कश्मीर घाटी में इस साल जून महीने में 9 पुलिसवालों समेत कम से कम 42 लोगों की जान गई है। इसे हाल के सालों का सबसे खूनी रमजान कहा जा रहा है। मरने वालों में 27 आतंकी और 6 नागरिक भी शामिल हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने शुक्रवार को हुई डीएसपी की हत्या की वजह आम नागरिकों में सुरक्षा बलों के डर को बताया है।
भीड़ द्वारा डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित को पीट-पीटकर मार डालने की घटना की हर तरफ से निंदा की गई।
हालांकि सुरक्षा बलों का मानना है कि पुलिस के खिलाफ नागरिकों के गुस्से को शांत करना मुश्किल है।
अधिकारी ने कहा, ''हालांकि उन्होंने (महबूबा) पुलिस के हमले पर दिए अपने बयान में काफी कड़े शब्द कहे। लेकिन हमें संकेत मिल गया कि राजनीतिक कारणों से अपराधी के साथ भी कठोरता से पेश नहीं आना है। यहां तक की उग्रवादियों के खिलाफ भी नहीं।''
उन्होंने कहा, ''हम और कितने जवान खोएंगे। लोग हमारे पीछे कुत्तों की तरह पागल हैं, बस इसलिए क्योंकि हम पुलिसवाले हैं।''
घाटी में पुलिसवालों को नागरिक और उग्रवादी दोनों अपना शिकार बनाते रहे हैं। डीजीपी वैद ने बताया कि पंडित के कत्ल के पीछे तीन लोगों का हाथ था जिनमें से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है।
बता दें कि शुक्रवार की मध्य रात्रि को नौहट्टा की जामिया मस्जिद के बाहर भीड़ ने जम्मू-कश्मीर के डिप्टी एसपी मोहम्मद अयूब पंडित को पीट-पीट कर मार डाला।
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इसे शर्मनाक हरकत करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कश्मीरी लोगों को चेतावनी दी है कि वह सुरक्षाबलों के सब्र का इम्तिहान न लें। इस घटना के बाद से पुलिस अधिकारी के परिवार वाले और करीबी गुस्से में है और वह इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं।
पंद्रह वर्षीय जुनैद खान गुरुवार को जब अपने घर बल्लभगढ़ से निकला था तो उसने सोचा था कि वह दिल्ली से ईद के मौके पर अपने लिए नया कुर्ता-पायजामा, नए जूते और अपने लिए कुछ अन्य चीजें लेकर आएगा, लेकिन किसी को क्या पता था कि वह यह खुशी अपने परिवार के साथ मनाने के लिए कभी घर वापस ही नहीं लौटेगा।
ईद की खरीददारी कर जुनैद अपने तीन भाई हाशिम, शाकिर और मोइन के साथ मथुरा जा रही ट्रेन में घर जाने के लिए सफर कर रहा था कि बीफ की अफवाह के बीच करीब 10-12 लोगों ने उनपर चाकू से हमला कर दिया जिसमें जुनैद की मौत हो गई और उसके दो भाई हाशिम और शाकिर गंभीर रूप से घायल हो गए।
इस मामले की जानकारी देते हुए 23 वर्षीय शाकिर ने बताया कि ट्रेन में सफर कर रहे कुछ युवकों ने पहले तो उनके पहनावे को लेकर अभद्र टिप्पणी की और फिर बाद में बीफ खाने वाला बताने लगे। उन्होंने हमारे सिर से टोपी उतारकर फेंक दी और वे मेरे भाई की दाढ़ी खींचने लगे। वे हमें बार-बार ताने मारे जा रहे थे कि हम बीफ खाते हैं। हमारे गांव में बीफ पकाया तक नहीं जाता है, लेकिन फिर भी हमें ताने मारे जा रहे थे। जैसे ही हम बल्लभगढ़ पहुंचे तो उन्होंने चाकू निकाल लिए। वे सभी हमसे बड़े थे जिसकी वजह से हम कुछ नहीं कर पाए।
रोते-रोते शाकिर ने बताया कि एक व्यक्ति ने पहले तो जुनैद पर कई बार चाकू से हमला किया और फिर उसके बाद हाशिम और मुझपर हमला कर दिया। शाकिर को पांच बार चाकू मारा गया जिसमें से एक उसकी छाती पर लगा।
उन्मादी भीड़ ने चार मुस्लिम युवकों की न केवल जमकर पिटाई कर दी बल्कि उसे चलती ट्रेन से नीचे भी फेंक दिया।
फिलहाल शाकिर एम्स के ट्रोमा सेंटर में भर्ती है। चाकू लगने के बाद शाकिर बेहोश हो गया था और उसे पता नही आगे उसके साथ क्या हुआ था। शाकिर ने कहा कि हासिम ने मुझे बताया कि आरोपियों ने उन्हें घायल करने के बाद असौती स्टेशन पर फेंक दिया था। किसी व्यक्ति ने एंबुलेंस बुलाकर उन्हें पलवल के अस्पताल में पहुंचाया, जहां पर जुनैद ने दम तोड़ दिया और बाकी घायलों को एम्स रेफर कर दिया गया।
पुलिस थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार, दो गुटों के बीच सीट को लेकर झगड़ा हुआ था। दूसरे पक्ष को पीड़ितों के परिधान से लगा कि वे मुस्लिम हैं तो उन्होंने उन्हें ताना मारना शुरु कर दिया।
शाकिर ने कहा कि जब वे जुनैद पर हमला कर रहे थे तो हमने उनसे कहा था कि उसे मत मारों वह बच्चा है, लेकिन उन्होंने हमारी एक न सुनी। हमने उनसे यह भी कहा था कि हमने आपके धर्म के बारे में कुछ नहीं कहा है आप भी हमारे धर्म के बारे में कुछ मत कहिए।
इस घटना की शिकायत फरीदाबाद जीआरपी स्टेशन में दर्ज कराई गई है। एसपी ने बताया कि इस मामले में एक गिरफ्तारी हो चुकी है और जल्द ही अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने शुक्रवार, 23 जून को पटना में रोजा इफ्तार पार्टी दी थी। पार्टी में बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड अध्यक्ष नीतीश कुमार भी पहुंचे थे। इस मौके पर लालू यादव ने गले लगाकर नीतीश कुमार का स्वागत किया और राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा, लेकिन नीतीश ने यह कहकर सबको चौंका दिया कि यूपीए ने बिहार की बेटी मीरा कुमार को राष्ट्रपति चुनाव में हराने के लिए क्यों खड़ा किया।
नीतीश ने कहा कि उनकी पार्टी ने बहुत सोच-समझकर और पार्टी नेताओं से बातचीत कर राष्ट्रपति चुनाव पर एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का फैसला किया है।
नीतीश ने कहा कि यह ना तो कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है और ना ही राजनीतिक टकराव का विषय है। उन्होंने साफ किया कि पिछली बार भी उनकी पार्टी ने एनडीए में रहते हुए भी यूपीए उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को समर्थन दिया था।
नीतीश ने कहा कि हम पहले भी स्वतंत्र होकर इस मामले में फैसला लेते रहे हैं। हालांकि, मीरा कुमार के नाम पर उन्होंने कहा कि वो व्यक्तिगत तौर पर मीरा कुमार का बहुत सम्मान करते हैं।
गौरतलब है कि गुरुवार (22 जून को) नई दिल्ली में मीरा कुमार को यूपीए का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि वो पटना जाकर नीतीश कुमार को समझाएंगे कि वो अपने फैसले पर पुनर्विचार करें।
लालू यादव ने कहा था कि नीतीश कुमार की यह ऐतिहासिक भूल होगी।
बता दें कि इस बार का राष्ट्रपति चुनाव दलित बनाम दलित हो गया है।
एनडीए ने बिहार के गवर्नर रहे रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाया है तो यूपीए ने बिहार की बेटी और पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को मैदान में उतारा है।
हालांकि, रामनाथ कोविंद का जीतना लगभग तय है क्योंकि एनडीए के घटक दलों के अलावा उन्हें जेडीयू, बीजेडी, एआईएडीएमके (शशिकला गुट), एआईएडीएमके (पनीरसेल्वम गुट), वाईएसआर कांग्रेस, टीडीपी, टीआरएस का भी समर्थन हासिल है।
भारत में 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी पार्टियों ने गुरुवार शाम को बैठक की। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विभिन्न दलों के नेताओं की मौजूदगी में तय किया गया कि पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा। बिहार के सासाराम से जीतने वालीं मीरा कुमार 15वीं लोकसभा की अध्यक्ष रह चुकी हैं। मीरा के सामने एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद होंगे जिन्हें कई विपक्षी दलों ने समर्थन की बात कही है।
एक दिन पहले ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (युनाइटेड) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का फैसला किया था। खड़गे ने जनता दल (युनाइटेड) द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, ''नीतिश कुमार की पार्टी जनता दल (युनाइटेड) ने कोविंद को समर्थन देने का ऐलान किया है, यह उनका फैसला है।''
उन्होंने कहा, ''इससे पहले विपक्षी पार्टियों की बैठक में जनता दल (युनाइटेड) नेता शरद यादव ने राष्ट्रपति उम्मीदवार पर जल्दबाजी में फैसला नहीं करने की सलाह दी थी।''
शरद यादव राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर फैसला करने के लिए विपक्षी पार्टियों द्वारा गठित उपसमिति के सदस्य भी हैं।
सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर आम सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों से चर्चा करने की पहल की थी। इस संदर्भ में सोनिया गांधी से मुलाकात करने वालों में नीतीश कुमार भी थे और उनकी पार्टी के नेताओं ने समूह की सभी बैठकों में हिस्सा लिया था। वामपंथी दल कोविंद के मुकाबले उम्मीदवार उतारने के पक्ष में हैं। वे इसे 'विचारात्मक संघर्ष' कहते हैं।
राष्ट्रपति पद के लिए राजग उम्मीदवार के तौर पर अपना नाम घोषित होने के बाद से कोविंद कई शीर्ष भाजपा नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। वह पार्टी के महासचिव भी रह चुके हैं। बुधवार को उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से मुलाकात की थी। कोविंद शुक्रवार को नामांकन-पत्र दाखिल करने वाले हैं। उम्मीद की जा रही है कि इसके बाद वह अपने पक्ष में समर्थन के लिए विपक्षी दलों से भी संपर्क साध सकते हैं।
बिहार में सत्ताधारी महागठबंधन में शामिल जनता दल (युनाइटेड) द्वारा राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन के फैसले के बाद राष्ट्रीय जनता दल का गुस्सा सातवें आसमान पर है। राष्ट्रीय जनता दल ने यहां तक कह दिया है कि नीतीश कुमार देशभर के मालिक नहीं हैं।
राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने गुरुवार को कहा कि सबसे पहले नीतीश कुमार ने ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद से मिलकर धर्मनिरपेक्ष दलों के संयुक्त फैसले से राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार उतारने की बात कही थी, इसके बाद वह बदल गए।
उन्होंने जनता दल (यू) पर विपक्षी एकता में फूट डालने का आरोप लगाते हुए कहा, ''जनता दल (यू) अलग निर्णय लेकर विपक्षी एकता को कमजोर करने की कोशिश करता है जिससे लोगों में गलत संदेश जाता है।''
रघुवंश प्रसाद सिंह ने हालांकि यह भी कहा कि राष्ट्रीय जनता दल सभी धर्मनिरपेक्ष दलों के एकजुट करने का प्रयास करता रहेगा। उन्होंने नीतीश के फैसले पर बिफरते हुए कहा, ''नीतीश देशभर के मालिक हैं क्या? राष्ट्रीय जनता दल के प्रयास से धर्मनिरपेक्ष दल एकजुट होंगे और एक राष्ट्रीय विकल्प तैयार होगा।''
इधर, राष्ट्रीय जनता दल के विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि नीतीश कुमार महागठबंधन को ठेंगा दिखा रहे हैं और नीतीश का यह फैसला राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ धोखा है। उन्होंने कहा, ''नीतीश कुमार को अगर बीजेपी से दोस्ती निभानी है तो खुलकर कहें। हमें क्यों धोखा दे रहे हैं?''
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति चुनाव में जनता दल (यू) ने कोविंद को समर्थन देने का फैसला किया है। इससे पहले सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर आम सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों से चर्चा करने की पहल की थी। इस संदर्भ में सोनिया गांधी से मुलाकात करने वालों में नीतिश कुमार भी थे और उनकी पार्टी के नेताओं ने विपक्ष की सभी बैठकों में हिस्सा लिया था।
वामपंथी दल कोविंद के मुकाबले उम्मीदवार उतारने के पक्ष में हैं। वे इसे 'विचारात्मक संघर्ष' कहते हैं। कुछ पार्टियां राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार का नाम भी सुझा रही हैं, जबकि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे का नाम भी चर्चा है। ये भी दलित हैं। बिहार में सत्ताधारी महागठबंधन में जनता दल (यू), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल शामिल हैं।
मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां सूबे के किसानों ने सिवानी, मालवा और बानापुर रेलवे ट्रेक को ब्लॉक कर दिया।
साथ ही मंगलवार (20 जून, 2017) को ट्रेनों की आवाजाही को भी बुरी तरह से बाधित किया। वहीं एक अन्य घटना में सूबे के दो किसानों के आत्महत्या करने की खबरें हैं।
मध्य प्रदेश लगातार किसानों के विरोध प्रदर्शन और हिंसा की आग में जल रहा है। दरअसल किसान फसलों का उचित मूल्य दिए जाने और कर्जमाफी के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।
खबर के अनुसार, होशंगाबाद जिले के किसान बाबू वर्मा (40) ने बीते दिनों आत्महत्या कर ली थी। जबकि 65 साल की लक्ष्मी गोमास्ता ने नरसिंहनगर जिले में जहर खाकर आत्महत्या कर ली। घटना बीते सोमवार की है।
बता दें कि 6 जून को मध्य प्रदेश के मंदसौर में शुरू हुए किसान आंदोलन में अबतक 17 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। सभी फसलों की उचित कीमत दिए जाने और कर्जमाफी की मांग कर रहे थे।
वहीं मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने प्रदर्शन कर रहे किसानों पर निशाना साधते हुए कहा कि फसल कर्ज माफी इन दिनों एक फैशन बन गया है। भाजपा नेता ने आगे कहा कि किसानों को लोन माफी में जरूर छूट दी जानी चाहिए, लेकिन अत्यधिक खराब परिस्थितियों में। उन्होंने कहा कि कर्ज माफी किसानों की भलाई के लिए आखिरी समाधान नहीं है।
वहीं किसान कर्ज माफी से जुड़े नायडू के बयान का विरोध करते हुए सीपीआई (एम) के लीडर सीताराम येचुरी ने कहा कि पिछले तीन सालों में 36 से 40 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय मंत्री द्वारा लोन माफी को फैशनेबल बताना हमारे अन्नदाताओं का अपमान है।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने के बाद विपक्ष की एकता टूट गई है। नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए बीजेपी नीत गठबंधन एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने की घोषणा की है। तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टी आर एस) नेता और तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने सोमवार (19 जून) को ही कोविंद को अपना समर्थन दे दिया था। नवीन पटनायक की बीजद भी कोविंद को समर्थन दे चुकी है।
बसपा प्रमुख मायावती ने भी कहा है कि विपक्ष अगर दलित उम्मीदवार नहीं उतारता तो वो कोविंद को समर्थन देने को लेकर सकारात्मक हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष एक ऐसा उम्मीदवार तलाश रहा है जो रामनाथ कोविंद को टक्कर दे सके। विपक्ष की कोशिशों को केवल चेहरा बचाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि टीआरएस, बीजद और जनता दल यूनाइटेड के समर्थन के बाद आंकड़ें बीजेपी के पक्ष में झुक गए हैं।
राष्ट्रपति चुनाव सामान्य चुनाव की तरह सीधे मतदान से नहीं होता। राष्ट्रपति चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज के तहत होता है जिसमें सभी सांसदों और विधायकों के वोटों का प्रतिनिधिक मूल्य होता है। राष्ट्रपति चुनाव में नामित सांसदों का वोट नहीं शामिल होता है। राष्ट्रपति चुनाव में कुल 4120 विधायकों और 776 सांसदों का वोट शामिल होगा। हर सांसद के वोट का मूल्य 708 है, जबकि विधायक के वोट का मूल्य संबंधित राज्य की जनसंख्या के आधार पर तय होता है। जिस राज्य की ज्यादा जनसंख्या होती है वहां के विधायकों के वोट का मूल्य ज्यादा होता है। कुल 100 प्रतिशत वोटों में से चुनाव जीतने के लिए किसी भी प्रत्याशी को 51 प्रतिशत वोट पाने होते हैं।
बीजेपी के पास 1352 विधायकों और 337 सांसद हैं जिनका वोट कुल वोटों का करीब 40.03 प्रतिशत है। शिव सेना जिसने मंगलवार (20 जून) को बीजेपी प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा की उसके पास 63 विधायक और 21 सांसद हैं जिनका वोट प्रतिशत 2.34 है। बीजेपी के अन्य दलों का वोट मिलाकर एनडीए के पास कुल 48.64 प्रतिशत वोट है। यानी बीजेपी को कोविंद को जिताने के लिए करीब ढाई प्रतिशत वोट ही और चाहिए। वहीं यूपीए के पास करीब 35.47 फीसदी वोट शेयर हैं।
टीआरएस के पास 82 विधायक और 14 सांसद हैं जिनका कुल वोट प्रतिशत 1.99 है। नवीन पटनायक की बीजद ने भी कोविंद की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। बीजद के पास 117 विधायक और 28 सांसद हैं और उसका कुल वोट प्रतिशत 2.98 है। जनता दल यूनाइटेड के पास 73 विधायक और 12 सांसद हैं और उसका कुल वोट प्रतिशत 1.89 है।
बीजद, टीआरएस और जनता दल यूनाइटेड के समर्थन के बाद बीजेपी को कांग्रेस नीत गठबंधन यूपीए में नहीं शामिल कुछ छोटे दलों का समर्थन भी मिल सकता है।
आइए एक नजर डालते हैं उन दलों पर जो बीजेपी का साथ दे सकते हैं। ए आई ए डी एम के के पास 139 विधायक और 50 सांसद हैं और उसका कुल वोट प्रतिशत 5.36 है। वाई एस आर सी पी के पास 66 विधायक और 10 सांसद हैं और उसका कुल वोट प्रतिशत 1.53 है। बसपा के पास 19 विधायक और छह सांसद हैं और उसका कुल वोट प्रतिशत 0.74 है। अगर इन दलों का भी साथ बीजेपी को मिल जाता है तो उसके पास 60 प्रतिशत से ज्यादा वोट होंगे और उसका प्रत्याशी सम्मानजनक अंतर से जीतेगा।
अगर इन दलों का बीजेपी के राष्ट्रपति उम्मीदवार कोविंद को समर्थन नहीं मिलता है तो बीजेपी उम्मीदवार की हार निश्चित है।
राष्ट्रपति चुनाव पर एनडीए के साथ विपक्ष के सहमति के आसार नहीं दिख रहे हैं। सीपीआई नेता डी राजा ने कहा है कि विपक्षी दलों को बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार खड़ा करना चाहिए।
वामपंथी नेता डी राजा ने कहा कि इस पर जोर रहेगा कि देश में राष्ट्रपति का चुनाव हो। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को बीजेपी उम्मीदवार राम नाथ कोविंद के खिलाफ एक मजबूत दलित नेता को खड़ा करना चाहिए।
डी राजा ने कहा कि ये विचारधाराओं का संघर्ष है, और राष्ट्रपति पद के लिए बकायदा चुनाव होना चाहिए। अंग्रेजी न्यूज़ चैनल एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और पूर्व स्पीकर मीरा कुमार के नाम पर विचार करने के लिए तैयार है। ये दोनों ही नेता दलित समुदाय से आते हैं और यूपीए शासन में अहम पदों पर रहे।
हालांकि वामपंथी नेता ने नाम तय करने का जिम्मा मुख्य रुप से कांग्रेस पर छोड़ दिया है।
बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए ने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए दलित नेता रामनाथ कोविंद का नाम आगे कर मास्टर स्ट्रोक चला है। दलित समुदाय से होने की वजह से विपक्ष भी बीजेपी के इस कैंडिडेट का खुलकर विरोध नहीं कर पा रहा है। बीजेडी, टीआरएस जैसे कई दलों ने रामनाथ कोविंद को समर्थन का ऐलान कर दिया है, वहीं ज्यादातर कह रहे हैं कि वे जल्द ही अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करेंगे।
डी राजा ने कहा कि हम 22 जून को आयोजित विपक्ष के बैठक का इंतजार करेंगे, इसके बाद ही राष्ट्रपति पद के नाम पर आखिरी फैसला लिया जाएगा।
बता दें कि राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारने के लिए रणनीति बना रहा है, इसके लिए एनडीए में फूट डालने की नीति पर भी काम की जा रही है। शिवसेना रामनाथ कोविंद के नाम पर अपनी असहमति जता चुकी है और कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन का नाम आगे बढ़ा चुकी है। अगर कांग्रेस भी इस नाम पर सहमति जता दे तो शिवसेना इस नाम पर हर हाल में सहमति जताएगी। विपक्ष सुशील कुमार शिंदे, मीरा कुमार के अलावा गोपाल कृष्ण गांधी, और बाबा साहेब अंबेडकर के पौत्र प्रकाश यशवंत अंबेडकर के नाम पर भी विचार विमर्श कर रही है।
भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को बिहार के राज्यपाल राम नाथ कोविंद को एनडीए का राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित कर दिया। हालांकि विपक्ष कोविंद के नाम पर समर्थन के मूड में नजर नहीं आ रहा है।
कहा जा रहा है कि एनडीए के उम्मीदवार के खिलाफ विपक्ष अपना कैंडिडेट खड़ा करेगा और इसकी तलाश भी शुरू कर दी गई है। कयास लग रहे हैं कि कोविंद के खिलाफ विपक्ष किसी दलित चेहरे को ही उम्मीदवार बनाएगा।
मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अपने अगले कदम को लेकर संशय में है। वहीं, लेफ्ट पार्टियों के अंदर चर्चा है कि कोविंद के खिलाफ विपक्ष एक ज्वाइंट उम्मीदवार खड़ा कर सकता है।
इंडिया टुडे ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया, ''कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर चार लोगों का नाम शॉर्टलिस्ट किया गया है। जिन नामों की चर्चा है, उनमें सबसे आगे लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार, पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, प्रकाश यशवंत आंबेडकर और पूर्व नौकशाह गोपाल कृष्ण गांधी है।
प्रकाश यशवंत आंबेडकर, संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के पौत्र और यशवंत भीमराव अम्बेडकर के पुत्र हैं।
वहीं, गोपाल कृष्ण गांधी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते हैं और रिटायर्ड आईएएस हैं। गांधी 2004 से 2009 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रह चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि विपक्ष 22 जून को बैठक करेगा और उसके बाद उम्मीदवार का ऐलान करेगा।
टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए भारत के जाने-माने कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का नाम भी सामने आ रहा है। कहा जा रहा है कि स्वामीनाथन के नाम पर भी कांग्रेस विचार कर रही है। इसे एनडीए में फूट डालने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। एनडीए में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना पहले भी स्वामीनाथन के नाम को आगे बढ़ा चुकी है। ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि अगर स्वामीनाथन का नाम राष्ट्रपति के लिए आगे आता है तो शिवसेना उसका समर्थन कर सकती है।
शिवसेना ने कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद सवाल उठाए थे। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर सिर्फ दलित वोटों के लिए कोविंद को चुना गया है तो वह एनडीए उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेगी। इससे देश को कोई लाभ नहीं होगा। शिवसेना ने कभी किसी को ढाल बनाकर राजनीति नहीं की।
भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार के खिलाफ 21 जून को योग दिवस पर लखनऊ की सड़कों पर शवासन कर योग दिवस मनाने का निर्णय लिया है। योग दिवस के दिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लखनऊ में योग करेंगे, तब किसान वहां की सड़कों पर विरोध में शवासन करते हुए मिलेंगे।
भारतीय किसान यूनियन का आरोप है कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों की वजह से किसान आज मरणावस्था में पहुंच गया है। हरिद्वार में गंगा के तट पर स्थित लालकोठी परिसर में भारतीय किसान यूनियन की तीन दिवसीय राट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में किसानों ने केंद्र सरकार की जमकर निंदा की। एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को किसान विरोधी करार दिया और केंद्र की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ 31 जुलाई को लखनऊ में किसान महापंचायत करने और पंचायत के बाद दिल्ली कूच करने का फैसला लिया है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार हर मोर्चे पर नाकाम साबित हो रही है। किसानों के भले के लिए केंद्र सरकार ने जितने भी वादे किए थे, उनमें से एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है। बैठक में केंद्र सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया गया। बैठक में किसानों ने उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश की सरकार को सिरे से किसान विरोधी बताया।
बैठक में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने, स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करने, राज्यों में बिजली और खेती से जुड़े हुए उपकरणों की बढ़ी कीमत वापस लेने की मांग की गई।
भारतीय किसान यूनियन ने बीजेपी की मानसिकता को किसान विरोधी बताया। भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार से खेती से जुड़े उत्पादों का लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की।
भारतीय किसान यूनियन ने हरिद्वार के जिला प्रशासन के मार्फत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पिथौरागढ़ के किसान द्वारा की गई आत्महत्या के विरोध में ज्ञापन सौंपा।









