विदेश

उत्तर प्रदेश: विदेशी लड़की से छेड़छाड़, विदेशी कपल को लाठी-डंडों से पीटा

फतेहपुर सीकरी में कुछ युवाओं द्वारा रविवार को लगभग एक घंटे तक स्विट्जरलैंड के एक जोड़े क्वेंटिन जेरेमी क्लेर्क और मैरी ड्रोक्स का पीछा करने, उन्हें प्रताड़ित करने और पत्थरों और डंडों से उन पर हमला करने की खबर सामने आई है।

मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। 4 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

हमले के बाद पीड़ितों को आगरा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आगरा में स्विट्जरलैंड के एक जोड़े पर रविवार को हुए हमले के संबंध में गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

सुषमा ने स्विट्जरलैंड के जोड़े पर हमले की खबर को साझा करते हुए ट्वीट कर कहा, ''मैंने इसे अभी देखा। मैने इस संबंध में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।''

सुषमा ने एक और ट्वीट कर कहा, ''मेरे मंत्रालय के अधिकारी अस्पताल में जाकर पीड़ित जोड़े से मिलेंगे।''

अधिकारियों ने दोपहर में जोड़े से मुलाकात की।

वहीं इस पूरी घटना पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री व समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया है। अखिलेश ने कहा कि विदेशी पर्यटकों को सेल्फी लेने के लिए पीटा जा रहा है। उत्तर प्रदेश का एंटी रोमियो स्क्वॉड कहां है? वह गुरुवार को समाजवादी पार्टी के कार्यालय में पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे।

अखिलेश ने कहा, ''एंटी रोमियो स्क्वॉड का क्या हुआ? एक विदेशी युगल को फतेहपुर सिकरी में सेल्फी लेने के लिए पीटा गया। उत्तर प्रदेश में अप्रत्याशित रूप से अपराध और लूट की घटनाओं में इजाफा हुआ है। कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है।''

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 24 साल के क्‍वेंटिन जेरेमी क्‍लार्क अपनी गर्लफ्रेंड मैरी ड्रोज के साथ 30 सितंबर को भारत आए थे। उन्‍होंने बताया कि आगरा में एक दिन बिताने के बाद वे फतेहपुर सीकरी रेलवे स्‍टेशन के नजदीक खड़े थे, जब एक समूह ने उनका पीछा करना शुरू किया।

क्‍लार्क के अनुसार, ''शुरू में उन्‍होंने कुछ कहा, जो हमारी समझ में नहीं आया और फिर उन्‍होंने हमें रुकने को कहा ताकि वे मैरी के साथ सेल्‍फी ले सकें।''

शोषण जल्‍द ही हमले में बदल आया। दोनों की पिटाई की गई जिसमें क्‍लार्क के सिर में चोट आई है। डॉक्‍टर ने कहा कि उसके एक कान पर लगी चोट से सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। मैरी ड्रोज का हाथ भी टूट गया है और कई जगह चोट के निशान हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, घायल अवस्‍था में दोनों वहीं पड़े रहे। आस-पास खड़े लोग अपने मोबाइल फोन पर उनकी विडियो उतारते रहे।

भयावह अनुभव को याद करते हुए क्‍लार्क ने कहा, ''लड़के मना करने के बावजूद हमारे साथ चलते रहे। पूरे रास्‍ते वह तस्‍वीरें लेते रहे और मैरी के पास आने की कोशिश करते रहे। जो कुछ भी हम समझ सके, उसके अनुसार वे हमारे नाम और आगरा में हमारे रहने की जगह पूछ रहे थे। उन्‍होंने हमें किसी जगह ले जाने को कहा, जिसपर हमने मना कर दिया। कुछ देर बाद मेरे ऊपर लाठियां और पत्‍थर बरसने लगे। जब मैरी ड्रोज ने रोका तो उसे भी नहीं छोड़ा गया।

मैरी ड्रोज ने कहा कि पहले मुझे लगा कि वह एक महिला पर हमला नहीं करेंगे, मगर वह गलत निकलीं। उन्‍होंने कहा, ''मुझे नहीं पता उन्‍होंने क्यों हमला किया? वे हमारा कोई सामान नहीं ले गए।''

मैरी ड्रोज ने इस बात से भी इनकार किया कि वे दोनों 'किस' कर रहे थे। किसी एक स्‍थानीय पुलिसकर्मी ने 'भीड़ के गुस्‍से' के पीछे इसी को वजह बताने की कोशिश की थी, जिसे ड्रोज ने 'अफवाह' करार दिया।

मेक इन इंडिया को झटका: चीन ने टेस्ला का प्लांट हासिल किया

अमेरिकी मोटर निर्माता कंपनी टेस्ला इंक के प्रोडक्ट आर्किटेक्ट एलन मस्क ने कंपनी का नया कारखाना चीन में खोलने का फैसला किया है।

द वाल स्ट्रीट जनरल की खबर के अनुसार, टेस्ला ने पहली बार अमेरिका से बाहर कारखाना खोलने के लिए चीन के साथ करार कर लिया है। टेस्ला के इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' मुहिम को बड़ा झटका माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन में बनने वाले इस कारखाने का मालिक टेस्ला होगा, न कि उसे तैयार करने वाला स्थानीय निर्माता। चीन ने इलेक्ट्रिक वेहिकल मैनुफैक्चर्स की सुविधा के लिए हाल ही में कुछ कानूनी रियायतें दी हैं। माना जा रहा है कि चीन टेस्ला को 25 प्रतिशत आयात शुल्क में शायद ही छूट दे।

मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने टेस्ला को किसी भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता के साथ भारत में कारखाना खोलने के लिए प्रस्ताव दिया था।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में टेस्ला के फ्रीमोंट स्थित कारखाने का दौरा किया था। इसी साल जून में टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने ट्विटर पर सूचित किया था कि उनकी कंपनी इस मसले पर भारत सरकार के साथ बातचीत कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, कार कंपनी स्थानीय कारखाने के निर्माण तक आयात से जुड़े जुर्माने और अन्य पाबंदियों में ढील चाहती थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2014 को 'मेक इन इंडिया' योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में निर्माण के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके माध्यम से भारत सरकार देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ावा दे रही है। सरकार को उम्मीद है कि 'मेक इन इंडिया' से देश में निवेश के साथ ही रोजगार में भी बढ़ोत्तरी होगी।

रोहिंग्या नरसंहार: म्यांमार सेना के खिलाफ अमेरिका ने प्रतिबन्ध लगाया

अमेरिका ने म्यांमार की उन ईकाइयों और अधिकारियों को दी जा रही सैन्य सहायता वापस लेने का ऐलान किया है जो रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा में शामिल थे।

इस हिंसा की वजह से बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार छोड़ कर भागना पड़ा है।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नॉर्ट ने दंडात्मक कदमों का ऐलान करते हुए कहा, ''रखाइन प्रांत में हाल ही में हुई हिंसा की वजह से रोहिंग्या तथा अन्य समुदायों को जिस तरह की तकलीफ उठानी पड़ी है, उसके लिए हम गहरी चिंता प्रकट करते हैं।''

उन्होंने कहा कि यह अनिवार्य हो गया है कि ज्यादतियों के लिए जिम्मेदार राज्येत्तर तत्वों सहित लोगों तथा संस्थाओं को जवाबदेह ठहराया जाए।

रखाइन प्रांत में हिंसा की वजह से बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम देश छोड़कर बांग्लादेश चले गए जिससे वहां (बांग्लादेश में) गहन मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है।

हीथर नॉर्ट ने कहा कि अमेरिका अपने मित्रों और सहयोगियों के साथ जवाबदेही संबंधी विकल्प पर विचार कर रहा है।

हीथर ने एक बयान में कहा कि अमेरिका लोकतंत्र की ओर म्यांमार के बढ़ने के साथ ही रखाइन प्रांत में मौजूदा संकट को दूर करने के प्रयासों में मदद करता रहेगा।

नॉर्ट ने कहा, ''हालांकि म्यांमार की सरकार और इसके सशस्त्र बलों को सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे।''

रखाइन प्रांत में सेना की कार्रवाई के बाद म्यांमार से अब तक 600,000 रोहिंग्या मुस्लिम अपना घर छोड़कर सीमा पार कर बांग्लादेश चले गए। यह संकट अगस्त महीने के आखिर में तेज हुआ है।

म्यांमार के सुरक्षा बलों पर उग्रवादियों के हमलों के बाद सेना ने इस समुदाय पर कार्रवाई शुरू की थी।

नॉर्ट ने कहा कि अमेरिका ने म्यांमार की सेना के मौजूदा और पूर्व नेतृत्व पर लगे यात्रा प्रतिबंध हटाने पर विचार करना 25 अगस्त से बंद कर दिया है।

वहीं, सोमवार को खबर आई थी कि संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों, सरकार के मंत्रियों और अधिकार समूहों से जुड़े नेता एक सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं जिसका उद्देश्य बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए रकम जुटाना है।

यूरोपीय संघ, कुवैत सरकार और संयुक्त राष्ट्र की प्रवासी, शरणार्थी और मानवीय सहायता समन्वय एजेंसियों का उद्देश्य फरवरी तक संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए 43.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता के लक्ष्य को हासिल करना है।

अधिकारियों ने कहा था कि अब तक इस लक्ष्य का महज एक चौथाई ही जुट पाया है।

अफगानिस्तान में मिलिट्री एकेडमी पर आत्मघाती हमला, सेना के 15 कैडेट्स की मौत

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में सेना के शिविर से निकलते समय आत्मघाती बम हमले में अफगान सेना के 15 प्रशिक्षु मारे गए।

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता दौलत वजीरी ने कहा, ''शनिवार दोपहर सेना के कैडेट मिलिट्री अकादमी से जब एक मिनी बस में बाहर आ रहे थे, तो एक आत्मघाती बम हमलावर ने उन्हें निशाना बनाया जिसमें 15 कैडेट मारे हो गए और चार जख्मी हो गए।''

वहीं, अफगानिस्तान में जुम्मे की नमाज के दौरान दो मस्जिदों में हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 63 लोगों की मौत हो गई है। इन हमलों में काबुल में एक शिया मस्जिद और पश्चिमी गोर प्रांत में एक सुन्नी मस्जिद को निशाना बनाया गया था।

युद्ध से प्रभावित अफगानिस्तान में पिछले सप्ताह कई हमले हुए।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इन हमलों की निंदा करते हुए एक बयान में कहा कि सभी धर्मों और जातियों को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों को समाप्त करने के लिए सुरक्षा बल लड़ाई तेज करेंगे।

गृह मंत्रालय के अधिकारी मेजर जनरल अलीमस्त मोमांद ने बताया कि काबुल की शिया मस्जिद इमाम जमान में एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। इस हमले में 30 लोगों की मौत हो गई और 45 घायल हो गए।

प्रांतीय पुलिस प्रमुख के प्रवक्ता मोहम्मद इकबाल निजामी ने बताया कि गोर प्रांत के एक सुन्नी मस्जिद में जुम्मे की नमाज के दौरान हुए आत्मघाती हमले में 33 लोगों की मौत हो गई। इस हमले की जिम्मेदारी तत्काल किसी समूह ने नहीं ली है।

अमेरिकी सरकार ने भी काबुल और गोर में हुए हमलों सहित इस सप्ताह अफगानिस्तान में हुए अन्य हमलों की निंदा की है।

काबुल की मस्जिद में आत्मघाती हमला, 30 लोगों की मौत

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की एक शिया मस्जिद में शुक्रवार को हुए आत्मघाती विस्फोट में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई और 45 अन्य घायल हो गए।

अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के अधिकारी मेजर जनरल अलीमस्त मोमंद ने बताया कि हमलावर पैदल आया था और उसने जामा मस्जिद में खुद को उड़ा दिया। यह मस्जिद दश्ती बार्च इलाके में है।

इस्तेकलाल अस्पताल के प्रमुख मोहम्मद साबिर नसीब ने कहा कि दो शवों को अस्पताल में लाया गया है।

किसी संगठन ने फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की संपति में भारी गिरावट दर्ज की गई

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की संपति में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ऐसा अमेरिका समेत दुनिया भर में प्रॉपर्टी की कीमतों में मंदी की वजह से हुआ है।

डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के जाने-माने बिल्डर होने के अलावा अमेरिका के पहले अरबपति राष्ट्रपति हैं।

अंतरराष्ट्रीय पत्रिका फोर्ब्स द्वारा जारी की गई रईस अमेरिकियों की सूची में 248वें नंबर पर हैं। उनकी संपत्ति 3.1 बिलियन डॉलर (201 अरब रुपये लगभग) है।

इससे पिछले साल फोर्ब्स की लिस्ट में वह अमीर अमेरिकियों की लिस्ट में 156वें नंबर पर थे। तब उनकी कुल संपत्ति 3.7 (241 अरब रुपये लगभग) बिलियन डॉलर थी।

इस तरह से एक साल में धनवान अमेरिकी नागरिकों की सूची में ट्रंप 92 अंक नीचे गिर गये हैं और उनकी संपत्ति में 60 करोड़ डॉलर यानी की लगभग 40 अरब रुपये की गिरावट दर्ज की गई है।

बतौर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ट्रंप ने अपनी कुल संपत्ति 10 बिलियन डॉलर बताई थी, लेकिन सितंबर 2015 में फोर्ब्स ने उनकी संपत्ति का आकलन 4.5 बिलियन डॉलर किया था।

फोर्ब्स के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 2 साल में ट्रम्प की संपत्ति में 31 फीसदी की गिरावट हुई है।

फोर्ब्स के मुताबिक, ट्रम्प की आधी संपत्ति न्यूयॉर्क सिटी रियल स्टेट से आती है।

फोर्ब्स के मुताबिक, हाल के सालों में लग्जरी रियल स्टेट की कीमतों में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसका असर ट्रंप की संपत्ति पर पड़ा है। प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट से ट्रम्प टावर, जिसका मालिकाना हक राष्ट्रपति ट्रम्प के पास है, काफी गिरी हैं।

फोर्ब्स के मुताबिक, ट्रम्प की गोल्फ प्रॉपर्टी के दाम भी काफी कम हुए हैं। इसके अलावा ट्रम्प ने चुनाव प्रचार में 66 मिलियन डॉलर खर्च किये।

यही नहीं, एक मुकदमे को निपटाने में भी ट्रम्प को 25 मिलियन डॉलर खर्च करने पड़े। ये मुकदमा ट्रम्प यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दायर किये थे।

इमरान खान कभी भी हो सकते हैं गिरफ्तार

पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने विपक्ष के नेता इमरान खान की गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वॉरंट जारी किया है। चुनाव आयोग ने पूर्व क्रिकेटर द्वारा उस पर पक्षपात का आरोप लगाए जाने को लेकर यह कार्रवाई की है।

जियो न्यूज की खबर के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त की अगुवाई वाली पांच सदस्यी पीठ ने 64 वर्षीय इमरान खान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें 26 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई के लिए पेश करने का आदेश दिया।

पाकिस्तान में चुनाव आयोग गिरफ्तारी वॉरंट जारी कर सकता है।

इस बीच इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने कहा कि वह फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देगी।

इससे पहले 14 सितंबर को पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने मामले में इमरान खान की मौजूदगी को सुनिश्चित करने के लिए इमरान खान के खिलाफ जमानती वॉरंट जारी किया था।

हालांकि, उनकी पार्टी ने 20 सितंबर को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसने जमानती वॉरंट को खारिज कर दिया था।

इस प्रकार से इमरान की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले पाकिस्तान की प्रमुख राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की नेता आयशा गुलालाई ने पार्टी प्रमुख इमरान खान पर गंभीर आरोप लगाते इस्तीफा दे दिया था।

आयाशा ने इमरान खान को चरित्रहीन बताते हुए कहा था कि वो उन्हें और पार्टी की दूसरी महिलाओं को अश्लील मैसेज भेजेते हैं। इस्तीफा देते हुए आयशा ने यह भी कहा था, ''मेरी इज्जत मेरी लिए ज्यादा मायने रखती है और मैं अपनी अस्मत और गैरत से समझौता नहीं कर सकती।''

आयशा ने इमरान खान के साथ ही पीटीआई पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। आयशा ने पाकिस्तानी दैनिक डॉन से बातचीत में कहा था कि पीटीआई में महिला कार्यकर्ताओं का कोई सम्मान नहीं है और गैरतमंद महिलाएं इमरान खान की पार्टी में काम नहीं कर सकतीं।''

हालांकि, पीटीआई नेता शिरीन मजारी ने आयशा के लगाए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें पार्टी ने चुनाव में टिकट नहीं दिया, इसलिए वो ऐसे आरोप लगा रही हैं।

मजारी ने कहा था कि इमरान खान सभी महिलाओं की इज्जत करते हैं।

अमेरिका ने यूनेस्को की सदस्यता छोड़ी, इजराइल विरोधी रुख का लगाया आरोप

अमेरिका ने यूनेस्को से बाहर होने की आज घोषणा की। उसने संयुक्त राष्ट्र की इस सांस्कृतिक संस्था पर इस्राइल विरोधी रूख अपनाने का आरोप लगाया है।

पेरिस स्थित यूनेस्को ने 1946 में काम करना शुरू किया था और यह विश्व धरोहर स्थल को नामित करने को लेकर मुख्य रूप से जाना जाता है।

यूनेस्को से बाहर होने का अमेरिका का फैसला 31 दिसंबर 2018 से प्रभावी होगा। हालांकि, अमेरिका उस वक्त तक यूनेस्को का एक पूर्णकालिक सदस्य बना रहेगा।

विदेश विभाग की प्रवक्ता हीथर नाउर्ट ने कहा, ''यह फैसला यूं ही नहीं लिया गया है। बल्कि यह यूनेस्को पर बढ़ती बकाया रकम की चिंता और यूनेस्को में इस्राइल के खिलाफ बढ़ते पूर्वाग्रह को जाहिर करता है। संस्था में मूलभूत बदलाव करने की जरूरत है।''

उन्होंने कहा कि विदेश विभाग ने आज संयुक्त राष्ट्र वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) महानिदेशक इरीना बोकोवा को संस्था से अमेरिका के बाहर होने के फैसले की सूचना दी और यूनेस्को में एक स्थायी पर्यवेक्षक मिशन स्थापित करने की मांग की है।

प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने महानिदेशक को गैर सदस्य पर्यवेक्षक के तौर पर यूनेस्को के साथ जुड़े रहने की अपनी इच्छा जाहिर की है ताकि संगठन द्वारा उठाए जाने वाले कुछ अहम मुद्दों पर अमेरिकी विचार, परिप्रेक्ष्य और विशेषज्ञता में योगदान दिया जा सके। इन मुद्दों में विश्व धरोहर की सुरक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता की हिमायत करना और वैज्ञानिक सहयोग एवं शिक्षा को बढ़ावा देना भी शामिल है।

रिचर्ड थेलर को अर्थशास्‍त्र का नोबेल पुरस्कार मिला

साल 2017 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है।

अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के लिए रिटर्ड एच थेलर को चुना गया है। इससे पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी नोबेल पुरस्कार पाने वाले संभावित लोगों की लिस्ट में शामिल थे।

गौरतलब है कि क्लैरिवेट ऐनालिटिक्स अकैडमिक और साइंटिफिक रिसर्च अपने रिसर्च के आधार पर नोबेल पुरस्कार के संभावित विजेताओं की लिस्ट भी तैयार करती है।

राजन भी उन छह अर्थशास्त्रियों में से एक थे जिन्हें क्लैरिवेट ऐनालिटिक्स ने इस साल अपनी लिस्ट में शामिल किया था।

कॉर्पोरेट फाइनेंस के क्षेत्र में किए गए काम के लिए राजन का नाम लिस्ट में आया था। राजन अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की दुनिया में बड़े नाम हैं। सबसे कम उम्र (40) में पहले गैर पश्चिमी IMF चीफ बनने वाले राजन ने साल 2005 में एक पेपर प्रेजेंटेशन के बाद बड़ी प्रसिद्धि हासिल की।

अर्थशास्त्री रिचर्ड थेलर को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने की आज (10 अक्टूबर) घोषणा कर दी गई। उन्हें यह पुरस्कार अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान के अंतर को पाटने पर किए गए उनके काम के लिए दिया गया है।

1945 में अमेरिका के ईस्ट ऑरेंज में उनका जन्म हुआ था।

नोबेल पुरस्कार के निर्णायक मंडल ने एक बयान में कहा कि थेलर का अध्ययन बताता है कि किस प्रकार सीमित तर्कसंगता, सामाजिक वरीयता और स्व-नियंत्रण की कमी जैसे मानवीय लक्षण किसी व्यक्ति के निर्णय को प्रक्रियागत तौर पर प्रभावित करते हैं और इससे बाजार के लक्षण पर भी प्रभाव पड़ता है।

व्यवहारिक अर्थशास्त्र मनोविज्ञान का अध्ययन है। यह व्यक्ति और संस्थानों की आर्थिक निर्णय प्रक्रिया से जुड़ा है।

स्वीडन की विज्ञान अकादमी के सचिव गोएरन हैंसन ने कहा कि थेलर को उनकी 'अर्थशास्त्र के मनोविज्ञान की समझ' पर अध्ययन के लिए 90 लाख क्रोनोर (11 लाख डॉलर) की राशि पुरस्कार स्वरुप दी जाएगी।

नोबल समिति ने कहा, थेलर का काम दिखाता है कि कैसे मानवीय लक्षण बाजार के परिणामों और व्यक्तिगत निर्णयों को प्रभावित करते हैं।

अकादमी ने थेलर का परिचय देने वाले अपने प्रपत्र में कहा है कि 72 वर्षीय थेलर व्यवहारिक अर्थशास्त्र का अध्ययन करने वाले अग्रणी अर्थशास्त्री हैं। यह शोध का एक ऐसा क्षेत्र है, जहां आर्थिक निर्णय निर्माण की प्रक्रिया के दौरान मनोवैज्ञानिक अनुसंधानों का अनुपालन करने का अध्ययन किया जाता है। इससे व्यक्तियों के आर्थिक निर्णय लेते समय सोच और व्यवहार का अधिक वास्तविक आकलन करने में मदद मिलती है।

अडाणी की कोयला खान परियोजना के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में हजारों लोग सड़कों पर उतरे

अडाणी की ऑस्ट्रेलिया में 16.5 अरब डॉलर की कारमाइकल कोयला खान परियोजना के खिलाफ शनिवार को ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न इलाकों में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया।

पर्यावरण और वित्तपोषण के मुद्दों की वजह से परियोजना में पहले ही कई साल का विलंब हो चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अडाणी की इस परियोजना के खिलाफ सिडनी, ब्रिसबेन, मेलबर्न, उत्तरी क्वींसलैंड के गोल्ड कोस्ट और पोर्ट डगलस में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने रैलियां निकालीं।

एबीसी न्यूज के अनुसार, सिडनी में साइमन फॉस्टरिंग ने कहा, ''यदि यह खान परियोजना आगे बढ़ती है, तो यह हमें खराब भविष्य की ओर ले जाएगी और ऑस्ट्रेलिया एक ऐसा देश है जो इससे कहीं ज्यादा स्मार्ट है।''

सिडनी में प्रदर्शन में करीब 2,000 लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने #स्टॉपअडाणी अभियान चलाया।

सिडनी के #स्टॉपअडाणी आंदोलनकारी इसाक एस्टिल ने कहा कि इस खान का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है। जब हमारा पर्यावरण ढांचा भुरभुरा के गिर रहा है, उस दौर में यह दक्षिणी गोलार्द्ध की सबसे बड़ी कोयला खान है। इसी वजह से दुनिया भर और ऑस्ट्रेलिया में लोग इसके खिलाफ आगे आ रहे हैं। हजारों लोग मांग कर रहे हैं कि अडाणी को नहीं आने दिया जाए।

खबरों में कहा गया है कि मेलबर्न में भी करीब 2,000 लोग इस परियोजना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए।

इन लोगों के हाथों में तख्तियों पर 'कोयला=कार्बन डाई आॅक्साइड (कोल=सीओ2) और 'प्रोटेक्ट ऑवर फ्यूचर' लिखा हुआ था।

ऑस्ट्रेलिया के कंजर्वेशन फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी केली ओ शानस्सी ने उम्मीद जताई कि इससे सभी को यह मजबूत संदेश गया होगा कि करदाता नहीं चाहते हैं कि उनके पैसे से परियोजना को सब्सिडी दी जाए।

उन्होंने कहा कि इससे हर व्यक्ति प्रभावित होगा। इसी वजह से मेलबर्न, सिडनी, कैनबरा, एडिलेड और केयर्सं में लोग चाहते हैं कि इस परियोजना को रोक दिया जाए।

पर्थ के कोटेस्लोई बीच पर 200-300 और होबार्ट में 250 लोगों ने परियोजना के खिलाफ रैली निकाली।