आतंकी संगठन आईएसआईएस के मुखिया अबु बकर अल बगदादी के सीरिया हवाई हमले में मारे जाने की खबर है।
सीरिया की स्टेट मीडिया ने एक असत्यापित रिपोर्ट के हवाले से जानकारी देते हुए दावा किया है कि शनिवार (10 जून, 2017) को हवाई हमले में आईएसआईस का मुखिया मारा गया है। इस दौरान आतंकी संगठन के मजबूत गढ़ रक्का में भारी तोपों से हमला किया गया।
हमले की फुटेज खुद आईएसआईएस न्यूज एजेंसी अमाक ने जारी करते हुए इसे तबाही का कारण बताया।
बगदादी से प्रभावित होकर हाल के समय में यूरोप में किए गए आंतकी हमले के बाद बगदादी के सिर पर 20 मिलियन ब्रिटिश पौंड का इनाम रखा गया है।
बता दें कि पहले भी बगदादी की मौत की खबरें मीडिया में आती रही हैं जो कि बाद में गलत साबित हुईं। इससे पहले एक डॉक्यूमेंट्री में दावा किया गया है कि जिहादियों की आर्मी तैयार करने से पहले बगदादी 2013 में इराक पर कब्जा करने के लिए वहां चला गया था।
वहीं बगदादी की मौत की खबर ऐसे समय में सामने आई है जब इराकी फौज ने उसके उत्तराधिकारी अयाद अल जुमाली को सीरिया-इराक बॉर्डर पर एक हवाई हमले में मार गिराया है। जुमाली सद्दाम हुसैन के शासन में ख़ुफ़िया अधिकारी था। इस मामले में इराकी टीवी रिपोर्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि जुमाली आईएसआईएस में दूसरा सबसे बड़ा नेता और वॉर मिनिस्टर था।
वहीं एक अन्य सूत्र ने बताया कि जुलाई 2014 में मोसुल की अल नूरी मस्जिद में बगदादी को आखिरी बार देखा गया था। तब से अबतक बगदादी को सार्वजनिक तौर पर किसी ने नहीं देखा है।
हालांकि कई बार बड़े पैमाने पर हुई बमबारी में बगदादी को निशाना बनाया जाता रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है बगदादी अभी तक जिंदा है।
इससे पहले साल 2015 में हुई भारी हवाई बमबारी में दावा किया किया बगदादी मारा गया है। लेकिन हकीकत में क्या हुआ ? ये अभी तक राज बना हुआ है।
भारत तथा पाकिस्तान को पूर्णकालिक सदस्यता प्रदान करने के साथ ही शुक्रवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) अपने इतिहास के एक नए चरण में प्रवेश कर गया।
स्पेन की समाचार एजेंसी ईएफई न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान तथा तजाकिस्तान द्वारा साल 2001 में स्थापना के बाद इस संगठन में पहली बार दक्षिण एशिया के देश शामिल हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शुक्रवार को कहा कि अपने मतभेदों को दूर करने के लिए भारत तथा पकिस्तान के पास अब एक नया मंच है।
कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव ने कहा कि दो नए सदस्यों के शमिल होने से संगठन के विकास को नई गति मिली है और इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रासंगिकता को और बढ़ावा मिलेगा।
नए आवेदन के लिए एससीओ ने अपने द्वार खोल रखे हैं और अगले उम्मीदवार के रूप में ईरान पर विचार किया जाएगा, जिसका रूस समर्थन करता है, जबकि संगठन के कुछ सदस्य इसका विरोध कर रहे हैं।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पक्के मित्र नजरबायेव ने कहा कि नए सदस्यों को शामिल करना संगठन के लिए जरूरी है, हालांकि उन्होंने किसी खास देश का नाम नहीं लिया।
ईरान की ही तरह अफगानिस्तान भी अब संगठन में प्रेक्षक की भूमिका में आ गया है और अंदरूनी संघर्षो से निजात पाने के बाद यह संगठन में शामिल हो सकता है।
पुतिन ने कहा कि यह स्पष्ट है कि अफगान संघर्ष का सैन्य समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि रूस तथा एससीओ के अन्य सदस्य एक ऐसे राजनीतिक समाधान का समर्थन करते हैं जो अफगान सरकार तथा तालिबान विद्रोहियों के बीच समझौते पर आधारित हो।
उन्होंने कहा कि एससीओ को संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करना चाहिए, ताकि अफगानिस्तान से ड्रग्स की तस्करी पर लगाम लग सके।
वहीं, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने आतंकवाद तथा ड्रग्स की तस्करी से निपटने के लिए एससीओ की रणनीति का समर्थन किया और कहा कि अफगानिस्तान से आतंकवादियों की मौजूदगी को जड़ से मिटाना संभव है।
अस्ताना के अंतिम घोषणापत्र के अलावा, एससीओ के नेताओं ने 10 अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें कट्टरवाद से निपटने के लिए एक सम्मेलन तथा अंतर्राष्ट्रीयआतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई के लिए एक घोषणा पत्र शामिल है।
आतंकवादी खतरों की ओर इशारा करते हुए पुतिन ने कहा कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकवादी संगठन की नजर मध्य एशियाई देशों तथा दक्षिणी रूस में अपनी पैठ बनाने पर है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एससीओ में भारत के शामिल होने से क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को नई गति मिलेगी।
वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि संगठन की आतंकवाद-रोधी पहल पाकिस्तान की सुरक्षा में सुधार करने में मददगार साबित होगी।
अस्ताना शिखर सम्मेलन के बाद रोटेटिंग पद्धति के तहत एससीओ की अध्यक्षता चीन करेगा और साल 2018 में होने वाली अगली बैठक की मेजबानी करेगा।
सौ से ज्यादा लोगों को लेकर जा रहे म्यांमार सेना के विमान का मलबा अंडमान सागर में मिला है।
न्यूज एजेंसी एएफपी ने एक म्येइक शहर के पर्यटन अधिकारी नैंग लिन जॉ के हवाले से कहा, ''हमें विमान के टुकड़े दवेई शहर से 218 किलोमीटर दूर समुद्र में मिले हैं।''
एयरफोर्स के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नौसेना के राहत पोत ने विमान के टुकड़ों का पता लगाया।
मिलिट्री कमांडर-इन-चीफ मिन आंग ह्लांग के कार्यालय ने एक बयान में कहा, ''विमान के दवेई शहर से 20 मील पश्चिम पहुंचने के बाद 1.35 बजे अचानक संपर्क टूट गया था।''
कार्यालय के अनुसार, विमान में म्येइक एयरफोर्स कमांड के अधिकारी और उनके परिवार वाले बैठे थे जिनकी संख्या 105 बताई गई है। इसके अलावा विमान पर 11 क्रू के सदस्य थे।
विमान की तलाश के लिए चार नौसेना के जहाज और एयरफोर्स के दो विमान भेजे गए थे। यह विमान म्येइक और यंगून शहर के बीच 18,000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर उड़ रहा था। म्यांमार की व्यापारिक राजधानी यंगून से दवेई दो घंटे की हवाई दूरी पर है।
ईरान की संसद पर बुधवार (7 जून) को तीन बंदूकधारियों ने हमला कर दिया। आतंकी संगठन आईएस ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
ईरान में आज दो जगह पर आतंकी हमले हुए। इन दोनों ही आतंकी हमलों में 12 लोगों के मारे जाने और 39 लोगों के घायल होने की खबर है।
वहीं सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ खत्म होने की जानकारी भी सामने आ रही है।
प्रेस टीवी के मुताबिक, संसद में छिपे सभी आतंकियों को मार गिराया गया है।
बता दें आज दोपहर लगभग 12 से 12:30 बजे के बीच में पहला आतंकी हमला ईरान की संसद पर हुआ। यहां आतंकियों की अंधाधुंध फायरिंग में कई लोग घायल हो गए और एक गार्ड की मौके पर ही मौत हो गई।
वहीं दूसरा हमला दक्षिणी तेहरान इलाके में हुआ। यहां पर खुमैनी दरगाह में एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया जिसमें कई लोग घायल हो गए और एक शख्स की मौके पर ही मौत हो गई।
वहीं दरगाह पर एक दूसरा हमलावर भी मौजूद था जिसने साइनाइड कैप्सूल खाकर आत्महत्या कर ली।
आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ईरान के तेहरान में बुधवार को संसद और इमाम अयातुल्लाह खुमैनी की दरगाह पर हुए हमलों की जिम्मेदारी ली है। आईएस से संबद्ध समाचार एजेंसी अमाक के मुताबिक, ये दोनों हमलों को आईएस ने ही अंजाम दिया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरआईबी ने एक सांसद के हवाले से बताया कि हमलावरों ने एके-47 राइफ़लों का इस्तेमाल किया है। इसके अलावा तेहरान में साइनाइड कैप्सूल खाकर आत्महत्या करने वाले हमलावर के पास से 8 ग्रिनेड्स, राइफल की 10 मैग्जीन और कुछ तरल पदार्थ बरामद किया गया है।
एजेंसी आईआरआईबी के मुताबिक, सांसद इलियास हज़रती ने कहा, ''तीन हमलावर थे जिनमें से दो के पास कलाशनिकोव राइफ़ल और एक के पास कोल्ट पिस्टल थी।''
वहीं संसद में कुछ लोगों को हमलावरों द्वारा बंधक भी बना लिया गया था। आतंकियों को मार गिराने के बाद बंधकों को निकाला गया।
बता दें संसद पर हुए हमले में शामिल एक आतंकी की तस्वीर भी प्रेस टीवी ने अपने ट्वीट के जरिए जारी की थी। संसद पर हमला करने वाले सभी आतंकियों को सुरक्षा बलों द्वारा ढ़ेर किया जा चुका है। इन आतंकी हमलों के बाद ईरान में सभी जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कई जगहों पर रेड भी डाली जा रही है।
प्रेस टीवी के मुताबिक, खुमैनी हमले के मामले में 3 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थिति को अब काबू में कर लिया गया है।
अफगानिस्तान में कब्रिस्तान पर आतंकी हमला
ब्रिटेन के लंदन में दो अलग-अलग जगह हुए आतंकवादी हमलों में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 48 घायल हो गए। पुलिस ने तीन हमलावरों को भी मार गिराया।
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कहा है कि यह कहने का समय है कि जब आतंकवाद से निपटने की बात आती है तो "पर्याप्त पर्याप्त" है। उन्होंने कहा, "हम ऐसा नहीं कर सकते हैं और न ही ढोंग कर सकते हैं कि चीजें जारी रहें।" उन्होंने कहा कि गुरुवार को आम चुनाव की योजना तैयार की जाएगी।
बीबीसी के मुताबिक, यह हमला लंदन ब्रिज पर शनिवार को रात 10 बजे हुआ। वैन सड़क पर चल रहे लोगों को कुचलती हुई चली गई। यह वैन लोगों को कुचलते हुए बोर बाजार की ओर बढ़ती चली गई, जहां वैन से तीन हमलावर उतरे और उन्होंने रेस्तरां में लोगों पर चाकू से हमले करने शुरू कर दिए। घायलों में एक ब्रिटिश परिवहन पुलिस का अधिकारी भी है।
हालांकि, मौके पर पहुंची पुलिस ने आठ मिनट के भीतर ही संदिग्धों को मार गिराया।
मेट्रोपॉलिटन पुलिस सहायक आयुक्त मार्क रॉवले ने बताया, ''संदिग्धों ने विस्फोटक जैकेट जैसा कुछ पहना हुआ था जो जांच के बाद नकली निकले।''
उन्होंने बताया कि ऐसा लग रहा है कि इन घटनाओं को तीन ही हमलावरों ने अंजाम दिया।
मेट्रॉपॉलिटन पुलिस ने ट्वीट कर कहा, ''लंदन ब्रिज और बोर बाजार की घटनाएं आतंकवादी घटनाएं थीं।
बीबीसी ने रॉवले के हवाले से बताया, ''हम इसे आतंकवादी घटना मान रहे हैं और इसकी जांच कर रहे हैं।''
ब्रिटेन में सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी ने आम चुनाव का प्रचार की योजना रद्द कर दी है। प्रधानमंत्री थेरेसा मे सरकार की संकट समिति की आपात बैठक की अध्यक्षता करेंगी।
द गार्डियन के मुताबिक, लंदन के महापौर सादिक खान ने कहा कि मुझे यह जानकर गुस्सा आ रहा है कि ये कायर आतंकवादी लंदन के निर्दोष लोगों को जानबूझकर निशाना बना रहे हैं।
विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बिन ने इस घटना को बर्बर बताया।
सीएनएन ने व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर के हवाले से बतायाकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस संबंध में पूर्ण जानकारी दी गई है।
ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, ''अमेरिका, लंदन और ब्रिटेन की जो भी मदद कर सकता है, वह करेगा। हम आपके साथ हैं।''
उन्होंने एक अन्य ट्वीट कर कहा, ''मे चौकस रहने की जरूरत है। अदालतों को हमारे अधिकार लौटाने चाहिए। हमें यात्रा प्रतिबंध को उच्च स्तर पर प्रभावी करने की जरूरत है।''
मार्च के बाद से यह ब्रिटेन में हुआ तीसरा आतंकवादी हमला है।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना के बाद लंदन ब्रिज को बंद कर दिया गया। बसों के मार्गो में बदलाव किया गया है और पास के साउथवार्क ब्रिज को भी बंद कर दिया गया है।
हालांकि, अभी तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
बीबीसी के रिपोर्टर हॉली जोन्स का कहना है कि वैन को एक पुरूष चला रहा था और वैन की रफ्तार 50 मील प्रतिघंटा थी। जोन्स उस समय घटनास्थल पर ही मौजूद थे।
जोन्स ने कहा, ''वैन मेरे सामने से ही निकली और उसने पांच से छह लोगों को टक्कर मार दी। वैन ने दो लोगों को मेरे सामने ही टक्कर मारी।''
लंदन ब्रिज की घटना का गवाह बने एक जोड़े ने कहा, ''हमने एक शख्स को देखा, वह दूसरे शख्स पर चाकू से हमला कर रहा था। उसने तीन बार उस पर चाकू से वार किया।''
गौरतलब है कि लंदन के मैनचेस्टर में ही 22 मई को आतंकवादी हमला हुआ था जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी। ब्रिटेन सरकार ने मैनचेस्टर हमले के मद्देनजर आतंकी अलर्ट का स्तर बढ़ा दिया था और पुलिस की सहायता के लिए सेना की तैनाती भी कर दी थी।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने गुरुवार (1 जून) को आपसी हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर तथा ऊर्जा और व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर व्यापक बातचीत की।
अपनी मुलाकात की शुरूआत में मोदी ने पुतिन से कहा कि वह प्रधानमंत्री के रूप में पुतिन के गृहनगर आकर खुश हैं। पहली बार रूस में भारत-रूस शिखरवार्ता मॉस्को से बाहर सेंट पीटर्सबर्ग में हो रही है।
मोदी ने कहा, ''सामान्य तौर पर अंतरराष्ट्रीय संबंध ऊपर नीचे होते रहते हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि भारत-रूस संबंधों में कोई उतार चढ़ाव नहीं आया।''
मोदी ने भारत को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की सदस्यता दिलाने में अहम भूमिका निभाने के लिए रूस के राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया।
पुतिन ने कहा कि भारत एक सप्ताह में शंघाई सहयोग संगठन का पूर्णरूपेण सदस्य बन जाएगा।
मोदी ने पुतिन के साथ बातचीत में सुबह द्वितीय विश्व युद्ध के शहीदों के स्मारक के अपने दौरे का जिक्र किया। उन्होंने पुतिन से कहा, ''आप ऐसे नेता हैं जिसके परिवार ने बलिदान दिया। आपके भाई ने शहादत दी थी।''
पुतिन के भाई 70 साल पहले द्वितीय विश्व युद्ध में लेनिनग्राड हमले में मारे गये थे। उन्होंने युद्ध स्मारक जाने के लिए मोदी का आभार जताया और कहा कि रूस की जनता के दिल में ऐसी जगहों के लिए खास महत्व है।
दोनों पक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी, रेलवे, सांस्कृतिक आदान-प्रदान समेत कई क्षेत्रों में और निजी पक्षों के बीच भी अन्य कारोबारी क्षेत्रों में 12 समझौतों पर दस्तखत कर सकते हैं। वे एक विजन डॉक्यूमेंट भी जारी करेंगे। वे कुडनकुलम में भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र की अंतिम दो इकाइयों के निर्माण के लिए करार भी कर सकते हैं।
बता दें कि पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री आर्थिक एवं कारोबारी शिखर सम्मेलन में शामिल हो रहा है। दोनों देशों के बीच 7.8 अरब डॉलर का कारोबार है जिसमें 2014 की तुलना में कमी आई है। तब यह 10 अरब डॉलर था। दोनों देश अगले पांच साल में व्यापार को 30 अरब डॉलर पहुंचाने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे हैं।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने आज (1 जून) कहा कि दक्षिण एशिया में टिकाऊ शांति के लिए भारत बड़ा अवरोधक बन गया है। इसके अलावा उन्होंने कश्मीर मुद्दे को बंटवारे का अपूर्ण एजेंडा बताया।
डॉन के मुताबिक, संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान एवं भारत के बीच तल्ख द्विपक्षीय संबंधों को रेखांकित किया।
कश्मीर को उपमहाद्वीप के बंटवारे का अपूर्ण एजेंडा बताते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा, ''भारत क्षेत्र में टिकाऊ शांति के लिए बड़ी बाधा बन गया है।''
उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान के शांति प्रयासों पर सकारात्मक जवाब की बजाए भारत ने कुलभूषण जाधव, आतंकवादियों और अन्य जासूसों को भेजा।''
कश्मीर की स्थिति और जाधव मामले सहित विभिन्न मुद्दों पर भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण है।
बता दें कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन से पहले भी कई पाकिस्तान हुक्मरान कश्मीर को बंटवारे का अधूरा एजेंडा बता चुके हैं। इसी साल जनवरी में पाकिस्तान के पूर्व आर्मी चीफ राहील शरीफ ने भी ऐसा ही बयान दिया था।
पिछले ही महीने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी कहा था कि कश्मीर बंटवारे के दौरान अधूरा रह गया एजेंडा है।
भारत ने पाकिस्तान की इस बयानबाजी पर कड़ा उत्तर दिया था और पाकिस्तान से आतंक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
उरी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के संबंध लगातार तनावपूर्ण चल रहे हैं। भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में क्रॉस बॉर्डर एक्शन कर पाकिस्तान को इस हमले का करारा जवाब दिया था।
इधर पाकिस्तान की संसद के संयुक्त सत्र में अपने सालाना अभिभाषण के दौरान राष्ट्रपति ममनून हुसैन को आज (1 जून) विपक्ष का विरोध झेलना पड़ा और सांसदों ने 'गो नवाज गो' जैसे सरकार विरोधी नारे लगाये।
विपक्ष की मुख्य दलील है कि सरकार ने बजट पर विपक्षी नेताओं के भाषण का सरकारी चैनल पीटीवी पर सीधा प्रसारण करने से इनकार कर दिया है।
सत्र शुरू होते ही विपक्ष ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में अवरोध डालना शुरू कर दिया। कुछ सांसदों ने तो सीटी बजाई और कुछ ने नारेबाजी की। सांसदों को मेजें थपथपाकर 'गो नवाज गो' जैसे नारे लगाते सुना गया। बाद में विपक्ष ने सदन से वाकआउट किया।
संसद के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए विपक्ष के नेता खुर्शीद शाह ने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए अलोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार के प्रमुख मुद्दे पर कोई बात नहीं रखी।''
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के वजीर अकबर खान इलाके में आज एक कार में जबर्दस्त आत्मघाती बम धमाका हुआ जिसमें 80 लोग मारे गए और 350 घायल हो गए।
अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है। फिलहाल धमाके की जिम्मेदारी किसी आतंकी संगठन ने नहीं ली है।
टीवी रिपोर्ट्स में बताया गया कि धमाका जर्मन मिशन के पास हुआ जिसमें 50 मीटर की दूरी पर स्थित भारतीय दूतावास की इमारत को भी नुकसान पहुंचा है।
वहीं भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर बताया कि जबर्दस्त धमाके के बाद भारतीय स्टाफ और राजनयिक सुरक्षित हैं।
वहीं भारतीय राजदूत मनप्रीत वोहरा ने कहा, ''धमाके के कारण दूतावास की कुछ खिड़कियां टूट गई हैं, लेकिन स्टाफ सुरक्षित है।''
इस मामले में और ज्यादा जानकारी का इंतजार है।
इससे पहले 8 मार्च को काबुल स्थित अफगानिस्तान के सबसे बड़े सैन्य अस्पताल पर डॉक्टरों की भेष में आतंकवादियों ने हमला किया था। सुरक्षाकर्मियों के साथ छह घंटे चली मुठभेड़ में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी जो अफगानिस्तान में अपना असर बढ़ाने में लगा है।
इसके बाद अफगानिस्तान में 13 मार्च को व्यस्त समय के दौरान एक बस में शक्तिशाली विस्फोट हुआ था। किसी संगठन ने इस धमाके की जिम्मेदारी नहीं ली थी। यह हमला उस वक्त हुआ था, जब तालिबान ने वार्षिक बसंत उत्सव की आधिकारिक शुरुआत से पहले हमले तेज कर दिए थे।
अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय ने शुरुआती सूचना के आधार पर बताया था कि विस्फोट में कम से कम एक महिला की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए। काबुल पुलिस के प्रवक्ता बसीर मुजाहिद ने कहा था, ''काबुल में मिनीबस को निशाना बनाकर विस्फोट किया गया।''
1 मार्च को भी काबुल में बम विस्फोट हुआ था। चरमपंथियों ने दो सुरक्षा परिसरों पर हमला किया था जिनमें 15 लोग मारे गए और 38 अन्य घायल हो गए थे।
अफगान गृह मंत्रालय ने बताया था कि पश्चिमी काबुल में एक आत्मघाती कार बम हमलावर ने पुलिस परिसर को निशाना बनाने का प्रयास किया और वहाँ गोलीबारी भी हुई थी। इस हमले के बाद आसमान में धुआं उठता दिखाई पड़ा था।
अफगान गृह मंत्रालय ने कहा था कि इस हमले के पांच मिनट बाद ही एक अन्य आत्मघाती हमलावर ने पूर्वी काबुल में अफगान खुफिया एजेंसी के भवन में गेट पर हुए खुद को उड़ा लिया था।
अमेरिका के ओरीगोन स्थित उत्तरी पोर्टलैंड में शुक्रवार को एक शख्स ने दो लोगों पर इसलिए जानलेवा हमला कर दिया क्योंकि उन्होंने आरोपी को हिजाब में दो युवतियों पर नस्लीय टिप्पणी करने से रोका था। आरोपी तब चिल्ला रहा था कि मुस्लिमों को मरना होगा। इस हमले में दोनों लोगों की मौत हो गई और आरोपी को जेल भेजा गया है।
पुलिस इस बारे में आरोपी से पूछताछ करेगी कि उसमें ऐसे कट्टर विचार कहाँ से आए?
यह हमला मुस्लिमों के पाक महीने रमजान के पहले दिन हुआ। ऐसे में अपनी सहिष्णुता और उदारवादी विचारों के लिए जाना जाने वाला पोर्टलैंड शहर इस घटना से सकते में है।
चश्मदीद क्रिस्टफर डगलस ने कहा कि जिस तरह से लोग ऐसी कट्टरता दिखाते हैं, उससे मुझे डर लगता है। पोर्टलैंड अपने उदारवादी विचारों के लिए जाना जाता है, लेकिन मुझे लगता है कि हकीकत अब बदल रही है।
वहीं, आरोपी जेरमी जोसेफ क्रिस्चियन (35) को कई मामलों के संदेह में मल्टनोमाह कंट्री जेल में भेजा गया है। शुक्रवार को हुए हमले के कुछ देर बाद ही उसकी गिरफ्तारी हुई थी। मंगलावर को कोर्ट में उसकी पेशी है और अगर वकील न मिला तो वह छूट भी नहीं पाएगा। पुलिस ने इस मामले में पीड़ितों की पहचान ओरीगोन में हैपी वैली के निवासी रिकी जॉन बेस्ट (53) और पोर्टलैंड के मायरिड्न नामकाई मेशे (23) के रूप में की।
पुलिस के मुताबिक, बेस्ट ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था और मेशे की अस्पताल में मौत हुई थी।
पुलिस का यह भी कहना है कि पोर्टलैंड की मीकाह डेविड-कोल फ्लेचर (21) पर भी जानलेवा हमला हुआ था। फिलहाल उनकी हालत पोर्टलैंड अस्पताल में गंभीर है। हमले के दौरान ट्रेन में उन दो युवतियों की पहचान भी हो गई है जिन्होंने तब हिजाब पहन रखा था। पुलिस के मुताबिक, हमलावर ट्रेन में भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल कर रहा था।
स्थानीय मीडिया को उन्हीं युवतियों में से एक की माँ डायजुआना हडसन ने बताया कि युवतियों को देखते ही आरोपी उन पर नस्लीय टिप्पणी करना शुरू कर दिया था। उनकी बेटी अफ्रीकी-अमेरिकी है। उसकी दोस्त हिजाब पहने थी। आरोपी कह रहा था कि मुस्लिमों को मरना होगा। वह सालों से क्रिस्चियन को मारते आ रहे हैं।
आरोपी जेरमी जोसेफ क्रिस्चियन 15 साल पहले चोरी और किडनैपिंग के मामलों में जेल जा चुका है।









