अमेरिका की एक रिपोर्ट में पाक अधिकृत कश्मीर को आजाद कश्मीर लिखे जाने पर भारत ने कडी आपत्ति जताई है। भारत ने इस बावत अमेरिका से विरोध जताया है। 19 जुलाई को जारी अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट 'कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म 2016' में पाक अधिकृत कश्मीर को आजाद कश्मीर कहा गया है, हालांकि रिपोर्ट में इस बात को भी लिखा गया है कि इस इलाके का इस्तेमाल आतंकी भारत में आतंकी गतिविधियों को चलाने के लिए करते हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद भारत ने अमेरिकी प्रशासन से विरोध जताया है। भारत के विरोध के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात को स्वीकार किया कि अमेरिका के जम्मू-कश्मीर के विवरण में विसंगति रही है, लेकिन अमेरिका का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ''कश्मीर को लेकर हमारी नीति में बदलाव नहीं आया है। कश्मीर से संबंधित चर्चाओं की गति, गुंजाइश तथा चरित्र का निर्धारण दोनों संबद्ध देश करेंगे, लेकिन हम करीबी संबंधों के विकास के लिए भारत एवं पाकिस्तान द्वारा उठाए जाने वाले सभी सकारात्मक कदमों का समर्थन करते हैं।''
बता दें कि ये पहली बार है कि अमेरिका ने पीओके को आजाद कश्मीर कहकर संबोधित किया है। अमेरिकी प्रशासन इस क्षेत्र के लिए 'पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर' शब्द का इस्तेमाल करता रहा है।
हालांकि भारत के लिए संतुष्टि की बात ये है कि इसी रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर को भारत का राज्य बताया गया है, जबकि अमेरिकी सरकार पहले इसके लिए 'भारत प्रशासित कश्मीर' शब्द का प्रयोग करती थी।
इस रिपोर्ट में हरकत-उल-मुजाहिदीन की चर्चा करते हुए लिखा गया है कि ये संगठन मुख्य रुप से भारत के राज्य जम्मू-कश्मीर और अफगानिस्तान में अपनी गतिविधियां चलाता है।
आगे इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि हरकत-उल-मुजाहिदीन आजाद कश्मीर के मुजफ्फराबाद और पाकिस्तान के कई दूसरे शहरों से संचालित होता है। इसी तरह आतंकी हाफिज सईद के बारे में इस रिपोर्ट में लिखा गया कि इस संगठन के सदस्यों की वास्तविक संख्या तो बताना मुश्किल है, लेकिन आजाद कश्मीर और पाकिस्तान के पंजाब, खैबर पख्तूनखवा और भारत के राज्य जम्मू-कश्मीर में इस संगठन के हजारों सदस्य हैं।
सरहद पार से नशीली पदार्थों की तस्करी के कई मामले लगातार सामने आते रहते हैं। पुलिस और सुरक्षाबलों की ओर से सीमा पार से आने वाले नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए समय-समय पर अभियान भी चलाया जाता है। शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर की बारामुल्ला पुलिस ने भारत आ रहे 25 किलो नारकोटिक्स ड्रग्स से भरा ट्रक पकड़ा।
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, यह क्रॉस बॉर्डर ट्रेड के उद्देश्य से ड्रग्स पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से भारत भेजे गए थे जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया। इस मामले में किसी तस्कर की गिरफ्तारी हुई है या नहीं। इस संबंध में अभी जानकारी नहीं मिल पाई। साथ ही मादक पदार्थ की कीमत का भी अभी तक पता नहीं चल सका है। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है।
बारामूला पुलिस ने शनिवार को नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के खिलाफ अभियान चलाते हुए ट्रक में लादकर ले जाए रहे 25 किलो नारकोटिक्स ड्रग्स को सीज़ किया। इस तरह के मामले पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं।
पंजाब भी सीमा पार तस्करी की समस्या से जूझ रहा है। बीते दिनों पाकिस्तान से आई हीरोइन की खेप को फाजिल्का एसटीएफ जालंधर रेंज व कमिश्नरेट पुलिस ने ज्वाइंट आप्रेशन के दौरान बरामद की थी। पुलिस टीम ने 2 तस्करों को गिरफ्तार कर 1 किलो हीरोइन बरामद की है। बरामद हीरोइन की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 5 करोड़ रुपए आंकी जा रही थी। तस्करों की गिरफ्तारी से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे हैरोइन तस्करी के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
कुछ महीने पहले खबरें आईं थी भारत में ड्रग्स पहुंचाने के लिए पाकिस्तानी तस्करों ने नए तरीके खोज निकाले हैं जिससे ड्रग्स पकड़े जाने पर तस्करों को ज्यादा नुकसान न हो। पाकिस्तानी तस्कर पंजाब में भारत की ओर मादक पदार्थ पहुंचाने के लिए सीमा पार सिंचाई साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके साथ ही प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के छोटे-छोटे पैकेट फेंकने जैसे तरीके अपना रहे हैं।
बीएसएफ के अधिकारी की ओर से बताया गया था कि हीरोइन के एक किलोग्राम या ज्यादा वजन के बड़े पैकेट की तस्करी करना कठिन है। इसलिए तस्कर 250 ग्राम के छोटे-छोटे पैकेटों में नशीले पदार्थ पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। वे रात में सीमापार से पैकेट फेंकते हैं। यहां स्थानीय तस्कर पैकेट ले लेते हैं। तस्करी को रोकने के लिए बीएसएफ और पुलिस संयुक्त अभियान चला रहे हैं।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा चलाए जाने वाले अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। अखबार में शुक्रवार (21 जुलाई) को छपे संपादकीय में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के डोकलाम गतिरोध पर भारतीय संसद में दिए गए बयान को झूठा बताया गया है।
ग्लोबल टाइम्स ने डोकलाम इलाके से दोनों देशों द्वारा एक साथ सेनाएं हटाने को भारत का दिवास्वप्न बताया है। संपादकीय में भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की भी धमकी दी गई है। इस संपादकीय में लिखा गया है, ''अगर भारत अपने सैनिक नहीं हटाता है तो चीन के पास आखिरी विकल्प है उससे लड़ाई और बगैर किसी कूटनीति के संघर्ष का खात्मा।'' चीन में एक ही राजनीतिक पार्टी (कम्युनिस्ट पार्टी) है जो 1949 से ही सत्ता में है। चीन में मीडिया पर सरकार का पूरी तरह नियंत्रण है।
भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद के मानसून सत्र में कहा था कि चीन डोकलाम के त्रिमुहाने वाले इलाके में यथास्थिति बदलना चाहता है और इससे भारत की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। डोकलाम इलाके में चीन भारी सैन्य वाहन और टैंक की आवाजाही लायक सड़क बनाना चाहता है। डोकलाम इलाके को चीन अपना डोंगलॉन्ग इलाका बताता है।
चीनी अखबार ने कहा, ''भारतीय विदेश मंत्री ने झूठ बोला, सबसे पहली बात ये है कि भारत ने उस इलाके में घुसपैठ किया है, भारत के रवैये से पूरी दुनिया हैरान है और उसे किसी देश का समर्थन नहीं मिल रहा है।'' चीनी अखबार ने लिखा है कि '' .... दूसरी बात ये है कि सैन्य क्षमता के मामले में भारत चीन से बहुत पीछे है और इस मामले ने सैन्य समाधान का रुख किया तो इसमें कोई संदेह नहीं कि हार भारत की होगी।
चीनी अखबार ने लिखा है कि दोनों देशों द्वारा एक साथ सेना हटाने की बात भारत के रुख में बदलाव है। चीनी अखबार ने लिखा है, ''भारत ने डोंगलॉन्ग (डोकलाम) को त्रिमुहाना बताना शुरू कर दिया है और चीन का रुख भांपने के लिए दोनों तरफ से सैनिक हटाने का प्रस्ताव दे रहा है। लगता है कि भारत को अपनी हैसियत का अहसास होने लगा है।''
ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में एक बार फिर भारत और चीन के बीच अन्य जगहों पर भी 'संघर्ष' बढ़ने के प्रति आगाह किया है। अखबार ने कहा है कि ''सीमा पर सैन्य साजोसामान और गोलाबारूद पहुंचाने के मामले में चीन की क्षमता भारत से बहुत ज्यादा है और चीनी सैनिक कभी भी कहीं भी पहुंच सकते हैं और चीन-भारत सीमा चीन के लिए अपने प्रशिक्षण और सुधार को दर्शाने वाला प्रदर्शनस्थल बन जाएगी।''
अखबार ने लिखा है कि भारत को डोकलाम का ख्वाब देखना छोड़ देना चाहिए। अखबार ने लिखा है कि चीन कभी भी दोनों तरफ से सेना हटाने पर सहमत नहीं होगा।
चीनी अखबार ने लिखा है कि अगर चीन और भारत के बीच युद्ध होगा तो अमेरिका और जापान उसकी मदद नहीं करेंगे। चीनी अखबार ने लिखा है कि चीनी जनता भी भारत के खिलाफ युद्ध की कीमत पर भी एक-एक इंच भूमि की रक्षा की समर्थक है।
चीनी अखबार ने लिखा है कि भले ही भारतीय सैनिकों की संख्या ज्यादा हो, लेकिन चीनी सेना के तेज परिवहन क्षमता से किसी भी मोर्च की स्थिति बहुत कम समय में बदल सकती है।
चीनी अखबार ने लिखा है कि भारत ने 1962 में भी चीन को आंकने में गलती की थी जिसकी उसे कीमत चुकानी पड़ी थी।
चीन के एक पूर्व राजनयिक ने बुधवार को डोकलाम विवाद पर भारत को धमकी देते हुए कहा है कि इस विवाद को एक महीना हो चुका है, अब भारतीय सैनिकों को तीन विकल्प दिए जाएंगे- वापस जाओ, कब्जा करलो या चीन का हमला।
चीन के पूर्व राजनयिक की यह टिप्पणी बीजिंग के उस रुख को और कड़ा कर देती हैं जिसमें चीनी सरकार जोर दे रही है कि जब तक भारत वापस जाने की पूर्व शर्त पूरी नहीं करता, राजनयिक समाधान के लिए कोई जगह नहीं है।
पहले मुंबई में कौंसल जनरल रह चुके ये पूर्व राजनयिक लियू हेफा अब रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ बन गए हैं। लियू ने चाइना सेंट्रल टेलिविजन को दिए इंटरव्यू में कहा, ''जब किसी देश के सैनिक बॉर्डर पार कर लेते हैं और किसी दूसरे देश की सरहद में पहुंच जाते हैं तो वह खुद ब खुद उस देश के दुश्मन बन जाते हैं और उन्हें तीन विकल्प में से एक चुनना होता है।'' लियू ने आगे कहा, ''वह स्वेच्छा से बाहर चले जाएं। या इलाके पर कब्जा कर लें। और सीमा विवाद बढ़ने पर वह मारे जाएंगे। यही तीन संभावनाए हैं।'' लियू ने कहा कि चीन भारत के कदम का इंतजार कर रहा है।
एक दिन पहले ही चीन ने भारत को ललकारते हुए कहा था कि चीन युद्ध के लिए तैयार है और वह भारत से युद्ध करने से डरता नहीं है। भारत को विवादित सीमा पर सभी जगह टकराव का सामना करना पड़ेगा।
डोकलाम में गतिरोध पर चीन और भारत के बीच तनाव में कोई कमी नहीं आई है। चीन ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है और वह हर रोज भारत को चेतावनी दे रहा है। चीन, भूटान व भारत की सीमा डोकलाम में मिलती है। यह स्थान तीनों राष्ट्रों के लिए रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है।
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख के अनुसार भारत में तेजी से बढ़ रहा हिंदू राष्ट्रवाद दोनों देशों के बीच युद्ध के खतरे को बढ़ा रहा है। ग्लोबल टाइम्स में 'भारत में बढ़ता हिंदू राष्ट्रवाद' शीर्षक से छपे लेख में यू निंग ने लिखा, ''भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावों के दौरान हिंदू राष्ट्रवाद को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव में देश में राष्ट्रवादी भावनाओं को हवा दी है। और ऐसे में अगर धार्मिक राष्ट्रवाद हद से ज्यादा बढ़ गया तो मोदी भी कुछ नहीं कर पाएंगे क्योंकि वह 2014 में सत्ता में आने के बाद मुस्लिमों के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने में विफल रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद हिंदू राष्ट्रवाद का लाभ उठाया है।''
लेख में आगे कहा गया कि राष्ट्रवाद भारत को चीन के खिलाफ बॉर्डर पर युद्ध की तरफ धकेल रहा है। जबकि भारत ताकत के मामले में चीन से कमजोर है, लेकिन बावजूद इसके नई दिल्ली के रणनीतिकारों और नेताओं ने भारत की चीन नीति को राष्ट्रवाद के हाथों में जाने से नहीं रोका। चीन भले ही भारत से कई बार भारत के सैनिकों को बॉर्डर से वापस बुलाने की अपील कर चुका है, जबकि नई दिल्ली ने अपनी उत्तेजनाएं जारी रखी हैं।
गौरतलब कि डोकलाम में सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन पिछले एक महीने से अधिक समय से आमने-सामने हैं। इस बीच तिब्बत में चीनी सैनिकों की तैनाती और भारी हथियारों को तैनात किए जाने की खबर आई थी, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है।
जानकारी के लिए बता दें कि संसद के मानसून सत्र में भी चीन सीमा विवाद को लेकर हंगामा जारी है। समाजवादी पार्टी नेता और देश के पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा में सरकार को नसीहत देते हुए कहा था कि चीन भारत के साथ युद्ध की तैयारी कर चुका है। उन्होंने कहा कि भारत को भी अब तिब्बत की आजादी का समर्थन करना शुरू कर देना चाहिए।
भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के दरम्यान कूटनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं। चीन ने बीजिंग स्थिति विदेशी राजनयिकों से कहा है कि उसकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) धैर्य के साथ डोकलाम इलाके में तैनात है।
चीन ने विदेशी राजनयिकों से कहा है कि उसकी सेना असीमित काल तक धैर्य नहीं रखेगी। चीन भूटान के डोकलाम इलाके पर दावा जताता रहा है। चीन इसे डोंगलॉन्ग कहता है।
भारत के सिक्किम में देश की सीमा तिब्बत और भूटान से लगती है। चीन भूटानी इलाके में उच्च क्षमता वाली सड़क बनाना चाहता है जिस पर 40 टन तक के सैन्य वाहन और टैंक आ जा सकेंगे। भारत की सुरक्षा की दृष्टि से ये इलाका बहुत संवेदनशील है। इस इलाके में चीन का कब्जा हो जाने से पूर्वोत्तर भारत को शेष भारत से जोड़ने वाले मार्ग पर चीन की सामरिक स्थिति मजबूत हो जाएगी।
चीन में मौजूद विदेशी राजनयिक सीमा विवाद को लेकर चिंतित हैं और उनमें से कुछ ने भारतीय और भूटानी राजनयिकों से अपनी चिंता साझा की। पिछले महीने डोकलाम इलाके में भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों के सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी। तभी से दोनों देशों के बीच तनातनी है। चीन भारत से अपने सैनिक पीछे हटाने की मांग कर रहा है।
चीन ने विदेशी राजनयिकों के सामने दावा किया कि उसके पास इस बात के ठोस सबूत हैं कि डोकलाम उसका इलाका है। चीन ने कहा कि डोकलाम चीनी सीमावर्ती निवासियों के पशुओं के लिए चारागाह का काम करता रहा है। चीन ने भूटानी घास काटने वालों को दी गई रसीद भी दिखाई।
सूत्रों के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने बंद कमरे में हुई एक बैठक में पिछले हफ्ते विदेशी राजनयिकों को सीमा विवाद पर अपना पक्ष बताया। चीन सरकार ने जी-20 समूह में शामिल कुछ देशों को भी इस गतिरोध के बारे में सूचित किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों मे से एक के राजनयिक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ''हमारे बीजिंग स्थित सहयोगी उस वार्ता में मौजूद थे। उन्हें ये संकेत दिया गया कि चीनी सेनी अनिश्चित काल तक इंतजार नहीं करेगी। ये चिंता की बात है और हमने ये सूचना बीजिंग स्थित भारतीय राजनयिकों और नई दिल्ली स्थित भूटानी राजनयिकों को दे दी है।''
राजनयिक के अनुसार चीन ने विदेशी राजनयिकों से कहा है कि ये विवाद चीन और भूटान के बीच का है और भारत उसमें 'कूद' पड़ा है। राजयनिक ने कहा, ''चीन का कहना है कि भारतीय सैनिक उसकी सीमा में घुसे हैं और उन्होंने यथास्थिति को बदल दिया है।''
हालांकि भारत ने चीन को 30 जून को भेजे अपने बयान में कहा है कि भारत सीमा पर मौजूदा स्थिति को लेकर काफी चिंतित है और इस इलाके में सड़क निर्माण से यथास्थिति बदलेगी जिसकी भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
चीन का कहना है कि भारत अपने सैनिक बगैर किसी शर्त के हटाए और उसके बाद ही दोनों देशों के बीच बातचीत हो पाएगी। वहीं भारत ने साफ कर दिया है कि चीन के साथ 2012 में इस बात पर सहमति बन गई थी कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के मामले में सभी संबंधित देशों को शामिल करने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जाएगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि इस त्रिमुहाने के बारे में कोई भी एकतरफा फैसला उस सहमति का उल्लंघन है।
केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, भारत कूटनीतिक प्रयासों से मौजूदा गतिरोध को दूर करना चाहता है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल 26-27 जुलाई को ब्रिक्स देशों के एनएसए की बैठक में शामिल होने चीन जाने वाले हैं। माना जा रहा है कि डोभाल इस मौका का लाभ चीनी एनएसए यांग जीची के साथ आपसी समझ बेहतर करने के लिए करेंगे।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और डोकलाम विवाद को लेकर तनातनी चल रही है। चीन और भारत दोनों अपने रुख में परिवर्तन करने के लिए तैयार नहीं है। इस बीच पाकिस्तान के एक टीवी चैनल भारत के खिलाफ बड़ा प्रोपेगंडा फैला रहा है।
पाकिस्तानी टीवी चैनल दुनिया न्यूज ने दावा किया है कि चीनी सेना की ओर से किए रॉकेट अटैक में भारतीय सेना के 158 सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा सोमवार को हुए हमले में कई अन्य सैनिक घायल बताए जा रहे हैं।
पाकिस्तानी टीवी चैनल की इस हिमाकत की हद तो तब हो गई जब उसने अपनी वेबसाइट पर हमले से संबंधित तस्वीरें भी पोस्ट कर दी। जबकि इंडियन आर्मी ने इन तस्वीरों को फर्जी करार दिया है।
पाकिस्तानी टीवी चैनल ने दावा किया है कि सिक्किम मुद्दे पर भारत और चीन के बीच झड़प शुरू हो गई है। जिसके बाद चीन ने भारतीय मोर्चा पर रॉकेट हमले कर दिए। जिसमें भारतीय फौजों के 158 जवान मारे गए हैं। जबकि दर्जनों अन्य जवान घायल हो गए हैं।
टीवी चैनल का कहना है कि इससे पहले भी ऐसे दोनों देशों में झड़प देखने में आई है। टीवी चैनल का कहना है कि विवाद की शुरआत भारत की ओर से की गई थी। जिस पर कार्रवाई करते हुए चीन ने भारतीय मोर्चा पर रॉकेट फायर किया।
दुनिया न्यूज का दावा है कि इस हमले का दो मिनट का फुटेज चाइना सेंट्रल टेलिविजन पर दिखाया गया है। उसका कहना है कि वीडियो में दिखाया गया है कि चीनी सैनिकों ने रॉकेट लांचरों, मशीनगनों और मोर्टारों का उपयोग करके 'दुश्मन की स्थिति' पर हमला किया।
दावे के मुताबिक, भारत और चीन दो बड़े और कुछ छोटे इलाकों की संप्रभुता पर अपना-अपना दावा पेश करते हैं जो पिछले दशकों से दोनों के बीच विवादित मुद्दा बना हुआ है। 14,380 स्क्वॉयर मील का अक्साई चिन के क्षेत्र ब्रिटिश उपनिवेशवाद समाप्त होने के बाद से दोनों देशों के बीच विवादित है।
बता दें कि डोकलाम में चीनी सेना ने सड़क निर्माण की कोशिश की थी, जिस पर भारत ने विरोध किया था और चीनी सेना को सड़क बनाने से रोक दिया था। इस क्षेत्र पर चीन अपना दावा करता रहा है। वहीं, भारत इसे भूटान का हिस्सा मानकर भूटान के दावे का समर्थन करता आया है। चीन चाहता है कि भारतीय सेना डोकलाम क्षेत्र से पीछे हट जाए, लेकिन भारत इस स्थिति में पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है बल्कि भारतीय सेना ने और अधिक फोर्स तैनात कर दी है।
भारतीय सेना ने इन तस्वीरों को फर्जी करार देते हुए कहा कि यह हादसे की तस्वीरें है। यह हादसा अरुणाचल में सेना की एक ट्रेनिंग के दौरान हुआ था। घटना की तस्वीरें कई महीने पुरानी है।
सिक्किम विवाद पर चीन ने भारत को एक बार फिर से धमकी दी है और कहा है कि इस मसले पर अब बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है।
चीन के मुताबिक, समस्या का अब एकमात्र समाधान सिक्किम से भारतीय सैनिकों की वापसी है। चीन ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा है कि यदि भारत सीमा से अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाता है तो इंडिया को शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शनिवार 15 जुलाई की रात को एक बयान में ये बातें कही। अंग्रेजी वेबसाइट हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने ये स्पष्ट कर दिया है कि अब बातचीत के लिए कोई गुंजाइश नहीं है, और भारत को डोकलाम इलाके से अपने सैनिकों को वापस बुलाना ही होगा। लेकिन चीन ने इस बार इस विवाद में बड़े शातिराना तरीके से लद्दाख और कश्मीर का भी जिक्र किया है। साथ ही इन दोनों नामों को पाकिस्तान और चीन से भी जोड़ दिया।
शिन्हुआ द्वारा जारी किये गये बयान में कहा गया है कि ''भारत को मौजूदा विवाद को 2013-14 के लद्दाख विवाद जैसा नहीं समझना चाहिए या फिर उससे तुलना नहीं करनी चाहिए, जो कि चीन, पाकिस्तान और भारत के बीच दक्षिण-पूर्व कश्मीर में एक विवादित इलाका है। वहां पर कूटनीतिक प्रयासों की वजह से दोनों देशों के बीच सेना के टकराव का एक आसान हल निकल गया, लेकिन इस बार ये पूरी तरह से अलग मामला है।''
बता दें कि चीन द्वारा लद्दाख को विवादित क्षेत्र कहना और कश्मीर का संदर्भ देना एक अलग संकेत करता हैं।
बता दें कि ये पहली बार है जब चीन ने अपने सरकारी समाचार एजेंसी के जरिये ये स्पष्ट किया है कि सिक्किम मुद्दे पर अब दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं रह गयी है।
शिन्हुआ द्वारा जारी किये गये इन बयानों को चीन की सरकार और सत्ता पर नियंत्रण करने वाली कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का भी विचार माना जाता है।
शिन्हुआ ने आगे अपने बयान में लिखा है, ''डोकलाम से सेना हटाने की चीन की मांग को भारत जानबूझकर नजरअंदाज करता आ रहा है, हालांकि चीन की बातों को अनसुना कर भारत लगभग एक महीने पुराने इस विवाद को और भी गंभीर बना देगा और इस वजह से भारत को शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है।''
बता दें कि डोकलाम में चीन सड़क बनाना चाहता है, लेकिन ये इलाका भूटान का है और चीन इस पर कब्जा किये हुए है। भूटान के कहने पर भारत ने इस इलाके में सड़क बनाने की चीनी कोशिशों का विरोध किया है और वहां पर अपनी सेना तैनात कर दी है।
सीरियन आब्जर्वेटरी फोर ह्यूमन राइट्स ने मंगलवार (11 जुलाई) को कहा कि आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट के शीर्ष सदस्यों ने उसके सामने संगठन के प्रमुख अबु बकर अल बगदादी की मौत की पुष्टि की है।
निगरानी समूह के निदेशक रामी अब्देल रहमान ने कहा, ''दायेर एज्जोर प्रांत में मौजूद आईएस के शीर्ष स्तर के कमांडरों ने ऑब्जर्वेटरी से इस्लामिक स्टेट समूह के अमीर अबु बकर अल बगदादी की मौत की पुष्टि की है।''
उन्होंने कहा, ''हमें इसके बारे में आज पता चला, लेकिन यह नहीं पता है कि उसकी मौत कब और कैसे हुई।"
पूर्वी सीरिया का दायेर एज्जोर प्रांत का अधिकतर हिस्सा आईएस के कब्जे में है, जबकि समूह देश में और पड़ोसी देश इराक में दूसरी जगहों पर अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र खो रहा है।
रहमान ने कहा कि बगदादी हाल में महीनों में दायेर एज्जोर प्रांत के पूर्वी हिस्सों में मौजूद था, लेकिन यह साफ नहीं है कि उसकी मौत कहां हुई है? लेकिन हाल के महीनों में लगातार बगदादी की मौत की अफवाहें उड़ती रही हैं और रूसी सेना ने मध्य जून में कहा था कि वह इस बात का सत्यापन करने में लगी है कि क्या मई में सीरिया में उसके एक हवाई हमले में आईएस प्रमुख मारा गया।
रूसी सेना ने कहा कि आईएस के गढ़ राका के पास एक ठिकाने पर सुखोई लड़ाकू विमानों ने 28 मई को 10 मिनट तक हमला किया, जहां समूह के कमांडर इलाके से अपने सदस्यों को बाहर ले जाने की योजना बना रहे थे। अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन ने तब कहा था कि वह रूसी हमले में बगदादी के मारे जाने की पुष्टि नहीं कर सकता। इराक में जन्मे 46 साल के बगदादी को 2014 के बाद से सार्वजिनक रूप से कहीं नहीं देखा गया।
हालांकि, अब उसके मौत की आधिकारिक पुष्टि होने पर यह आतंकी समूह के लिए एक नया झटका होगा जो अपने सीरियाई गढ़ राका पर कब्जे के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले कुर्द एवं अरब लड़ाकों के गठबंधन से भी लड़ रहा है।
इराक ने मोसुल में इस्लामिक स्टेट पर जीत दर्ज करने की घोषणा की है। इराकी प्रधानमंत्री हैदर अल-आब्दी ने रविवार (9 जुलाई, 2017) को मुक्त कराये गये मोसुल में जीत की घोषणा की। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के लिये यह करारी हार है। उनके दफ्तर ने एक बयान में कहा कि आब्दी मुक्त कराये गये मोसुल में पहुंचे और जवानों तथा इराकी लोगों को इस अहम जीत की उपलब्धि पर बधाई दी।
तीन साल पहले जिहादियों ने मोसुल पर कब्जा जमा लिया था जिसके बाद पिछले नौ महीनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद आतंकियों पर इस जीत का ऐलान हुआ है। मोसुल की सुनी सड़कों से गुजरते हुए इराकी सैनिकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। नौ महीने तक चले संघर्ष के बाद इराक ने विजय हासिल की है।
एक इराकी कमांडर ने बचे हुए आईएस लड़ाकों से लाउडस्पीकर पर आत्मसमर्पण करने को कहा था, मगर उनके कमांडर ने इसे ठुकरा दिया। लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। प्रधानमंत्री के कार्यालय द्वारा बयान जारी करने के दौरान भी बंदूकों के चलने और शहर में हवाई हमलों की आवाज सुनाई दे रही थी। मोसुल में जीत का ऐलान इराकी सुरक्षा बलों के लिये मील का पत्थर है जो 2014 से ही इराक में आईएस के आतंक के सफाये की कोशिश में जुटे थे।
एक इराकी प्रेक्षक ने द इंडिपेंडेंट से कहा, ''इसमें दो या तीन दिन और लग सकते हैं, लेकिन इराकी सरकार यह सही कहती है कि आईएस के खिलाफ उसकी जंग की सबसे बड़ी लड़ाई जीत ली गई है।''
एक दिन पहले ही आईएस ने बड़ा जवाबी हमला किया था। संयुक्त अभियान कमांड ने कहा है, ''हमारी सेना अभी भी आगे बढ़ रही है .... नदी तक पंहुचने से पहले हमारी सेना के पास ज्यादा कुछ करने के लिए नहीं है।''
इराकी अधिकारियों ने पिछले सप्ताह इसी तरह की घोषणाएं की थी कि सुरक्षा बल दजला नदी के पास मोसुल के पुराने शहर के छोटी सी जगह तक ही सीमित कर दिया था।
हालांकि सेना का अभियान पिछले कुछ दिनों में धीमी हुई है। आईएस का नियंत्रण अब एक वर्ग किलोमीटर तक के क्षेत्र तक ही सीमित रह गया है। लेकिन आईएस असैन्य नागरिकों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जिस कारण हवाई हमले संभव नहीं हो पा रहे।
संघीय पुलिस ने शनिवार को घोषणा थी कि उन्हें सौंपे गए क्षेत्र का काम पूरा कर लिया है, हालांकि नियमित रूप से सेना और विशेष बल आतंकियों का सामना करना जारी रखे हुए हैं।









