विदेश

डोकलाम हमारा है, हमारी सेना अभी शांत है, पर लंबे समय तक नहीं रहेगी: चीन

भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के दरम्यान कूटनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं। चीन ने बीजिंग स्थिति विदेशी राजनयिकों से कहा है कि उसकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) धैर्य के साथ डोकलाम इलाके में तैनात है।

चीन ने विदेशी राजनयिकों से कहा है कि उसकी सेना असीमित काल तक धैर्य नहीं रखेगी। चीन भूटान के डोकलाम इलाके पर दावा जताता रहा है। चीन इसे डोंगलॉन्ग कहता है।

भारत के सिक्किम में देश की सीमा तिब्बत और भूटान से लगती है। चीन भूटानी इलाके में उच्च क्षमता वाली सड़क बनाना चाहता है जिस पर 40 टन तक के सैन्य वाहन और टैंक आ जा सकेंगे। भारत की सुरक्षा की दृष्टि से ये इलाका बहुत संवेदनशील है। इस इलाके में चीन का कब्जा हो जाने से पूर्वोत्तर भारत को शेष भारत से जोड़ने वाले मार्ग पर चीन की सामरिक स्थिति मजबूत हो जाएगी।

चीन में मौजूद विदेशी राजनयिक सीमा विवाद को लेकर चिंतित हैं और उनमें से कुछ ने भारतीय और भूटानी राजनयिकों  से अपनी चिंता साझा की। पिछले महीने डोकलाम इलाके में भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों के सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी। तभी से दोनों देशों के बीच तनातनी है। चीन भारत से अपने सैनिक पीछे हटाने की मांग कर रहा है।

चीन ने विदेशी  राजनयिकों के सामने दावा किया कि उसके पास इस बात के ठोस सबूत हैं कि डोकलाम उसका इलाका है। चीन ने कहा कि डोकलाम चीनी सीमावर्ती निवासियों के पशुओं के लिए चारागाह का काम करता रहा है। चीन ने भूटानी घास काटने वालों को दी गई रसीद भी दिखाई।

सूत्रों के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने बंद कमरे में हुई एक बैठक में पिछले हफ्ते विदेशी राजनयिकों को सीमा विवाद पर अपना पक्ष बताया। चीन सरकार ने जी-20 समूह में शामिल कुछ देशों को भी इस गतिरोध के बारे में सूचित किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों मे से एक के राजनयिक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ''हमारे बीजिंग स्थित सहयोगी उस वार्ता में मौजूद थे। उन्हें ये संकेत दिया गया कि चीनी सेनी अनिश्चित काल तक इंतजार नहीं करेगी। ये चिंता की बात है और हमने ये सूचना बीजिंग स्थित भारतीय राजनयिकों और नई दिल्ली स्थित भूटानी राजनयिकों को दे दी है।''

राजनयिक के अनुसार चीन ने विदेशी राजनयिकों से कहा है कि ये विवाद चीन और भूटान के बीच का है और भारत उसमें 'कूद' पड़ा है। राजयनिक ने कहा, ''चीन का कहना है कि भारतीय सैनिक उसकी सीमा में घुसे हैं और उन्होंने यथास्थिति को बदल दिया है।''

हालांकि भारत ने चीन को 30 जून को भेजे अपने बयान में कहा है कि भारत सीमा पर मौजूदा स्थिति को लेकर काफी चिंतित है और इस इलाके में सड़क निर्माण से यथास्थिति बदलेगी जिसकी भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

चीन का कहना है कि भारत अपने सैनिक बगैर किसी शर्त के हटाए और उसके बाद ही दोनों देशों के बीच बातचीत हो पाएगी। वहीं भारत ने साफ कर दिया है कि चीन के साथ 2012 में इस बात पर सहमति बन गई थी कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के मामले में सभी संबंधित देशों को शामिल करने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जाएगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि इस त्रिमुहाने के बारे में कोई भी एकतरफा फैसला उस सहमति का उल्लंघन है।

केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, भारत कूटनीतिक प्रयासों से मौजूदा गतिरोध को दूर करना चाहता है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल 26-27 जुलाई को ब्रिक्स देशों के एनएसए की बैठक में शामिल होने चीन जाने वाले हैं। माना जा रहा है कि डोभाल इस मौका का लाभ चीनी एनएसए यांग जीची के साथ आपसी समझ बेहतर करने के लिए करेंगे।

पाकिस्तानी चैनल का दावा, चीन के हमले में 158 भारतीय सैनिकों की मौत

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और डोकलाम विवाद को लेकर तनातनी चल रही है। चीन और भारत दोनों अपने रुख में परिवर्तन करने के लिए तैयार नहीं है। इस बीच पाकिस्तान के एक टीवी चैनल भारत के खिलाफ बड़ा प्रोपेगंडा फैला रहा है।

पाकिस्तानी टीवी चैनल दुनिया न्यूज ने दावा किया है कि चीनी सेना की ओर से किए रॉकेट अटैक में भारतीय सेना के 158 सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा सोमवार को हुए हमले में कई अन्य सैनिक घायल बताए जा रहे हैं।

पाकिस्तानी टीवी चैनल की इस हिमाकत की हद तो तब हो गई जब उसने अपनी वेबसाइट पर हमले से संबंधित तस्वीरें भी पोस्ट कर दी। जबकि इंडियन आर्मी ने इन तस्वीरों को फर्जी करार दिया है।

पाकिस्तानी टीवी चैनल ने दावा किया है कि सिक्किम मुद्दे पर भारत और चीन के बीच झड़प शुरू हो गई है। जिसके बाद चीन ने भारतीय मोर्चा पर रॉकेट हमले कर दिए। जिसमें भारतीय फौजों के 158 जवान मारे गए हैं। जबकि दर्जनों अन्य जवान घायल हो गए हैं।

टीवी चैनल का कहना है कि इससे पहले भी ऐसे दोनों देशों में झड़प देखने में आई है। टीवी चैनल का कहना है कि विवाद की शुरआत भारत की ओर से की गई थी। जिस पर कार्रवाई करते हुए चीन ने भारतीय मोर्चा पर रॉकेट फायर किया।

दुनिया न्यूज का दावा है कि इस हमले का दो मिनट का फुटेज चाइना सेंट्रल टेलिविजन पर दिखाया गया है। उसका कहना है कि वीडियो में दिखाया गया है कि चीनी सैनिकों ने रॉकेट लांचरों, मशीनगनों और मोर्टारों का उपयोग करके 'दुश्मन की स्थिति' पर हमला किया।

दावे के मुताबिक, भारत और चीन दो बड़े और कुछ छोटे इलाकों की संप्रभुता पर अपना-अपना दावा पेश करते हैं जो पिछले दशकों से दोनों के बीच विवादित मुद्दा बना हुआ है। 14,380 स्क्वॉयर मील का अक्साई चिन के क्षेत्र ब्रिटिश उपनिवेशवाद समाप्त होने के बाद से दोनों देशों के बीच विवादित है।

बता दें कि डोकलाम में चीनी सेना ने सड़क निर्माण की कोशिश की थी, जिस पर भारत ने विरोध किया था और चीनी सेना को सड़क बनाने से रोक दिया था। इस क्षेत्र पर चीन अपना दावा करता रहा है। वहीं, भारत इसे भूटान का हिस्सा मानकर भूटान के दावे का समर्थन करता आया है। चीन चाहता है कि भारतीय सेना डोकलाम क्षेत्र से पीछे हट जाए, लेकिन भारत इस स्थिति में पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है बल्कि भारतीय सेना ने और अधिक फोर्स तैनात कर दी है।

भारतीय सेना ने इन तस्वीरों को फर्जी करार देते हुए कहा कि यह हादसे की तस्वीरें है। यह हादसा अरुणाचल में सेना की एक ट्रेनिंग के दौरान हुआ था। घटना की तस्वीरें कई महीने पुरानी है।

इंडिया को शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है: चीन

सिक्किम विवाद पर चीन ने भारत को एक बार फिर से धमकी दी है और कहा है कि इस मसले पर अब बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है।

चीन के मुताबिक, समस्या का अब एकमात्र समाधान सिक्किम से भारतीय सैनिकों की वापसी है। चीन ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा है कि यदि भारत सीमा से अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाता है तो इंडिया को शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शनिवार 15 जुलाई की रात को एक बयान में ये बातें कही। अंग्रेजी वेबसाइट हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने ये स्पष्ट कर दिया है कि अब बातचीत के लिए कोई गुंजाइश नहीं है, और भारत को डोकलाम इलाके से अपने सैनिकों को वापस बुलाना ही होगा। लेकिन चीन ने इस बार इस विवाद में बड़े शातिराना तरीके से लद्दाख और कश्मीर का भी जिक्र किया है। साथ ही इन दोनों नामों को पाकिस्तान और चीन से भी जोड़ दिया।

शिन्हुआ द्वारा जारी किये गये बयान में कहा गया है कि ''भारत को मौजूदा विवाद को 2013-14 के लद्दाख विवाद जैसा नहीं समझना चाहिए या फिर उससे तुलना नहीं करनी चाहिए, जो कि चीन, पाकिस्तान और भारत के बीच दक्षिण-पूर्व कश्मीर में एक विवादित इलाका है। वहां पर कूटनीतिक प्रयासों की वजह से दोनों देशों के बीच सेना के टकराव का एक आसान हल निकल गया, लेकिन इस बार ये पूरी तरह से अलग मामला है।''

बता दें कि चीन द्वारा लद्दाख को विवादित क्षेत्र कहना और कश्मीर का संदर्भ देना एक अलग संकेत करता हैं।

बता दें कि ये पहली बार है जब चीन ने अपने सरकारी समाचार एजेंसी के जरिये ये स्पष्ट किया है कि सिक्किम मुद्दे पर अब दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं रह गयी है।

शिन्हुआ द्वारा जारी किये गये इन बयानों को चीन की सरकार और सत्ता पर नियंत्रण करने वाली कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का भी विचार माना जाता है।

शिन्हुआ ने आगे अपने बयान में लिखा है, ''डोकलाम से सेना हटाने की चीन की मांग को भारत जानबूझकर नजरअंदाज करता आ रहा है, हालांकि चीन की बातों को अनसुना कर भारत लगभग एक महीने पुराने इस विवाद को और भी गंभीर बना देगा और इस वजह से भारत को शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है।''

बता दें कि डोकलाम में चीन सड़क बनाना चाहता है, लेकिन ये इलाका भूटान का है और चीन इस पर कब्जा किये हुए है। भूटान के कहने पर भारत ने इस इलाके में सड़क बनाने की चीनी कोशिशों का विरोध किया है और वहां पर अपनी सेना तैनात कर दी है।

सीरियाई निगरानी समूह का दावा: आईएस चीफ अबु बकर अल बगदादी मारा गया

सीरियन आब्जर्वेटरी फोर ह्यूमन राइट्स ने मंगलवार (11 जुलाई) को कहा कि आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट के शीर्ष सदस्यों ने उसके सामने संगठन के प्रमुख अबु बकर अल बगदादी की मौत की पुष्टि की है।

निगरानी समूह के निदेशक रामी अब्देल रहमान ने कहा, ''दायेर एज्जोर प्रांत में मौजूद आईएस के शीर्ष स्तर के कमांडरों ने ऑब्जर्वेटरी से इस्लामिक स्टेट समूह के अमीर अबु बकर अल बगदादी की मौत की पुष्टि की है।''

उन्होंने कहा, ''हमें इसके बारे में आज पता चला, लेकिन यह नहीं पता है कि उसकी मौत कब और कैसे हुई।"

पूर्वी सीरिया का दायेर एज्जोर प्रांत का अधिकतर हिस्सा आईएस के कब्जे में है, जबकि समूह देश में और पड़ोसी देश इराक में दूसरी जगहों पर अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र खो रहा है।

रहमान ने कहा कि बगदादी हाल में महीनों में दायेर एज्जोर प्रांत के पूर्वी हिस्सों में मौजूद था, लेकिन यह साफ नहीं है कि उसकी मौत कहां हुई है? लेकिन हाल के महीनों में लगातार बगदादी की मौत की अफवाहें उड़ती रही हैं और रूसी सेना ने मध्य जून में कहा था कि वह इस बात का सत्यापन करने में लगी है कि क्या मई में सीरिया में उसके एक हवाई हमले में आईएस प्रमुख मारा गया।

रूसी सेना ने कहा कि आईएस के गढ़ राका के पास एक ठिकाने पर सुखोई लड़ाकू विमानों ने 28 मई को 10 मिनट तक हमला किया, जहां समूह के कमांडर इलाके से अपने सदस्यों को बाहर ले जाने की योजना बना रहे थे। अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन ने तब कहा था कि वह रूसी हमले में बगदादी के मारे जाने की पुष्टि नहीं कर सकता। इराक में जन्मे 46 साल के बगदादी को 2014 के बाद से सार्वजिनक रूप से कहीं नहीं देखा गया।

हालांकि, अब उसके मौत की आधिकारिक पुष्टि होने पर यह आतंकी समूह के लिए एक नया झटका होगा जो अपने सीरियाई गढ़ राका पर कब्जे के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले कुर्द एवं अरब लड़ाकों के गठबंधन से भी लड़ रहा है।

इराक का मोसुल में इस्‍लामिक स्‍टेट पर जीत का ऐलान

इराक ने मोसुल में इस्‍लामिक स्‍टेट पर जीत दर्ज करने की घोषणा की है। इराकी प्रधानमंत्री हैदर अल-आब्दी ने रविवार (9 जुलाई, 2017) को मुक्त कराये गये मोसुल में जीत की घोषणा की। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के लिये यह करारी हार है। उनके दफ्तर ने एक बयान में कहा कि आब्दी मुक्त कराये गये मोसुल में पहुंचे और जवानों तथा इराकी लोगों को इस अहम जीत की उपलब्धि पर बधाई दी।

तीन साल पहले जिहादियों ने मोसुल पर कब्जा जमा लिया था जिसके बाद पिछले नौ महीनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद आतंकियों पर इस जीत का ऐलान हुआ है। मोसुल की सुनी सड़कों से गुजरते हुए इराकी सैनिकों ने जश्‍न मनाना शुरू कर दिया है। नौ महीने तक चले संघर्ष के बाद इराक ने विजय हासिल की है।

एक इराकी कमांडर ने बचे हुए आईएस लड़ाकों से लाउडस्‍पीकर पर आत्‍मसमर्पण करने को कहा था, मगर उनके कमांडर ने इसे ठुकरा दिया। लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। प्रधानमंत्री के कार्यालय द्वारा बयान जारी करने के दौरान भी बंदूकों के चलने और शहर में हवाई हमलों की आवाज सुनाई दे रही थी। मोसुल में जीत का ऐलान इराकी सुरक्षा बलों के लिये मील का पत्थर है जो 2014 से ही इराक में आईएस के आतंक के सफाये की कोशिश में जुटे थे।

एक इराकी प्रेक्षक ने द इंडिपेंडेंट से कहा, ''इसमें दो या तीन दिन और लग सकते हैं, लेकिन इराकी सरकार यह सही कहती है कि आईएस के खिलाफ उसकी जंग की सबसे बड़ी लड़ाई जीत ली गई है।''

एक दिन पहले ही आईएस ने बड़ा जवाबी हमला किया था। संयुक्त अभियान कमांड ने कहा है, ''हमारी सेना अभी भी आगे बढ़ रही है  ....  नदी तक पंहुचने से पहले हमारी सेना के पास ज्यादा कुछ करने के लिए नहीं है।''

इराकी अधिकारियों ने पिछले सप्ताह इसी तरह की घोषणाएं की थी कि सुरक्षा बल दजला नदी के पास मोसुल के पुराने शहर के छोटी सी जगह तक ही सीमित कर दिया था।

हालांकि सेना का अभियान पिछले कुछ दिनों में धीमी हुई है। आईएस का नियंत्रण अब एक वर्ग किलोमीटर तक के क्षेत्र तक ही सीमित रह गया है। लेकिन आईएस असैन्य नागरिकों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जिस कारण हवाई हमले संभव नहीं हो पा रहे।

संघीय पुलिस ने शनिवार को घोषणा थी कि उन्हें सौंपे गए क्षेत्र का काम पूरा कर लिया है, हालांकि नियमित रूप से सेना और विशेष बल आतंकियों का सामना करना जारी रखे हुए हैं।

चीन के सरकारी अखबार ने ल‍िखा- आजादी की लड़ाई लड़े स‍िक्‍कि‍म, हम करेंगे मदद

भारत-चीन सीमा विवाद के बीच चीन की आधिकारिक मीडिया ने सिक्किम को भारत से अलग होने और आजाद होने की सलाह दी है। इसके साथ ही चीनी मीडिया ने भूटान को भी भारतीय दबाव से बाहर निकलने के लिए उकसाया है।

चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स में कहा गया है कि अगर सिक्किम और भूटान भारत के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो चीन उनकी मदद करेगा और दुनियाभर में अनुचित सीमा संधियों के खात्मे के लिए चीन उनकी पैरवी करेगा।

चीन का आरोप है कि नई दिल्ली ने भूटान पर दबाव बनाकर अनुचित सीमा संधि की है।

चीन की आधिकारिक मीडिया ने सिक्किम में हिंसा को उकसाने के मकसद से लिखे गए लेख में अपने नागरिकों से कहा है कि वो सिक्किम के लोगों में आजादी का आंदोलन और माहौल पैदा करे। इसके साथ ही उन्हें भारत के खिलाफ माहौल बनाने को भी कहा गया है।

ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है, ''बीजिंग को सिक्किम के रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए। हालांकि, चीन ने 2003 में सिक्किम को भारत के राज्य के रूप में मान्यता दी थी, लेकिन अब इस मामले पर अपना रुख बदल सकता है।''

अखबार ने लिखा है, सिक्किम में ऐसे लोग हैं जो अपने इतिहास को एक अलग राज्य के रूप में पसंद करते हैं, और वे इस बात के प्रति संवेदनशील हैं कि बाहरी दुनिया सिक्किम के मुद्दे को कैसे देखे। चीन में भी सिक्किम के लोगों की आवाज को मजबूती देने के लिए जनसमर्थन है। यह जनसमर्थन सिक्किम में आजादी से पहले की भूमिका और जनांदोलन खड़ा कर सकता है।''

डोकलाम पठार सामरिक दृष्टि से भारत और चीन के लिए महत्वपूर्ण है। अगर चीन यहां तक सड़क बनाने में कारगर रहता है तो वह भारत के पूर्वोत्तर हिस्से तक आसानी से अपनी पहुंच बना सकता है। यह सामरिक दृष्टि से भारत के लिए खतरनाक होगा।

बता दें कि भारत और चीन के बीच सिक्किम-भूटान-चीन सीमा पर स्थित डोकलाम पठार को लेकर विवाद चल रहा है। चीन वहां तक सड़क बनाना चाहता है, जबकि भारत उसका विरोध कर रहा है। पिछले दिनों भारत ने चीनी सैनिकों के सड़क निर्माण का विरोध किया था, तब चीनी सैनिकों ने भारत के दो बंकर तबाह कर दिए थे। उस वक्त भारतीय जवानों ने मानव दीवार बनकर चीनी मंसूबों पर पानी फेर दिया।

भूटान भी चीन के इस सड़क निर्माण का विरोध करता रहा है, जबकि चीन डोकलाम पठार को डोकलांग पठार कहकर उसे अपना इलाका कहता रहा है। चूंकि भूटान और चीन के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं है, इसलिए भारत इस मामले में भूटान की पैरवी करता रहा है।

चीन ने कहा, डोक ला का भारत-भूटान से लेना-देना नहीं

चीन ने आज कहा कि भारत यह कहकर आम लोगों को गुमराह कर रहा है कि सिक्किम सेक्टर में 'सिक्किम गलियारा' या 'चिकन्स नेक' के पास चीनी जवान सड़क का निर्माण कर रहे हैं जो पूर्वोत्तर राज्यों में भारत की पहुंच के लिये खतरा बन सकता है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने संवाददाताओं को बताया, ''1890 की चीन-ब्रिटिश संधि की अवमानना करते हुए भारतीय पक्ष ने कहा कि डोक ला तीन देशों के तिराहे के क्षेत्र में स्थित है, यह जनता को गुमराह करना है।''

जेंग ने जोर देकर कहा, ''1890 की संधि कहती है कि सिक्किम क्षेत्र की सीमा पूर्वी पहाड़ियों से शुरू होती है और यह घटना (सड़क निर्माण की) गिपमोची पर्वत से करीब 2000 मीटर दूर हुई है।

उन्होंने दावा किया कि इस घटना का चीन, भारत और भूटान के बीच तिराहे से कुछ लेना-देना नहीं है।

जेंग ने चीन द्वारा सड़क निर्माण का बचाव करते हुए कहा, भारतीय पक्ष दरअसल यह कह कर जनता को भ्रमित कर रही है कि यह घटना तीनों देशों की सीमा के मिलन बिंदु की है।''

भारत और भूटान चीन द्वारा सड़क बनाये जाने का विरोध कर रहे हैं। भारत ने सड़क निर्माण पर चिंता व्यक्त करते हुए आशंका जताई थी कि इससे उसके पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क काटने में चीनी सैनिक कामयाब हो सकते हैं।

बता दें कि भारत-चीन के बीच कुल 3500 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है। इन दोनों देशों के बीच सीमा विवाद की वजह से 1962 में युद्ध हो चुका है। बावजूद इसके सीमा विवाद नहीं सुलझ सका।

यही वजह है कि अलग-अलग हिस्सों में अक्सर भारत-चीन के बीच सीमा विवाद उठता रहा है। मौजूदा सीमा विवाद भारत-भूटान और चीन सीमा के मिलान बिन्दु से जुड़ा हुआ है। सिक्किम में भारतीय सीमा से सटे डोकलाम पठार है, जहां चीन सड़क निर्माण करने पर आमादा है।

भारतीय सैनिकों ने पिछले दिनों चीन की इस कोशिश का विरोध किया था। डोकलाम पठार का कुछ हिस्सा भूटान में भी पड़ता है। भूटान ने भी चीन की इस कोशिश का विरोध किया। भूटान में यह पठार डोक ला कहलाता है, जबकि चीन में डोकलांग।

भूटान और चीन के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं है। भूटान को अक्सर ऐसे मामलों में भारतीय सैन्य और राजनयिक सहयोग मिलता रहा है। लिहाजा, भारतीय सेना ने इस बार भी चीनी सैनिकों के सड़क निर्माण की कोशिशों का विरोध किया है। चीन को यह बात नागवार गुजरी है।

भारत-इजरायल के बीच हुए 7 अहम समझौते

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे के दूसरे दिन दोनों देशों के बीच सात समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए गए। इस दौरान संयुक्‍त बयान में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देशों के रिश्‍ते वैवाहिक संबंधों जैसे हैं। उन्‍होंने कहा, ''यह (भारत-इजरायल रिश्‍ता) स्‍वर्ग में बनी शादी है, लेकिन हम इसे यहां धरती पर लागू कर रहे हैं।''

नेतन्याहू ने कहा, ''मेरे लिए यह बेहद भावुक पल है। हम इतिहास बना रहे हैं।'' उन्‍होंने कहा, ''हम आतंकी ताकतों की चुनौती का सामना कर रहे हैं। हमने इस क्षेत्र में काम करने पर सहमति बनाई है।'' भारत और इजरायल के बीच भारत में जल संरक्षण, परमाणु घड़‍ियों को लेकर सहयोग की योजना से जुड़े समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए गए हैं।

नरेंद्र मोदी ने संयुक्‍त बयान में कहा, ''हमारी बातचीत में सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि इस पर भी बात हुई कि किस तरह हमारा सहयोग वैश्विक शांति और स्थिरता लाने में मदद कर सकता है। इजरायल कृषि, जल एवं नई खोजें करने में अग्रणी देश है। प्रधानमंत्री (नेतन्‍याहू) और मैं, हमारे रणनीतिक हितों की रक्षा करने पर सहमत हुए हैं।'' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर इजरायल पीएम को परिवार समेत भारत आने का न्‍योता भी दिया।

मोदी ने इजरायल के अपने समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू को केरल से ले जाए गए दो सेट तांबे के प्लेटों की प्रतिकृति भेंट की जो भारत में यहूदी इतिहास का हिस्सा है। माना जा रहा है कि तांबे के दोनों प्लेट 9-10वीं सदी के हैं। मोदी इजरायल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह इजरायल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री के तौर पर खुद को सम्मानित महसूस कर रहे हैं, यद्यपि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध 25 साल पुराने हैं।

आईसीबीएम मिसाइल प्रक्षेपित कर उत्तर कोरिया ने कहा, अमेरिकन बास्टर्डस के लिए हैं स्वतंत्रता दिवस का एक तोहफा

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन ने कहा कि अंतरमहाद्वीपीय मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण अमेरिकन बास्टर्डस को उनके स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिया गया एक तोहफा है।

प्योंगयांग की आधिकारिक समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी की खबर के अनुसार, नेता किम जोंग-उन ने बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण का निरीक्षण करने के बाद कहा कि अमेरिकन बास्टर्डस चार जुलाई को उनके स्वतंत्रता दिवस पर भेजे गए इस तोहफे से ज्यादा खुश नहीं होंगे। जोर-जोर से हंसते हुए उन्होंने कहा, हमें उनकी उदासी दूर करने के लिए बीच-बीच में तोहफे भेजते रहना चाहिए।

उत्तर कोरिया की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल बड़े, भारी परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम है जो पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा दाखिल हो सकती है।

यह बात आज उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी ने कही।

वाशिंगटन ने कल इस मिसाइल को आईसीबीएम बताया था। वहीं स्वतंत्र विशेषज्ञों ने कहा था कि यह मिसाइल अलास्का तक पहुंच सकती है।

द कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने कहा कि नेता किम जोंग-उन ने प्रक्षेपण का निरीक्षण करने के बाद गाली देते हुए कहा कि अमेरिकी चार जुलाई को उनके स्वतंत्रता दिवस पर भेजे गए इस तोहफे से ज्यादा खुश नहीं होंगे।

केसीएनए के अनुसार, जोर से हंसते हुए उन्होंने कहा, ''हमें उनकी बोरियत दूर करने के लिए बीच-बीच में तोहफा भेजते रहना चाहिए।''

किम ने सोंग-14 मिसाइल का निरीक्षण किया था और संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा था, ''यह बेहद सुंदर लग रही है और इसे अच्छे से बनाया गया है।''

प्रायद्वीप युद्ध के वर्ष 1953 में समाप्त होने के साथ ही उत्तर और दक्षिण कोरिया अलग हो गए और इस युद्ध की समाप्ति शांति समझौते की जगह युद्ध विराम के साथ हुई थी।

उत्तर कोरिया का कहना है कि उसे आक्रमण के खतरे से खुद को बचाने के लिए परमाणु हथियारों की जरूरत है।

केसीएनए ने किम के हवाले से कहा कि वाशिंगटन के साथ उत्तर कोरिया का टकराव अंतिम चरण में पहुंच गया है और अमेरिका की शुत्रतापूर्ण नीति तथा उसकी ओर से परमाणु खतरे के पूरी तरह खत्म होने तक उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों तथा बैलिस्टक मिसाइलों को किसी भी सूरत में नहीं त्यागेगा।

दक्षिण कोरिया के संयुक्त चीफ्स आॅफ स्टाफ ने चेतावनी के एक मजबूत संदेश के रूप में कहा कि इसके (मिसाइल प्रक्षेपण) के जवाब में अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सैनिकों ने आज समानांतर रूप से कई मिसाइल दागकर अभ्यास किया।

चीन की धमकी, भारत को जल्द से जल्द सेना को हटा लेना चाहिए

भारत में चीन के राजदूत लोऊ जाजोई ने इसे काफी गंभीर बताया और कहा कि भारत को तय करना है कि वह इस मसले को कैसे हल करना चाहता है।

चीनी मीडिया लगातार भारत को जंग की धमकी दे रही है। इसपर जब राजदूत से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि चीनी सरकार ने उस विकल्प पर भी बात की थी और अब सब भारत सरकार पर निर्भर है।

राजदूत ने कहा कि चीनी सरकार भारत के साथ शांति बनाए रखना चाहती है और पहले जैसे हालात बनाए रखने के लिए भारत को डोका ला इलाके से अपनी सेना को हटाना होगा।

राजदूत ने कहा कि आगे की बातचीत के लिए सैनिकों को वहां से हटाया जाना सबसे ज्यादा जरूरी है।

भारत और चीन के बीच  डोका ला इलाके में विवाद चल रहा है। पिछले 20 दिनों से स्थिति ऐसी ही बनी हुई है। सारा विवाद एक सड़क को लेकर शुरू हुआ जिसे चीन वहां बना रहा है। भूटान उस इलाके को डोकलाम कहता है और भारत उसे डोका ला कहता है। चीन का दावा है कि वह जगह उसकी है और वह अपने हिस्से में ही निर्माण कर रहा है। चीन और भूटान के बीच राजनयिक सम्बन्ध नहीं है, भारत हर मोर्चे पर भूटान का समर्थन करता है।

राजदूत ने कहा कि स्थिति बेहद गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि भारतीय सैनिक नियंत्रण रेखा को लांघकर उनकी तरफ चले गए। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत को चीन और भूटान के बीच बोलने का और भूटान की तरफ से विवादित जगह पर अधिकार जताने का कोई हक नहीं है। राजदूत ने आखिर में कहा कि भारत को जल्द से जल्द सेना को हटा लेना चाहिए यह दोनों देशों के लिए अच्छा होगा।