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पूर्व जनप्रतिनिधियों को पेंशन देना क्या करदाता पर बोझ नहीं: सुप्रीम कोर्ट

पूर्व सांसदों और विधायकों को आजीवन पेंशन और भत्ते दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, लोकसभा और राज्यसभा के महासचिव को नोटिस जारी किया है।

सर्वोच्च अदालत ने यह नोटिस उत्तर प्रदेश के एनजीओ लोकप्रहरी की याचिका पर जारी किया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि पूर्व जनप्रतिनिधियों को पेंशन देना क्या करदाता पर बोझ नहीं है?

जनहित याचिका में कहा गया है कि पूर्व सासंदों और विधायकों को आजीवन पेंशन दी जा रही है, जबकि ऐसा कोई नियम नहीं है।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यदि एक दिन के लिए भी कोई सांसद बन जाता है तो वह ना केवल आजीवन पेंशन का हकदार हो जाता है, बल्कि उसकी पत्नी को भी पेंशन मिलती है। साथ ही वह जीवन भर एक साथी के साथ ट्रेन में मुफ्त यात्रा करने का अधिकारी हो जाता है, जबकि राज्य के राज्यपाल को भी आजीवन पेंशन नहीं दी जाती।

एनजीओ के सचिव तथा पूर्व आईएएस अधिकारी एसएन शुक्ला ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के वर्तमान जजों को भी साथी के लिए मुफ्त यात्रा का लाभ नहीं दिया जाता। चाहे वह आधिकारिक यात्रा पर ही क्यों ना जा रहे हों। लेकिन पूर्व सांसदों को यह सुविधा मिलती है।

उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था आम लोगों पर बोझ है और ये राजनीति को और भी लुभावना बना देती है। उन्होंने कहा कि देखा जाए तो यह खर्च ऐसे लोगों पर किया जाता है जो जनता का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं। इसलिए इस व्यवस्था को खत्म किया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।

स्वामी ने कहा, मेरा प्रस्ताव मान लें मुस्लिम, वरना....

अयोध्या में राम मंदिर विवाद को सभी पक्षों को आपस में मिलकर सुलझाने के सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने बुधवार को कहा कि मुस्लिम समुदाय को सरयू नदी के पार मस्जिद निर्माण के प्रस्ताव को मान लेना चाहिए।

स्वामी ने एक ट्वीट के जरिए ये बातें कही। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को मस्जिद के बारे में दिए गए प्रस्ताव को मान लेना चाहिए, नहीं तो जब उनकी पार्टी 2018 में राज्यसभा में बहुमत में आएगी तो राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाएगी।

स्वामी ने कहा कि 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में जिस हिस्से को राम जन्मभूमि माना था, वहां पर पहले से ही एक अस्थाई रामलला का मंदिर है। वहां पर पूजा-अर्चना भी होती है। उन्होंने कहा कि क्या कोई इसे नष्ट करने की हिमाकत कर सकता है?

हालांकि इस विवाद की अदालती कार्रवाई में लम्बे अरसे से मुसलमानों का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने मंगलवार को कहा था कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है। सुप्रीम कोर्ट अगर मध्यस्थता करने की पहल करता है तो इसके लिए मुस्लिम पक्ष पूरी तरह तैयार है, मगर किसी बाहरी व्यक्ति की मध्यस्थता स्वीकार नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए अयोध्या में राम मंदिर विवाद का कोर्ट के बाहर निपटारा करने पर जोर दिया। कोर्ट ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्ष मिलकर बैठें और आम राय बनाकर मामले को सुलझाएं। अगर इस मामले पर होने वाली बातचीत नाकाम रहती है तो हम दखल देंगे।

मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि ये ऐसे मुद्दे हैं जहां विवाद को खत्म करने के लिए सभी पक्षों को एक साथ बैठना चाहिए। इसके बाद पीठ ने सुब्रमण्यम स्वामी से कहा कि वे दोनों पक्षों से सलाह करें और 31 मार्च तक फैसले के बारे में सूचित करें। कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की।

स्वामी ने कहा कि इस मामले में अपीलें दायर हुए छह साल से भी ज्यादा समय हो गया है और इस पर जल्द से जल्द सुनवाई किए जाने की जरूरत है।

इस पर कोर्ट ने कहा, सर्वसम्मति से किसी समाधान पर पहुंचने के लिए आप नए सिरे से प्रयास कर सकते हैं। जरूरत पड़ी तो आपको इस विवाद को खत्म करने के लिए कोई मध्यस्थ भी चुनना चाहिए। यदि दोनों पक्ष चाहते हैं कि मैं उनके द्वारा चुने गए मध्यस्थों के साथ बैठूं तो मैं तैयार हूं। यहां तक कि इसके लिए मेरे साथी जजों की सेवाएं ली जा सकती हैं।

नरेंद्र मोदी नहीं, आरएसएस की पसंद है योगी आदित्‍यनाथ

योगी आदित्यनाथ को जब से उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री घोषित किया गया है तब से ये बहस चालू है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद हैं या नहीं? यूपी की कुल 403 सीटों में से जिस तरह भाजपा गठबंधन ने कुल 325 सीटें जीतें उसके बाद से यूपी के अगले सीएम को लेकर अकटलों का बाजार गर्म था। 11 मार्च को जब नतीजे आए तो भाजपा ने संकेत दिया कि वो 16 मार्च को संसदीय दल की बैठक के बाद यूपी के अगले सीएम के नाम की घोषणा करेगी।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 18 मार्च को विधायक दल की बैठक के बाद पार्टी ने घोषणा की कि राज्य का अगले सीएम गोरखपुर से भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ होंगे। 11 मार्च से 18 मार्च तक योगी का नाम घोषित होने से पहले मीडिया में मनोज सिन्हा, केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा, राम लाल, स्वतंत्र सिंह देव, राजनाथ सिंह इत्यादि के नाम सीएम के तौर पर उछाले गए।

मनोज सिन्हा को तो मीडिया ने लगभग सीएम बना ही दिया था, लेकिन ये हो न सका।

आदित्यनाथ के राज्य के सीएम के तौर पर पेश किए जाने के बाद भी मीडिया में भ्रम की स्थिति रही। कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसंद कोई और था। भाजपा के चुनाव पूर्व आंतरिक सर्वे मे योगी राजनाथ सिंह के बाद सीएम के दूसरे सबसे ज्यादा लोकप्रिय उम्मीदवार बनकर उभरे थे। राजनाथ यूपी का सीएम बनना नहीं चाहते थे। इसलिए मोदी और पार्टी अध्यक्ष शाह ने योगी को चुना। लेकिन वरिष्ठ पत्रकार और ''नमो स्टोरी: अ पोलिटिकल लाइफ'' किताब के लेखक किंशुक नाग की मानें तो आदित्यनाथ मोदी और शाह की नहीं, आरएसएस की वजह से यूपी के सीएम बने हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पीएम मोदी ने मनोज सिन्हा का नाम फाइनल कर लिया था, लेकिन अंतिम समय में आरएसएस के वीटो के बाद उन्हें अपना निर्णय बदलने को मजबूर होना पड़ा।

नाग मोदी और योगी के बीच एक समानता की तरफ भी याद दिलाते हैं। 2002 दंगे के बाद तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी चाहते थे कि नरेंद्र मोदी को सीएम पद से हटा दिया जाए। माना जाता है कि वाजपेयी ने अरुण जेटली को मोदी का इस्तीफा दिलवाने के लिए गुजारत भेज भी दिया था। लेकिन तमाम उतार-चढ़ावों के बाद मोदी सीएम बने रहे और उस समय पीएम वाजपेयी अपने मन की न कर सके। नाग की मानें तो योगी के मसले में भी कुछ-कुछ ऐसा ही हुआ है।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो आरएसएस नरेंद्र मोदी के बढ़ते कद की वजह से चिंता में था। पीएम मोदी को अभी भी आरएसएस का पूरा समर्थन हासिल है, लेकिन आदित्यनाथ का चयन करवाकर संघ ने ये संदेश दिया है कि कोई भी व्यक्ति संगठन से ऊपर नहीं है, चाहे वो पीएम मोदी ही क्यों न हों? ये कोई छिपी बात नहीं है कि आरएसएस नेता के ऊपर संगठन को तरजीह देता है। और शायद यही वजह है कि संघ या भाजपा से अलग होने वाला कोई भी नेता अपनी जमीन नहीं बना सका। चाहे वो बलराज मधोक हैं या कल्याण सिंह या उमा भारती।

आदित्यनाथ के चयन के पीछे एक और तर्क ये दिया जा रहा है कि संघ अभी से नरेंद्र मोदी का उत्तराधिकारी तैयार करने में लग गया है। योगी का चयन उस दिशा में एक बड़ा कदम है। ये साफ है कि साल 2019 का लोक सभा चुनाव भाजपा पीएम मोदी के नेतृत्व में ही लड़ेगी, लेकिन 2024 के लोक सभा में मोदी 75 साल की उम्र पार कर चुके होंगे। खुद पीएम मोदी ने 75 के नेताओं को सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का अघोषित नियम बना रखा है।

कुछ लोग ये तर्क भी दे रहे हैं कि चूंकि आरएसएस 2025 में अपनी स्थापना के 100 पूरा कर लेगा इसलिए वो चाहता है कि तब तक भारत ''हिंदू राष्ट्र'' बन जाए और इसके लिए उसे योगी जैसे नेता की जरूरत होगी। योगी के चयन के पीछे अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के भाजपा के पुरानी मांग को पूरा करने को भी एक उद्देश्य बताया जा रहा है। वजह चाहे जो हो इतना तो तय है कि योगी बनाम मोदी की ये बहस यहीं नहीं थमने वाली।

योगी आदित्यनाथ को मुस्लिमों के प्रति अपना नजरिया बदलना पड़ेगा: उल्मा काउंसिल

उल्मा काउंसिल के अध्यक्ष मुफ्ती नदीमुद्दीन ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुस्लिमों के प्रति अपना नजरिया बदलना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इस देश का मुसलमान किसी से डरता नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबको अपनी पार्टी चुनने का हक है। उत्तर प्रदेश की जनता ने बीजेपी को चुना और बीजेपी ने मोदी को चुना। इससे मुसलमानों को क्या लेना-देना?

उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के विवादित बयान हैं, बयान थे और वह मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलते रहे। एेसे बहुत सारे कैबिनेट में लोग हैं जिन्होंने जहर उगला और आज वह कैबिनेट में हैं।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सबसे ज्यादा सेक्युलर पार्टियों और मुस्लिम नेताओं ने इस देश में निराश किया है। अब अगर योगी आए हैं तो उन्हें बदलना पड़ेगा।

उन्होंने सुशासन की बात की, सबका साथ सबका विकास की बात की। इसलिए अब अगर हम चाहे कितना ही कहें कि योगी को मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए था, लेकिन बीजेपी को जनता ने ही देश ही बागडोर संभालने की जिम्मेदारी दी।

नदीमुद्दीन ने कहा, अब योगी मुख्यमंत्री बन गए हैं तो यह उनकी जिम्मेदारी है कि मुसलमानों के प्रति अपना नजरिया बदलें। अगर वह एेसा नहीं करते हैं तो मुसलमानों को भारत के संविधान पर भरोसा कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा।

उन्होंने कहा कि यह देश किसी के कहने पर नहीं चलता, यह देश संविधान पर चलता था, चलता है और आगे भी चलता रहेगा। अगर योगी संविधान के खिलाफ काम करेंगे तो जिस जनता ने उन्हें वोट दिया है वह उन्हें बाहर कर देगी।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को भयभीत करने या डराने की जरूरत नहीं है। मुसलमान किसी से नहीं डरता है क्योंकि संविधान ने सबको बराबरी का हक दिया है। हम सिर्फ अल्लाह से डरते हैं और जब संविधान ने हमें बराबरी का हक दिया है तो आप डराने वाले कौन होते हैं?

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर पीठ के महंत भी हैं और उन्होंने कई बार मुस्लिम विरोधी बयान दिए हैं। उनकी छवि एक कट्टर हिंदूवादी शख्स की रही है।

बाबरी मस्जिद कमेटी ने कहा, अब बातचीत का वक्त नहीं रहा

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। 21 मार्च को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजीआई) की तरफ से कहा गया है कि दोनों पक्ष इस मामले को कोर्ट के बाहर सुलझा लें तो ठीक रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह धर्म और आस्था से जुड़ा मामला है इसलिए इसको कोर्ट के बाहर सुलझा लेना चाहिए। कोर्ट ने इसपर सभी पक्षों को आपस में बैठकर बातचीत करने के लिए कहा है। इसपर राम मंदिर की तरफ से लड़ रहे सुब्रमण्यम स्वामी ने बताया कि कोर्ट ने कहा कि मस्जिद कहीं भी बन सकती है। इस मामले पर अब 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

लेकिन इस मामले पर बाबरी मस्जिद कमेटी ने सीजीआई खेहर की बात मानने से इंकार कर दिया है। कमेटी के ज्वॉइंट कंवीनर डॉ एसक्यूआर इलयास ने कहा, ''हम लोगों को सीजीआई की बात मंजूर नहीं है। इलाहबाद हाई कोर्ट पहले ही अपना निर्णय दे चुका है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को लगता है कि बातचीत का वक्त अब खत्म हो चुका है।''

उन्होंने बाबरी मस्जिद कमेटी और विश्व हिंदू परिषद के बीच हुई पिछली बातचीत का भी जिक्र किया जो कि किसी फैसले पर नहीं पहुंची थी।

अयोध्या के इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफल नहीं होती है तो फिर सुप्रीम कोर्ट दखल देगा। इसके लिए एक सुलह करवाने वाला व्यक्ति नियुक्त करने की भी बात कही जा रही है।

राम मंदिर विवाद काफी पहले से चल रहा है। 6 दिसंबर 1992 को एक राजनीतिक रैली के बाद कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था।

30 सितंबर 2010 को इलाहबाद कोर्ट ने भी इस मामले पर सुनावाई की थी। उनकी तरफ से फैसला करके 2.77 एकड़ की उस जमीन का बंटवारा कर दिया गया था जिसमें जमीन को तीन हिस्सों में बांटा गया था। जिसमें ने एक हिस्सा हिंदू महासभा को दिया गया जिसमें राम मंदिर बनना था। दूसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को और तीसरा निरमोही अखाड़े वालों को। लेकिन फिर 9 मई को इलाहबाद हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया था।

आदित्यनाथ अयोध्या में रामायण म्यूजियम बनाने के लिए देंगे 25 एकड़ जमीन

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से रामायण म्यूजियम के लिए जमीन देने का एेलान किया गया है। इसके लिए 25 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी। अयोध्या में बनने वाले इस म्यूजियम के निर्माण का काम हफ्ते भर में शुरू हो जाएगा।

फिलहाल इस पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इस संग्रहालय के लिए केंद्र सरकार ने 150 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, लेकिन इस पर अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है। लेकिन भाजपा सरकार आते ही इस काम में तेजी आई है।

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2007 में की गई थी। उस वक्त यूपी में मायावती की सरकार थी। साल 2009 में लोकसभा चुनाव की वजह से इसमें तेजी आई और 27 एकड़ जमीन चिन्हित की गई। बाद में यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। जून 2015 में केंद्र सरकार ने अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर अयोध्या में रामायण संग्रहालय बनाने की घोषणा की, लेकिन इसे लेकर कोई ठोस काम नहीं हो पाया।

आज (21 मार्च) को ही राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजीआई) ने कहा है कि दोनों पक्ष इस मामले को कोर्ट के बाहर सुलझा लें तो ठीक रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह धर्म और आस्था से जुड़ा मामला है इसलिए इसको कोर्ट के बाहर सुलझा लेना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफल नहीं होती है तो फिर सुप्रीम कोर्ट दखल देगा। इसके लिए एक सुलह करवाने वाला व्यक्ति नियुक्त करने की भी बात कही जा रही है।

इस पर राम मंदिर की तरफ से लड़ रहे सुब्रमण्यम स्वामी ने बताया कि कोर्ट ने कहा कि मस्जिद कहीं भी बन सकती है। इस मामले पर अब 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। लेकिन इस मामले पर बाबरी मस्जिद कमेटी ने सीजीआई खेहर की बात मानने से इंकार कर दिया है।

कमेटी के ज्वॉइंट कंवीनर डॉ एसक्यूआर इलयास ने कहा, ''हमें चीफ जस्टिस की बात मंजूर नहीं है। इलाहबाद हाई कोर्ट पहले ही अपना निर्णय दे चुका है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को लगता है कि बातचीत का वक्त अब खत्म हो चुका है।''

उन्होंने बाबरी मस्जिद कमेटी और विश्व हिंदू परिषद के बीच हुई पिछली बातचीत का भी जिक्र किया जो कि किसी फैसले पर नहीं पहुंची थी।

योगी आदित्यनाथ ने रविवार (19 मार्च) को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। उन्होंने इसके बाद ही अपने इरादे साफ कर दिए थे। उनके आदेश के बाद इलाहाबाद, गाजियाबाद सहित कई और जगह बूचड़खाने सील किए जा चुके हैं। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से बीजेपी सांसद होने के अलावा गोरखनाथ मठ के महंत भी हैं। बीजेपी के फायर ब्रांड नेता और कट्टर हिंदूवादी छवि रखने वाले योगी आदित्यनाथ का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी चीफ अमित शाह ने तय किया था।

दागियों के चुनाव लड़ने और पार्टी बनाने पर आजीवन प्रतिबंध लगे: चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में नेताओं और नौकरशाहों के खिलाफ चल रहे मुकदमों की सुनवाई एक साल में पूरा करने के लिए विशेष त्वरित अदालतें बनाने की मांग का समर्थन किया है।

चुनाव आयोग ने कहा कि सजायाफ्ता व्यक्ति के चुनाव लड़ने, राजनीतिक पार्टी बनाने और पार्टी पदाधिकारी बनने पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए।

चुनाव आयोग ने यह जवाब एक जनहित याचिका पर दिया है जिसमें नेताओं के मुकदमों को जल्द निपटाने के लिए विशेष त्वरित अदालतें बनाने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है। इस मामले पर कल सुनवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर उसका पक्ष जनना चाहा था।

चुनाव आयोग ने शपथपत्र में कहा कि उसने राजनीति का अपराधीकरण रोकने के लिए कानून मंत्रालय को प्रस्ताव भेजे हैं, लेकिन ये अभी लंबित हैं। इसके अलावा पेड न्यूज पर प्रतिबंध लगाने, चुनाव से 48 घंटे पहले प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों पर प्रतिबंध, वोटरों को घूस देने को संज्ञेय अपराध बनाने और चुनाव खर्च के प्रावधानों में संशोधन के प्रस्ताव शामिल हैं।

चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और अधिकतम आयु सीमा निर्धारित किए जाने की मांग पर चुनाव आयोग का कहना है कि ये उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। लेकिन इसे लेकर कानून बनाया जा सकता है।
भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में मांग की है कि नेताओं और नौकरशाहों के खिलाफ चल रहे मुकदमों की सुनवाई एक साल में पूरा करने के लिये त्पविरत अदालतें बनाई जाये।

गोवा में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला गठबंधन जल्द ही टूट जाएगा

शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने सोमवार को कहा कि गोवा में नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला गठबंधन जल्द ही टूट जाएगा और सरकार गिरेगी।

संजय राउत ने भाजपा के साथ दो क्षेत्रीय दलों और दो निर्दलीय विधायकों के गठबंधन को 'भ्रष्ट गठबंधन' करार दिया। राउत ने पत्रकारों से कहा, ''मनोहर पर्रिकर रक्षा मंत्रालय छोड़कर सरकार बनाने और भाजपा को सत्ता में बनाए रखने के लिए गोवा आए। जबकि उन्हें पता है कि उनकी सरकार के पांव मजबूती से टिके नहीं हैं और वे जल्द ही लड़खड़ाएंगे। यह भ्रष्टों का गठबंधन है।''

उन्होंने कहा कि जनादेश स्पष्ट रूप से भाजपा के खिलाफ था, लेकिन पर्रिकर ने सरकार चुरा ली और महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी व गोवा फॉरवर्ड जैसी स्थानीय पार्टियों ने गोवावासियों के साथ विश्वासघात किया है क्योंकि उन्होंने चुनाव तो भाजपा के खिलाफ मुद्दों पर लड़ा था। लेकिन नतीजे आने के बाद सत्ता के लालच में भाजपा का दामन थाम लिया।

राउत ने कहा, ''इन दोनों स्थानीय दलों ने भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन मतदान के बाद तुरंत पाला बदलते हुए भाजपा से जुड़ गए। यह गोवावासियों के साथ धोखा है। गोवावासी उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।''

राउत ने यह भी कहा कि गोवा में शिवसेना को करारी हार मिली, इसके बावजूद वह गोवा में काम करते रहेंगे।

संजय राउत से पहले शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में भी गोवा में भाजपा की सरकार बनने को लेकर कडी आलोचन की गई थी। शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में इसे 'लोकतंत्र की हत्या' बताया था। एक संपादकीय में लिखा गया था कि, ''छोटी पार्टियों ने राज्यपाल को इस शर्त के साथ स्वीकृति के पत्र दिए थे कि अगर मनोहर पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, तभी वे भाजपा को समर्थन देंगे ... हालांकि भाजपा के लिए अपने 13 निर्वाचित विधायकों में से एक को मुख्यमंत्री चुनना आसान नहीं था।''

शिवसेना ने कहा कि गोवा की जनता ने हालांकि कांग्रेस का चयन किया है, लेकिन पार्टी त्वरित कदम नहीं उठा पाई और भाजपा ने तेजी से काम करते हुए संख्या के जोड़-तोड़ का लाभ उठा लिया।

पर्रिकर के बारे में शिवसेना ने कहा कि या तो वह मोदी सरकार के लिए एक दायित्व बन चुके हैं या फिर वह खुद ही राष्ट्रीय राजनीति से परेशान होकर अपने गृह नगर में ही आरामदायक स्थिति में रहना चाहते हैं।

योगी आदित्यनाथ के सीएम बनते ही यूपी को 56 हजार करोड़ रुपए की चपत

यूपी में सरकार बनाने में कामयाब होने के बाद बीजेपी का पूरा जोर जनता से किए गए वादों को निभाने पर होगा। पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में कहा था कि अगर वह सत्ता में आती है तो सभी अवैध बूचड़खानों को बंद किया जाएगा।

हालांकि, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ओर से कहा गया था कि 12 मार्च से (वोटों की गिनती के अगले दिन) राज्य के सभी बूचड़खाने बंद होंगे। शाह का यह बयान पहले चरण के चुनाव के बाद आया था।

रविवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बीजेपी के मंत्री श्रीकांत शर्मा ने शाह के वादे को याद दिलाया। शर्मा ने योगी आदित्यनाथ की ओर से अपने सभी मंत्रियों को ऐसे बयानों से बचने के लिए कहा है जिससे किसी की भावनाएं आहत होती हो।

यूपी में स्लाटर हाउस (बूचड़खाने) पर पाबंदी लगाई जाती है तो इसका असर इकोनॉमी और रोजगार दोनों पर पड़ेगा। सरकार के इस फैसले से यूपी को हजारों करोड़ के राजस्व का नुकसान हो सकता है।

उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, यूपी ने साल 2014-15 में 7,515.14 लाख किलो भैस के मीट, 1171.65 लाख किलो बकरे का मीट, 230.99 लाख किलो भेड़ का मांस और 1410.32 लाख किलो सुअर के मांस का उत्पादन किया था।

वर्तमान में भारत में सरकार द्वारा स्वीकृत 72 बूचड़खाने कम मांस प्रोसेसिंग प्लांट हैं, जिनमें से अकेले 38 उत्तर प्रदेश में हैं। साल 2011 में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा जारी लिस्ट के मुताबिक, देशभर में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त करीब 30 बूचड़खाने थे, जिसमें से आधे यूपी में थे। साल 2014 में इनकी संख्या बढ़कर 53 हो गई। इसके बाद वाले साल में 11 बूचड़खाने की संख्या और बढ़ गई। इस तरह कुल बूचड़खानों की संख्या 62 हो गई। वर्तमान में यूपी में 38 स्लाटर हाउस है, जिनमें से 7 अलीगढ़ और 5 गाजियाबाद में है।

साल 2016 में भारत ने पूरे विश्व में 13,14,158.05 मीट्रिक टन भैस के मांस का निर्यात किया था, जिसकी कीमत 26,681.56 करोड़ रुपए थी। ज्यादातर निर्यात मुस्लिम देशों जैसे मलेशिया, मिस्त्र, सऊदी अरब और इराक में किया गया। उत्तर प्रदेश में स्लाटर हाउस को 15 साल से बड़े भैसे या बैल या फिर अस्वस्थ्य नस्ल को काटने की इजाजत है।

हालांकि सरकार की ओर से अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि वह भैस के मांस का कारोबार करने वालों को टारगेट करेगी या फिर अन्य मीट के अन्य उत्पादों में कारोबार करने वालों को भी टारगेट करेगी।

APEDA की साल 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी देश में सबसे ज्यादा मीट का उत्पादन करने वाला राज्य (19.1 पर्सेंट) है। इसके बाद आंध्र प्रदेश (15.2 प्रतिशत) और पश्चिम बंगाल (10.9 प्रतिशत) का नंबर आता है। साल 2008 से 2013 के दौरान यूपी मीट उत्पादन में सबसे आगे रहा है।

2007 में किए गए 18 वीं पशुधन जनगणना के मुताबिक यूपी गोजातीय जनसंख्या के मामले में भी सभी राज्यों से आगे है। 2012 में आए 19वें पशुधन जनगणना में भी यह बढ़त बरकरार रही। राज्य में इसकी संख्या 29 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,38,12,000 से बढ़कर 3,06,25,000 हो गई है। वहीं, आंध्र प्रदेश में 20 प्रतिशत गिरावट के साथ जनसंख्या 1,32,71,000 से घटकर 1,06,22,000 हो गई है।

निर्यात पर प्रतिबंध से राजस्व के मामले में कम से कम 11,350 करोड़ (2015-16) की कमी हो सकती है। बीजेपी की सरकार अगर अपने पूरे कार्यकाल यानी की 5 साल के लिए बूचड़खानों पर प्रतिबंध लगाती है तो उस हिसाब से 56 हजार करोड़ से ज्यादा (5 साल के लिए लागू रहा बैन तो) का नुकसान होगा। साल 2015-16 में यूपी ने 5,65,958.20 मीट्रिक टन भैस के मीट का निर्यात किया था। संसाधनों या गोजातीय जनसंख्या के साथ देश में कोई अन्य ऐसा राज्य नहीं है, जो यूपी की जगह को भर सके।

योगी आदित्यनाथ बने यूपी के 21वें सीएम, दो डिप्टी सीएम ने ली शपथ

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के 21वें मुख्यमंत्री के रूप में आज (19 मार्च को) पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। योगी प्रदेश में भाजपा के चौथे सीएम बने हैं।

लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल राम नाईक ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के अलावा केन्द्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद थे। इनके अलावा यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव, नारायण दत्त तिवारी भी मौजूद थे। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अलावा एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस शपथ ग्रहण समारोह के गवाह बने। राज्यपाल राम नाईक ने केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।

सूर्य प्रताप शाही, सुरेश खन्ना, सतीश महाना, राजेश अग्रवाल, रीता बहुगुणा जोशी, दारा सिंह चौहान, धर्मपाल सिंह, रमापति शास्त्री, जयप्रताप सिंह, ओमप्रकाश राजभर, चेतन शर्मा, सिद्धार्थ सिंह को मंत्री बनाया गया है।

इनके अलावा अनुपमा जायसवाल, सुरेश राणा, उपेंद्र तिवारी, डॉ. महेंद्र सिंह, धर्म सिंह सैनी, स्वतंत्र देव सिंह, उपेंद्र सिंह चौधरी, अनिल राजभर और स्वाति सिंह को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।