भारत

लालकृष्ण आडवाणी भारत के अगले राष्ट्रपति बनना चाहते हैं

बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि वो बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़े हैं और उन्हें इस पर गर्व है।

राजस्थान के माउंट आबू में ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में शामिल हुए आडवाणी ने कहा, ''मैं बचपन से जिस संगठन के साथ जुड़ा हूं उसका सम्मान करता हूँ और मुझे उस पर गर्व है और ये संगठन आरएसएस है।''

आडवाणी का ये बयान संघ के प्रति आस्था व्यक्त करना भर है या फिर इसके कुछ सियासी मायने भी हैं।

आडवाणी का संघ से गहरा नाता रहा है और वो राजस्थान में संघ के प्रचारक रहे हैं। साल 2005 में कराची यात्रा के दौरान जिन्ना के बारे उनकी टिप्पणी आरएसएस को नागवार गुजरी थी जिसकी वजह से दोनों के रिश्ते में थोड़ी खटास आ गई थी।

हालांकि फिर साल 2009 में संघ के कहने पर ही भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री के रूप में उनका नाम आगे बढ़ाया था।

लेकिन आडवाणी ने इस समय आरएसएस की तारीफ़ की है जिसके अपने मायने हैं क्योंकि वो इस समय भाजपा के उस मार्गदर्शक मंडल में हैं जो हाशिए पर है और जिसकी कभी कोई बैठक नहीं हुई।

बिहार चुनाव के बाद आडवाणी का बस एक बयान आया था जिसमें भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व पर कुछ सवाल उठाए गए थे, लेकिन उसके बाद कहीं कुछ सुनने में नहीं आया।

आरएसएस वर्तमान सरकार में अहम भूमिका अदा कर रहा है और आडवाणी अपने लिए एक रास्ता खोलना चाहते हैं क्योंकि आरएसएस के मौजूदा नेतृत्व के साथ उनके वैसे संबंध नहीं हैं जैसे पुराने नेतृत्व के साथ थे।

आडवाणी के ताज़ा बयान को अगले राष्ट्रपति चुनाव के नज़रिए से भी देखने की ज़रूरत है।

मीडिया के एक हिस्से में चर्चा है कि आडवाणी को भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रपति पद के लिए नामित कर सकती है।

मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई 2017 को खत्म होगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद तय है कि बीजेपी अगले राष्ट्रपति के लिए अपना उम्मीदवार उतारेगी।

इस तरह की तमाम ख़बरें सामने आ चुकी हैं जो कहती हैं कि राष्ट्रपति की कुर्सी में आडवाणी की दिलचस्पी है।  

हालांकि बाबरी मस्जिद वाला केस सुप्रीम कोर्ट में दोबारा आ गया है जिसमें उनका नाम है।

वैसे अभी ये नहीं पता है कि आडवाणी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की कितनी दिलचस्पी है ?

फिर भी इतना तो तय है कि आडवाणी आरएसएस के ज़रिए ये संदेश देना चाहते हैं कि उनके नाम पर भी विचार किया जाए।

बीजेपी का सारा तमाशा खत्म हो जाएगा: लालू

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में यदि मायावती और मुलायम सिंह एक हो जाएं तो बीजेपी को खत्म किया जा सकता है।

लालू ने ट्वीट किया, ''यूपी में मायावती और मुलायम एक हो जाएं। बिहार में हमलोग एक हैं, बीजेपी का सारा तमाशा खत्म हो जाएगा। अब ये विकास की बात नहीं करते।''

हाल के विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला था। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन किया था, इसके बावजूद उनका प्रदर्शन बेहद ख़राब रहा था।

इसके बाद, लालू ने एक और ट्वीट कर उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी पर निशाना साधा।

लालू ने ट्वीट किया, ''योगी ने सीएम आवास का शुद्धिकरण इसलिए कराया क्योंकि विगत एक दशक से ज्यादा वहां दलित-पिछड़ा एवं बहुजन वर्गों के मुख्यमंत्री रहते थे।''

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने लखनऊ स्थित सीएम आवास 5 कालीदास मार्ग में प्रवेश से पहले विशेष पूजा-अर्चना करवाई थी।

भारतीय मीडिया ने इसे योगी के सीएम आवास का शुद्धिकरण करवाने के तौर पर पेश किया था। योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद सीएम आवास में गायों को भी रखा गया है।

योगी से पहले अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और उनसे पहले दलित नेता मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं।

वहीं शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि 2022 में जब वो फिर से सीएम बनेंगे तो मुख्यमंत्री आवास में फ़ायर ब्रिगेड से गंगाजल छिड़कवाएंगे।

नेशनल हाईवे-74 में मुआवजे के नाम पर अफसर करोड़ों रुपये डकार गए

नेशनल हाईवे-74 फोरलेन प्रोजेक्ट में कृषि भूमि अकृषक दिखाकर सरकार को करीब 250 करोड़ से अधिक के राजस्व की चपत लगाई गई है। मुआवजे के नाम पर अफसर करोड़ों रुपये डकार गए। मामले में कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज हो चुका है।

एनएच घोटोले में एनएचएआई के नजीबाबाद और रुद्रपुर के परियोजना निदेशक और एनएचएआई के रिजनल ऑफिस देहरादून के अधिकारियों और एसडीएम के साथ कार्यालय में तैनात रीडर, पेशकार, तहसीलदार, लेखपाल, चकबंदी अधिकारी और कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों के खिलाफ सिडकुल चौकी में मुकदमा दर्ज हुआ है। जांच एसआईटी को सौंप दी गई थी।

विवेचना प्लान तैयार करने के बाद बीते गुरुवार की दोपहर एसआईटी ने एसएसपी सदानंद दाते के निर्देश पर एनएचएआई और एसएएलओ कार्यालय में कार्रवाई कर जांच से संबंधी दस्तावेज कब्जे में लिए थे। घोटाले में जसपुर, बाजपुर, खटीमा, सितारगंज समेत एनएच से जुड़े सभी मामले जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा सितारगंज तहसील में तैनात राजस्व अहलमद संतराम के खिलाफ एसडीएम विनोद कुमार कार्यालय से मिशलबंद फाइल के पेज फाड़ने के आरोप में केस दर्ज हो चुके हैं। शुक्रवार को कब्जे में ली गई फाइलों की जांच एसआईटी ने शुरू कर दी है।

एसआईटी ने बाजपुर और गदरपुर तहसील की 108 फाइलें कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। इसमें पेमेंट, गजट और ऑर्डर की फाइल शामिल हैं। यह फाइल गुरुवार को एसआईटी ने एसएएलओ और एनएचएआई कार्यालय में छापामार कार्रवाई के दौरान कब्जे में लिए थे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कब्जे में बाजपुर और गदरपुर तहसील की फाइल ली गई हैं।

इसमें 27 फाइल ऑर्डर, 55 पेमेंट फाइल और 26 गजट की फाइलें शामिल हैं। नवनियुक्त डीएम डॉ. नीरज खैरवाल ने शुक्रवार को कहा कि एनएच-74 घोटाले में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। घोटाले में लिप्त अधिकारी-कर्मचारी किसी दशा में बख्शे नहीं जाएंगे।

पार्टी दोबारा सत्ता में आई तो गंगाजल से मुख्यमंत्री आवास धुलवाएंगे: अखिलेश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश की नई सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 के चुनाव में उनकी पार्टी दोबारा सत्ता में आई तो वे गंगाजल से मुख्यमंत्री आवास धुलवाएंगे।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सीएम आवास में जाने से पहले पूजा-अर्चना कराए जाने पर यह टिप्पणी की।

समाजवादी पार्टी मुख्यालय पर शनिवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बीच पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश ने यह भी कहा कि फायर ब्रिगेड में भरकर सभी सरकारी दफ्तरों व 'आप' यानी पत्रकारों पर भी गंगाजल डलवाएंगे। पांच कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के शुद्धीकरण पर कहा कि उन्हें इसका अफसोस नहीं है।

अखिलेश ने कहा कि गौशाला भले ही बनाई जाए, लेकिन वे वहां पर दो मोर छोड़ आएं हैं, उन्हें भूखा न रखा जाए।

पूर्व सीएम ने चुटकी लेते हुए कहा कि हमारी नेम प्लेट जनता ने हटाई है और इस सरकार में किसी का बोर्ड कोई हटा रहा है।

अखिलेश ने बताया कि हार के कारणों की समीक्षा की जा रही है। भितरघातियों को चिह्नित कर उन पर कार्रवाई की जाएगी। पार्टी 15 अप्रैल से 30 सितंबर तक सदस्यता अभियान चलाएगी। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव 30 सितंबर से पहले कर लिया जाएगा।

अखिलेश ने भविष्य में किसी महागठबंधन की संभावना पर कहा कि इस पर अभी कुछ नहीं कह सकते, अभी हमारा कांग्रेस से गठबंधन है। पत्रकारों से यह जरूर कहा कि 'मुझे अब उस दिन का इंतजार होगा, जब आप लोग यूपी में होने वाली हत्या-रेप की घटनाओं पर उसी तरह योगी की फोटो के साथ खबरें दिखाएंगे जैसे मेरी दिखाया करते थे।'

अखिलेश ने कहा कि अभी तक नई सरकार ने कैबिनेट नहीं की है। हमने लखनऊ में मेट्रो चलवा दी है और नई सरकार द्वारा गोरखपुर और झांसी में मेट्रो चलवाने का उन्हें इंतजार रहेगा।

अखिलेश ने कहा, केवल झाड़ू लगाई जा रही है। हमें नहीं मालूम था कि हमारे अधिकारी इतनी अच्छी झाड़ू लगाते हैं। हमें मालूम होता तो हम भी खूब झाडू लगवाते।

बूचड़खाने बंद कराने की नई सरकार की मुहिम पर कहा कि हमारे शेर बहुत भूखे हैं, नजदीक मत जाना?

उन्होंने कहा कि योगी जी उम्र में भले ही आप बड़े होंगे, लेकिन काम में बहुत पीछे हैं। डायल 100 व 1090 का स्टिकर बदल कर एंटी रोमियो दल बनाया गया।

अखिलेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि कुछ अफसर तो यह भी कह रहे हैं कि आंखे देखकर बता देंगे कि कौन रोमियो है? इस अभियान की किरकरी होने पर अब कह रहे हैं कि युवा जोड़ों को परेशान नहीं किया जाएगा।

अखिलेश ने कहा कि विधानसभा चुनाव में ईवीएम में गड़बड़ी की बातें हर तरफ से आ रही है। बसपा व अन्य विरोधी दल भी कह रहे हैं कि विधानसभा चुनाव ईवीएम में गड़बड़ी करके जीता गया है। कुछ गांव वाले उन्हें लिखकर देने को तैयार हैं कि उन्होंने वोट किसी को दिया और पड़ा कहीं और। चुनाव आयोग को संज्ञान लेकर जांच करानी चाहिए।

अखिलेश ने कहा कि एक विशेष जाति वर्ग के अफसरों को परेशान किया जा रहा है। उनकी सरकारी में यह बात आई थी कि विशेष जाति वर्ग के लोगों को तैनाती दी जा रही है। राज्यपाल ने भी टोका था कि सब जगह एक जाति के अधिकारी तैनात हैं। तब उन्होंने राज्यपाल को प्रदेश में अफसरों की तैनाती की सूची दे दी थी।

बिजली की अनुदान राशि अब सीधे उपभोक्ताओं को देगी सरकार

अगले माह से बिजली उतनी महंगी नहीं होगी, जितनी विद्युत विनियामक आयोग ने टैरिफ सुनाया है। एक अप्रैल से 55 फीसदी महंगी करने का आयोग ने फैसला दिया है।

आयोग की दर आने के बाद राज्य सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को अनुदान देने का निर्णय लिया है। अनुदान बिजली कंपनी के बजाए अब सीधे उपभोक्ताओं को ही मिलेगा।

शनिवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि दो-तीन दिनों में अनुदान की घोषणा की जाएगी।

मंत्री ने कहा कि अब तक कंपनी राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान का जिक्र करते हुए पिटिशन दायर करती थी। पहली बार नीतिगत निर्णय के तहत बिजली कंपनी ने अनुदान रहित टैरिफ पिटिशन दायर किया था। बिजली दर की प्रति मिल गई है। पड़ोसी राज्यों की बिजली दर का भी अध्ययन हो रहा है। चूंकि, नई बिजली दर एक अप्रैल से प्रभावी होनी है, इसलिए चालू सत्र में ही उपभोक्ताओं को सीधे अनुदान की घोषणा होगी।

बिजली बिल में आयोग की ओर से सुनाई गई बिजली दर के अनुसार राशि का जिक्र होगा। राज्य सरकार जिस श्रेणी के उपभोक्ताओं को जितना अनुदान देगी, उसके अनुसार बिल में कटौती होगी। बाकी पैसा जमा करना होगा।

अभी बीपीएल-कुटिर ज्योति, ग्रामीण उपभोक्ता, कृषि व ग्रामीण व्यवसायिक उपभोक्ता को अनुदान मिल रहा है।

रसोई गैस उपभोक्ताओं को अभी सीधा अनुदान मिल रहा है।

बिहार में बिजली 55 फीसदी महंगी

बिहार में बिजली 55 फीसदी महंगी हो गई। एक अप्रैल 2017 से लागू होने वाली बिजली दरों की घोषणा शुक्रवार को बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने की।

हालांकि आयोग के इस निर्णय के बावजूद राज्य सरकार अनुदान देकर बिजली सस्ती कर सकती है।

आयोग के अध्यक्ष एसके नेगी, सदस्य आरके चौधरी व राजीव अमित ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अब तक की टैरिफ में बीपीएल, ग्रामीण उपभोक्ता, कृषि व ग्रामीण व्यवसायिक उपभोक्ताओं को मिलने वाले अनुदान का जिक्र रहता था।

पहली बार बिजली कंपनी ने राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान का जिक्र किए बगैर टैरिफ पिटिशन फाइल की थी। इस कारण बिजली दर में वृद्धि करने की विवशता आ गई। कंपनी ने 84 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव दिया था, लेकिन 55 फीसदी वृद्धि की गई है।

केन्द्रीय विद्युत अधिनियम में तय प्रावधानों के तहत नई बिजली दरों की घोषणा बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने की है। बिजली दर तय करने में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं रहती है। वैसे राज्य सरकार इस फैसले पर विचार करेगी।
- बिजेन्द्र प्रसाद यादव, ऊर्जा एवं वाणिज्यकर मंत्री, बिहार

माल्या के प्रत्यर्पण पर ब्रिटिश जज विचार करेंगे

भगोड़ा अपराधी घोषित उद्योगपति विजय माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढाते हुए ब्रिटिश सरकार ने भारत के आग्रह को सत्यापित किया और इसे आगे की कार्रवाई के लिए एक जिला न्यायाधीश के पास भेज दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि ब्रिटिश गृह विभाग ने 21 फरवरी को जानकारी दी कि माल्या के प्रत्यर्पण के लिए भारत के अनुरोध को उनके मंत्री ने सत्यापित किया है और इसे वारंट जारी करने के मुद्दे पर जिला न्यायाधीश द्वारा विचार के लिए वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत भेजा गया है। यह नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक की ऋण चूक के लिए भारत में वांछित भगोड़े कारोबारी का प्रत्यर्पण हासिल करने की दिशा में अगला कदम है।

बागले ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि के अनुसार माल्या के संबंध में औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध आठ फरवरी को यहां ब्रिटिश उच्चायोग को सौंपा गया था। अनुरोध सौंपते हुए भारत ने कहा था कि उसका माल्या के खिलाफ वैध मामला है। भारत ने कहा कि अगर प्रत्यर्पण अनुरोध को स्वीकार किया जाता है तो यह हमारी चिंताओं के प्रति ब्रिटेन की संवेदनशीलता को दिखाएगा।

ब्रिटेन में प्रत्यर्पण प्रक्रिया में न्यायाधीश द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी करने पर फैसले सहित कई कदम शामिल हैं। वारंट जारी होने पर व्यक्ति को गिरफ्तार करके शुरुआती सुनवाई के लिए अदालत के सामने लाया जाता है जिसके बाद मंत्री द्वारा अंतिम फैसले से पहले प्रत्यर्पण सुनवाई होती है। वांछित व्यक्ति को किसी भी फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय तक में अपील करने का अधिकार होता है।

इससे पहले इस साल जनवरी में सीबीआई की एक अदालत ने 720 करोड़ रुपये के आईडीबीआई बैंक ऋण चूक मामले में माल्या के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। माल्या दो मार्च 2016 को देश छोड़कर भाग गया था।

मंच टूटने के कारण राजद प्रमुख लालू प्रसाद घायल

पटना जिला के दीघा थाना क्षेत्र में आज आयोजित एक यज्ञ कार्यक्रम के दौरान लोगों के अधिक संख्या में मंच पर चढ़ जाने से उसके टूट जाने से राजद प्रमुख लालू प्रसाद चोटिल हो गये।

दीघा से लौटने पर देर शाम इलाज के लिए पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान रवाना होने के पूर्व मीडिया से बातचीत करते हुए लालू बताया कि उन्हें कमर के नीचे वाले हिस्से में चोट आयी और सूजन है।

उन्होंने कहा कि उक्त यज्ञ कार्यक्रम के दौरान मंच पर अधिक संख्या में लोगों के चढ़ जाने के कारण वह धराशायी हो गया।

लालू के साथ इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान उनके छोटे पुत्र और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री और उनके बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव, बडी पुत्री एवं राज्यसभा सदस्या मीसा भारती सहित राजद के कई अन्य विधायक पहुंचे हैं जहां उनका एक्सरे कराये जाने के साथ चिकित्सकों द्वारा उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।

दीघा थाना प्रभारी गोल्डेन कुमार ने बताया कि गंगा नदी किनारे दीघा घाट पर आयोजित उक्त यज्ञ के कार्यक्रम में भाग लेने शाम करीब 7 बजे पहुंचे राजद प्रमुख ने प्रवचन और कथा वाचन के बाद स्थानीय लोगों को संबोधित किया और जब वे मंच से उतरने लगे तभी मंच पर अधिक संख्या में मौजूद लोगों के उनके साथ उतरने पर मंच का कोई पाया अपने स्थान से खिसक गया जिससे वह धराशायी हो गया। उन्होंने बताया कि इस हादसे में कोई अन्य व्यक्ति जख्मी नहीं हुए हैं।

एयर इंडिया कर्मचारी को चप्‍पल से पीटने वाले शिव सेना सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज

शिव सेना सांसद रवींंद्र गायकवाड़ ने गुरुवार (23 मार्च) को एयर इंडिया एयरलाइन्स के एक कर्मचारी की चप्पल से पिटाई कर दी। यह बात खुद गायकवाड़ ने कुबूल की है।

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान उन्होंने एयर इंडिया के एक कर्मचारी को पीटने की बात स्वीकार करते हुए कहा, ''हां, मैंने उसे सैंडल से 25 बार मारा है।''

इस संबंध में एयर इंडिया ने गायकवाड़ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन पर जबर्दस्‍ती फ्लाइट रुकवाने, उसे 40 मिनट तक देर कराने और एयर इंडिया स्‍टाफ को पीटने के संबंध में आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एयर इंडिया के कर्मचारी ने अपने पत्र में कहा है कि ''अगर हमारे सांसदों का यह रवैया और व्‍यवहार है तो देश को भगवान ही बचाए।''

रवींद्र गायकवाड़ पहली बार उस्मानाबाद सीट से चुनकर संसद पहुंचे हैं। खबरों के मुताबिक, एयर इंडिया कर्मचारियों से सांसद की सीट को लेकर कहा सुनी हो गई थी।

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि उन्होंने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और टीम गठित की है जो पूरे मामले की जांच करेगी।

रवींद्र गायकवाड़ का दावा है कि उन्होंने बिजनेस क्लास की टिकट खरीदी थी पर उन्हें इकॉनमी क्लास की सीट दी गई। गायकवाड ने आगे बताया कि जब उन्होंने इसकी शिकायत की तो किसी ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया।

वहीं गायकवाड सिर्फ चप्पल से मारने की बात कुबूलने तक ही नहीं रुके। जब पत्रकार ने उनसे पूछा कि आप सांसद हैं और ऐसा काम करना आपको शोभा देता है तो उन्होंने पत्रकार को टोकते हुए बेहद आक्रामक रवैये में कहा, ''तुम क्या चाहते हो ? सांसद हूं तो क्या मैं चुपचाप गालियां सुनता ?''

वहीं इस मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री अशोक गजपति राजू ने भी अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा, ''देश के किसी भी नागरिक को मारपीट नहीं करनी चाहिए।''

हालांकि उन्होंने इस मामले में सांसद गायकवाड पर एफआईआर दर्ज होने के सावल पर कोई जवाब नहीं दिया।

नोएडा और बरेली में लगा जींस, टी-शर्ट पर बैन

उत्तर प्रदेश के नोएडा में सरकारी अस्पतालों और बरेली में गवर्नमेंट ऑफिसों में जींस, टी-शर्ट पर प्रतिबंध लगाया गया है। नोएडा में सीएमओ ने आदेश जारी कर अधिकारियों/कर्मचारियों को अस्पतालों में शालीन कपड़े पहनकर आने के लिए कहा है।

आदेश के अनुसार, पुरुषों को पैंट-शर्ट और महिलाओं को साड़ी व सूट पहनने के लिए कहा गया है। स्थानीय अफसरों ने इसकी पुष्टि भी की है।

वहीं, बरेली के डीएम सुरेंद्र सिंह ने सरकारी ऑफिसों में अधिकारी और कर्मचारियों के जींस-टीशर्ट और स्पोर्ट्स शूज पहनकर आने पर पाबंदी लगा दी है। गुरूवार सुबह सरकारी महकमों को उन्होंने यह आदेश दिया है।

बरेली में ड्रेस कोड लागू करने को लेकर कई बार अफसरों ने अपने स्तर से प्रयास किए, लेकिन कामयाबी नहीं मिली थी। सरकार बदलते ही अफसरों ने सीएम योगी के रुख को भांपते हुए कार्रवाई शुरू कर दी। मालूम हो कि सीएम के आदेश पर अवैध बूचड़खानों के खिलाफ अभियान चल रहा है।

हालांकि, सर्विस नियमावली में औपचारिक वेशभूषा में ऑफिस आने का जिक्र है। बावजूद इसके अधिकारी अपनी सुविधा को देखते हुए उसपर अमल करने से कतरा रहे थे। गुरूवार को सरकारी ऑफिसों में अफसर और कर्मचारियों ने जींस-टीशर्ट के साथ स्पोर्ट्स शूज से तौबा कर ली। सरकारी विभागों के अध्यक्षों ने अपने अधीनस्थों को औपचारिक वेशभूषा में आने के लिखित आदेश दिए हैं।