भारत

जम्मू-कश्मीर में एनकाउंटर करने गए जवानों पर स्थानीय लोगों का पत्थर-लाठी से हमला

शहर के बाहरी हिस्से तराल क्षेत्र में आज सुरक्षा बलों और एक मकान में घिरे हिज्बुल मुजाहिदीन के चार-पांच उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ में एक उग्रवादी ढेर हो गया।

आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि क्षेत्र में तलशी अभियान के लिए सेना के विशेष बल की तैनाती की गयी है। शाम में सुरक्षा बलों द्वारा मकान की घेराबंदी किए जाने के बाद मुठभेड़ शुरू हुई।

उन्होंने कहा कि एक पाकिस्तानी उग्रवादी का शव बरामद हो गया है और अन्य की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि मुठभेड़ स्थल पर प्रदर्शनकारियों के जमा होने के कारण इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है। उन्होंने सीआरपीएफ के एक जवान की राइफल छीन ली थी। सुरक्षा बलों ने मकान का आधा हिस्सा गिरा दिया है, लेकिन उग्रवादी तब भी उनपर गोलियां चला रहे थे। आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन का सदस्य बुरहान वानी इसी क्षेत्र का रहने वाला था।

अधिकारियों के मुताबिक, इलाके में छिपा हुआ एक आतंकी संगठन का टॉप कमांडर था जिसके बुरहान वानी से अच्छे संबंध थे। सर्च ऑपरेशन के दौरान ही आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग शुरू कर दी थी। सर्च ऑपरेशन को 42 राष्ट्रीय राइफल्स, जेएंडके पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और सीआरपीएफ के जवान चला रहे थे। इसी बीच इलाके के लोग धरना-प्रदर्शन करने निकल गए और उन्होंने गांव की तरफ जाने वाले कई रास्तों को ब्लॉक भी कर दिया।

अधिकारियों के मुताबिक, इसी दौरान एक जवान पर लाठी-डंडों से हमला कर उसकी बंदूक छीन ली गई।

वहीं सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब जवान अपने रास्ते पर थे तो उनपर मेनटाउन में पत्थरों और डंडो से हमला किया गया। इस पत्थरबाजी में सीआरपीएफ के 5 जवान घायल भी हो गए थे। एनकाउंटर के दौरान पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी थी कि वह एनकाउंट साइट के करीब न जाए।

इसी बीच शोपियां इलाके के चिलपोरा गांव में चलाए जा रहे ऑपरेशन को मिलिटेंट्स के भागने के बाद बंद करना पड़ा। मुठभेड़ की शुरुआत शुक्रवार (3 फरवरी) देर रात को शुरू हुई थी। आतंकियों को ढूंढने के लिए घर-घर जाकर सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे थे।

शत्रुघ्‍न सिन्‍हा का पीएम मोदी के रोड शो पर ताना, ये कैसा डिप्रेशन है?

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वाराणसी रोड शो अब भाजपा सांसद शत्रुघ्‍न सिन्‍हा के निशाने पर हैं। उन्‍होंने रोड शो को ताम झाम बताते हुए कहा कि यह एक तरह की हताशा को दिखाता है।

उन्‍होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''ये किसी किस्‍म की डिप्रेशन का भी संकेत देता है। ये कैसा डिप्रेशन है? अगर आप कॉन्‍फिडेंट हैं, आपके पास स्‍टार कैंपेनर्स हैं, जलेबी खाने वाले लीडर्स हैं तो ताम झाम का क्‍या मतलब है?''

एक दिन पहले ही 4 मार्च को केंद्रीय मंत्री और एनडीए के सहयोगी दल आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी रोड शो पर निशाना साधा था।

उन्‍होंने कहा था कि यह केवल विधानसभा चुनाव है, पीएम को रोड शो नहीं करना चाहिए। कुशवाहा ने समाचार एजेंसी एएनआर्इ से कहा कि मुझे लगता है कि पीएम को वाराणसी में रोड शो नहीं करना चाहिए। यह केवल विधानसभा चुनाव है।”

गौरतलब है कि कुशवाहा पहले यूपी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन बाद में मोदी से बैठक के बाद उन्‍होंने अपना फैसला वापस ले लिया। रालोसपा बिहार में प्रभाव रखती है और उसने भाजपा के साथ लोकसभा और बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा था।

भाजपा ने मोदी के चार मार्च के रोड शो के बारे में कहा कि यह रोड शो नहीं था। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि वे तो काशी विश्‍वनाथ मंदिर दर्शन को जा रहे थे लोग उनसे जुड़ गए और एक सैलाब बन गया।

वहीं कांग्रेस ने इस रोड शो को आचार संहिता का उल्‍लंघन बताया था। उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा का सपा-कांग्रेस गठबंधन और मायावती नीत बसपा से कड़ा मुकाबला है और पार्टी को उम्मीद है कि राज्य के पूर्वी हिस्से अच्छा प्रदर्शन करके वह 403 सीटों वाले विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा हासिल कर सकती है, लेकिन ऐसा हो पायेगा, कहना मुश्किल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान वाराणसी में रोड शो किया था जिस सीट से वह सांसद हैं। भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जबर्दस्त जीत हासिल की थी और अपना दल के साथ भाजपा गठबंधन को 80 में से 73 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।

तीन वर्ष बाद उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के लिए एक बार फिर भाजपा मोदी पर काफी हद तक निर्भर दिख रही है, लेकिन बीजेपी को सफलता मिलेगी या नहीं, ये वक्त बताएगा।

एसबीआई का झटका, मिनिमम बैलेंस नहीं रखा तो लेगा चार्ज

स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया ने खातों में न्‍यूनतम बैलेंस रखना अनिवार्य कर दिया है। बैंक ने गुरुवार (2 मार्च) को बताया कि न्‍यूनतम बैंलेंस ना रहने पर एक अप्रैल से पेनल्‍टी देनी होगी।

बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मेट्रोपॉलिटन शहरों में 5000, शहरी क्षेत्रों में 3000, अर्धशहरी क्षेत्रों में 2000 और ग्रामीण क्षेत्रों में खाते में कम से कम 1000 रखने होंगे। ऐसा नहीं होने पर एक अप्रैल से चार्ज लगाया जाएगा। चार्ज न्‍यूनतम बैलेंस और जितना पैसा रहेगा उसके अंतर के आधार पर वसूला जाएगा।

मेट्रोपॉलिटन शहरों में अगर अंतर 75 प्रतिशत से ज्‍यादा होगा तो चार्ज 100 रुपये और सर्विस टैक्‍स होगा। यदि कमी 50-75 प्रतिशत रहती है तो बैंक 75 रुपये और सर्विस टैक्‍स लेगा। 50 प्रतिशत से कम रहने पर 50 रुपये और सर्विस टैक्‍स लिया जाएगा।

इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में 20-50 रुपये के बीच वसूले जाएंगे। सार्वजनिक क्षेत्र का यह बैंक एक अप्रैल से एक महीने के अंदर ब्रांच से तीन से ज्‍यादा नकद लेनदेन करने पर 50 रुपये चार्ज करेगा। वर्तमान में भी यह चार्ज लगता है और इसका रीन्‍यू किया जाएगा।

एसबीआई अधिकारी ने बताया, ''नकद लेनदेन पर चार्ज पहले से वसूला जा रहा है। एक अप्रैल से यह नियम फिर से रीन्‍यू कर दिया जाएगा। यह कदम ग्राहकों को बैंक आने से रोकने के लिए है क्‍योंकि बैंक एटीएम से 10 बार मुफ्त में पैसे निकालने की सुविधा दे रहा है।''

हाल के दिनों में बैंकों ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं। एक मार्च से एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक ने एक महीने में चार बार से अधिक धन जमा करने या निकासी पर न्यूनतम 150 रुपए शुल्क लगाना शुरू किया।

एचडीएफसी बैंक ने एक परिपत्र में कहा कि यह शुल्क बचत के साथ-साथ वेतन खातों पर भी लगेगा। यह 1 मार्च से प्रभाव में आ गया है।

परिपत्र के अनुसार, साथ ही एचडीएफसी बैंक ने तीसरे पक्ष के लिये नकद लेनदेन की सीमा 25,000 रुपए प्रतिदिन तय की।

इसके अलावा नकद रखरखाव शुल्क वापस लिया जाएगा। ये सभी बुधवार (1 मार्च) से प्रभाव में आ गये हैं।

इस कदम को नकद लेन-देन को हतोत्साहित करने तथा डिजिटल भुगतान अभियान को गति देने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।

मणिपुर में भाजपा प्रत्‍याशी स्टिंग ऑपरेशन में रुपए बांटने की बात कहते पकड़े गए

23 फरवरी को मणिपुर में पीएम नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली से पहले वहां के एक भाजपा प्रत्‍याशी स्टिंग ऑपरेशन में रुपए बांटने की बात कहते पकड़े गए थे। इंडिया टुडे द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में मणिपुर बीजेपी के उम्‍मीदवार वोबा जोराम कैमरे पर यह बताते पाए गए थे कि कैसे उन्‍होंने चुनाव जीतने के लिए अपने क्षेत्र में वोटरों के बीच रुपए बांटने की योजना बना रखी है।

पिछले साल तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले जोराम को इस बार बीजेपी ने सेनापति जिले की माओ विधानसभा सीट से टिकट दिया है। हिडन कैमरा से किए गए स्टिंग में जोराम ने दावा किया था कि उन्‍होंने 'अपने प्रचार पर 1.02 करोड़ रुपए पहले ही खर्च कर दिए हैं।'

चुनाव आयोग द्वारा मणिपुर में हर उम्‍मीदवार द्वारा चुनावी खर्च की सीमा 20 लाख रुपए तय की गई है। स्टिंग में जोराम ने कहा था, ''अभी तक मैंने 1.02 करोड़ खर्च किए हैं। अगर मेरे पास दो करोड़ हैं तो मैं जीत जाऊंगा। मैं पक्‍का जीतूंगा। चार से पांच करोड़ में हो जाएगा। इतना ही लगेगा। पिछली बार (2012) में चार करोड़ लगे थे, 2007 में तीन करोड़। अब ज्‍यादा खर्चा होने लगा है। इस बार पक्‍का 5 करोड़ हो जाएगा।''

इस पर चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस थमा दिया था।

11 खिलाड़ियों को अवॉर्ड देकर मोदी सरकार ने तोड़ी आचार संहिता

आचार संहिता लागू होने के बावजूद केंद्र की मोदी सरकार ने उत्तर-पूर्वी राज्यों के खिलाड़ियों, जिनमें से 5 चुनाव वाले मणिपुर के हैं, को सम्मानित किया है। इसके बाद चुनाव आयोग ने केंद्र को आचार संहिता का उल्लंघन करने पर नोटिस जारी किया है।

मणिपुर में दो चरणों में 4 और 8 मार्च को मतदान होना है। राज्य में 4 जनवरी को ही आचार संहिता लागू हो गई थी। चुनाव के नतीजे 11 मार्च को जारी किए जाएंगे।

गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के विभाग को जारी नोटिस में चुनाव आयोग ने पूछा है कि खिलाड़ियों को सम्मानित करने से पहले उससे क्यों सलाह नहीं ली गई? चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं से चुनाव के दौरान सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचेगा और चुनावी मैदान का बैलेंस बिगड़ जाएगा।

28 फरवरी को आयोजित एक समारोह में रियो ओलिंपिक में शामिल होने वाले पूर्वोत्तर के 11 खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया था। मणिपुर से भारतीय महिला हॉकी की कप्तान पी.सुशीला चानू, एल बॉमबेयला देवी (निशानेबाजी), के चिंग्लेनसान सिंह और के कोठाजीत सिंह (पुरुष हॉकी) और सॉयकॉम मीराबाई चानू (वेटलिफ्टिंग) हो सम्मानित किया गया।

पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के विभाग का काम संभाल रहे राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह और गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू भी इस समारोह में मौजूद थे। शनिवार तक इन मंत्रियों को चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब देना है।

पुरुष पुलिसकर्मियों ने छात्रा को बाल पकड़कर सड़क पर घसीटा, घूसे मारे

दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेस में 22 फरवरी को एक सेमिनार के रद्द होने को लेकर एबीवीपी और एआईएसए के कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प हो गई। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने जेएनयू के छात्र उमर खालिद के बुलाने का विरोध किया था जिसके बाद सेमिनार को भी रद्द कर दिया गया। इसके बाद दोनों संगठनों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और आपस में भिड़ गए। बाद में छात्रों ने एबीवीपी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने छात्रों को लाठीचार्ज और अन्य तरीकों से नियंत्रित करने की कोशिश की।

दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा ने अंग्रेजी वेबसाइट द क्विंट को उस दिन की अपनी आपबीती बताई है। छात्रा ने बताया कि महिला पुलिसकर्मियों के होने के बावजूद भी उनके साथ पुरुष पुलिसकर्मियों ने मारपीट की।

छात्रा ने बताया, ''22 फरवरी की शाम को मैं 200 से ज्यादा छात्रों के साथ थी। हम लोग सड़क पर बैठे थे और नारे लगा रहे थे। एक महिला एसएचओ वहां आई और हमसे कहा कि यहां से चले जाओ। उसने हमें बोला कि हम पांच मिनट में यह जगह खाली कर दें। हम लोगों ने मना कर दिया और कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, हम लोग तब तक नहीं जाएंगे। उन लोगों ने हमें चेतावनी नहीं दी। उन लोगों ने हमें लाठीचार्ज के बारे में भी नहीं बताया। हम लोगों ने हमारा विरोध प्रदर्शन जारी रखा। तभी अचानक मैंने शोर सुना। दो पुलिसवालों ने मेरा हाथ पकड़ा और सड़क पर घसीटना शुरु कर दिया। वे मुझे बस तक ले गए। उन्होंने मेरे चेहरे पर घूसे मारे। वे मुझे बस के पीछे ले गए, जहां पांच-छह दूसरे पुलिसवाले इंतजार कर रहे थे। उन्होंने मुझे पीटना शुरू कर दिया और बाल खींचे। उन्होंने चिल्लाया, 'बस के अंदर चलो'। लेकिन वे मुझे बस के अंदर नहीं जाने दे रहे थे। वे मुझे दरवाजे के पास धक्के देते रहे और मुझे पीटते रहे। यह स्पष्ट था कि वे मुझे चोट पहुंचाना और डराना चाहते थे। अगर वे मुझे बस के अंदर ले जाना चाहते थे तो मुझे कह सकते थे या मुझे घसीटकर अंदर ले जा सकते थे। वहां पर महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद थीं।

साथ ही छात्रा ने बताया, ''मैंने सोचा कि हो सकता है मेरे छोटे बाल होने की वजह से उन्होंने मुझे लड़का समझ लिया होगा। लेकिन तभी देखा कि मेरी ही कॉलेज की दूसरी लड़की के भी बाल नोचे जा रहे थे। एबीवीपी के कार्यकर्ता महिलाओं को रेप की धमकियां दे रहे थे। लेकिन पुलिस हमें पीट रही थी और बस में भर रही थी। इसके बाद हमें हिरासत में ले लिया गया और एक घंटे तक बस में रखा। हमें रात में 9 बजे के आसपास हौज खास स्टेशन पर उतारा गया। मेरे पास मेरा सामान नहीं था, यहां तक की मेरा मोबाइल फोन भी नहीं। मेरा सामान उस दिन गायब हो गया।''

इसके अलावा छात्रा ने कहा, ''जब हमें हौज खास मेट्रो स्टेशन पर उतारा गया तो हम लोग यह सोच रहे थे कि अब क्या करें? हमें हमारे दोस्त से पता चला कि एबीवीपी के कुछ कार्यकर्ता नॉर्थ कैम्पस के पास सड़कों पर घूम रहे हैं और प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले छात्रों के साथ मारपीट कर रहे हैं। हम लोग वापस जाने से डर रहे थे। हमें यह भी सुनने को मिला कि एबीवीपी के कार्यकर्ता होस्टलों में छापा मारकर उन छात्रों को पीट रहे हैं, जिन्होंने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। इसके बाद हमारे एक टीचर ने हमें वापस पीजी, होस्टल और फ्लैट में पहुंचाया।''

गुरमेहर कौर की मां ने कहा, राष्‍ट्र-विरोधी नहीं है मेरी बेटी

आरएसएस के स्टूडेंट विंग एबीवीपी के खिलाफ सोशल मीडिया पर कैम्पेन चलाने वाली गुरमेहर कौर की मां का कहना है कि उन्हें दुख होता है, जब उनकी बेटी को राष्ट्र-विरोधी कहा जाता है।

गुरमेहर की मां राजविंदर कौर ने कहा कि उनकी बेटी जो भी कर रही है, उस पर उन्हें गर्व है।

अंग्रेजी न्यूज चैनल इंडिया टुडे से बात करते हुए राजवींदर कौर ने कहा, ''मेरी बेटी जो भी कर रही है, उसके लिए हिम्मत चाहिए। जब उसे राष्ट्र-विरोधी बोला जाता है तो दुख होता है। वह जो भी कर रही है, उस पर मुझे गर्व है। मैंने उसे जन्म जरूर दिया, लेकिन अब मैं उससे सीख रही हूं।''

साथ ही गुरमेहर की मां ने बताया, ''उसने शांति का संदेश देने का रास्ता इसलिए चुना था क्योंकि वह नहीं चाहती कि जिन परिस्थितियों का सामना उसे करना पड़ा है, वैसे दिन दुनिया का कोई और बच्चा देखे। पिछले 48 घंटे में जो भी हुआ, मैं उससे बहुत दुखी हूं। मेरी बेटी बहुत ही मजबूत है। मैं मेरी दोस्त से कहती रहती थी, अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरी बेटी का क्या होगा? लेकिन अब मुझे पूरा भरोसा है कि मेरी बेटी मजबूत रहेगी और अपना गुजारा कर लेगी।''

गुरमेहर को ट्रोल किए जाने पर उसकी मां ने कहा, ''सहवाग जैसे क्रिकेटर ने उनका मजाक उड़ाया। मेरी बेटी खुद एक टेनिस प्लेयर है। सहवाग ने एक क्रिकेटर के नाते देश के लिए जो भी किए, उसके लिए हम उनका सम्मान करते हैं। हम लोग हमेशा उनसे प्यार करते रहे हैं। हमें फोगाट बहनों पर भी गर्व है। उन्होंने जो भी कहा वह उन्होंने अपने देशप्रेम की वजह से कहा। यह हो सकता है कि गुरमेहर का तरीका अलग हो। लेकिन वह भी अपने देश से उतना ही प्यार करती है।''

राहुल का मजाक बनाने की कोशिश में मोदी और शाह से हुई गलती

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सूबे का सियासी पारा चरम पर है। ऐसे में हर पार्टी का बड़ा नेता, दूसरी पार्टी पर निशाना साध रहा है। हालांकि ऐसा लगता है कि बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक गलत बयान दे बैठे।

महराजगंज की रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्‍होंने अपने समर्थकों से पूछा कि क्‍या उन्‍होंने कभी नारियल जूस जैसी चीज का नाम सुना है।

उन्‍होंने कहा, ''कांग्रेस के एक नेता बड़े कमाल के हैं। हम प्रार्थना करेंगे कि उन्हें लम्बी उम्र मिले। कल उन्‍होंने (राहुल गांधी) एक बहुत बड़ी घोषणा कर डाली… उन्‍होंने कहा कि अब वह नारियल से जूस निकालेंगे… और जूस निकालने के बाद, वह उसे इंग्‍लैंड में बेचेंगे। गरीब से गरीब बच्‍चे को भी पता होगा कि नारियल से पानी मिलता है। जूस तो नींबू, संतरे, मोसम्‍बी से मिलता है… क्‍या आपने कभी नारियल जूस देखा या सुना है? शायद मुझे जानकारी न हो मगर मुझे बताइए… नारियल केरल में पाए जाते हैं, मगर वह कहते हैं कि वह नारियल जूस निकालेंगे।''

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जब बुधवार को मणिपुर पहुंचे तो उन्‍होंने भी राहुल गांधी पर 'नारियल जूस' को लेकर कटाक्ष किया।

अमित शाह ने कहा, ''कल यहां राहुल बाबा आए थे। इन्होंने कहा, मणिपुर के नारियल जूस को एक्सपोर्ट करेंगे। क्या आपने कभी नारियल का जूस देखा है? अरे भैया राहुल, यहां अनानास होता है नारियल नहीं होता। लगता है शायद आपको इबोबी सिंह ने ठीक से भाषण लिखकर नहीं दिया है। या फिर आपको नारियल और अनानास का अंतर मालूम नहीं है।''

प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने राहुल पर जिस 'नारियल जूस' के लिए तंज कसा, वह तो राहुल गांधी ने इम्‍फाल ईस्‍ट की अपनी सभा में कहा ही नहीं।

28 फरवरी की रैली में राहुल ने जो कहा, वह इस प्रकार है, ''यहां (मणिपुर में) आप नींबू उगाते हैं, नारंगी उगाते हैं, अनानास उगाते हैं… मैं उम्‍मीद करता हूं कि ऐसा दिन आएगा, जब लंदन में बैठकर कोई अनानास का जूस पियेगा और बॉक्‍स पर लेबल देखेगा 'मेड इन मणिपुर'।''

राहुल गांधी के बयान को ज्‍यादातर मीडिया संस्‍थानों ने गलत कवर किया, लेकिन हमारे मीडिया संस्थान ने ऐसा नहीं किया। नारियल और नारंगी को लेकर हुई कंफ्यूजन से ऐसा हुआ होगा। कांग्रेस पार्टी ने मोदी को जवाब देने के लिए राहुल की स्‍पीच का वीडियो जारी किया है, जिसे आप नीचे देख सकते हैं।

गुरमेहर कौर ने विरेंदर सहवाग को कहा, मेरे खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने के लिए शुक्रिया

दिल्‍ली यूनिवर्सिटी में दो छात्र संगठनों के बीच हिंसक भिड़ंत के बाद एबीवीपी के खिलाफ सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाने वाली गुरमेहर कौर ने खुद को पूरे आंदोलन से अलग कर लिया है। 2016 में जब उन्‍होंने भारत और पाकिस्‍तान के नेताओं से शांति वार्ता करने की अपील करता एक वीडियो बनाया था, तब कौर पहली बार चर्चा में आई थीं।

हालांकि अब उनकी एक फेसबुक पोस्‍ट ने भारत में एक अलग बहस को जन्‍म दे दिया है। कारगिल शहीद की बेटी, गुरमेहर कौर को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया, उन्‍हें 'चुनावी शिगूफा' बताया गया। इस बीच, कई आवाजें उनके समर्थन में भी उठीं, मगर पूरे हंगामे से वह खुद बेहद दुखी हैं।

रेडिफ डॉट कॉम को दिए एक इंटरव्‍यू में उन्‍होंने साफ किया कि वह किसी स्‍टूडेंट यूनियन का हिस्‍सा नहीं, बस दिल्‍ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा भर हैं। उन्‍होंने यह भी साफ किया कि उन्‍हें जो बलात्‍कार की धमकियां मिली थीं, उनके बारे में वह निश्चित तौर पर नहीं कह सकतीं कि ऐसा एबीवीपी की तरफ से किया गया या नहीं।

गुरमेहर कौर ने बताया कि उन्‍हें फेसबुक पर रेप की धमकियां मिलीं और एक शख्‍स ने उन्‍हें कहा कि '2017 उनकी जिंदगी का आखिरी साल होगा।'

कौर के मुताबिक, उन्‍होंने शिकायत दर्ज कराने की कार्यवाही शुरू कर दी है। गुरमेहर ने बीजेपी सांसद प्रताप सिम्‍हा के ट्वीट जिसमें उन्‍होंने कौर की तुलना दाऊद इब्राहिम से की थी, पर टिप्‍पणी करने से इनकार कर दिया।

कौर के अभियान पर क्रिकेटर विरेंदर सहवाग ने चुटीला ट्वीट किया था, जिसे बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हूडा ने भी सराहा।

इस पर कौर ने कहा कि 'मुझे मिल रही नफरत को और भड़काने के लिए मैं विरेंदर सहवाग का धन्‍यवाद करती हूं। आखिर में, मैं एक 20 साल की लड़की हूं और अगर विरेंदर सहवाग और रणदीप हूडा अपनी पोजिशन का इस्‍तेमाल मेरे खिलाफ करना चाहते हैं तो ठीक है। ये उनके लिए अच्‍छा है।'

छात्रों के प्रोटेस्ट मार्च से गुरमेहर कौर अलग हुई

रामजस कॉलेज विवाद मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पर सोशल मीडिया के जरिए टिप्पणी करने के बाद सुर्खियों में आई गुरमेहर कौर के समर्थन में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और छात्र मंगलवार को एक प्रोटेस्ट मार्च निकालने वाले हैं। हालांकि गुरमेहर कौर ने इस अभियान से अलग होने का फैसला किया है और कहा है कि उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। गुरमेहर ने यह बातें मंगलवार सुबह अपने ट्विटर हैंडल पर कहीं।

उन्होंने कहा, ''मैं अभियान से अलग हो रही हूं। आप सभी को बधाई। मुझे अकेला छोड़ दो। मैंने वही कहा जो कहना चाहिए था। मैं काफी कुछ सह चुकी हूं। 20 साल की उम्र में इससे ज्यादा सहने की ताकत नहीं है।''

अभियान के बारे में बोलते हुए गुरमेहर ने लिखा, ''यह अभियान छात्रों के बारे में ना सिर्फ मेरे बारे में। प्लीज बड़ी संख्या में जाईए और मार्च में हिस्सा लीजिए। बेस्ट ऑफ लक।''

विरोधियों को जवाब देते हुए उन्होंने लिखा, ''जो लोग भी मेरी बहादुरी और साहस को लेकर सवाल उठा रहे हैं उन्हें बता दूं कि मैने जरूरत से ज्यादा बहादुरी दिखाई। लेकिन एक बात तो पक्की है, अगली बार हिंसा और धमकियों के खिलाफ बोलने से पहले हम दो बार सोचेंगे।''

20 साल की गुरमेहर कौर डीयू के लेडी श्रीराम कॉलेज में इंग्लिश (ऑनर्स) की छात्रा हैं। गुरमेहर के पिता कारगिल की जंग में शहीद हो गए थे। उन्‍होंने रामजस कॉलेज में हिंसा के बाद फेसबुक पर कैंपेन चलाया था कि जिसमें उन्होंने लिखा था, ''वह एबीवीपी से डरती नहीं हैं और उनके साथ पूरे देश के छात्र हैं।''

गुरमेहर के मुताबिक, इस कैंपेन के बाद उन्हें रेप की धमकियां मिली हैं। गुरमेहर के चर्चाओं में आने के बाद उनकी एक वीडियो भी सामने आई, जिसमें उनका कहना था कि ''पाकिस्‍तान ने उनके पिता की जान नहीं ली बल्कि युद्ध ने ली।'' उनके इस बयान पर पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने परोक्ष रूप से निशाना भी साधा था और कहा था, ''मैंने दो ट्रिपल सेंचुरीज नहीं लगाईं, मेरे बैट ने लगाईं।''