौर पर इसी मौक़े के लिए ख़रीदा था।''
इराक़ की कुल आबादी में कुर्दों की हिस्सेदारी 15 से 20 फीसदी के बीच है।
साल 1991 में स्वायत्तता हासिल करने के पहले उन्हें दशकों तक दमन का सामना करना पड़ा।
कुर्दों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सोमवार को 18 साल से ज़्यादा उम्र वाले क़रीब 52 लाख कुर्द और गैर कुर्द लोगों के लिए मतदान शुरू हुआ।
हालांकि गैर कुर्द आबादी वाले क्षेत्रों में कुर्दों और इराकी सरकार के बीच कुछ बातों को लेकर विरोध भी है।
विवादित शहर किरकुक में स्थानीय अरब और तुर्क समुदाय ने जनमत संग्रह का बहिष्कार किया।
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री री योंग-हो ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर उनके देश के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने का आरोप लगाया है।
योंग-हो ने कहा है कि यूएस बॉम्बर्स को मार गिराने का अधिकार उनके पास है।
उन्होंने कहा कि यूएस बॉम्बर्स को उस हालत में भी मार गिराया जा सकता है, जबकि वो उत्तर कोरिया के वायु क्षेत्र में न हों। दुनिया को 'ये साफ़-साफ़ याद रखना चाहिए' कि युद्ध की घोषणा अमरीका ने पहले की है।
व्हाइट हाउस ने उत्तर कोरिया के इस बयान को बेतुका बताते हुए खारिज कर दिया है।
अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने उत्तर कोरिया को चेतावनी दी है कि वो उकसाने वाली कार्रवाई बंद कर दे।
वहीं संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने कहा है कि दोनों देशों के बीच चल रही आक्रामक बातचीत से नुक़सानदेह ग़लतफहमियां हो सकती हैं।
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था। इसके बाद अमरीकी राष्ट्रपति ने ट्वीट कर कहा था, ''अभी संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री का भाषण सुना। अगर वो भी लिटिल रॉकेट मैन के सुर में सुर मिलाते रहे तो, वो ज़्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे।''
ट्रंप के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर कोरिया मंत्री ने कहा, ''बहुत जल्द ही उनका देश इस बात का जवाब दे देगा कि कौन ज़्यादा दिनों तक नहीं बचा रहेगा।''
उत्तर कोरिया मंत्री के बयान के बाद पेंटागन के प्रवक्ता कर्नल रॉबर्ट मैनिंग ने कहा, ''अगर उत्तर कोरिया अपनी आक्रामक गतिविधयां नहीं रोकता है तो आप जानते हैं कि हम सुनिश्चित करेंगे कि राष्ट्रपति के पास उत्तर कोरिया से निबटने के सभी विकल्प मौजूद रहें।''
वहीं संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस संकट का समाधान सिर्फ़ कूटनीतिक तरीके से ही हो सकता है।
पिछले कुछ समय से अमरीका और उत्तर कोरिया एक-दूसरे पर जुबानी हमले कर रहे हैं।
हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि तीखी होती जुबानी जंग के बावजूद दोनों देशों के बीच आमने-सामने का संघर्ष होने की संभावना बहुत कम है।
भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव और तमाम पाबंदियों के बावजूद उत्तर कोरिया ने पिछले हफ्तों में बैलेस्टिक मिसाइलों का परीक्षण जारी रखा था।
उत्तर कोरिया के नेताओं का कहना है कि उनके परमाणु हथियार केवल सुरक्षा के लिए हैं और उन ताक़तों के ख़िलाफ़ हैं, जो उसे बर्बाद करने की नीयत रखते हैं।
इसी महीने की शुरुआत में ताक़तवर परमाणु परीक्षण करने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ नई पाबंदियों का ऐलान किया था।
इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र की आज़ादी के लिए जनमत संग्रह में क्षेत्र के तीन राज्यों के लोगों ने मतदान किया है।
इराक़ की सरकार और कुर्द लोग जिस विवादित क्षेत्र पर दावा करते हैं, वहां भी वोटिंग हुई। इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी ने जनमत संग्रह को 'अंसवैधानिक' बताते हुए इसकी निंदा की है।
इराक़ के कुछ पड़ोसी देशों ने भी जनमत संग्रह की आलोचना की है।
कुर्द नेताओं का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि जनमत संग्रह में 'हां' के पक्ष में नतीजे आएंगे और इससे उन्हें अलगाव के लिए लंबी बातचीत का जनादेश मिलेगा।
मध्य पूर्व में कुर्द चौथा सबसे बड़ा जातीय समूह है, लेकिन वो कभी कोई स्थायी राष्ट्र हासिल नहीं कर सके हैं।
इराक़ की कुल आबादी में कुर्दों की हिस्सेदारी 15 से 20 फीसदी के बीच है। साल 1991 में स्वायत्तता हासिल करने के पहले उन्हें दशकों तक दमन का सामना करना पड़ा।
कुर्दों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सोमवार को 18 से अधिक उम्र वाले करीब 52 लाख कुर्द और गैर कुर्द लोगों के लिए मतदान शुरु हुआ। कुर्दिस्तान की रुडॉ समाचार एजेंसी के मुताबिक, मतदान बंद होने के करीब एक घंटे पहले 76 फीसदी लोग वोट डाल चुके थे।
इरबिल में वोटिंग के लिए लाइन में लगे एक व्यक्ति ने समाचार एजेंसी रायटर्स से कहा, ''हम सौ सालों से इस दिन का इंतज़ार कर रहे थे। ईश्वर की मदद से हम एक राज्य चाहते हैं। आज सभी कुर्दों के लिए जश्न का दिन है।''
हालांकि इसकी उम्मीद नहीं है कि सभी कुर्दों ने 'हां' के पक्ष में मतदान किया हो।
द चेंज मूवमेंट (गोरान) और कुर्दिस्तान इस्लामिक ग्रुप पार्टीज़ ने कहा कि वो आज़ादी का समर्थन करते हैं, लेकिन उन्हें जनमत संग्रह आयोजित करने के समय पर आपत्ति है।
अलगाव के आर्थिक और राजनीतिक जोखिमों की वजह से व्यापारी शसवार अब्दुलवाहिद क़ादिर ने 'नोफॉरनाऊ' अभियान चलाया।
विवादित शहर किरकुक में स्थानीय अरब और तुर्क समुदाय ने बहिष्कार का ऐलान किया। सोमवार रात मतदान ख़त्म होने के बाद अशांति की आशंका में गैर कुर्द ज़िलों में कर्फ्यू लगा दिया गया।
इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी ने रविवार को चेतावनी दी थी कि जनमत संग्रह 'इराक की शांति और इराक के लोगों के सहअस्तित्व को जोखिम में डालेगा और ये क्षेत्र के लिए ख़तरा है।''
उन्होंने कहा कि वो 'देश की एकता और सभी इराकियों को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाएंगे।'
अबादी सरकार ने कहा है कि कुर्दिस्तान क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे और सीमा पार करने वाली चौकियां उनके नियंत्रण में आनी चाहिए। अबादी सरकार ने सभी देशों से कहा है कि वो 'तेल और सीमा के मुद्दों पर सिर्फ उनके साथ संपर्क करें।'
तुर्की और ईरान जैसे पड़ोसी देशों ने भी जनमत संग्रह पर जोरदार आपत्ति जाहिर की। उन्हें आशंका है कि इससे उनके देश के कुर्द अल्पसंख्यकों के बीच भी अलगाव की भावना पैदा हो सकती है।
चीन के साथ चल रहे संयुक्त अभ्यास के बीच, पाकिस्तान ने कहा कि उसने शनिवार को उत्तरी अरब सागर में सी किंग हेलीकॉप्टर से एंटी शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि एंटी शिप मिसाइल ने अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया।
पाकिस्तानी नौसेना के प्रवक्ता के मुताबिक, नौसेना प्रमुख एडमिरल मुहम्मद जकाउल्ला इस मिसाइल परीक्षण के गवाह बने और उन्होंने कहा कि सफल परीक्षण पाकिस्तानी नौसेना की युद्धक तैयारी और पेशेवर क्षमता का एक प्रमाण है।
नौसेना प्रमुख ने समुद्र में तैनात नौसेना की इकाइयों का भी दौरा किया और नौसेना के बेड़े से जुड़े अभ्यास देखे।
जकाउल्ला ने कहा, ''मुझे पाकिस्तानी नौसेना के बेड़े की युद्धक तैयारी देखकर गर्व है।''
उन्होंने कहा कि नौसेना किसी भी कीमत पर समुद्री सीमाओं और पाकिस्तान के हितों की रक्षा करेगी।
चीनी और पाकिस्तानी वायुसेना के पायलटों ने उसी विमान में बैठकर मिसाइल का परीक्षण किया, जिसमें एक दिन पहले ही दोनों ने संयुक्त अभ्यास किया था।
सिन्हुआ ने कहा कि यह दो सेनाओं के बीच गहरे पारस्परिक विश्वास का प्रतीक है। 'शाहीन छह' नामक संयुक्त अभ्यास के दौरान, वायुसेना कर्मियों ने रणनीति तैयार करने और उन्हें क्रियान्वित करने में सहयोग किया, और साथ ही एक-दूसरे से सामरिक सिद्धांतों और रणनीति की सीख ली।
इससे पहले मार्च में, नौसेना ने एंटी शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। यह परीक्षण तटीय क्षेत्र से किया गया था और मिसाइल ने समुद्र में एक लक्ष्य को भेदा था।
पाकिस्तानी नौसेना ने मई में ब्रिटेन से बहु-भूमिका वाले सात अतिरिक्त वेस्टलैंड सी किंग हेलीकाप्टर प्राप्त किए थे, जिनका ठेका 2016 में दिया गया था।
भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में फंसे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिवार की संपत्ति को जब्त कर लिया गया है।
पाकिस्तान की शीर्ष भ्रष्टाचार निरोधी संस्था ने आज (22 सितंबर को) कार्रवाई करते हुए उनकी और परिवार की संपत्ति जब्त की है। 67 साल के शरीफ को पिछले 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने पनामा पेपर केस में दोषी ठहराते हुए पीएम पद से बर्खास्त कर दिया था और शरीफ और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार का केस चलाने का आदेश दिया था।
शरीफ के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की सुनवाई करने वाले पाकिस्तान के उत्तरदायित्व न्यायालय ने आज सुनवाई करते हुए शरीफ, उनकी बेटी मरियम और दामाद कप्तान (सेवानिवृत्त) सफदर को 26 सितंबर को पेश होने के लिए बुलाया है।
नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो के अधिकारियों ने शरीफ के रायविन्ड स्थित घर पर पहुंचकर कोर्ट का समन और अटैचमेंट ऑर्डर दिखाया और शरीफ परिवार की संपत्ति सीज कर ली।
बता दें कि नवाज शरीफ अपने बच्चों के साथ इन दिनों लंदन में हैं, जहां उनकी पत्नी कुलसुम का इलाज चल रहा है।
पाकिस्तान में इस बात की भी चर्चा है कि शायद नवाज शरीफ और उनका परिवार भ्रष्टाचार से जुड़े मुकदमों की पैरवी के लिए पाकिस्तान वापस ना आए।
हालांकि, सत्तारूढ़ पीएमएल (एन) का कहना है कि जब शरीफ की पत्नी की तबीयत थोड़ी ठीक हो जाएगी, तब शरीफ वतन वापस लौटेंगे।
इधर नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो के अधिकारियों ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान और अन्य कॉमर्शियल बैंकों को पत्र लिखकर नवाज शरीफ और उनके परिवार के बैंक खातों पर नजर रखने को कहा है।
अंतर्राष्ट्रीय पीपुल्स ट्रिब्यूनल ने रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ नरसंहार के लिए म्यांमार को शुक्रवार को दोषी ठहराया और कहा कि म्यांमार की सेना द्वारा 'सुनियोजित तरीके से नागरिकों को निशाना बनाने' को और उनके दूसरे कृत्यों को युद्ध अपराध माना जाना चाहिए।
रोहिंग्या के खिलाफ राज्य में हो रहे कथित अत्याचार व अपराध पर सुनवाई कर रही परमानेंट पीपुल्स ट्रिब्यूनल (पीपीटी) की सात सदस्यीय पीठ ने कहा कि म्यांमार सेना 'आधिकारिक कर्तव्यों के संदर्भ' में अपराध कर रही है।
ट्रिब्यूनल के फैसले में कहा गया है, ''प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ट्रिब्यूनल सहमति से इस फैसले पर पहुंचा है कि म्यांमार का रोहिंग्या लोगों और दूसरे मुस्लिम समूहों के नरसंहार का इरादा है। म्यांमार रोहिंग्या समूह के खिलाफ हो रहे नरसंहार का दोषी है। इसके अलावा रोहिंग्या के खिलाफ नरसंहार जारी है और इसे रोका नहीं गया तो भविष्य में नरसंहार के हताहतों की संख्या ज्यादा हो सकती है।''
पीपीटी ने कुआलालंपुर में यह सुनवाई ऐसे समय में आयोजित की और म्यांमार के पीड़ितों को सुना है, जब अपने देश में हो रहे उत्पीड़न से बचने के लिए लाखों रोहिंग्या मुस्लिम पलायन कर गए हैं।
पलायन कर चुके रोहिंग्या मुसलमानों के बयानों को 18 सितंबर से 22 सितंबर तक मलाया विश्वविद्यालय के कानून संकाय में दर्ज किया गया। इसके लिए कानून संकाय में अदालत जैसी व्यवस्था की गई थी।
रोम आधारित पीपीटी ट्रिब्यूनल का मकसद रोहिंग्या के खिलाफ कथित अमानवीय व्यवहार को उजागर करना और उनके खिलाफ अपराध को रोकना है।
ट्रिब्यूनल के फैसले को खास तौर से संयुक्त राष्ट्र सहित अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को भेजा जाएगा, जिससे म्यांमार में हिंसा खत्म करने के लिए आगे के कदम उठाए जाएं।









