शहबाज शरीफ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री होंगे। इस बात का ऐलान पाकिस्तानी मीडिया में हो गया है। शहबाज शरीफ नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं। नवाज शरीफ को शुक्रवार (28 जुलाई) को उनके पद से हटाया गया।
नवाज शरीफ को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्ट घोषित किया था। पनामा पेपर में उनका नाम आया था। जिसका केस वहां चल रहा था। इसपर 28 जुलाई को फैसला आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने आज उस वक्त इस्तीफा दे दिया, जब देश के सर्वोच्च न्यायालय ने पनामागेट मामले में उनको पद के अयोग्य ठहरा दिया तथा उनके एवं उनकी संतानों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
यह तीसरी बार है जब 67 वर्षीय नवाज़ शरीफ का प्रधानमंत्री का कार्यकाल बीच में ही खत्म हो गया। न्यायमूर्ति एजाज अफजल खान ने सर्वोच्च न्यायालय के कोर्ट नंबर-एक में फैसला पढ़कर सुनाया। इस मौके पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ कार्यकर्ताओं ने अदालत के बाहर जश्न मनाया। अदालत ने शरीफ को संविधान के अनुच्छेद 62 और 63 के तहत अयोग्य ठहराया। इन अनुच्छेदों के अनुसार, संसद के सदस्य को 'ईमानदार' और 'इंसाफ पसंद' होना चाहिए। न्यायमूर्ति खान ने कहा, ''वह संसद के सदस्य के तौर पर अयोग्य ठहराए जाते हैं इसलिए वह प्रधानमंत्री कार्यालय में बने रहने के योग्य नहीं रह गए।''
इमरान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने शरीफ पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया, ''भलाई के लिए गॉडफादर के शासन का अंत .... सच्चाई और इंसाफ कायम होगा।''
सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (नैब) को भी आदेश दिया कि वह शरीफ, उनके बेटों हुसैन एवं हसन और बेटी मरियम के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला शुरू करे। उसने यह भी आदेश दिया कि छह हफ्ते के भीतर मामला दर्ज किया जाए और छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी की जाए।
रेडियो पाकिस्तान के अनुसार, वित्त मंत्री इसहाक डार और नेशनल असेंबली के सदस्य कैप्टन मुहम्मद सफदर को भी पद के अयोग्य ठहराया गया।
नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के आरोप में दोषी करार दिया गया है। उनको प्रधानमंत्री के पद से हटा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनको दोषी करार दिया।
नवाज का नाम पनामा पेपर में आया था। यह मामला 1990 के दशक में उस वक्त धनशोधन के जरिए लंदन में सपंत्तियां खरीदने से जुड़ा है जब शरीफ दो बार प्रधानमंत्री बने थे।
नवाज शरीफ के परिवार की लंदन में इन संपत्तियों का खुलासा पिछले साल पनामा पेपर्स लीक मामले से हुआ। इन संपत्तियों के पीछे विदेश में बनाई गई कंपनियों का धन लगा हुआ है और इन कंपनियों का स्वामित्व शरीफ की संतानों के पास है। इन संपत्तियों में लंदन स्थित चार महंगे फ्लैट शामिल हैं।
वह पाकिस्तान के सबसे रसूखदार सियासी परिवार और सत्तारूढ़ पार्टी पीएमएल-एन के मुखिया हैं।
इस्पात कारोबारी-सह-राजनीतिज्ञ शरीफ पहली बार 1990 से 1993 के बीच प्रधानमंत्री रहे। उनका दूसरा कार्यकाल 1997 में शुरू हुआ जो 1999 में तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ द्वारा तख्तापलट किए जाने के बाद खत्म हो गया।
सर्वोच्च न्यायालय ने शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए इसी साल मई में संयुक्त जांच दल (जे आई टी) का गठन किया था। जेआईटी ने गत 10 जुलाई को अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपी थी।
अमेरिका में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा जारी एक सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, ''अध्ययन से पता चला कि सर्वेक्षण में लगभग तीन-चौथाई मुस्लिम उत्तरदाता इस पर सहमत थे कि अमेरिका में मुसलमानों के खिलाफ बहुत भेदभाव है और इनमें से लगभग दो-तिहाई ने कहा कि राष्ट्र जिस दिशा में जा रहा है, उसे लेकर वह असंतुष्ट हैं।''
सर्वेक्षण के अनुसार, मुस्लिम उत्तरदाताओं की राय में वर्ष 2011 की तुलना में बड़ा बदलाव देखा गया है। उस समय बराक ओबामा राष्ट्रपति थे और अधिकांश मुस्लिम उत्तरदाताओं ने कहा था कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
लगभग 48 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने स्वीकार किया कि पिछले 12 महीनों में उन्होंने कम से कम एक बार भेदभाव की घटना का सामना किया है, जो 2007 में हुई घटनाओं से 40 प्रतिशत अधिक है।
अमेरिका में पांच में एक मुस्लिम शख्स ने पिछले एक साल में अपने स्थानीय इलाके में मुस्लिम-विरोधी भित्तिचित्रों को पाया।
सर्वेक्षण में यह बताया गया कि मुसलमान ट्रंप को लेकर संदेह में हैं और उनका सोचना है कि अमेरिकी नागरिक इस्लाम को मुख्यधारा के अमेरिकी समाज के हिस्से के रूप में नहीं देखते हैं।
अनुमान के अनुसार, अमेरिका में करीब 33 करोड़ मुसलमान रहते हैं।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 6 देशों के मुस्लिम नागरिकों के अमेरिका प्रवेश पर रोक के फैसले को कोर्ट से रद्द करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
ट्रंप ने हवाई कोर्ट के इस फैसले को न्यायपालिका का कार्यपालिका के काम में दखल बताया है। अमेरिका के नेशविले में उन्होंने कहा कि ये बहुत ही बुरी खबर, और उदास करने वाली खबर है।
हवाई कोर्ट के फैसले के बाद ट्रम्प ने कहा कि, 'अदालत ने जिस आदेश पर रोक लगाई है उसके प्रावधान पहले आदेश से कम सख्त थे, ये पहले कभी नही हुआ, न्यायिक हस्तक्षेप है।'
अमेरिका के एक विशेषज्ञ ने कहा है कि सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में भारत तथा चीन के बीच का सीमा विवाद दोनों देशों के बीच युद्ध का कारण बन सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या भारत-चीन के बीच मौजूदा गतिरोध युद्ध का कारण बन सकता है, अमेरिकन फॉरेन पॉलिसी काउंसिल के जेफ एम स्मिथ ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, ''हां, मुझे लगता है और मैं यह हल्के-फुल्के अंदाज में नहीं कह रहा हूं।''
सीमा से संबंधित मुद्दों के कारण सन् 1962 के युद्ध की ओर इशारा करते हुए स्मिथ ने कहा, ''दोनों पक्षों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है, जिससे वापस लौटना मुश्किल है।'' डोकलाम में चीन, भारत तथा भूटान, तीनों देशों की सीमाएं आकर मिलती हैं और इसका तीनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व है।
भारतीय सेना ने जून में चीनी सैनिकों द्वारा इस इलाके में सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण दोनों देशों के सैनिकों के बीच ठन गई थी। डोकलाम में दोनों देशों के सैनिकों के बीच गतिरोध का यह दूसरा महीना है।
चीन ने बार-बार भारत से डोकलाम से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा है। डोकलाम को चीन अपना भूभाग मानता है। भारत ने कहा है कि दोनों देशों के सैनिकों को उस जगह से हटना चाहिए, क्योंकि यह उसके सहयोगी देश भूटान का हिस्सा है। भूटान का चीन के साथ कोई कूटनीतिक संबंध नहीं है। उसने भी डोकलाम में चीन द्वारा सड़क निर्माण का विरोध किया है।
बता दें कि सिक्किम सेक्टर में गतिरोध के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने गुरुवार को ब्रिक्स के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की बैठक से इतर अपने चीनी समकक्ष एवं स्टेट काउंसिलर यांग जेची से बातचीत की। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यांग ने दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और भारत के वरिष्ठ सुरक्षा प्रतिनिधियों के साथ अलग से मुलाकात की।
खबर में कहा गया है कि यांग ने तीनों वरिष्ठ सुरक्षा प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों, अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों तथा बहुपक्षीय मामलों पर चर्चा की और द्विपक्षीय मुद्दों एवं बड़ी समस्याओं पर चीन के रूख पेश किया। डोभाल और यांग भारत-चीन सीमा व्यवस्था के विशेष प्रतिनिधि हैं।
डोभाल ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स) के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की दो दिवसीय बैठक में भाग लेने के लिए कल चीन पहुंचे। उनकी यात्रा से सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम इलाके में एक महीने से चल रहे गतिरोध को लेकर भारत और चीन के बीच समाधान निकलने की संभावना बढ़ गई है। डोभाल और यांग दोनों भारत-चीन सीमा तंत्र के विशेष प्रतिनिधि हैं।
आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, डोभाल ब्रिक्स देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ कल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात करेंगे।
पाकिस्तान के लाहौर शहर में पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ के आवास सह कार्यालय के निकट एक शक्तिशाली आत्मघाती विस्फोट में आज पुलिसर्किमयों समेत 25 लोगों की मौत हो गई और 30 अन्य घायल हो गए।
रेस्क्यू 1122 की दीबा शहनाज ने बताया, ''पुलिस और लाहौर विकास प्राधिकरण के अधिकारी मुख्यमंत्री के मॉडल टाउन स्थित आवास के निकट अरफा करीम टावर के बाहर अतिक्रमण हटाने में व्यस्त थे जब एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ।''
मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई भी हैं और अपने मॉडल टाउन स्थित कार्यालय में बैठक में व्यस्त थे। रेस्क्यू 1122 के अनुसार, पुलिसर्किमयों समेत कम से कम 25 लोगों की विस्फोट में मौत हुई है जबकि 30 से अधिक अन्य लोग घायल हुए।
इससे पहले पाकिस्तान के गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान ने मृतकों की संख्या 14 बताई थी, लेकिन कहा था कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। बचाव दलों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। शहर के अस्पतालों में आपात स्थिति घोषित कर दी गई है। शहनाज ने कहा, ''कई घायलों की स्थिति गंभीर बताई जाती है।''
लाहौर पुलिस के प्रमुख कैप्टन (रिटायर्ड) अमीन वैन्स ने इस बात की पुष्टि की कि यह आत्मघाती हमला था और पुलिस निशाने पर थी। पुलिस सूत्रों का हवाला देते हुए 'जियो न्यूज' ने बताया कि एक आत्मघाती हमलावर ने घटनास्थल पर तैनात पुलिसर्किमयों को निशाना बनाया। सुरक्षा बलों की भारी टुकड़ी ने इलाके को घेर लिया है और सड़क के उस खंड को सील कर दिया गया है। विस्फोट की किसी भी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली है। पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी लाहौर में हाल के वर्षों में कई आतंकवादी हमले हुए हैं।
अमेरिका की एक रिपोर्ट में पाक अधिकृत कश्मीर को आजाद कश्मीर लिखे जाने पर भारत ने कडी आपत्ति जताई है। भारत ने इस बावत अमेरिका से विरोध जताया है। 19 जुलाई को जारी अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट 'कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म 2016' में पाक अधिकृत कश्मीर को आजाद कश्मीर कहा गया है, हालांकि रिपोर्ट में इस बात को भी लिखा गया है कि इस इलाके का इस्तेमाल आतंकी भारत में आतंकी गतिविधियों को चलाने के लिए करते हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद भारत ने अमेरिकी प्रशासन से विरोध जताया है। भारत के विरोध के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात को स्वीकार किया कि अमेरिका के जम्मू-कश्मीर के विवरण में विसंगति रही है, लेकिन अमेरिका का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ''कश्मीर को लेकर हमारी नीति में बदलाव नहीं आया है। कश्मीर से संबंधित चर्चाओं की गति, गुंजाइश तथा चरित्र का निर्धारण दोनों संबद्ध देश करेंगे, लेकिन हम करीबी संबंधों के विकास के लिए भारत एवं पाकिस्तान द्वारा उठाए जाने वाले सभी सकारात्मक कदमों का समर्थन करते हैं।''
बता दें कि ये पहली बार है कि अमेरिका ने पीओके को आजाद कश्मीर कहकर संबोधित किया है। अमेरिकी प्रशासन इस क्षेत्र के लिए 'पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर' शब्द का इस्तेमाल करता रहा है।
हालांकि भारत के लिए संतुष्टि की बात ये है कि इसी रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर को भारत का राज्य बताया गया है, जबकि अमेरिकी सरकार पहले इसके लिए 'भारत प्रशासित कश्मीर' शब्द का प्रयोग करती थी।
इस रिपोर्ट में हरकत-उल-मुजाहिदीन की चर्चा करते हुए लिखा गया है कि ये संगठन मुख्य रुप से भारत के राज्य जम्मू-कश्मीर और अफगानिस्तान में अपनी गतिविधियां चलाता है।
आगे इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि हरकत-उल-मुजाहिदीन आजाद कश्मीर के मुजफ्फराबाद और पाकिस्तान के कई दूसरे शहरों से संचालित होता है। इसी तरह आतंकी हाफिज सईद के बारे में इस रिपोर्ट में लिखा गया कि इस संगठन के सदस्यों की वास्तविक संख्या तो बताना मुश्किल है, लेकिन आजाद कश्मीर और पाकिस्तान के पंजाब, खैबर पख्तूनखवा और भारत के राज्य जम्मू-कश्मीर में इस संगठन के हजारों सदस्य हैं।
सरहद पार से नशीली पदार्थों की तस्करी के कई मामले लगातार सामने आते रहते हैं। पुलिस और सुरक्षाबलों की ओर से सीमा पार से आने वाले नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए समय-समय पर अभियान भी चलाया जाता है। शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर की बारामुल्ला पुलिस ने भारत आ रहे 25 किलो नारकोटिक्स ड्रग्स से भरा ट्रक पकड़ा।
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, यह क्रॉस बॉर्डर ट्रेड के उद्देश्य से ड्रग्स पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से भारत भेजे गए थे जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया। इस मामले में किसी तस्कर की गिरफ्तारी हुई है या नहीं। इस संबंध में अभी जानकारी नहीं मिल पाई। साथ ही मादक पदार्थ की कीमत का भी अभी तक पता नहीं चल सका है। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है।
बारामूला पुलिस ने शनिवार को नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के खिलाफ अभियान चलाते हुए ट्रक में लादकर ले जाए रहे 25 किलो नारकोटिक्स ड्रग्स को सीज़ किया। इस तरह के मामले पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं।
पंजाब भी सीमा पार तस्करी की समस्या से जूझ रहा है। बीते दिनों पाकिस्तान से आई हीरोइन की खेप को फाजिल्का एसटीएफ जालंधर रेंज व कमिश्नरेट पुलिस ने ज्वाइंट आप्रेशन के दौरान बरामद की थी। पुलिस टीम ने 2 तस्करों को गिरफ्तार कर 1 किलो हीरोइन बरामद की है। बरामद हीरोइन की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 5 करोड़ रुपए आंकी जा रही थी। तस्करों की गिरफ्तारी से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे हैरोइन तस्करी के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
कुछ महीने पहले खबरें आईं थी भारत में ड्रग्स पहुंचाने के लिए पाकिस्तानी तस्करों ने नए तरीके खोज निकाले हैं जिससे ड्रग्स पकड़े जाने पर तस्करों को ज्यादा नुकसान न हो। पाकिस्तानी तस्कर पंजाब में भारत की ओर मादक पदार्थ पहुंचाने के लिए सीमा पार सिंचाई साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके साथ ही प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के छोटे-छोटे पैकेट फेंकने जैसे तरीके अपना रहे हैं।
बीएसएफ के अधिकारी की ओर से बताया गया था कि हीरोइन के एक किलोग्राम या ज्यादा वजन के बड़े पैकेट की तस्करी करना कठिन है। इसलिए तस्कर 250 ग्राम के छोटे-छोटे पैकेटों में नशीले पदार्थ पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। वे रात में सीमापार से पैकेट फेंकते हैं। यहां स्थानीय तस्कर पैकेट ले लेते हैं। तस्करी को रोकने के लिए बीएसएफ और पुलिस संयुक्त अभियान चला रहे हैं।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा चलाए जाने वाले अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। अखबार में शुक्रवार (21 जुलाई) को छपे संपादकीय में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के डोकलाम गतिरोध पर भारतीय संसद में दिए गए बयान को झूठा बताया गया है।
ग्लोबल टाइम्स ने डोकलाम इलाके से दोनों देशों द्वारा एक साथ सेनाएं हटाने को भारत का दिवास्वप्न बताया है। संपादकीय में भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की भी धमकी दी गई है। इस संपादकीय में लिखा गया है, ''अगर भारत अपने सैनिक नहीं हटाता है तो चीन के पास आखिरी विकल्प है उससे लड़ाई और बगैर किसी कूटनीति के संघर्ष का खात्मा।'' चीन में एक ही राजनीतिक पार्टी (कम्युनिस्ट पार्टी) है जो 1949 से ही सत्ता में है। चीन में मीडिया पर सरकार का पूरी तरह नियंत्रण है।
भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद के मानसून सत्र में कहा था कि चीन डोकलाम के त्रिमुहाने वाले इलाके में यथास्थिति बदलना चाहता है और इससे भारत की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। डोकलाम इलाके में चीन भारी सैन्य वाहन और टैंक की आवाजाही लायक सड़क बनाना चाहता है। डोकलाम इलाके को चीन अपना डोंगलॉन्ग इलाका बताता है।
चीनी अखबार ने कहा, ''भारतीय विदेश मंत्री ने झूठ बोला, सबसे पहली बात ये है कि भारत ने उस इलाके में घुसपैठ किया है, भारत के रवैये से पूरी दुनिया हैरान है और उसे किसी देश का समर्थन नहीं मिल रहा है।'' चीनी अखबार ने लिखा है कि '' .... दूसरी बात ये है कि सैन्य क्षमता के मामले में भारत चीन से बहुत पीछे है और इस मामले ने सैन्य समाधान का रुख किया तो इसमें कोई संदेह नहीं कि हार भारत की होगी।
चीनी अखबार ने लिखा है कि दोनों देशों द्वारा एक साथ सेना हटाने की बात भारत के रुख में बदलाव है। चीनी अखबार ने लिखा है, ''भारत ने डोंगलॉन्ग (डोकलाम) को त्रिमुहाना बताना शुरू कर दिया है और चीन का रुख भांपने के लिए दोनों तरफ से सैनिक हटाने का प्रस्ताव दे रहा है। लगता है कि भारत को अपनी हैसियत का अहसास होने लगा है।''
ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में एक बार फिर भारत और चीन के बीच अन्य जगहों पर भी 'संघर्ष' बढ़ने के प्रति आगाह किया है। अखबार ने कहा है कि ''सीमा पर सैन्य साजोसामान और गोलाबारूद पहुंचाने के मामले में चीन की क्षमता भारत से बहुत ज्यादा है और चीनी सैनिक कभी भी कहीं भी पहुंच सकते हैं और चीन-भारत सीमा चीन के लिए अपने प्रशिक्षण और सुधार को दर्शाने वाला प्रदर्शनस्थल बन जाएगी।''
अखबार ने लिखा है कि भारत को डोकलाम का ख्वाब देखना छोड़ देना चाहिए। अखबार ने लिखा है कि चीन कभी भी दोनों तरफ से सेना हटाने पर सहमत नहीं होगा।
चीनी अखबार ने लिखा है कि अगर चीन और भारत के बीच युद्ध होगा तो अमेरिका और जापान उसकी मदद नहीं करेंगे। चीनी अखबार ने लिखा है कि चीनी जनता भी भारत के खिलाफ युद्ध की कीमत पर भी एक-एक इंच भूमि की रक्षा की समर्थक है।
चीनी अखबार ने लिखा है कि भले ही भारतीय सैनिकों की संख्या ज्यादा हो, लेकिन चीनी सेना के तेज परिवहन क्षमता से किसी भी मोर्च की स्थिति बहुत कम समय में बदल सकती है।
चीनी अखबार ने लिखा है कि भारत ने 1962 में भी चीन को आंकने में गलती की थी जिसकी उसे कीमत चुकानी पड़ी थी।
चीन के एक पूर्व राजनयिक ने बुधवार को डोकलाम विवाद पर भारत को धमकी देते हुए कहा है कि इस विवाद को एक महीना हो चुका है, अब भारतीय सैनिकों को तीन विकल्प दिए जाएंगे- वापस जाओ, कब्जा करलो या चीन का हमला।
चीन के पूर्व राजनयिक की यह टिप्पणी बीजिंग के उस रुख को और कड़ा कर देती हैं जिसमें चीनी सरकार जोर दे रही है कि जब तक भारत वापस जाने की पूर्व शर्त पूरी नहीं करता, राजनयिक समाधान के लिए कोई जगह नहीं है।
पहले मुंबई में कौंसल जनरल रह चुके ये पूर्व राजनयिक लियू हेफा अब रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ बन गए हैं। लियू ने चाइना सेंट्रल टेलिविजन को दिए इंटरव्यू में कहा, ''जब किसी देश के सैनिक बॉर्डर पार कर लेते हैं और किसी दूसरे देश की सरहद में पहुंच जाते हैं तो वह खुद ब खुद उस देश के दुश्मन बन जाते हैं और उन्हें तीन विकल्प में से एक चुनना होता है।'' लियू ने आगे कहा, ''वह स्वेच्छा से बाहर चले जाएं। या इलाके पर कब्जा कर लें। और सीमा विवाद बढ़ने पर वह मारे जाएंगे। यही तीन संभावनाए हैं।'' लियू ने कहा कि चीन भारत के कदम का इंतजार कर रहा है।
एक दिन पहले ही चीन ने भारत को ललकारते हुए कहा था कि चीन युद्ध के लिए तैयार है और वह भारत से युद्ध करने से डरता नहीं है। भारत को विवादित सीमा पर सभी जगह टकराव का सामना करना पड़ेगा।
डोकलाम में गतिरोध पर चीन और भारत के बीच तनाव में कोई कमी नहीं आई है। चीन ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है और वह हर रोज भारत को चेतावनी दे रहा है। चीन, भूटान व भारत की सीमा डोकलाम में मिलती है। यह स्थान तीनों राष्ट्रों के लिए रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है।
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख के अनुसार भारत में तेजी से बढ़ रहा हिंदू राष्ट्रवाद दोनों देशों के बीच युद्ध के खतरे को बढ़ा रहा है। ग्लोबल टाइम्स में 'भारत में बढ़ता हिंदू राष्ट्रवाद' शीर्षक से छपे लेख में यू निंग ने लिखा, ''भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावों के दौरान हिंदू राष्ट्रवाद को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव में देश में राष्ट्रवादी भावनाओं को हवा दी है। और ऐसे में अगर धार्मिक राष्ट्रवाद हद से ज्यादा बढ़ गया तो मोदी भी कुछ नहीं कर पाएंगे क्योंकि वह 2014 में सत्ता में आने के बाद मुस्लिमों के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने में विफल रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद हिंदू राष्ट्रवाद का लाभ उठाया है।''
लेख में आगे कहा गया कि राष्ट्रवाद भारत को चीन के खिलाफ बॉर्डर पर युद्ध की तरफ धकेल रहा है। जबकि भारत ताकत के मामले में चीन से कमजोर है, लेकिन बावजूद इसके नई दिल्ली के रणनीतिकारों और नेताओं ने भारत की चीन नीति को राष्ट्रवाद के हाथों में जाने से नहीं रोका। चीन भले ही भारत से कई बार भारत के सैनिकों को बॉर्डर से वापस बुलाने की अपील कर चुका है, जबकि नई दिल्ली ने अपनी उत्तेजनाएं जारी रखी हैं।
गौरतलब कि डोकलाम में सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन पिछले एक महीने से अधिक समय से आमने-सामने हैं। इस बीच तिब्बत में चीनी सैनिकों की तैनाती और भारी हथियारों को तैनात किए जाने की खबर आई थी, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है।
जानकारी के लिए बता दें कि संसद के मानसून सत्र में भी चीन सीमा विवाद को लेकर हंगामा जारी है। समाजवादी पार्टी नेता और देश के पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा में सरकार को नसीहत देते हुए कहा था कि चीन भारत के साथ युद्ध की तैयारी कर चुका है। उन्होंने कहा कि भारत को भी अब तिब्बत की आजादी का समर्थन करना शुरू कर देना चाहिए।









