विदेश

काबुल की मस्जिद में आत्मघाती हमला, 30 लोगों की मौत

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की एक शिया मस्जिद में शुक्रवार को हुए आत्मघाती विस्फोट में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई और 45 अन्य घायल हो गए।

अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के अधिकारी मेजर जनरल अलीमस्त मोमंद ने बताया कि हमलावर पैदल आया था और उसने जामा मस्जिद में खुद को उड़ा दिया। यह मस्जिद दश्ती बार्च इलाके में है।

इस्तेकलाल अस्पताल के प्रमुख मोहम्मद साबिर नसीब ने कहा कि दो शवों को अस्पताल में लाया गया है।

किसी संगठन ने फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की संपति में भारी गिरावट दर्ज की गई

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की संपति में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ऐसा अमेरिका समेत दुनिया भर में प्रॉपर्टी की कीमतों में मंदी की वजह से हुआ है।

डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के जाने-माने बिल्डर होने के अलावा अमेरिका के पहले अरबपति राष्ट्रपति हैं।

अंतरराष्ट्रीय पत्रिका फोर्ब्स द्वारा जारी की गई रईस अमेरिकियों की सूची में 248वें नंबर पर हैं। उनकी संपत्ति 3.1 बिलियन डॉलर (201 अरब रुपये लगभग) है।

इससे पिछले साल फोर्ब्स की लिस्ट में वह अमीर अमेरिकियों की लिस्ट में 156वें नंबर पर थे। तब उनकी कुल संपत्ति 3.7 (241 अरब रुपये लगभग) बिलियन डॉलर थी।

इस तरह से एक साल में धनवान अमेरिकी नागरिकों की सूची में ट्रंप 92 अंक नीचे गिर गये हैं और उनकी संपत्ति में 60 करोड़ डॉलर यानी की लगभग 40 अरब रुपये की गिरावट दर्ज की गई है।

बतौर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ट्रंप ने अपनी कुल संपत्ति 10 बिलियन डॉलर बताई थी, लेकिन सितंबर 2015 में फोर्ब्स ने उनकी संपत्ति का आकलन 4.5 बिलियन डॉलर किया था।

फोर्ब्स के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 2 साल में ट्रम्प की संपत्ति में 31 फीसदी की गिरावट हुई है।

फोर्ब्स के मुताबिक, ट्रम्प की आधी संपत्ति न्यूयॉर्क सिटी रियल स्टेट से आती है।

फोर्ब्स के मुताबिक, हाल के सालों में लग्जरी रियल स्टेट की कीमतों में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसका असर ट्रंप की संपत्ति पर पड़ा है। प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट से ट्रम्प टावर, जिसका मालिकाना हक राष्ट्रपति ट्रम्प के पास है, काफी गिरी हैं।

फोर्ब्स के मुताबिक, ट्रम्प की गोल्फ प्रॉपर्टी के दाम भी काफी कम हुए हैं। इसके अलावा ट्रम्प ने चुनाव प्रचार में 66 मिलियन डॉलर खर्च किये।

यही नहीं, एक मुकदमे को निपटाने में भी ट्रम्प को 25 मिलियन डॉलर खर्च करने पड़े। ये मुकदमा ट्रम्प यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दायर किये थे।

इमरान खान कभी भी हो सकते हैं गिरफ्तार

पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने विपक्ष के नेता इमरान खान की गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वॉरंट जारी किया है। चुनाव आयोग ने पूर्व क्रिकेटर द्वारा उस पर पक्षपात का आरोप लगाए जाने को लेकर यह कार्रवाई की है।

जियो न्यूज की खबर के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त की अगुवाई वाली पांच सदस्यी पीठ ने 64 वर्षीय इमरान खान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें 26 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई के लिए पेश करने का आदेश दिया।

पाकिस्तान में चुनाव आयोग गिरफ्तारी वॉरंट जारी कर सकता है।

इस बीच इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने कहा कि वह फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देगी।

इससे पहले 14 सितंबर को पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने मामले में इमरान खान की मौजूदगी को सुनिश्चित करने के लिए इमरान खान के खिलाफ जमानती वॉरंट जारी किया था।

हालांकि, उनकी पार्टी ने 20 सितंबर को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसने जमानती वॉरंट को खारिज कर दिया था।

इस प्रकार से इमरान की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले पाकिस्तान की प्रमुख राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की नेता आयशा गुलालाई ने पार्टी प्रमुख इमरान खान पर गंभीर आरोप लगाते इस्तीफा दे दिया था।

आयाशा ने इमरान खान को चरित्रहीन बताते हुए कहा था कि वो उन्हें और पार्टी की दूसरी महिलाओं को अश्लील मैसेज भेजेते हैं। इस्तीफा देते हुए आयशा ने यह भी कहा था, ''मेरी इज्जत मेरी लिए ज्यादा मायने रखती है और मैं अपनी अस्मत और गैरत से समझौता नहीं कर सकती।''

आयशा ने इमरान खान के साथ ही पीटीआई पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। आयशा ने पाकिस्तानी दैनिक डॉन से बातचीत में कहा था कि पीटीआई में महिला कार्यकर्ताओं का कोई सम्मान नहीं है और गैरतमंद महिलाएं इमरान खान की पार्टी में काम नहीं कर सकतीं।''

हालांकि, पीटीआई नेता शिरीन मजारी ने आयशा के लगाए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें पार्टी ने चुनाव में टिकट नहीं दिया, इसलिए वो ऐसे आरोप लगा रही हैं।

मजारी ने कहा था कि इमरान खान सभी महिलाओं की इज्जत करते हैं।

अमेरिका ने यूनेस्को की सदस्यता छोड़ी, इजराइल विरोधी रुख का लगाया आरोप

अमेरिका ने यूनेस्को से बाहर होने की आज घोषणा की। उसने संयुक्त राष्ट्र की इस सांस्कृतिक संस्था पर इस्राइल विरोधी रूख अपनाने का आरोप लगाया है।

पेरिस स्थित यूनेस्को ने 1946 में काम करना शुरू किया था और यह विश्व धरोहर स्थल को नामित करने को लेकर मुख्य रूप से जाना जाता है।

यूनेस्को से बाहर होने का अमेरिका का फैसला 31 दिसंबर 2018 से प्रभावी होगा। हालांकि, अमेरिका उस वक्त तक यूनेस्को का एक पूर्णकालिक सदस्य बना रहेगा।

विदेश विभाग की प्रवक्ता हीथर नाउर्ट ने कहा, ''यह फैसला यूं ही नहीं लिया गया है। बल्कि यह यूनेस्को पर बढ़ती बकाया रकम की चिंता और यूनेस्को में इस्राइल के खिलाफ बढ़ते पूर्वाग्रह को जाहिर करता है। संस्था में मूलभूत बदलाव करने की जरूरत है।''

उन्होंने कहा कि विदेश विभाग ने आज संयुक्त राष्ट्र वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) महानिदेशक इरीना बोकोवा को संस्था से अमेरिका के बाहर होने के फैसले की सूचना दी और यूनेस्को में एक स्थायी पर्यवेक्षक मिशन स्थापित करने की मांग की है।

प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने महानिदेशक को गैर सदस्य पर्यवेक्षक के तौर पर यूनेस्को के साथ जुड़े रहने की अपनी इच्छा जाहिर की है ताकि संगठन द्वारा उठाए जाने वाले कुछ अहम मुद्दों पर अमेरिकी विचार, परिप्रेक्ष्य और विशेषज्ञता में योगदान दिया जा सके। इन मुद्दों में विश्व धरोहर की सुरक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता की हिमायत करना और वैज्ञानिक सहयोग एवं शिक्षा को बढ़ावा देना भी शामिल है।

रिचर्ड थेलर को अर्थशास्‍त्र का नोबेल पुरस्कार मिला

साल 2017 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है।

अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के लिए रिटर्ड एच थेलर को चुना गया है। इससे पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी नोबेल पुरस्कार पाने वाले संभावित लोगों की लिस्ट में शामिल थे।

गौरतलब है कि क्लैरिवेट ऐनालिटिक्स अकैडमिक और साइंटिफिक रिसर्च अपने रिसर्च के आधार पर नोबेल पुरस्कार के संभावित विजेताओं की लिस्ट भी तैयार करती है।

राजन भी उन छह अर्थशास्त्रियों में से एक थे जिन्हें क्लैरिवेट ऐनालिटिक्स ने इस साल अपनी लिस्ट में शामिल किया था।

कॉर्पोरेट फाइनेंस के क्षेत्र में किए गए काम के लिए राजन का नाम लिस्ट में आया था। राजन अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की दुनिया में बड़े नाम हैं। सबसे कम उम्र (40) में पहले गैर पश्चिमी IMF चीफ बनने वाले राजन ने साल 2005 में एक पेपर प्रेजेंटेशन के बाद बड़ी प्रसिद्धि हासिल की।

अर्थशास्त्री रिचर्ड थेलर को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने की आज (10 अक्टूबर) घोषणा कर दी गई। उन्हें यह पुरस्कार अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान के अंतर को पाटने पर किए गए उनके काम के लिए दिया गया है।

1945 में अमेरिका के ईस्ट ऑरेंज में उनका जन्म हुआ था।

नोबेल पुरस्कार के निर्णायक मंडल ने एक बयान में कहा कि थेलर का अध्ययन बताता है कि किस प्रकार सीमित तर्कसंगता, सामाजिक वरीयता और स्व-नियंत्रण की कमी जैसे मानवीय लक्षण किसी व्यक्ति के निर्णय को प्रक्रियागत तौर पर प्रभावित करते हैं और इससे बाजार के लक्षण पर भी प्रभाव पड़ता है।

व्यवहारिक अर्थशास्त्र मनोविज्ञान का अध्ययन है। यह व्यक्ति और संस्थानों की आर्थिक निर्णय प्रक्रिया से जुड़ा है।

स्वीडन की विज्ञान अकादमी के सचिव गोएरन हैंसन ने कहा कि थेलर को उनकी 'अर्थशास्त्र के मनोविज्ञान की समझ' पर अध्ययन के लिए 90 लाख क्रोनोर (11 लाख डॉलर) की राशि पुरस्कार स्वरुप दी जाएगी।

नोबल समिति ने कहा, थेलर का काम दिखाता है कि कैसे मानवीय लक्षण बाजार के परिणामों और व्यक्तिगत निर्णयों को प्रभावित करते हैं।

अकादमी ने थेलर का परिचय देने वाले अपने प्रपत्र में कहा है कि 72 वर्षीय थेलर व्यवहारिक अर्थशास्त्र का अध्ययन करने वाले अग्रणी अर्थशास्त्री हैं। यह शोध का एक ऐसा क्षेत्र है, जहां आर्थिक निर्णय निर्माण की प्रक्रिया के दौरान मनोवैज्ञानिक अनुसंधानों का अनुपालन करने का अध्ययन किया जाता है। इससे व्यक्तियों के आर्थिक निर्णय लेते समय सोच और व्यवहार का अधिक वास्तविक आकलन करने में मदद मिलती है।

अडाणी की कोयला खान परियोजना के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में हजारों लोग सड़कों पर उतरे

अडाणी की ऑस्ट्रेलिया में 16.5 अरब डॉलर की कारमाइकल कोयला खान परियोजना के खिलाफ शनिवार को ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न इलाकों में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया।

पर्यावरण और वित्तपोषण के मुद्दों की वजह से परियोजना में पहले ही कई साल का विलंब हो चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अडाणी की इस परियोजना के खिलाफ सिडनी, ब्रिसबेन, मेलबर्न, उत्तरी क्वींसलैंड के गोल्ड कोस्ट और पोर्ट डगलस में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने रैलियां निकालीं।

एबीसी न्यूज के अनुसार, सिडनी में साइमन फॉस्टरिंग ने कहा, ''यदि यह खान परियोजना आगे बढ़ती है, तो यह हमें खराब भविष्य की ओर ले जाएगी और ऑस्ट्रेलिया एक ऐसा देश है जो इससे कहीं ज्यादा स्मार्ट है।''

सिडनी में प्रदर्शन में करीब 2,000 लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने #स्टॉपअडाणी अभियान चलाया।

सिडनी के #स्टॉपअडाणी आंदोलनकारी इसाक एस्टिल ने कहा कि इस खान का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है। जब हमारा पर्यावरण ढांचा भुरभुरा के गिर रहा है, उस दौर में यह दक्षिणी गोलार्द्ध की सबसे बड़ी कोयला खान है। इसी वजह से दुनिया भर और ऑस्ट्रेलिया में लोग इसके खिलाफ आगे आ रहे हैं। हजारों लोग मांग कर रहे हैं कि अडाणी को नहीं आने दिया जाए।

खबरों में कहा गया है कि मेलबर्न में भी करीब 2,000 लोग इस परियोजना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए।

इन लोगों के हाथों में तख्तियों पर 'कोयला=कार्बन डाई आॅक्साइड (कोल=सीओ2) और 'प्रोटेक्ट ऑवर फ्यूचर' लिखा हुआ था।

ऑस्ट्रेलिया के कंजर्वेशन फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी केली ओ शानस्सी ने उम्मीद जताई कि इससे सभी को यह मजबूत संदेश गया होगा कि करदाता नहीं चाहते हैं कि उनके पैसे से परियोजना को सब्सिडी दी जाए।

उन्होंने कहा कि इससे हर व्यक्ति प्रभावित होगा। इसी वजह से मेलबर्न, सिडनी, कैनबरा, एडिलेड और केयर्सं में लोग चाहते हैं कि इस परियोजना को रोक दिया जाए।

पर्थ के कोटेस्लोई बीच पर 200-300 और होबार्ट में 250 लोगों ने परियोजना के खिलाफ रैली निकाली।

अफगानिस्तान में अमेरिकी बल आईएस की मदद कर रहे हैं: हामिद करजई

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा है कि अमेरिकी सैन्य और खुफिया एजेंसियों की निगरानी में पिछले तीन-चार सालों के दौरान आतंकवादी संगठन, इस्लामिक स्टेट (आईएस) उनके देश में उभर कर सामने आया है।

लंदन में 'रशिया टुडे' के साथ एक साक्षात्कार में करजई ने कहा कि उन्हें संदेह है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी अड्डों का इस्तेमाल आईएस की सहायता के लिए किया जाता है।

उन्होंने कहा, ''अफगानिस्तान के कई हिस्सों में सैन्य हेलीकाप्टरों द्वारा आईएस को आपूर्ति किए जाने की दैनिक खबरें मुझे अफगानी लोगों से मिली हैं।''

करजई ने कहा कि 9/11 से आज तक, अरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद अफगानिस्तान में चरमवाद सिर उठाए हुए है।

उन्होंने कहा कि अफगानी लोग पूछते हैं कि अगर अमेरिका अफगानिस्तान में आतंकवाद को हराने के लिए आया था, तो आज वह इतना अधिक क्यों है''?

करजई ने कहा, ''हम नहीं चाहते हैं कि हमारे देश में विशाल, विनाशकारी हथियारों से बमबारी करनी चाहिए। हम शांति चाहते हैं।''

उन्होंने कहा कि अमेरिकी बलों द्वारा एम ओ ए बी (बमों का बाप) का इस्तेमाल उत्तर कोरिया को अमेरिकी शक्ति का अंदाजा कराने का एक संकेत था, लेकिन यह अफगान लोगों पर एक क्रूरता थी। इस साल 13 अप्रैल को अमेरिका ने पूर्वी अफगानिस्तान में आईएस द्वारा उपयोग किए जाने वाले एक सुरंग परिसर पर अपने एक सबसे बड़े गैर-परमाणु बम को गिराया था। अफानिस्तान में इस तरह के हथियार का इस्तेमाल पहली बार किया गया था।

उन्होंने कहा, ''विशेष रूप से विदेशी सेनाओं द्वारा सैन्य कार्रवाई, शांति नहीं लाएगी। अफगानों को समझौते की तलाश के लिए तालिबान समेत सभी लोगों तक पहुंच बनाने के लिए आम सहमति तैयार करने की जरूरत है।''

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका को शांति लाने के लिए चीन, रूस, पाकिस्तान समेत भारत में सहकारी साझेदार बनने की जरूरत है।

पाकिस्तान के संबंध में करजई ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान के साथ मिलकर रहना होगा।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ उनके रिश्ते में दो मजबूत विरोधाभास हैं, ''जब हम शरणार्थी बने, तो पाकिस्तानी लोगों ने हमारा स्वागत किया। लेकिन उन्होंने मुजाहिदीन (सोवियत के खिलाफ) का समर्थन करने का खतरनाक काम किया, जिसने हमारे समाज को कमजोर कर दिया।''

करजई ने कहा कि उन्हें लगता है कि क्षेत्र के लिए नई अमेरिकी नीति में एक अमानवीय उद्देश्य के लिए अमेरिका पाकिस्तान का इस्तेमाल उसके पड़ोसी देश के खिलाफ करेगा।

उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान के साथ इसलिए हाथ मिलाना चाहते हैं, ताकि हम इस गहरी साजिश से बच सकें।

नक्सलियों और अलगाववादियों द्वारा बच्चों की भर्ती पर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने चिंता जाहिर की

संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने अलगाववादियों और नक्सलियों द्वारा बच्चों की भर्ती किए जाने पर चिंता जाहिर की है और कहा है कि सशस्त्र समूहों और सरकार के बीच हिंसा की घटनाओं से वह लगातार प्रभावित होते हैं, खासकर छत्तीसगढ़, झारखंड और जम्मू और कश्मीर क्षेत्र में।

'चिल्ड्रेन इन आर्म्ड कॉन्फलिक्ट' पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र को लगातार सशस्त्र समूह द्वारा बच्चों के इस्तेमाल और नियुक्ति की खबर प्राप्त हो रही है जिसमें नक्सली समूह भी शामिल हैं, खासकर छत्तीसगढ़ और झारखंड में।

सरकारी सूचना के मुताबिक, जम्मू और कश्मीर में सशस्त्र समूहों द्वारा कम से कम 30 स्कूलों को जलाया गया और आंशिक रूप से नुकसान पहुंचाया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके साथ ही सरकारी रिपोर्ट इस बात की भी पुष्टि करते हैं कि इन क्षेत्रों में कई हफ्तों तक चार स्कूलों का सैन्य इस्तेमाल किया गया।

खबरों के मुताबिक, सशस्त्र समूह बच्चों को नियुक्त करने के लिए उनका अपहरण कर अभिभावकों को डराते हैं जो उसके बाद सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और संदेशवाहकों, मुखबिरों और गार्ड के तौर पर बाल दस्तों में सेवाएं देते हैं।

उन्होंने निरीक्षण और रिपोर्टिंग पर लगे प्रतिबंधों का हवाला देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सशस्त्र समूहों द्वारा बच्चों के इस्तेमाल और नियुक्ति पर इन रिपोर्टों को प्रमाणित करने में असमर्थ हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने सशस्त्र समूहों द्वारा आत्मघाती हमलों के लिए बच्चों की नियुक्ति और इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है। इसमें मदरसे के बच्चे भी शामिल हैं।

उन्होंने संघर्षरत क्षेत्रों में सभी पक्षों को संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय एवं मानवाधिकार कानूनों तथा सुरक्षा परिषद् से संबंधित प्रस्तावों के आधार पर अपने दायित्वों से बच्चों की सुरक्षा को बेहतर बनाने की अपील की।

अमेरिका-पाकिस्तान रिश्ते गंभीर संकट में हैं: अमेरिकी थिंक टैंक

अमेरिका के एक प्रमुख थिंक टैंक यूनाइटेड इंस्टीट्यूट आॅफ पीस के एक विशेषज्ञ ने कहा कि अमेरिका-पाकिस्तान रिश्ते गंभीर संकट में हैं और दोनों देशों के बीच अविश्वास गहरा गया है।

इसके एक दिन पहले ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अपना तीन दिवसीय अमेरिका दौरा खत्म किया है। कांग्रेस से वित्त पोषित अमेरिकी थिंक टैंक यूनाइटेड इंस्टीट्यूट आॅफ पीस में पाकिस्तान पर विशेषज्ञ मोईद यूसुफ ने कहा कि इस्लामाबाद और वाशिंगटन एक-दूसरे की मंशा को बेहद संदेहास्पद नजरिए से देखते हैं।

यूसुफ ने शुक्रवार को पीटीआई को बताया, ''मुझे लगता है कि यह रिश्ता गंभीर संकट में है।''

उनकी यह टिप्पणी पाकिस्तानी विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ के तीन दिवसीय वाशिंगटन दौरा शुक्रवार को खत्म करने के बाद आई है। अपनी यात्रा के दौरान आसिफ ने अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एच आर मैक्मास्टर से मुलाकात की।

आसिफ से जब पूछा गया कि वह अपनी यात्रा से क्या लेकर लौट रहे हैं तो उन्होंने कहा, ''यह असाधारण नहीं होगा। विदेश मंत्री से काफी अच्छी मुलाकात रही। मैक्मास्टर से मुलाकात में मैं थोड़ा सतर्क था, लेकिन वह अच्छी थी। यह बुरी नहीं थी। मुझे लगता है कि हमें चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान के रूप में संपर्क के इस रूख को बरकरार रखने की जरूरत है।''

अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों के विशेषज्ञ यूसुफ ने कहा कि यहां असली मुद्दा अविश्वास का है। उन्होंने कहा, ''यह अविश्वास इतना गहरा है कि दोनों पक्षों के लिए इससे बाहर निकलकर उस तरीके को तलाशना बेहद मुश्किल होगा जिसमें वे एक-दूसरे पर जरूरी भरोसा कायम रख सकें।

यह विश्वास कर सकें कि वे जो कुछ भी करेंगे, उसके प्रति गंभीर होंगे। दो पक्षों की स्थिति ऐसी है कि वे दूसरे पक्ष की मंशा को लेकर बेहद संदेहास्पद नजरिया रखते हैं।'' यूसुफ ने कहा कि किसी को भी इसमें जल्द किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि अगर पाकिस्तान अपने तौर-तरीके नहीं बदलता है और आतंकी समूहों को समर्थन देना जारी रखता है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उसके खिलाफ हर जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं।

मैटिस ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अगर वह अपनी धरती पर आतंकियों की सुरक्षित पनाहगाह के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है तो उसे वैश्विक स्तर पर राजनयिक रूप से अलग-थलग किया जा सकता है और उससे गैर-नाटो सहयोगी का दर्जा छीना जा सकता है।

सबसे अहम सवाल कि आतंकवादियों के पास हथियार आता कहाँ से है?

बलूचिस्तान में आत्मघाती हमला, 13 की मौत

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एक सूफ़ी दरगाह पर आत्मघाती हमला हुआ है। इस हमले में 13 लोगों के मारे जाने और 20 के घायल होने की ख़बर है। 

जब धमाका हुआ उस समय दरगाह में बड़ी तादाद में श्रद्धालु जमा थे। बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के पास झल मग्सी ज़िले की दरगाह में यह धमाका हुआ है।

एक स्थानीय अधिकारी असद ककर ने बताया, ''जिस समय श्रद्धालु सूफ़ी संत सैयद चीसल शाह की सालगिरह के जश्न में शामिल होने के लिए दरगाह में इकट्ठे हो रहे थे, उसी समय हमलावर वहां पहुंचा, पुलिस ने जब उसे गेट पर रोका तो उसने खुद को बम से उड़ा दिया।''

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, सुरक्षाबलों ने इमारत को सील बंद कर दिया है।

फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि धमाके के पीछे किस संगठन का हाथ है, हालांकि पिछले कुछ सालों से सूफ़ी दरगाहें इस्लामी चरमपंथियों के निशाने पर रही हैं।

फरवरी माह में पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत के सहवान इलाके में एक मस्जिद में धमाका किया गया था, इस धमाके में 80 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी।