डोकलाम गतिरोध को लेकर एक बार फिर से चीनी मीडिया भारत को लगातार आंख दिखा रही है। इस बार चीनी मीडिया ने भारत को जंग के लिए ललकारा है। चाईना डेली ने अपने संपादकीय में लिखा है, ''दो ताकतों के बीच टकराव होने की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। समय हाथ से निकलता जा रहा है।''
संपादकीय में यह भी लिखा है कि भारत को जल्द ही अपने सैनिक क्षेत्र से हटा लेने चाहिए ताकि दोनों मुल्कों के बीच बातचीत हो सके और किसी तरह का संघर्ष न हो। 'न्यू डेह्ली शुड कम टू इट्स सेंसिस वाइल इट हैड टाइम' शीर्षक से प्रकाशित इस संपादकीय में और भी कई बातें लिखी गई हैं।
संपादकीय में आगे लिखा गया है, ''बीजिंग के पास समय है और इसी लिए उसने दोबारा यह मैसेज भेजा कि भारत अगर संघर्ष नहीं चाहता तो वह अपने सारे जवान हटा ले।''
इसके अलावा संपादकीय में भारत को यह भी कहा गया है कि वह चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ताकत को कम न समझे।
बता दें यह पहली बार नहीं है, जब चीनी मीडिया ने डोकलाम गतिरोध को लेकर भारत को धमकाया हो। इससे पहले भी वह कई बार ऐसा कर चुका है। चीन के एक दैनिक समाचार पत्र ने लिखा था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सख्त रुख के चलते भारत को युद्ध की ओर धकेल रहे हैं और अपने देशवासियों के भविष्य को दांव पर लगा रहे हैं।
चीन की सरकारी मीडिया 'ग्लोबल टाइम्स' में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि मोदी को चीन की सेना की अपार शक्ति से वाकिफ होना चाहिए जो डोकलाम में भारतीय सैनिकों को तबाह करने की क्षमता रखता है।
इसके अलावा बीते महीने भी पीपुल्स डेली नाम के एक और मीडिया संस्थान भारत को 1962 में छपा एक संपादकीय दोबारा साझा कर भारत को धमकाया था। 22 सितंबर 1962 के उस संपादकीय को दोबारा प्रकाशित कर, भारत पर आरोप लगाए गए थे कि उसने चीन को पहले भी भड़काने का काम किया था जिसे वह अब दोहरा रहा है और इस उकसावे को चीनी लोग बरदाश्त नहीं करेंगे।
डोकलाम गतिरोध खत्म करने के लिए एक साथ दोनों देशों के सैनिकों को हटाने के भारत के सुझाव को खारिज करते हुए चीन ने मंगलवार (8 अगस्त) को धमकी देते हुए कहा कि अगर वह उत्तराखंड के कालापानी क्षेत्र या कश्मीर में घुस जाएगा, तब नयी दिल्ली क्या करेगा?
यह पहला मौका है जब किसी चीनी अधिकारी ने कश्मीर मुद्दे को उछाला है। हालांकि, चीन सरकार के द्वारा संचालित ग्लोबल टाइम्स में इस तरह की एक टिप्पणी की गई थी। भारतीय सैनिकों ने चीनी सेना को सिक्किम के डोकलाम सेक्टर में एक सड़क बनाने से रोक दिया जिसके बाद इलाके में 50 दिनों से भारत और चीन के बीच गतिरोध चल रहा है।
चीन ने दावा किया कि वह अपनी सरजमीं के अंदर सड़क बना रहा है और वह डोकलाम पठार से भारतीय सैनिकों को फौरन हटाने की मांग कर रहा है।
भूटान ने कहा है कि डोकलाम उसका क्षेत्र है, लेकिन चीन ने इस इलाके को अपना होने का दावा किया है और कहा है कि थिम्पू का बीजिंग के साथ इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं है। चीनी विदेश मंत्रालय में सीमा और सागर मामलों की उप महानिदेशक वांग वेनली ने कहा कि एक दिन के लिए भी यदि सिर्फ एक भारतीय सैनिक भी रहता है तो भी यह हमारी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है।
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत के साथ चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है, वांग ने कहा, ''मैं सिर्फ इतना कह सकती हूं कि पीएलए और चीन सरकार के लिए, हमारे पास प्रतिबद्धता है। इसलिए, यदि भारत गलत रास्ते पर जाने का फैसला करता है या इस घटना के बारे में कोई भ्रम रखता है तो हमारे अधिकारों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक हमारे पास कोई भी कार्रवाई करने का अधिकार है। वांग एक भारतीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल को संबोधित कर रही थी।
उन्होंने कहा कि इस वक्त भारत के साथ वार्ता करना असंभव होगा। हमारे लोग सोचेंगे कि हमारी सरकार अक्षम है। जब तक कि भारत चीनी सरजमीं से सैनिकों को वापस नहीं बुला लेता है हमारे बीच कोई ठोस वार्ता नहीं हो सकती। उन्होंने भारत को छेड़ते हुए कश्मीर का मुद्दा उठाया और भारत और नेपाल के बीच के कालापानी विवाद का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि भारत के लिए ट्राई जंक्शन का इस्तेमाल करना कोई बहाना नहीं हो सकता। उन्होंने भारत के विदेश मंत्रालय के इस बयान का जिक्र किया जिसके तहत भारत ने कहा कि देश के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाले संकरे इलाके में चीन, भारत और भूटान ट्राई जंक्शन में सड़क का निर्माण यथास्थिति को बदल रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत के भी कई ट्राई जंक्शन हैं। क्या होगा जब हम यही बहाना बनाएंगे और चीन, भारत और नेपाल के बीच कालापानी क्षेत्र में घुस जाएंगे या भारत और पाकिस्तान के बीच के कश्मीर क्षेत्र में घुस जाएंगे। वांग ने कहा कि ट्राई जंक्शन का इस्तेमाल और अधिक संकट पैदा करेगा।
पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पीएमएल-एन के कुछ नेताओं का कहना है कि नवाज शरीफ ने पारिवारिक राजनीति की वजह से अपने छोटे भाई शहबाज शरीफ को बड़ी चतुराई से प्रधानमंत्री बनने से वंचित कर दिया, हालांकि इस पद के लिए शहबाज के नाम का ऐलान किया गया था।
बीते 28 जुलाई को पनामा पेपर्स मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के बाद नवाज ने ऐलान किया था कि 45 दिनों के लिए शाहिद खाकान अब्बासी के अंतरिम प्रधानमंत्री रहने के बाद 10 महीने के शेष कार्यकाल के लिए शहबाज प्रधानमंत्री होंगे।
परदे के पीछे बातचीत करने पर कुछ पीएमएल-एन नेताओं का कहना है कि शहबाज प्रधानमंत्री बनने का सुनहरा मौका चूक गए क्योंकि अब इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि 2018 में पार्टी का चुनाव जीतने पर वह प्रधानमंत्री बनेंगे।
पीएमएल-एन के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि शरीफ की बेटी मरियम भ्रष्टाचार के मामले में बरी नहीं होती हैं तो अगले साल होने वाले आम चुनाव में पीएमएल-एन की जीत होने पर शरीफ की पत्नी कुलसुम प्रधानमंत्री पद की प्रबल दावेदार होंगी।
इस नेता ने कहा, ''शायद शहबाज प्रधानमंत्री बनने का सुनहरा मौका चूक गए, यह उनके बड़े भाई की चतुराई भरी राजनीति की वजह से हुआ। कौन जानता है कि 2018 के चुनाव का नतीजा क्या होगा और उस वक्त परिवार की राजनीति क्या होगी। शरीफ को डर है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद शहबाज पार्टी पर कब्जा कर लेंगे और पंजाब की सत्ता अपने बेटे हमजा को सौंप देंगे।''
उल्लेखनीय है कि नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिया गया है। उनको प्रधानमंत्री के पद से हटा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनको दोषी करार दिया। नवाज का नाम पनामा पेपर में आया था। यह मामला 1990 के दशक में उस वक्त धनशोधन के जरिए लंदन में सपंत्तियां खरीदने से जुड़ा है जब शरीफ दो बार प्रधानमंत्री बने थे।
शरीफ के परिवार की लंदन में इन संपत्तियों का खुलासा पिछले साल पनामा पेपर्स लीक मामले से हुआ। इन संपत्तियों के पीछे विदेश में बनाई गई कंपनियों का धन लगा हुआ है और इन कंपनियों का स्वामित्व शरीफ की संतानों के पास है। इन संपत्तियों में लंदन स्थित चार महंगे फ्लैट शामिल हैं।
चीन के एक दैनिक समाचार पत्र ने लिखा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सख्त रुख के चलते भारत को युद्ध की ओर धकेल रहे हैं और अपने देशवासियों के भविष्य को दांव पर लगा रहे हैं।
चीन की सरकारी स्वामित्व वाली 'ग्लोबल टाइम्स' में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया है कि मोदी को चीन की सेना की अपार शक्ति से वाकिफ होना चाहिए जो डोकलाम में भारतीय सैनिकों को तबाह करने की क्षमता रखता है। भारत के साथ चल रहे सीमा विवाद पर बीते कुछ दिनों से चीन और चीनी मीडिया का रुख तीखा होता जा रहा है।
इस बीच चीन के रक्षा मंत्री ने भी बयान दिया है कि भारत, चीन के धैर्य का इम्तहान न ले।
वहीं भारत हमेशा नपी-तुली प्रतिक्रिया देता रहा है और सिक्किम सेक्टर को लेकर उपजे सीमा विवाद के सामाधान के लिए वार्ता का आह्वान करता रहा है।
चीनी अखबार लिखता है कि भारत ने ऐसे देश को चुनौती दी है जो ताकत में उससे कहीं अधिक दमदार है।
संपादकीय में कहा गया है, ''यह एक ऐसा युद्ध होगा, जिसका परिणाम पहले से तय है।''
वहीं अखबर यह भी कहता है कि भारत ने अपने रुख से चीन को हैरान किया है। संपादकीय में कहा गया है, ''सीमा पर तैनात भारतीय सैनिक चीनी सेना के दुश्मन नहीं हैं। अगर युद्ध छिड़ता है तो पीएलए सीमा पर तैनात भारत के सभी सैनिकों को तबाह करने में सक्षम है। मोदी सरकार का सख्त रवैया न तो कानूनी रूप से और न ही ताकत के आधार पर कहीं टिकता है। मोदी सरकार लापरवाही से अंतर्राष्ट्रीय नियमों को तोड़ती आ रही है और भारत की राष्ट्रीय गरिमा और शांतिपूर्ण विकास को खतरे में डाल रही है।''
चीनी अखबार आगे कहता है, ''क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए इसकी (भारतीय सेना की) गतिविधियां गैर-जिम्मेदाराना हैं और भारत के भविष्य और अपने देशवासियों के हित को दांव पर लगाने वाली हैं। अगर मोदी सरकार यहीं नहीं रुकी तो वह अपने देश को युद्ध की ओर धकेल देगी, जिसका नियंत्रण भारत के हाथ में नहीं होगा।''
संपादकीय में कहा गया है कि भारत दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तरह चीन को नहीं भड़का सकता।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि डोकलाम मुद्दे पर भारत को चीन के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए और हमारा धैर्य अब खत्म होने को है।
चीन के रक्षा मंत्रालय ने भारत को विवाद को टालने की रणनीति छोड़ने की चेतावनी भी दी। रक्षा मंत्रालय वहीं शांति की बात भी करता है, ''हम शांति स्थापित होने का अवसर देना चाहते हैं और भारत को इसके गंभीर परिणामों का अहसास करने का वक्त देना चाहते हैं।''
डोकलाम मुद्दे पर चीन की ओर से लगातार भड़काऊ बयान आने के बावजूद भारत लगातार कहता रहा है कि वह सीमा विवाद के समाधान के लिए बीजिंग के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए रखेगा और युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं होता।
भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को संसद में कहा था, ''भारत का हमेशा मानना है कि भारत-चीन सीमा पर शांति हमारे द्विपक्षीय संबंधों के सुचारू विकास के लिए महत्वपूर्ण शर्त है। हम कूटनीतिक माध्यमों के जरिए चीनी पक्ष से अस्ताना में अपने नेताओं में हुए सहमति पर पारस्परिक स्वीकार्य हल के लिए लगातार संपर्क जारी रखेंगे।''
उन्होंने कहा था, ''इस संदर्भ में भूटान के साथ पारंपरिक व अद्वितीय दोस्ती बनाए रखते हुए हम भूटान की राजशाही के साथ भी गहन परामर्श व समन्वय बनाए रखेंगे।''
चीन के एक सैन्य विशेषज्ञ ने कहा है कि उनका देश डोकलाम से अपने सैनिकों को वापस नहीं हटाएगा क्योंकि अगर वह ऐसा करता है तो भारत को भविष्य में उसके लिए समस्या खड़ी करने का प्रोत्साहन मिलेगा।
नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी ऑफ द पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ डिफेंस में सहायक प्राध्यापक यू दोंगशियोम ने कहा कि अगर भारतीय रणनीतिकार और नीति निर्माता यह सोचते हैं कि चीन वापस लौट जाएगा तो वह गलती कर रहे हैं।
यू ने कहा कि भारतीय सैनिकों को बिना शर्त तत्काल वापस हो जाना चाहिए। चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी सिन्हुआ में यू ने लिखा कि बीजिंग डोकलाम से सैनिकों को वापस नहीं बुलाएगा क्योंकि यह क्षेत्र चीन से संबंधित है और ब्रिटेन और चीन के बीच 1890 की संधि इस बात का प्रमाण है।
यू ने कहा, ''अगर चीन अभी पीछे हटता है, तो भारत भविष्य में और अधिक समस्याएं पैदा करने के लिए प्रोत्साहित होगा। बीजिंग और नई दिल्ली के बीच कई सीमाओं पर मतभेद हैं, लेकिन डोकलाम इनमें शामिल नहीं है।''
वहीं, भारत ने कहा है कि अगर चीन अपनी सेना वापस लेता है तो वह भी अपने सैनिकों को वहां से हटा लेगा।
यू ने कहा, ''कुछ भारतीय रणनीतिकार और नीतिकार इस गलतफहमी में हैं कि चीन निहित स्वार्थो, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में अधूरे सुधारों और चीन-अमेरिका रणनीति में भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, यह सोचकर वापस लौट जाएगा।''
गौरतलब है कि चीन और भूटान के बीच डोकलाम एक विवादित क्षेत्र है। भारत और भूटान इसे भूटानी क्षेत्र मानते हैं। डोकलाम में 16 जून को चीनी सेना द्वारा सड़क निर्माण को लेकर भारतीय व चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध शुरू हुआ था। डोकलाम पर स्वामित्व पर कोई फैसला न होने का हवाला देते हुए भारतीय सैनिकों ने चीन के सड़क निर्माण कार्य को रोक दिया था।
यू ने कहा, ''भारत के लिए सैन्य अधिकारियों को चीनी क्षेत्र में भेजना अवैध है, फिर चाहे वह भूटान की सुरक्षा चिंताओं या संरक्षण के बहाने भी क्यों न हो। भारत ने अपनी कार्रवाई के संबंध में कोई कानूनी आधार प्रदान नहीं किया है।''
यू के अनुसार, ''भारत भूटान की रक्षा के नाम पर अपनी कार्रवाई को जायज साबित करने का प्रयास कर रहा है और तर्क दे रहा है कि डोकलाम भूटानी क्षेत्र है। अगर यही मामला है तो भारत कैसे अपने सैनिकों को वहां भेजने का दावेदार बन गया है।''
भारत के लिए डोकलाम का बड़ा रणनीतिक महत्व है क्योंकि यह उसके बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी गलियारे के करीब है जो शेष भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।
यू ने कहा कि भारत की अपनी सुरक्षा चिंताएं पड़ोसी देश पर सैन्य कब्जे की गारंटी नहीं दे सकती हैं। अगर उन्होंने ऐसा किया तो कोई भी देश विशुद्ध रूप से अपनी आंतरिक सुरक्षा चिंताओं के तहत किसी भी पड़ोसी देश में अपने सैन्य बलों को भेज सकता है। उन्होंने कहा, ''चीन विदेशी सैन्य दबाव के समक्ष कभी नहीं झुकेगा और हर कीमत पर अपनी मिट्टी की रक्षा करेगा।''
शहबाज शरीफ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री होंगे। इस बात का ऐलान पाकिस्तानी मीडिया में हो गया है। शहबाज शरीफ नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं। नवाज शरीफ को शुक्रवार (28 जुलाई) को उनके पद से हटाया गया।
नवाज शरीफ को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्ट घोषित किया था। पनामा पेपर में उनका नाम आया था। जिसका केस वहां चल रहा था। इसपर 28 जुलाई को फैसला आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने आज उस वक्त इस्तीफा दे दिया, जब देश के सर्वोच्च न्यायालय ने पनामागेट मामले में उनको पद के अयोग्य ठहरा दिया तथा उनके एवं उनकी संतानों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
यह तीसरी बार है जब 67 वर्षीय नवाज़ शरीफ का प्रधानमंत्री का कार्यकाल बीच में ही खत्म हो गया। न्यायमूर्ति एजाज अफजल खान ने सर्वोच्च न्यायालय के कोर्ट नंबर-एक में फैसला पढ़कर सुनाया। इस मौके पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ कार्यकर्ताओं ने अदालत के बाहर जश्न मनाया। अदालत ने शरीफ को संविधान के अनुच्छेद 62 और 63 के तहत अयोग्य ठहराया। इन अनुच्छेदों के अनुसार, संसद के सदस्य को 'ईमानदार' और 'इंसाफ पसंद' होना चाहिए। न्यायमूर्ति खान ने कहा, ''वह संसद के सदस्य के तौर पर अयोग्य ठहराए जाते हैं इसलिए वह प्रधानमंत्री कार्यालय में बने रहने के योग्य नहीं रह गए।''
इमरान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने शरीफ पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया, ''भलाई के लिए गॉडफादर के शासन का अंत .... सच्चाई और इंसाफ कायम होगा।''
सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (नैब) को भी आदेश दिया कि वह शरीफ, उनके बेटों हुसैन एवं हसन और बेटी मरियम के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला शुरू करे। उसने यह भी आदेश दिया कि छह हफ्ते के भीतर मामला दर्ज किया जाए और छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी की जाए।
रेडियो पाकिस्तान के अनुसार, वित्त मंत्री इसहाक डार और नेशनल असेंबली के सदस्य कैप्टन मुहम्मद सफदर को भी पद के अयोग्य ठहराया गया।
नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के आरोप में दोषी करार दिया गया है। उनको प्रधानमंत्री के पद से हटा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनको दोषी करार दिया।
नवाज का नाम पनामा पेपर में आया था। यह मामला 1990 के दशक में उस वक्त धनशोधन के जरिए लंदन में सपंत्तियां खरीदने से जुड़ा है जब शरीफ दो बार प्रधानमंत्री बने थे।
नवाज शरीफ के परिवार की लंदन में इन संपत्तियों का खुलासा पिछले साल पनामा पेपर्स लीक मामले से हुआ। इन संपत्तियों के पीछे विदेश में बनाई गई कंपनियों का धन लगा हुआ है और इन कंपनियों का स्वामित्व शरीफ की संतानों के पास है। इन संपत्तियों में लंदन स्थित चार महंगे फ्लैट शामिल हैं।
वह पाकिस्तान के सबसे रसूखदार सियासी परिवार और सत्तारूढ़ पार्टी पीएमएल-एन के मुखिया हैं।
इस्पात कारोबारी-सह-राजनीतिज्ञ शरीफ पहली बार 1990 से 1993 के बीच प्रधानमंत्री रहे। उनका दूसरा कार्यकाल 1997 में शुरू हुआ जो 1999 में तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ द्वारा तख्तापलट किए जाने के बाद खत्म हो गया।
सर्वोच्च न्यायालय ने शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए इसी साल मई में संयुक्त जांच दल (जे आई टी) का गठन किया था। जेआईटी ने गत 10 जुलाई को अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपी थी।
अमेरिका में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा जारी एक सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, ''अध्ययन से पता चला कि सर्वेक्षण में लगभग तीन-चौथाई मुस्लिम उत्तरदाता इस पर सहमत थे कि अमेरिका में मुसलमानों के खिलाफ बहुत भेदभाव है और इनमें से लगभग दो-तिहाई ने कहा कि राष्ट्र जिस दिशा में जा रहा है, उसे लेकर वह असंतुष्ट हैं।''
सर्वेक्षण के अनुसार, मुस्लिम उत्तरदाताओं की राय में वर्ष 2011 की तुलना में बड़ा बदलाव देखा गया है। उस समय बराक ओबामा राष्ट्रपति थे और अधिकांश मुस्लिम उत्तरदाताओं ने कहा था कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
लगभग 48 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने स्वीकार किया कि पिछले 12 महीनों में उन्होंने कम से कम एक बार भेदभाव की घटना का सामना किया है, जो 2007 में हुई घटनाओं से 40 प्रतिशत अधिक है।
अमेरिका में पांच में एक मुस्लिम शख्स ने पिछले एक साल में अपने स्थानीय इलाके में मुस्लिम-विरोधी भित्तिचित्रों को पाया।
सर्वेक्षण में यह बताया गया कि मुसलमान ट्रंप को लेकर संदेह में हैं और उनका सोचना है कि अमेरिकी नागरिक इस्लाम को मुख्यधारा के अमेरिकी समाज के हिस्से के रूप में नहीं देखते हैं।
अनुमान के अनुसार, अमेरिका में करीब 33 करोड़ मुसलमान रहते हैं।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 6 देशों के मुस्लिम नागरिकों के अमेरिका प्रवेश पर रोक के फैसले को कोर्ट से रद्द करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
ट्रंप ने हवाई कोर्ट के इस फैसले को न्यायपालिका का कार्यपालिका के काम में दखल बताया है। अमेरिका के नेशविले में उन्होंने कहा कि ये बहुत ही बुरी खबर, और उदास करने वाली खबर है।
हवाई कोर्ट के फैसले के बाद ट्रम्प ने कहा कि, 'अदालत ने जिस आदेश पर रोक लगाई है उसके प्रावधान पहले आदेश से कम सख्त थे, ये पहले कभी नही हुआ, न्यायिक हस्तक्षेप है।'
अमेरिका के एक विशेषज्ञ ने कहा है कि सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में भारत तथा चीन के बीच का सीमा विवाद दोनों देशों के बीच युद्ध का कारण बन सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या भारत-चीन के बीच मौजूदा गतिरोध युद्ध का कारण बन सकता है, अमेरिकन फॉरेन पॉलिसी काउंसिल के जेफ एम स्मिथ ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, ''हां, मुझे लगता है और मैं यह हल्के-फुल्के अंदाज में नहीं कह रहा हूं।''
सीमा से संबंधित मुद्दों के कारण सन् 1962 के युद्ध की ओर इशारा करते हुए स्मिथ ने कहा, ''दोनों पक्षों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है, जिससे वापस लौटना मुश्किल है।'' डोकलाम में चीन, भारत तथा भूटान, तीनों देशों की सीमाएं आकर मिलती हैं और इसका तीनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व है।
भारतीय सेना ने जून में चीनी सैनिकों द्वारा इस इलाके में सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण दोनों देशों के सैनिकों के बीच ठन गई थी। डोकलाम में दोनों देशों के सैनिकों के बीच गतिरोध का यह दूसरा महीना है।
चीन ने बार-बार भारत से डोकलाम से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा है। डोकलाम को चीन अपना भूभाग मानता है। भारत ने कहा है कि दोनों देशों के सैनिकों को उस जगह से हटना चाहिए, क्योंकि यह उसके सहयोगी देश भूटान का हिस्सा है। भूटान का चीन के साथ कोई कूटनीतिक संबंध नहीं है। उसने भी डोकलाम में चीन द्वारा सड़क निर्माण का विरोध किया है।
बता दें कि सिक्किम सेक्टर में गतिरोध के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने गुरुवार को ब्रिक्स के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की बैठक से इतर अपने चीनी समकक्ष एवं स्टेट काउंसिलर यांग जेची से बातचीत की। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यांग ने दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और भारत के वरिष्ठ सुरक्षा प्रतिनिधियों के साथ अलग से मुलाकात की।
खबर में कहा गया है कि यांग ने तीनों वरिष्ठ सुरक्षा प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों, अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों तथा बहुपक्षीय मामलों पर चर्चा की और द्विपक्षीय मुद्दों एवं बड़ी समस्याओं पर चीन के रूख पेश किया। डोभाल और यांग भारत-चीन सीमा व्यवस्था के विशेष प्रतिनिधि हैं।
डोभाल ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स) के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की दो दिवसीय बैठक में भाग लेने के लिए कल चीन पहुंचे। उनकी यात्रा से सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम इलाके में एक महीने से चल रहे गतिरोध को लेकर भारत और चीन के बीच समाधान निकलने की संभावना बढ़ गई है। डोभाल और यांग दोनों भारत-चीन सीमा तंत्र के विशेष प्रतिनिधि हैं।
आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, डोभाल ब्रिक्स देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ कल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात करेंगे।
पाकिस्तान के लाहौर शहर में पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ के आवास सह कार्यालय के निकट एक शक्तिशाली आत्मघाती विस्फोट में आज पुलिसर्किमयों समेत 25 लोगों की मौत हो गई और 30 अन्य घायल हो गए।
रेस्क्यू 1122 की दीबा शहनाज ने बताया, ''पुलिस और लाहौर विकास प्राधिकरण के अधिकारी मुख्यमंत्री के मॉडल टाउन स्थित आवास के निकट अरफा करीम टावर के बाहर अतिक्रमण हटाने में व्यस्त थे जब एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ।''
मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई भी हैं और अपने मॉडल टाउन स्थित कार्यालय में बैठक में व्यस्त थे। रेस्क्यू 1122 के अनुसार, पुलिसर्किमयों समेत कम से कम 25 लोगों की विस्फोट में मौत हुई है जबकि 30 से अधिक अन्य लोग घायल हुए।
इससे पहले पाकिस्तान के गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान ने मृतकों की संख्या 14 बताई थी, लेकिन कहा था कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। बचाव दलों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। शहर के अस्पतालों में आपात स्थिति घोषित कर दी गई है। शहनाज ने कहा, ''कई घायलों की स्थिति गंभीर बताई जाती है।''
लाहौर पुलिस के प्रमुख कैप्टन (रिटायर्ड) अमीन वैन्स ने इस बात की पुष्टि की कि यह आत्मघाती हमला था और पुलिस निशाने पर थी। पुलिस सूत्रों का हवाला देते हुए 'जियो न्यूज' ने बताया कि एक आत्मघाती हमलावर ने घटनास्थल पर तैनात पुलिसर्किमयों को निशाना बनाया। सुरक्षा बलों की भारी टुकड़ी ने इलाके को घेर लिया है और सड़क के उस खंड को सील कर दिया गया है। विस्फोट की किसी भी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली है। पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी लाहौर में हाल के वर्षों में कई आतंकवादी हमले हुए हैं।









