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पंजाब चुनाव: ओपिनियन पोल्स में अकाली-भाजपा सत्ता से बाहर

पंजाब में शिरोमणी अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सरकार को कांग्रेस और आम आदमी पार्टी कड़ी टक्कर देते बताए जा रहे हैं। पिछले विधान सभा चनाव में पंजाब की कुल 117 विधान सभा सीटों  में से अकाली दल को 56 और उसकी सहयोगी भाजपा को 12 सीटों पर जीत मिली थी। 68 सीटें जीतकर अकाली-भाजपा गठबंधन ने राज्य में लगातार दूसरी बार सरकार बनायी।

वहीं कांग्रेस को 2012 में 46 सीटों पर ही जीत मिल सकी और वो सत्ता में वापसी नहीं कर सकी। पंजाब विधान सभा 2012 के चुनाव में तीन निर्दलीय उम्मीदवारों को भी जीत मिली थी।

पंजाब में कई दशकों से सत्ता की लड़ाई मुख्यतः अकाली दल और कांग्रेस के बीच रही है, लेकिन साल 2012 में बनी आम आदमी पार्टी ने 2014 के लोक सभा चुनाव में चार सीटों पर जीत हासिल करके पूरे देश को चौंका दिया था।

संसदीय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने देश में सबसे पहले पंजाब में खाता खोलकर खुद को राज्य की राजनीति में नए खिलाड़ी के तौर पर पेश कर दिया था। दिल्ली में प्रचण्ड बहुमत से सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी ने पंजाब और गोवा विधान सभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

वहीं कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में चुनाव लड़ा है। माना जा रहा है कि सत्ताविरोधी आक्रोश का असर अकाली-भाजपा के प्रदर्शन पर पडे़गा जिसका लाभ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को मिलेगा।

उत्तर प्रदेश में 2017 विधान सभा चुनाव के ओपिनियन पोल की भविष्यवाणियां

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के लिए सातवें और आखिरी चरण का मतदान बुधवार (आठ मार्च) को समाप्त हुआ। जिन पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव हुए हैं उनमें सबसे ज्यादा निगाहें यूपी के नतीजों पर ही हैं। राज्य में समाजवादी पार्टी सत्ता में है जो चुनाव से पहले ही अंदरूनी कलह की वजह से सुर्खियों में रही।

साल 2012 में सपा को अकेले दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ था। 2012 के विधान सभा चुनाव में सपा को 224, बसपा को 80 और भाजपा को 47 सीटों पर जीत मिली थी।

मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा ने बहुजन समाज पार्टी की मायावती की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। वहीं भारतीय जनता पार्टी करीब डेढ़ दशकों से राज्य की सत्ता से बाहर है।

चुनाव से पहले भाजपा, बसपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन तीनों ही पूर्ण बहुमत पाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन भिन्न-भिन्न ओपिनियन सर्वे अलग-अलग पार्टी को राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने का अनुमान जता रहे हैं।

जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल के मंत्रियों ने यूपी चुनाव में अपनी ताकत झोंकी है उससे भाजपा अच्छे प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त है।

वहीं अंदरूनी कलह से उबरी सपा को अखिलेश यादव की छवि और पार्टी की सेकुलर छवि पर भरोसा है।

बसपा प्रमुख मायावती ने इस चुनाव में सबसे ज्यादा मुसलमानों को वोट दिया है इसलिए उन्हें उम्मीद है कि दलित-मुस्लिम समीकरण के बदौलत वो दोबारा सत्ता में वापस कर सकेंगी।

2007 अजमेर ब्लास्ट केस: स्वामी असीमानंद बरी

2007 में हुए अजमेर ब्लास्ट केस में NIA कोर्ट ने स्वामी असीमानंद को बरी कर दिया गया है, जबकि तीन आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। लेकिन अभी सजा का ऐलान नहीं हुआ है। इस मामले में कुल 9 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। जिन लोगों को दोषी पाया गया है उसमें सुनील जोशी, भावेश और देवेंद्र गुप्ता का नाम शामिल है।

सुनील जोशी की पहले ही मौत हो चुकी है। वहीं जिन लोगों को बरी किया गया है उसमें स्वामी असीमानंद के अलावा चंद्रशेखर का नाम शामिल है।

यह ब्लास्ट अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह पर हुआ था। यह हमला 11 अक्टूबर 2007 को हुआ था, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई थी। वहीं 17 लोग जख्मी हुए थे। 2011 में केस को NIA को सौंप दिया गया था।

उससे पहले 2007 तक सिर्फ दो FIR रजिस्टर की गई थी। असीमानंद के अलावा इस केस में देवेंद्र गुप्ता, चंद्रशेखर लेवी, मुकेश वासनी, भारत मोहन रतेशवर, लोकेश शर्मा और हर्षद सोलंकी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।

मारे गए संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह के आईएसआईएस से लिंक के सबूत नहीं मिले: एटीएस

उत्तर प्रदेश पुलिस ने बुधवार (8 मार्च) को स्पष्ट किया कि राजधानी लखनऊ में तड़के मारे गए संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह के तार अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से जुड़े थे, इसका कोई प्रमाण नहीं है। हालांकि वह आईएसआईएस के साहित्य और विचारों से स्वत: प्रेरित था।

उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) दलजीत चौधरी ने मीडिया से कहा, ''इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि सैफुल्लाह के आईएसआईएस से संबंध थे। आज के युग में कोई भी युवा आईएसआईएस के बहकावे में आ सकता है। इंटरनेट, सोशल मीडिया के माध्यम से वे प्रेरित हो जाते हैं।''

मध्यप्रदेश में भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में हुए विस्फोट के बाद गिरफ्तार तीन संदिग्ध आतंकी, उसके बाद कानपुर और इटावा में संदिग्धों की गिरफ्तारियां तथा सैफुल्लाह के साथ मुठभेड़ का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार संदिग्ध आतंकियों और सैफुल्लाह के आईएसआईएस से जुड़े होने का हमारे पास कोई प्रमाण नहीं है।

उन्होंने कहा, ''हम नहीं कहते कि वह किसी से जुड़े था। वह नेट सामग्री के प्रभाव में आ जाते हैं और अपना आचरण और संकल्प उसी तरह करने लगते हैं। इसी प्रभाव में इन सभी ने काम करने का विचार किया और धीरे-धीरे करने की कोशिश की। वह आईएस-खोरासान के नाम से अपनी पहचान बनाना चाह रहे थे। उन्होंने छोटी घटनाओं का प्रयास किया, मगर नाकाम रहा। मध्य प्रदेश की घटना के बाद उनकी असली गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली।''

जब सवाल किया गया कि आईएस-खोरासन माड्यूल का प्रमुख कौन था, तो चौधरी ने बताया कि सभी संदिग्ध आतंकियों का नेता अतीक मुजफ्फर था।

चौधरी ने बताया कि सैफुल्लाह की जब आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने घेराबंदी की तो वह शहादत की बात करने लगा। उसे आत्मसमर्पण के लिए राजी करने के काफी प्रयास किये गये, लेकिन वह लगातार गोलीबारी करता रहा। एटीएस ने भी जवाबी फायरिंग की और अंत में सैफुल्लाह मारा गया। उन्होंने बताया कि ठाकुरगंज के मकान में सैफुल्लाह के साथ तीन अन्य युवक रहते थे। ट्रेन विस्फोट के बाद पकडे गये संदिग्ध आतंकियों से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर कानपुर, औरैया और लखनऊ में छापेमारी की गयी।

चौधरी ने बताया कि संदिग्धों के पास बरामद लैपटॉप की जांच करने पर पता चला कि वे लगातार आईएसआईएस के साहित्य का अध्ययन करते थे। इंटरनेट से ही उन्होंने असलहा और बम बनाना सीखा। इन्हें कहीं बाहर से धन नहीं मिलता था बल्कि धन की व्यवस्था उन्होंने खुद की थी। उन्होंने बताया कि कई जगह छापेमारी के बाद गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन दो संदिग्ध अभी भी बाकी हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

यह पूछने पर कि उत्तर प्रदेश पुलिस को माड्यूल की जानकारी किस राज्य की ओर से मुहैया करायी गयी, तो चौधरी ने कहा कि कई राज्यों और एजेंसियों से जानकारी आयी थी लेकिन वह किसी का नाम नहीं बताएंगे। इस सवाल पर कि क्या बाराबंकी के मशहूर देवाशरीफ सहित प्रदेश की दरगाहों और अन्य धार्मिक स्थानों पर यह माड्यूल हमले की फिराक में था, चौधरी ने स्पष्ट कहा, ''यह कहना गलत होगा। लक्ष्य पर दरगाहें आदि थीं, इस बारे में ना तो किसी संदिग्ध ने बयान दिया है और ना ही कोई प्रमाण है।''

इस सवाल पर कि पकड़े गये संदिग्ध आपस में भाई या रिश्तेदार हैं क्या, चौधरी ने कहा कि आपस में कुछ तो भाई और रिश्तेदार हैं, लेकिन साथ में कुछ दोस्त भी हैं। जब पूछा गया कि क्या सभी संदिग्ध नौसिखिये हैं, चौधरी ने कहा, ''ये नहीं कहेंगे कि नौसिखिये हैं। जिस ढंग से उनके पास हथियार और गोला बारूद सामग्री, बम बनाने का सामान मिला है, जिस ढंग से वे स्वत: प्रेरित थे और कट्टर थे, उनको नौसिखिया नहीं कहा जा सकता। आखिर ट्रेन विस्फोट तो उन्होंने कर ही दिया।''

चौधरी ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस ने पिपरिया से उत्तर प्रदेश के रहने वाले तीन संदिग्धों दानिश अख्तर उर्फ जफर, सैयद मीर हुसैन उर्फ हजमा और अतीक मुजफ्फर उर्फ अल कासिम को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि लखनऊ में मारे गये संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह के पास से आठ पिस्टल, चार चाकू, 32 बोर के 630 जिन्दा कारतूस, 71 खोखा राउण्ड, 45 ग्राम सोना, तीन मोबाइल, बैंकों की चेक बुक, एटीएम कार्ड तथा पैन कार्ड, सिम कार्ड, दो वाकी टाकी सैट, बम बनाने का सामान, तीन पासपोर्ट, डेढ़ लाख रुपए नकद, काले रंग के कपड़े का बैनर बरामद किया गया।

लखनऊ: संदिग्‍ध आतंकी से ठाकुरगंज इलाके में चल रही मुठभेड़

उत्तर प्रदेश में एक संदिग्ध आतंकी से मुठभेड़ जारी है। उस संदिग्ध आतंकी को यूपी ATS ने एक घर में घेर लिया है। यह मुठभेड़ लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में चल रही है। यह मुठभेड़ पिछले आधे घंटे से जारी है।

एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस दलजीत चौधरी ने कहा, ''यूपी ATS ने दोपहर को यह ऑपरेशन लॉन्च किया है। संदिग्ध आतंकी हाजी कॉलेनी के ठाकुर गंज इलाके में छिपा हुआ है। उसने ATS पर हमला किया था जिसके बाद फोर्स ने हमला किया। हम लोग उसको पकड़ने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।''

चौधरी ने आगे कहा कि उनको लगता है कि संदिग्ध लखनऊ का ही रहने वाला है। उसके पास हथियार भी बताए जा रहे हैं।

चौधरी ने कहा कि वह उसको जिंदा पकड़कर पूछताछ करना चाहते हैं।

इस मामले पर एडीजी दलजीत चौधरी ने कहा, ''हम लोगों को उम्मीद है कि एक ही शख्स छिपा हुआ है। इस मामले के बारे में जानकारी राज्य के बाहर से आई थी।''

ठाकुरगंज पुराने लखनऊ का इलाका है और चौक, नक्‍खास जैसे बाजारी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। संकरी गलियों की वजह से संदिग्‍धों को पकड़ने में और परेशानी आ रही है।

भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में मंगलवार की सुबह विस्फोट हुआ था। उस धमाके में छह लोग जख्मी हो गए थे। बताया गया था कि किसी मोबाइल में हुए धमाके से हादसा हुआ था। हालांकि, मध्यप्रदेश के एक मंत्री ने कहा था कि धमाके के बाद ट्रेन से बारूद की सी गंध आ रही थी।

यूपी में कल विधानसभा चुनाव के लिए आखिरी चरण का मतदान होना है। हालांकि, लखनऊ में वोटिंग पहले ही हो चुकी है।

डीयू प्रोफेसर जी एन साईबाबा और 5 अन्य उम्रकैद की सजा

छत्तीसगढ़ कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने मंगलवार को डीयू प्रोफेसर जीएन साईबाबा को उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा पांच अन्य को भी प्रोफेसर के साथ ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, जबकि एक अन्य दोषी टिरके को 10 साल की जेल हुई।

माओवादियों के साथ संबंध रखने के आरोप में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए साईबाबा को मंगलवार सुबह महाराष्ट्र के गढ़चिरौली कोर्ट ने दोषी करार दिया था।

गढ़चिरौली कोर्ट ने साईबाबा और जेएनयू स्टूडेंट हेम मिष्ठा समेत 6 आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) एक्ट की धारा 13, 18, 20, 38, 39 और आईपीसी की धारा 120 B के तहत दोषी करार दिया था।

प्रोफेसर साईबाबा पोलियो से ग्रसित हैं और उनका 90 फीसदी शरीर अक्षम है। दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर जीएन साईबाबा को महाराष्ट्र पुलिस ने मई 2014 में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उनपर प्रतिबंधित संगठन भाकपा-माओवादी का कथित सदस्य होने, उन लोगों को साजोसामान से समर्थन देने और भर्ती में मदद करने के आरोप लगाया था।

साधना गुप्‍ता ने कहा, अब हम पीछे नहीं हटेंगे, मेरा बहुत अपमान हुआ है

मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्‍नी साधना गुप्‍ता राजनीति में आने की इच्‍छा रखती थी। हालांकि अब वह खुद की बजाय बेटे प्रतीक को राजनीति में देखना चाहती है।

एएनआई को दिए इंटरव्‍यू में साधना ने कहा कि ''नेताजी ने नहीं आने दिया (राजनीति में), पर हां बैकग्राउंड में काम करते रहे। मगर अब मैं राजनीति में नहीं आना चाहती, लेकिन हां मैं अपने बेटे प्रतीक को राजनीति में जरूर देखना चाहती हूं।''

साधना ने यह भी कहा कि उनका बहुत अपमान हुआ है। उन्‍होंने कहा, ''अब हम पीछे नहीं हटेंगे, मेरा बहुत अपमान हुआ है।''

साधना के मुताबिक, अब वक्‍त बदल गया है और आपको अपने काम के बारे में बताना पड़ता है। उन्‍होंने कहा, ''मैं एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ी, जहां मेरे पिता कहते थे कि किसी को अच्‍छे काम का ढिंढोरा नहीं पीटना चाहिए, लेकिन अब वक्‍त बदल गया है।''

बीते दिनों परिवार में पार्टी पर नियंत्रण को लेकर छिड़े वार पर साधना कहती है, ''हां, परिवार में जो हुआ, उससे बुरा तो लगता ही है, मगर मैं किसी को कुछ नहीं कहना चाहती (अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को लेकर)।''

साधना कहती है कि काश उनके पास पहले ताकत होती। उन्‍होंने कहा, ''एक मुख्‍य सचिव का तबादला हुआ, लोगों ने कहा कि मैं उसके पीछे थी, ये गलत है, हालांकि मैं सोचती हूं कि मैं उतनी ताकतवर होती।''

साधना मानती है कि शिवपाल यादव के साथ गलत हुआ। उन्‍होंने कहा, ''उनका अपमान नहीं होना चाहिए था, उनकी गलती नहीं थी। उन्‍होंने नेताजी और पार्टी के लिए बहुत कुछ किया है।''

मुलायम को लेकर साधना ने कहा, ''चाहे कुछ भी हो, किसी को नेताजी का अपमान नहीं करना चाहिए था, उन्‍होंने ही पार्टी बनाई और उसे सींचा।''

अखिलेश के साथ अपने संबंधों को साधना पहले से बेहतर पाती है। उनके मुताबिक, ''1 जनवरी के बाद से अखिलेश के साथ मैंने इतनी ज्‍यादा बातें की हैं, जितनी पिछले पांच सालों में नहीं की। मुझे नहीं पता कि अखिलेश को किसने गुमराह किया। वह नेताजी और मेरा, बहुत सम्‍मान करता है।''

मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्‍ता की मुलाकात 1989 में हुई थी। मुलायम ने पहली पत्‍नी मालती देवी की मृत्यु के चार साल बाद, 2007 में सुप्रीम कोर्ट के सामने दिए एक शपथ-पत्र में साधना गुप्ता को पत्नी और प्रतीक को बेटा माना था।

गुजरात में अमित शाह के काफिले पर अंडे फेंके गए

बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह के काफिले पर अंडे फेंके जाने की खबर है। बताया जाता है कि पाटीदार समुदाय के लोगों ने शाह के काफिले को निशाना बनाया।

यह घटना सोमवार (6 मार्च) रात की है। हिंदुस्‍तान टाइम्‍स ने सूत्रों के हवाले से रिपोई दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले अमित शाह सड़क मार्ग से सोमनाथ मंदिर जा रहे थे। इसी दौरान कुछ युवकों ने उनके काफिले पर अंडे फेंके।

बीजेपी के अन्‍य नेताओं पर भी पिछले कुछ महीनों में इसी तरह के हमले हुए हैं। पिछले दिनों ही मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा पर एक युवक ने जूता फेंका था। भाजपा के युवा मोर्चे के अध्‍यक्ष ऋत्विज पटेल को मेहसाणा में रैली में एक युवक ने थप्‍पड़ मार दिया था। वहीं सूरत में उनकी रैली में अंडे फेंके गए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर गुजरात पर हैं। वे भी बुधवार (8 मार्च) को सोमनाथ मंदिर जाएंगे। पीएम बनने के बाद वे पहली बार सोमनाथ मंदिर जा रहे हैं। इससे पहले वे साल 2014 में लोकसभा चुनावों से पहले गए थे। उनके दौरे में किसी तरह ही अवांछित गतिविधि ना हो इसे रोकने के लिए सुरक्षा व्‍यवस्‍था को कड़ा किया गया है। तीन से आठ मार्च तक सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी गई है।

पाटीदार समुदाय आरक्षण की मांग कर रहा है। इस आंदोलन का नेतृत्‍व हार्दिक पटेल कर रहे हैं। गुजरात में लगभग एक साल से ज्‍यादा समय से पाटीदार नौकरियों और सरकारी संस्‍थाओं में आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

गुजरात में 1998 से बीजेपी की सरकार है और पाटीदार आंदोलन के चलते उस पर दबाव बढ़ा है। इसके चलते प्रधानमंत्री मोदी पार्टी को यहां पर फिर से पटरी पर लाने में जुटे हैं। पाटीदार आंदोलन के बाद से वे कई बार गुजरात का दौरा कर चुके हैं। पीएम का वर्तमान दौरा भी इसी दिशा में एक प्रयास बताया जाता है। पटेलों की नाराजगी को दूर करने के लिए ही भाजपा ने पिछले साल आनंदीबेन पटेल को हटाकर विजय रुपाणी को मुख्‍मयंत्री बनाया था। नितिन पटेल को उपमुख्‍यमंत्री बनाया था।

गुजरात विधानसभा में इसी साल चुनाव होने हैं। बीजेपी पटेलों के साथ ही दलित अत्‍याचारों के मुद्दे पर भी घिरी हुई है।

रेप के आरोपी गायत्री प्रजापति अभी तक कैबिनेट में क्यों हैं: गवर्नर

उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और बलात्कार के आरोपी गायत्री प्रजापति को लेकर अखिलेश यादव सरकार की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही है। चुनाव के दौरान विपक्षी पार्टियों द्वारा निशाने पर रहने के बाद राज्य के गवर्नर राम नाईक ने भी प्रजापति के कैबिनेट में बने रहने पर सवाल उठाए हैं।

राज्यरपाल राम नईक ने सीएम अखिलेश यादव को चिट्टी लिखकर रेप के आरोपी गायत्री प्रजापति के कैबिनेट में बने रहने पर सफाई मांगी हैं। इससे पहले शनिवार को गायत्री प्रजापति का पासपोर्ट रद्द कर दिया था। इसके साथ ही गायत्री समेत 6 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गायत्री प्रजापति चुनाव नतीजे वाले दिन (11 मार्च) को खुद को सरेंडर कर सकते हैं।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर दलजीत चौधरी ने शनिवार को बताया, ''बलात्कार के आरोपी मंत्री गायत्री प्रजापति का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है।'' इसके साथ ही प्रजापति और छह अन्य के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किए गए हैं।

दलजीत चौधरी ने बताया कि प्रजापति के लिए लुक आउट नोटिस जारी किया गया है। प्रजापति की तलाश के लिए लखनऊ, कानपुर और अमेठी में छापे मारे गए हैं। इतना ही नहीं, स्पेशल टास्क फोर्स को भी प्रजापति के तलाशी अभियान में लगाया गया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने सपा नेता के खिलाफ कथित सामूहिक बलात्कार और अपने साथियों के साथ मिलकर पीड़िता की बेटी का उत्पीड़न करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज की गई। पुलिस ने जब गिरफ्तारी के लिए उनके घर पर रेड मारी तो वह गायत्री प्रजापति नहीं मिले। इसके बाद से वह फरार है।

गौरतलब है कि गायत्री प्रजापति पर जमीन कब्जे, खनन घोटाला, आय से अधिक संपत्ति, बलात्कार और मारपीट के कई आरोप लग चुके हैं। इन्हीं आरोपों की वजह से वे मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए गए थे, लेकिन मुलायम सिंह यादव के दबाव में अखिलेश को प्रजापति को वापस लाना पड़ा।

इसके बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन के बाद अमेठी से टिकट पाने में भी गायत्री कामयाब रहे। विधानसभा चुनाव में प्रजापति अमेठी से ताल ठोंक रहे थे।

सीएम अखिलेश यादव ने उनके समर्थन में प्रचार भी किया था जिसके बाद से विपक्षी पार्टियों ने उन पर निशाना साधा था।

राहुल गांधी ने चायवाले की बेटी से कहा, तुम तो मेरी बहन हो

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के अंतिम चरण के प्रचार के दौरान जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर दुद्धी क्षेत्र में चाय की दुकान चलाने वाले बनारसी और उनकी पत्नी मंजू के लिए रविवार (5 मार्च) कुछ खास था। बनारसी के यहां खास मेहमान जो आये। करीब डेढ़ बजे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का काफिला बनारसी की चाय की दुकान पर रूका।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि राहुल सुरक्षा घेरा तोडकर वाहन से उतरे और चाय मांगी। बनारसी और उनकी पत्नी पहले तो आश्चर्य में पड़ गये, लेकिन बाद में राहुल ने जब बातचीत शुरू की तो सामान्य हो गये। राहुल ने चाय की चुस्कियां भरते हुए बनारसी की पुत्री का नाम पूछा। बनारसी की बेटी ने जैसे ही बताया कि उसका नाम 'प्रियंका' है तो राहुल जोर से हंसे और बनारसी की बेटी से कहा, ''तुम तो मेरी बहन हो।'' यह कहकर उसे गले लगा लिया।

बातचीत के दौरान राहुल ने बनारसी के कामकाज और घर परिवार के बारे में जानकारी ली। राहुल को देखकर वहां भीड जमा हो गयी। राहुल ने उनसे भी बात की। कुछ उत्साही युवाओं ने राहुल के साथ 'सेल्फी' भी ली।

इससे पहले राहुल गांधी ने 4 मार्च को वाराणसी में उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी पत्‍नी डिंपल यादव के साथ रोड शो किया था। 5 मार्च को उन्‍होंने जौनपुर में रैली की। उत्‍तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस ने गठबंधन कर रखा है। कांग्रेस यहां पर 103 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

उन्होंने कहा, ''हम लोगों (सपा-कांग्रेस) के गठबंधन के बाद उनका (मोदी) चेहरा बदल गया है और अब वो नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में उन्हें इसका फायदा नहीं मिलने वाला है।''

राहुल ने कहा कि मोदी सिर्फ अमीरों का कर्ज माफ करते हैं, किसानों का नहीं। 'वो (मोदी) जहां जाते हैं, रिश्ते बनाते हैं, लेकिन रिश्ते बोलने से नहीं, निभाने से बनते हैं।'

नोटबंदी के फैसले को लेकर मोदी सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि काला धन रखने वाले किसी भी व्यक्ति को जेल में नहीं डाला गया। आज भी 94 फीसदी काला धन विदेश में है।