भारत में दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज स्थित गिरिजाघर के दरवाजे पर शरारती तत्वों ने कथित तौर पर मंदिर बनाए जाने की बात लिखी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चर्च के दरवाजे पर रोमन लिपि में काले अक्षरों में लिखा गया - ''मंदिर यहीं बनेगा।''
कहा जा रहा है कि गिरिजाघर के बाहर बने ईसाइयों के धार्मिक चिन्ह को भी विकृत देखा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विश्वविद्यालय सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार (4 मई) की शाम को इस तरह की छेड़छाड़ देखी गई थी और शनिवार को लिखे गए नारों को मिटाने का काम शुरू किया गया। स्टीफेंस के एक छात्र ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर मीडिया को बताया कि ''कुछ छात्रों का शुक्रवार को पहले ही इस छेड़छाड़ पर ध्यान गया था, लेकिन मैंने शनिवार तड़के इसे देखा। कुछ देर बाद मैंने देखा कि स्टाफ ने नारों को मिटाने का काम शुरू कर दिया था। शनिवार की दोपहर तक सभी नारे मिटा दिए गए थे।''
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रॉकी तुसीद ने कहा कि वह संबंधित अधिकारियों के सामने इस मामले को उठाएंगे। तुसीद ने ए एम यू विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश की गई है। कांग्रेस की छात्र शाखा एन एस यू आई की तरफ से भी बयान दिया गया। एन एस यू आई के मीडिया इंचार्ज नीरज मिश्रा ने कहा, ''सेंट स्टीफन कॉलेज छात्रों को उत्कृष्ट गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने में एक चमकदार बीकन के तौर पर रहा है और युवा दिमाग को आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिसका नीति बनाने के फैसलों में सकारात्मक असर देखा गया है। इस प्रकार की घटना से संस्थान के भवन और जिस भारत के विचार की भावना के साथ यह खड़ा है, उसको नुकसान पहुंचा है। यह घटना निंदाजनक है और जो लोग इसमें दोषी पाए जाएं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।''
बीजेपी की छात्र शाखा ए बी वी पी की तरफ से भी इस घटना की निंदा की गई और बयान में कहा गया कि जो भी इस घटना के लिए जिम्मेदार पाया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय एक्जिक्यूटिव काउंसिल के सदस्य राजेश कुमार ने कहा, हम पूरी तरह से इस घटना की निंदा करते हैं। ऐसी घटनाएं मौजूदा सरकार के आने के बाद से बढ़ी हैं। शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण सामाजिक न्याय विरोधी है। इसलिए ऐसी घटनाएं होती हैं।''
भारत में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (ए एम यू) के छात्रसंघ भवन में लगी मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर बवाल जारी है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने चार और पांच मई तक शहर में इंटरनेट सेवाएं बंद करने का फरमान जारी किया है। डी एम चंद्र भूषण सिंह ने धारा 144 के तहत इंटरनेट सेवाओं को बंद करने का आदेश पारित किया है।
मुहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (ए एम यू) परिसर और उसके बाहर हुई घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय में छात्रों का धरना आज भी जारी रहा। ए एम यू के बाब-ए-सैयद गेट के पास अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आज वहीं पर जुमे की नमाज अदा की। जमात में विश्वविद्यालय के शिक्षकों तथा ए एम यू से ताल्लुक रखने वाले अन्य कई लोग शरीक हुए।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने अगले दो दिनों तक परिसर में होने वाली सभी शैक्षणिक गतिविधियों का बहिष्कार जारी रखने का ऐलान किया है। ए एम यू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने आज जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा किया। गत बुधवार को पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुए छात्रों का इसी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
ए एम यू टीचर्स एसोसिएशन ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर गत बुधवार को हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में अराजकता फैलाये जाने के घटनाक्रम की फौरन उच्च स्तरीय जांच कराने की गुजारिश की। एसोसिएशन के सचिव प्रोफेसर नजमुल हसन ने बताया कि संगठन ने राष्ट्रपति से गुहार लगायी है कि वह मामले को गम्भीरता से लें, क्योंकि यह पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि दो मई को पुलिस हिन्दू युवा वाहिनी के गुंडों को रोकने के बजाय तमाशबीन बनी रही।
ए एम यू के शिक्षकों ने आज शांति मार्च निकालने की योजना बनायी है। यह मार्च कचहरी में सम्पन्न होगा।
मालूम हो कि ए एम यू के यूनियन हॉल में जिन्ना की तस्वीर 1938 से लगी है। हिन्दू युवा वाहिनी के कुछ गुंडों ने दो मई को परिसर में घुसकर सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट और भड़काऊ नारेबाजी की थी।
ए एम यू छात्र संघ ने हिन्दू युवा वाहिनी के गुंडों की गिरफ्तारी की मांग की थी। इस मांग के समर्थन में परिसर के गेट पर एकत्र हुए ए एम यू छात्रों की भीड़ को तितर बितर करने के लिए पुलिस ने बलप्रयोग किया था, जिसमें ए एम यू छात्र संघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी और छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष एम हुसैन जैदी समेत छह लोग घायल हो गये थे। इस घटना के बाद ए एम यू छात्रों ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था।
भारत में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज कहा कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश में आज आंधी तूफान आने की एक ताजा चेतावनी जारी की गई है। गृह मंत्रालय ने कहा कि पिछले दो दिनों के दौरान पांच राज्यों में आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने से 124 व्यक्तियों की मौत हो गई और 300 से अधिक घायल हुए हैं।
सबसे अधिक 73 व्यक्तियों की मौत उत्तर प्रदेश में हुई, जबकि 91 अन्य घायल हो गए। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि राज्य में अधिकतर मौतें और लोगों के घायल होने की घटनाएं आगरा क्षेत्र में हुई। राजस्थान में कुल मिलाकर 35 व्यक्तियों की मौत हुई और 206 घायल हो गए। वहीं तेलंगाना में आठ, उत्तराखंड में छह और पंजाब में दो व्यक्तियों की मौत हुई है। तेलंगाना, उत्तराखंड और पंजाब में करीब 100 व्यक्ति घायल हुए हैं।
आंधी-तूफान के बाद कई क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बाधित हुई क्योंकि कई पेड़ उखड़ गए और इससे बिजली के तार टूट गए। प्रभावित राज्यों में गत दो दिनों में बिजली के कम से कम 12000 खंभे गिर गए और 2500 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए।
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चार राज्यों पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश में आज संभावित आंधी तूफान आने के बारे में एक ताजा चेतावनी जारी की गई। आंधी-तूफान असम और मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के छिटपुट स्थानों पर आ सकता है।
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, और दिल्ली, पंजाब, बिहार, झारखंड, सिक्किम, ओड़िशा, उत्तर पश्चिम मध्यप्रदेश, तेलंगाना, रायलसीमा, उत्तर तटवर्ती आंध्र प्रदेश, अंदरूनी तमिलनाडु और केरल में छिटपुट स्थानों पर आंधी तूफान और तेज हवाएं चलने की आशंका है।
तमिलनाडु और केरल में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है, जबकि राजस्थान में छिटपुट स्थानों पर धूल भरी आंधी और आंधी तूफान आ सकता है। गृह मंत्रालय ने इसके साथ ही यह कहते हुए कल के लिए भी एक परामर्श जारी किया कि उत्तराखंड, असम और मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, उपरी हिमालयी पश्विम बंगाल और सिक्किम के छिटपुट स्थानों पर आंधी-तूफान आ सकता है।
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और पश्चिम बंगाल में छिटपुट स्थानों पर आंधी तूफान और तेज आंधी आने की आशंका है। एक अधिकारी ने कहा कि असम, मेघालय और त्रिपुरा में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। राजस्थान में छिटपुट स्थानों पर धूल भरी आंधी आ सकती है।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मुहम्मद अली जिन्नाह की तस्वीर लगी है। ये बात कुछ दिन पहले अलीगढ़ से बीजेपी सांसद सतीश गौतम दुनिया को बता चुके हैं।
ऐसा लगा जैसे हाल फिलहाल में ही ये तस्वीर लगाई गई हो जिससे कई सवाल उठने लाज़िमी थे। लेकिन इसके आगे-पीछे की भी कुछ जानकारियां है, वो भी आपसे साझा कर लेते हैं।
ये तस्वीर 1938 में ए एम यू के स्टूडेंट यूनियन हॉल में लगाई गई थी क्योंकि उस वक्त जिन्नाह को ए एम यू के स्टूडेंट यूनियन की आजीवन सदस्यता दी गई थी।
भारत में बीती रात आए भयानक आंधी-तूफान व बारिश में अब तक कुल 118 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हैं। सबसे ज्यादा नुकसान उत्तर प्रदेश के आगरा और राजस्थान के भरतपुर व धौलपुर में हुआ। उत्तर प्रदेश में 73, उत्तराखंड में 6, राजस्थान में 33, झारखंड में 1, पंजाब में 2 और ओडिशा में 3 लोगों की मौत हो चुकी है।
वहीं गुरुवार की सुबह उत्तर बिहार के कई जिलों में तेज बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया है। भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने मृतक परिवारों से संवेदना जताई है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में खराब मौसम की चेतावनी जारी की है।
आंधी-तूफान के कारण उत्तर प्रदेश में 73 लोगों की मौत हो गई और 51 लोग घायल हो गए हैं। उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त संजय कुमार ने गुरुवार को बताया कि बुधवार रात सूबे में आए तेज आंधी-तूफान, बिजली गिरने और ओलावृष्टि के कारण हुए हादसों में काफी लोगों की मौत हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में हुआ है। जबर्दस्त आंधी-तूफान की वजह से अनेक मकान ध्वस्त हो गए, पेड़ गिर गए और बिजली के खंबे उखड़ गए। बिजनौर, सहारनपुर, बरेली, चित्रकूट, रायबरेली, उन्नाव, फिरोजाबाद, मुजफ्फरनगर, मथुरा, कानपुर, सीतापुर, मिर्जापुर, सम्भल, बांदा तथा कन्नौज में भी आंधी-तूफान और बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
उत्तर मध्य रेलवे के सभी ट्रैकों पर बुधवार को चार घंटे रेल गाड़ियों का संचालन बंद रहा। तूफान का असर गुरुवार को ट्रेन संचालन पर भी पड़ा। आगरा से होकर गुजरने वाली तकरीबन 13 रेल गाड़ियां घंटों देरी से चलीं। रेलवे प्रवक्ता डॉ. संचित त्यागी ने बताया कि बुधवार रात आठ बजे से तूफान के कारण रेलों का संचालन रोकना पड़ा। तूफान थमने के बाद रात करीब 12 बजे ट्रेनों का संचालन बहाल किया गया।
लखनऊ के आंचलिक मौसम केन्द्र ने अगले 48 घंटों के दौरान भी उत्तर प्रदेश के अधिसंख्य जिलों में धूल भरी आंधी चलने तथा कुछ स्थानों पर बारिश होने की चेतावनी जारी की है। केन्द्र के निदेशक जे पी गुप्ता ने अगले 48 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, बलिया, मऊ, गाजीपुर, अम्बेडकर नगर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर और गोंडा समेत 32 जिलों में आंधी-तूफान आने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग द्वारा राहत आयुक्त को पत्र भेजकर अलर्ट करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के डीएम और एस पी को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
उत्तर प्रदेश शासन स्तर से मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। आपदा से राहत के लिए प्रशासनिक टीमों को निर्देश दिए गए हैं। नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित जिलाधिकारियों को आंधी-तूफान और बारिश से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
बिहार की सियासी गरियारे से बड़ी खबर है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और जदयू के बड़े नेता उदय नारायण चौधरी ने जदयू को अलविदा कह दिया है। पटना में बुधवार को साफ-साफ कह दिया कि आज से उनका जदयू से कोई वास्ता नहीं। इस दौरान उदय नारायण ने जदयू पर आरोप लगाया कि अब पार्टी में दलितों के साथ सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कि उदय नारायण चौधरी ने इस्तीफा दे दिया है।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार धनकुबेरों को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। दलितों के साथ अत्याचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने 20 साल तक पार्टी को सींचने का काम किया। लेकिन मेरे साथ ऐसा व्यवहार हुआ। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि मैं अब जदयू में नहीं हूँ। लेकिन आगे का रास्ता क्या होगा, वक्त बताएगा। उन्होंने कहा कि जदयू में भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई है। कई लोग मेरे संपर्क में हैं।
इसके साथ ही, उन्होंने राजद में जाने के सवाल पर कहा कि अब मैं जदयू और बीजेपी के कब्जे से बाहर हूँ। रास्ता खुला है। मैं उन सबके साथ हूँ जो इनके खिलाफ हैं।
जाहिर है कि उदय नारायण चौधरी के इस बयान ने राजनैतिक गलियारे की गर्मी बढ़ा दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अब जल्द ही वो लालू प्रसाद की पार्टी राजद में शामिल होंगे।
आपको बता दें कि उदय नारायण चौधरी लंबे समय से जदयू में रहते हुए पार्टी के कामों का विरोध कर रहे थे। कई बार उन्होंने पार्टी के खिलाफ बोलने का काम किया। इतना ही नहीं, कई बार लालू प्रसाद के सपोर्ट में देखने को मिले। नरेंद्र मोदी तक को कोसते रहे। अब उन्होंने इन सब के बीच जदयू से अपना रिश्ता तोड़ लिया है।
गौरतलब है कि उदय नारायण चौधरी के पार्टी छोड़ने पर फिलहाल जदयू की ओर से कोई बयान नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से उनका विरोध देखने को मिल रहा है। माना जा रहा है कि जदयू उनके पार्टी छोड़ने को काफी गंभीरता से लेने वाला है। इससे पहले हम के मुखिया जीतनराम मांझी भी एनडीए का साथ छोड़ महागठबंधन में सामिल हुए थे। अब उदय नारायण चौधरी के इस बड़े फैसले ने राजनैतिक गलियारे में हलचल बढ़ा दी है।
आईबीटीएन मीडिया नेटवर्क के लिए दिनेश गुप्ता की रिपोर्ट।
मुजफ्फरपुर से दिल्ली जा रही ए सी बस गुरुवार शाम पूर्वी चम्पारण के कोटवा के समीप पुल से नीचे गिर गई और उसमे भीषण आग लग गई। हादसा एन एच-28 पर बेलवा चौक के समीप हुआ। दुर्घटना में छह यात्रियों के जिंदा जलने की आशंका है। बस का शीशा तोड़कर निकले लोगों के अनुसार, हादसे के वक्त बस में 27 से 30 लोग सवार थे। इनमें से देर रात तक आठ के निकलने की सूचना मिली। बाकी बचे 20 लोगों के बारे में तरह-तरह की चर्चा है। दूसरी ओर प्रशासन ने एक भी मौत की पुष्टि नहीं की है।
मोतिहारी के डी एम रमण कुमार ने बताया कि अभी कोई शव नहीं मिला है। एस डी आर एफ व एन डी आर एफ के सहयोग से जली बस और एन एच किनारे के गड्ढे में तलाश की जा रही है। एफ एस एल टीम को भी मौके पर बुलाया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बस चालक एक बाइक सवार को बचाने के चक्कर में नियंत्रण खो बैठा और बस पुल से नीचे जा गिरी। बस के गिरते ही उसमें आग लग गई और धू-धू कर जलने लगी। चारों ओर चीख-पुकार मच गई। तब तक बस के अंदर बैठे कुछ यात्री शीशा तोड़कर बाहर निकले। सूचना मिलते ही घटनास्थल पर डी एम रमण कुमार, एस पी उपेन्द्र शर्मा, डी आई जी ललन मोहन प्रसाद, विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह पहुंच गए हैं।
हादसे की सूचना मिलते ही घटनास्थल पर तिरहुत कमिश्नर एच आर श्रीनिवास, आई जी सुनील कुमार सहित आला अफसर और भारी संख्या में पुलिस बल पहुंचा। इधर, मुजफ्फरपुर के बैरिया बस स्टैंड से मिली जानकारी के मुताबिक, साहिल राज डेली सर्विस की बस गुरुवार दोपहर दो बजे यहां से चली। बस स्टैंड से निकलकर रास्ते में चालक ने डीजल भी डलवाया। पेट्रोल पंप के नोजल मैन के मुताबिक, 48 सीट वाली बस में लगभग ढाई दर्जन लोग बैठे थे। हादसे में घायल एक यात्री अमित ने बताया कि बस चालक गाड़ी पलटने के बाद शीशा तोड़ कर बाहर निकला। उसके बाद उसका पता नहीं चला। अमित के अनुसार, उनके पीछे एक महिला श्रुति भी बाहर निकलीं। एक अन्य घायल यात्री समस्तीपुर के संजीव कुमार (35) ने बताया कि बस स्टाफ की बात से लग रहा था कि कुछ सीटों की बुकिंग मुजफ्फरपुर से थी, वहीं कुछ लोग गोपालगंज से बस में बैठने वाले थे।
कोटवा में बस हादसे के बाद मची अफरातफरी से चकिया से लेकर गोपालगंज तक एन एच-28 पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी। सड़कों पर गाड़ियां फंसी रहीं। तिरहुत प्रमंडल के कमिश्नर अतुल कुमार व आई जी सुनील कुमार ने पहल करके रात 8 बजे जाम समाप्त कराकर पीपराकोठी-गोपालगंज एन एच पर वाहनों का परिचालन शुरू करवाया।
तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त एच एन श्रीनिवास ने बताया, पूर्वी चम्पारण के कोटवा में हुए सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। अब तक की छानबीन में पता चला है कि बस का परमिट मुजफ्फरपुर से जारी नहीं किया गया था। आशंका है कि टूरिस्ट परमिट पर बस चलाई जा रही थी। इस मामले की जांच की जा रही है।
वहीं मोतिहारी के एस पी उपेन्द्र कुमार ने बताया, बस दुर्घटना में अब तक कोई मौत नहीं हुई है। किसी प्रकार की आशंका को दूर करने के लिए एन डी आर एफ व एस टी आर एफ की टीम को भी बुलाया गया है। मुजफ्फरपुर से बस में 13 ऑनलाइन बुकिंग की गयी थी। 27 ऑनलाइन बुकिंग गोपालगंज से थी। घायलों को इलाज के लिए मोतिहारी भेजा गया है।
बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के अध्यक्ष उदय शंकर सिंह के अनुसार, कई महीने पहले दिल्ली जाने वाली बसों के लिए परिवहन विभाग ने अलग से कई मानक बनाए थे। परिवहन आयुक्त ने सभी जिलों के डी टी ओ और परिवहन सचिव का आदेश जारी किया था। दिल्ली जाने वाली सभी बसों की हर रोज जांच होनी है। विभागीय मानकों को पूरा करने वालों को ही बस आगे बढ़ाने की इजाजत दी जानी थी। मगर मुजफ्फरपुर सहित किसी जिले में इसका पालन नहीं किया गया। इसी के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं। ट्रांसपोर्टर निरंकुश होते जा रहे हैं। प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है। बिहार से हर रोज दिल्ली के लिए कम से कम चार से पांच सौ बसें रोज जा रही है। इसे सख्ती से पालन कराना होगा।
भारत में 65वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार वितरण समारोह कुछ विवादों में भी घिर गया। समारोह में गुरुवार को 137 विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए जाने थे। लेकिन 59 लोगों ने कार्यक्रम से दूरी बना ली। दरअसल, ये सभी इस बात से नाराज थे कि उन्हें पुरस्कार राष्ट्रपति के हाथों नहीं मिलेगा।
समारोह में प्रोटोकॉल के चलते राष्ट्रपति को केवल एक घंटे ही मौजूद रहना था। इसलिए तय किया गया था कि केवल 11 विजेताओं को ही उनके हाथ से पुरस्कार दिलाए जाएंगे। इसी पर नाराजगी जताते हुए पुरस्कार के लिए चुने गए कई कलाकारों ने एक पत्र लिखा। इसकी प्रति राष्ट्रपति भवन और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी भेजी गई।
कलाकारों ने पत्र में कहा गया कि वे पुरस्कार वितरण समारोह में शामिल नहीं होंगे क्योंकि राष्ट्रपति स्थापित परंपरा से अलग हटकर केवल 11 लोगों को पुरस्कार देंगे।
साथ ही स्पष्ट किया कि इसके पीछे पुरस्कार के बहिष्कार की कोई मंशा नहीं है, लेकिन असंतुष्टि से अवगत कराने के लिए समारोह में शामिल नहीं हो रहे हैं। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता एक कलाकार ने कहा कि अभी तक राष्ट्रपति ही सभी विजेताओं को अवार्ड देते रहे हैं। इस बार परंपरा टूटी है। यह चिंता का विषय है क्योंकि इससे पुरस्कार का महत्व भी कम हो सकता है।
राष्ट्रपति के प्रेस सचिव अशोक मलिक ने कहा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सभी पुरस्कार कार्यक्रमों और दीक्षांत समारोहों में अधिकतम एक घंटे रुकते हैं। यह प्रोटोकाल उनके पदभार ग्रहण करने के समय से ही चला आ रहा है।
पत्रकार ज्योतिर्मय डे हत्याकांड में सात साल बाद बुधवार को अदालत ने फैसला सुनाया। मुंबई की विशेष मकोका अदालत ने गैंगस्टर छोटा राजन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में सभी आठ अन्य दोषियों को भी ताउम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही सभी दोषियों पर 26-26 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
वहीं, इस मामले में आरोपी पत्रकार जिग्ना वोरा और पॉलसन जोसेफ को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। मोटरसाइकिल सवार दो व्यक्तियों ने वर्ष 2011 में मुंबई के पवई में 56 वर्षीय डे की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी, जब वह अपने घर लौट रहे थे।
तिहाड़ जेल में बंद माफिया डॉन छोटा राजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुंबई की विशेष मकोका अदालत में सुनवाई में शामिल हुआ। न्यायाधीश समीर अदकर ने उसे दोषी करार दिए जाने पर पूछा कि क्या वह कुछ कहना चाहता है तो उसके जवाब में उसने कहा, ठीक है।
छोटा राजन पर आरोप है कि उसने अपने खिलाफ लिखे गए लेख से गुस्साकर पत्रकार जेडे की हत्या करवाई थी। 2011 में मुंबई के पवई इलाके में अंग्रेजी अखबार मिड डे के लिये काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार ज्योति डे की अंडरवर्ल्ड के शूटरों ने 5 गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। साल 2015 में इंडोनेशिया के बाली में गिरफ्तारी के बाद जेडे मर्डर केस पहला ऐसा मामला है, जिसमें छोटा राजन के खिलाफ मुकदमा चला।
विशेष मकोका अदालत ने जून 2015 में वोरा समेत बाकी 10 आरोपियों के विरुद्ध आरोप तय किए थे। छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने डे हत्याकांड की जांच दोबारा शुरू की और अपने पूरक आरोप-पत्र में उसे एक आरोपी बनाया।
जे डे 'खल्लास - एन ए टू जेड गाईड टू द अंडरवर्ल्ड' और 'जीरो डायल : द डेंजरस वर्ल्ड ऑफ इनफोरमर्स' के लेखक थे। वे मौत से पहले अपनी तीसरी किताब 'चिंदी : राग्स टू रिचेस' लिख रहे थे।
जे डे ने कथित रूप से अपनी आने वाली किताब में माफिया डॉन राजन की चिंदी (तुच्छ) के रूप में छवि गढ़ी थी, जिसने संभवत: छोटा राजन को उकसाने का काम किया।
इस मामले के आरोपियों में मुंबई के पत्रकार जिगना वोरा शामिल हैं। कोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया है। इस मामले के 11वें आरोपी विनोद आसरानी उर्फ विनोद चेंबुर की एक निजी अस्पताल में अप्रैल 2015 में मौत हो गई थी। आसरानी कथित रूप से इस पूरे अभियान का मुख्य सह-साजिशकर्ता और धन प्रबंधक था।
अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन फर्जी पासपोर्ट केस में इन दिनों तिहाड़ जेल में 7 साल की सजा काट रहा है।
छोटा राजन का असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे है। उसे प्यार से 'नाना' या 'सेठ' कहकर भी बुलाते हैं। उसका जन्म 1960 में मुंबई के चेम्बूर की तिलक नगर बस्ती में हुआ था।
जिन्ना की फोटो पर चल रहा विवाद बुधवार को ज्यादा गर्मा गया। दोपहर में हिंदू जागरण मंच और ए बी वी पी के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने ए एम यू इंतजामिया का पुतला फूंका, फिर परिसर में घुसकर सुरक्षा बल के जवानों से मारपीट की।
दूसरी ओर ए एम यू छात्र संघ अध्यक्ष ने चेतावनी दे दी कि पुतला फूंकने और सुरक्षा कर्मी से मारपीट करने वाले आरोपी यदि 30 मिनट के अंदर गिरफ्तार नहीं किए तो वह गिरफ्तारी देंगे। जैसे ही शाम करीब चार बजे समय सीमा खत्म हुई तो ए एम यू छात्रों ने गिरफ्तारी देने के लिए थाना सिविल लाइंस की ओर कूच कर दिया। छात्र ए एम यू सर्किल से निकल कर लाल डिग्गी के मुख्य गेट के सामने आ पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। ये जब थाना सिविल लाइंस की ओर कूच करने लगे तो पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया। आंसू गैस के गोले दागे और रबर बुलेट भी चलाईं। इसमें एक दर्जन से अधिक छात्रों के घायल होने की खबर है। हालांकि पुलिस ने रबर बुलेट चलाने से इंकार किया है। उधर लाठीचार्ज के विरोध में छात्र ए एम यू के मुख्य गेट (बाब-ए-सैयद गेट) पर धरने पर बैठ गए।
ए एम यू के यूनियन हॉल में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर पिछले दो दिनों से माहौल गरमाया हुआ है। जिन्ना की तस्वीर हटाने की मांग को लेकर दोपहर करीब 1:30 बजे हिन्दू जागरण मंच और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के आधा दर्जन कार्यकर्ता सर्किल पर जा पहुंचे और ए एम यू इंतजामिया का पुतला फूंका। तभी ए एम यू के सुरक्षा कर्मियों ने कार्यकर्ताओं को दबोच लिया और ए एम यू परिसर में ले गए। आरोप है कि वहां पर कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता की गई। इसके बाद पुलिस ने सभी को थाना सिविल लाइंस ले जाकर छोड़ दिया।
इस घटना की जानकारी जैसे ही अन्य कार्यकर्ताओं को हुई तो वे भी थाना सिविल लाइंस पहुंच गए। इसके बाद करीब डेढ़ दर्जन कार्यकर्ता थाने से सीधे ए एम यू पहुंचे। वहां पर सुरक्षा कर्मी ने रोकने की कोशिश की तो उससे मारपीट कर दी।
दूसरी ओर ए एम यू छात्र संघ के पदाधिकारी और अन्य छात्र भी आ गए। एक तरफ ए एम यू छात्रों ने मोर्चा संभाल लिया तो दूसरी ओर हिन्दू जागरण मंच और ए वी बी पी कार्यकर्ता डट गए।
इस दौरान भारी पुलिस फोर्स भी पहुंच गया और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद तथा हिन्दू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को पुलिस थाने ले गई। वहां पर ये कार्यकर्ता ए एम यू छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।
दूसरी ओर ए एम यू छात्र संघ अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने चेतावनी दे दी कि पुतला फूंकने और सुरक्षा कर्मी से मारपीट करने वाले आरोपी यदि 30 मिनट के अंदर गिरफ्तार नहीं किए तो वह गिरफ्तारी देंगे। जैसे ही शाम करीब चार बजे समय सीमा खत्म हुई तो ए एम यू छात्रों ने गिरफ्तारी देने के लिए थाना सिविल लाइंस की ओर कूच कर दिया। छात्र ए एम यू सर्किल से निकल कर लाल डिग्गी के मुख्य गेट के सामने आ पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की।
आरोप है कि एस पी क्राइम और आर ए एफ कमांडेंट के साथ अभद्रता कर अन्य पुलिस अधिकारियों को भी यहां धक्का दे दिया। इसके बाद पुलिस छात्रों पर टूट पड़ी और दौड़ा-दौड़ा कर छात्रों को पीटा। आरोप है कि छात्रों पर रबर बुलेट भी चलाईं।
आशुतोष द्विवेदी, एस पी क्राइम ने कहा कि छात्रों की भीड़ जब थाने की ओर जा रही थी तो उन्हें समझाने का प्रयास किया। उसी दौरान मेरे और आर ए एफ के कमांडेंट समेत कई अधिकारियों से अभद्रता की गई। पुलिस ने लाठी फटकारीं और आंसू गैस छोड़ी। रबर बुलेट नहीं चलाई गई है।









