भारत और चीन के बीच सिक्किम में हुए ताजा सीमा विवाद के बाद दोनों देशों ने इस इलाके में सुरक्षा बंदोबस्त बढ़ा दिया है। चीन और भारत दोनों ने इस इलाके में तीन-तीन हजार सैनिक तैनात कर रखे हैं।
भारतीय सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने गुरुवार (29 जून) को गंगटोक स्थित 17 माउंटेन डिविजन और कालिमपॉन्ग में 27 माउंटेन डिविजन का दौरा किया।
विवाद तब शुरू हुआ, जब चीनी सैनिकों ने भारतीय इलाके में बने दो अस्थायी बंकरों को नष्ट कर दिया। भारत के सिक्किम में स्थित विवादित इलाका भूटान और तिब्बत के सीमा के निकट है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस इलाके खासकर डोका ला में हालात कई सालों से गंभीर बनी हुई है। दोनों ही देश अपने सैनिकों को पीछे नहीं हटाना चाहते। चीन द्वारा घुसपैठ की ताजा कोशिश को रोकने के लिए भारतीय सैनिकों ने मानव दीवार बनाई थी। बिपिन रावत ने अपने दौरे में 17वीं डिविजन पर विशेष ध्यान दिया। 17वीं डिविजन की चार ब्रिगेडो पर पूर्वी सिक्किम की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। हर ब्रिगेड में तीन हजार से अधिक सैनिक हैं। बिपिन रावत के दौरे में 33 कॉर्प्स और 17वीं डिविजन के सभी अधिकारी मौजूद रहे। रावत शुक्रवार (30 जून) सुबह नई दिल्ली वापस लौट गए।
चीन इस इलाके में भूटान की डोकलाम घाटी तक जाने वाली सड़क बनाना चाहता है, लेकिन भारत ने ऐसा करने की इजाजत देने से साफ मना कर दिया है। भूटान ने भी चीन को सड़क निर्माण रोकने के लिए कहा है। चीन उच्च गुणवत्ता वाली चौड़ी सड़क बना रहा है जिस पर भारी सैन्य वाहन भी आसानी से जा सकें।
चीन की सेना ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि उसने तिब्बत में 35 टन वजन वाले टैंक का सड़क परीक्षण किया। माना जा रहा है कि चीन 40 टन तक वजन सह सकने वाली सड़क बना रहा है।
चीन 269 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाली डोकलाम घाटी में सड़क बनाकर सिक्किम और भूटान के बीच पड़ने वाली अपनी चंबी घाटी में अपनी सामरिक स्थिति मजबूत करना चाहता है। चीन चाहता है कि भूटान डोकलाम घाटी उसे सौंप दे, बदले में वो उसे उत्तरी भूटान के 495 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर अपना दावा छोड़ देगा। लेकिन भारत अपने सुरक्षा जरूरतों के मद्देनजर इस इलाके को लेकर बहुत संवेदनशील है।
चीन ने गुरुवार (29 जून) को भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने चीनी क्षेत्र से अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाया तो इससे सीमा पर मौजूदा तनाव और बढ़ेगा और सीमा पर गतिरोध को लेकर अर्थपूर्ण वार्ता के लिए यही शर्त है।
बीजिंग ने कहा कि उसके पास भारतीय सैनिकों के चीनी सीमा के उल्लंघन की तस्वीरें हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने संवाददाताओं से बातचीत में कुछ सेकंड के लिए तस्वीरें दिखाईं। दूरी के कारण तस्वीर स्पष्ट रूप से नहीं दिख पाई।
लू ने कहा कि प्रेस वार्ता के बाद ये तस्वीरें विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर डाली जाएंगी। उन्होंने कहा, ''हम एक बार फिर भारतीय पक्ष से ऐतिहासिक सीमा सम्मेलन का पालन करने, चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता का आदर करने तथा तनाव में और इजाफा न हो इसके लिए सैनिकों को वापस भारतीय सीमा में लौटने का आग्रह करते हैं।''
उन्होंने कहा, 'विवाद के निपटारे के लिए यही शर्त है और अर्थपूर्ण वार्ता शुरू करने का आधार भी।''
लु द्वारा चीनी क्षेत्र कहने का मतलब डोंगलोंग तथा डोकलाम से है जो चीन तथा भूटान के बीच एक विवादित क्षेत्र है, जहां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी तथा भारतीय सैनिकों के बीच झड़प हुई है। चीन ने भारत पर भूटान की मिलीभगत से सड़क निर्माण को बाधित करने का आरोप लगाया है।
सैनिकों के आमने-सामने आने के बाद चीन ने भारतीय तीर्थयात्रियों की कैलाश मानसरोवर यात्रा निलंबित कर दी। तीर्थयात्री नाथुला दर्रा होते हुए कैलाश मानसरोवर जाने वाले थे जिसे बंद कर दिया गया है।
लु ने कहा कि भारतीय सैनिकों के चीनी क्षेत्र में घुसने की खबर से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, ''भारत हमारे ऐतिहासिक सीमा सम्मेलनों के साथ ही भारत सरकार के वादे का उल्लंघन कर रहा है। मैं आपको सीमा के उल्लंघन की तस्वीरें दिखा सकता हूं।''
चीन ने डोकलाम या डोंगलोंग इलाके के जोंपलरी में एक भूटानी सैन्य शिविर की तरफ सड़क निर्माण पर भूटान के विरोध को दरकिनार करते हुए कहा कि यह चीनी क्षेत्र में हो रहा है तथा निर्माण न्यायोचित व वैध है।
भूटान ने इस घटना को लेकर नई दिल्ली में चीनी दूतावास को एक डेमार्श (कूटनीतिक कार्यवाही) जारी किया है क्योंकि दोनों देशों के बीच कोई कूटनीतिक रिश्ता नहीं है।
लु ने कहा, ''डोंगलोंग प्राचीन काल से ही चीन का हिस्सा है। यह निर्विवाद क्षेत्र है और इस संबंध में हमारे पास पर्याप्त कानूनी आधार हैं।''
लु ने कहा, ''और अपने क्षेत्र में सड़क निर्माण करना चीन की संप्रभु कार्रवाई है। यह पूरी तरह न्यायोचित तथा वैध है।''
केवल भारत व भूटान ही नहीं, चीन के बाकी 12 पड़ोसी मुल्कों के साथ सीमा को लेकर विवाद हैं।
चीन ने सिक्किम सेक्टर में सड़क निर्माण को वैध करार दिया और कहा कि यह निर्माण चीन के उस इलाके में किया जा रहा है जो न तो भारत का है और न ही भूटान का और किसी अन्य देश को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
चीन ने इशारा किया कि भारत भूटान की ओर से सिक्किम क्षेत्र के दोंगलांग में सड़क निर्माण के प्रयासों का विरोध कर रहा है जिसका चीन के साथ कोई राजनयिक संबंध नहीं है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ल्यू कांग ने मीडिया से कहा, ''दोंगलांग चीनी क्षेत्र में आता है। यह अविवादित है। दोंगलांग क्षेत्र प्राचीन काल से चीन का हिस्सा है भूटान का नहीं।''
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, ''भारत इस क्षेत्र के साथ मुद्दा उठाना चाहता है। मेरा कहना है कि यह भूटान का हिस्सा नहीं है, और न ही यह भारत का हिस्सा है। तो हमारे पास इसके लिए पूरा कानूनी आधार है। चीन की सड़क निर्माण परियोजना वैध है और उसके क्षेत्र के भीतर यह सामान गतिविधि है। किसी भी देश को इसमें हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।''
भारत पर निशाना साधते हुए ल्यू ने कहा कि भूटान वैश्विक मान्यता प्राप्त संप्रभु देश है।
उन्होंने कहा, ''उम्मीद है कि अन्य देश दूसरे देश की संप्रभुता को सम्मान देंगे। चीन-भूटान सीमा निरूपित नहीं है, किसी भी तीसरे पक्ष को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और न ही कोई गैरजिम्मेदाराना कार्य करना चाहिए और न ही बयानबाजी।''
चीन का कहना है कि भारत-चीन सीमा का सिक्किम भाग निर्धारित है इसलिए भारत को सड़क निर्माण में आपत्ति उठाने का अधिकार नही है। उन्होंने कहा कि चीन ने इसी कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सिक्किम क्षेत्र में नाथूला दर्रे को भारतीय श्रद्धालुओं के लिए खोला था।
चीनी विचारकों का मानना है कि भारत ने भूटान की ओर से सड़क निर्माण का कार्य रोका है। इससे पहले चीन ने सिक्किम में सड़क निर्माण को जायज ठहराते हुए कहा था कि 1890 में हुई चीन-ब्रिटेन संधि के अनुसार, निसंदेह वह क्षेत्र उसकी सीमा में आता है।
ल्यू कांग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि सिक्किम का प्राचीन नाम 'झी' था। उन्होंने कहा, ''भारतीय सेना ने जिस क्षेत्र पर आपत्ति उठाई है। वह इस संधि के मुताबिक, निसंदेह चीन की सीमा की ओर स्थित है। चीन की ओर से यह बयान भारतीय सेना द्वारा सड़क निर्माण पर रोक लगाए जाने के चीनी सेना के आरोपों के एक दिन बाद आया है। चीन भारत-चीन सीमा के सिक्किम को अपना 'संप्रभु क्षेत्र' मानता है। ल्यू ने कहा कि भारत-चीन सीमा के सिक्किम प्रखंड को चीन और भारत दोनों ने मान्यता दी थी।
उन्होंने कहा, ''भारतीय नेताओं, भारत सरकार में संबंधित दस्तावेज, चीन-भारत सीमा मुद्दे के विशेष प्रतिनिधियों की बैठक ने इस बात की पुष्टि की कि दोनो पक्षों ने 1890 में चीन-ब्रिटेन संधि पर हस्ताक्षर किए थे और सिक्किम की चीन-भारत सीमा को आम सहमति के अनुसार देखने के निर्देश दिए थे।
प्रवक्ता ने कहा, ''इन संधियों और दस्तावेजों का पालन अंतरराष्ट्रीय बाध्यता है और भारतीय पक्ष इससे बच नहीं सकता।''
वहीं चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से सोमवार रात जारी एक बयान में कहा गया, ''भारतीय सीमा प्रहरियों ने भारत-चीन सीमा के सिक्किम क्षेत्र की सीमा को पार किया और चीनी क्षेत्र में घुस आए और उन्होंने दोंगलांग क्षेत्र में चीन के अग्रिम बलों की सामान्य गतिविधियों को बाधित किया जिसके बाद चीन ने रक्षात्मक कदम उठाए।''
इससे पहले कल ल्यू ने कहा था कि चीन ने भारतीय सैनिकों के सिक्किम में घुस आने का आरोप लगाते हुए तथा उन्हें तत्काल वापस बुलाने की मांग करते हुए भारत के समक्ष राजनयिक विरोध दर्ज करा दिया है।
उन्होंने यह भी कहा था कि सीमा गतिरोध के कारण चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नाथूला दर्रे को बंद कर दिया है।
चीन ने भारतीय सेना के एक बंकर पर बुलडोजर चला दिया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि भारत, चीन और भूटान के जंक्शन पर सेना के एक बंकर को चीन ने हटाने के लिए कहा था । भारत ने इंकार किया तो चीन ने जबरन बंकर ढाह दिया।
यह घटना जून के पहले हफ्ते में सिक्किम के डोका ला जनरल क्षेत्र में हुई जिसके बाद भारत-चीन बॉर्डर पर तनाव बढ़ गया है।
सिक्किम से लगी सीमा पर भारत कई नए बंकर बना रहा है और पुराने बंकरों को दुरुस्त कर रहा है, यह कवायद चीन को रास नहीं आई।
भारत-चीन के बीच जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3,488 किलोमीटर की सीमा है। इसमें से 220 किलोमीटर सिक्किम में आता है।
बीजिंग बीते दिनों तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के अरुणाचल दौरे को लेकर पहले ही नाराजगी जता चुका है।
पीटीआई के मुताबिक, चीनी सैनिक सिक्किम के अलावा आगे के क्षेत्रों में तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सीमांकन हो चुका है। सिक्किम सरकार ने केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट भेजकर डोका-ला की घटना के बाद पैदा हुए हालातों की जानकारी दी है।
भारत और चीन के बीच जारी तनाव के चलते कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले करीब 50 श्रद्धालुओं को नाथू ला बॉर्डर से वापस लौटा दिया गया था। तीन दिन तक नाथू ला में चीन की तरफ से इजाजत मिलने का इंतजार करने के बाद तीर्थयात्री 23 जून को वापस गंगटोक आ गए।
दूसरी तरफ, भूटान ने चीनी राजदूत को डिमार्श जारी करते हुए कहा है कि वह डोकलाम क्षेत्र में पहले जैसी स्थिति बहाल करे, जहां चीनी सैनिक अपनी मर्जी से सड़क बना रहे हैं।
चीन ने भारतीय सैनिकों पर अपनी सीमा के उल्लंघन का आरोप लगाया है और उन्हें वापस लौटने को कहा है।
लु ने कहा, ''वहां के हालात पर आपात प्रतिक्रिया के रूप में तीर्थयात्रा रोकनी पड़ी। मैं कहना चाहता हूं कि तीर्थयात्रा शुरू करने के लिए आवश्यक माहौल तथा हालात की जरूरत है।''
उन्होंने कहा, ''इसलिए इसकी पूरी जवाबदेही भारतीय पक्ष की है और यह कब पुन: शुरू होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि भारतीय पक्ष अपनी गलती सुधारता है या नहीं।''
भारत तथा अमेरिका द्वारा पाकिस्तान से अपनी सरजमीं का इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद के लिए न करना सुनिश्चित करने की अपील करने के बाद चीन ने बुधवार को इस्लामाबाद का मजबूती से बचाव किया है। चीन ने यह भी कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे 'अग्रिम मोर्चे' पर है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को उसे इसके लिए उचित मान्यता देनी चाहिए।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने कहा, ''हम आतंकवाद के हर रूप का विरोध करते हैं। यह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि हम आतंकवाद को किसी खास देश से जोड़ने के खिलाफ हैं।''
उन्होंने कहा, ''हमें कहना होगा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम मोर्चे पर खड़ा है और इस संबंध में प्रयास कर रहा है।''
लु ने कहा, ''हमारा मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय संपर्क बढ़ाया जाना चाहिए और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस संबंध में प्रयासों के लिए पाकिस्तान को पूर्ण मान्यता देनी चाहिए।''
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तथा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सोमवार को हुई बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में पाकिस्तान से अपील की गई कि वह अपनी सरजमीं का इस्तेमाल आतंकवादियों द्वारा दूसरे देशों पर हमलों के लिए न होना सुनिश्चित करे।
बयान में मुंबई, पठानकोट तथा सीमा पार से भारत पर हुए अन्य आतंकवादी हमलों के साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में लाने की अपील की गई।
उत्तर-पश्चिमी कोलंबिया के एक जलाश्य में पर्यटकों को ले जा रही एक नौका के डूबने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और 28 अन्य लापता हो गए।
यह जानकारी एक क्षेत्रीय अधिकारी ने दी है।
अधिकारियों ने अभी यह जानकारी नहीं दी है कि चार डेक वाली एल्मीरांते कैसे गुआटापे के पर्यटक स्थल में एल पेनोल जलाशय में डूब गई। यहां कोलंबिया एवं विदेशी पर्यटक शानदार क्रूज आदि पर घूमने आते हैं।
एंटियोक्किया क्षेत्रीय सरकार के आपदा निवारण विभाग की प्रमुख मार्गारीटा मोनकाडा ने कहा, ''हम अभी नौ लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि कर सकते हैं। वहीं करीब 28 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट है।''
उन्होंने बताया कि नौका में 170 लोग सवार थे, उनमें से अधिकतर लोगों को या तो अन्य नौकाओं ने बचा लिया, या फिर वे खुद ही बच निकले।
अग्निश्मन विभाग के कप्तान लुइस बर्नार्डो मोरालेस ने कहा, ''वह बेहद जल्दी डूब गई। यह सब कुछ मिनटों में हो गया।''
सेना ने बताया कि वायु सेना का एक और सेना के दो हेलीकॉप्टर बचाव कार्य के लिए भेजे गए।
जलाशय मेडेलिन शहर से 68 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और एंटियोक्किया विभाग के मुख्य पर्यटक स्थलों में से एक है।
एक पीड़ित महिला ने बताया कि नौका के नीचे के दो डेक अत्यधिक भरे थे और नौका में काफी बच्चे सवार थे।
एंटियोक्किया क्षेत्रीय सरकार ने ट्वीट कर बताया कि मलबे से निकाले गए 24 लोगों का अस्पताल में इलाज जारी है।
राष्ट्रपति जुआन मैनुअल सैंटोस ने ट्विटर पर कहा, ''आपात स्थिति से निपटने के लिए वायु सेना एवं बचाव सेवाओं को तैनात किया गया है।'' उन्होंने लिखा, ''हम आवश्यक सहायता प्रदान करने को तैयार हैं।''
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 6 इस्लामिक-बहुल देशों पर यात्रा प्रतिबंध को आंशिक रूप से प्रभावी करने की इजाजत दे दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले 7 देशों के मुसलमानों के अमेरिका आने पर रोक लगाई थी, लेकिन अदालत ने इस रोक को खारिज कर दिया था। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने 6 देशों के नागरिकों का नाम ही बैन लिस्ट में शामिल किया था। इनमें सीरिया, लीबिया, ईरान, सोमालिया, सूडान और यमन के नागरिक शामिल थे।
नयी सूची में ट्रम्प ने इराक का नाम बैन लिस्ट से हटा दिया था। ट्रंप ने यात्रा प्रतिबंध पर रोक लगाने के अदालत के आदेश की आलोचना करते हुए इसे 'एक बहुत बुरा फैसला, अपने देश की सुरक्षा के लिए बहुत बुरा फैसला' बताया था।
ट्रंप के 6 देशों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने के आदेश को कई राज्यों की अदालतों ने खारिज कर दिया था। हवाई के एक संघीय जज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संशोधित यात्रा प्रतिबंध के प्रभावी होने से महज कुछ ही घंटे पहले इस पर रोक लगा थी।
अमेरिकी जिला जज डेरिक वाटसन ने फैसला सुनाया कि हवाई राज्य ने ट्रंप के शासकीय आदेश को कानूनी तौर पर दी गई चुनौती के संदर्भ में इस बात को मजबूती से स्थापित किया था कि यदि इस प्रतिबंध को आगे बढ़ाया जाता है तो इससे 'अपूर्णनीय क्षति' होगी।
चीनी सेना ने सोमवार को एक बार फिर अपनी कदम भारतीय सीमा में रखे। चीनी सेना की एक दल ने भारत के सिक्किम सेक्टर में सीमा लांघी और चीन-भारत सीमा की सुरक्षा में तैनात भारतीय सेना के जवानों के साथ झड़प हो गई।
इसके अलावा चीनी के जवानों ने दो बंकर भी तबाह कर दिए। इस दौरान भारत और चीनी सेना के सैनिकों के बीच टकराव हो गया।
पीटीआई ने अपने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा, चीनी सेना के जवानों ने कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं को भी जाने से रोक दिया था।
भारतीय सेना के जवानों को चीनी सेना के कर्मियों को भारतीय क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोकने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ा। भारतीय सेना के जवानों ने उनको रोकने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ मानव दीवार का निर्माण किया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने इस घटना की वीडियो और तस्वीरें ली। चीनी सेना की ओर से डकोला इलाके के लालटेन में बंकरों को निशाना बनाया गया और उन्हें तबाह कर दिया।
दोनों देशों की सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच 20 जून को फ्लैग मिटिंग हुई थी, लेकिन दोनों सेनाओं के बीच तनाव बरकरार है। डोका ला क्षेत्र में चीनी सेना की ओर से यह दूसरी बार की गई कार्रवाई है। इससे पहले नवंबर 2008 में चीनी सेना ने इसी क्षेत्र में भारतीय सेना के अस्थायी सैन्य बंकरों को नष्ट कर दिया था।
हाल ही में कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले तीर्थयात्रियों को चीन ने इंटरनेशनल बॉर्डर पार करने की इजाजत नहीं दी। विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया था कि नाथुला दर्रे से होकर कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले को लेकर चीन के साथ बातचीत की जा रही है।
चीन ने नाथुला दर्रा का रास्ता नहीं खोला था जिसके बाद 47 तीर्थयात्रियों को वापस लौटना पड़ा था।
हालांकि चीन ने अभी तक श्रद्धालुओं को इजाजत नहीं दिए जाने को लेकर चुप्पी साध रखी है। चीन ने सोमवार को यह बताने से इनकार किर दिया कि उसने कैलाश मानसरोवर जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं के एक जत्थे को क्यों रोक दिया, साथ ही कहा कि इस मुद्दे पर दोनों देशों का विदेश मंत्रालय संपर्क में है।
नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय सेना के गश्ती दल पर हमला करने वाली पाकिस्तान की बोर्डर एक्शन टीम (बैट) में विशेष बल के जवान और आतंकवादी शामिल थे। उनके पास विशेष खंजर और कैमरा लगा हेडबैंड था जिससे वे पुंछ जिले के हमले को रिकार्ड करना चाहते थे।
जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में 22 जून को हुए हमले में दो भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे और भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में 'बैट' का एक सदस्य मारा गया था। भारतीय सेना ने खोज एवं अन्य अभियानों के दौरान वहां से 'बैट' के एक सदस्य का शव बरामद किया था।
भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई भाषा से कहा, '' 'बैट' के प्रयास को नाकामयाब करने की कार्रवाई में मारे गए घुसपैठिए का शव स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है।''
उन्होंने कहा, ''हथियार, गोला बारूद और अन्य युद्ध संबंधी सामान जैसे विशेष खंजर, कैमरा लगा एक हेडबैंड, चाकू, एक एके-47 राइफल, तीन मैगजीन, दो ग्रेनेड के अलावा कुछ कपड़े और थैले वहां से बरामद किए गए हैं जो पाकिस्तानी सेना की बर्बर मानसिकता को दर्शाता है।’’
अधिकारी ने बताया कि 'बैट' के सदस्य ने कार्रवाई और जवानों को मारने की घटना को रिकॉर्ड करने के लिए हेडबैंड पहना था। बलों ने उनकी इस कोशिश को नाकामयाब कर दिया और इस जवाबी कार्रवाई में उनके एक सदस्य की मौत हो गई और अन्य घायल हो गए।
उन्होंने बताया कि यह जांच का विषय है कि कैमरा सीमा पार पाकिस्तानी सेना संस्थानों से लाइव जुड़ा था या नहीं। उन्होंने कहा, ''कैमरा के डेटा एवं विवरण की जांच की जाएगा।''
अधिकारी ने कहा, ''हमें यकीन है कि 'बैट' का एक और सदस्य मारा गया है, लेकिन उसका शव 'बैट' के अन्य सदस्य अपने साथ ले गए हैं।''
उन्होंने कहा, ''हमारे सैनिकों द्वारा की गई कठोर कार्रवाई नापाक योजना (सैनिकों का विघटित करने और उसे कैमरा में रिकार्ड करने) को कभी पूरा नहीं होने देगी।''
इस साल पाकिस्तानी विशेष बलों द्वारा नियंत्रण रेखा से 600 मीटर अंदर आकर पुंछ सेक्टर में हमला करने की यह तीसरी घटना है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी सेना की उनकी चौकियों से की गई भारी गोलीबारी के बीच बोर्डर एक्शन टीम 'बैट' ने करीब रात दो बजे हमला किया था। 'बैट' में आमतौर पर पाकिस्तान सेना के विशेष बलों के कर्मी और कुछ आतंकवादी होते हैं।
अधिकारी ने कहा, ''भारी हथियारों से लैस पांच-सात लोगों की एक बोर्डर एक्शन टीम पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी की आड़ में गुलपुर के अग्रिम इलाके पर नियंत्रण रेखा से 600 मीटर अंदर पुंछ सेक्टर में आ गई थी।''
पाकिस्तानी हमलावर भारतीय चौकियों के पास 200 मीटर तक पहुंच गए थे। हमले के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने गुलपुर-करमारा-चाकन दा-बाघ इलाकों के पास नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी की। अधिकारी ने बताया कि हथियारों से लैस घुसपैठियों ने भारतीय गश्ती दल के अधिकार क्षेत्र को निशाना बनाया था। हमले में औरंगाबाद के नाईक जाधव संदीप और कोल्हापुर के सिपाही माने श्रावण बालकू शहीद हो गए थे।
चीन में भयंकर भूस्खलन होने की खबर है। बताया जा रहा है इसके कारण 100 से ज्यादा लोगों के दफन हो जाने की आशंका है।
चीनी मीडिया के मुताबिक, सिचुआन प्रांत के माक्सियन काउंटी में आई इस प्राकृतिक आपदा के कारण कम से कम 40 घर ध्वस्त हो गए।
जानकारी के मुताबिक, भूस्खलन स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे आया। इलाके में 500 से ज्यादा बचावकर्मी पहुँचकर बचाव कार्य में लग गए हैं।
सरकार के मुताबिक, घटना तब हुई जब यहां स्थित पहाड़ी का एक हिस्सा टूटकर गिर गया। बचावकर्मी रस्सियों और बुलडोजर के सहारे पत्थरों को हटाने का काम कर रहे हैं।
स्थानीय पुलिस कप्तान चेन ताइबो ने बताया कि यहां कई टन पत्थर पड़ा है। हाल ही में यहां भीषण बारिश हुई थी जिसके कारण यह भूस्खलन हुआ है।
इससे पहले बांग्लादेश में भी हफ्ते भर तक लगातार हुए भूस्खलन से 163 लोगों की मौत हो गई थी। इस आपदा को सरकार ने इतिहास में अब तक का सबसे भीषण भूस्खलन करार दिया था।









