विदेश

चीन के सरकारी अखबार ने ल‍िखा- आजादी की लड़ाई लड़े स‍िक्‍कि‍म, हम करेंगे मदद

भारत-चीन सीमा विवाद के बीच चीन की आधिकारिक मीडिया ने सिक्किम को भारत से अलग होने और आजाद होने की सलाह दी है। इसके साथ ही चीनी मीडिया ने भूटान को भी भारतीय दबाव से बाहर निकलने के लिए उकसाया है।

चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स में कहा गया है कि अगर सिक्किम और भूटान भारत के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो चीन उनकी मदद करेगा और दुनियाभर में अनुचित सीमा संधियों के खात्मे के लिए चीन उनकी पैरवी करेगा।

चीन का आरोप है कि नई दिल्ली ने भूटान पर दबाव बनाकर अनुचित सीमा संधि की है।

चीन की आधिकारिक मीडिया ने सिक्किम में हिंसा को उकसाने के मकसद से लिखे गए लेख में अपने नागरिकों से कहा है कि वो सिक्किम के लोगों में आजादी का आंदोलन और माहौल पैदा करे। इसके साथ ही उन्हें भारत के खिलाफ माहौल बनाने को भी कहा गया है।

ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है, ''बीजिंग को सिक्किम के रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए। हालांकि, चीन ने 2003 में सिक्किम को भारत के राज्य के रूप में मान्यता दी थी, लेकिन अब इस मामले पर अपना रुख बदल सकता है।''

अखबार ने लिखा है, सिक्किम में ऐसे लोग हैं जो अपने इतिहास को एक अलग राज्य के रूप में पसंद करते हैं, और वे इस बात के प्रति संवेदनशील हैं कि बाहरी दुनिया सिक्किम के मुद्दे को कैसे देखे। चीन में भी सिक्किम के लोगों की आवाज को मजबूती देने के लिए जनसमर्थन है। यह जनसमर्थन सिक्किम में आजादी से पहले की भूमिका और जनांदोलन खड़ा कर सकता है।''

डोकलाम पठार सामरिक दृष्टि से भारत और चीन के लिए महत्वपूर्ण है। अगर चीन यहां तक सड़क बनाने में कारगर रहता है तो वह भारत के पूर्वोत्तर हिस्से तक आसानी से अपनी पहुंच बना सकता है। यह सामरिक दृष्टि से भारत के लिए खतरनाक होगा।

बता दें कि भारत और चीन के बीच सिक्किम-भूटान-चीन सीमा पर स्थित डोकलाम पठार को लेकर विवाद चल रहा है। चीन वहां तक सड़क बनाना चाहता है, जबकि भारत उसका विरोध कर रहा है। पिछले दिनों भारत ने चीनी सैनिकों के सड़क निर्माण का विरोध किया था, तब चीनी सैनिकों ने भारत के दो बंकर तबाह कर दिए थे। उस वक्त भारतीय जवानों ने मानव दीवार बनकर चीनी मंसूबों पर पानी फेर दिया।

भूटान भी चीन के इस सड़क निर्माण का विरोध करता रहा है, जबकि चीन डोकलाम पठार को डोकलांग पठार कहकर उसे अपना इलाका कहता रहा है। चूंकि भूटान और चीन के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं है, इसलिए भारत इस मामले में भूटान की पैरवी करता रहा है।

चीन ने कहा, डोक ला का भारत-भूटान से लेना-देना नहीं

चीन ने आज कहा कि भारत यह कहकर आम लोगों को गुमराह कर रहा है कि सिक्किम सेक्टर में 'सिक्किम गलियारा' या 'चिकन्स नेक' के पास चीनी जवान सड़क का निर्माण कर रहे हैं जो पूर्वोत्तर राज्यों में भारत की पहुंच के लिये खतरा बन सकता है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने संवाददाताओं को बताया, ''1890 की चीन-ब्रिटिश संधि की अवमानना करते हुए भारतीय पक्ष ने कहा कि डोक ला तीन देशों के तिराहे के क्षेत्र में स्थित है, यह जनता को गुमराह करना है।''

जेंग ने जोर देकर कहा, ''1890 की संधि कहती है कि सिक्किम क्षेत्र की सीमा पूर्वी पहाड़ियों से शुरू होती है और यह घटना (सड़क निर्माण की) गिपमोची पर्वत से करीब 2000 मीटर दूर हुई है।

उन्होंने दावा किया कि इस घटना का चीन, भारत और भूटान के बीच तिराहे से कुछ लेना-देना नहीं है।

जेंग ने चीन द्वारा सड़क निर्माण का बचाव करते हुए कहा, भारतीय पक्ष दरअसल यह कह कर जनता को भ्रमित कर रही है कि यह घटना तीनों देशों की सीमा के मिलन बिंदु की है।''

भारत और भूटान चीन द्वारा सड़क बनाये जाने का विरोध कर रहे हैं। भारत ने सड़क निर्माण पर चिंता व्यक्त करते हुए आशंका जताई थी कि इससे उसके पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क काटने में चीनी सैनिक कामयाब हो सकते हैं।

बता दें कि भारत-चीन के बीच कुल 3500 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है। इन दोनों देशों के बीच सीमा विवाद की वजह से 1962 में युद्ध हो चुका है। बावजूद इसके सीमा विवाद नहीं सुलझ सका।

यही वजह है कि अलग-अलग हिस्सों में अक्सर भारत-चीन के बीच सीमा विवाद उठता रहा है। मौजूदा सीमा विवाद भारत-भूटान और चीन सीमा के मिलान बिन्दु से जुड़ा हुआ है। सिक्किम में भारतीय सीमा से सटे डोकलाम पठार है, जहां चीन सड़क निर्माण करने पर आमादा है।

भारतीय सैनिकों ने पिछले दिनों चीन की इस कोशिश का विरोध किया था। डोकलाम पठार का कुछ हिस्सा भूटान में भी पड़ता है। भूटान ने भी चीन की इस कोशिश का विरोध किया। भूटान में यह पठार डोक ला कहलाता है, जबकि चीन में डोकलांग।

भूटान और चीन के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं है। भूटान को अक्सर ऐसे मामलों में भारतीय सैन्य और राजनयिक सहयोग मिलता रहा है। लिहाजा, भारतीय सेना ने इस बार भी चीनी सैनिकों के सड़क निर्माण की कोशिशों का विरोध किया है। चीन को यह बात नागवार गुजरी है।

भारत-इजरायल के बीच हुए 7 अहम समझौते

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे के दूसरे दिन दोनों देशों के बीच सात समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए गए। इस दौरान संयुक्‍त बयान में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देशों के रिश्‍ते वैवाहिक संबंधों जैसे हैं। उन्‍होंने कहा, ''यह (भारत-इजरायल रिश्‍ता) स्‍वर्ग में बनी शादी है, लेकिन हम इसे यहां धरती पर लागू कर रहे हैं।''

नेतन्याहू ने कहा, ''मेरे लिए यह बेहद भावुक पल है। हम इतिहास बना रहे हैं।'' उन्‍होंने कहा, ''हम आतंकी ताकतों की चुनौती का सामना कर रहे हैं। हमने इस क्षेत्र में काम करने पर सहमति बनाई है।'' भारत और इजरायल के बीच भारत में जल संरक्षण, परमाणु घड़‍ियों को लेकर सहयोग की योजना से जुड़े समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए गए हैं।

नरेंद्र मोदी ने संयुक्‍त बयान में कहा, ''हमारी बातचीत में सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि इस पर भी बात हुई कि किस तरह हमारा सहयोग वैश्विक शांति और स्थिरता लाने में मदद कर सकता है। इजरायल कृषि, जल एवं नई खोजें करने में अग्रणी देश है। प्रधानमंत्री (नेतन्‍याहू) और मैं, हमारे रणनीतिक हितों की रक्षा करने पर सहमत हुए हैं।'' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर इजरायल पीएम को परिवार समेत भारत आने का न्‍योता भी दिया।

मोदी ने इजरायल के अपने समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू को केरल से ले जाए गए दो सेट तांबे के प्लेटों की प्रतिकृति भेंट की जो भारत में यहूदी इतिहास का हिस्सा है। माना जा रहा है कि तांबे के दोनों प्लेट 9-10वीं सदी के हैं। मोदी इजरायल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह इजरायल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री के तौर पर खुद को सम्मानित महसूस कर रहे हैं, यद्यपि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध 25 साल पुराने हैं।

आईसीबीएम मिसाइल प्रक्षेपित कर उत्तर कोरिया ने कहा, अमेरिकन बास्टर्डस के लिए हैं स्वतंत्रता दिवस का एक तोहफा

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन ने कहा कि अंतरमहाद्वीपीय मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण अमेरिकन बास्टर्डस को उनके स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिया गया एक तोहफा है।

प्योंगयांग की आधिकारिक समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी की खबर के अनुसार, नेता किम जोंग-उन ने बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण का निरीक्षण करने के बाद कहा कि अमेरिकन बास्टर्डस चार जुलाई को उनके स्वतंत्रता दिवस पर भेजे गए इस तोहफे से ज्यादा खुश नहीं होंगे। जोर-जोर से हंसते हुए उन्होंने कहा, हमें उनकी उदासी दूर करने के लिए बीच-बीच में तोहफे भेजते रहना चाहिए।

उत्तर कोरिया की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल बड़े, भारी परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम है जो पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा दाखिल हो सकती है।

यह बात आज उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी ने कही।

वाशिंगटन ने कल इस मिसाइल को आईसीबीएम बताया था। वहीं स्वतंत्र विशेषज्ञों ने कहा था कि यह मिसाइल अलास्का तक पहुंच सकती है।

द कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने कहा कि नेता किम जोंग-उन ने प्रक्षेपण का निरीक्षण करने के बाद गाली देते हुए कहा कि अमेरिकी चार जुलाई को उनके स्वतंत्रता दिवस पर भेजे गए इस तोहफे से ज्यादा खुश नहीं होंगे।

केसीएनए के अनुसार, जोर से हंसते हुए उन्होंने कहा, ''हमें उनकी बोरियत दूर करने के लिए बीच-बीच में तोहफा भेजते रहना चाहिए।''

किम ने सोंग-14 मिसाइल का निरीक्षण किया था और संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा था, ''यह बेहद सुंदर लग रही है और इसे अच्छे से बनाया गया है।''

प्रायद्वीप युद्ध के वर्ष 1953 में समाप्त होने के साथ ही उत्तर और दक्षिण कोरिया अलग हो गए और इस युद्ध की समाप्ति शांति समझौते की जगह युद्ध विराम के साथ हुई थी।

उत्तर कोरिया का कहना है कि उसे आक्रमण के खतरे से खुद को बचाने के लिए परमाणु हथियारों की जरूरत है।

केसीएनए ने किम के हवाले से कहा कि वाशिंगटन के साथ उत्तर कोरिया का टकराव अंतिम चरण में पहुंच गया है और अमेरिका की शुत्रतापूर्ण नीति तथा उसकी ओर से परमाणु खतरे के पूरी तरह खत्म होने तक उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों तथा बैलिस्टक मिसाइलों को किसी भी सूरत में नहीं त्यागेगा।

दक्षिण कोरिया के संयुक्त चीफ्स आॅफ स्टाफ ने चेतावनी के एक मजबूत संदेश के रूप में कहा कि इसके (मिसाइल प्रक्षेपण) के जवाब में अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सैनिकों ने आज समानांतर रूप से कई मिसाइल दागकर अभ्यास किया।

चीन की धमकी, भारत को जल्द से जल्द सेना को हटा लेना चाहिए

भारत में चीन के राजदूत लोऊ जाजोई ने इसे काफी गंभीर बताया और कहा कि भारत को तय करना है कि वह इस मसले को कैसे हल करना चाहता है।

चीनी मीडिया लगातार भारत को जंग की धमकी दे रही है। इसपर जब राजदूत से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि चीनी सरकार ने उस विकल्प पर भी बात की थी और अब सब भारत सरकार पर निर्भर है।

राजदूत ने कहा कि चीनी सरकार भारत के साथ शांति बनाए रखना चाहती है और पहले जैसे हालात बनाए रखने के लिए भारत को डोका ला इलाके से अपनी सेना को हटाना होगा।

राजदूत ने कहा कि आगे की बातचीत के लिए सैनिकों को वहां से हटाया जाना सबसे ज्यादा जरूरी है।

भारत और चीन के बीच  डोका ला इलाके में विवाद चल रहा है। पिछले 20 दिनों से स्थिति ऐसी ही बनी हुई है। सारा विवाद एक सड़क को लेकर शुरू हुआ जिसे चीन वहां बना रहा है। भूटान उस इलाके को डोकलाम कहता है और भारत उसे डोका ला कहता है। चीन का दावा है कि वह जगह उसकी है और वह अपने हिस्से में ही निर्माण कर रहा है। चीन और भूटान के बीच राजनयिक सम्बन्ध नहीं है, भारत हर मोर्चे पर भूटान का समर्थन करता है।

राजदूत ने कहा कि स्थिति बेहद गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि भारतीय सैनिक नियंत्रण रेखा को लांघकर उनकी तरफ चले गए। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत को चीन और भूटान के बीच बोलने का और भूटान की तरफ से विवादित जगह पर अधिकार जताने का कोई हक नहीं है। राजदूत ने आखिर में कहा कि भारत को जल्द से जल्द सेना को हटा लेना चाहिए यह दोनों देशों के लिए अच्छा होगा।

चीन के अखबार ने लिखा, चीनी सेनाओं को भारत को जोरदार सबक सिखाना चाहिए

चीन द्वारा भारत को गीदड़ भभकी दिये जाने के एक दिन बाद ड्रैगन की सरकारी मीडिया ने फिर कहा है कि नयी दिल्ली को या तो सिक्किम से अपने सैनिकों को इज्जत से वापस बुला लेना चाहिए या फिर उन्हें चीनी सेना धक्के मारकर बाहर कर दे।

इससे पहले चीन ने कहा था कि सीमा विवाद मुद्दे पर बीजिंग कोई समझौता नहीं करेगा। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि यदि भारत की सेना चीन से सीमा विवाद में उलझती है तो उसे 1962 से भी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा।

अखबार ने लिखा है कि चीनी सेनाओं को भारत को जोरदार सबक सिखाना चाहिए।

बता दें कि सिक्किम में चीन द्वारा विवादित स्थान पर सड़क बनाने को लेकर भारत और चीन के बीच 20 दिनों से तनाव है, दोनों देशों ने विवादित स्थल के पास अपनी-अपनी सेनाएं तैनात कर रखी है।

ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है, ''हम उम्मीद करते हैं कि चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) इतनी ताकतवर है कि चीनी क्षेत्र से भारतीय सेनाओं को बाहर भगा सकती है, अब हिन्दुस्तान की आर्मी को चुनना है कि वो इज्जत से बाहर जाना पसंद करेगी या फिर चीनी सेना उन्हें खदेड़कर बाहर कर दे।''

ग्लोबल टाइम्स में छपे संपादकीय के मुताबिक, चीन का मानना है कि यदि भारत को लगता है कि वो ढाई मोर्चे पर युद्ध में सक्षम है तो चीन को भारत की क्षमता पर हंसी आती है।

अखबार लिखता है, ''यदि नयी दिल्ली को लगता है कि वो अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन डोका ला में कर सकता है और भारत ढाई मोर्चे पर युद्ध के लिए तैयार है तो हम भारत को कहना चाहेंगे कि हम उसकी सैन्य क्षमता को कमतर आंकते हैं''

बता दें कि कुछ दिन पहले भारत के आर्मी चीफ बिपिन रावत ने कहा है कि भारत ढाई मोर्चों पर यानी की पाकिस्तान, चीन और नक्सलियों से एक साथ युद्ध करने के लिए तैयार है।

भारत और चीन के बीच ये विवाद 6 जून को सिक्किम के नजदीक एक घाटी पर सड़क निर्माण को लेकर शुरू हुआ है। चीन, भूटान की मालिकाना हक वाली इस जमीन पर एक सड़क बनाना चाहता है।

चीन का दावा है कि भारत के सैनिकों ने चीन के क्षेत्र डोका ला में घुसकर इस निर्माण को रोक दिया है।

भारत का कहना है कि इस इलाके में सड़क बनाने के गंभीर सुरक्षा परिणाम हो सकते हैं, भारत ने ये भी कहा कि चीन जिस इलाके को अपना बता रहा है कि उसका मालिक भूटान है। भूटान ने भी भारत के रुख का कूटनीतिक और रणनीतिक समर्थन किया है।

बता दें कि जमीन के जिस टुकड़े को लेकर विवाद है वो भारत के लिए काफी अहम है। इस जमीन के जरिये ही भारत के उत्तर-पूर्व के सात राज्य देश के बाकी हिस्से से जुड़े हैं। इसके रणनीतिक महत्व को देखते हुए इसे 'चिकेन नेक' (मुर्गे की गरदन) भी कहा जाता है।

भारत-चीन में 1962 की जंग के बाद सबसे लम्बा गतिरोध, भारत ने और ज्यादा सैनिक तैनात किये

भारत ने सिक्किम के पास एक इलाके में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए और अधिक सैनिकों को 'नॉन-कांबटिव मोड' में लगाया है, जहां करीब एक महीने से भारतीय सैनिकों का चीनी जवानों के साथ गतिरोध बना हुआ है और यह दोनों सेनाओं के बीच 1962 के बाद से सबसे लंबा इस तरह का गतिरोध है।

सूत्रों ने कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा भारत के दो बंकरों को तबाह किये जाने और आक्रामक चालें अपनाये जाने के बाद भारत ने और अधिक सैनिकों को लगाया है। गैर-लड़ाकू मोड या 'नॉन-कांबेटिव मोड' में बंदूकों की नाल को जमीन की ओर रखा जाता है।

दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध से पहले के घटनाक्रम का पहली बार ब्योरा देते हुए सूत्रों ने कहा कि पीएलए ने गत एक जून को भारतीय सेना से डोका ला के लालटेन में 2012 में स्थापित दो बंकरों को हटाने को कहा था जो चंबी घाटी के पास और भारत-भूटान-तिब्बत ट्राईजंक्शन के कोने में पड़ते हैं। कई साल से इस क्षेत्र में गश्त कर रही भारतीय सेना ने 2012 में फैसला किया था कि वहां भूटान-चीन सीमा पर सुरक्षा मुहैया कराने के साथ ही पीछे से मदद के लिए दो बंकरों को तैयार रखा जाएगा।

सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना के अग्रिम मोर्चों ने उत्तर बंगाल में सुकना स्थित 33 कोर मुख्यालय को चीन द्वारा बंकरों के लिए दी गयी चेतावनी के बारे में सूचित किया था। हालांकि सूत्रों ने कहा कि छह जून की रात को दो चीनी बुलडोजरों ने बंकरों को तबाह कर दिया था और दावा किया कि यह इलाका चीन का है और भारत या भूटान का इस पर कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि तैनात भारतीय सैनिकों ने चीनी जवानों और मशीनों को इलाके में घुसपैठ करने या और अधिक नुकसान पहुंचाने से रोक दिया।

टकराव वाली जगह से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित पड़ोस के ब्रिगेड मुख्यालय से अतिरिक्त बलों को आठ जून को भेजा गया जिस दौरान झड़प की वजह से दोनों पक्षों के सैनिकों को मामूली चोट आईं। इलाके में स्थित पीएलए के 141 डिवीजन से उसके सैनिक पहुंचने लगे जिसके बाद भारतीय सेना ने भी अपनी स्थिति को मजबूत किया।

भारत और चीन की सेनाओं के बीच 1962 के बाद से यह सबसे लंबा गतिरोध है। पिछली बार 2013 में 21 दिन तक गतिरोध की स्थिति बनी थी, जब जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में 30 किलोमीटर अंदर डेपसांग प्लेन्स तक प्रवेश कर लिया था और इसे अपने शिनझियांग प्रांत का हिस्सा होने का दावा किया था। हालांकि उन्हें वापस खदेड़ दिया गया।

सिक्किम मई 1976 में भारत का हिस्सा बना था और एकमात्र राज्य है जिसकी चीन के साथ एक निर्धारित सीमा है। ये सीमा रेखा चीन के साथ 1898 में हुई एक संधि पर आधारित हैं। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद जिस इलाके में भारतीय सैनिक तैनात थे, उसे भारतीय सेना और आईटीबीपी के हवाले कर दिया गया। आईटीबीपी का एक शिविर अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर दूर स्थित है।

दोनों पक्षों के बीच संघर्ष की स्थिति आने के बाद भारतीय सेना ने मेजर जनरल रैंक के एक अधिकारी को इलाके में भेजा और चीन के अधिकारियों के साथ फ्लैग वार्ता का प्रस्ताव रखा गया। चीन ने भारत की तरफ से ऐसे दो आग्रहों को खारिज कर दिया, लेकिन बैठक की तीसरी पेशकश को स्वीकार कर लिया। इस बैठक में चीन की सेना ने भारतीय फौज से लालटेन इलाके से अपने जवानों को वापस बुलाने को कहा जो डोका ला में पड़ता है। डोका ला उस क्षेत्र का भारतीय नाम है जिसे भूटान डोकालम कहता है, वहीं चीन इसे अपने डोंगलांग क्षेत्र का हिस्सा होने का दावा करता है।

सूत्रों ने बताया कि गतिरोध के मद्देनजर चीनी सैनिकों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जाने वाले 47 यात्रियों के पहले जत्थे को जाने से रोक दिया। उन्होंने भारतीय पक्ष से यह भी कहा कि एक और जत्थे में शामिल 50 लोगों के वीजा भी निरस्त कर दिये गये हैं। तिब्बत में स्थित कैलाश मानसरोवर के लिए सिक्किम वाला रास्ता 2015 में खोला गया था जिससे तीर्थयात्री नाथू ला से 1500 किलोमीटर लंबे रास्ते पर बसों से जा सकें। डोका ला में पहली बार इस तरह की घुसपैठ नहीं हुई है। चीन के सैनिकों ने नवंबर 2008 में भी वहां भारतीय सेना के कुछ अस्थाई बंकरों को नष्ट कर दिया था।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन चंबी घाटी पर अपना प्रभुत्व जमाना चाहता है जो तिब्बत के दक्षिणी हिस्से में है। डोका ला इलाके पर दावा करके बीझिंग अपनी भौगोलिक स्थिति को व्यापक करना चाहता है ताकि वह भारत-भूटान सीमा पर सभी गतिविधियों पर निगरानी रख सके। चीन ने भारत पर कूटनीतिक दबाव भी बढ़ाया है और सिक्किम क्षेत्र में भारतीय सैनिकों द्वारा कथित रूप से सीमा पार करने को लेकर विरोध दर्ज कराया है।

हांगकांग में चीनी राष्‍ट्रपति ने चेतावनी दी- रेड लाइन लांघने की कोशिश न करे

हांगकांग में चीन के शासन के 20 साल पूरा होने के मौके पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार (1 जुलाई) को कड़ी चेतावनी दी कि लोकतंत्र के नाम पर हांगकांग में चीन की संप्रभुता को खतरा पैदा करने का कोई प्रयास रेड लाइन लांघना होगा और इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।

ब्रिटेन द्वारा हांगकांग को चीन के सुपुर्द किए जाने की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक समारोह में जिनपिंग ने कहा कि हांगकांग पहले कभी इतना स्वतंत्र नहीं था, जितना आज है। साथ ही उन्होंने बीजिंग शासन के लिए अनुचित चुनौतियां खड़ी किए जाने के खिलाफ आगाह भी किया।

उन्होंने यह चेतावनी हांगकांग में बीजिंग समर्थक नई मुख्य कार्यकारी कैरी लैम के शपथ ग्रहण के मौके पर आयोजित समारोह में दी। सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के महासचिव शी ने कहा, ''राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा पैदा करने, केंद्रीय सरकार के अधिकार एवं हांगकांग विशेष प्रशासित क्षेत्र के मौलिक कानून के प्राधिकार को चुनौती देना या मुख्य क्षेत्र में घुसपैठ तथा नुकसान पहुंचाने के लिए हांगकांग के इस्तेमाल करने का कोई भी प्रयास रेड लाइन लांघना होगा और इसकी बिल्कुल इजाजत नहीं होगी।''

चीन समर्थक समिति द्वारा लैम का चयन किया गया है। अभी से इस निर्णय की आलोचना की जा रही है और कई लोग इसे शहर में चीन की एक कठपुतली की तैनाती बता रहे हैं। वहीं कुछ लोग लगभग 80 लाख लोगों की स्वतंत्रता पर बीजिंग की कठोर होती पकड़ से नाराज हैं।

चीनी राष्ट्रपति की यह प्रतिक्रिया युवा कार्यकर्ताओं के आत्मनिर्णय या हांगकांग के लिए पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करने के बाद आई है। युवा कार्यकर्ताओं की मांग को लेकर चीन की त्यौरियां तनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि हांगकांग के पास अधिक इतने व्यापक लोकतांत्रिक अधिकार हैं, जितने पहले कभी उसके पास नहीं थे।

लैम ने शी से हाथ मिलाने से पहले, देश के हारबरफ्रंट सम्मेलन केंद्र में चीन के राष्ट्रीय ध्वज के नीचे पद की शपथ ली। ब्रिटेन ने एशिया के वित्तीय केंद्र हांगकांग का नियंत्रण वर्ष 1997 में चीन के हाथ में दे दिया था।

अमेरिका: अर्कांसस के नाइट क्‍लब में बंदूकधारी ने गोलियां बरसाईं, 17 लोग घायल

अमेरिका के अर्कांसस राज्‍य के एक नाइट क्‍लब में गोलीबारी की खबर है।

अमेरिकी मीडिया के अनुसार, राज्‍य के लिटिल रॉक शहर में एक कंसर्ट के दौरान विवाद हो गया जिसके बाद एक बंदूकधारी ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं।

घटना में 17 लोग घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, घटना शनिवार रात करीब ढाई के आसपास हुई। एक व्‍यक्ति गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा था, मगर उसकी हालत फिलहाल स्थिर है। संदिग्‍ध के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है, मगर पुलिस का कहना है कि स्थिति किसी आतंकी या सक्रिय शूटर से जुड़ी नहीं लग रही।

भारत को चीन के साथ जंग से बचना चाहिए, चीन ताकत में भारत से बहुत आगे है: असम के राज्यपाल

भारत-चीन के बीच ताजा तनाव पर असम के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत को चीन के साथ जंग से बचना चाहिए क्योंकि चीन ताकत में भारत से बहुत आगे है।

बीजेपी शासित असम के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने कहा कि भारत और चीन 2 साल आगे पीछे आजाद हुए, लेकिन आज परिस्थिति ये है कि हम आज चीन से डरते हैं।

उत्तर-पूर्वी राज्यों के पुलिस अधिकारियों के एक कार्यक्रम में बनवारी लाल पुरोहित ने कहा, ''चीन हमसे 2 साल पहले स्वतंत्र हुआ था। आज परिस्थिति ये है कि हम चीन से डरते हैं।''

उन्होंने कहा कि भारत को चीन से जंग से बचना चाहिए क्योंकि चीन हमारे से ताकत में बहुत आगे है। गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित ने चीन से भारत के पिछड़ने की वजह के लिए भ्रष्टाचार को जिम्मेवार माना है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के राक्षस ने भारत को बर्बाद किया है।

बता दें कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर पिछले कुछ दिनों से तनाव बढ़ा हुआ है। ये विवाद तब शुरू हुआ है, जब चीनी सेनाओं ने सिक्किम में भारतीय इलाके में बने दो अस्थायी बंकरों पर बुलडोजर चलवा दिया। इसके बाद आर्मी चीफ बिपिन रावत ने गुरुवार (29 जून) को सिक्किम का दौरा किया। अब यहां दोनों देशों ने अपनी तीन-तीन हजार सेनाएं तैनात कर रखी है, और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।

इस बीच चीन ने गुरुवार को भारत को धमकी भरे अंदाज में कहा कि अगर भारत ने 'चीनी क्षेत्र' से अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाया तो दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ सकता है। चीन ने कहा है कि भारत को 1962 की जंग से सबक लेना चाहिए और युद्ध के लिए शोर नहीं मचाना चाहिए।

चीन के इस बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत के रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि चीन को ये समझना चाहिए कि 1962 और 2017 के भारत में बहुत फर्क है।

इस बीच भारत ने चीनी सीमा में भारतीय सैनिकों के घुसपैठ की खबरों का आधिकारिक तौर पर खंडन किया है और कहा है कि घुसपैठ चीन के सैनिकों ने की थी।

भारत के विदेश मंत्रालय ने चीन को पत्र लिखकर कहा है कि भारत चीन द्वारा डोकलाम इलाके में सड़क निर्माण के प्रति गंभीर चिंता जाहिर करता है। भारत के मुताबिक, चीन की इस कोशिश से सिक्किम-भूटान-तिब्बत के त्रिमुहाने पर भौगोलिक स्थिति में बदलाव हो सकता है जिससे गंभीर सुरक्षा परिणाम हो सकता है। भूटान ने भी इस इलाके में सड़क बनाने की चीनी कोशिशों का खंड़न किया है।