भारत में विमान यात्रा की तरह ही अब ट्रेन में सीमा से अधिक सामान ले जाने पर यात्रियों को सतर्क रहना होगा। अधिकारी ने बताया कि ट्रेन डिब्बों में अत्यधिक सामान ले जाने को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर भारतीय रेल ने अपने तीन दशक पुराने 'सामान अनुज्ञा नियम' को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत यात्रियों को अधिक सामान ले जाने पर निर्धारित राशि से छह गुना अधिक राशि बतौर जुर्माना देनी होगी।
नियम के मुताबिक, यात्री स्लीपर क्लास में 40 किलोग्राम और सेकेंड क्लास में 35 किलोग्राम सामान तक बिना अतिरिक्त भुगतान किए ले जा सकते हैं और पार्सल कार्यालय में अतिरिक्त भुगतान कर स्लीपर क्लास के यात्री 80 किलोग्राम और सेकेंड क्लास के यात्री 70 किलोग्राम सामान ले जा सकते हैं। अतिरिक्त सामान मालगाड़ी में रखा जाता है।
रेल बोर्ड के सूचना एवं प्रचार निदेशक वेद प्रकाश ने कहा, ''अगर यात्री को निर्धारित सीमा से अधिक सामान बिना बुक कराए ले जाते पाया गया तो सामान पर निर्धारित राशि से छह गुना अधिक भुगतान करना होगा। यह कदम यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने और डिब्बों के अंदर होने वाली भीड़ से निपटने के लिए उठाया गया है।''
अधिकारी ने कहा कि यात्रियों द्वारा ले जाए जा रहे सामान पर निगरानी रखने के लिए आकस्मिक दौरे किए जाएंगे। इस नियम को सख्ती से लागू करने लिए भारतीय रेलवे ने एक जून से छह जून तक सभी जोन्स में अभियान चलाया है।
नियम क्या कहता है:
- अगर कोई यात्री 80 किलोग्राम सामान के साथ 500 किलोमीटर की यात्रा कर रहा है तो वह तय सीमा से अतिरिक्त 40 किलो सामान के 109 रुपए देकर लग्गेज वैन में बुक करा सकता है। अगर वह ऐसा नहीं करता है और पकड़ा जाता है तो उसे 654 रुपए का जुर्माना देना होगा।
- इसी तरह एसी फर्स्ट क्लास के यात्री 70 किलोग्राम सामान मुफ्त ले जा सकते हैं। इसके अलावा उनके लिए सामान ले जाने की तय सीमा 150 किलोग्राम है, लेकिन इसके लिए उन्हें अतिरिक्त 80 किलोग्राम सामान का किराया भरना होगा।
- एसी टू टियर के यात्री 50 किलोग्राम तक सामान मुफ्त ले जा सकते हैं। वहीं इनके लिए अधिकतम सीमा 100 किलोग्राम है, लेकिन इसके लिए उन्हें सीमा से अतिरिक्त 50 किलोग्राम सामान का किराया देना होगा।
भारत में अब ट्रेनों की आवाजाही में देरी से निपटने के लिए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। रेलवे ने अब फैसला लिया है कि यदि ट्रेनों के संचालन में देरी होती है तो संबंधित अधिकारियों के प्रमोशन पर इसका असर पड़ेगा। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे के सभी जोन्स के प्रमुखों को चेतावनी देते हुए कहा है कि रेल सेवाओं में देरी होने पर उनका अप्रेजल प्रभावित होगा। मंत्रालय ने अधिकारियों को ट्रेनों के समय पर संचालन को सुनिश्चित करने के लिए एक महीने का वक्त दिया है।
पिछले सप्ताह एक विभागीय बैठक में गोयल ने इस मुद्दे को लेकर जोनल महाप्रबंधकों की खिंचाई की। मंत्री ने कहा कि रेल सेवाओं में देरी के लिए अधिकारी रखरखाव काम का बहाना नहीं बना सकते। रेल मंत्रालय में वरिष्ठ सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि रेलमंत्री ने स्पष्ट किया कि 30 जून तक अगर उन्हें कोई सुधार नजर नहीं आया तो सम्बद्ध महाप्रबंधक को पदोन्नति के लिए विचार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन (अधिकारियों) के कार्य निष्पादन देरी सूची में उनके स्थान पर निर्भर करेगा।
वित्त वर्ष 2017-18 में भारतीय रेलवे नेटवर्क की 30 प्रतिशत गाड़ियां देरी से चल रही थीं। इस संख्या में इन गर्मियों के छुट्टियों में भी कोई सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक को गोयल की नाराजगी सबसे अधिक झेलनी पड़ी। इस जोन में गाड़ियों के समय पर चलने यानी सेवा अनुशासन का आंकड़ा 29 मई तक बहुत ही खराब 49.59 प्रतिशत है जो पिछले साल की तुलना में 32.74 प्रतिशत अधिक खराब है।
सूत्रों ने कहा कि मंत्री ने रेलगाड़ियों में देरी की आलोचना की, लेकिन वह यह भी समझते हैं कि बड़ी मात्रा में पटरियों को बदले जाने का कुछ खामियाजा भी है। हालांकि, अनुशासन का आंकड़ा उनकी अपेक्षा से बहुत ही खराब है। स्पष्ट रूप से जोनल अधिकारी अपनी अक्षमता को छुपाने के लिए रखरखाव काम को बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, मंत्री ने प्रत्येक जोनल प्रमुख को व्यक्तिगत रूप से बुलाया तथा उनसे इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने प्रगति बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाड़ियों में देरी को लेकर गोयल से सवाल किए थे।
रमजान के पवित्र महीने को देखते हुए कश्मीर में एकतरफा सीजफायर से आतंकवाद विरोधी अभियान एक तरह थमा हुआ है। इस सबके बीच एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, आतंकी संगठनों में स्थानीय युवकों की भर्तियां बढ़ गईं हैं। बताया जा रहा है कि अब तक 80 से अधिक स्थानीय युवक आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के अनुसार, साउथ कश्मीर में आतंकवाद से ज्यादा प्रभावित शोपियां और पुलवामा जिले से ज्यादा युवा आई एस आई एस - कश्मीर और असंर - गजवात उल हिंद जैसे आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। खबरों के मुताबिक, आतंकी संगठनों में शामिल होने वाले ज्यादातर छात्र हैं।
आईपीएस अफसर इनामुलहक का भाई और एक यूनानी डॉक्टर भी शोपियां जिले से गायब है। ऐसा माना जा रहा है कि यह भी आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल के अंत तक यह आंकड़ा 45 तक पहुंच चुका था। बहरहाल, आतंकी संगठनों में नयी भर्तियों से कश्मीर की सुरक्षा को लेकर परेशानी बढ़ सकती है।
बोधगया के महाबोधि मंदिर परिसर में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट मामले में पटना की एनआईए कोर्ट ने दोषी करार दिए गए इंडियन मुजाहिदीन के पांचों आतंकियों को आज उम्रकैद की सजा सुनाई। इस आतंकी हमले में तेज सुनवाई करते हुए कोर्ट ने महज चार साल 10 माह 19 दिन में दोषियों को सजा सुनाई है। आरोपितों के वकील ने कहा कि सजा के फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट जाएंगे। यूएपीए क़ानून के 4 धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा कोर्ट ने सुनाए हैं।
इस मामले में पांच आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था। एनआईए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिन्हा ने 25 मई को हैदर अली उर्फ ब्लैक ब्यूटी, अजहरुउद्दीन, उमर सिद्दकी, इम्तियाज अंसारी और मुजीबुल्लाह को दोषी करार दिया था। 7 जुलाई 2013 को बोधगया में हुए नौ धमाकों में छह आरोपियों के खिलाफ एनआईए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी।
पटना की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) अदालत के विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सभी पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने उमर सिद्दिकी, अजहरुद्दीन कुरैशी, हैदर अली, मुजिबुल्लाह अंसारी और इम्तियाज अंसारी को बोधगया में सीरियल बम विस्फोट मामले में दोषी करार देते हुए कहा था कि इनकी सजा के मामले में सुनवाई 31 मई को होगी।
बोधगया सीरियल ब्लास्ट मामले में 25 मई को 4 साल बाद एनआईए कोर्ट का फैसला आया था। 7 जुलाई 2013 को बोधगया में हुए नौ धमाकों में पांच आरोपियों के खिलाफ एनआईए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार ने फैसला सुनाया। इस धमाके में एक तिब्बती बौद्ध भिक्षु और म्यांमार के तीर्थ यात्री घायल हो गए थे। पटना सिविल कोर्ट में 2013 में गठित एनआईए कोर्ट का यह पहला फैसला है।
बोधगया ब्लास्ट में एनआईए ने 90 गवाहों को पेश किया। विशेष न्यायाधीश ने 11 मई 2018 को दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अपना निर्णय 25 मई तक सुरक्षित रख लिया था। सीरियल ब्लास्ट का सरगना हैदर अली था। आरोपितों मे इम्तियाज अंसारी, उमर सिद्दीकी, अजहरुद्दीन कुरैशी, मुजिबुल्लाह अंसारी हैं। कुछ रांची के रहने वाले हैं और कुछ छत्तीसगढ़ के रायपुर के रहने वाले हैं। ये सभी पटना के बेउर जेल में बंद है।
एनआईए ने मामले की जांच करने के बाद सभी आरोपियों पर 3 जून 2014 को चार्जशीट किया था। 7 जुलाई 2013 सुबह 5:30 से 6:00 के बीच महाबोधि मंदिर में एक के बाद एक धमाके हुए थे। आतंकियों ने महाबोधि वृक्ष के नीचे भी दो बम लगाए थे। सिलेंडर बम रखा गया था। जिसमें टाइमर लगा हुआ था। एनआईए ने जांच में यह भी माना है कि रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई का बदला लेने के लिए गया में ब्लास्ट किया गया था। ब्लास्ट के लिए हैदर ने रायपुर में रहने वाले सिमी के सदस्य उमर सिद्दीकी से संपर्क किया था। हैदर रायपुर गया था। राजा तालाब स्थित एक मकान में जिहाद के नाम पर प्रवचन दिया गया।
हैदर को बम विस्फोट का सामान भी वही दिया गया। हैदर ने ब्लास्ट के पहले बोधगया का पांच बार दौरा किया। वहां की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था और उसके साथ ही आतंकी संगठन सिमी के सदस्य थे। हैदर ने बौद्ध भिक्षु बनकर मंदिर में प्रवेश किया।
भारत में तेल विपणन कंपनियों ने रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोत्तरी की है। सब्सिडी वाला गैस सिलेंडर दो रुपये 34 पैसे और गैर सब्सिडी वाला गैस सिलेंडर 48 रुपये महँगा हो गया है।
राजधानी दिल्ली में आज से सब्सिडी का एलपीजी सिलेंडर 2.34 रुपये बढ़कर 493.55 रुपये का हो गया है। गैर सब्सिडी वाला गैस सिलेंडर 48 रुपये महँगा होकर 698.50 रुपये का मिलेगा।
भारत के तीन अन्य बड़े महानगरों में कोलकाता में कीमत क्रमश: 496.65 और 723.50 रुपये हो गई है। मुंबई में कीमत क्रमशः 491.31 और 671.50 रुपये तथा चेन्नई में 481.84 और 712.50 रुपये हो गई है।
उपभोक्ता को एक वित्तीय वर्ष में 12 सिलेंडर सब्सिडी पर मिलते हैं, जबकि इससे अधिक लेने पर गैर सब्सिडी वाले दाम देने पड़ते हैं। सब्सिडी वाली रसोई गैस की कीमत में दो माह के बाद बढ़ोत्तरी की गई है और गैर सब्सिडी वाली रसोई गैस की कीमत में पांच महीने के बाद बढ़ोत्तरी की गई है।
हिंदी विश्वविद्यालय में छुट्टी लेना अनुसूचित जनजाति के छात्र को महँगा पड़ा, पीएचडी रद्द हुई। हिंदी विश्वविद्यालय ने आनन-फानन में जाँच कमेटी गठित की। विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एल कारूण्यकारा पर पीडीपी (पवित्र दलित परिवार) संस्था के नाम पर धन उगाही का आरोप लगा।
महाराष्ट्र के वर्धा में महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के दलित एवं जनजाति अध्ययन केन्द्र के अनुसूचित जनजाति के पीएचडी शोधार्थी भगत नारायण महतो जो मूल रूप से बिहार के पश्चिमी चम्पारण की थारू जनजाति से ताल्लुक रखते है। उनका प्रवेश दिसम्बर 2017 में इस केंद्र में पीएचडी शोधार्थी के रूप हुआ था और वह इसी केंद्र से एम फिल के टॉपर भी रहें हैं, उनकी पीएचडी अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित एवं पंजीयन पूर्व सेमिनार प्रस्तुत न करने का आरोप लगाते हुए केंद्र निदेशक प्रोफेसर एल कारूण्यकारा की अनुशंसा पर निरस्त कर दिया गया है।
जबकि शोधार्थी भगत नारायण महतो ने आरोप को निराधार बताते हुए अपने पक्ष को तथ्य सहित सभी सम्बंधित दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कहा है कि प्रवेश की तिथि एवं जब भी उसका अवकाश स्वीकृत या अस्वीकृत हुआ उसने केंद्र निदेशक से अनुमति ली थी तथा उनका यह भी कहना था कि उसे पूर्व सेमीनार प्रस्तुत करने के सम्बन्ध में विभाग के द्वारा उसे कोई जानकारी नहीं दी गई थी जिसे किसी भी रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति मानने को तैयार नहीं है। इसके विपरीत छात्र पर लापरवाह एवं पढ़ने में कमजोर छात्र के श्रेणी में रख रहे हैं। उसके पी एच डी प्रवेश निरस्त को सही बताने में लगे हुए हैं। परन्तु कुलपति गिरिश्वर मिश्र को यह ज्ञात नहीं है कि उनके ही विश्वविद्यालय के अपने विभाग में एम फिल प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला भगत नारायण महतो एक होनहार छात्र है।
पीड़ित छात्र भगत नारायण ने कहा, ''उसके केंद्र निदेशक प्रोफेसर एल कारुण्यकारा जो इस पीएचडी प्रवेश निरस्त के मुख्य कर्ताधर्ता है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाकर मेरा प्रवेश निरस्त कर दिया और विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना किसी जाँच पड़ताल किये ही निरस्त के आदेश को स्वीकृत कर लिया तथा मुझे अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया।''
शोधार्थी भगत नारायण महतो के पिता की मृत्यु के उपरांत घर की जिम्मेदारी उस के ऊपर ही थी जिस कारण छात्र अपनी पढाई के साथ परिवार का भी ख्याल रख रहा है। समस्त घटनाक्रम प्रवेश के उपरांत आरम्भ होती है जिसमें छात्र को किन्ही कारणवश अलग-अलग तिथि में अपने घर पश्चिमी चम्पारण (बिहार) जाना पड़ जाता है। घर जाने से पूर्व विश्वविद्यालय की सभी संवैधानिक प्रक्रिया का अनुपालन करता है जिसमें घर जाने से पहले अवकाश के लिए आवेदन देना आदि शामिल है। जिस अवकाश को आधार बनाकर छात्र का प्रवेश निरस्त किया गया है, उस अवकाश लिए भी छात्र ने 20 अप्रैल 2018 को आवेदन दिया था जिसे उसके केन्द्र निदेशक के कार्यालय द्वारा 25 अप्रैल 2018 को ई-मेल के माध्यम से अस्वीकृत करने की सूचना दी गई। छात्र के अपने गृह स्थान बिहार के पश्चिमी चम्पारण पहुँच जाने एवं इंटरनेट की सुविधा के अभाव के कारण विलम्ब से अवकाश निरस्त की सूचना प्राप्त हुई। जब छात्र को अवकाश निरस्त की सूचना प्राप्त हुई तो तत्पश्चात वर्धा (महाराष्ट्र) आने के लिए ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं मिलना, आर्थिक तंगी और पारिवारिक समस्या के कारण विश्वविद्यालय पहुँचने में विलम्ब हुआ जिसके बाद छात्र ने कुलपति से इसके लिए क्षमा माँगी।
पीएचडी प्रवेश निरस्त का दूसरा कारण पंजीयन पूर्व सेमीनार प्रस्तुति को आधार बताया गया है। छात्र के अनुसार, इससे सम्बन्धित किसी भी प्रकार की सूचना विश्वविद्यालय की वेबसाइट, ई-मेल के माध्यम एवं अन्य किसी भी प्रकार के संचार माध्यम से छात्र को सूचना नहीं दी गई। विश्वविद्यालय पहुँचने के तुरंत बाद छात्र के द्वारा पंजीयन पूर्व सेमीनार प्रस्तुति के विषय में केंद्र सहायक से पता करने पर मालूम हुआ कि 2017 बैच के पीएचडी शोधार्थी का पंजीयन पूर्व सेमीनार हुआ ही नहीं है।
इस विषय को लेकर विश्वविद्यालय के छात्र पीड़ित शोधार्थी भगत नारायण महतो को लेकर दिनांक 25 मई 2018 को कुलपति से मिले तथा समस्त घटनाक्रम से उन्हें अवगत कराया एवं इससे सम्बंधित अपना पक्ष रखते हुए आवेदन पत्र दिया और आवश्यक कार्यवाही करने का आग्रह किया।
केंद्र निदेशक प्रोफेसर एल कारुण्यकारा के सम्बन्ध में अवैध वसूली जो कि पीडीपी (पवित्र दलित परिवार) के नाम पर प्रत्येक एम फिल के छात्र से 500 रूपए प्रति माह, पीएचडी छात्र से 1000 रूपये प्रति माह एवं नेशनल फेलोशिप, आर जी एन एफ एवं जे आर एफ पाने वाले छात्र से 3000 रूपये प्रति माह की अवैध वसूली के बारे में भी अवगत कराया। जिसके बारे में विभाग में पढने वाले छात्रों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर खुलासा किया। इन सभी बातों को बेमन से कुलपति ने सुना और कहा कि हम इस विषय पर 28 मई 2018 को जवाब देंगे।
इसी क्रम में फिर से छात्र राजेश सारथी, राजू कुमार, राम सुन्दर शर्मा और अनुपम राय पीड़ित शोधार्थी के साथ कुलपति से मिलने गये तथा कार्यवाही के बारे में जानना चाहा तो कुलपति उल्टे ही छात्र को लापरवाह एवं प्रोफेसर एल कारुण्यकारा की पीएचडी प्रवेश निरस्त निर्णय को सही बताने में लगे।
अंतत: छात्रों ने पूरे पीएचडी निरस्त की प्रक्रिया के असंवैधानिक पहलू से कुलपति को अवगत कराया तथा कहा कि किसी भी छात्र की पीएचडी निरस्त करने का अधिकार बीओएस (बोर्ड ऑफ़ स्टडीज़) के क्षेत्र में नहीं आता है। उसे सिर्फ छात्र के विषय से सम्बंधित एवं उसे शोध निदेशक उपलब्ध कराने का अधिकार है। छात्र को पीएचडी में रखना या न रखना विश्वविद्यालय के अकादमिक परिषद् के अधिकार क्षेत्र में आता है।
आश्चर्य की बात ये भी है कि विश्वविद्यालय के अकादमिक परिषद के किसी भी सदस्य के साथ पीएचडी निरस्त से सम्बंधित किसी प्रकार का बैठक नहीं किया गया जिसमें छात्र के पक्ष को जाना जा सके। छात्र के केंद्र निदेशक प्रोफेसर एल कारूण्यकारा ने सभी नियमों को ताक पर रखते हुए गलत तरीके छात्र के पीएचडी प्रवेश को निरस्त किया तथा छात्र को अकादमिक परिषद के सामने अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।
28 मई 2018 को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस सन्दर्भ में प्रोफेसर मनोज कुमार की अध्यक्षता में प्रोफेसर हनुमान प्रसाद शुक्ल, प्रोफेसर प्रीति सागर एवं डॉ सुरजीत कुमार सिंह की चार सदस्यीय जाँच समिति का गठन किया गया है तथा एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन जानकार सूत्रों की माने तो प्रोफेसर मनोज कुमार और प्रोफेसर प्रीति सागर आधिकारिक रूप से छुट्टी पर हैं तो ऐसी जाँच समिति क्या रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, इसका अन्दाजा लगाया जा सकता है।
इस घटना के सन्दर्भ में जब हमने प्रोफेसर एल कारूण्यकारा का पक्ष जानना चाहा तो उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया एवं कार्यकारी कुलसचिव कादर नवाज़ खान का फोन स्विच ऑफ़ मिला।
उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा सीट पर आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन करीब 50 हजार मतों से विजयी।
उत्तर प्रदेश में नूरपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी नईमुल हसन ने बीजेपी की अवनी सिंह को कड़े संघर्ष के बाद शिकस्त दी। समाजवादी पार्टी के हसन ने बीजेपी की अवनी सिंह को लगभग 6200 मतों से हराया। यह सीट समाजवादी पार्टी ने बीजेपी से छीनी।
बिहार में जोकीहाट विधानसभा सीट पर राजद के शाहनवाज आलम ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जदयू के मुर्शीद आलम को 41,225 वोटों से हरा दिया है।
उत्तराखंड में थराली विधानसभा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी मुन्नी देवी शाह ने 1,900 वोटों से ज्यादा के अंतर से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के डॉक्टर जीतराम शाह को हराया। थराली में मिली विजय से 70 सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा सदस्यों की संख्या बढकर फिर 57 हो गयी है।
झारखंड में गोमिया विधानसभा सीट पर झामुमो की बबिता देवी ने आजसू के लंबोदर महतो को पराजित किया और बीजेपी के माधवलाल सिंह तीसरे स्थान पर पिछड़ गये।
झारखंड में सिल्ली विधानसभा सीट पर झामुमो की उम्मीदवार सीमा महतो ने आजसू के अध्यक्ष सुदेश महतो को पराजित कर यह सीट झामुमो के पास बरकरार रखी।
महाराष्ट्र में पालघर लोकसभा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार राजेंद्र गावित ने 29574 वोटों से जीत हासिल की।
महाराष्ट्र में भंडारा गोंदिया लोकसभा सीट पर एनसीपी के मधुकरराव कुकड़े ने 45000 वोट से जीत हासिल की है।
पंजाब में शाहकोट विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार हरदेव सिंह लाडी ने अपने निकटमत प्रतिद्वंद्वी तथा शिरोमणि अकादी दल के उम्मीदवार नायब सिंह कोहाड़ को 38,801 वोटों से हराया।
केरल में चेंगन्नुर विधानसभा सीट पर केरल की सत्तारूढ़ माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ के उम्मीदवार साजी चेरियन ने कांग्रेस के अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी को 20,956 मतों के भारी अंतर से मात दी।
कर्नाटक में राजराजेश्वरी नगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मुनिरतना 41162 वोटों से जीते।
पश्चिम बंगाल में महेशतला विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस के दुलाल दास ने बीजेपी के सुजीत कुमार घोष को 62,827 मतों से हराया।
नगालैंड में नगालैंड लोकसभा सीट पर सत्तारूढ़ पीपल्स डेमोक्रेटिक एलायंस (पीडीए) के उम्मीदवार तोखेहो येपथोमी ने जीत हासिल की।
मेघालय में अंपाति विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी मिआनी डी शिरा ने मेघालय की अंपाति विधानसभा सीट जीत ली है। कांग्रेस प्रत्याशी मिआनी डी शिरा ने 3191 मतों से चुनाव जीता।
भारत की 3 राज्यों की 4 लोकसभा सीटों और 9 राज्यों की 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी की हार हुई। कैराना लोकसभा सीट पर आरएलडी और नूरपुर विधानसभा सीट पर सपा की जीत हुई है।
बीजेपी की हार के बाद पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर जमकर निशाना साधा। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि ताली कप्तान को, तो गाली भी कप्तान को।
शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि एक पुरानी कहावत है कि ताली कप्तान को, तो गाली भी कप्तान को। उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोग अहंकारी हो गए है, अब भाषण से कुछ नहीं होगा, राशन से काम होगा। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि ये पिछड़े नहीं हैं, बुरी तरह से हारे हैं, इससे हमें सबक लेना होगा।
बीजेपी सांसद ने कहा कि ये हार दीवार पर लिखी हुई थी, जैसी उम्मीद थी, वैसा ही रहा। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि मोदी लहर होती तो अरुण जेटली की बुरी तरह शर्मनाक हार नहीं होती। उन्होंने कहा कि पार्टी दरबारी, सरकारी और बाहरी लोगों से भरी हुई है।
उन्होंने कहा कि जब एक वकील अर्थव्यवस्था की बात करने लगे, एक टीवी कलाकार देश की एचआरडी मंत्री बन जाये और तथाकथित चाय वाला पीएम बन सकता है तो राहुल क्यों नहीं पीएम बन सकते हैं।
भारत के 3 राज्यों की 4 लोकसभा सीटों और 9 राज्यों की 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। बिहार की जोकीहाट विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जनता दल यूनाइटेड को करारी हार का सामना करना पड़ा है।
जनता दल यूनाइटेड ने इस हार के लिए पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को जिम्मेदार बताया है। इसके साथ ही जनता दल यूनाइटेड ने एनडीए को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। जनता दल यूनाइटेड के महासचिव के सी त्यागी ने नतीजों के बाद कहा कि पूरे देश में पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ गुस्सा है। इसी गुस्से का असर उपचुनाव में भी पड़ा है। हम अपील करते हैं कि पेट्रोल-डीजल की दामों में कटौती होनी चाहिए।
बता दें जोकीहाट विधानसभा सीट पर राजद के उम्मीदवार शाहनवाज आलम ने 41,224 वोटों से जीत दर्ज की। राजद की जीत के बाद तेजस्वी यादव ने भी नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला है।
के सी त्यागी ने कहा कि उपचुनाव के नतीजे एनडीए के लिए चिंता का विषय हैं। एनडीए में अभी सहयोगी अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दो बड़े दल एक साथ आ गए हैं, इसलिए वहां के नतीजे खतरे की घंटी बन सकते हैं।
एनडीए के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आज चंद्रबाबू नायडू ने एनडीए का साथ छोड़ दिया है, शिवसेवा बीजेपी के खिलाफ ही लड़ रही है। वहीं अकाली दल खुश नहीं है, इंडियन नेशनल लोक दल साथ छोड़ चुकी है, महबूबा मुफ्ती ने भी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए को दुरुस्त करने की जरूरत है।
जोकीहाट सीट के बारे में उन्होंने कहा कि ये राजद की जीत नहीं है, ये सीट पहले से ही तसलीमुद्दीन के पास थी। अब उनके बेटे ने पार्टी बदल ली है, इसी वजह से जीत हुई है।
भारत में 3 राज्यों की 4 लोकसभा सीटों और 9 राज्यों की 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। लेकिन सबसे चर्चित उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट पर सबकी निगाहें टिकी हुई थी।
राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी ने जीत पर अपनी खुशी जाहिर की है। साथ ही उन्होंने बीजेपी पर हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि कैराना में जिन्ना की हार हुई और गन्ना जीत गया। इसी के साथ उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल का समर्थन करने वाली पार्टियों को धन्यवाद कहा।
आने वाले दिनों में गठबंधन के कयासों को लेकर चौधरी ने कहा कि हम सब साथ मिलकर सांप्रदायिक ताकतों का मुकाबला करेंगे और गठबंधन को इसी तरह आगे लेकर जाएंगे। इसी के साथ उन्होंने उम्मीद जताई कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भी ऐसे नतीजे ही देखने को मिलेंगे।
कैराना में जीत के बाद जयंत चौधरी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मंगलयान से लेकर 9 किमी तक की सड़क का श्रेय जब वहीं खुद लेते हैं तो हार की जिम्मेदारी भी उन्हें लेनी चाहिए।
देशभर की 4 लोकसभा और 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ चुके हैं। ये नतीजे जहां संयुक्त विपक्ष के लिए राहत और ताकत का संदेश लेकर आएं हैं तो बीजेपी के लिए खतरे की घंटी भी बजा रहे हैं।









