विदेश

मक्का की मस्जिद पर हमले के इरादे से आए आतंकी ने खुद को उड़ाया, 9 लोगों की मौत

सऊदी अरब के सुरक्षाबलों ने मुसलमानों के पवित्र शहर मक्का की मशहूर मस्जिद पर हमले की साजिश को नाकाम कर दिया। इस दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया।

इस हमले में कम से कम आठ नागरिकों और एक सैनिक की मौत हो गई। यह हमलावर चार आत्मघाती हमलावरों के समूह में से एक था जो अल-बगदादी शहर में घुस आए था। यह शहर अनबार प्रांत में फरात नदी के किनारे स्थित है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बल तीन आत्मघाती हमलावरों को एक घर में पकड़कर मारने में सक्षम रहे, लेकिन चौथा हमलावर भागने में सफल रहा और बाद में उसने सैनिकों और नागरिकों के बीच खुद को उड़ा लिया।

पुलिस अधिकारी और एक स्थानीय जिला अधिकारी शरहाबिल अल-ओबिदी ने बताया कि इस हमले में आठ नागरिक और एक सैनिक की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य लोग जख्मी हो गए। अनबार सऊदी अरब का रेगिस्तान वाला प्रांत है और इससे सीरिया और जॉर्डन की सीमाएं लगती है। यह इलाका लंबे समय से उग्रवादियों का गढ़ रहा है।

अफगानिस्‍तान: कार बम धमाके में 24 की मौत, 60 से ज्‍यादा घायल

अफगानिस्‍तान के हेलमंद राज्‍य की राजधानी में बैंक के बाहर खड़ी एक कार में बम ब्‍लास्‍ट किया गया है। लश्‍कर गाह शहर में हुए इस हमले में कम से कम 24 लोगों के मारे जाने की सूचना है और 60 से ज्‍यादा लोग घायल हुए हैं।

हमला स्‍थानीय समयानुसार दोपहर करीब 12 बजे हुआ। राज्‍य के गर्वनर उमर जाक ने कहा, ''घायलों में नागरिक और सेना के लोग हैं। अभी तक मृतकों की पुष्‍ट संख्‍या नहीं पता चली है।''

धमाका एक बैंक के बाहर हुआ, जहां लोग अपना वेतन लेने के लिए जमा हुए थे। धमाके वाली जगह देश की राजधानी काबुल से करीब 550 किलोमीटर की दूरी पर है। अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्‍मेदारी नहीं ली है।

अफगानिस्‍तान में पिछले कुछ महीनों से कार के जरिए किए जाने वाले आतंकी हमले बढ़ गए हैं। 31 मई को राजधानी काबुल में एक कार में आत्मघाती बम धमाका हुआ था जिसमें 80 लोग मारे गए और 350 घायल हो गए थे। धमाका जर्मन मिशन के पास हुआ था जिसमें 50 मीटर की दूरी पर स्थित भारतीय दूतावास की इमारत को भी नुकसान पहुंचा।

8 मार्च को काबुल स्थित अफगानिस्तान के सबसे बड़े सैन्य अस्पताल पर डॉक्टरों की भेष में आतंकवादियों ने हमला कर दिया था। सुरक्षाकर्मियों संग छह घंटे चली मुठभेड़ में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी।

13 मार्च को एक बस में शक्तिशाली विस्फोट हुआ था। किसी संगठन ने इस धमाके की जिम्मेदारी नहीं ली थी। यह हमला उस वक्त हुआ था, जब तालिबान ने वार्षिक बसंत उत्सव की आधिकारिक शुरुआत से पहले हमले तेज कर दिए थे।

सऊदी अरब में पर‍िवार रखने पर टैक्‍स लगेगा

सऊदी अरब शासन के एक ताजा फैसले से हजारों भारतीयों की मुश्किल बढ़ने वाली है। सऊदी अरब सरकार ने एक जुलाई से देश में रहने वाले प्रवासियों पर 'आश्रित कर' (डिपेंडेंट टैक्स) लगाने जा रही है। इसके तहत सऊदी अरब में परिवार के साथ रहने वाले दूसरे देशों के नागरिकों को प्रति आश्रित 100 रियाल (करीब 1700 रुपये) टैक्स के रूप में देने पड़ेंगे।

एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब में करीब 41 लाख भारतीय रहते हैं। सऊदी अरब में रहने वाले प्रवासियों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है।

कुछ प्रवासियों ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि इस टैक्स के बाद वो अपने परिवार को हिंदुस्तान वापस भेज देंगे। मोहम्मद ताहिर नामक सऊदी अरब में रहने वाले प्रवासी ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार से कहा कि वो इस टैक्स का बोझ नहीं उठा सकता औऱ वो अपने परिवार को हैदराबाद वापस भेज देगा। ताहिर ने अखबार को बताया कि उसके कई और जानने वाले भी ऐसा ही कदम उठा रहे हैं। मोहम्मद ताहिर कम्प्यूटर इंजीनियर हैं। एक अन्य भारतीय प्रवासी ने कहा कि सऊदी अरब सरकार चाहती है कि प्रवासी कुंवारे रहें।

सऊदी अरब सरकार पांच हजार रियाल (करीब 86 हजार रुपये) से ज्यादा आमदनी वाले प्रवासी कामगारों को फैमिली वीजा देती है। अगर पांच हजार रियाल वाले किसी परिवार में एक पति के अलावा एक पत्नी और दो बच्चे रहते हैं तो उसे सऊदी सरकार को हर महीने 300 रियाल (करीब पांच हजार रुपये) टैक्स के रूप में देने होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी सरकार 2020 तक हर साल ये टैक्स बढ़ाती रहेगी।

सऊदी सरकार के फरमान के मुताबिक, सभी प्रवासी परिवारों को इस टैक्स का एडवांस भुगतान करना होगा। यानी जिस परिवार में तीन आश्रित हैं उसके अभिभावक को 300 रियाल पहले ही टैक्स के रूप में देने होंगे। अभी तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब सरकार की तरफ से लगाए गए इस टैक्स के बारे में कोई बयान नहीं दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत और सऊदी अरब के रिश्ते काफी बेहतर हुए हैं। पिछले साल भारतीय पीएम सऊदी अरब के दो दिवसीय दौरे पर गए थे। सऊदी अरब सरकार पीएम मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी दे चुकी है। ऐसे में भारतीय कामगारों की कमर तोड़ने वाले इस टैक्स से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आने की संभावना है।

सऊदी किंग सलमान ने भतीजे को सत्ता से बेदखल किया

सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद ने बुधवार (21 जून, 2017) को अपने भतीजे को बेदखल कर बेटे मोहम्मद बिन सलमान को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। बेटे को उत्तराधिकारी घोषित करने के बाद 57 साल के भतीजे मोहम्मद बिन नायेफ की सारी शक्तियां छीन ली गई हैं।

सऊदी की रॉयल न्यूज एजेंसी के अनुसार, मोहम्मद बिन सलमान को उप प्रधानमंत्री पद सहित रक्षा मंत्रालय का पद संभालने की भी बात कही गई है। 81 साल की उम्र में सऊदी किंग बने सलमान के दो साल के उतार-चढ़ाव भरे कार्यकाल में मोहम्मद बिन सलमान को प्रिंस बनाने की तैयारी पहले से नजर आने लगी थीं क्योंकि प्रिंस नायेफ की सारी शक्तियां धीरे-धीरे छीनी जाने लगी थीं। अब प्रिंस का खिताब छीनने के साथ ही उनसे मुल्क के सबसे ताकतवर आंतरिक सुरक्षा मंत्री का पद भी छीन लिया गया है।

बता दें कि मोहम्मद नायेफ एक अनुभवी कानून प्रवर्तनकर्ता हैं जिन्हें साल 2003-2006 में अल-कायदा के खिलाफ लड़ने के लिए पश्चिम देशों में अच्छी तरह से जाना जाता है। इस दौरान उन्होंने अलकायदा के बम विस्फोटों को भी नाकाम किया था। साल 2015 में भी किंग सलमान ने मिसाल पेश करते हुए क्राउन प्रिंस मोकरिन बिन अब्दुल अजीज बिन सऊद को बेदखल किया था। क्राउन प्रिंस को बेदखल करने के बाद सऊदी किंग सलमान ने मोहम्मद बिन नायेफ को क्राउन प्रिंस बनाया था। वहीं मोकरिन को किंग अब्दुल्लाह के शासनकाल में प्रिस बनाया गया था।

नए राजकुमार प्रिन्स मोहम्मद बिन सलमान, जो रक्षा मंत्री के पद के अलावा एक विशाल आर्थिक पोर्टफोलियो की देखरेख भी करते हैं। बताया जाता है कि पहले वे इस रेस में दूसरे स्थान पर थे। हालांकि शाही मामलों में नजर रखने वालों को इस बात का अंदाजा हो गया था कि जल्द ही उनकी ताकत बढ़ सकती है और वे उत्तराधिकारी बन सकते हैं।

जनवरी 2015 में सलमान के राजा बनने से पहले युवा राजकुमार को सऊदी के लोग नहीं जानते थे। इससे पहले प्रिंस सलमान अपने पिता के शाही अदालत के प्रभारी थे। अब सऊदी किंग ने अपने बेटे को शाही परिवार का प्रिंस नियुक्त कर बहुत सारी शक्तियां दे दी हैं।

डोनाल्ड ट्रंप खुफिया टेपों के बारे में खुलासा करेंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आने वाले दिनों में यह घोषणा कर सकते हैं कि पूर्व एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी के साथ उनकी निजी बातचीत की कोई रिकॉर्डिंग है भी या नहीं।

यह घोषणा हालिया जांच से जुड़ी मुख्य रहस्यों को खत्म कर सकती है। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव ने कल कहा कि वह 'इस सप्ताह' टेपों की संभाव्यवता से जुड़ी घोषणा की उम्मीद कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने मई में कोमी को बर्खास्त कर दिया था और फिर ट्वीट किया था कि ट्रंप के चुनाव अभियान और रूसी अधिकारियों के बीच संभावित संपर्कों की जांच का निरीक्षण कर चुके कोमी प्रेस में जानकारी लीक करने से पहले यह उम्मीद करें कि हमारी बातचीत के कोई टेप न हों।

ट्रंप और उनके सहयोगियों ने उसके बाद से यह स्पष्ट करने से सीधा इनकार किया है कि क्या यह एक असाधारण और छिपी हुई चेतावनी थी?

राष्ट्रपति ने पिछले माह संवाददाताओं से कहा था कि इस बारे में मैं आपको निकट भविष्य में बताउंगा, लेकिन उन्होंने इस बात का संकेत नहीं दिया था कि टेप हैं भी या नहीं। हालांकि उन्होंने यह कहा था कि कुछ पत्रकार जवाब को जानकर बेहद निराश होंगे।

सदन की खुफिया समिति ने व्हाइट हाउस के वकील डोन मैकगान से कहा था कि वे टेप से जुड़े सवालों के जवाब शुक्रवार तक दे दें।

वाटरगेट के बाद बने कानून प्रेजीडेंशियल रिकॉडर्स एक्ट के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा की गई रिकॉर्डिंगों पर जनता का अधिकार है और उन्हें सार्वजनिक किया जा सकता है। उन्हें नष्ट करना अपराध माना जाएगा।

भारत का न्यूक्लियर ग्रुप में एंट्री और मसूद अजहर के मुद्दे पर चीन साथ नहीं देगा

चीन ने पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के नेता पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध को एक बार फिर बाधित करने का संकेत देते हुए मंगलवार (20 जून) को कहा कि इस विशेष मामले में आतंकवाद के मुद्दे के संबंध में संयुक्त राष्ट्र समिति में असहमति बरकरार है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग की टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र की 1267 समिति की अगले माह होने जा रही समीक्षा से पहले अजहर के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में आर्इं।

गेंग ने संवाददाताओं को बताया, ''अपने रूख के बारे में हम कई बार बात कर चुके हैं। हमारा मानना है कि लक्ष्य एवं पेशेवर तथा न्याय संबंधी सिद्धांतों को बरकरार रखा जाए।''

संवाददाताओं ने गेंग से पूछा था कि अजहर पर संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध लगाने के भारत के कदम पर चीन द्वारा बार-बार लगाई जाने वाली तकनीकी रोक को लेकर क्या कोई अग्रगामी कदम है। उन्होंने कहा, ''वर्तमान में, इस सूचीबद्ध मामले को लेकर कुछ सदस्यों में असहमति बरकरार है। चीन इस मुद्दे पर सामयिक पक्षों के साथ सहयोग और संवाद के लिए तैयार है।''

बीजिंग ने पठानकोट आतंकी हमले में अजहर की भूमिका के लिए उसे आतंकवादी घोषित करने के अमेरिका एवं अन्य देशों के संयुक्त राष्ट्र में प्रयासों पर तकनीकी रोक लगा रखी है। पिछले साल चीन ने अजहर को आतंकवादी का दर्जा देने के भारत के आवेदन पर तकनीकी रोक लगा दी थी।

फरवरी में चीनी अधिकारियों के साथ रणनीतिक वार्ता कर चुके विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा, ''अजहर के मामले में, जैश खुद 1267 के तहत निषिद्ध है। इसलिए सबूत तो 1267 समिति की कार्रवाई में है। इस मामले में जो कुछ भी उसने किया है, उसकी गतिविधियों का विस्तृत ब्यौरा है।''

उन्होंने कहा, ''ऐसा नहीं है कि समझाने के लिए सबूत का जिम्मा भारत का ही है। प्रायोजक (अमेरिका और अन्य देश) भी इस बात से सहमत प्रतीत होते हैं अन्यथा वे प्रस्ताव पेश करने की पहल नहीं करते।''

जयशंकर का इशारा अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा अजहर के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिए जाने के संबंध में था। यूएन की 1267 समिति में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं। अजहर के मुद्दे पर गेंग की प्रतिक्रिया के पहले ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक हुई थी जिसमें आतंकवाद से निपटने और इसकी रोकथाम के लिए एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने पर कड़ा रूख अपनाया गया था।

बैठक में हिस्सा लेने वाले विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह ने कहा था कि अच्छे और बुरे आतंकवादी पर अस्पष्टता खत्म करते हुए ब्रिक्स को संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद पर एक व्यापक घोषणापत्र का समर्थन करना चाहिए। वी के सिंह ने कल ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''ब्रिक्स देशों में इस बात पर आम सहमति है कि हर तरह के आतंकवाद की निंदा की जानी चाहिए और सहयोग के लिए विभिन्न कदम उठाने चाहिए ताकि आतंकवाद का प्रसार न हो और हम में से किसी भी देश को कोई नुकसान न हो।''

गेंग ने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास आतंकवाद से निपटने के लिए एक कार्यकारी समूह है। अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र घोषणापत्र की जरूरत पर चीन का साझा रूख है। उन्होंने कहा, ''जहां तक आतंकवाद से निपटने पर सम्मेलन का सवाल है तो मेरा मानना है कि चीन और ब्रिक्स के अन्य देशों का रूख मिलता-जुलता है। हमें उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा आतंकवाद पर एक समग्र घोषणापत्र पारित कर सकती है।''

अमेरिका ने पहली बार मार गिराया सीरिया का फाइटर प्लेन

अमेरिका के एक लड़ाकू विमान ने पहली बार किसी सीरियाई युद्धक विमान को मार गिराया है। वाशिंगटन का आरोप है कि सीरियाई विमान अमेरिकी समर्थन वाले लड़ाकों पर हमला कर रहा था। इससे अमेरिका और सीरिया की सेना के बीच नये सिरे से तनाव की स्थिति बन गई है। इस घटना ने सीरिया में पिछले छह वर्षों से चल रहे युद्ध को और जटिल बना दिया है।

सीरियाई सरकार के सहयोगी ईरान ने भी कल अपनी सीमा से पहली बार पूर्वी सीरिया में इस्लामिक स्टेट के कथित ठिकानों पर हमला किया। तेहरान में हुए हमले की जिम्मेदारी आईएस द्वारा लिए जाने के बाद ईरान ने यह कार्वाई की है।

विश्लेषकों का कहना है कि वाशिंगटन या बशर अल-असद दोनों ही विवाद और संघर्ष नहीं चाहते हैं, लेकिन चेतावनी दी कि सीरिया के युद्ध में पक्षकारों की संख्या बढ़ने के कारण हालात और जटिल होने वाले हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियों की सेना रका के पास जमा हो रही हैं और वहीं पास में रूस समर्थित सीरियाई बल हैं। इससे वहां हालात और जटिल हो गये हैं। इस बीच ईरान ने कहा कि उसने तेहरान पर आईएस के हमले का बदला लेने के लिये रविवार को सीरिया के उत्तरपूर्वी दैर एजोर प्रांत में 'आतंकी अड्डों' के खिलाफ मिसाइल हमला शुरू किया है।

वहीं दूसरी ओर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) की वायुसेना ने सीरिया के डेर-अल-जोर में आतंकवादियों के गढ़ों पर मिसाइलें दागी हैं। आईआरजीसी के पब्लिक रिलेशंस की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मिसाइल हमला ईरान की राजधानी तेहरान में हुए दोहरे हमलों के जवाब में रविवार को किए गए, ताकि आतंकवादियों को सबक सिखाया जा सके। बयान के मुताबिक, आईआरजीसी की मध्यम दूरी की मिसाइलों को ईरान के पश्चिमी प्रांतों केनमनशाह और कुर्दिस्तान से दागा गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, इन हमलों में बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए और हमले में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद नष्ट किए गए। आईआरजीसी ने ईरान पर किसी भी तरह के आतंकवादी हमले का माकूल जवाब देने की प्रतिबद्धता जताई।

गौरतलब है कि सात जून को इस्लामिक स्टेट ने तेहरान पर दो हमले किए थे, जिनमें से एक हमला ईरान की संसद और दूसरा अयातुल्ला खमैनी के मकबरे को निशाना बनाकर किया गया था। इन हमलों में 17 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हो गए थे। आईआरजीसी के कमांडर ने मंगलवार को कहा था कि तेहरान में सात जून को हुए इन हमलों में सऊदी अरब का हाथ है।

लंदन में 24 मंजिला इमारत में आग लगी, 12 लोगों की मौत, 74 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती

पश्चिमी लंदन में 24 मंजिला एक आवासीय इमारत में आज (14 जून) भीषण आग लग गयी जिसमें कम से कम बारह लोगों की मौत हो गयी और 74 अन्य घायल हो गये।

ब्रिटेन में पिछले करीब तीन दशक में यह सबसे भीषण अग्निकांड है। लेटिमेर रोड पर स्थित लैंकेस्टर वेस्ट एस्टेट के ग्रेनफेल टावर में स्थानीय समयानुसार रात एक बज कर 16 मिनट पर आग लगी।

समझा जाता है कि जब इमारत आग की लपटों से घिर गई, तब करीब 600 लोग टावर के 120 फ्लैटों में मौजूद थे।

मेट्रोपोलिटिन पुलिस के कमांडर स्टुअर्ट कंडी ने बताया, ''मैं 12 लोगों की मौत होने की पुष्टि कर सकता हूं लेकिन ये आंकड़े बढ़ने की आशंका है।''

बीबीसी की खबर के मुताबिक, इमारत अब भी आग के घेरे में है। इसके कभी भी ढह जाने की आशंका है। करीब 200 दमकलकर्मी अब भी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं।

करीब 200 दमकलकर्मी, 40 दमकल वाहन और  एंबुलेंस के 20 लोग मौके पर हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ने बताया कि कुल 74 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा, जबकि 20 लोगों की हालत नाजुक है।

दमकलकर्मियों ने बड़ी संख्या में लोगों को बचाया है, लेकिन लंदन के मेयर सादिक खान ने कहा कि कई सारे लोगों के बारे में पता नहीं चल पाया है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग की लपटों में घिरी इमारत के अंदर फंसे कई लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे और अपने बच्चों को बचाने की गुहार लगा रहे थे। कुछ लोगों को चादर का इस्तेमाल कर इमारत से बच कर निकलने की कोशिश करते देखा गया।

लंदन दमकल सेवा प्रमुख डैनी कॉटन ने संवाददाताओं को बताया, यह एक अभूतपूर्व घटना है। मेरे 29 साल के करियर में कभी भी मैंने इतने बड़े पैमाने पर आग लगने की घटना नहीं देखी।

समझा जाता है कि आग आधी रात के ठीक बाद तीसरी और चौथी मंजिल पर एक खराब रेफ्रीजरेटर के कारण लगी और यह फैलती चली गई।

हालांकि, महानगर पुलिस ने कहा है कि आग लगने की वजह की पुष्टि करने से पहले उसे कुछ वक्त चाहिए।

गौरतलब है कि ग्रेनफेल टावर इलाके के आसपास काफी संख्या में मुसलमान रहते हैं। कई लोग आग लगने के वक्त जगे हुए थे । वे रमजान के दौरान बहुत सवेरे खाई जाने वाली सहरी की तैयारी कर रहे थे।

अमेरिका: वर्जीनिया में अंधाधुंध फायरिंग, डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के बड़े नेता सहित 5 जख्मी

अमेरिका के वर्जीनिया में रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ नेता और सदन के सचेतक स्टीव स्कैलिसे पर बंदूकधारी हमलावर ने बुधवार को अटैक किया। हमले में स्टीव घायल हो गए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावर द्वारा की गई फायरिंग में रिपब्लिकन पार्टी के नेता समेत कम से कम 5 लोगों के घायल होने की सूचना है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि स्टील स्कैलिसे पर हमला करने वाले शूटर की मौत हो गई है।

फॉक्स न्यूज के मुताबिक, बुधवार सुबह वर्जिनिया में बेसबॉल प्रैक्टिस के दौरान एक शख्स ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। हमलावर की बंदूक से निकली गोली स्टीव के कमर में लगी है। वहीं एक गोली उनके सहयोगी के सीने में लगी। मीडिया रिपोर्ट्स के  अनुसार, स्टीव के साथ उनके तीन करीबी सहयोगी भी इस हमले में जख्मी हुए हैं।

बेसबॉल गेम के दौरान मौजूद अलबामा के सांसद और रिपब्लिकन लॉ मेकर मो ब्रूकस ने बताया कि हमलावर की ओर से 20 से 23 बार फायर किए गए। गोलीबारी के बाद स्कैलिसे खुद को घसीटकर ले गए।

ब्रूकस ने बताया कि वरिष्ठ रिपब्लिकन स्कैलिसे जिंदा हैं। शूटर मध्यम उम्र का श्वेत शख्स लगा रहा था। वह इस बात से अंजान नहीं था कि वह इस पर गोली चला रहा है। गनमैन निश्चित रूप से जानता था कि वह कौन था, जिस पर उसने गोली चलाई।

पुलिस ने मीडिया से बातचीत में इस वर्जीनिया हमले को जानबूझकर किया गया हमला बताया है।

पुलिस ने कहा कि हमलावरों को मालूम था कि रिपब्लिकन पार्टी के लोग यहां प्रैक्टिस कर रहे हैं।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, फायरिंग की यह घटना व्हाइट हाउस से कुछ मील की दूरी पर हुई।

रिपब्लिकन पार्टी के नेता स्कैलिसे पर हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भी बयान जारी किया गया है। ट्रंप ने अपने ट्वीट में शूटिंग की घटना की निंदा करते हुए लिखा, ''लुसियाना प्रांत के रिपब्लिकन स्टीव स्कैलिसे हमले में बुरी तरह घायल हुए हैं, लेकिन वह जल्द ही पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे। हमारी चिंता और प्रार्थना उनके साथ है।''

बता दें कि जिस समय यह हमला हुआ रिपब्लिकन पार्टी के सांसद चैरिटी मैच के लिए वर्जीनिया के एलेक्सजेंड्रिया में बेसबॉल की प्रैक्टिस कर रहे थे। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद कहीं और मैच की प्रैक्टिस कर रहे थे।

बांग्लादेश में भूस्खलन से 51 की मौत और 11 लोग घायल

बांग्लादेश में तीन दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलनों में 51 लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

समाचार एजेंसी ईएफई  के मुताबिक, बांग्लादेश आपदा प्रबंधन विभाग (डीएमडी) के महानिदेशक रियाज अहमद ने कहा, रंगमति जिले से 29, चटगांव से 16 और बंदरबाड से छह लोगों की मौत की सूचना मिली है।

इससे पहले रंगमति के अतिरिक्त पुलिस प्रमुख मोहम्मद शाहीदुल्ला ने कहा कि भारी बारिश के कारण बचाव कार्य में बाधा पहुंच रही है।

उन्होंने कहा, ''यहां मौसम बेहद खराब है और यह पहाड़ी इलाका है इसलिए बचाव अभियान में काफी मुश्किलें आ रही हैं।''

मौसम विभाग के चटगांव कार्यालय के प्रवक्ता दिजेन रॉय ने कहा कि उन्होंने पिछले 24 घंटों में 131 मिलीमीटर बारिश दर्ज की है। उन्होंने साथ ही कहा कि बंगाल की खाड़ी में लगातार कम दबाव बने रहने के कारण बारिश जारी रहने की संभावना है।

ढाका में बाढ़ का अनुमान करने वाले केंद्र ने कहा कि सभी प्रमुख नदियों में जल स्तर बढ़ गया है, जबकि कुछ नदियां पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

भारत के असम के लोग भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। बीते सप्ताह असम में लगातार बारिश के कारण आई बाढ़ से लगभग 13,000 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा बाढ़ बाद के भूस्खलन से रेल कनेक्टिविटी में बाधा पहुंची है।

असम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में लखीमपुर, जोरहाट और बिश्वनाथ जिले के 28 गांवों में बाढ़ से लगभग 13,000 लोग प्रभावित हुए हैं।

डीमा हसाओ जिले के पहाड़ी क्षेत्र में आए भूस्खलन से बराक घाटी का रेल संपर्क टूट गया है। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) को भूस्खलन की वजह से शनिवार को लुमडिंग से सिल्चर तक यात्री ट्रेन सेवा रद्द करनी पड़ी। ब्रह्मपुत्र नदी में पानी का स्तर बढ़ा है और यह निमातिघाट में खतरे के स्तर से ऊपर बह रहा है जिससे अधिकारियों ने जोरहाट से मजुली तक की नौका सेवाओं पर रोक लगा दी है।

ब्रह्मपुत्र नदी में जल स्तर बढ़ने के कारण कुछ अन्य हिस्सों में भी नौका सेवाओं को रद्द कर दिया है। असम सरकार ने बाढ़ की आशंका वाले जिलों के अधिकारियों को आपातकाल स्थिति में राहत और बचाव सामग्री की व्यवस्था करने के पहले ही निर्देश दिए हैं।