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कांग्रेस के दामन पर खून के धब्‍बे हैं: सलमान खुर्शीद के बयान से पार्टी ने किया किनारा

कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ पार्टी नेता सलमान खुर्शीद के सुर्खियों में आए एक बयान को उनकी 'निजी राय' करार देते हुए आज उससे पल्ला झाड़ लिया। खुर्शीद ने कहा था कि 'कांग्रेस का मैं भी हिस्सा हूँ इसलिए मुझे मानने दीजिये कि हमारे दामन पर खून के धब्बे हैं।''

कांग्रेस ने कहा कि जब एक तरफ समाज को धर्म और जाति को बांटने की राजनीति हो रही है तो उस समय किसी नेता को इस तरह के आधारहीन बयान नहीं देने चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता पी एल पूनिया ने संवाददाताओं से कहा, ''सलमान खुर्शीद पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन जहां तक उनके बयान का सवाल है तो कांग्रेस उससे पूर्णत: असहमत है। यह उनकी निजी राय है और कांग्रेस का इससे कोई लेनादेना नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''कांग्रेस ने हमेशा सभी समुदायों को साथ लेकर चलने का काम किया है। हम ऐसे तत्वों के खिलाफ रहे हैं जो धर्म और जाति के आधार पर बांटकर सत्ता में आने की कोशिश करते हैं।''

उन्होंने कहा, ''मोदी सरकार में समाज को बांटने की राजनीति हो रही है, सभी संवैधानिक संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में नेताओं को आधारहीन बयान नहीं देने चाहिए।''

यह पूछे जाने पर कि क्या खुर्शीद पर कोई करवाई होगी, तो पूनिया ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और सिर्फ यह कहा, ''मैंने इस बारे में इतना कह दिया और अब कुछ कहने के लिए नहीं बचता।''

खुर्शीद ने कल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (ए एम यू) के आंबेडकर हॉल में एक कार्यक्रम के दौरान एक छात्र द्वारा पूछे गये सवाल पर कहा, ''यह राजनीतिक सवाल है। हमारे दामन पर खून के धब्बे हैं। कांग्रेस का मैं भी हिस्सा हूँ तो मुझे मानने दीजिये कि हमारे दामन पर खून के धब्बे हैं।''

उन्होंने कहा कि क्या आप यह कहना चाहते हैं कि चूंकि हमारे दामन पर खून के धब्बे लगे हुए हैं, इसलिए हमें आपके ऊपर होने वाले वार को आगे बढ़कर नहीं रोकना चहिए?

उन्होंने छात्र की तरफ इशारा करते हुए कहा, ''हम ये धब्बे दिखाएंगे ताकि तुम समझो कि ये धब्बे हम पर लगे हैं, लेकिन यह धब्बे तुम पर ना लगें। तुम वार इन पर करोगे, धब्बे तुम पर लगेंगे। हमारे इतिहास से सीखो और समझो। अपना हश्र ऐसा मत करो कि तुम 10 साल बाद अलीगढ़ यूनीर्विसटी आओ और आप जैसा कोई सवाल पूछना भी ना मिले।''

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों में यह दूसरा मौका है जब सलमान खुर्शीद कांग्रेस पार्टी की लाइन से अलग दिखाई दिए हैं। इससे पहले भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ राज्य सभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के पार्टी के रूख से भी उन्होंने खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इस बाबत राज्यसभा सभापति एम वेंकैया नायडू को दी गई अर्जी पर दस्तखत करने से भी कथित तौर पर इंकार कर दिया था।

अलीगढ़: जागरण में देवी बनी बच्ची से बलात्कार, आरोपी पूजा के दौरान शेर बना था

भारत में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शख्स ने देवी जागरण कार्यक्रम में उसी बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया जो झांकी में दुर्गा मां बनकर शेर बने आरोपी की पीठ पर सवारी कर रही थी।

आरोप है कि शख्स कार्यक्रम के लिए बच्ची को तैयार कराने के बहाने सुनसान जगह ले गया। दुष्कर्म की जानकारी मिलने पर परिजनों ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी नाबालिग है।

दरअसल, बीते रविवार को साईं विहार कॉलोनी में सरकारी विभाग में तैनात एक व्यक्ति ने घर में देवी जागरण कराया था। जागरण के दौरान एक झांकी दुर्गा मां की निकाली गई। इसमें एक 12 वर्षीया बच्ची को देवी का रूप दिया गया था, जबकि शेर का किरदार कार्यक्रम में शामिल एक युवक निभा रहा था। झांकी के प्रदर्शन के दौरान भक्तों में देवी मां बनी बच्ची और सवारी बने शेर की पूजा करने और पैर छूने की होड़ मची हुई थी।

खबर के मुताबिक, कार्यक्रम के बाद आरोपी युवक बच्ची को दूसरी झांकी के लिए तैयार कराने की बात कहकर पड़ोस के एक घर में ले गया और बच्ची के साथ बलात्कार किया। आरोपी ने बच्ची को धमकी देते हुए कहा कि किसी को बताया तो वह उसकी जान ले लेगा। बच्ची इतना डर गई कि उसने उस रात परिजनों को कुछ नहीं बताया, लेकिन अगली सुबह घटना की जानकारी दी।

परिजन तुरंत स्थानीय पुलिस थाने पहुंचे। पुलिस ने आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। एस पी सिटी अतुल कुमार का कहना है कि केस दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल कराया गया है। रिपोर्ट में बच्ची से दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। आरोपी नाबालिग है। मामले में जांच चल रही है।

सीजेआई के खिलाफ महाभियोग: कपिल सिब्‍बल ने कहा, उपराष्‍ट्रपति को कोलेजियम से बात करनी चाहिए थी

भारत में उपराष्‍ट्रपति और राज्‍यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने मुख्‍य न्‍यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा को पद से हटाने के प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया है। कांग्रेस के राज्‍यसभा सदस्‍य और सी जे आई को पद से हटाने का नोटिस देने में अहम भूमिका निभाने वाले कपिल सिब्‍बल ने उपराष्‍ट्रपति के कदम पर तीखी टिप्‍पणी की है।

उन्‍होंने कहा कि गलत सलाह पर नोटिस को ठुकराया गया है। सिब्‍बल के अनुसार, उपराष्‍ट्रपति को यह फैसला लेने से पहले कॉलेजियम से संपर्क करना चाहिए था।

कांग्रेस नेता और वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता ने कहा, ''हमलोग निश्चित तौर पर इसके खिलाफ (उपराष्‍ट्रपति द्वारा अर्जी खारिज करने का निर्णय) सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करेंगे। हमलोग चाहते हैं कि सी जे आई खुद इस पर कोई फैसला न लें। फिर चाहे वह याचिका को सुनवाई के लिए लिस्‍टेड करने का मामला हो या कुछ और .... सुप्रीम कोर्ट इस पर (उपराष्‍ट्रपति के निर्णय के खिलाफ दाखिल याचिका) जो भी फैसला देगा, हमें स्‍वीकार्य होगा।''

उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू ने सोमवार (23 अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट में आम दिनों की तरह कामकाज शुरू होने से ठीक पहले सी जे आई को पद से हटाने वाले नोटिस को खारिज कर दिया।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को 10:30 के बजाय 10:45 बजे कामकाज शुरू हुआ। राज्‍यसभा के सभापति ने नोटिस में दिए गए तथ्‍यों को सी जे आई को पद से हटाने के लिए राज्‍यसभा में प्रक्रिया शुरू करने के लिए अपर्याप्‍त माना।

कांग्रेस ने उपराष्‍ट्रपति के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत सी जे आई को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए 50 सदस्‍यों के हस्‍ताक्षर की जरूरत होती है। नोटिस में पर्याप्‍त सदस्‍यों के हस्‍ताक्षर थे, ऐसे में राज्‍यसभा के सभापति प्रस्‍ताव पर निर्णय नहीं ले सकते हैं।

कांग्रेस के प्रवक्‍ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट किया, ''वास्‍तव में यह लड़ाई लोकतंत्र को खारिज करने और प्रजातंत्र को बचाने वाली ताकतों के बीच है।''

बता दें कि भारत के इतिहास में यह पहला मौका था, जब भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश को पद से हटाने के लिए प्रस्‍ताव लाने का नोटिस दिया गया। जज लोया की मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष ने सी जे आई के खिलाफ राज्‍यसभा के सभापति को नोटिस दिया था।

भारत में जिस दिन रेप पर सख्त कानून बना, उस दिन हुए सात रेप

कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ गैंगरेप की घटना के बाद विरोध के स्वर पूरे भारत में बुलंद हुए। जनभावनाओं को देखते हुए भारत में केंद्र सरकार ने शनिवार (21अप्रैल) को पॉक्सो एक्ट में बदलाव करते हुए 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार के दोषियों को मौत की सजा प्रस्तावित की। जिसे अगले ही दिन रविवार (22) अप्रैल) को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दी।

बलात्कार को लेकर जिस वक्त देश में सबसे कड़ी सजा का बंदोबस्त हो रहा था, उस वक्त भी कई हिस्सों से बलात्कार की कई खबरें सामने आई हैं।

उत्तर प्रदेश, ओडिशा से लेकर हरियाणा आदि राज्यों में बच्चियों के साथ दरिंदगी की घटनाओं को लेकर लोगों में रोष है। इन राज्यों में बीजेपी का शासन है। पॉक्सो एक्ट में हुए बदलाव के बाद 16 साल से कम उम्र की लड़की से रेप करने पर दी जाने वाली सजा दस साल से बढ़ाकर 20 साल कर दी गई है। यही नहीं, ऐसे मामलों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित होंगी। थानों और अस्पतालों को मामले की जांच के लिए स्पेशल फॉरेंसिक किट भी उपलब्ध कराई जाएगी।

हरियाणा में कठुआ जैसी घटना दोहराई गई। यहां यमुनापार इलाके में एक धर्मस्थल के नजदीक स्थित धर्मशाला में लड़की से गैंगरेप की घटना हुई। जहां 13 साल की लड़की से पहले चार दरिंदों ने गैंगरेप किया, फिर दीवार पर सिर पटककर हत्या करने की कोशिश हुई।

ओडिशा के कटक में 6 साल की बच्ची से शनिवार (21 अप्रैल) की रात स्कूल के अंदर रेप की घटना सामने आई, इसी दिन केंद्र सरकार बच्चियों से बलात्कार पर फांसी की सजा का प्रावधान करने में जुटी थी। बच्ची स्कूल परिसर में बेहोश मिली थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी चॉकलेट का लालच देकर बच्ची को स्कूल में सुनसान स्थान पर ले गया, फिर हवस का शिकार बनाया। आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

उधर तमिलनाडु में एक छेड़खानी की घटना भी सामने आई। जब एक बीजेपी नेता पर बच्ची से छेड़खानी और दुष्कर्म की कोशिश का आरोप लगा। ट्रेन तिरुवनंतपुरम से चेन्नई जा रही थी। दस वर्षीया लड़की के साथ बीजेपी नेता ने गंदी हरकत की। बच्ची के चीखने पर लोगों ने बीजेपी नेता को पकड़कर पुलिस को सूचना दी। बताया जा रहा कि आरोपी बीजेपी के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुका है।

केंद्र सरकार की ओर से कानून बनाने और राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी दिए जाने के बीच उत्तर प्रदेश में रेप की जबर्दस्त घटनाएं हुईं। 24 घंटे के अंदर चार बच्चियों को दरिंदों ने हवस का शिकार बनाया। रामपुर के स्वार थाना क्षेत्र में घर में अकेली मौजूद सात साल की बच्ची के साथ बलात्कार की घटना हुई। आरोपी घर से बच्ची को सुनसान स्थान पर ले गया और फिर बलात्कार किया।

वहीं कन्नौज के विष्णुगढ़ में 11 साल की बच्ची के साथ चाचा पर रेप का आरोप लगा। मुरादाबाद में आरोपियों ने घर में घुसकर नाबालिग का बलात्कार किया। फिर उसका वीडियो बनाकर वायरल भी कर दिया। उधर मुजफ्फरनगर में और सनसनीखेज घटना हुई। जब सिर दर्द के लिए दवा लेने गई 13 साल की बच्ची से रेप करने का आरोप चिकित्सक पर लगा। शिकायत के मुताबिक, बच्ची को कई दिन तक चिकित्सक बंधक बनाए रखा। पुलिस ने क्लीनिक पर छापा मारकर आरोपी चिकित्सक को गिरफ्तार कर लिया।

उन्‍नाव में रेप के आरोपी बीजेपी विधायक के समर्थन में रैली निकली

भारत में उत्तर प्रदेश के उन्नाव में भी ठीक वैसा ही हाल देखने को मिला, जैसा कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हुआ था। गैंगरेप के मामले में यहां पर भी लोगों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आरोपी विधायक के समर्थन में रैली निकाली। लोग इस दौरान बड़े-बड़े बैनर लिए हुए थे, जिन पर लिखा था, ''हमारा विधायक निर्दोष है।''

लोगों का कहना था कि यह पूरा मामला सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक षडयंत्र का हिस्सा था। यह रैली सोमवार (23 अप्रैल) को बांगरमऊ, सफीपुर, बीघापुर और उससे सटे इलाकों में निकाली गई।

महिलाओं से लेकर सैकड़ों पुरुषों ने इस रैली में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, जिसका नेतृत्व नगर पंचायत अध्यक्ष अनुज कुमार दीक्षित ने किया। दीक्षित ने इस बारे में एक न्यूज वेबसाइट से कहा, ''यह हमारे विधायक को बदनाम करने की राजनीतिक साजिश है। वह निर्दोष हैं। उन्हें गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। ऐसे में, हम इस मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं।''

आपको बता दें कि कठुआ में भी कुछ ऐसी ही घटना देखने को मिली थी। यहां आठ साल की मासूम लड़की के साथ गैंगरेप और हत्या के मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसमें एक पुजारी भी शामिल था। हिंदू एकता मंच ने इसके बाद आरोपियों के समर्थन में एक रैली निकाली थी। प्रदर्शनकारियों का दावा था कि जिन्हें गैंगरेप के मामले में आरोपी बनाया गया, उन्होंने कुछ नहीं किया। लोगों ने सी बी आई जांच की मांग उठाई थी। जम्मू-कश्मीर सरकार में बीजेपी के दो मंत्री चौधरी लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा भी इस रैली का हिस्सा थे।

याद दिला दें कि पिछले साल जून में पीड़िता ने बांगरमऊ से बीजेपी विधायक सेंगर और उसके भाई पर गैंगरेप करने का आरोप लगाया था। लेकिन तब उसकी सुनवाई नहीं हुई थी। मामला तब सुर्खियों में आया, जब पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी।

आरोप है कि सेंगर के भाई ने ही उनकी हत्या कराई थी। आरोपी विधायक को इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया था। मामले की जांच सी बी आई के पास है, जबकि आरोपी विधायक की वाई श्रेणी सुरक्षा उससे छीन ली गई है।

मेघालय से अफस्पा हटा, अरुणाचल प्रदेश के सिर्फ 8 थानों में लागू

भारत में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मेघालय से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफस्पा) हटा दिया है और अरुणाचल प्रदेश में इसे 8 पुलिस थानों तक सीमित कर दिया है। एक अधिकारी ने सोमवार को कहा, ''मेघालय के सभी इलाकों से 1 अप्रैल से अफस्पा को पूरी तरह हटा लिया गया है। अरुणाचल में इसे 16 पुलिस थानों से घटा कर 8 में कर दिया गया है।''

हालांकि, इस अधिनियम को अरुणाचल प्रदेश के तीन पूर्वी जिलों में छह महीनों के लिए बढ़ा दिया गया है। इन जिलों में तिरप, लोंगडिंग और चांगलांग शामिल हैं, जिनकी सीमा म्यांमार और 8 पुलिस थानों के तहत असम की सीमा के 7 अन्य जिलों से लगती है। तीनों जिले जनवरी 2016 से अफस्पा के तहत हैं।

अधिकारी ने कहा कि त्रिपुरा से यह अधिनियम 2015 में हटा लिया गया था और बीते एक साल में पूर्वोत्तर के कुछ इलाके इस अधिनियम के तहत हैं। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम मेघालय में सिर्फ असम से लगे 20 किमी इलाके में लागू है और मिजोरम में यह प्रभावी नहीं है।

अफस्पा सेना और केंद्रीय बलों को 'अशांत क्षेत्रों' में कानून का उल्लंघन करने पर किसी को भी मारने, बिना वारंट के तलाशी लेने और गिरफ्तारी करने की शक्ति देता है और केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना अभियोजन और कानूनी मुकदमे से बलों को सुरक्षा प्रदान करता है। यह पूरे नागालैंड, असम, मणिपुर (इंफाल के सात विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को छोड़कर) में प्रभावी है। असम और मणिपुर की राज्य सरकारों के पास अब इस अधिनियम को बनाए रखने या रद्द करने की शक्तियां हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक और फैसले में पूर्वोत्तर में विद्रोहियों के आत्मसमर्पण करने पर पुनर्वास नीति सहायता राशि में इजाफा किया है जो कि 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी गई है। यह नीति इसी 1 अप्रैल से प्रभावी हो चुकी है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक और बयान में कहा गया है कि इलाके में पिछले 4 वर्षों में विद्रोह से संबंधित घटनाओं में 63 फीसदी की कमी दर्ज की गई है, जबकि 2017 में इन घटनाओं में नागरिकों के मारे जाने में 83 फीसदी की कमी और 40 फीसदी की कमी सुरक्षा बलों के हताहत होने को लेकर दर्ज की गई। पूर्वोत्तर में 2000 के मुकाबले 2017 में विद्रोह से संबंधित घटनाओं में 85 फीसदी तक की कमी आई। वहीं, 1997 के मुकाबले सुरक्षा बलों की हताहत होने की घटनाओं में 96 फीसदी की कमी देखी गई।

लंदन में पीएम मोदी से सवाल पूछने वाला निकला बीजेपी नेता का बेटा

इस खुलासे ने निश्चित तौर से विपक्ष को मोदी सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा थमा दिया है और भाजपा की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। हम बात कर रहे हैं उस खुलासे की, जिसे आम आदमी पार्टी की नेता अलका लांबा ने अपने ट्वीट के जरिए किया है।

अलका लांबा ने ट्वीट कर कहा है कि विदेश दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लंदन में सवाल पूछने वाला सिख लड़का कोई और नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता का बेटा ही था। अलका लांबा का यह ट्वीट जबरदस्त तरीके से वायरल भी हो रहा है।

दरअसल लंदन के वेस्टमिंस्टर सेंट्रल हॉल में एक सिख लड़के ने प्रधानमंत्री से पूछा था कि आप की ऊर्जा का राज क्या है? इस लड़के ने पीएम से पूछा कि 'आप 20-20 घंटे लगातार काम करने के बावजूद कभी थके हुए नहीं दिखते हैं। आपको ऊर्जा कहां से मिलती है? इसका राज बताएं, ताकि हम भी यह तरीका अपना कर देश हित के लिए काम कर सकें?' सिख लड़के के इस सवाल का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ही दिलचस्प जवाब दिया था।

मोदी ने कहा था कि 'मैं लगभग 20 साल से हर दिन एक, दो किलोग्राम गालियां खा रहा हूं'।

उस वक्त मोदी का यह जवाब काफी चर्चे में रहा था। विभिन्न रिपोर्टों में यह कहा गया कि मोदी ने एक आम लड़के के सवाल का जवाब बेहद ही अनूठे अंदाज में दिया। मोदी का यह जबाव सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ था। लेकिन अब जो खुलासा आम आदमी पार्टी की नेता अलका लांबा ने किया है। उसके मुताबिक प्रधानमंत्री से सवाल पूछने वाले लड़का कोई आम लड़का नहीं था।

इस लड़के का नाम तरणप्रीत सिंह है। तरणप्रीत सिंह झारखंड के जमशेदपुर शहर का रहने वाला है। तरणप्रीत सिंह लंदन स्थित University of Warwick में पढ़ाई करता है। तरणप्रीत सिंह के पिता अमरप्रीत सिंह काले भाजपा के नेता बतलाए जा रहे हैं। अलका लांबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तरणप्रीत के पिता की एक तस्वीर भी पोस्ट की है। इस तस्वीर में अमरप्रीत प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक मंच पर नजर आ रहे हैं। फिलहाल यह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।

इस समय न्यायपालिका की स्वतंत्रता संकट में है, चीफ जस्टिस को हटाया जाना जरूरी है: कांग्रेस

भारत में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के कई फैसलों पर नाराजगी जताते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस उनके खिलाफ महाभियोग लाने में जुटी है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाब नबी आजाद की अगुआई में विपक्ष ने उपराष्ट्रपति वैंकैया नायडू को महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया, जिस पर 71 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।

हालांकि, इनमें से सात सांसदों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। इस प्रकार महाभियोग प्रस्ताव पर सिर्फ 64 सांसदों का हस्ताक्षर ही प्रभावी होगा। विपक्षी नेताओं ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन से प्रस्ताव पेश करने को अनुमति प्रदान करने की मांग की।

महाभियोग प्रस्ताव के लिए कांग्रेस ने विपक्षी नेताओं की बैठक बुलाई थी, मगर इसमें समाजवादी पार्टी, राजद, तमिलनाडु की डी एम के और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने हिस्सा नहीं लिया। हालांकि, इन दलों के नेताओं ने महाभियोग का समर्थन करने की बात कही है।

गुलाब नबी आजाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि इस समय न्यायपालिका की स्वतंत्रता संकट में है, जिसके कारण चीफ जस्टिस को हटाया जाना जरूरी है। विपक्ष ने महाभियोग के लिए कारण भी गिनाए। उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश के कई प्रशासनिक फैसले विवादों में घिरे हैं। सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में पारदर्शिता नहीं होने से जजों को मीडिया में आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए मजबूर होना पड़ा। विपक्ष ने मुख्य न्यायाधीश पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार सवाल उठने के बाद भी सर्वोच्च न्यायालय के काम में सुधार नहीं हुआ। जज लोया और मेडिकल कॉलेज घोटाले को लेकर चीफ जस्टिस विवादों में घिरे।

जज लोया मौत: कांग्रेस को घेरने का बीजेपी का प्लान लीक

सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई करने वाले जज बी एच लोया की संदेहास्पद मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी अब कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी पर आक्रामक हो गई है। बीजेपी के प्रवक्ता गुरुवार (19 अप्रैल) से लगातार कांग्रेस पर हमला बोल रहे हैं और उनसे देश से माफी मांगने की मांग कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, बीजेपी ने इस मुद्दे को देशव्यापी बनाने का प्लान बनाया है और सभी सांसदों को लिखित सलाह दी गई है कि उन्हें इस संदर्भ में क्या-क्या करना है, लेकिन बीजेपी का यह प्लान सोशल मीडिया में लीक हो गया है। बीजेपी की संसदीय दल की तरफ से बालासुब्रमण्यम कामरसू ने यह चिट्ठी सभी बीजेपी सांसदों को लिखी है।

19 अप्रैल, 2018 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद पत्र में लिखा गया है कि सभी सांसद तुरंत लोकल टीवी चैनलों पर अपनी बात रखें और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से जज लोया की मौत के मामले में अमित शाह को बदनाम करने के लिए देश से माफी मांगने की बात कहें।

बीजेपी की तरफ से कहा गया है कि टीवी चैनलों को बाइट देने के अलावा प्रेस स्टेटमेंट भी जारी करें। प्रेस स्टेटमेंट में क्या लिखना है, इसका पूरा ड्राफ्ट सांसदों को ई-मेल से भेजा गया है। बीजेपी ने सांसदों को इस बाबत प्रेस कॉन्फ्रेन्स करने की भी सलाह दी है। साथ ही, जजमेंट की कॉपी पढ़कर उसके फैसलों की व्याख्या किसी वकील की सहायता लेकर करने को कहा है।

बीजेपी की तरफ से सभी सांसदों को यह भी कहा गया है कि केंद्रीय नेताओं द्वारा इस मामले में किए जा रहे ट्वीट्स को रिट्वीट करें। उसे स्थानीय भाषाओं में सभी सांसद ट्वीट करें। सांसदों को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वॉट्सऐप और एस एम एस सुविधा का भी इस्तेमाल करने की नसीहत दी गई है। बीजेपी ने एस एम एस में क्या लिखना है, इसका भी ड्राफ्ट भेजा है। चिट्ठी में एस एम एस, वॉट्सऐप और अन्य मैसेजेज प्लेटफॉर्म के लिए सात बिंदुओं में मामले से जुड़ा कंटेंट लिखकर दिया गया है।

गुजरात में 2002 में हुए नरसंहार मामले में हाई कोर्ट ने बाबू बजरंगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई

गुजरात के नरोदा पाटिया इलाके में 2002 में हुए नरसंहार मामले में हाई कोर्ट ने आरोपी बाबू बजरंगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पहले से जेल में बंद बाबू बजरंगी को अब पूरी जिंदगी सलाखों के भीतर ही काटनी होगी।

गुजरात दंगों के बाद जो आरोपी सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहे हैं, उसमें बाबू बजरंगी का नाम प्रमुख है। चार्जशीट के मुताबिक, बाबू बजरंगी ने अल्पसंख्यकों के इलाके में घुसी भीड़ का नेतृत्व किया और उन्हें मार-काट के लिए उकसाया। 2002 में 27 फरवरी को साबरमती एक्सप्रेस में कारसेवकों को जलाए जाने की घटना के अगले दिन 28 फरवरी को हिंदू संगठनों ने बंद का आह्वान किया था। इस दौरान अहमदाबाद के नरोदा पाटिया इलाके में उन्मादी भीड़ ने 97 लोगों की हत्या कर दी थी।

तहलका ने दस वर्ष पहले नरोदा पाटिया इलाके के मुख्य आरोपी बाबू बजंरगी का स्टिंग किया था। यू-ट्यूब पर 25 अक्टूबर 2007 की तिथि का यह वीडियो मौजूद है। इस वीडियो में बाबू बजरंगी को नरोदा पाटिया में दंगे के दौरान मार-काट की घटना के बारे में बताते हुए दिखाया गया है।

वीडियो में दिखाया गया है कि बाबू बजरंगी नाम का शख्स कहता है कि ट्रेन जलाने की घटना के बाद उसका खून खौल उठा। जिसके बाद कार्यकर्ताओं के साथ इलाके में मार-काट शुरू कर दी। एक शख्स वीडियो बना रहा था, उसे तेल डालकर जला दिया गया। किसी उम्र के व्यक्ति को नहीं छोड़ा गया। लाशों का ढेर लगा दिया गया। फिर रात दो बजे उसने राज्य के गृहमंत्री को फोन कर कहा - ..... इतने लोग मार डाले गए हैं, बाकी आप संभाल लो।

वीडियो में बाबू बजंरगी एक जगह कहता है कि लोगों को जलाने के लिए कई पेट्रोल पंप से उसे मुफ्त में तेल मिले। जब मार-काट चल रही थी तो तमाम लोग जान बचाने के लिए माथे पर टीका और भारत माता के जयकारे लगाते हुए भागे।

बाबू बजरंगी का मूल नाम बाबूभाई पटेल है। शुरुआत में यह आरोपी बजरंद दल से जुड़ा था, मगर दो साल बाद विश्व हिंदू परिषद की सदस्यता ली। विहिप में भी मन नहीं लगा तो बाद में शिवसेना से जुड़ गया। 2002 में जब नरोदा पाटिया इलाके में बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ तो बीजेपी सरकार में तत्कालीन मंत्री माया कोडनानी और हिंदू नेता बाबू बजरंगी पर भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप लगा।

शुक्रवार (20 अप्रैल, 2018) को गुजरात हाईकोर्ट की ओर से दिए फैसले में पूर्व मंत्री माया कोडनानी को बरी कर दिया गया, वहीं जेल में बंद बाबू बजरंगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इससे पहले कोर्ट ने बाबू बजरंगी को उम्रकैद की सजा दी थी।