भारत

जम्मू-कश्मीर के मुसलमान अल्पसंख्यक हैं या नहीं, सरकार तय करे: सुप्रीम कोर्ट

भारत के जम्मू-कश्मीर में रहने वाले मुसलमानों को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलना चाहिए या नहीं- इस मामले में चल रही बहस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये मुद्दा केंद्र और राज्य सरकार आपस में बात कर के सुलझाएं।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एसके कॉल की बेंच ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार आपसी बातचीत से इस मामले को सुलझाएं और चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करें।

बेंच का कहना है, ''ये बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है और दोनों सरकारों को मिलकर इसका हल खोजना चाहिए।''

बीते साल जम्मू स्थित वकील अंकुर शर्मा ने एक जनहित याचिका दायर की थी और कहा था कि जम्मू-कश्मीर में मुसलमान बहुसंख्यक हैं, लेकिन वहां अल्पसंख्यकों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ बहुसंख्यक मुसलमानों को मिल रहा है।

उनका कहना था कि मुसलमानों को मिले अल्पसंख्यक समुदाय के दर्ज़े पर फिर से विचार किया जाना चाहिए और राज्य की जनसंख्या के आधार पर अल्पसंख्यक समुदायों की पहचान की जानी चाहिए।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, जम्मू-कश्मीर सरकार और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को नोटिस जारी किया था।

शर्मा का कहना था कि जम्मू-कश्मीर में राज्य अल्पसंख्यक आयोग जैसी कोई संस्था नहीं है।

बूचड़खाने बंद हुए तो हिंदू-मुसलमान दोनों को नुक़सान होगा

उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों कुछ बूचड़खाने बंद कराए गए। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि वो 'अवैध' रूप से चलाए जा रहे थे।

बूचड़खानों का ज़िक्र आने पर आम लोग जहाँ मानते हैं कि इस पेशे में एक ख़ास मज़हब और वर्ग के लोग ही काम करते हैं।

हकीकत क्या है? भारत के 10 बड़े बीफ़ एक्सपोर्टर्स का संबंध हिंदू समुदाय से है? भारत के केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की संस्था कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (अपेडा) से मंजूर देश के 74 बूचड़खानों में 10 के मालिक हिंदू हैं।

भारत के सबसे बड़े और आधुनिक बूचड़खाने अल कबीर के मालिक ग़ैर-मुस्लिम हैं। भारत का सबसे बड़ा बूचड़खाना तेलंगाना के मेडक ज़िले में रूद्रम गांव में है। तक़रीबन 400 एकड़ में फैले इस बूचड़खाने के मालिक सतीश सब्बरवाल हैं। यह बूचड़खाना अल कबीर एक्स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड चलाता है।

मुंबई के नरीमन प्वॉइंट स्थित मुख्यालय से मध्य-पूर्व के कई देशों को बीफ़ निर्यात किया जाता है। यह भारत का सबसे बड़ा बीफ़ निर्यातक भी है और मध्य-पूर्व के कई शहरों में इसके दफ़्तर हैं।

अल कबीर के दफ़्तर दुबई, अबू धाबी, क़ुवैत, ज़ेद्दा, दम्मम, मदीना, रियाद, खरमिश, सित्रा, मस्कट और दोहा में हैं। दुबई दफ़्तर से फ़ोन पर बातचीत में अल कबीर मध्य पूर्व के चेयरमैन सुरेश सब्बरवाल ने बीबीसी से कहा, ''धर्म और व्यवसाय दो बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं और दोनों को एक-दूसरे से मिला कर नहीं देखा जाना चाहिए। कोई हिंदू बीफ़ व्यवसाय में रहे या मुसलमान ब्याज पर पैसे देने के व्यवसाय में रहे तो क्या हर्ज़ है?''

अल कबीर ने बीते साल लगभग 650 करोड़ रुपये का कुल व्यवसाय किया था।

अरेबियन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लमिटेड के मालिक सुनील कपूर हैं। इसका मुख्यालय मुंबई के रशियन मैनशन्स में है। कंपनी बीफ़ के अलावा भेड़ के मांस का भी निर्यात करती है। इसके निदेशक मंडल में विरनत नागनाथ कुडमुले, विकास मारुति शिंदे और अशोक नारंग हैं।

एमकेआर फ़्रोज़न फ़ूड एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक मदन एबट हैं। कंपनी का मुख्यालय दिल्ली में है।

एबट कोल्ड स्टोरेजेज़ प्राइवेट लिमिटेड का बूचड़खाना पंजाब के मोहाली ज़िले के समगौली गांव में है। इसके निदेशक सनी एबट हैं।

अल नूर एक्सपोर्ट्स के मालिक सुनील सूद हैं। इस कंपनी का दफ़्तर दिल्ली में है, लेकिन इसका बूचड़खाना और मांस प्रसंस्करण संयंत्र उत्तर प्रदेश के मुजफ़्फ़रनगर के शेरनगर गांव में है।

इसके अलावा मेरठ और मुबई में भी इसके संयंत्र हैं। इसके दूसरे पार्टनर अजय सूद हैं। इस कंपनी की स्थापना 1992 में हुई और यह 35 देशों को बीफ़ निर्यात करती है।

एओवी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का बूचड़खाना उत्तर प्रदेश के उन्नाव में है। इसका मांस प्रसंस्करण संयंत्र भी है। इसके निदेशक ओपी अरोड़ा हैं।

यह कंपनी साल 2001 से काम कर रही है। यह मुख्य रूप से बीफ़ निर्यात करती है। कंपनी का मुख्यालय नोएडा में है।

अभिषेक अरोड़ा एओवी एग्रो फ़ूड्स के निदेशक हैं। इस कंपनी का संयंत्र मेवात के नूह में है।

स्टैंडर्ड फ़्रोज़न फ़ूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक कमल वर्मा हैं। इस कंपनी का बूचड़खाना और सयंत्र उत्तर प्रदेश के उन्नाव के चांदपुर गांव में है। इसका दफ्तर हापुड़ के शिवपुरी में है।

पोन्ने प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट्स के निदेशक एस सास्ति कुमार हैं। यह कंपनी बीफ़ के अलावा मुर्गी के अंडे और मांस के व्यवसाय में भी है। कपंनी का संयंत्र तमिलनाडु के नमक्काल में परमति रोड पर है।

अश्विनी एग्रो एक्सपोर्ट्स का बूचड़खाना तमिलनाडु के गांधीनगर में है। कंपनी के निदेशक के राजेंद्रन धर्म को व्यवसाय से बिल्कुल अलग रखते हैं। वे कहते हैं, ''धर्म निहायत ही निजी चीज है और इसका व्यवसाय से कोई ताल्लुक नहीं होना चाहिए।''

राजेंद्रन ने इसके साथ यह ज़रूर माना कि उन्हें कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा है। कई बार स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें परेशान किया है।

महाराष्ट्र फ़ूड्स प्रोसेसिंग एंड कोल्ड स्टोरेज के पार्टनर सन्नी खट्टर का भी यही मानना है कि धर्म और धंधा अलग-अलग चीजें हैं और दोनों को मिलाना ग़लत है। वो कहते हैं, ''मैं हिंदू हूं और बीफ़ व्यवसाय में हूं तो क्या हो गया? किसी हिंदू के इस व्यवसाय में होने में कोई बुराई नहीं है? मैं यह व्यवसाय कर कोई बुरा हिंदू नहीं बन गया।"

इस कंपनी का बूचड़खाना महाराष्ट्र के सतारा ज़िले के फलटन में है।

इसके अलावा हिंदुओं की ऐसी कई कंपनियां हैं, जो सिर्फ बीफ़ निर्यात के क्षेत्र में हैं। उनका बूचड़खाना नहीं है, पर वे मांस प्रसंस्करण, पैकेजिंग कर निर्यात करते हैं। कनक ट्रेडर्स ऐसी ही एक कंपनी है।

इसके प्रोप्राइटर राजेश स्वामी ने कहा, ''इस व्यवसाय में हिंदू-मुसलमान का भेदभाव नहीं है। दोनों धर्मों के लोग मिलजुल कर काम करते हैं। किसी के हिंदू होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है।''

वे यह भी कहते हैं कि बूचड़खाने बंद हुए तो हिंदू-मुसलमान दोनों को नुक़सान होगा।

बड़ी तादाद में हिंदू मध्यम स्तर के प्रबंधन में हैं। वे कंपनी के मालिक तो नहीं, लेकिन निदेशक, क्वॉलिटी प्रबंधक, सलाहकार और इस तरह के दूसरे पदों पर हैं।

कश्मीर में मंत्री के पुश्तैनी घर पर हमला, दो पुलिसकर्मी घायल

भारत में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में संदिग्ध चरमपंथियों के हमले में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध चरमपंथियों ने रविवार रात करीब साढ़े दस बज़े जम्मू-कश्मीर सरकार के राज्यमंत्री फारुक़ अंदराबी के पुश्तैनी मकान पर हमला किया।

अनंतनाग के पुलिस अधीक्षक ज़ुबैर अहमद ने स्थानीय पत्रकार माजिद जहांगीर को बताया कि ये मकान अनंतनाग ज़िले के डूरू इलाके में है।

अहमद ने बताया, ''फारुक़ अंदराबी घर पर मौजूद नहीं थे। चरमपंथियों ने उनके घर पर तैनात पुलिस पोस्ट को निशाना बनाया। हमले में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।''

फारुक अंदराबी मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के रिश्तेदार भी हैं।

स्थानीय रिपोर्टों में ये भी बताया गया है कि संदिग्ध चरमपंथी सुरक्षाकर्मियों के हथियार भी अपने साथ ले गए हैं, लेकिन पुलिस अधीक्षक ज़ुबैर अहमद ने इसकी पुष्टि नहीं की।

अहमद ने कहा, ''पूरे मामले की जांच की जा रही है। इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।''

पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध चरमपंथी हमले के बाद भागने में कामयाब हो गए।

दक्षिणी कश्मीर की संसदीय सीट पर 9 अप्रैल को उपचुनाव होना है। चुनाव की वजह से दक्षिणी कश्मीर में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था चौकस होने का दावा किया जा रहा है।

वहीं, रविवार दोपहर पुलिस ने दावा किया कि दक्षिणी कश्मीर के अवंतीपुरा में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में दो संदिग्ध चरमपंथियों की मौत हो गई।

पुलिस के मुताबिक, इनका संबंध हिज्बुल मुजाहिदीन से था।

एक अप्रैल से कार, बाइक और हेल्थ इंश्योरेंस महंगा

एक अप्रैल से कार, बाइक और हेल्थ का इंश्‍योरेंस प्रीमियम महंगा हो जाएगा। इंश्योरेंस रेग्युलेट्री एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (इरडा) ने इसके लिए मंजूरी दे दी है।

इससे पहले इरडा ने थर्ड पार्टी इन्श्योरेंस का प्रीमियम रेट बढ़ाने को हरी झंडी दे दी थी। इस फैसले के बाद बीमा प्रीमियम की राशि में मौजूदा दरों में पांच फीसदी की बढ़ोत्तरी या कटौती की जा सकती है।

इरडा का कहना है कि बीमा एजेंटों का कमीशन बढ़ जाएगा और इसके साथ ही उनको रिवार्ड भी मिलेगा। इसके अलावा जो एजेंट्स अच्छा काम करके दें, उनको कंपनी की तरफ से अलग से प्रोत्साहन राशि मिलेगी।

इरडा का कहना है कि बीमा कंपनियों को यह भी सर्टिफिकेट देना होगा कि जो पॉलिसी पहले बिक चुकी है, उनमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया जाएगा। इतना ही नहीं, सर्टिफिकेट में यह भी बताना होगा कि प्रीमियम रेट में इस तरह का कोई बदलाव नहीं होगा जिससे पॉलिसी लेने वाले को नुकसान हो।

इरडा ने कंपनियों से कहा है कि वो इस हिसाब से भी प्रीमियम का रेट अपने हिसाब से तय कर सकेंगे।

फर्रुखाबाद जेल पर बंदियों का कब्जा, जेलर व 5 सिपाही निलंबित

फर्रूखाबाद स्थित फतेहगढ़ जिला जेल में रविवार को हुए बवाल में जेलर वीपी सिंह और पांच बंदी रक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। यह जानकारी एडीजी जेल जीएल मीना ने दी।

एक बीमार बंदी को रेफर करने के बजाय जेल के अस्पताल में ले जाने से बंदियों में आक्रोश फैल गया। नाराज बंदियों ने हंगामा करते हुए छतों पर चढ़कर नारेबाजी शुरू कर दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो बंदी और उग्र हो गए और पथराव करके पुलिस को जेल में घुसने से रोक दिया।

जेल में हंगामे की खबर पर जेल अधीक्षक के अलावा एसपी व प्रभारी डीएम भी पहुंचे। पथराव की घटना में सीडीओ सहित कई सुरक्षाकर्मी भी घायल हो गए।

फर्रुखाबाद जिला जेल में बंदी को लोहिया अस्पताल में रेफर करने को लेकर जिला जेल के डॉक्टर और बंदी रक्षक से बंदियों का विवाद हो गया। बंदी बैरकों से बाहर निकल आए और प्रांगण में आग लगा दी। अधीक्षक और जेलर के कक्ष की छतों पर कब्जाकर पथराव शुरू कर दिया जिससे भगदड़ मच गई।

सूचना पर पहुंचे अधीक्षक, प्रभारी डीएम, एसपी, सिटी मजिस्ट्रेट, एडीएम ने बंदियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बंदी नहीं माने। पथराव में प्रभारी डीएम, जेल अधीक्षक समेत समेत कई लोग घायल हो गए। डीआईजी जेल भी दोपहर बाद पहुंचे।

रविवार सुबह लगभग साढ़े आठ बजे जिला जेल के बंदी अतुल कुमार का डॉक्टर नीरज और बंदी रक्षक संतोष से विवाद हो गया। बंदी अपने साथी को लोहिया अस्पताल इलाज के लिए रेफर करने की बात कह रहे थे जिसको लेकर कहासुनी हुई। इसी बीच बंदी उग्र हो गए और नारेबाजी करते हुए बैरकों से बाहर निकल आए। बंदियों ने प्रांगण में आग लगाकर पथराव शुरू कर दिया।

बंदी जेलर व अधीक्षक के कक्ष के ऊपर चढ़ आए और पथराव करने लगे। सूचना पर कोतवाल फतेहगढ़ अनूप कुमार निगम पहुंचे, मगर पथराव के चलते पीछे हट आए। कुछ देर में एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम भी पहुंचे, लेकिन अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। एसपी सुभाष सिंंह बघेल फोर्स के साथ पहुंचे।

उन्होंने बंदियों को समझाने का प्रयास किया। कुछ देर पथराव बंद हुआ। इसके बाद बंदी फिर पत्थर फेंकने लगे। पत्थर जेल के बाहर आकर गिर रहे थे। उसी दौरान प्रभारी डीएम एनपी पांडेय आए जो बाल-बाल बच गए। उन्हें बॉडी प्रोटेक्टर व हेलमेट पहनाकर जेल के अंदर पहुंचाया गया। बंदी रुक-रुककर पथराव करते रहे। इसी बीच जेल अधीक्षक राकेश कुमार पत्थर लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए।

उन्हें इलाज के लिए लोहिया अस्पताल भेजा गया। बंदी रक्षक संतोष कुमार का भी सिर फूट गया। कोतवाल अनूप कुमार निगम एसपी को बचाने के चक्कर में घायल हो गए। उन्होंने प्राइवेट अस्पताल में उपचार कराया। पत्थर लगने से प्रभारी डीएम एनपी पांडेय के पैर में चोट आई। उन्हें भी लोहिया इलाज के लिए भेजा गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने चले गए।

दोपहर बाद डीएम प्रकाश बिंदु भी लखनऊ जाते समय आधे रास्ते से वापस लौट आए। एसपी या डीएम ने कई चक्रों में बंदी रक्षकों से वार्ता की जिसके बाद उनकी मांगें मान ली गईं। जिला जेल के डाक्टर नीरज को हटाकर सीएमओ कार्यालय संबद्ध कर दिया गया। वहीं सेंट्रल जेल के डाक्टर विजय अनुरागी को यहां तैनात किया गया है। जेलर डीपी सिंह समेत चार बंदी रक्षकों को भी हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए।

चार बजे बंदियों को शांत करके बैरकों में भेज दिया गया। डीएम व एसपी ने बताया कि पूरे प्रकरण की कमेटी से जांच कराई जाएगी जो दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। बंदियों ने जो शिकायतें की हैं उनकी जांच होगी।

31 मार्च तक नोट बदलने की अनुमति क्यों नहीं?

रिजर्व बैंक ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया कि आखिर भारतीयों को 31 मार्च 2017 तक नोट बदलने की अनुमति क्यों नहीं दी गयी। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के दौरान लोगों को 31 मार्च तक नोट बदलने की अनुमति देने का आश्वासन दिया था।

केंद्रीय बैंक ने इस विषय पर सूचना के अधिकार कानून के तहत पूछे गये सवाल का जवाब देने से इनकार करते हुए कहा कि पारदर्शिता कानून के तहत सवाल सूचना की परिभाषा में नहीं आता।

प्रधानमंत्री ने आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा करते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया था कि वे 1,000 और 500 रुपये के नोट 31 मार्च तक बदल सकते हैं। बाद में यह फैसला किया गया है कि केवल प्रवासी भारतीयों के नोट 31 मार्च तक बदले जाएंगे।

नोट जमा करने की समयसीमा के बारे में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है।

अपने जवाब में रिजर्व बैंक ने नोट बदलने की सुविधा 31 मार्च तक केवल प्रवासी भारतीय तक सीमित करने के फैसले से संबंधित फाइल नोटिंग के बारे में कुछ भी बताने से मना कर दिया। उसने कहा कि यह देश के आर्थिक हित के खिलाफ होगा।

आवेदन में 31 मार्च तक भारतीयों के लिये पुराने नोट बदलने की अनुमति नहीं देने के कारण के बारे में जानकारी मांगी गयी थी। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया था कि लोगों को 31 मार्च तक पुराना नोट बैंकों में जमा करने की अनुमति होगी।

केंद्रीय जन सूचना अधिकारी सुमन रे ने कहा कि जो सूचना मांगी गयी है, वह आरटीआई कानून की धारा 2 (एफ) के तहत नहीं आता।

पूर्व सूचना अधिकारी शैलेष गांधी ने कहा कि आरटीआई कानून की धारा 8 (2) के तहत अगर जानकारी व्यापक रूप से जनहित में है तो उसके खुलासे से छूट होने पर भी उसे सार्वजनिक करने की अनुमति है।

बाबरी मस्जिद का मुद्दा सिर्फ अदालत से ही हल हो सकता है: कमेटी

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ने रविवार को कहा कि रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को आपसी बातचीत के जरिये हल नहीं किया जा सकता और इसका समाधान सिर्फ उच्चतम न्यायालय से ही हो सकता है।

कमेटी के संयोजक जफरयाब जीलानी ने आज लखनऊ में एक बयान में बताया कि कमेटी की यहां हुई एक बैठक में उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा अयोध्या विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने और जरूरत पड़ने पर उसमें मध्यस्थता करने की पेशकश को लेकर यह फैसला किया गया है कि बाबरी मस्जिद का मुद्दा सिर्फ अदालत से ही हल हो सकता है। बैठक में कहा गया कि अदालत के बाहर कई बार बातचीत नाकाम रही है और इस समय भी बातचीत से इस मुद्दे का कोई हल मुमकिन नहीं है।

जीलानी ने बताया कि सभा में यह भी महसूस किया गया कि पहले प्रधानमंत्री निष्पक्ष हुआ करते थे, किन्तु इस समय तो प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री स्वयं एक पक्षकार हैं जो भाजपा के राम मंदिर आन्दोलन के हिमायती तथा कार्यकर्ता हैं। इनसे क़तई यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह मुसलमानों के साथ मस्जिद के मसले पर न्याय करेंगे।

सभा में यह भी महसूस किया गया कि अगर उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या अन्य न्यायाधीश दीवानी की धारा 89 के अर्न्तगत मुद्दे के हल के लिये प्रयास करें तो इस प्रयास में मुस्लिम पक्ष अवश्य सहयोग करेगा।

मालूम हो कि उच्चतम न्यायालय ने पिछले दिनों कहा था कि अयोध्या का विवाद बेहद संवेदनशील है और इसे विभिन्न पक्षों को आपसी बातचीत से सुलझाना चाहिये।

अदालत ने यह भी कहा था कि वह इस मामले में मध्यस्थता करने को भी तैयार है।

यदि किसी को मेरे शब्दों से कोई आपत्ति है तो मैं खेद प्रकट करता हूं: विक्रम सैनी

गाय को मां न मानने वालों के हाथ-पैर तोड़ने की बात करने वाले भारतीय जनता पार्टी के विधायक विक्रम सैनी का कहना है कि उन्होंने 'ठीक बयान दिया है'।

बीबीसी से बातचीत में उत्तर प्रदेश के खतौली से भाजपा विधायक और मुजफ्फरनगर दंगों में अभियुक्त रह चुके विक्रम सैनी ने कहा कि उन्हें अपने बयान पर कोई अफ़सोस नहीं है।

विक्रम सैनी ने एक कार्यक्रम में कहा था, ''जिन लोगों को 'वंदे मातरम' और 'भारत माता की जय' कहने में दिक्कत है और जो लोग गाय को अपनी माता नहीं मानते हैं और उनका वध करते हैं उनके हाथ-पैर तोड़ने का मैंने वादा किया था। हम अपना वादा पूरा करने के लिए तैयार हैं। हमारे पास युवा कार्यकर्ताओं की टीम है जो ऐसे व्यक्तियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी।''

अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए विक्रम सैनी ने कहा, ''मैंने ठीक बयान दिया है।'' उन्होंने सवाल किया, ''मेरे कहने का मतलब है कि जो गाय काटेगा या बहू-बेटी का अपमान करेगा उसके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज करवाकर जेल भिजवाया जाएगा।''

उन्होंने कहा, ''सपा सरकार में गुंडागर्दी हो रही थी। गायों का कटान हो रहा था। मैंने लोगों से वादा किया था कि मैं ये नहीं होने दूंगा और मैं अपना वादा पूरा करूंगा?''

अपने बयान का बचाव करते हुए विक्रम सैनी ने कहा, ''जो हमारी मां का अपमान करेगा हम उसका क्या करें? जब बात मां के अपमान की आती है तो कोई क़ानून थोड़े ही देखा जाता है?''

इस सवाल पर कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने अपने नेताओं और मंत्रियों से भाषा में संयम बरतने के लिए कहा है तो विक्रम सैनी ने कहा, ''मेरे कहने का मतलब था कि मेरी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। मैंने गांव की भाषा बोली। मेरे कहने का मतलब था कि ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाकर जेल भेजा जाएगा। यदि किसी को मेरे शब्दों से कोई आपत्ति है तो मैं खेद प्रकट करता हूं।''

जब उनसे पूछा गया कि यूपी में मीट का संकट है और लोगों को मुर्गे-बकरे का मांस भी नहीं मिल पा रहा है तो उन्होंने कहा, ''जिन्हें मुर्गा या बकरा खाना हो वो हमारे गांव आ जाएं यहां बहुत मुर्गे-बकरे हैं।''

विक्रम सैनी ने ये भी कहा कि अब वो मंच से संभल कर बोलेंगे।

अश्लील क्लिप मामले में केरल के मंत्री शशिन्द्रन का इस्तीफ़ा

केरल के परिवहन मंत्री एके शशिन्द्रन ने एक कथित अश्लील ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद रविवार को अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, ये ऑडियो क्लिप एक मलयालम टीवी चैनल पर रविवार दोपहर बाद प्रसारित हुई थी।

इस ऑडियो क्लिप के जारी होने के कुछ ही घंटों बाद कोझिकोड में मौजूद शशिन्द्रन ने आनन-फ़ानन में संवाददाता सम्मेलन बुलाकर अपने इस्तीफ़े की घोषणा कर दी।

केरल में मार्क्सवादी पार्टी के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार सता में है। इस गठबंधन में साझेदार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता शशिन्द्रन ने कहा कि वह मुख्यमंत्री पी विजयन को पहले ही इस बारे में बता चुके हैं और मुख्यमंत्री ने उनका इस्तीफा नहीं मांगा है।

मंत्री ने कहा कि उनके इस्तीफ़े को अपराध स्वीकार करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शशिन्द्रन ने कहा, ''मेरा इस्तीफ़ा राजनीति में नैतिकता कायम रखने के लिए है।''

शशिन्द्रन ने कहा कि उन्होंने किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं किया है और वो किसी भी जाँच का सामना करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा, ''उचित जाँच ज़रूरी है। सारे तथ्य सामने आने चाहिए। मैं किसी भी जाँच का स्वागत करता हूँ।''

करीब 10 महीने पुरानी विजयन सरकार में पूर्व उद्योग मंत्री ईपी जयराजन के बाद शशिन्द्रन दूसरे मंत्री हैं जिन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा है।

इस बीच, मुख्यमंत्री विजयन ने कहा है कि वह आरोपों को 'गंभीरता' से देखेंगे।

उत्तराखंड की बीजेपी सरकार के दस में से चार मंत्रियों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले

उत्तराखंड की बीजेपी सरकार अपने नवनिर्वाचित विधायकों पर लगे आपराधिक मामलों को वापस लेने पर विचार कर रही है।

राज्य के 70 विधायकों में से 22 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं जिनमें से 17 बीजेपी के हैं, चार कांग्रेस के और एक निर्दलीय है।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने एक स्थानीय अख़बार से कहा था कि कई मामले ऐसे हैं जिन पर पुनर्विचार किया जाएगा और इनमें विधायकों पर दर्ज आपराधिक मामले भी हैं।

बीजेपी का कहना है कि उसके विधायकों पर दर्ज आपराधिक मामले राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं। बीजेपी प्रवक्ता और विकासनगर से विधायक मुन्ना सिंह चौहान इस बयान की पुष्टि करते हैं।

मुन्ना सिंह चौहान का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में ग़लत मुकदमों का सामना करना ही पड़ता है और इसलिए इनकी समीक्षा की ही जानी चाहिए।

बीजेपी के 10 मंत्रियों (मुख्यमंत्री सहित) में से चार पर आपराधाकि मामले दर्ज हैं।

इनमें हरक सिंह रावत पर दो, मदन कौशिक पर दो, सुबोध उनियाल पर एक और अरविंद पांडे पर 12 मामले दर्ज हैं।

गदरपुर के विधायक और कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे उन विधायकों की सूची में भी सबसे ऊपर हैं जिन पर गंभीर मामले दर्ज हैं।

अरविंद पांडे पर दर्ज 12 मामलों में हत्या (आईपीसी की धारा 302) और डकैती (आईपीसी की धारा 395) के आरोप भी शामिल हैं।

पिछले साल पुलिस के घोड़े शक्तिमान की टांग तोड़ने के आरोपों से सुर्खियों में आए मसूरी के विधायक गणेश जोशी पर कुल 5 मामले दर्ज हैं।

गणेश जोशी पर स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल के इस्तेमाल (आईपीसी की धारा 354) के भी आरोप हैं।

गणेश जोशी अकेले नहीं हैं। सहसपुर के बीजेपी विधायक सहदेव पुंडीर भी महिला के साथ बदसलूकी करने के आरोप का सामना कर रहे हैं। पुंडीर इसके अलावा दो और केसों में असामी हैं।

अरविंद पांडे से हत्या और डकैती के मामले वापस लिए जाने के सवाल पर मुन्ना सिंह चौहान कहते हैं कि सिर्फ़ ऐसे मामले वापस लिए जाएंगे जो दुर्भावना के तहत दर्ज करवाए गए हैं।

लेकिन मसूरी के विधायक पर धारा 354 के तहत दर्ज मामले पर उनके सुर बदल जाते हैं।

मुन्ना सिंह चौहान कहते हैं कि उन पर मुकदमे (घोड़े शक्तिमान को हानि पहुंचाना समेत) तो साफ़ तौर पर दुर्भावना के तहत दर्ज करवाए गए हैं।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय पर भी दंगा करने और सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने के मामले में आईपीसी की धारा 332, 353, 147, 148, 524, 149 के तहत एक मामला दर्ज है।

वह पूछते हैं कि क्या सरकार उन पर दर्ज मुक़दमे भी वापस लेगी? उपाध्याय कहते हैं, ''इस सरकार को आए चार दिन भी नहीं हुए और इसने अराजकता फैलानी शुरू कर दी है जो अभूतपूर्व बहुमत इन्हें मिला है ये इसका अपमान है।''

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अरविंद पांडे को विद्यालयी शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, पंचायती राज, खेल और युवा कल्याण मंत्रालय दिए हैं।

पिछले साल ही अनुसूचित जनजाति के सरकारी अधिकारी से बदसलूकी और मारपीट के आरोप में अरविंद पांडे ने जेल भी काटी थी। अब वह उनसे कहीं बड़े अधिकारियों को काम करने का सलीका सिखाएंगे।

कांग्रेस के चार विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

जसपुर से विधायक आदेश सिंह पर धार्मिक भावनाएं भड़काने और सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने के लिए आईपीसी की धारा 147, 332, 353, 153ए, 295ए, 268 के तहत एक मामला दर्ज है।

चकराता के विधायक प्रीतम सिंह पर दंगा करने और सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने के मामले में आईपीसी की धारा 147, 149, 332, 353, 336, 504 के तहत एक मामला दर्ज है।

केदारनाथ सीट से विधायक मनोज रावत पर दंगा करने और शांति भंग करने के मामले में आईपीसी की धारा 147, 323, 504, 506, 509 के तहत एक मामला दर्ज है।

पुरोला के विधायक राजकुमार पर उत्तराखंड रिप्रेज़ेंटेशन ऑफ़ पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 2ए, 2बी के तहत एक मामला दर्ज है।