बुधवार (चार अप्रैल) को राजस्थान के राजसमंद में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की मूर्ति तोड़ी गई। नाथद्वारा इलाके में शरारती तत्वों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के सिर को धड़ से अलग कर दिया। इलाके में इसके बाद तनाव का माहौल है। लोगों में महात्मा गांधी की मूर्ति तोड़े जाने को लेकर आक्रोश है। लोगों ने फौरन इस बारे में पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद प्रतिमा का टूटा हिस्सा कपड़े से ढंकवा दिया गया।
लोगों ने पुलिस को बताया, ''हमने बीती रात तकरीबन एक बजे चार-पांच लोगों को मोहल्ले में आते देखा था। शायद उन्हीं ने बापू की मूर्ति को तोड़ा होगा।''
गौरतलब है कि पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव में माकपा के हारने और बीजेपी के जीतने के बाद बेलोनिया के एक शैक्षणिक संस्थान में रूसी क्रांति और वामपंथी विचारधारा के प्रतीक माने जाने वाले व्लादिमीर लेनिन की प्रतिमा को बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने जे सी बी मशीन से तोड़ी दी थी। भीड़ उस दौरान भारत माता की जय के नारे लगा रही थी। लेनिन की मूर्ति तोड़ने की इस घटना के बाद भारत के विभिन्न हिस्सों में महानायकों की मूर्तियों के साथ छेड़छाड़ की गई और उन्हें नुकसान पहुंचाया गया।
तमिलनाडु में इसके बाद पेरियार की प्रतिमा तोड़ी गई। पश्चिम बंगाल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति पर कालिख पोती गई। बाबा साहब डॉ.भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ा गया, जिसके बाद केरल में महात्मा गांधी की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया गया था। यहां पर महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर लगे चश्मे को क्षति पहुंचाई गई थी।
यह स्थिति तब है, जब महानायकों की मूर्तियां तोड़े जाने के मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू और गृह मंत्री राजनाथ सिंह सख्त चेतावनी दे चुके हैं। मूर्ति तोड़े जाने को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय भी हरकत में आ गया था। गृह मंत्रालय ने हर राज्य में महानायकों की मूर्तियों के इर्द-गिर्द सुरक्षा के बंदोबस्त किए थे और कहा था कि जो भी इन्हें नुकसान पहुंचाएगा, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
सी ए जी की एक रिपोर्ट में मंगलवार (3 अप्रैल, 2018) को कहा गया है कि साढ़े तीन साल पहले स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत होने के बाद से राष्ट्रीय राजधानी में एक भी शौचालय का निर्माण नहीं किया गया है और इस उद्देश्य के लिए निर्धारित 40.31 करोड़ रुपए का कोष बेकार पड़ा है।
दिल्ली विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ( सी ए जी) की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार ने कार्यान्वयन एजेंसियों को उनकी जरूरत के मुताबिक स्वच्छ भारत मिशन का कोष आवंटित नहीं किया। इसमें कहा गया है कि दिल्ली की तीनों नगर निगम, दिल्ली शहर आश्रय सुधार बोर्ड (डी यू एस आई बी) समेत कार्यान्वयन एजेंसियों को राज्य का हिस्सा 10.08 करोड़ रुपए सहित 40.31 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, लेकिन मार्च 2017 तक इस पैसे का इस्तेमाल नहीं किया गया।
सी ए जी की रिपोर्ट के मुताबिक, एन डी एम सी, एस डी एम सी और डी सी बी घरेलू शौचालयों की जरूरत का आकलन नहीं कर पाई, लेकिन घरेलू शौचालयों के निर्माण के लिए उन्हें 16.92 करोड़ रुपए जारी किए गए। इसने कहा कि शहर में झुग्गी झोपड़ी और जे जे क्लस्टर को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए जिम्मेदार एजेंसी डी यू एस आई बी को दिल्ली सरकार से राज्य सरकार का हिस्सा नहीं मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, डी यू एस आई बी को (जनवरी, 2016 तक) 6.86 करोड़ रुपए मिले जिसमें राज्य का 1.71 करोड़ रुपए (कुल लागत का 25 फीसदी) का हिस्सा भी शामिल था, जबकि उसे 41.49 करोड़ रुपए की जरूरत थी।
सी ए जी ने अपनी अन्य रिपोर्ट में यह भी कहा कि दिल्ली में 10.85 करोड़ रुपए के खर्च के बावजूद यथोचित परिश्रम की कमी और दिल्ली जल बोर्ड की ओर से समय सीमा का पालन नहीं करने की वजह से शहर में सीवर लाइन बिछाने में देरी हुई। रिपोर्ट में सीवर के काम की योजना बनाने में दिल्ली जल बोर्ड की चूक को लेकर भी उसे फटकारा गया है। सी ए जी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यथोचित परिश्रम और समय सीमा का पालन नहीं करने तथा तदर्थ योजना और प्रबंधन में चूक की वजह से सीवर लाइन बिछाने का जो काम सितंबर 2007 में पूरा हो जाना था। वह 30 जून 2017 तक प्रगति पर था। इसमें कहा गया है कि ऐसे पांच स्थल है जहां सड़क खोदने के लिए अनुमति की जरूरत थी, लेकिन बोर्ड ने चार स्थलों के लिए इजाजत ली।
एस सी / एस टी कानून पर जारी विवाद के बीच बिहार में पूर्व मंत्री रह चुके रमई राम का एक बड़ा बयान आया है। शरद यादव खेमे के जे डी यू नेता रमई राम ने मंगलवार (3 अप्रैल) को कहा कि यदि देश के अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोगों को संविधान द्वारा मिले अधिकार नहीं दिये गये और उन अधिकारों की रक्षा नहीं की गई तो भारत में अलग हरिजिस्तान की मांग फिर से उठ सकती है।
आठ बार विधायक रह चुके रमई राम ने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकारों में कटौती करने की साजिश रची जा रही है। बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा आजादी के वक्त पाकिस्तान के बाद हरिजिस्तान की मांग उठाये जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 70 सालों तक सरकार ने समाज में भाईचारा और प्रेम कायम रखा, लेकिन अब मौजूदा सरकार की नजर दलितों के विधि सम्मत अधिकारों पर है। उन्होंने कहा कि अब इस वर्ग के सुरक्षा और विकास की बात को पीछे रखा जा रहा है।
बिहार के मुजफ्फरपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रमई राम ने केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान पर भी हमला बोला। रमई राम ने कहा कि पासवान दलित समाज के हित की बात करने की बजाय अपने परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए मोदी के साथ राजनीति कर रहे हैं। 2 अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा एस सी / एस टी कानून में बदलाव के खिलाफ बुलाये भारत बंद को उन्होंने ऐतिहासिक बताया और कहा कि इस दौरान जो लोग मारे गये, उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाए। रमई राम ने कहा कि ऐसे लोगों के परिवार वालों को सरकार को आर्थिक मदद और सामाजिक सम्मान दिया जाना चाहिए।
रमई राम ने कहा कि मौजूदा सरकार कोर्ट और कानूनी अड़चनों की आड़ में दलितों को मिलने वाली संवैधानिक सुविधाओं से वंचित कर रही है। रमई राम ने कहा कि सरकार ना सिर्फ उनकी उपेक्षा कर रही है, बल्कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। बता दें कि शरद यादव का साथ देने के लिए जे डी यू ने रमई राम को पार्टी से निलंबित कर दिया है।
भारत बंद में व्यापक हिंसा के बाद राजस्थान के करौली में मंगलवार (3 अप्रैल) को हिंसा भड़क गई। आक्रोशित लोगों ने हिंडौन से भाजपा की मौजूदा दलित विधायक राजकुमारी जाटव और राजस्थान की पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता भरोसी लाल जाटव के घरों में आग लगा दी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिंडौन के स्थानीय व्यापारियों ने भी सोमवार को दुकानों में की गई तोड़फोड़ और हिंसा के खिलाफ मंगलवार को बंद का आह्वान किया था। व्यापारियों का आरोप है कि बाजार बंद कराने के नाम पर व्यवसायियों के साथ मारपीट और लूटपाट की गई थी। वाहन भी जला दिए गए थे। इसके विरोध में बड़ी संख्या में जुटे लोग कलेक्टर को ज्ञापन देने जा रहे थे, लेकिन माहौल को तनावपूर्ण देखते हुए धारा 144 लगा दी गई थी। इसके बावजूद आक्रोशित लोग नहीं माने।
बताया जाता है कि यहां तकरीबन 40,000 लोग इकट्ठा हो गए थे। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। आरोप है कि इसी भीड़ ने भाजपा विधायक और कांग्रेस नेता के घरों में आग लगा दी। भीड़ का गु्स्सा इतना उग्र था कि उसने छात्रावास को भी नहीं छोड़ा। गुस्साए लोगों ने अनाज मंडी स्थित दलित छात्रावास को भी आग के हवाले कर दिया। हालांकि, बाद में आग पर काबू पा लिया गया।
सोमवार को हुई हिंसा के विरोध में जुटे हजारों लोगों ने सिर्फ नेताओं को ही निशाना नहीं बनाया। उग्र भीड़ ने एक मॉल में भी आग लगा दी। इसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। हिंसक घटनाओं के बाद करौली में हालात तनावपूर्ण बना हुआ है। पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
बता दें कि भारत में सु्प्रीम कोर्ट ने पिछले महीने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारक) कानून को लेकर अहम फैसला दिया था। अब एस सी/एस टी से जुड़े मामलों में बिना किसी जांच के गिरफ्तारी नहीं की जा सकेगी। इस कानून में अग्रिम जमानत का भी प्रावधान नहीं है, लेकिन शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में अपवाद का प्रावधान भी जोड़ दिया है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया गया था। इस दौरान भारत के विभिन्न हिस्सों में व्यापक पैमाने पर हिंसा हुई। इसमें दस लोगों की जान चली गई थी। इसके अलावा सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचा था।
भारत में बीते दो दिनों से केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी समेत कम से कम 13 केंद्रीय मंत्रियों ने एक वेबसाइट का लिंक शेयर किया है। इस लिंक के जरिए 'चार बड़ी फेक न्यूज' का भंडाफोड़ करने का दावा किया गया है। 7 मंत्रियों ने इस लिंक को शेयर करते हुए टिप्पणी की, ''फेक न्यूज के खिलाफ आवाज उठाइए।''
इस वेबसाइट thetruepicture.in का डोमेन रजिस्ट्रेशन whois.com के जरिए चेक किया गया तो पता चला कि यह पिछले साल ही रजिस्टर कराई गई है। बाकी डिटेल्स में एक लैंडलाइन टेलिफोन नंबर और ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन का जिक्र है।
दिलचस्प बात यह है कि ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन पीएम मोदी की लिखी किताब 'एग्जाम वॉरियर्स' की टेक्नोलॉजी एंड नॉलेज पार्टनर है। पीएम की लिखी यह किताब हाल ही में लॉन्च हुई थी। इसका मकसद बच्चों को परीक्षा के तनाव से मुक्त होने के टिप्स देना था।
द इंडियन एक्सप्रेस ब्लूक्राफ्ट वेबसाइट के पते के तौर पर दर्ज दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित दफ्तर पर पहुंचा। वहां मौजूद दो लोगों ने बताया कि वे ब्लूक्राफ्ट के लिए काम तो करते हैं, लेकिन इस नाम से कोई वेबसाइट नहीं चलाते।
रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के रिकॉर्ड के मुताबिक, ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन की स्थापना हितेश जैन और राजेश जैन ने 2016 में की थी। राजेश जैन तकनीक के क्षेत्र से जुड़े उद्यमी हैं जो 2014 आम चुनाव में नरेंद्र मोदी के कैंपेन में शामिल रहे हैं। वह यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के भी पार्ट टाइम मेंबर रहे हैं।
ब्लूक्राफ्ट के संस्थापक सी ई ओ अखिलेश मिश्रा भी मोदी के 2014 के कैंपेन से जुड़े रहे हैं। ब्लूक्राफ्ट में आने से पहले वह केंद्र सरकार के ऐप MyGov.in के कंटेंट डायरेक्टर भी रहे हैं। हालिया वक्त में ब्लूक्राफ्ट मोदी की किताब एग्जाम वॉरियर्स की टेक्नोलॉजी एंड नॉलेज पार्टनर है। इस कंपनी ने मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' पर एक किताब भी प्रकाशित की है।
द इंडियन एक्सप्रेस ने जब अखिलेश मिश्रा से संपर्क किया तो उन्होंने इस बात से इनकार किया कि ब्लूक्राफ्ट के द ट्रू पिक्चर वेबसाइट से कोई संबंध हैं। उन्होंने कहा, ''हम इस वेबसाइट को नहीं चलाते।'' जब ब्लूक्राफ्ट और द ट्रू पिक्चर के समान लैंडलाइन नंबर होने की बात की गई तो मिश्रा ने कहा, ''यह किसी किस्म का मिक्सअप हो सकता है।''
वहीं, राजेश जैन ने मोबाइल पर किए कॉल्स या संदेशों का कोई जवाब नहीं दिया।
बता दें कि जिन मंत्रियों ने इस वेबसाइट का लिंक शेयर किया है, उनमें पीयूष गोयल, स्मृति ईरानी, राधा मोहन सिंह, प्रकाश जावड़ेकर, बीरेंदर सिंह, थावरचंद गहलोत, किरन रिजिजू, एम जे अकबर, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, विजय गोयल, बाबुल सुप्रियो, पोन राधाकृष्णन और अर्जुन राम मेघवाल आदि शामिल हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी के उस फैसले को पलट दिया है जिसमें फर्जी खबरों के प्रकाशन या प्रसारण का दोषी पाए जाने पर पत्रकार की मान्यता निलंबित या रद्द करने की बात कही गई थी।
मंगलवार (3 अप्रैल, 2018) को नरेंद्र मोदी ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को अपना आदेश वापस लेने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि फर्जी खबर पर कोई भी फैसला प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया या एन बी ए लेगा। इसमें सरकार का कोई दखल नहीं होगा।
बता दें कि पूर्व में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने पत्रकारों की मान्यता संबंधी दिशा निर्देशों को संशोधित कर कहा था कि अगर पत्रकार फर्जी खबरों का प्रसारण या प्रकाशन का दोषी पाया गया तो उसकी मान्यता रद्द हो सकती है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने यह बात एक विज्ञप्ति के जरिए कही थी। इसमें कहा गया कि पत्रकारों की मान्यता के लिए संशोधित दिशा निर्देशों के मुताबिक अगर फर्जी खबर के प्रकाशन या प्रसारण की पुष्टि होती है तो पहली बार ऐसा करते पाए जाने पर पत्रकार की मान्यता छह महीने के लिए, जबकि दूसरी पर ऐसा हुआ तो एक साल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।
विज्ञप्ति में आगे कहा कि अगर पत्रकार तीसरी बार फर्जी खबरों के प्रसारण या प्रकाशन का दोषी पाया गया तो उसकी मान्यता स्थाई रूप से रद्द कर दी जाएगी।
अनुसूचित जाति/जनजाति (एस सी/एस टी) अत्याचार रोकथाम अधिनियम को कमजोर करने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के विरोध में आयोजित भारत बंद के दौरान देश के कई हिस्से में प्रदर्शन हिंसक हुए, जिससे 8 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
मध्य प्रदेश में पांच जबकि उत्तर प्रदेश मेंं दो और राजस्थान में एक व्यक्ति की मौत हुई है। इस बीच केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी दलितों को शांत करने के लिए कहा कि उसने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है जिससे न्यायालय के 20 मार्च के फैसले की समीक्षा हो सके। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार मामले में तत्काल गिरफ्तारी नहीं हो सकेगी।
मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया गया है और इंटरनेट सेवा निलंबित कर दी गई है। मध्य प्रदेश में सर्वाधिक हिंसा ग्वालियर, मुरैना और भिंड में देखने को मिली है। ग्वालियर के कलेक्टर राहुल जैन ने जिले में तीन लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, ''दो लोगों की मौत ग्वालियर शहर में और एक व्यक्ति की मौत डबरा कस्बे में आपसी संघर्ष के दौरान हुई है।'' जैन से साफ किया कि तीनों मौतें आपसी संघर्ष में हुई है, जिसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि जिले में कुल 62 लोग घायल भी हुए हैं, जिनमें सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है।
बिहार के जहानाबाद, दरभंगा, आरा, अररिया, सहरसा, मधुबनी जिलों में बंद समर्थक रेल पटरियों पर बैठ गए, जिससे रेलों के परिचालन पर भी प्रभाव देखा जा रहा है। बंद समर्थकों ने कई ट्रेनें रोक दी और हंगामा किया। बेतिया स्टेशन पर समर्थकों ने तोड़फोड़ की तथा पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, औरंगाबाद, मुजफरपुर, समस्तीपुर सहित विभिन्न जिलों में लोग सड़क जामकर सड़कों पर आगजनी की, जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। बेतिया में बंद समर्थकों ने एक पेट्रोल पंप में तोड़फोड़ की।
दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम (एस सी/एस टी एक्ट) पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ विभिन्न दलित संगठनों के देशव्यापी आंदोलन का समर्थन किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, ''अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद उत्पन्न हुई स्थिति पर आम आदमी पार्टी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय का समर्थन करती है। केंद्र सरकार को अदालत के फैसले के खिलाफ याचिका के लिए प्रतिष्ठित एवं वरिष्ठ वकीलों की मदद लेनी चाहिए।
मध्य प्रदेश के आई जी (कानून-व्यवस्था) ने मीडिया से 4 लोगों की मौत होने की पुष्टि की है। उन्होंने घायलों की संख्या स्पष्ट नहीं की। आई जी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस अभी शांति स्थापित करने का प्रयास कर रही है। आई जी के अनुसार, शांति होने के बाद मुकदमे दर्ज होंगे और अराजकता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एस एस पी मंजिल सैनी ने बाताया कि अब तक 200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। हम उनके खिलाफ मामले दर्ज कर रहे हैं। सभी षड्यंत्रकारियों और गुंडों के खिलाफ एन एस ए के तहत मुक़दमा दर्ज किया जाएगा। अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं हैं।
बसपा सुप्रीमो मयावती ने कहा कि मैं एस सी / एस टी एक्ट के खिलाफ विरोध का समर्थन करती हूं। मुझे पता चल गया है कि विरोध के दौरान कुछ लोगों ने हिंसा फैलाई है, मैं इसकी निंदा करती हूं। हमारी पार्टी विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा के पीछे नहीं है।
हरियाणा के यमुनानगर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया है। दरअसल काफी प्रदर्शनकारी एक साथ सड़क पर आ गए थे, जिसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज किया।
महानिरीक्षक (कानून और व्यवस्था) मकरंद देवसकर ने बताया कि ग्वालियर में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि हिंसा के दौरान भिंड और मोरेना जिले में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई। भिंड सहित तीन जिलों में कर्फ्यू लगाया गया था, जहां स्थिति को काबू में करने के लिए सेना को बुलाया गया।
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और बीजेपी के सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला बिलकुल ठीक है, क्योंकि एस सी/एस टी एक्ट को दहेज निषेध अधिनियम के समान व्यापक रुप से दुरुपयोग किया जाता है। निर्दोष लोगों को इस अधिनियम के तहत परेशान किया जाता है। एक मामला एक मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी द्वारा जांच के बाद ही पंजीकृत होना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने नई दिल्ली में गुरुग्राम एक्सप्रेस वे को ब्लॉक कर दिया है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी गुरुग्राम के सदर बाजार में भी रैली निकाल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एस सी/एस टी एक्ट में बदलाव पर लिए गए फैसले का तत्काल रिव्यू करने से मना कर दिया है।
भिंड के पुलिस अधीक्षक प्रशांत खरे ने कहा कि भिंड जिले में सेना को बुलाया गया, जहां प्रदर्शनकारियों द्वारा गोलीबारी में छह लोग घायल हो गए। सेना और अर्धसैनिक बलों को पंजाब में एहतियाती तौर पर स्टैंडबाय पर रहने के लिए कहा गया है।
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में भी प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश रोडवेज की बस को आग के हवाले कर दिया। पहले बस में तोड़ फोड़ की गई। बस के सारे शीशे तोड़ दिए और फिर बस में आग लगा दी।
भारत बंद से जुड़े प्रदर्शन हिंसक होते जा रहे हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अब तक 19 लोग घायल हो चुके हैं, जिसमें दो की स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही है। शाम छह बजे तक के लिए इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई है।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एस सी/एस टी प्रोटेक्शन एक्ट को लेकर हो रहे प्रदर्शन के दौरान गोलियां चल गईं। बीच बाजार में एक शख्स पिस्तौल से गोली चलाता देखा गया, जिसके बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
गुजरात के कच्छ स्थित गांधीधाम में भी आगजनी की गई। भारी संख्या में जुटकर दलित महिला ने भारत बंद का समर्थन किया। कच्छ में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ कर दी है। कच्छ में महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं। वह सडकों पर ही बैठ गई हैं। इसके अलावा कच्छ के गांधीधाम में ही प्रदर्शनकारियों ने आग लगाकर भी विरोध प्रदर्शन किया है।
भारत के केंद्रीय होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने कहा कि ''हमने सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर की है। मैं सभी राजनीतिक दलों और समूहों से शांति बनाए रखने और हिंसा नहीं भड़काने के लिए अपील करता हूं।''
गाजियाबाद में भी प्रदर्शन का असर देखने को मिल रहा है। यहां प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोककर प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश के हापुड़ में कार फूंकी। इसके अलावा उत्तराखंड के देहरादून में प्रदर्शनकारियों ने जबरदस्ती लोगों की दुकानें बंद कराईं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के चार थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लग गया है। वहीं मेरठ में भी प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस चौकी फूंक दी है। मध्य प्रदेश में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर बरसाए।
जयपुर में प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। जयपुर में एक शोरूम में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोक कर दी। शोरूम का शीशा तोड़ दिया। इसके आलावा जयपुर में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोककर उसके सामने खडे़ होकर और ट्रेन के इंजन पर चढ़कर प्रदर्शन किया। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने मध्यप्रदेश के मुरैना में भी रेलवे ट्रेक को ब्लॉक कर दिया है।
मेरठ में प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पीटा। पहले पुलिसवाले एक प्रदर्शनकारी को लेकर आए। उसके बाद एक गली में से कई और प्रदर्शनकारियों को पकड़कर लाए और उनकी खूब पिटाई की।
रांची में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। इसमें कई लोग घायल हो गए हैं। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क जाम कर रहे थे। पुलिस उन्हें ऐसा करने से रोक रही थी। इसी को लेकर दोनों के बीच भिडंत हो गई।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब राजस्थान में भी विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया है। गाड़ियों समेत दूसरी प्रॉपर्टी फूंक दी हैं। इसके अलावा राजस्थान के ही भरतपुर में महिलाएं लाठी डंडे लेकर सड़क पर उतर गई हैं।
मेरठ में हिंसक हुआ एस सी/एस टी एक्ट को लेकर विरोध प्रदर्शन। यूपी के मेरठ में भारत बंद को लेकर रोड पर तोड़फोड़। रोड पर जा रही होंडा सिटी और आई 20 कार के शीशे तोड़े। लोगों को चोट भी आई। दिल्ली के मंडी हाउस पर भी हो रहा भारत बंद को लेकर विरोध प्रदर्शन।
यूपी के आगरा में प्रदर्शनकारियों ने लगाया जाम। पंजाब के अमृतसर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री थावर चंद्र गहलोत ने कहा कि जब तक नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं तब तक एस सी/एस टी और अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों से कोई खिलवाड़ नहीं हो सकता।
एस सी/एस टी एक्ट को लेकर बिहार के आरा में सी पी आई एम एल समेत कई संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोक दी। इसके रेलवे फाटक पर टायर डालकर आगजनी भी की। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने बिहार के सोनापुर में रोड ब्लॉक कर दी। भारत बंद का भोजपुर में भी असर दिख रहा है। यहां सड़कों पर सन्नटा पसरा हुआ है। सभी दुकानें बंद हैं और परिचालन भी ठप हो गया है।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़कों को गड्ढामुक्त करने का ऐलान किया था। मगर विभागीय अफसर इस योजना के नाम पर धनराशि का गबन करने में जुट गए। कहीं पुराने काम को नया काम दिखाकर तो कहीं सिर्फ तारकोल छिड़ककर पूरा पैसा का गबन किया गया। हद तो तब हो गई, जब कुछ जगहों पर सिर्फ कागज पर काम दिखाकर पैसे का गबन किया गया।
यह खुलासा बांदा से सत्ताधारी बीजेपी के सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा ने किया है। उन्होंने बांदा और चित्रकूट में सड़कों के गड्डामुक्त के नाम पर बड़े घोटाले की बात कही है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। भैरों प्रसाद मिश्रा वही सांसद हैं, जो संसद में सबसे ज्यादा उपस्थिति को लेकर सुर्खियों में रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बांदा और चित्रकूट तो केवल उदाहरण हैं, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले एक साल में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के नाम पर कागज पर काम दिखाकर पैसे डकारने का खेल चल रहा है। मार्च 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने 15 जून तक एक लाख 21 हजार से अधिक किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त करने का ऐलान किया था।
हालांकि तय समय में टारगेट पूरा नहीं हो सका था। बाद में अवधि बढ़ा दी गई थी। देखने में आया कि सड़कों को गड्ढामुक्त करने के नाम पर सिर्फ पी डब्यू डी ने खानापूर्ति की जिससे सरकार की मंशा धराशाय़ी हो गई।
सांसद ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में कहा है कि उनके संसदीय क्षेत्र बांदा और चित्रकूट में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता हुई है। विभागीय अफसरों ने सड़कों पर नाममात्र का लेपन कराया। फिर फर्जी ठेकेदारों के जरिए भुगतान दिखाया जा रहा है। इस खेल में विभागीय अफसरों का 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने मुख्यमंत्री से गड्डामुक्त के लिए चुनी गई सभी सडकों पर हुए कार्य की जांच कराकर अफसरों से रिकवरी की मांग की है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में सड़कों को गड्ढामुक्त करने की जिम्मेदारी लोकनिर्माण विभाग की है। यह विभाग उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के पास है।
भारत बंद के दौरान मध्य प्रदेश के ग्वालियर और चंबल सहित कई स्थानों से हिंसा की सूचना है। हालात बिगड़ने के कारण कई स्थानों पर कर्फ्यू लगाया गया है। इस दौरान मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां पर बंद में शामिल एक युवक कट्टा लेकर सड़क पर आ गया और तड़ातड़ गोलियां बरसाने लगा। इस युवक ने कई गोलियां चलाई। इस युवक की ये हरकत कैमरे में कैद हो गई। युवक एक दुकान के किनारे खड़ा दिख रहा है और गोलियां चला रहा है। इस वक्त यहां जबर्दस्त हंगामा हो रहा था। थोड़ी देर बाद युवक आगे बढ़ गया।
मध्य प्रदेश के आई जी लॉ एंड ऑर्डर मकरंद देउस्कर ने कहा कि विरोध प्रदर्शन में ग्वालियर और भिंड में 4 लोग मारे गये हैं, जबकि 15 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
बता दें कि एस सी/एसटी (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति) अधिनियम का दुरुपयोग रोकने के लिए हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के विरोध में विभिन्न संगठनों ने सोमवार (2 अप्रैल) को एक दिवसीय भारत बंद का आह्वान किया था जिसका मध्य प्रदेश में भी व्यापक असर नजर आ रहा है।
ग्वालियर, भिंड आदि स्थानों में आंदोलन हिंसक हो गया। यहां पर दो समूह आमने-सामने आ गए और पथराव के बीच वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।
ग्वालियर में इस वक्त हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। यहां पर शाम तक इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। पुलिस नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार , हिंसा के बाद ग्वालियर के तीन थाना क्षेत्रों थाटीपुर, गोला का मंदिर, मुरार में कर्फ्यू लगाया गया है। इसी तरह भिंड से भी आंदोलन के हिंसक होने की सूचना मिली है। वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल, इंदौर सहित अन्य स्थानों पर भी आंदोलन के हिंसक होने की सूचनाएं आ रही हैं। इसके अलावा ट्रेनों को जगह-जगह रोका जा रहा है।
मध्य प्रदेश के भिंड में भी जमकर हंगामा हुआ। यहां प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की और कई जगहों पर तोड़फोड़ की। भिंड में भी कर्फ्यू घोषित कर दिया गया है। पुलिस के जवान मोर्चे पर तैनात है। इलाके में व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद कर दिये गये हैं। प्रशासन ने लोगों से शांति बरतने की अपील की है।
पूरे भारत में दलित संगठनों के प्रदर्शन का जनजीवन पर व्यापक असर पड़ा है। मध्य प्रदेश में हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई है। मध्य प्रदेश के मुरैना में एक व्यक्ति की मौत के बाद तीन शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। इसमें सागर और ग्वालियर भी शामिल है। मुरैना में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। यहां पर लोगों ने गाड़ियों में आग लगाई और रेल परिचालन को बाधित कर दिया।
दलित संगठनों ने केन्द्र सरकार पर अनुसूचित जाति/जनजाति (एस सी/एस टी) अत्याचार रोकथाम अधिनियम को कमजोर करने का आरोप लगाकर आज भारत बंद का ऐलान किया है। हिंसा की चपेट में भारत के कई शहर हैं। इसके अलावा मेरठ, रांची, आगरा, भिंड में भी प्रदर्शन का असर देखने को मिला है।
भारत के केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के संसदीय क्षेत्र हाजीपुर में भी बड़े पैमाने पर आगजनी हुई है। यहां पर प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों में आग लगा दी और दुकानों में तोड़फोड़ की। गाजियाबाद में बड़ी संख्या में लोग सड़क पर निकले और केन्द्र पर दलितों के हितों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। जयपुर में भी प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों के शीशे तोड़ दिये।
बिहार के जहानाबाद, दरभंगा, आरा, अररिया, सहरसा, मधुबनी जिलों में बंद समर्थक रेल पटरियों पर बैठ गए, जिससे रेलों के परिचालन पर भी प्रभाव देखा जा रहा है। बंद समर्थकों ने कई ट्रेनें राक दी और हंगामा किया। इसके अलावा पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर सहित कई जिलों में लोग सड़क जामकर सड़कों पर आगजनी की, जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। इस बंद को राजद, सपा, कांग्रेस, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, भाकपा (माले) और शरद यादव का समर्थन मिला है।
पंजाब और हरियाणा में भी जनजीवन ठप हो गया है। तलवारें, लाठियां, बेसबाल बैट व झंडे लिए सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने जालंधर, अमृतसर व बठिंडा में दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों को जबर्दस्ती बंद करा दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने सोमवार सुबह अमृतसर जिले में एक ट्रेन को रोकने की कोशिश की, लेकिन रेलवे अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद उन्होंने ट्रेन को जाने दिया। प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन के अंदर भी दाखिल हो गए। उन्होंने ट्रैक पर पुतले भी जलाए। कुछ राजमार्गो व सड़कों को भी जाम कर दिया गया है, जिसके कारण चंडीगढ़ व आसपास के इलाकों में आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। पड़ोसी राज्य हरियाणा के रोहतक व दूसरे शहरों में भी विरोध प्रदर्शनों की खबरें मिली हैं। राज्य में दुकानें, शैक्षिक संस्थान व अन्य प्रतिष्ठान बंद हैं। पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड की 10वीं व 12वीं कक्षाओं की अंतिम प्रेक्टिकल परीक्षा सोमवार को होनी निर्धारित थी, लेकिन अब इसे 11 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा।
पंजाब सरकार ने सोमवार को होने वाले विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर एहतियाती उपाय के तौर पर रविवार को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने का आदेश दिया था। पंजाब में सभी राज्यों की तुलना में सबसे अधिक दलित आबादी है। राज्य की 2.8 करोड़ आबादी में 32 फीसदी दलित हैं। राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं रविवार शाम 5 बजे से सोमवार शाम तक बंद कर दी गई हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने एस सी/एस टी समुदाय से याचिका पर अंतिम निर्णय आने तक अपना विरोध प्रदर्शन रोकने की अपील की है।
वहीं भारत के केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दलित प्रदर्शनकारियों से शांति की अपील की है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है। कानून मंत्री ने कहा कि वरिष्ठ वकील सरकार के पक्ष को कोर्ट के सामने रखेंगे।









