भारत

स्मृति ईरानी से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय छीना गया

भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कई केंद्रीय मंत्रियों के विभागों में बदलाव किए हैं। रेल मंत्री पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। स्मृति ईरानी से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय वापस ले लिया गया है। इसी मंत्रालय में राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर को अब इस मंत्रालय की स्वतंत्र रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई है। के अल्फोंस से भी सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्यमंत्री की जिम्मेदारी वापस ली गई है।

देर रात राष्ट्रपति भवन ने मंत्रियों के नए विभागों को मंजूरी प्रदान की। दरअसल, सोमवार को ही अरुण जेटली का एम्स में गुर्दा प्रत्यारोपण हुआ है। इसलिए उन्हें लंबे समय तक आराम की जरूरत होगी। उनके स्वस्थ होने तक वित्त मंत्रालय का कार्यभार रेल मंत्री पीयूष गोयल के जिम्मे होगा।

विभागों के फेरबदल में सबसे बड़ा फैसला स्मृति से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय वापस लेने को माना जा रहा है। पिछले दिनों स्मृति द्वारा पत्रकारों से जुड़े नियमों को लेकर खासा विवाद हुआ था। पी एम ओ के हस्तक्षेप के बाद नियम को वापस लिया गया था। इसमें फेक न्यूज प्रकाशित करने पर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने का प्रावधान किया गया था। इसके अलावा भी महकमे में कई फैसलों जैसे पी आई बी अफसरों के तबादले, प्रसार भारती से टकराव आदि कारणों से विवाद पैदा हुए थे।

स्मृति के पास सूचना प्रसारण के अलावा कपड़ा मंत्रालय का भी जिम्मा है। लेकिन अब आगे उनके पास सिर्फ कपड़ा मंत्रालय की ही जिम्मेदारी रहेगी। उनके लिए यह फैसला एक बड़ा झटका है, क्योंकि पूर्व में उनसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी भी वापस ली जा चुकी है।

राज्यवर्धन सिंह राठौर जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में राज्यमंत्री थे और खेल मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार का जिम्मा देख रहे थे, अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का प्रभार भी स्वतंत्र रूप से संभालेंगे। उनके लिए यह अच्छी खबर है। राठौर के पास दो मंत्रालयों का स्वतंत्र प्रभार अब हो गया है। इसी प्रकार एस एस आहलूवालिया को सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग में राज्यमंत्री नियुक्त किया गया है। जबकि अभी तक वे स्वच्छ एवं पेयजल विभाग के राज्यमंत्री का कार्य देख रहे थे। वहीं अल्फोंस से इस मंत्रालय की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है।

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान कई इलाकों में खूनी संघर्ष, 11 लोगों की मौत

भारत के पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान कई इलाकों में खूनी संघर्ष हुआ। सोमवार दोपहर तक इन झड़पों में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हिंसा के संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी है। मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। सुबह से ही मतदान के दौरान हिंसा की खबरें मिलनी शुरू हो गई थीं। वहीं, अलग-अलग स्थानों पर हुई झड़पों में दर्जनों लोग जख्मी हुए हैं।

पुलिस ने कहा कि नदिया जिले में मतदान केंद्र के भीतर जाने का प्रयास कर रहे एक युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई, जबकि तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्त्ता की दक्षिण 24 परगना जिले के कुलटली में गोली मारकर हत्या कर दी गई। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का कहना है कि उसके तीन कार्यकतार्ओं की उत्तर 24 परगना के अमडंगा में बम हमलों में मौत हो गई।

मुर्शिदाबाद जिले में दो की मौत हो गई, जबकि नदिया में भी एक की मौत हुई। नदिया जिले के पुलिस महानिरीक्षक संतोष पांडे ने बताया, ''नदिया जिले के शांतिपुर क्षेत्र में सोमवार सुबह स्थानीय लोगों ने तीन युवाओं की पिटाई की। पुलिस ने उन्हें बचाया और स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। इनमें से एक संजित प्रामाणिक की मौत हो गई।''

कुलटली पुलिस थाने के एक अधिकारी ने कहा, ''तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता आरिफ अली गजी को मतदान केंद्र से बाहर निकलते समय छाती में गोली मारी गई।'' माकपा के उत्तर 24 परगना के नेताओं का कहना है कि कच्चे बम के हमले में उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई। हालांकि, पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। अमडंगा पुलिस थाने के एक अधिकारी ने कहा, ''हमने इस घटना के बारे में सुना है, लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।''

राज्य में पंचायत चुनाव के लिए सुबह सात बजे मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई, जो शाम पांच बजे तक जारी रही। इस दौरान 38,616 उम्मीदवार चुनावी मैदान में आमने-सामने है। चुनाव पूर्व सवेर्क्षणों में अनुमान जताया गया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इन चुनाव में वाममोर्चे और कांग्रेस को पीछे छोड़ देगी और तृणमूल के समक्ष मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी के तौर  पर उभरकर सामने आएगी।

आंकड़ों से पता चलता है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कुल 58,692 सीटों में से 20,076 सीटों पर पहले ही निर्विरोध उम्मीदवार चुन लिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निवार्चन आयोग से निर्विरोध जीतने वाले उम्मीदवारों के सर्टिफिकेट जारी नहीं करने को कहा है।

सुनंदा पुष्कर मौत केस: दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में शशि थरूर का नाम

सुनंदा पुष्कर की रहस्यमय मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने सोमवार को एक चार्जशीट दाखिल की। इसमें सुनंदा के पति और कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर आत्महत्या के लिए उकसाने और 'शादीशुदा रिश्ते में क्रूर बर्ताव' करने का आरोप तय किया गया।

दिल्ली पुलिस की एस आई टी ने सुनन्दा पुष्कर की मौत के मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में करीब तीन हजार पेज की चार्जशीट दाखिल की है। जिसमें आरोपी के तौर पर शशि थरूर का नाम लिखा है। एस आई टी ने ये चार्जशीट IPC की धारा 306 यानी आत्महत्या के लिए उकसाने और IPC की धारा 498A यानी वैवाहिक जीवन में प्रताड़ित करना के तहत दाखिल की है।

बता दें कि चार्जशीट में शशि थरूर का नाम कॉलम नंबर 11 में डाला गया है। कालम नंबर 11 में बिना आरोपी के गिरफ्तारी के भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। एस आई टी के मुताबिक, 306 यानी आत्महत्या के लिए  उकसाना की धारा इसलिए चार्जशीट में जोड़ी गई है क्योंकि सुनन्दा के शरीर पर चोट के जो करीब 12 निशान पाए गए थे उससे साफ जाहिर होता है कि थरूर ने सुनन्दा के साथ मारपीट की थी।

वही धारा 498A भी इसलिए लगाई गई है क्योंकि शशि थरूर और सुनन्दा का वैवाहिक जीवन में काफी तनाव था और सुनन्दा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ ज़िक्र था कि उसके शरीर पर 12 चोट के निशान पाए गए है। इस मामले में 24 मई को कोर्ट चार्जशीट पर संज्ञान लेगी।

कर्नाटक चुनाव: मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, चुनाव नतीजे आने के बाद पार्टी आलाकमान ही सीएम पर फैसला करेंगे

कांग्रेस के बड़े नेता और लोकसभा में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आज (14 मई को) ऐसे संकेत दिए कि अगर कर्नाटक में कांग्रेस की जीत होती है, तब भी सिद्धारमैया सीएम नहीं रहेंगे।

हालांकि, समाचार एजेंसी ए एन आई से बात करते हुए खड़गे ने कहा कि मीडिया के लोग कांग्रेस नेताओं के बीच मनमुटाव और दुराव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

जब उनसे सिद्धारमैया के इस बयान पर प्रतिक्रिया पूछी गई तो उन्होंने कहा, ''यह विवाद मीडिया में पैदा किया गया है ताकि हमारे बीच मनमुटाव हो। हमलोग इस मुद्दे पर स्पष्ट राय रखते हैं कि चुनाव नतीजे आने के बाद पार्टी आलाकमान ही इस पर फैसला करेंगे। आप लोग सिर्फ 12 घंटे और इंतजार कीजिए।'' यानी चुनाव नतीजे पक्ष में आने के बाद पार्टी नेतृत्व ही तय करेगा कि अगला सीएम कौन होगा?

बता दें कि कर्नाटक के सी एम सिद्धारमैया ने रविवार (13 मई) को कहा था कि वो दलित सी एम के लिए पद छोड़ सकते हैं। इसके बाद इस पर कयास लगाए जाने लगे कि राज्य में कांग्रेस की ओर से कौन सा दलित चेहरा सी एम हो सकता है। मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम भी उस लिस्ट में सबसे आगे चल रहा है। खड़गे 2013 के चुनावों के वक़्त भी मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में थे, लेकिन तब सिद्धारमैयाने बाजी मार ली थी।

कर्नाटक में 12 मई को 222 विधान सभा की सीटों पर चुनाव हुए थे। 70 फीसदी मतदाताओं ने वोटिंग की थी। इसके नतीजे मंगलवार (15 मई) को आएंगे। चुनाव आयोग ने इसके लिए विशेष इंतजाम किए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि मंगलवार दोपहर तक कर्नाटक में अगली सरकार पर स्थिति साफ हो जाएगी। फिलहाल, कांग्रेस और बीजेपी दोनों बड़ी पार्टियों के लोग अपनी-अपनी सरकार के दावे कर रहे हैं, जबकि अधिकांश एग्जिट पोल के नतीजों के मुताबिक राज्य में त्रिशंकु विधान सभा के आसार है।

कर्नाटक एग्जिट पोल 2018: एग्जिट पोल में त्रिशंकु विधानसभा के आसार, जे डी एस किंगमेकर की भूमिका में

कर्नाटक में शनिवार को मतदान के बाद अलग-अलग टेलीविज़न चैनलों के एग्जिट पोल के नतीजे देखें तो किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है। किसी ने कांग्रेस को तो किसी ने भाजपा को बढ़त बताई है।

आजतक चैनल पर प्रसारित इंडिया टूडे एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में कांग्रेस को बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं इंडिया न्यूज टूडे चाणक्या का एग्जिट पोल ने भाजपा को बहुमत मिलने का अनुमान लगाया है।

बाकी चैनलों के अगर एग्जिट पोल के रुझानों को देखें तो कहीं भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो कहीं कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनती नजर आ रही है, पर दोनों ही पार्टियां बहुमत से दूर हैं।

ऐसे हालात में किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगोड़ा की क्षेत्रीय पार्टी जनता दल सेक्युलर का सहयोग लेने की जरूरत पड़ेगी। त्रिशंकु जनादेश की स्थिति में जे डी एस किंगमेकर की भूमिका में होगी।

कर्नाटक में किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 112 से ज्यादा सीटों की जरूरत होगी। राज्य में विधानसभा की कुल 224 सीटें में से 222 सीटों पर मतदान हुआ है। चुनाव के नतीजे 15 मई को आएंगे।

पूर्व पीएम ने कहा, बहुत नीचे गिर गए पीएम मोदी, प्रधानमंत्री पद की गरिमा के योग्य शब्दों का चुनाव भी न कर पाए

आमतौर पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारत के सबसे शांत प्रधानमंत्रियों में से एक माना जाता है। लेकिन इस बार उन्होंने कर्नाटक के धुआंधार चुनाव प्रचार के बीच कुछ ऐसा कह दिया है, जिसकी चर्चाएं चुनावी शोर से ऊपर उठकर हो रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ये बेहद दुखद है कि भारत का प्रधानमंत्री इतना नीचे गिर जाए और प्रधानमंत्री पद की गरिमा के योग्य शब्दों का चुनाव भी न कर पाए।'

ये बातें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार (7 मई) को कहीं। ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए लगातार चुनावी रैलियों को संबोधित कर रहे हैं।

भारत के पूर्व पी एम मनमोहन सिंह का बयान उस वाकये के बाद आया है, जिसमें कांग्रेस के दिग्गज नेता और कर्नाटक के सी एम पी सी सिद्धारमैया ने पी एम मोदी को चुनावी रैलियों में कहे अपशब्दों पर कानूनी मानहानि का नोटिस भिजवाया है। नोटिस में ये धमकी दी गई है कि अगर पी एम मोदी, भाजपा, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, येदियुरप्पा और भाजपा नेता लिखित माफी नहीं मांगते हैं तो वह 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा ठोंक देंगे।

चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने कहा कि पूर्व पी एम मनमोहन सिंह 12 मई के बाद कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में प्रचार करने उतरेंगे। पूर्व पी एम मनमोहन सिंह ने कहा, ''कोई भी प्रधानमंत्री अपने विरोधियों के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता। जो मोदी दिन-रात करते हैं। ये देश के लिए अच्छा नहीं है।'' ये टिप्पणी पूर्व पी एम मनमोहन सिंह ने उस सवाल का जवाब देते हुए की है, जिसमें उनसे प्रचार के तरीके के बारे में सवाल किया गया था।

पूर्व पी एम सिंह ने कहा, ''मुझे दुख है कि जिस तरह की बातें राज्य की जनता को सहनी पड़ी हैं। ये कर्नाटक के लिए अच्छा नहीं है। ये देश के लिए भी अच्छी बता नहीं है। कोई भी प्रधानमंत्री चुनाव के वक्त ऐसी बातें नहीं कहता है, जिस अंदाज में मोदी जी कहने की कोशिश करते हैं। मुझे उम्मीद है कि वह अब सबक लेंगे और समाज के विकेंद्रीकरण की कोशिश बंद कर देंगे। जो वह दिन-रात कर रहे हैं।''

पी एम मोदी अक्सर देश की खराब ​आर्थिक स्थिति के लिए कांग्रेस की सरकारों को जिम्मेदार ठहराते आए हैं। पूर्व पी एम सिंह ने उनके इस रवैये की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, ''जब भी प्रधानमंत्री मोदी से बीते चार सालों से खराब आर्थिक स्थितियों पर सवाल किया जाता है, प्रधानमंत्री मोदी जी हर चीज के लिए कांग्रेस के 70 सालों के शासनकाल पर सवाल खड़ा कर देते हैं।''

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2018 में कर्नाटक चुनावों के दौरान कई विवादास्पद बयान दिए हैं। लेकिन उनमें से पांच बयान सबसे ज्यादा विवादित रहे हैं।

(1) मैं उन सभी से कहना चाहता हूँ जिन्हें राष्ट्रवाद अच्छा नहीं लगता है। आप मत सीखिए, अगर आपको दूसरों से, अपने राजनीतिक पुरखों से, यहां तक कि महात्मा गांधी की कांग्रेस से भी सीखना अच्छा नहीं लगता है। लेकिन कम से कम मेरे बगलकोट के रहने वाले मुधोल कुत्तों से ही सीख लीजिए। बगलकोट के मुधोल कुत्ते इस वक्त सेना की बटालियन में शामिल होकर देश की सेवा कर रहे हैं।

(2) (राहुल गांधी को बहस की चुनौती देते हुए) केवल 15 मिनट, हाथ में कागज लिए बिना, क्या आप अपनी सरकार की उपलब्धियों के बारे में बात कर सकते हैं। आप किसी भी भाषा में बात कर सकते हैं, जिसमें आप चाहें। अंग्रेजी, हिंदी या फिर अपनी मातृ भाषा (इटालियन) में।

(3) सीधा रुपैया सरकार (कर्नाटक के सी एम सिद्धारमैया के नाम की पैरोडी करते हुए)।

(4) बाप बड़ा न भैया, सब से बड़ा रुपैया। आपके मुख्यमंत्री ने इस कहावत को बदल दिया है। बाप भी बड़ा, भैया भी बड़ा और उससे भी ऊपर रुपैया, सीधा-सीधा रुपैया।

(5) कर्नाटक में उनके मंत्री और नेताओं ने टैंक बनवा रखा है। जो पैसा वो जनता से लूटते हैं, उसे घर ले जाते हैं और टैंक में रखते हैं। ये टैंक दिल्ली से पाइपलाइन से जुड़ा हुआ है। ये पैसा सीधे दिल्ली को जाता है।

राहुल गांधी ने कहा, बीजेपी का अध्यक्ष अमित शाह मर्डर का आरोपी है

भारत के कर्नाटक में इसी महीने की 12 तारीख को विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव परिणाम 15 तारीख को आएंगे। उससे पहले कांग्रेस, बीजेपी और जे डी (एस) के नेताओं ने चुनाव प्रचार में अपनी ताकत झोंक दी है। इस प्रचार में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला पूरे सबाब पर है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष अमित शाह पर बड़ा हमला बोला है।

राहुल गांधी ने अमित शाह को हत्या का आरोपी बतला दिया है। राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट ने लोया केस में बताया है मुझे नहीं लगता अमित शाह की कोई विश्वसनीयता है। अमित शाह का बैकग्राउंड देखें, वो किस चीज के जिम्मेदार हैं, वो कैसी राजनीति करते हैं और हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि वो मर्डर का आरोपी हैं, बीजेपी का अध्यक्ष मर्डर का आरोपी है। ये सच है, पार्टी ईमानदारी की बात करती है, विश्वसनीयता की बात करती है और उसके अध्यक्ष हत्या के आरोपी हैं’।

वर्ष 2005 में जब अमित शाह गुजरात के गृहमंत्री थे, तब सोहराबुद्दीन शेख को एक फर्जी मुठभेड़ में पुलिस ने मार गिराया था। बाद में कई लोगों ने इसे फर्जी मुठभेड़ करार देते हुए सोहराबुद्दीन की मौत के मामले में अमित शाह की भूमिका को संदिग्ध कहा था। मामला कोर्ट के चौखट तक पहुंचा। जज लोया की मौत के बाद मुंबई की सी बी आई कोर्ट के नवनियुक्त जज ने 30 दिसंबर 2014 को अमित शाह को केस से आरोपमुक्त कर दिया था और अपनी टिप्पणी में कहा था कि अमित शाह को राजनीतिक कारणों से फंसाया गया था।

गौर करने की बात है कि जिसके बाद रबीबुद्दीन शेख ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अर्जी डाली थी कि वो स्वास्थ्य कारणों से अब यह केस आगे नहीं लड़ सकता। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। इधर सी बी आई ने भी इस मामले में दोबारा अर्जी नहीं लगाई।

लेकिन पेंच तब फंसा, जब मुंबई के सी बी आई कोर्ट के फैसले से पहले 30 नवंबर 2014 को सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई कर रहे सी बी आई कोर्ट के जज लोया की मौत का मामला सुर्ख़ियों में आया।

कांग्रेस शुरू से ही लोया की मौत को संदिग्ध कहती आई है। इस मामले में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि जज लोया की मौत की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया।

सोनिया ने कहा, पीएम मोदी पर चढ़ा कांग्रेस मुक्त भारत का भूत, भाषण कभी भी खाली पेट नहीं भर सकता

भारत में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कर्नाटक के बीजापुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोदी जी पर कांग्रेस मुक्त भारत का जुनून है, उन्हें इसका भूत लग गया है।

सोनिया ने कहा, ''कांग्रेस मुक्त भारत तो छोड़िए, वो अपने सामने किसी को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।'' कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने अपनी पहली चुनावी रैली में कहा कि मोदी जी जहां कहीं भी जाते हैं, वहां वो गलत तथ्य पेश करते हैं और इतिहास से छेड़छाड़ करते हैं। सोनिया ने आरोप लगाया कि पी एम मोदी अपने राजनीतिक हित साधने के लिए इतिहास के नायकों का गलत इस्तेमाल करते हैं।

सोनिया गांधी ने पी एम नरेंद्र मोदी के भाषणों पर तंज कसा और कहा, ''मोदी जी को इस बात का बहुत घमंड है कि वो अच्छा भाषण देते हैं। मैं भी इस बात से सहमत हूँ। वो एक अभिनेता की तरह बोलते हैं। मुझे बड़ी खुशी होती, जब उनके भाषणों से देश के लाखों भूखे लोगों की भूख मिटती, लेकिन भाषण कभी भी खाली पेट नहीं भर सकता। उसके लिए भोजन की जरूरत होती है।''

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सूखा से प्रभावित सभी राज्यों को केंद्र सरकार ने मुआवजा दिया, लेकिन कर्नाटक को सबसे कम मुआवजा दिया गया। यह किसानों के जख्मों पर नमक रगड़ने जैसा है।

सोनिया ने पूछा, ''मोदी जी क्या यही आपका 'सबका साथ, सबका विकास' है?''

उन्होंने कहा कि सूखे की वजह से कर्नाटक के किसानों को मार झेलनी पड़ी है। राज्य के सी एम सिद्धारमैया इस मुद्दे पर पी एम से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।

सोनिया ने कहा कि ऐसा कर पी एम मोदी ने न केवल किसानों का बल्कि कर्नाटक का भी अपमान किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने गरीबों के लिए लगातार काम किए हैं। हमने गरीबों के लिए महात्मा गांधी नरेगा प्रोग्राम शुरू किया, जिसकी मोदी जी आलोचना करते थे।

उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में एकसाथ खड़े होना और एकसाथ काम करना कर्नाटक की संस्कृति रही है।

सोनिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक में बहुत काम किए हैं। इस वजह से कर्नाटक देश में नंबर वन राज्य बन सका।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार राज्य से भेदभाव करती है।

राहुल गांधी ने कहा, 2019 में जीतने पर मैं पीएम क्यों नहीं बनूंगा?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद की दावेदारी ठोंक दी है। उन्होंने मंगलवार (आठ मई) को कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान साफ कहा कि 2019 में जीतने पर मैं पी एम क्यों नहीं बनूंगा? राहुल गांधी ने यह जवाब तब दिया, जब उनसे प्रधानमंत्री पद को लेकर लोगों ने सवाल किया था।

कर्नाटक में राहुल गांधी ने कहा कि आप लोग मेरे बयान पर हंसेंगे, मगर 2019 में भाजपा सरकार नहीं बनाएगी। वजह कि विपक्ष की एकजुटता के कारण बीजेपी को 2019 के लोकसभा चुनाव में सरकार बनाने में बहुत परेशानी होगी। लोगों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पद के सवाल पर कहा कि अगर 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह पी एम क्यों नहीं बनेंगे। राहुल ने साफ कहा कि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनती है तो वह प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अगर कांग्रेस राज्यों में अपनी विशेष रणनीति पर काम करे तो फिर 2014 की तरह पार्टी को नतीजे नहीं झेलने पड़ेंगे। राहुल ने दावा किया कि 2019 में उनका राजनीतिक विश्लेषण सही साबित होगा और नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनने में सफल नहीं होंगे।

राहुल ने इस दौरान कर्नाटक में महिला उम्मीदवारों की कम संख्या पर असंतोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि हम और ज्यादा संख्या में महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारना चाहते थे, मगर 15 को ही टिकट दे पाए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जब राजनीतिक विचारधारा की लड़ाई होती है तो सभी को इस मुद्दे पर एकजुट होना पड़ता है। राहुल गांधी ने कहा कि अगर देश के तीन प्रमुख दल एकजुट हो गए तो बीजेपी को पांच सीट भी नहीं नसीब होने वाली।

हालांकि राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होगा, वहीं पर मुख्य राजनीतिक लड़ाई देखने को मिलेगी।

बता दें कि राहुल गांधी ने इससे एक दिन पहले सोमवार (आठ मई) को कोलार में रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोलते हुए कहा था कि मोबाइल में तीन मोड होते हैं, वर्क, स्पीकर और एयरप्लेन। मोदी जी सिर्फ एयरप्लेन और स्पीकर मोड में ही काम करते हैं। कभी वर्क मोड में नहीं दिखते हैं।

राहुल गांधी ने किसानों से वादा करते हुए कहा कि 2019 में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के 10 दिन के भीतर उनके कर्ज को माफ कर दिया जाएगा। बता दें कि 12 मई को कर्नाटक में मतदान के बाद 15 मई को परिणाम घोषित होंगे।

जिन्ना की तस्वीर हटाने पर जमात-ए-इस्लामी हिंद ने कहा, अगर कोई ऐसा चाहता है तो उसे अदालत का रूख करना चाहिए

भारत में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर छिड़े विवाद के बीच देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन ने आज (05 मई को) कुछ दक्षिणपंथी संगठनों की इस मांग का औचित्य जानना चाहा और कहा कि अगर कोई ऐसा चाहता है तो उसे अदालत का रूख करना चाहिए।

जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी ने तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं से कहा, ''ऐसी मांग के पीछे क्या औचित्य है? क्योंकि यह पिछले 80 साल से लोगों की नजर में है। फिर भी किसी की ऐसी मांग है तो उसे अदालत जाना चाहिए। इस पर विवाद क्यों?''

यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर लगाने को एक मामूली मुद्दा बताते हुए उमरी ने कहा कि इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि ए एम यू की यह लंबे से अरसे से परंपरा रही है कि वह परिसर में छात्र संघ के आजीवन सदस्यों की तस्वीर लगाता है। उन्होंने कहा कि जिन्ना की तस्वीर 1938 से लगी हुई है। इतने सालों किसी ने भी आपत्ति नहीं जताई या तस्वीर को हटाने की मांग नहीं की।

उमरी ने कहा कि भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी आजादी के संग्राम में जिन्ना की भूमिका पर संदेह नहीं किया है। जमात-ए-इस्लामी हिंद के नेता ने कहा कि यह ऐसा मसला है जिसे छात्र संघ के साथ बातचीत के जरिए हल करने की जरूरत है। उमरी ने भाजपा नीत केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और नागरिकों के मौलिक अधिकार खतरे में है। जमात ने भगवा पार्टी के खिलाफ लड़ने वाली ताकतों का समर्थन किया है।

बता दें कि विवाद की शुरुआत अलीगढ़ के बीजेपी सांसद सतीश गौतम के उस पत्र के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी के कुलपति से लिखकर पूछा था कि क्या यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी हुई है? अगर हां तो यह तस्वीर कहां लगी हुई है और क्यों लगी हुई है?

इसका जवाब देते हुए यूनिवर्सिटी के पी आर ओ ने कहा था कि चूंकि जिन्ना यूनिवर्सिटी के स्टूडेन्ट यूनियन के आजीवन सदस्य रहे हैं इसलिए परंपरा के मुताबिक यूनियन हॉल में उनकी तस्वीर लगी हुई है। इसके बाद तस्वीर को हटाने की मांग पर हिन्दूवादी संगठन हिन्दू युवा वाहिनी के गुंडों ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी कैंपस में सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट की थी और सुरक्षा कर्मियों पर पिस्तौल तान दिया था।