भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (13 अप्रैल) को कठुआ गैंगरेप और हत्या के मामले को लेकर चुप्पी तोड़ी। प्रधानमंत्री मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने बिना किसी का नाम लिए कहा, ''देश के किसी भी राज्य में, किसी भी क्षेत्र में होने वाली ऐसी वारदातें, हमारी मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देती हैं। मैं देश को विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि कोई अपराधी बचेगा नहीं, न्याय होगा और पूरा होगा। हमारे समाज की इस आंतरिक बुराई को खत्म करने का काम, हम सभी को मिलकर करना होगा।''
समाचार एजेंसी ए एन आई के मुताबिक, इस मामले में जम्मू-कश्मीर के दो बीजेपी मंत्रियों ने इस्तीफे दे दिए हैं। राज्य सरकार के दो मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा और लाल सिंह ने अपने इस्तीफे दिए हैं।
बता दें कि हाल ही में कठुआ गैंपरेप के आरोपियों के समर्थन में हिंदू एकता मंच की ओर से रैली निकाली गई थी, जिसमें राज्य के मंत्री और बीजेपी के विधायक लाल सिंह और प्रकाश चंद्र गंगा के शामिल होने को लेकर बीजेपी की किरकिरी हो रही थी। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हो रहा था, तब बीजेपी के मंत्री ने रैली में शामिल होने की बात कबूली थी। हालांकि उन्होंने आठ साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के आरोपियों का बचाव करने के आरोपों से इनकार किया था।
लाल सिंह ने कहा था, ''हमने कभी किसी का समर्थन नहीं किया। बच्ची के साथ ज्यादती हुई है और ऐसा करने वालों को दंड जरूर मिलना चाहिए। वहां (सभा में) हमारी ड्यूटी लगी थी और मैं गंगाजी (जम्मू-कश्मीर में मंत्री और भाजपा विधायक प्रकाश चंद्र गंगा) के साथ गया था। लेकिन, हमारी ड्यूटी पीड़िता के विरोध में नहीं लगाई गई थी। सभा में लोगों ने मामले की सी बी आई से जांच कराने की मांग रखी थी। मैंने उनकी मांग मैडम (मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती) के समक्ष रखी थी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। बस मामला यहीं खत्म हो गया। आगे जो भी कर रही हैं, वही कर रही हैं। हम तो कुछ कर नहीं रहे हैं।''
बता दें कि कठुआ गैंगरेप मामले में प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी के खिलाफ कांग्रेस लगातार उन पर हमलावर हो रही थी। गुरुवार की रात दिल्ली के इंडिया गेट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुआई में कैंडल मार्च भी निकाला गया था। लेकिन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में डॉ. अंबेडकर नेशनल मेमोरियल के उद्घाटन के मौके पर कठुआ और उन्नाव मामले पर अपनी बात रखी।
कठुआ में इसी वर्ष जनवरी में आठ साल की बच्ची के साथ कई दिनों तक गैंगरेप किया गया था और बाद में उसकी निर्मम हत्या कर दी गई थी। मामले में आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई चार्जशीट में बच्ची के साथ की गई निर्ममता की बात सामने आने पर भारत भर में लोग उबल पड़े।
कहा जा रहा है कि वकीलों ने चार्जशीट दाखिल करने जा रही पुलिस के लिए अड़चनें भी खड़ी कीं। वहीं, कुछ हिंदूवादी संगठन आरोपियों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। इन लोगों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। मामले की सी बी आई जांच की मांग भी जोर पकड़ रही है।
कठुआ सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड को लेकर जम्मू और कश्मीर की राजनीति गरमा गई है। आरोपियों के समर्थन में हिंदू एकता मंच की ओर से निकाली गई रैली में राज्य के मंत्री और बीजेपी के विधायक लाल सिंह ने भी शिरकत की थी।
सोशल मीडिया में वीडियो पहले ही वायरल हो चुका था। लेकिन भाजपा नेता ने अब जाकर सभा में शामिल होने की बात खुद कबूल की है।
उन्होंने आठ साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के आरोपियों का बचाव करने के आरोपों से इनकार किया है। लाल सिंह ने कहा, ''हमने कभी किसी का समर्थन नहीं किया। बच्ची के साथ ज्यादती हुई है और ऐसा करने वालों को दंड जरूर मिलना चाहिए। वहां (सभा में) हमारी ड्यूटी लगी थी और मैं गंगाजी (जम्मू-कश्मीर में मंत्री और भाजपा विधायक प्रकाश चंद्र गंगा) के साथ गया था। लेकिन, हमारी ड्यूटी पीड़िता के खिलाफ के लिए नहीं लगाई गई थी। सभा में लोगों ने मामले की सी बी आई से जांच कराने की मांग रखी थी। मैंने उनकी मांग मैडम (मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती) के समक्ष रखी थी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। बस मामला यहीं खतम हो गया। आगे जो भी कर रही हैं, वही कर रही हैं। हम तो कुछ कर नहीं रहे हैं।''
बता दें कि भाजपा कोटे के दो मंत्रियों के हिंदू एकता मंच की रैली में जाने से पी डी पी के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई है।
कठुआ में इस साल जनवरी में एक आठ साल की बच्ची के साथ कई दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और बाद में उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा ने इस मामले में कुछ दिनों पहले ही आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें बच्ची के साथ की गई निर्ममता की बात सामने आई थी, जिसके बाद भारत भर में आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग ने जोर पकड़ लिया। वकीलों ने चार्जशीट दाखिल करने जा रही पुलिस के लिए अड़चनें भी खड़ी की थीं।
वहीं, जम्मू में हिंदूवादी संगठन आरोपियों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन करने वाले धड़े ने मामले की सी बी आई से जांच कराने की मांग की है। ये लोग जम्मू-कश्मीर पुलिस पर पक्षपाती रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं।
उन्नाव गैंगरेप केस में आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सी बी आई ने शुक्रवार तड़के हिरासत में ले लिया और पूछताछ की। इस मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं।
पता चला है कि किसी जमाने में आरोपी विधायक और पीड़िता महिला के परिवार में 'मैत्रीपूर्ण रिश्ते' थे। मखी गांव में दोनों परिवारों के घर आमने-सामने हैं। पीड़िता लड़की और उसके भाई-बहन विधायक को 'भइया' कहते थे। पिछले साल जून में विधायक ने उसे नौकरी देने की बात कहकर घर बुलाया। इसके बाद वह एक रिश्तेदार के साथ आरोपी विधायक के घर गई और यह वारदात हो गई।
पीड़िता ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में दोनों परिवारों के बीच के रिश्तों और उन घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया है, जिसके बाद पिछले साल उसके साथ कथित तौर पर गैंगरेप हुआ।
17 साल की पीड़िता ने कहा, ''पिछले साल 4 जून की बात है। मुझे एक कमरे में जाने के लिए कहा गया, जहां उसने मेरे साथ रेप किया। बाद में मुझसे कहा गया कि अगर मैंने इस बारे में किसी को बताया तो मेरे पिता और परिवार को मार दिया जाएगा। मैंने इसके बारे में किसी को नहीं बताया। हालांकि, कुछ दिन बाद 11 जून को उसके कुछ लोगों ने मेरा अपहरण कर लिया। उन्होंने कुछ दिनों तक मेरा गैंगरेप किया और मुझे किसी को बेच दिया। वहां से मुझे छुड़ाया गया।''
बता दें कि इस मामले को उत्तर प्रदेश सरकार ने सी बी आई को सौंपा है। इसके बाद, गुरुवार को आरोपी विधायक के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस ने पॉक्सो समेत कई धाराओं में विधायक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इससे पहले पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। आरोपी विधायक के भाई पर पीड़िता के पिता को पीटने का आरोप है।
पीड़िता ने कहा, ''हम सब उनको भैया कहते थे। हमारे बड़े पापा उनके साथ थे। कभी-कभी वो (विधायक) घर आते थे और दादी से कहते थे कि अंडा फ्राई करके खिलाओ तो दादी उन्हें बनाकर खिलाती थी।''
पीड़िता ने बताया कि पिछले साल गैंगरेप की वारदात के बाद जब वह घर लौटी तो अपने रिश्तेदार के पास दिल्ली चली गई। पीड़िता ने बताया, ''दिल्ली में पहली बार मैंने अपनी चाची को इस घटना के बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने चाचा को जानकारी दी।''
पीड़िता ने आगे बताया, ''17 अगस्त 2017 को मैं और चाचा लखनऊ गए और वहां सी एम योगी आदित्य नाथ के घर पर अपनी दरख्वास्त दी। उन्होंने हमारी दरख्वास्त किसी और व्यक्ति को सौंप दी और कुछ नहीं हुआ।''
पीड़िता ने आगे बताया कि जब सी एम योगी आदित्य नाथ से निजी तौर पर मिलने से भी कुछ नहीं हुआ तो उसने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश डी जी पी को चिट्ठी लिखकर मदद मांगी।
पीड़िता के मुताबिक, इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ। और तो और, पुलिसवालों ने नसीहत दी कि वह इस मामले में बीजेपी विधायक को न लाए। लेकिन पिछले हफ्ते जब पीड़िता ने अपने पिता के साथ मारपीट की घटना सुनी तो अगली ट्रेन पकड़कर लखनऊ पहुंची, ताकि सी एम योगी आदित्य नाथ से मुलाकात कर सके।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में ठीक एक महीने का समय रह गया है। इस बीच सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी, दोनों अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन न्यूज़ चैनल 'आजतक' ने 'कर्नाटक का किंग कौन' नाम से एक ओपिनियन पोल सर्वे जारी किया है, जिसके मुताबिक कांग्रेस का पलड़ा भारी दिख रहा है।
सर्वे के मुताबिक, आज की तारीख में अगर चुनाव हो जाय तो 225 सदस्यों वाले विधानसभा में सत्तारूढ़ कांग्रेस 90 से 101 सीटें पाकर कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी, जबकि बीजेपी को 78 से 86 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है। जे डी एस गठबंधन को 34 से 43 सीटें मिलती हुई दिखाई गई हैं।
मौजूदा समय में कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के 122, बीजेपी के 43, जे डी एस के 29 और अन्य के 14 विधायक हैं और 16 सीट खाली हैं। एक विधायक एंग्लो-इंडियन समुदाय से नामित हैं।
इस सर्वे को इंडिया टुडे ग्रुप और कार्वी इनसाइट्स ने मिलकर किया है। सर्वे 17 मार्च से 5 अप्रैल, 2018 के बीच सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया। इस दौरान कुल 27,919 लोगों का इंटरव्यू लिया गया। सर्वे में 62 फीसदी ग्रामीण और 38 फीसदी शहरी लोगों ने हिस्सा लिया।
सर्वे में 52 फीसदी लोगों ने कांग्रेस द्वारा खेले गए लिंगायत कार्ड को मुद्दा माना है, जबकि 28 फीसदी ने इसे कोई मुद्दा मानने से इनकार कर दिया। 42 फीसदी लोगों ने राहुल गांधी के मंदिर-मंदिर जाने से कांग्रेस को फायदा होना बताया है, 35 फीसदी लोगों ने माना कि इससे कांग्रेस को फायदा नहीं होगा, जबकि 20 फीसदी लोगों ने इस मुद्दे पर अपनी राय नहीं दी। सर्वे में सिद्धारमैया सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री के रूप में उभरे हैं। 33 फीसदी लोगों का मानना है कि सिद्धारमैया दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे, जबकि 26 फीसदी लोगों का मानना था कि बी एस येदुरप्पा सी एम बनेंगे।
सर्वे में 73 फीसदी लोगों ने सिद्धारमैया सरकार द्वारा कन्नड़ को अनिवार्य भाषा बनाने का समर्थन किया है, जबकि 59 फीसदी लोगों ने राज्य के लिए अलग झंडा की नीति का समर्थन किया है। सर्वे में 31 फीसदी लोगों ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यकाल को औसत माना है। बता दें कि अगले महीने 12 मई को सभी सीटों पर चुनाव होंगे और 15 मई को नतीजे आएंगे।
उन्नाव गैंगरेप के आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर को सी बी आई ने गिरफ्तार किया है। बता दें कि सेंगर की गिरफ्तारी इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले आने के बाद हुई है।
शुक्रवार अलसुबह करीब 4.30 बजे सेंगर को सी बी आई ने उसके निवास इंदिरा नगर से हिरासत में लिया था। लिहाजा अब उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
सेंगर पर पोस्को के तहत तीन बड़ी धाराएं दर्ज की गई हैं। सी बी आई ने इस मामले में आरोपी विधायक के खिलाफ रेप, हत्या और अपहरण के तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।
गौरतलब है कि विधायक के भाई अतुल सिंह सेंगर की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। शुक्रवार को सी बी आई की सात सदस्यीय समिति ने पीड़ित पक्ष से पूछताछ शुरू की। उन्नाव के एक होटल में पीड़ित पक्ष से पूछताछ हुई। इस दौरान पीड़िता, उसके चाचा और परिवार के अन्य सदस्य पूछताछ में शामिल हुए। सी बी आई के अधिकारियों को होटल तक स्थानीय पुलिस छोड़ने गई थी, लेकिन पूछताछ के दौरान पुलिस को गेट पर ही रोक दिया गया था।
बता दें कि बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर पीड़िता से बलात्कार करने का आरोप है। पीड़िता द्वारा हाल ही में सीएम आवास के बाहर खुदकुशी की कोशिश की गई, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया। अपनी ही पार्टी के विधायक के गैंगरेप में आरोपी बनाए जाने पर योगी सरकार की काफी किरकिरी हुई, जिसके बाद सीएम योगी आदित्य नाथ ने इस मामले की जांच के लिए एस आई टी गठित करने का आदेश दिया। बाद में राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार से सी बी आई जांच की अनुसंशा की, जिसे मंजूर कर मामले की जांच सी बी आई को सौंप दी गई। मामला सी बी आई के पास जाने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि सी बी आई आरोपी विधायक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार के चंपारण जिले में आए और यह कह कर चले गए कि बिहार में 8 लाख 50 हजार से ज्यादा शौचालयों का निर्माण हुआ है। लेकिन जिस तस्वीर से हम आपको रुबरु करा रहे हैं, वो तस्वीर भी बिहार की ही है और 'स्वस्छ भारत निर्मल भारत' के स्लोगनों को आईना दिखाने वाली है।
यह तस्वीर अरवल जिले की हैं जो बड़ी ही तेजी से वायरल हो गई हैं। खास बात यह भी है कि यह तस्वीर भी उसी दिन (मंगलवार 10 मार्च) की है, जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चंपारण जिले में मौजूद थे। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि किस तरह नन्हें बच्चे हाथों में लोटा (पानी रखने वाला बर्तन) लिए कतार लगा कर शौच के लिए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि यह सभी बच्चे कुर्था के आवासीय स्कूल के छात्र हैं। हाल के दिनों में राजधानी पटना से सटे अरवल जिले का कुर्था इलाका शिक्षा का हब बनकर उभरा है, लिहाजा यहां के निजी स्कूलों में अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन एड़ी-चोटी का जोर लगा कर करवा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि यहां प्राइवेट स्कूल प्रशासन इन बच्चों को सुबह-शाम ऐसे ही खुले में शौच के लिए भेज देता है। इस इलाके में सुबह या शाम के वक्त इन बच्चों को हाथों में लोटा लिए ऐसे ही कतारों में जाते देखा जा सकता है।
एक गंभीर बात यह भी है कि यहां कई सारे स्कूल मुख्य सड़क पर ही स्थित हैं। लिहाजा बच्चों के साथ कोई हादसा ना हो जाए इसलिए शौच जाते वक्त इन्हें ऐसे ही कतार में जाने को कहा जाता है।
सवाल यह है कि फीस के नाम पर माता-पिता से मोटी रकम वसूलने वाले निजी स्कूलों में आखिर क्यों उनके बच्चों के शौच जाने के लिए एक उचित शौचालय तक का भी प्रबंध नहीं है? क्या बच्चों को ऐसी खतरनाक सड़कों पर यूं लेकर जाना हादसों को न्योता देना नहीं है? सबसे बड़ा सवाल यह कि इन तस्वीरें के सामने आने के बाद हमारे रहनुमाओं द्वारा देश को खुले में शौच मुक्त बनाने की बात करना क्या एक छलावा नहीं लगता?
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के समापन समारोह ((मंगलवार 10 मार्च) के मौके पर कहा था कि ''पिछले एक हफ्ते में बिहार में 8 लाख 50 हजार से ज़्यादा शौचालयों का निर्माण हुआ है। पीएम के कहने के मुताबिक, यहां प्रति एक सेकेंड में एक से भी ज्यादा और हर एक मिनट में 84.31 शौचालय का निर्माण हुआ है। हालांकि प्रधानमंत्री के यह आंकड़ें उसी वक्त सवालों के कटघरे में आ गए थे, जब विपक्षी नेताओं ने इन आंकड़ों पर सवाल खड़ें किये थे।
बहरहाल इतने सारे शौचालयों का निर्माण कहां हुआ है। यह तो कोई नहीं जानता, लेकिन इन बच्चों की जो तस्वीर बिहार से आई है, वो इतना तो जरूर बता रही है कि नन्हें मासूमों का अपनी जान हथेली पर रखकर खुले में शौच के लिए जाना स्वस्छ भारत के सपने पर पानी जरूर फेर रहा है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को तमिलनाडु के दौरे पर रहे, लेकिन पीएम मोदी को तमिलनाडु में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। दरअसल, कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड के गठन में हो रही देरी के कारण तमिलनाडु की कई राजनैतिक पार्टियों और आम लोगों ने पीएम मोदी के तमिलनाडु दौरे का विरोध किया।
बता दें कि पीएम मोदी ने गुरुवार को तमिलनाडु के थिरुविदंतई में डिफेंस एग्जीबिशन 'द डिफेक्सपो' का उद्घाटन किया। पीएम मोदी का तमिलनाडु में विरोध करते हुए स्थानीय राजनैतिक पार्टी टी वी के का एक कार्यकर्ता चेन्नई एयरपोर्ट की छत पर चढ़ गया और उसने पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी की। किसी तरह सुरक्षा बलों ने उसे छत से उतारकर हिरासत में लिया।
वहीं, तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डी एम के ने पीएम मोदी के दौरे के विरोध में एक बड़ा-सा काला गुब्बारा हवा में लहराया, जिस पर 'मोदी गो बैक' लिखा हुआ था।
इनके अलावा, एम डी एम के के कार्यकर्ताओं ने काला झंडा लेकर मार्च किया और पीएम मोदी के दौरे का विरोध किया। एम डी एम के के नेताओं का कहना है कि कावेरी जल विवाद पर पीएम मोदी ने तमिलनाडु के साथ धोखा किया है।
बता दें कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जारी कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड के गठन का आदेश दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद केन्द्र सरकार ने अभी तक कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड का गठन नहीं किया है, जिससे तमिलनाडु के लोगों में भारी नाराजगी है। इसी के चलते पीएम मोदी के तमिलनाडु दौरे का भारी विरोध किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि द्रमुक ने मंगलवार को लोगों से अपील की थी कि पीएम मोदी के तमिलनाडु आने के विरोध में काली कमीज या काली साड़ी पहनकर अपना विरोध दर्ज कराएं। इससे पहले विरोध प्रदर्शनों के चलते आई पी एल के मैच भी अब तमिलनाडु में नहीं कराने का फैसला किया गया है।
दरअसल, हाल ही में चेन्नई में हुए आई पी एल के मैच के दौरान भारी बवाल हुआ था। कई लोगों ने विरोध के दौरान जूते मैदान के अंदर फेंके। वहीं, कई प्रदर्शनकारियों ने स्टेडियम के अंदर भी घुसने की कोशिश की। राज्य में बढ़ते राजनैतिक पारे को देखते हुए अब आई पी एल के बाकी मैच पुणे में कराने का फैसला किया गया है।
उन्नाव दुष्कर्म कांड में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। अब पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई है। उन्होंने बताया कि बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की वजह से आठवीं कक्षा में पढ़ाई छोड़ दी थी। बलात्कार की घटना को याद कर पीड़िता ने बताया कि सेंगर ने 4 जून, 2017 को नौकरी देने का वादा कर अपने घर बुलाया था।
पीड़िता ने कहा, ''जब मैं बीजेपी विधायक के घर पहुंची तो वह मुझे सीधे अपने कमरे में लेकर चले गए थे। विधायक का एक आदमी कमरे के बाहर पहरेदारी कर रहा था। बीजेपी नेता ने मेरे साथ दुष्कर्म किया था। मैं जोर से चिल्लाई थी, लेकिन मेरी मदद के लिए कोई भी व्यक्ति सामने नहीं आया था। दुष्कर्म के बाद भाजपा विधायक ने मुझे सीधे घर जाने की हिदायत दी थी। उस वक्त मैं रो रही थी। उसने मेरे आंसू पोछे थे और कहा था कि वह मुझे अच्छी नौकरी दिलाएगा। मैंने जब शिकायत दर्ज कराने की बात कही थी तो विधायक ने मेरे पिता और चार साल के भाई की हत्या करने की धमकी दी थी।''
पीड़िता ने बताया कि इस घटना के बाद वह सीधे घर पहुंची थी और बिल्कुल गुमसुम थी। उन्होंने बताया कि वह तकलीफ में थीं। मेरी मां मुझसे लगातार पूछ रही थीं कि क्या मैं ठीक हूं? मेरी बहनों ने भी मुझसे पूछा था कि मैं मुस्कुरा क्यों नहीं रही हूँ, लेकिन मैं चुप थी।
पीड़िता ने बताया कि विधायक कुलदीप सेंगर द्वारा दुष्कर्म करने के सात दिन बाद वह प्लम्बर को बुलाने के लिए घर से बाहर निकली थीं। उसी वक्त एस यू वी से आए तीन लोगों ने उन्हें अगवा कर लिया था। कथित तौर पर अगले नौ दिनों तक नशीला पदार्थ खिलाकर उनके साथ दुष्कर्म किया जाता रहा। इस दौरान उन्हें अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया था।
पीड़िता ने कहा, ''वे सभी मुझे लगातार दवा खिला रहे थे। एक बार मैंने भागने की कोशिश की थी, लेकिन उन लोगों ने मुझे पकड़ लिया था और फिर से दवा खिला दी थी। मैंने तीन में से दो लोगों को पहचान लिया था, क्योंकि वह अक्सर सेंगर के घर के आसपास दिखाई देता था। तीनों ने मुझे बेचने की भी कोशिश की थी। एक व्यक्ति ने 60 हजार रुपये में मेरा सौदा भी कर लिया था। लेकिन, पुलिस की खोजबीन के कारण वह ऐसा नहीं कर सका था।''
पीड़िता की मां ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी, जिसके बाद पुलिस तलाश में जुट गई थी। तीनों को जब इसका पता चला तो उन्होंने मुझे वापस छोड़ दिया था। पुलिस ने बाद में शुभम सिंह, बृजेश यादव और अवध नारायण को गिरफ्तार कर लिया गया था।
भारत में जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची की गैंगरेप के बाद हत्या के बाद तनाव है। विभिन्न क्षेत्रों की मशहूर हस्तियों ने कठुआ और उन्नाव की घटना का कड़ा विरोध किया है।
जम्मू के कठुआ जिले में रस्साना जंगलों से 17 जनवरी को एक आठ वर्षीया बच्ची आसिफा का शव बरामद हुआ था। बच्ची इससे एक सप्ताह पहले जंगल में घोड़ों को चराते हुए लापता हो गई थी। उसे एक मंदिर में कई दिन तक बंधक बनाकर रखा गया, उसे नशे में रखा गया, उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर हत्या कर दी गई।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार (12 अप्रैल) को कठुआ की घटना पर चुप्पी तोड़ी। राहुल ने एक ट्वीट में कहा, ''ऐसे जघन्य अपराध के दोषियों का बचाव कोई कैसे कर सकता है? कठुआ में आसिफा के साथ जो हुआ, वह मानवता के खिलाफ अपराध है। इसे ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता। अगर हम एक बच्ची के साथ ऐसी अकल्पनीय बर्बरता के साथ राजनैतिक हस्तक्षेप की अनुमति देते हैं तो हम क्या बन गए हैं?''
राहुल से पहले, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनके उपवास को लेकर निशाना साधा था। सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश के उन्नाव और जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ में दुष्कर्म की घटनाओं पर चुप हैं।'' सिब्बल ने कहा, ''आप (मोदी) दुष्कर्म की घटनाओं के खिलाफ क्यों उपवास नहीं रखते? लोगों को यह क्यों नहीं बताते कि दुष्कर्म की घटनाओं से आपको बुरा लगा है, इसलिए आपने उपवास रखा हुआ है।''
कठुआ की घटना पर बॉलीवुड की कई हस्तियों ने रोष प्रकट किया है। फरहान अख्तर ने कहा, ''जरा सोचिए, उस आठ साल की बच्ची के दिमाग में क्या चल रहा होगा, जिसे कई दिनों तक नशा दिया गया, बंधक बनाया गया, कई दिनों तक उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। अगर आप उसका दर्द नहीं समझ सकते तो आप इंसान नहीं हैं। अगर आप आसिफा के लिए न्याय की मांग नहीं करते तो आपका कोई वजूद नहीं है।''
रेणुका शहाने ने कहा, ''पीड़ित का धर्म और दुष्कर्मी का धर्म कभी भी कोई मायने नहीं रखना चाहिए। इसका कोई मतलब नहीं है। दुष्कर्म मानवता के खिलाफ अपराध है। भयावह है कि कुछ लोग दुष्कर्मियों का भी समर्थन कर सकते हैं। यकीन से परे जाकर स्तब्ध हूं। मानवता, तेरी आत्मा को शांति मिले।''
उन्नाव गैंगरेप मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा था कि विधायक को गिरफ्तार किया जाएगा या नहीं।
वहीं कोर्ट को जवाब देते हुए योगी सरकार ने कहा कि वे आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर को गिरफ्तार नहीं कर सकते हैं क्योंकि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से केस लड़ रहे एडवोकेट जनरल राघवेंद्र सिंह ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से कहा कि उन्नाव रेप केस में बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।
इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट से यह भी कहा कि कानून के अनुसार जो कार्रवाई की जानी चाहिए, वह सरकार कर रही है। इतना ही नहीं, इस मामले की जांच में जुटी एस आई टी ने कोर्ट से कहा था कि अगर उनके पास आरोपी विधायक के खिलाफ पर्याप्त सबूत होते तो वे उन्हें गिरफ्तार कर लेते। इसके साथ ही एस आई टी ने यह भी कहा कि अब यह मामला सी बी आई के पास चला गया है जिसके कारण हम आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकते हैं।
वहीं अभी तक आरोपी विधायक की गिरफ्तारी नहीं किए जाने को लेकर उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार पर विपक्ष निशाना साध रही है। इस मामले पर कांग्रेस पार्टी का कहना है कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को योगी नहीं कहना चाहिए। रेप के आरोपी विधायक को गिरफ्तार नहीं करने और उनका समर्थन करने वाले योगी नहीं भोगी हैं।
इतना ही नहीं, कांग्रेस कार्यकर्ता कुलदीप सेंगर की गिरफ्तारी के लिए सड़कों पर उतर आएं हैं। वहीं कांग्रेस के अलावा बहुजन समाजवादी पार्टी ने भी राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। फिलहाल आरोपी विधायक के खिलाफ विभिन्न धाराओं और पोस्कों एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
बता दें कि गैंगरेप पीड़िता ने अपने परिवार के साथ मिलकर सीएम आवास पर आत्मदाह करने की कोशिश की थी। पीड़िता के पिता की संदिग्ध हालत में मौत हो चुकी है। इस मामले में कुलदीप सेंगर के भाई और अन्य लोगों को पुलिस हिरासत में ले चुकी है।









