भारत

प्रधानमंत्री वय वंदन योजना में निवेश की सीमा 7.5 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई

भारत में केंद्र सरकार ने वरिष्ठ नागिरकों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी प्रधानमंत्री वय वंदन योजना में निवेश की सीमा 7.5 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी है। इससे निवेशक को हर महीने 10 हजार रुपये तक की पेंशन मिल सकेगी।

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा के अपने वादे के तहत प्रधानमंत्री वय वंदन योजना में निवेश की अवधि को 4 मई 2018 से बढ़ाकर 31 मार्च 2020 कर दिया है। अब इसमें 15 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकेगा, जिससे निवेशक को 10 हजार रुपये तक मासिक पेंशन मिल सकेगी। इस योजना का क्रियान्वयन एल आई सी कर रही है। इसमें 10 वर्षों के लिए निवेश किया जाता है जिसमें निश्चित आठ फीसदी रिटर्न मिलता है, जिसे मासिक पेंशन के रूप में दिया जाता है। इसमें मासिक, तिमाही, छमाही या वार्षिक पेंशन का चयन किया जा सकता है। आठ फीसदी रिटर्न से कम की राशि मिलने पर इसकी भरपाई केंद्र सरकार करती है।

मार्च 2018 तक 2.23 लाख वरिष्ठ नागरिकों ने इस योजना का लाभ उठाया है। जबकि इससे पहले की वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना 2014 में 3.11 लाख वरिष्ठ नागरिकों ने लाभ उठाया था।

जस्टिस जोसेफ पदोन्नति मामला: सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने फैसला टाला

भारत में सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय न्यायाधीशों की कोलेजियम ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ को शीर्ष अदालत में पदोन्नति देने की सिफारिश पर फिर से विचार के मुद्दे पर बुधवार को अपना निर्णय टाल दिया। केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति जोसेफ की फाइल पुनर्विचार के लिए लौटा दी थी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और कोलेजियम के अन्य सदस्यों - न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने बुधवार शाम हुई बैठक में हिस्सा लिया।

कोलेजियम के प्रस्ताव में कहा गया कि इसकी बैठक में जिस एजेण्डे पर विचार हुआ, उसमें भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय से 26 और 30 अप्रैल, 2018 के पत्रों के आलोक में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ के मामले पर पुन: विचार करना और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व की अवधारणा के मद्देनजर शीर्ष अदालत में पदोन्नति के लिये कलकत्ता, राजस्थान तथा तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के नामों पर विचार करना शामिल था। इस संबंध में निर्णय बुधवार को स्थगित कर दिया गया। न्यायमूर्ति चेलेमेश्वर हालांकि बुधवार को न्यायालय नहीं आए थे, लेकिन उन्होंने इस बैठक में हिस्सा लिया।

एक अधिकारी ने बताया कि कालेजियम की बैठक में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के पत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई। सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम ने दस जनवरी को न्यायमूर्ति जोसेफ को पदोन्नति देकर शीर्ष अदालत में न्यायाधीश बनाने और वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दु मल्होत्रा को सीधे उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी। सरकार ने इन्दु मल्होत्रा के नाम को मंजूरी दे दी और न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम पर फिर से विचार के लिये उनकी फाइल लौटा दी थी। प्रधान न्यायाधीश ने 27 अप्रैल को इन्दु मल्होत्रा को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद की शपथ दिलाई थी। केंद्र सरकार ने उन्हें पदोन्नति देकर शीर्ष अदालत का न्यायाधीश बनाने पर विचार नहीं किया और कहा कि यह प्रस्ताव शीर्ष अदालत के मानदंडों के अनुरूप नहीं है।

केन्द्र ने प्रधान न्यायाधीश को दो पत्र लिखे थे और इसमें कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही केरल को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। न्यायमूर्ति जोसेफ भी केरल से ही हैं। यही नहीं , केन्द्र ने उनकी वरिष्ठता पर भी सवाल उठाते हुये कहा है कि अखिल भारतीय स्तर पर उच्च न्यायालय की वरिष्ठता की समेकित सूची में उनका 42 वां स्थान हैं।

न्यायमूर्ति जोसेफ जून के महीने में साठ साल के हो जायेंगे। वह जुलाई 2014 से उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश है। उन्हें 14 अक्तूबर, 2004 को केरल उच्च न्यायालय का स्थाई न्यायाधीश बनाया गया था। न्यायमूर्ति चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति लोकूर और न्यायमूर्ति कुरियन सहित कोलेजियम के सदस्यों ने न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम को मंजूरी देने में हो रहे विलंब पर चिंता व्यक्त की थी।

ट्रेन में लालू की तबीयत बिगड़ी, गाड़ी रोक कर लगाया गया इंजेक्शन

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू यादव आज (01 मई) राजधानी एक्सप्रेस से नई दिल्ली से रांची पहुंच गए हैं। उन्हें रिम्स में भर्ती कराया गया है। कल ही एम्स ने उन्हें डिस्चार्ज कर रिम्स रेफर कर दिया था, लेकिन रांची आने के दौरान बीच रास्ते में ही उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। आनन-फानन में कानपुर रेलवे स्टेशन पर दो डॉक्टरों ने उनकी जांच की तो पता चला कि उनका शूगर लेवेल काफी बढ़ा हुआ है। इसके बाद उन्हें इन्सूलिन का इंजेक्शन लगाया गया। लालू का शूगर लेवेल 200 के करीब था। उनका ब्लड प्रेशर भी बढ़ा हुआ था।

लालू के इलाज की वजह से कानपुर में राजधानी करीब 15 मिनट तक रुकी रही। लालू यादव फर्स्ट क्लास कोच एच-1 में सफर कर रहे थे। जैसे ही ट्रेन कानपुर स्टेशन पहुंची, ट्रेन को पुलिस ने चारों ओर से घेर लिया।

पूरी यात्रा के दौरान लालू कड़ी सुरक्षा में थे। कानपुर पहुंचने पर मीडिया का भी जमावड़ा लग गया, लेकिन किसी को भी ट्रेन में घुसने की इजाजत नहीं दी गई।

बता दें कि डिस्चार्ज की खबर सुनते ही लालू ने एम्स प्रशासन को चिट्ठी लिखकर कहा था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। उन्हें अभी चक्कर आता है, बाथरूम में भी गिर चुके हैं, लेकिन एम्स में डॉक्टरों के पैनल ने उन्हें दुरुस्त बताते हुए रिम्स रेफर कर दिया। लालू ने इसे साजिश बताया है। उन्होंने अपने पत्र में ये भी लिखा था कि अगर उन्हें कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी एम्स की होगी।

चारा घोटाले में सजा काट रहे लालू यादव को सीने में दर्द और बेचैनी की समस्या के बाद 29 मार्च को एम्स में भर्ती कराया गया था। उन्हें किडनी इन्फेक्शन था और क्रिटनीन बढ़ा हुआ था। इसके अलावा लालू को डायबिटीज, बी पी और हार्ट की भी समस्या है। 70 साल के लालू पिछले साल 23 दिसंबर से ही रांची की जेल में बंद हैं।

इधर, रांची पहुंचते ही प्रशासन ने उन्हें तुरंत रिम्स पहुंचाया। अस्पताल के बाहर सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई थी। लालू को कार्डियलॉजी विभाग में रखा गया है। रिम्स सूत्रों के मुताबिक, वहां बिना आइडेंटिटी कार्ड के किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है।

भाजपा सरकार की जातीय मानसिकता ने देश के सीने पर चोट पहुंचाई है: राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान मेडिकल टेस्ट में उम्मीदवारों के सीने पर उनसे जुड़ी जाति का ठप्पा लगाने की आलोचना की है और इसे राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आर एस एस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का जातिवादी नजरिया कहा है।

राहुल ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी ने अपने जातिवादी दृष्टिकोण से देश को चोट पहुंचाया है। राहुल ने एक ट्वीट में घटना को लेकर भाजपा और आर एस एस की सोच को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस तरह की सोच को हराएगी। राहुल गांधी ने कांस्टेबल उम्मीदवारों की एक तस्वीर भी संलग्न की, जिसमें उनके सीने पर जातिवादी चिन्ह अंकित किए गए थे।

उन्होंने ट्वीट किया है, ''भाजपा सरकार की जातीय मानसिकता ने देश के सीने पर चोट पहुंचाई है। मध्य प्रदेश के युवाओं के सीने पर एससी/एसटी लिखकर संविधान पर हमला किया गया है।'' उन्होंने कहा, ''यह भाजपा/आर एस एस की सोच है। इसी सोच ने पहले दलितों को अपने गले में हांडी बांधने व शरीर से झाड़ू बाधने को बाध्य किया था और उन्हें मंदिरों में जाने की अनुमति नहीं दी। हम इस मानसिकता को हराएंगे।''

मध्य प्रदेश के धार जिले में चिकित्सा जांच के दौरान आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के सीने पर एस सी (अनुसूचित जाति) या एस टी (अनुसूचित जनजाति) अंकित किया गया था। राज्य सरकार ने इस मामले में रविवार को जांच के आदेश दिए थे।

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इसे गंभीर मसला बताते हुए कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इधर, धार के पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह ने कहा कि इसके पीछे कोई दुर्भावनापूर्ण मंशा नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा, ''पिछली बार भर्ती के दौरान कुछ गलतियां हुई थीं। अस्पताल ने इस बार किसी भी गलती से बचने के लिए इस पद्धति का इस्तेमाल किया होगा। हालांकि, मामले में जांच का आदेश दे दिया गया है।''

इस बीच बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने मामले पर चुप्पी साधने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने उजागर कर दिया है कि इन भगवाधारी पार्टियों के लिए दलित सिर्फ वोट बैंक हैं। इसके अलावा उनके दिल में दलितों के लिए कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या यह प्रधानमंत्री और उनकी भाजपाई टीम को शोभा देता है कि वो इस मसले पर चुप रहें? उन्होंने केंद्र सरकार से इस संबंध में तुरंत सख्त चेतावनी जारी करने का आदेश देने की मांग की है, ताकि भविष्य में फिर ऐसी घटना न हो सके।

सवर्ण लड़की का दलित लड़के के साथ भाग जाने पर दलितों के घर में तोड़-फोड़

हरियाणा में सवर्ण जाति की एक लड़की के कथित तौर पर एक दलित के लड़के के साथ भागने को लेकर शनिवार शाम दलितों के घर पर तोड़-फोड़ की गई थी। इस मामले में 30 लोगों को आरोपी बनाया गया है। रविवार को हरियाणा पुलिस ने इस मामले में 18 युवकों को गिरफ्तार किया। इनमें से अधिकतर राजपूत समुदाय से हैं।

वारदात यमुनानगर जिले के करहरा गांव में हुई। दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 80 साल के बुजुर्ग सतपाल ने अपने घर की खिड़की का टूटा शीशा दिखाते हुए कहा, ''यह तो बस एक लड़का-लड़की का मसला था। इसमें हमारी क्या गलती थी? हमारे घर क्यों तोड़ दिए गए?''

डी एस पी अजय सिंह राणा ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि आरोपियों को सोमवार को अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वहीं, गांव में तनाव के मद्देनजर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।

उधर, सोमवार को ही इस मसले को हल करने के लिए दोनों समुदाय के लोगों को बुलाकर पंचायत की गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। शनिवार की घटना पर डी एस पी राणा ने कहा, ''गांव के दलितों को डराने के लिए यह किया गया। आरोपियों ने दलितों के घर गए और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।''

गांव के पूर्व सरपंच श्याम सिंह भी दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने बताया, ''हमलावरों ने अनुसूचित जाति के सभी लोगों के घरों में तोड़-फोड़ की। इलाके में ऐसे करीब 250 घर हैं।''

वहीं, घटना के प्रत्यक्षदर्शी सतपाल ने बताया, ''हम रात 9 बजे अपने घर के सामने बैठे हुए थे कि वे अचानक हाथों में डंडे लेकर आए और हम पर हमला कर दिया। हम बचने के लिए भागे। यह अचानक किया हमला हमला था, वर्ना जरूर संघर्ष करते।''

इस हमले में घरों के दरवाजों के अलावा चारपाई, फैन आदि को नुकसान पहुंचाया गया। घटना के तुरंत बाद यमुनानगर के एस पी राजेश कालिया रात 1 बजे मौके पर पहुंचे। हमले में कुछ दलितों को हल्की-फुल्की चोटें भी आईं।

बता दें कि दोनों समुदाय के तनाव की वजह एक 19 साल की सवर्ण लड़की का कथित तौर पर एक 21 वर्षीय युवक के साथ भाग जाना है। लड़की एक प्राइवेट स्कूल में टीचर है, जबकि लड़का स्कूल में ही पढ़ाई छोड़ चुका है। लड़की और लड़के के घर नजदीक में ही हैं। कथित तौर पर दोनों के भाग जाने के दो दिन बाद लड़की के घरवालों ने अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया। बताया जा रहा है कि लड़के और लड़की के शादी करने की अटकलों के बाद दलितों के घर को निशाना बनाया गया।

उत्तर प्रदेश में दलित को पेड़ से बांधकर पीटा, जबरन पेशाब पिलाया

उत्तर प्रदेश में एक दलित किसान को पीटे जाने का मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी ए एन आई के मुताबिक, फसल काटने से इनकार करने पर लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर बदायूं के एक दलित पर हमला किया और पेशाब पीने के लिए मजबूर किया।

पीड़ित के मुताबिक, हमलावरों ने उसे पेड़ से बांधा और उसकी मूंछ मुढ़ा दी। एस एस पी अशोक कुमार ने कहा है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच चल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेहद चौंकाने वाली वारदात बदायूं के थाना हजरतपुर इलाके के आजमपुर गांव की है।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, दो दिन पहले दलित किसान को पीटे जाने की सूचना 100 नंबर पर मिली थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायत मिलने पर डायल 100 वाले सिपाही मौके पर गए थे और कार्रवाई के बाद लौट आए थे। लेकिन घंटे भर के अंदर फिर से 100 नंबर पर फोन आया और दलित किसान को फिर से पीटे जाने की सूचना दी गई। इसके बाद पीड़ित को थाने लाया गया था।

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है और दोषी पाए जाने पर आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, गांव के ही विजय सिंह, पिंकू, विक्रम सिंह और सोमपाल ने दलित किसान के साथ बेरहमी से मारपीट की और पेड़ से बांधकर जबरन उसकी मूंछ मुढ़ा दी। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि दबंगों ने जूते में शराब भरकर उसे पिलाई।

पीड़ित के मुताबिक, जब वह अपने खेत पर गेहूं की फसल काट रहा था, तब गांव के कुछ दबंगों ने उनके खेत की फसल काटने के लिए उस पर दबाव बनाया। पीड़ित के मुताबिक, उसने ऐसा करने से इनकार किया तो दबंग भड़क गए और उसके साथ मारपीट करने लगे। पीड़ित के मुताबिक, दबंगों ने पहले उसे खेत में ही पीटा, फिर गांव में ले जाकर एक पेड़ से बांधकर उसके ऊपर अत्याचार किया।

गुरुग्राम में खुले में नमाज पढ़ने पर रोक लगनी चाहिए: हिंदू संगठन

हरियाणा के गुरुग्राम में सोमवार शाम संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के बैनर तले कई संगठनों ने प्रदर्शन किया। इनकी मांग थी कि मुस्लिम लोगों के नमाज पढ़ने के दौरान बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार लोगों पर दर्ज केस वापस लिए जाएं। इन्होंने यह भी मांग की है कि शहर में खुले में नमाज पढ़ने पर रोक लगनी चाहिए।

बता दें कि यहां के सेक्टर 53 इलाके में 20 अक्टूबर को एक खाली प्लॉट पर कुछ लोग नमाज पढ़ रहे थे। आरोप है कि 6 लोगों ने नमाज पढ़ने के दौरान हंगामा किया और नमाजियों को वहां से जाने को कहा। बाद में घटना का वीडियो वायरल होने के बाद आरोपियों पर पुलिस ने एक्शन लिया था।

प्रदर्शन करने वाले संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने यह भी धमकी दी है कि वह खुले में नमाज रोकने के लिए शुक्रवार को सड़क पर उतरेंगे। वहीं, सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे करीब 50 प्रदर्शनकारी शहर के कमला नेहरू पार्क में इकट्ठे हुए। यहां से उन्होंने मिनी सचिवालय तक मार्च निकाला। इसके बाद, प्रदर्शनकारियों ने सी एम मनोहर लाल खट्टर को लिखी गई एक चिट्ठी डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप सिंह को सौंपी। चिट्ठी में प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सेक्टर 53 में शुक्रवार को पढ़ी जाने वाली नमाज गैरकानूनी ढंग से जमीन कब्जाने की शुरुआत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नमाजियों ने वहां 'भारत विरोधी' और 'पाकिस्तान के समर्थन' में नारे लगाए।

संगठन ने अपनी चिट्ठी में आरोप लगाया है, ''बीते डेढ़ महीने से कुछ लोग गुड़गांव के वजीराबाद स्थित एक जमीन के टुकड़े पर नमाज पढ़ रहे हैं। उनका मकसद इस पर अवैध ढंग से कब्जा करना है। 'हिंदुस्तान मुर्दाबाद' और 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारों की वजह से वहां का माहौल खराब हो रहा है। जब कुछ देशभक्त युवकों ने उन्हें ऐसा करने से रोका तो पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की। क्या 'जय श्री राम' और 'वंदे मातरम' बोलना अपराध है, जिसकी वजह से युवाओं को गिरफ्तार किया गया?''

वहीं, बताई गई जगह पर बीते 10 साल से नमाज पढ़ने वालों ने आरोपों को खारिज किया है। मामले में शिकायतकर्ता और नेहरू युवा संगठन वेलफेयर सोसाइटी चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रमुख वाजिद खान ने कहा, ''हम नमाज पढ़ते वक्त एक-दूसरे से बात भी नहीं करते। नारे लगाने का तो सवाल ही नहीं उठता। ये सब झूठे आरोप हैं।''

उधर, प्रदर्शन करने वाले संगठन की चिट्ठी में लिखा है, ''गुरुग्राम में रह रहे रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों की पहचान होनी चाहिए। उन्हें हिंदू कॉलोनियों, सेक्टरों और पास-पड़ोस में नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। इस तरह की इजाजत केवल उन जगहों पर दी जानी चाहिए, जहां इनकी आबादी 50 पर्सेंट से ज्यादा हो। अगर ऐसा नहीं हुआ तो शांति भंग का खतरा बना रहेगा।''

बता दें कि पिछले महीने 20 अप्रैल को खाली प्लॉट पर नमाज शुरू होने से ऐन पहले कुछ लोग मौके पर पहुंचे थे। घटना से जुड़े वीडियो में दिखता है कि इन लोगों ने 'जय श्री राम' और 'राधे-राधे' के नारे लगाए। साथ ही, वहां आए लोगों को जाने के लिए कहा। बीते हफ्ते इस मामले में केस दर्ज हुआ। आरोपियों की पहचान अरुण, मनीष, दीपक, रोहित, रवींदर और मोनू के तौर पर हुई है। ये सभी वजीराबाद और कन्हाई गांवों के रहने वाले हैं। इन्हें रविवार को जमानत मिल गई थी।

उधर, प्रदर्शन करने वाले संगठनों में से एक बजरंग दल के जिलाध्यक्ष अभिषेक गौर ने चेतावनी दी, ''हमने जिला प्रशासन से दरख्वास्त की है कि खुले में नमाज पर रोक लगाई जाए। हम टीम बनाकर इस शुक्रवार को नजर रखेंगे, ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि सरकारी जमीनों पर गैरकानूनी ढंग से खुले में नमाज न पढ़ी जा सके।''

पीएम मोदी का दावा: देश के सभी गांवों में बिजली पहुंचा दी, कांग्रेस बोली- फर्जी है दावा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी गांवों में बिजली पहुंच जाने पर देशवासियों को बधाई दी है और कहा है कि उनकी सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरा किया।

मोदी ने रविवार (29 अप्रैल) को कई ट्वीट कर 28 अप्रैल, 2018 को भारत के विकास की यात्रा में ऐतिहासिक दिन के रूप में याद करने की बात कही है। मोदी ने ट्वीट किया, ''28 अप्रैल 2018 को भारत की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक दिन के रूप में याद किया जायेगा। कल हमने एक वादा पूरा किया जिसके कारण अनेकों भारतीयों के जीवन में हमेशा के लिये बदलाव आयेगा।'' उन्होंने कहा, ''मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि अब भारत के हर गांव में बिजली सुलभ होगी।''

मोदी ने इस संदर्भ में मणिपुर के लीसांग गांव का उल्लेख किया और कहा कि इस जैसे हजारों उन अन्य गांवों में बिजली पहुंच गई जो अब तक इस सुविधा से वंचित थे।

बता दें कि मोदी सरकार ने शनिवार (28 अप्रैल) को घोषणा की थी कि देश के 18 हजार से अधिक गांवों में बिजली पहुंच गयी है। मोदी ने 15 अगस्त 2015 को लाल किले की प्राचीर से 1000 दिनों के भीतर इन गांवों में बिजली पहुंचाने का ऐलान किया था। हालांकि, समय-सीमा पूरी होने से 12 दिन पहले ही इस लक्ष्य को हासिल कर लिया गया। मोदी ने ट्वीट किया, ''मैं सशक्त भारत को हकीकत बनाने की दिशा में जमीन पर कार्य करने वाले सभी लोगों के प्रयासों को सलाम करता हूँ जिसमें अधिकारियों की टीम, तकनीकी कर्मी और अन्य लोग शामिल हैं। उनका यह प्रयास आने वाले वर्षो में हमारी पीढ़ियों को बहुत फायदा पहुंचायेगा।''

बीजेपी के इस दावे को कांग्रेस ने झूठ का पुलिंदा कहा है। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस पहले ही देश के 97 फीसदी गांवों में बिजली पहुंचा चुकी थी। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है, ''26 मई, 2014 को जब नरेंद्र मोदी सरकार का गठन हुआ था, तब मात्र 18,452 गांव ही बिना बिजली वाले थे। बीजेपी ने औसत रूप से हर साल 4,813 गांवों को विद्युतीकृत किया है। यह उनके निकम्मेपन और कांग्रेस द्वारा किए गए कार्यों का झूठा श्रेय लेने को उजागर करता है।'' (India has 6,49,867 villages. Congress connected 97% with electricity. During UPA (2004-14), Congress electrified 1,07,600 villages. In 60 yrs, Congress average is electrifying 10,000 villages per year. Congress created #PowerfulIndia but didn't boast! On 26th May, 2014; only 18,452 villages were without electrification. BJP Govt took 46 months to complete this at at an average of 4,813 villages per year. This is - 'celebrating inefficiencies' & taking 'fake credit' for Congress work.)

इस ट्वीट के साथ सुरजेवाला ने ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन का आंकड़ा युक्त ग्राफ भी शेयर किया है।

सोनिया ने कहा, देश बड़ी तेजी से बदल रहा है, आगे परिवर्तन की आंधी के आसार हैं

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी की जन आक्रोश रैली में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि ये सरकार सभी मोर्चों पर फेल रही है। सोनिया ने कहा कि देश बड़ी तेजी से बदल रहा है और आगे परिवर्तन की आंधी के आसार हैं।

पार्टी की 'जन आक्रोश रैली' में सोनिया ने कहा, ''आप (कार्यकर्ता) जिस उत्साह के साथ भारी तादाद में यहां आए हैं, यह साबित करता है कि अब हम बदलाव की तरफ तेज़ी से बढ़ रहे हैं, देश में परिवर्तन की आंधी के आसार हैं।''

उन्होंने कहा, ''पिछले कुछ साल से देश में भयंकर परेशानी का माहौल है। समाज का हर तबका बेचैन है। चाहे नौजवान हों, किसान हों, मज़दूर, व्यापारी, छोटे कारोबारी हों, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक हों, सबको भविष्य का भय सता रहा है।''

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ''बच्चियां तक सुरक्षित नहीं हैं। यही नहीं, उनके अपराधियों तक को संरक्षण मिल रहा है। बेरोज़गार युवाओं, जिन्हें हर साल दो करोड़ रोज़गार उपलब्ध कराने का वादा किया गया था, वे अभी तक रोज़गार की तलाश में हैं। वे अब समझ गये हैं कि उनके साथ क्या धोखा किया गया है। ठीक वही धोखा किसानों के साथ भी हुआ, जिन्हें उनकी उपज की लागत से, दोगुनी कीमत दिलाने का वादा मोदी जी ने किया था।''

उन्होंने कहा, ''अर्थव्यवस्था को मोदी-सरकार की नीतियों ने पूरी तरह चौपट कर दिया है। पेट्रोल, डीजल के दाम कहां तक पहुंच गये हैं? आप सब जानते हैं और उसका नतीजा आप खुद रोज़-रोज़ झेल रहे हैं। असंगठित क्षेत्र और खेत कामगारों की हालत बिगड़ती चली जा रही है। मेरी बहनों को महंगाई की वजह से अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।''

सोनिया ने कहा, ''मोदी जी का बहुत ही पसंदीदा वादा- 'न खाऊंगा और न खाने दूंगा' का क्या हुआ? उनके राज में भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी हुई हैं। सत्ता हथियाने के लिए मोदी जी ने जितने वादे किए थे, वे सब खोखले साबित हुए हैं, झूठे साबित हुए हैं।''

सोनिया ने कहा, ''क्या हमारे कांग्रेस के पूर्वजों ने ऐसा ही देश बनाने के लिए अपना रक्त बहाया था? उन्होंने अपना सब कुछ न्यौछावर किया क्योंकि वे एक ऐसा भारत बनाना चाहते थे, जिसकी बुनियाद सत्य, प्रेम और अहिंसा पर टिकी हो, लेकिन इन चार सालों में क्या हुआ, हम सबके सामने है। यह देखकर बहुत दु:ख होता है कि आज के भारत में सत्य, प्रेम और अहिंसा नहीं, बल्कि असत्य, नफरत और हिंसा का बोलबाला है।''

सोनिया ने कहा, ''आज जो न्याय के लिए आवाज़ उठाता है, वह मोदी सरकार के क्रोध का शिकार हो जाता है। वे संसदीय बहुमत को मनमानी करने का लाइसेंस समझते हैं। असहमति को हर स्तर पर कुचलने का अपना अधिकार समझते हैं।''

उन्होंने कहा, ''देश हिंसक दौर से गुजर रहा है। संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। चुनाव को ध्यान में रखकर समाज को बांटा जा रहा है। सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है।''

जन आक्रोश रैली में राहुल ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार नई दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली की है। कांग्रेस के इस जन आक्रोश रैली को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बिगुल माना जा रहा है। इस दौरान राहुल ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। लगे हाथ उन्होंने अपनी ही पार्टी के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को भी निशाने पर लिया।

उन्होंने कहा कि सलमान खुर्शीद जी यहां बैठे हैं। वो पार्टी से अलग विचार रखते हैं। राहुल ने कहा, ''हमारी पार्टी में अलग-अलग राय होती है। सलमान खुर्शीद जी ने कुछ दिनों पहले अलग राय दी थी, लेकिन अलग राय देने की वजह से मैं उनकी रक्षा करूंगा।''

उन्होंने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा नहीं कर सकते हैं क्योंकि उनकी पार्टी में एक ही आदमी की चलती है।

राहुल के अलावा पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी बीजेपी सरकार पर हमला बोला।

राहुल गांधी ने कहा, ''हमारे प्रधानमंत्री बोलते रहते हैं और वादे करते रहते हैं। वह जहां भी जाते हैं, वहां वह लोगों से कुछ नए वादे कर आते हैं। लेकिन लोगों को उनके शब्दों में से सच्चाई ढूंढने की कोशिश करनी पड़ती है। वे सोच में पड़ जाते हैं कि इस आदमी ने इतने वादे किए हैं, लेकिन सच्चाई कहां है।''

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ''उन्होंने हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था। लोगों ने उन पर भरोसा किया। लेकिन चार सालों के बाद हमारे पास केवल हर तरफ बेरोजगारी है। नोटबंदी और गब्बर सिंह कर (जी एस टी) जैसे कदमों ने अनौपचारिक क्षेत्र की कमर तोड़ दी है।